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Showing posts from February, 2016

मौसम विज्ञान में करियर

मौसम जितने मोहक और मादक होते हैं, उनसे जुड़े करियर भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। कल तक यह माना जाता था कि मौसम का संबंध केवल खेती-किसानी से ही है तो अब यह धारणा पुरानी हो चुकी है। सैटेलाइट के इस युग में सुनामी तूफान से बचाने की कवायद से लेकर एयरलाइंस की उड़ानों, जहाजों के परिवहन से लेकर खेल मैदानों की हलचल में मौसम विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यही कारण है कि सरकारी विभागों से लेकर मौसम विज्ञान की भविष्यवाणी करने वाली प्रयोगशालाओं, अंतरिक्ष विभाग और टेलीविजन चैनल पर मौसम विज्ञान एक अच्छे करियर की दावत दे रहा है। यदि आपको हवा, बादल, समुद्र, बरसात, धुँध-कोहरे, आँधी-तूफान और बिजली में दिलचस्पी है तो मौसम विज्ञान का क्षेत्र न केवल आपकी इन क्षेत्रों की जिज्ञासाओं की पूर्ति करेगा, बल्कि एक शानदार करियर भी प्रदान करेगा, जो बदलते मौसम की तरह ही मोहक होगा।

बहुआयामी करियर
मौसम विज्ञान के इतने अधिक आयाम हैं कि इस क्षेत्र में अध्ययन कर अपनी अभिरुचि के अनुसार परिचालन, अनुसंधान तथा अनुप्रयोग अर्थात ऑपरेशंस-रिसर्च या एप्लिकेशंस के क्षेत्र में बहुआयामी करियर बनाया जा सकता है। ऑपरेशं…

जोअलॉजी में करियर

जीव-जंतु प्रेमियों को निश्चय ही उनके साथ समय बिताना अच्छा लगता है। आप अपने इसी प्रेम को अपने करियर में भी बदल सकते हैं। प्राणि विज्ञान या जोअलॉजी जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जिसमें जीव-जंतुओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इसमें प्रोटोजोआ, मछली, सरीसृप, पक्षियों के साथ-साथ स्तनपायी जीवों के बारे में अध्ययन किया जाता है। इसमें हम न सिर्फ जीव-जंतुओं की शारीरिक रचना और उनसे संबंधित बीमारियों के बारे में जानते हैं, बल्कि मौजूदा जीव-जंतुओं के व्यवहार, उनके आवास, उनकी विशेषताओं, पोषण के माध्यमों, जेनेटिक्स व जीवों की विभिन्न जातियों के विकास के साथ-साथ विलुप्त हो चुके जीव-जंतुओं के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।
अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि प्राणि विज्ञान में किस-किस प्रकार के जीवों का अध्ययन किया जाता है। जवाब है, इस पाठय़क्रम के तहत आप लगभग सभी जीवों, जिनमें समुद्री जल जीवन, चिडियाघर के जीव-जंतु, वन्य जीवों, यहां तक कि घरेलू पशु-पक्षियों के जीव विज्ञान एवं जेनेटिक्स का अध्ययन करते हैं। आइए जानते हैं कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने का पहला पड़ाव क्या है?
प्राण…

पेशेवर पायलट: रोमांच भी करियर भी

नई दिल्ली। पायलट ’ शब्द जोखिम, ग्लैमर, विशेष भत्तों और ऊंची उड़ान से जुड़ा है। वस्तुत: इस करियर में अत्याधिक आकर्षण है, जबकि अन्य सामान्य नौकरियों में इसका अभाव है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सफलता की ऊंची उड़ान भरने के लिए इच्छुक पायलट को अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है, जिसमें बहुत कम लोग सफल हो पाते हैं।

यद्यपि यह करियर बहुत पुराना है, फिर भी इस क्षेत्र में नए-नए अवसर मिलते रहते हैं। आज तो भारत के आकाश में घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों की भरमार होती जा रही है। एयर इंडिया ने सबसे पहले सन 1948 में लंदन की उड़ान भरी थी और आज भारत का सिविल तथा वाणिज्यिक एयरवे क्षेत्र काफी विस्तृत हो चुका है।

पायलट के लिए आवश्यक गुणः-

अगले पांच वर्षों के भीतर वाणिज्यिक पायलट की आवश्यकता दोगुनी हो जाएगी। व्यावसायिक (पेशेवर) पायलट का कार्य काफी मानसिक दबाव वाला होता है, क्योंकि उसके कंधों पर सैकड़ों यात्रियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे पायलट को केवल उड़ान प्रक्रिया से ही भली-भांति परिचित नहीं होना चाहिए बल्कि उसे मौसम-विज्ञान, वायु-संचालन, अत्याधिक अधुनातन उपकरण व यांत्रिकी की जटिलताओं …

एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में करियर

भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि पर केंद्रित है। इसलिए यह क्षेत्र रोजगार मुहैया कराने के मामले में भी आगे है। लेकिन देश की लगातार बढती जनसंख्या की वजह से नई तकनीक और बेहतर सिंचाई व्यवस्था आदि की जरूरत महसूस की जा रही है। एग्रीकल्चर इंजीनियर अपनी इंजीनियरिंग स्किल की बदौलत कृषि उत्पाद से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने की दिशा में कार्य करते हैं। देश में कृषि के विशाल क्षेत्र को देखते हुए एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में करियर की अच्छी संभावनाएं हैं।
कार्य
एग्रीकल्चर इंजीनियर का काम कृषि उत्पाद से संबंधित तकनीकी समस्या को दूर करना होता है। वाटर सप्लाई और वाटर इरिगेशन की फील्ड में हाइड्रोलॉजिकल, डेम डिजाइन, कैनाल, पाइपलाइन, पम्प सिस्टम, माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम्स और ड्रेनेज सिस्टम आदि से जुड़ा होता है, जबकि एग्रिकल्चर मैकेनाइजेशन के तहत इंजीनियर ट्रैक्टर, अन्य मशीनों की टेस्टिंग, नए मशीन, उपकरण के लिए डिजाइन तैयार करने का कार्य करते हैं। मृदा संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले इंजीनियर मृदा संरक्षण से जुड़े उपाय, बाढ़ के पानी का सही तरीके से निकासी आदि संबंधित कार्यो से जुड़े होते हैं।

केमिकल इंजीनियरिंग में करियर

केमिकल इंजीनियरिंग एक बेहतरीन करियर क्षेत्र है। इस फील्ड में रोजगार के अवसरों की कमी नहीं है। इसमें करियर के अवसरों के बारे में जानकारी दे रहे हैं संजीव कुमार सिंह
केमिकल पदार्थों की बढ़ती मात्रा एवं भागीदारी के चलते इसमें रोजगार की संभावना तेजी से बढ़ रही है। इसमें कार्य करने वाले प्रोफेशनल्स ‘केमिकल इंजीनियर’ व यह पूरी प्रक्रिया ‘केमिकल इंजीनियरिंग’ कहलाती है। सामान्यत: केमिकल इंजीनियरिंग को इंजीनियरिंग की एक शाखा के रूप में जाना-समझा जाता है, जिसके अंतर्गत कच्चे पदार्थों एवं केमिकल्स को किसी प्रयोग की चीज में बदला जाता है, जबकि मॉडर्न केमिकल  इंजीनियरिंग कच्चे पदार्थों को बदलने के साथ-साथ तकनीक (नैनोटेक्नोलॉजी और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग) पर भी बल देती है। इस विधा के अंतर्गत रासायनिक उत्पादों के निर्माण में आने वाली समस्याओं का हल ढूंढा जाता है। इसके अलावा उत्पादन प्रक्रिया में होने वाले डिजाइन प्रोसेस का कार्य डिजाइन इंजीनियर देखते हैं। अत: इसमें एक ही साथ कई अलग-अलग क्षेत्रों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि यह पाठ्यक्रम केमिस्ट्री व  इंजीनियरिंग का मिला-जुला रूप है। …

इंस्ट्रमेंटेशन इंजीनियर में करियर

इंजीनियरिंग की प्रमुख विधाओं में इंस्ट्रमेंटेशन इंजीनियरिंग को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इंजीनियरिंग की इस शाखा के अंतर्गत इंटर डिसिप्लिनरी ट्रेनिंग दी जाती है। इन डिसिप्लिन या विषयों में इलेक्ट्रिकल, कैमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस शामिल हैं। इनका काम मुख्य रूप से ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स की डिजाइनिंग,मेन्युफेक्चरिंग, मेंटेनेंस और रिपेयरिंग से सम्बंधित है, जिनके माध्यम से टेम्प्रेचर, प्रेशर, फ्लो आदि को मापने का काम किया जाता है। ये इंस्ट्रूमेंट्स घरेलू थर्मामीटर, फ्रिज और एसी में इस्तेमाल होने वाले थर्मोस्टेट से लेकर पावर प्लांट्स, कैमिकल इंडस्ट्री,ऑयल रिफाइनरी, स्टील इंडस्ट्री तक में किसी न किसी रूप में इस्तेमाल किये जाते हैं।
इंस्ट्रमेंटेशन इंजीनियिरग का महत्व
अमूमन इस तरह की विधा में ट्रेंड इंजीनियर्स ऑटोमेशन प्लांट्स या प्रोसेसिंग से जुड़े कामों में देखे जा सकते हैं। यहां इनका दायित्व सिस्टम प्रोडक्टिविटी में सुधार लाने की दिशा में प्रयास करना तथा सेफ्टी इत्यादि से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर सम्बंधित होता है। इसके अतिरिक्तकम्युनिकेशन, एयरोस…

फॉरेंसिक अकाउंटिंग

देश में आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सत्यम (अब महिंद्रा सत्यम) में हुए बड़े वित्तीय घोटाले का मामला हो या फिर आए दिन सामने आने वाले आर्थिक साइबर अपराधों, मनी लॉन्डरिंग, बीमा, बैंकिंग और निवेश से संबंधित घोटालों आदि के खुलासे की बात, इनकी प्रभावी जांच के लिए फॉरेंसिक अकाउंटिंग की जरूरत होती है। बढ़ते आर्थिक अपराधों के इस दौर में फॉरेंसिक अकाउंटिंग के पेशेवरों का महत्व और उनकी मांग काफी बढ़ गई है। इस कारण इसे भविष्य के लिहाज से रोजगार का एक बेहतरीन विकल्प माना जा सकता है।
क्या है फॉरेंसिक अकाउंटिंग
यह अकाउंटिंग की ही एक शाखा है, जिसमें कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए अकाउंटिंग के सिद्धांतों के साथ ऑडिटिंग और जांच-पड़ताल के हुनर का इस्तेमाल किया जाता है। यह काम करने वाले पेशेवरों को फॉरेंसिक अकाउंटेंट कहा जाता है। वह अनुभवी ऑडिटर होते हैं और वित्तीय घपलों का पता लगाने के लिए किसी व्यावसायिक संस्थान (कंपनी, फर्म) के खातों (अकाउंट्स) पर निगरानी रखने का कार्य करते हैं। फॉरेंसिक अकाउंटिंग के लिए सबसे जरूरी होती है अकाउंटिंग की अच्छी जानकारी। इसके बाद ऑडिटिंग, रिस्क अस…

रोबोटिक्स का रोचक करियर

शब्द की उत्पत्ति चेक शब्द 'रोबिट' तथा स्लैव मूल के शब्द रोबोटा से हुई, जिसका अर्थ कार्य तथा गुलामी का काम है। आजकल रोबोट हार्ट सर्जरी करते हैं, बारूदी सुरंगों को हटाते हैं तथा कारों की असेम्बलिंग का कार्य करते हैं। फिर भी भारतीय कंपनियाँ अभी भी बार-बार किए जाने वाले बोरिंग तथा असुखदकर कार्यों में रोबोटों के उपयोग करने से बच रही है। वेल्डिंग, असेम्बलिंग, स्प्रे-पेटिंग, कटिंग तथा पूर्जों को लगाना कुछ ऐसे काम हैं, जिन्हें रोबोट द्वारा कुशलतापूर्वक किया जाता है।

तीन शाखाओं का संगम है रोबोटिक्स
रोबोटिक्स के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल या कम्प्यूटर इंजीनियरिंग का अध्ययन करने की आवश्यकता होती है। वास्तव में रोबोटिक्स इन तीनों के तालमेल का ही रूप है। इसलिए रोबोटिक्स में सुविज्ञता हासिल करने के लिए इन तीनों क्षेत्र का गहन ज्ञान अपेक्षित है। इस क्षेत्र में कुछ इंजीनियरिंग संस्थानों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, एडवांस्ड रोबोटिक्स सिस्टम्स, इंटेलिजेंस कंट्रोल, इमेजिंग प्रोसेस, न्यूरल नेटवर्क्स तथा फुजी लाजिक्स पर विशेष कोर्स संचालित किए ज…

टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में करियर

सिविल, एग्रीकल्चर, कम्प्यूटर, मैकेनिकल के साथ ही टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग भी संभावनाओं के नए द्वार खोल रही है। इस क्षेत्र में करियर के अवसरों के बारे में बता रही हैं नमिता सिंह
आर्थिक उदारीकरण और औद्योगिक आवश्यकताओं ने इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं में अवसरों के नए द्वार खोले हैं। वह दौर बीत गया, जब लोग इंजीनियरिंग को महज कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित मानते थे। आज इसका दायरा कई प्रमुख क्षेत्रों तक बढ़ चुका है। इसी में से एक टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग भी है। यह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की एक शाखा है और वैश्वीकरण के दौर में विभिन्न देशों के बीच कम्युनिकेशन का एक सशक्त माध्यम बन कर उभरी है। टेलीकम्युनिकेशन के ही कई सिद्धांतों को मिला कर ट्रांसमिशन, डिजिटल सिग्नल, नेटवर्क, चैनल, मॉडय़ूलेशन संबंधी कार्य आसानी से किए जा सकते हैं। यह इंजीनियरिंग की परंपरागत शाखाओं से कुछ अलग हट कर है। स्पष्ट शब्दों में कहा जा सकता है कि यह सेटेलाइट कम्युनिकेशन, केबल रेडियो, राडार आदि के जरिए दूर-दूर तक सूचनाओं के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण जरिया है।
बहुत कुछ सिखाता है कोर्स
टेलीकम्युनिकेशन से स…

एडवेंचर स्पोर्ट्स में करियर

आप एडवेंचर स्पोर्ट्स की चाहत में कुछ भी छोड़ सकते हैं? क्या आप प्रकृति के करीब रहना पसंद करते हैं? अगर इन सवालों का जवाब आपकी ओर से ‘हां’ है, तो आप एडवेंचर स्पोर्ट्स की दुनिया में अपने लिए बेहतर करियर तलाश सकते हैं। घरेलू पर्यटन में वृद्धि होने की वजह से एडवेंचर स्पोर्ट्स के पेशेवरों की मांग में भी कई गुना का इजाफा हुआ है। इसके अलावा नेशनल जियोग्राफिक, डिस्कवरी, एएक्सएन और एनिमल प्लेनेट जैसे चैनल सामान्य यात्राओं की बजाए रोमांच से भरपूर यात्राओं पर जाने वाले पर्यटकों को विशेष लाभ भी मुहैया कराते हैं।
क्या है एडवेंचर स्पोर्ट्स
इसे एक्शन स्पोर्ट्स, ऐग्रो स्पोर्ट्स और एक्सट्रीम स्पोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। इसके दायरे में वह गतिविधियां (खेल संबंधी) शामिल होती हैं, जिनमें बड़े खतरे अंतर्निहित होते हैं। इन गतिविधियों में गति, उच्च स्तर के शारीरिक दमखम और विशेष कौशल की दरकार होती है।
कई तरह के एडवेंचर स्पोर्ट्स
इन खेलों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है- एअर स्पोर्ट्स, लैंड स्पोर्ट्स और वॉटर स्पोर्ट्स। खेलों की इन श्रेणियों में ढेर सारे खेल शामिल हैं, इनमें …

एथिकल हैकिंग

वचरुअल दुनिया का दायरा जिस तरह दिन-दुनी रात-चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है, आईटी (इफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) आधारित सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी परेशानी का सबब बन रही हैं। हर रोज दुनिया के किसी न किसी कोने में नेटवर्क, वेबसाइट और ई-मेल अकाउंट्स की सुरक्षा दांव पर लगी होती है। इंटरनेट पर साइबर अपराध के मामलों में चिंताजनक रफ्तार से वृद्धि देखी जा रही है
इन मामलों में किसी व्यक्ति या संस्था के कंप्यूटर सिस्टम में सेंध लगाकर संवेदनशील डाटा चुराने से लेकर पासवर्ड चोरी करने, भद्दे ई-मेल भेजने और ई-मेल अकाउंट को हैक करने जैसी घटनाएं शामिल होती हैं। इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों से सूचनाओं को अवैध ढंग से प्राप्त करने वालों को हैकर कहा जाता है। मगर जब यही काम कंप्यूटर सिस्टम के सुरक्षा उपायों को जांचने और उसे पुख्ता बनाने के उद्ेदश्य से किया जाता है, तो उसे एथिकल हैकिंग कहते हैं। इस कार्य को करने वाले पेशेवर एथिकल हैकर के नाम से जाने जाते हैं। साइबर अपराधों की बढ़ती तादाद के बीच मूल्यवान इंफॉर्मेशन सिस्टम की सुरक्षा के लिए एथिकल हैकरों की मांग जोर पकड़ रही है। इस कारण यह पेशा नौकरी की आक…

ह्यूमेनिटीज में करियर

दसवीं और बारहवीं के स्तर पर साइंस और कॉमर्स के बाद छात्रों या अभिभावकों के सामने ह्यूमेनिटीज स्ट्रीम शेष रह जाती है। इस स्ट्रीम को हालांकि छात्र और अभिभावक अपनी प्राथमिकता में पहले या दूसरे स्थान पर नहीं रखते, लेकिन बदलते वक्त के साथ इस स्ट्रीम से जुड़ी संभावनाओं का आकाश भी काफी विस्तृत हो गया है। इस लेख के माध्यम से छात्रों को ह्यूमेनिटीज स्ट्रीम और उसमें निहित अवसरों को जानने-समझने में मदद मिलेगी।
ह्यूमेनिटीज को कुछ वर्ष पहले तक एक ऐसे स्ट्रीम के रूप में देखा जाता था, जो या तो कम बुद्धिमान लोगों के लिए है या शिक्षक बनने की इच्छा रखने वालों के लिए। लेकिन मौजूदा वक्त में यह धारणा अप्रासंगिक हो चुकी है। अब ह्यूमेनिटीज की बदौलत ऊंचे पद, बड़ी उपलब्धियां और तरक्की पाई जा सकती है। शिक्षण के अलावा इसमें सैकड़ों तरह के रोजगार उपलब्ध हैं, जो रुचिकर होने के साथ-साथ अपनी कार्य-प्रकृति में विशिष्ट भी हैं। ह्यूमेनिटीज स्ट्रीम आपके सामने असीमित विकल्प रखती है। यकीन न हो, तो मानवीय गतिविधियों से जुड़े किसी भी क्षेत्र को देख लीजिए, आप हर क्षेत्र में ह्यूमेनिटीज के छात्रों को सफलता के …

डर्मेटोलॉजी में करियर

डिसिन में स्पेशलाइजेशन के लिए उपलब्ध विकल्पों में ‘डर्मेटोलॉजी’ काफी लोकप्रिय हो गया है। मौजूदा वक्त में ‘फर्स्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन’ कहावत को इतनी गंभीरता से लिया जा रहा है कि व्यक्ति के रूप को व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण अंग माना जाने लगा है। इस कारण लोगों में अपने रूप और व्यक्तित्व को लेकर चिंता का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। यहां तक कि कॉलेज जाने वाले छात्र भी खुद को आकर्षक दिखाने की गरज से काफी रुपये खर्च कर रहे हैं।
अपने रूप को लेकर लोगों में गंभीरता का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि वह चेहरे पर छोटा-सा मुंहासा हो जाने भर से परेशान हो उठते हैं। कई बार वह ऐसी परेशानियों को इस कदर अपने ऊपर हावी कर लेते हैं कि घर से बाहर निकलना भी छोड़ देते हैं। ऐसे माहौल में रूप निखारने का दावा करने वाली फेयरनेस क्रीमों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। खुजली और घमौरियों (रैशेज) जैसे त्वचा संबंधी रोग आम हो चुके हैं। गर्मी और बरसात के मौसम में इनकी अधिकता काफी बढ़ जाती है। इनके सही उपचार के लिए डॉंक्टर का परामर्श जरूरी होता है। कई बार उपचार के लिए डॉंक्टर के पास कुछ दिनों या हफ्तों क…

एग्रो-फॉरेस्ट्री में फ्यूचर

फॉरेस्ट्री के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ एक्सप्लोर किया जाना बाकी है। इसमें नए इनोवेटिव रिसर्च की जरूरत है। फॉरेस्ट्री से ही जुड़ा फील्ड है एग्रो-फॉरेस्ट्री, जिसमें कृषि उत्पाद, वन पैदावार और आजीविका के क्रिएशन, कंजर्वेशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट की जानकारी दी जाती है। फॉरेस्ट्री या एग्रीकल्चर या प्लांट साइंसेज में ग्रेजुएट एग्रो-फॉरेस्ट्री में मास्टर्स कर सकते हैं। इसके लिए यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस एग्जाम देना होगा या फिर मेरिट के आधार पर भी दाखिला मिल सकता है। एग्रो फॉरेस्ट्री प्रोफेशनल्स बैंकिंग सेक्टर के अलावा कृषि विज्ञान केंद्र, आइटीसी जैसी प्लांटेशन कंपनी या बायो-फ्यूअल इंडस्ट्री में काम कर सकते हैं। डॉ. अरविंद बिजलवान, असि. प्रोफेसर (टेक्निकल फॉरेस्ट्री), आइआइएफएम, भोपाल लाइफ का सेकंड चांस भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग करने के बाद मैं टीसीएस मुंबई में जॉब कर रही थी। हर दिन कंप्यूटर के सामने एक-सा काम करते हुए मन नहींलग रहा था। बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट-सी गई थी। तब खुद से सवाल पूछा कि आखिर ये मैं क्या कर रही ह…