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Showing posts from January, 2016

बेकिंग स्पैशलिस्ट एक उज्जवल भविष्य

बेकिंग दुनिया के सबसे पुराने व्यवसायों में से एक है लेकिन समय के साथ इसके स्वरूप व तकनीक में काफी परिवर्तन आया है । आजकल पूरी दुनिया में लोग बेक की हुई चीजों का बहुत बड़े स्तर पर प्रयोग करते हैं । ऐसे में एक प्रोफैशनल बेकर की डिमांड भी काफी बढ़ी है । यदि आपको भी खाना बनाना पसंद है तो आप एक बेकर के रूप में अपना उज्ज्वल भविष्य देख सकते हैं ।

एक बेकर के लिए बेहद जरूरी है कि उसे भोजन व उससे संबंधित सामग्री से बेहद प्यार हो । इसके अतिरिक्त वह बेकरी प्रॉडक्ट्स और उसकी सामग्री से परिचित हो । उसे सिर्फ खाना पकाना ही नहीं आता हो बल्कि अपनी क्रिएटिविटी के बलबूते वह उसे एक नया रूप देने में सक्षम हो । साथ ही एक अच्छी प्रैजैंटेशन खाने को और भी अधिक लाजवाब बनाती है इसलिए उसमें खाने की प्रस्तुति करने का कौशल भी हो ।
खाना बनाते समय उसे सिर्फ टेस्ट पर ही ध्यान नहीं देना बल्कि सजावट व हाइजीन भी उतनी ही जरूरी है । उसका शारीरिक रूप से मजबूत होना भी आवश्यक है ताकि वह घंटों खड़े होकर काम कर सके व भारी सामान भी आसानी से उठा सके । एक बेकर तभी सफलता के नए मुकाम हासिल कर सकता है जब वह अपने ग्राहक…

लैइजर मैनेजमेंट में करियर

आमतौर पर लैइजर का अर्थ आराम से लगाया जाता है। जब इसके साथ मैनेजमेंट जुड़ जाता है तो इसका अर्थ यह कदापि नहीं होता कि सारा प्रबंधन आराम से किया जाए। वास्तव में यह प्रबंधन का ऐसा क्षेत्र है, जो ग्राहकों के आराम और मनोरंजन का ख्याल रखता है। इसलिए इसमें इवेंट मैनेजमेंट, रिसॉर्ट मैनेजमेंट, रेस्टॉरेंट मैनेजमेंट, डिस्क जोकिइंग जैसे करियर शामिल हैं। जिस तरह आम आदमी की क्रयशक्ति बढ़ी है और वह सप्ताहांत और छुट्टियाँ बिताने के नए-नए साधन ढूँढने लगा है, ऐसे में उसकी सुख-सुविधा का प्रबंध करने वाले लैइजर मैनेजमेंट में अवसर और राय दोनों खासे बढ़े हैं।

कठिन काम लेकिन अच्छे दाम
लैइजर मैनेजमेंट से जुड़े प्रोफेशनल्स को रोजाना उसी तरह भागदौड़ करते हुए काम करवाना पड़ता है, जैसे कि शादी के समय दुल्हन का पिता व्यवस्थाएँ जुटाता है। उन्हें लोगों को खुश करने तथा आराम पहुँचाने के नए-नए तरीकों की खोज करते रहना होता है। उन्हें कंट्री क्लब या रिसॉर्ट का प्रबंधन देखना होता है अथवा मनोरंजक कार्यक्रमों का आयोजन उनके दैनिक कार्य का हिस्सा होता है। इसमें प्लानिंग से लेकर एक्जीक्यूशन और पोस्ट इवेंट कार्य भी शामिल ह…

चार्टर्ड अकाउंटेंट मे करियर

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बाजार में सीए प्रोफेशनल्स की मांग हमेशा से रही है। लगभग सभी कंपनियों को एक स्तर के बाद इनकी जरूरत पड़ती है। इस करियर के बारे में बता रही हैं नमिता सिंह-
पिछले कुछ वर्षों में मल्टीनेशनल कंपनियों के देश में आगमन की वजह से जॉब के क्षेत्र की रौनक बढ़ी है। इनके अलावा स्थानीय कंपनियां भी रोजगार के एक बड़े हब के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। इसके चलते तेजी से विकास करती भारतीय अर्थव्यवस्था में फाइनेंस एवं अकाउंट्स से जुड़े लोगों की मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। जाहिर है इससे संबंधित करियर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते नजर आ रहे हैं। आर्थिक उदारीकरण के बाद इसमें तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) भी उन्हीं में से एक है। किसी भी संस्थान में सीए का काम बेहद सम्मानजनक एवं चुनौतीपूर्ण होता है। वे उस संस्थान अथवा कंपनी से जुड़े सभी अकाउंट एवं फाइनेंस संबंधी कार्यों के प्रति उत्तरदायी होते हैं। इसके अलावा इनका कार्य मनी मैनेजमेंट, ऑडिट अकाउंट का एनालिसिस, टैक्सेशन, रिटेनरशिप तथा फाइनेंशियल एडवाइज उपलब्ध कराने से भी संबंधित है।
क्या काम है सीए का
कंपनी एक्ट क…

इकोलॉजी: प्रकृति को जानने का हुनर

मनुष्य पूरी तरह से पर्यावरण पर निर्भर है। पर्यावरण में थोड़ी सी भिन्नता या बदलाव उसके जीवन को तेजी से प्रभावित करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज हर देश पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है। वायु, जल, ध्वनि या भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में होने वाले अनचाहे परिवर्तन मनुष्य या अन्य जीवधारियों, उनकी जीवन परिस्थितियों, औद्योगिक प्रक्रियाओं एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों के लिए हानिकारक साबित हो रहे हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को इसकी भयावहता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आने वाले समय में इसके और विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए इकोलॉजी का अध्ययन आवश्यक है। इसके जरिए पर्यावरण के विभिन्न आयामों व उनके संरक्षण की विधिवत जानकारी मिलती है। विगत कुछ वर्षों से यह तेजी से उभरता हुआ करियर साबित हो रहा है। इससे संबंधित कोर्स में लोगों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है।
क्या है इकोलॉजी
इकोलॉजी (पारिस्थितिकी) जीव विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत जीवों व उनके वातावरण के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन …

शेयर बाजार के शेर

शेयर ब्रोकर का करियर एक चुनौतीपूर्ण करियर है। इस करियर में सफलता हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत व अनुशासन बेहद जरूरी है। इस करियर के बारे में बता रही हैं रुचि गुप्ता
देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनाए रखने के लिए सरकारों द्वारा उठाए गए कई कदमों की वजह से शेयर बाजारों की हालत में काफी सुधार देखने को मिला है, जिसकी वजह से बढ़ते बाजार में पेशेवरों की मांग भी बढ़ी है। सिर्फ इतना ही नहीं, बाजार के कारोबार में बढ़ती पारदर्शिता और वैश्विक बाजारों तक बढ़ती हमारी पहुंच की वजह से भी शेयर ब्रोकर और बाजार विश्लेषकों के लिए नए-नए विकल्प खुलते नजर आ रहे हैं। यहां संभावनाएं बढ़ रही हैं और नए लोगों के लिए कंपनियों और नौकरियों के लिहाज से भी इस क्षेत्र में संभावनाएं पैर पसार रही हैं।
एक शेयर ब्रोकर के रूप में आपको अपने क्लाइंट को शेयर बाजार की वर्तनी और कारोबार के तरीके सरल भाषा में समझाने पड़ते हैं। आप उन्हें वित्तीय सलाह देते हैं और उनके लिए शेयरों को खरीदते-बेचते हैं। बतौर ब्रोकर आपको अपने क्लाइंट को उसका वित्तीय पोर्टफोलियो बनाने में मदद भी करनी चाहिए, जिसमें न सिर्फ शेयर, बल्कि जीवन बीम…

सीफॉलजी: चुनावी आंकड़ों का ताना-बाना

सीफॉलजी एक आकर्षक करियर है। कड़ी मेहनत के दम पर इस क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। इसके बारे में बता रही हैं नमिता सिंह-
किसी भी लोकतांत्रिक देश में लोगों को वोट देने से लेकर सरकार के गठन की प्रक्रिया तक के बारे में जानने की उत्सुकता रहती है। इसके लिए वे कई माध्यमों से अपनी जिज्ञासा शांत करने की कोशिश करते हैं। अभी हाल ही में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी कमोबेश यही स्थिति रही। इस चुनाव में जो चीज तेजी से उभर कर सामने आई, वह एग्जिट पोल के नतीजों की विश्वसनीयता थी, क्योंकि चुनाव के बाद जो नतीजे आए, वे काफी हद तक एग्जिट पोल के निष्कर्ष का समर्थन करने वाले थे। न सिर्फ दिल्ली विस चुनाव, बल्कि बीते लोकसभा चुनाव व उप्र विस चुनाव 2012 में भी एग्जिट पोल के संकेत सही साबित हुए थे। ये एग्जिट पोल अथवा इलेक्शन सर्वे आसानी से किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचते। इसके लिए कुछ खास लोगों की महीनों की मेहनत व लम्बी कवायद छिपी होती है। ये खास लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें राजनीतिक, सामाजिक, जातिगत, जनसांख्यिकी व पिछले कुछ चुनावों के आंकड़ों की बारीकी से जानकारी होती है। इन प्रोफेशनल्स को …

मॉडलिंग

सुंदर-सुंदर पोशाकों में खूबसूरत चेहरे जब दर्शकों के सामने आते हैं तो अपनी नपी-तुली चाल से रैम्प पर चलते हुए उनके दिलों में उतर जाते हैं। फिर चाहे वे किसी फैशन डिजाइनर के लिए मॉडलिंग कर रहे हों या किसी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के लिए। रौशनी, चकाचौंध, नाम-पहचान और ग्लैमर से भरा मॉडलिंग का प्रोफेशन सभी को, खासकर युवाओं को शुरू से ही अपनी ओर काफी आकर्षित करता रहा है, लेकिन इन दिनों दूसरे उद्योगों की फैशन शोज में बढ़ती रुचि के कारण आज उनके सामने बतौर करियर मॉडलिंग में ढेरों विकल्प हैं।
न सिर्फ फैशन, बल्कि आज हर बड़ी कंपनी को अपने नए उत्पादों या सेवाओं को एन्डोर्स करने के लिए खूबसूरत मॉडल्स की जरूरत होती है। नाम और पैसे के साथ-साथ इस क्षेत्र में मॉडल्स को घूमने और नए-नए लोगों के साथ काम करने का मौका मिलता है। ग्लिट्ज मॉडलिंग एजेंसी एंड एकेडमी, नई दिल्ली के संस्थापक प्रणव अवस्थी का कहना है, ‘आज एक फ्रेशर अपने एक शो के लिए 10 से 15 हजार रुपये कमा सकता है, वहीं कुछ जाने-माने चेहरे भारतीय बाजार में भी प्रति शो 60 से 70 हजार रुपये कमाते हैं। नाम के साथ-साथ पैसा एक ऐसा फैक्टर है, जिसकी व…

जोअलॉजी में करियर

जीव-जंतु प्रेमियों को निश्चय ही उनके साथ समय बिताना अच्छा लगता है। आप अपने इसी प्रेम को अपने करियर में भी बदल सकते हैं। प्राणि विज्ञान या जोअलॉजी जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जिसमें जीव-जंतुओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इसमें प्रोटोजोआ, मछली, सरीसृप, पक्षियों के साथ-साथ स्तनपायी जीवों के बारे में अध्ययन किया जाता है। इसमें हम न सिर्फ जीव-जंतुओं की शारीरिक रचना और उनसे संबंधित बीमारियों के बारे में जानते हैं, बल्कि मौजूदा जीव-जंतुओं के व्यवहार, उनके आवास, उनकी विशेषताओं, पोषण के माध्यमों, जेनेटिक्स व जीवों की विभिन्न जातियों के विकास के साथ-साथ विलुप्त हो चुके जीव-जंतुओं के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।
अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि प्राणि विज्ञान में किस-किस प्रकार के जीवों का अध्ययन किया जाता है। जवाब है, इस पाठय़क्रम के तहत आप लगभग सभी जीवों, जिनमें समुद्री जल जीवन, चिडियाघर के जीव-जंतु, वन्य जीवों, यहां तक कि घरेलू पशु-पक्षियों के जीव विज्ञान एवं जेनेटिक्स का अध्ययन करते हैं। आइए जानते हैं कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने का पहला पड़ाव क्या है?
प्राण…

सोनोग्राफी में करियर

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सोनोग्राफी रेडियोलॉजी की एक ब्रांच है। इसका उपयोग शरीर के विभिन्न अंगों मसलन छाती, दिल, पेट आदि में जांच करने के लिए प्रयोग में लाई जाती है। गर्भस्थ शिशु की सभी प्रक्रियाओं की जानकारी सोनोग्राफी के माध्यम से जान सकते हैं। यदि किसी में शरीर के भीतर चल रही प्रक्रियाओं को जानने की इच्छा है और इसमें  करियर भी बनाना चाहता  है, तो सोनोग्राफी उपयुक्त विकल्प है। प्रत्येक हॉस्पिटल में इससे संबंधित कार्य होने की वजह से इनकी काफी मांग है। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टेटिक्स के अनुसार, इस क्षेत्र में 2016 तक 19 प्रतिशत ग्रोथ की संभावना है। वर्तमान में ट्रेंड प्रोफेशनल की काफी कमी है। इस प्रकार यदि भविष्य के लिहाज से देखा जाए, तो इस क्षेत्र में करियर काफी ब्राइट है।
योग्यता
सोनोग्राफी से संबंधित कोर्स में एडमिशन के लिए भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान में 50 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं पास होना जरूरी है। यदि इन तीनों विषयों को मिलाकर पचास प्रतिशत अंक हैं, तो आप इस कोर्स को कर सकते हैं।
व्यक्तिगत गुण
एक सोनोग्राफर को अस्पताल की विभिन्न जगहों मसलन ऑपरेशन थियेटर, इंटेसिव केयर यूनिट में डॉक्टरों व नर्सों…

फ्रंट ऑफिस मैनेजर

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फ्रंट ऑफिस मैनेजर पर किसी भी संस्थान को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी होती है। यदि आप जिम्मेदारियों को निभाने में रुचि रखते हैं तो यह क्षेत्र एक बेहतर करियर प्रदान कर सकता है। बता रहे हैं पंकज घिल्डियाल
करियर काउंसलर डॉं. संजय सिंह बघेल के अनुसार फ्रंट ऑफिस मैनेजर किसी भी कंपनी का वह चेहरा होता है, जो ग्राहक और उपभोक्ता से सीधे जुड़ा होता है। इससे मार्केटिंग, सेल्स और सर्विस के प्रोफेशनल्स भी जुड़े होते हैं और इसका मुख्य काम होता है संबंधित संस्थान के सभी विभागों से कोऑर्डिनेशन स्थापित करते हुए ग्राहक की जरूरतों के हिसाब से उनका मार्गदर्शन करना।
दरअसल फ्रंट ऑफिस मैनेजर ही अपने यहां आने वाले अतिथियों को अपनी विशेषताओं के बारे में बताते और उन्हें जरूरी सूचनाएं देते हैं। इतना ही नहीं, वे बिल संबंधी हिसाब-किताब पर भी नजर रखते हैं। फ्रंट ऑफिस मैनेजर युवाओं के लिए एक उभरता हुआ करियर है। होटल हो, कोई बड़ा हॉस्पिटल या फिर किसी बड़े ईवेंट का आयोजन, फ्रंट ऑफिस मैनेजर ऐसी जगहों के लिए एक जरूरत बन चुके हैं।
आने वाले अतिथियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो, इसके लिए फ्रंट ऑफिस म…

लैइजर मैनेजमेंट मे करियर

आमतौर पर लैइजर का अर्थ आराम से लगाया जाता है। जब इसके साथ मैनेजमेंट जुड़ जाता है तो इसका अर्थ यह कदापि नहीं होता कि सारा प्रबंधन आराम से किया जाए। वास्तव में यह प्रबंधन का ऐसा क्षेत्र है, जो ग्राहकों के आराम और मनोरंजन का ख्याल रखता है। इसलिए इसमें इवेंट मैनेजमेंट, रिसॉर्ट मैनेजमेंट, रेस्टॉरेंट मैनेजमेंट, डिस्क जोकिइंग जैसे करियर शामिल हैं। जिस तरह आम आदमी की क्रयशक्ति बढ़ी है और वह सप्ताहांत और छुट्टियाँ बिताने के नए-नए साधन ढूँढने लगा है, ऐसे में उसकी सुख-सुविधा का प्रबंध करने वाले लैइजर मैनेजमेंट में अवसर और राय दोनों खासे बढ़े हैं।

कठिन काम लेकिन अच्छे दाम
लैइजर मैनेजमेंट से जुड़े प्रोफेशनल्स को रोजाना उसी तरह भागदौड़ करते हुए काम करवाना पड़ता है, जैसे कि शादी के समय दुल्हन का पिता व्यवस्थाएँ जुटाता है। उन्हें लोगों को खुश करने तथा आराम पहुँचाने के नए-नए तरीकों की खोज करते रहना होता है। उन्हें कंट्री क्लब या रिसॉर्ट का प्रबंधन देखना होता है अथवा मनोरंजक कार्यक्रमों का आयोजन उनके दैनिक कार्य का हिस्सा होता है। इसमें प्लानिंग से लेकर एक्जीक्यूशन और पोस्ट इवेंट कार्य भी शामिल ह…

बायोमेडिकल इंजीनियर के रूप में करियर

भारतमें हेल्थकेयर सेक्टर (Healthcare Sector) में आए उभार ने बायोमेडिकल क्षेत्र (Biomedical Field) को काफी धार दी है। देश-विदेश के हेल्थ एक्सपर्ट (Health Expert) सस्ती दर पर इस तकनीक के जरिए मरीजों को निरोगी बनाने में जुटे हैं। इसके लिए काफी संख्या में मेडिकल प्रोफेशनल (Medical Professional) की जरूरत पडती है। आवश्यकता को देखते हुए देश के प्रमुख अस्पतालों में बायोमेडिकल डॉक्टर और मेडिकल साइंटिस्ट रखे जा रहे हैं। यदि आप भी बायोमेडिकल से संबंधित कोर्स कर लेते हैं, तो बहुत आगे जा सकते हैं।
क्या है बीएमई (Biomedical Engineering) बायोमेडिकल इंजीनियरिंग (Biomedical Engineering) यानी बीएमई यांत्रिकी की एक उभरती हुई शाखा है। इसमें ऐसे उपकरणों का डिजाइन और निर्माण करते हैं, जो यांत्रिकी और क्लीनिकल लिहाज से उपयोगी हों, जिसमें क्लिनिकल कम्प्यूटर्स, कृत्रिम हृदय, कॉन्टैक्ट लैंस, व्हील चेयर आदि शामिल हैं। आज चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) के क्षेत्र में हम और आप जीन और टिश्यू मेनिपुलेशन, कृत्रिम अंगों (Artificial Organs) के निर्माण, जीवनरक्षक उपकरणों (Life saving equipment) तथा पेसम…

केमोइन्फॉर्मेटिक में करियर

विज्ञान में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के समावेश से कई ऐसे क्षेत्र सामने आए हैं, जिनमें हाल के दिनों में करियर की अच्छी संभावनाएं देखी गई हैं। खासकर बायोटेक्नोलॉजी, बायोइंजीनियरिंग, बायोइन्फॉर्मेटिक आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें देश में ही नहीं, बल्कि देश के बाहर भी करियर के अच्छे स्कोप हैं। अब इसमें एक और नया नाम जुड़ गया है केमोइन्फॉर्मेटिक्स का। यदि आप विज्ञान के क्षेत्र में कुछ नए की तलाश में हैं, तो केमोइन्फॉर्मेटिक्स आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।


क्या है केमोइन्फॉर्मेटिक?
केमिकल डाटा को कम्प्यूटर की सहायता से एक्सेस या चेंज करने का काम होता है केमोइन्फॉर्मेटिक्स में। पहले यही कार्य ढेर सारे बुक, जर्नल्स और पिरिडियोकल्स की सहायता से किए जाते थे। जाहिर है यह बेहद जटिल और समय खपाऊ काम रहा होग, लेकिन अब इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने इस प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है।

केमोइन्फॉर्मेटिक्स का प्रयोग ड्रग डिस्कवरी प्रक्रिया में होता है। इसमें शोधकर्ता अलग-अलग रसायनों का जैविक प्रभाव तलाशते हैं। किस रसायन का कैसा प्रभाव होगा, वह कितना खतरनाक या प्रभावी हो सकता है, इसके लिए केमिक…

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस में करियर

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एविएशन का नाम आते ही आसमान में उड़ने का मन करता है लेकिन यदि आप बनाना चाहते हो हो एविएशन में अपना करियर तो आप कहाँ पर अपनी लाइफ बना सकते हो। एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) में हो रहे लगातार विस्तार से रोजगार के अवसरों में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में बहुत से अवसर हैं कई लोग सोचते हैं केवल पायलट या एयर होस्टेस तक ही एविएशन में जॉब सीमित हैं,  लेकिन ऐसा कतई नही है क्योंकि इनके इलावा भी आप एविएशन में अपना करियर बना सकते हो। इसी लाइन में में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर (AME) भी बहुत अच्छा विकल्प है।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर की कार्य प्रकृति कैसी है उसका क्या काम होता है: किसी भी जहाज की तकनीकी जिम्मेदारी एएमई के ऊपर होती है। हर उड़ान के पहले एएमई जहाज का पूरी तरह से निरीक्षण करता है और सर्टिफिकेट जारी करता है कि जहाज उड़ान भरने को तैयार है। इस काम के लिए उसके पास पूरी तकनीकी टीम होती है। कोई भी विमान एएमई के फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना उड़ान नहीं भर सकता। गौरतलब है कि एक हवाईजहाज के पीछे करीब 15-20 इंजीनियर काम करते हैं। इसी से इनकी जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता है। कैसे बन…

स्पा थेरेपी में करियर

स्वस्थ रहने और स्वस्थ दिखने की चाह सभी की होती है। आज ऐसी कई थेरेपी मौजूद हैं, जिनके इस्तेमाल से न सिर्फ शरीर, बल्कि मन भी स्वस्थ रहता है। यही कारण है कि अब देश में वेलनेस इंडस्ट्री जोर पकड़ रही है और बतौर बिजनेस सामने आ रही है। इसी का एक हिस्सा है स्पा थेरेपी। कुशल लोगों की कमी से जूझ रही इस इंडस्ट्री में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं।
स्पा थेरेपी क्या है?
स्पा थेरेपी के केंद्र में मुख्यत: मसाज, हाइड्रो थेरेपी, हाथों तथा पैरों के उपचार तथा चेहरे के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट शामिल है। इन थेरेपीज के माध्यम से हमारी मांसपेशियां, हड्डियां, पाचन प्रणाली, श्वसन प्रणाली, भावनात्मक, दिमागी और नाड़ी तंत्र बेहतर प्रदर्शन करते हैं। इनसे थकान, भारीपन, मांसपेशियों की कठोरता आदि समस्याएं खत्म होती हैं।
योग्यता
हालांकि क्वालिफाइड स्पा थेरेपिस्ट बनने के लिए कई कोर्स हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्रशिक्षण लेना ही बेहतर होता है। आप हाईस्कूल करने के बाद भी कोर्सेज में प्रवेश ले सकते हैं।
कौशल
इस फील्ड में वही सफल हो सकता है, जो क्लाइंट की जरूरतों को समझ सके। क्लाइंट से विन…

टैटू आर्ट: कला भी, करियर भी

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टैटू आर्ट नये दौर में युवाओं के फैशन स्टेटमेंट का हिस्सा बन चुका है। यूं तो शरीर पर कलात्मक आकृतियां उभारना पुरातन दौर में भी चलन में रहा है, लेकिन तब यह कहीं न कहीं परम्परा से जुड़ा हुआ था। लोग ईश्वर का नाम, उनका चित्र या कोई पारंपरिक धरोहर टैटू के जरिये शरीर पर गुदवाते थे, पर अब इसमें विषयों की भरमार है। इन दिनों टैटू आर्ट चलन में आने से इसमें करियर की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। टैटू मेकिंग को व्यवसाय बनाने के लिए आप में कला से लगाव, धर्य और परफेक्शन होना पहली शर्त है, क्योंकि शरीर पर एक बार टैटू बनाने के बाद दोबारा इसमें सुधार की गुंजाइश कम ही बचती है। कैसे करें शुरुआतटैटू आर्टिस्ट बनने के लिए किसी बड़ी डिग्री या डिप्लोमा का होना बहुत जरूरी नहीं है। इसके लिए कई संस्थानों ने सामान्य ट्रेनिंग के जरिये टैटू मेकिंग सिखा कर लाइसेंस देना शुरू किया है। इसका लाइसेंस पाने के लिए एलायंस ऑफ प्रोफेशनल टैटूइस्ट्स (एपीटी) ने कुछ आधारभूत योग्यता मानक तय किए हैं। शैक्षिक योग्यतायूं तो टैटू मेकिंग के लिए आपका कलात्मक क्षेत्र में माहिर होना ही काफी है, लेकिन शरीर से सीधे संबंधित कला होने के कारण आपको विज…

फूड प्रोसेसिंग के रूप में करियर

फूड प्रोसेसिंग खाद्य सामग्री और पेय पदार्थों को कई रूपों में सहेजने की एक बेहतर प्रक्रिया है। इस क्षेत्र में स्वरोजगार अच्छे करियर के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
योग्यता
फूड प्रोसेसिंग में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्सेज के अलावा डिग्री भी प्राप्त की जा सकती है। इस क्षेत्र से स्नातक डिग्री में प्रवेश पाने के लिए केमिस्ट्री, फिजिक्स, मैथमेटिक्स या बायोलॉजी आदि विषयों में 12वीं में कम से कम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। एमएससी कोर्स करने के लिए फूड टेक्नोलॉजी से संबंधित विषयों में स्नातक की डिग्री आवश्यक है।
कोर्सेज
फूड प्रोसेसिंग में 3 साल के कोर्सेज में बीएससी इन फूड टेक्नोलॉजी, बीएससी इन फूड न्यूट्रीशियन एंड प्रिजरर्वेशन हैं। 4 साल में बीटेक इन फूड इंजीनियरिंग और 2 साल में एमएससी इन फूड टेक्नोलॉजी के कोर्स कराए जाते हैं।
कॉलेज स्तर पर इस क्षेत्र में बी टेक., बी़ एससी़, एम़ टेक़., एम़ एससी़ और पीएच़ डी इन फूड टेक्नोलॉजी एंड प्रोसेसिंग पाठय़क्रम उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी कराए जाते हैं।
कैसे लें प्रवेश
फूड प्रोसेसिंग की पढ़ाई के लिए प्रवेश प्रक्…

बायोमैकेनिक्स में करियर

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बायोलॉजी के स्टूडेंट्स आमतौर पर डॉंक्टर बनने का ही सपना देखते हैं, लेकिन देश में इस कोर्स की अत्यंत सीमित सीटों के कारण बहुसंख्यक युवाओं का सपना पूरा नहीं हो पाता। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं लगाया जाना चाहिए कि बायोलॉजी सब्जेक्ट की इसके अलावा कोई अन्य करियर उपयोगिता नहीं है। हाल के वर्षों में बायोइंफॉर्मेटिक्स, बायोफिजिक्स, बायो इंजीनियरिंग, बायोकैमिस्ट्री जैसे कई नए विषयों का अस्तित्व सामने आया है। इसी क्रम में सबसे उभरता हुआ नया विषय है बायोमैकेनिक्स का।
क्या है बायोमैकेनिक्स
बुनियादी रूप से इस विषय के अंतर्गत विभिन्न जैविक प्रणालियों के कार्यकलापों का मैकेनिक्स के सिद्धांतों के आधार पर अध्ययन किया जाता है। इन जैविक प्रणालियों में मानव, पशु, वनस्पति, अंग, कोशिका आदि शामिल हैं। यानी भौतिक शास्त्र की परिभाषाओं की नजर से प्राणियों और वनस्पतियों की संरचना एवं विभिन्न अंगों की कार्यप्रणालियों को समझने का प्रयास इसमें शामिल है। दुर्घटनाओं में अंग-भंग होने अथवा कृत्रिम अंगों के विकास एवं उत्पादन से जुड़े कार्यों में इस तरह की विशेषज्ञता वाले लोगों की जरूरत पड़ती है।
एकेडेमिक ब…