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Showing posts from June, 2015

मौसम विज्ञान में हैं शानदार अवसर

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मौसम जितने मोहक और मादक होते हैं, उनसे जुड़े करियर भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। कल तक यह माना जाता था कि मौसम का संबंध केवल खेती-किसानी से ही है तो अब यह धारणा पुरानी हो चुकी है। सैटेलाइट के इस युग में सुनामी तूफान से बचाने की कवायद से लेकर एयरलाइंस की उड़ानों, जहाजों के परिवहन से लेकर खेल मैदानों की हलचल में मौसम विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यही कारण है कि सरकारी विभागों से लेकर मौसम विज्ञान की भविष्यवाणी करने वाली प्रयोगशालाओं, अंतरिक्ष विभाग और टेलीविजन चैनल पर मौसम विज्ञान एक अच्छे करियर की दावत दे रहा है। यदि आपको हवा, बादल, समुद्र, बरसात, धुँध-कोहरे, आँधी-तूफान और बिजली में दिलचस्पी है तो मौसम विज्ञान का क्षेत्र न केवल आपकी इन क्षेत्रों की जिज्ञासाओं की पूर्ति करेगा, बल्कि एक शानदार करियर भी प्रदान करेगा, जो बदलते मौसम की तरह ही मोहक होगा।

बहुआयामी करियर
मौसम विज्ञान के इतने अधिक आयाम हैं कि इस क्षेत्र में अध्ययन कर अपनी अभिरुचि के अनुसार परिचालन, अनुसंधान तथा अनुप्रयोग अर्थात ऑपरेशंस-रिसर्च या एप्लिकेशंस के क्षेत्र में बहुआयामी करियर बनाया जा सकता है। ऑपरेशंस के तहत मौसम …

साइबर लॉ एक्सपर्ट इंटरनेट के डिटेक्टिव

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आज शायद ही कोई स्टूडेंट या प्रोफेशनल हो, जिसका ई-मेल एकाउंट या सोशल वेबसाइटï्स पर कोई प्रोफाइल न हो। इंटरनेट पर समय बिताने या काम करने वाले लोगों की संख्या भी दिनों-दिन बढ़ रही है। अब तो मोबाइल और स्मार्टफोन यूजर्स भी इसमें शामिल हो गए हैं। हालांकि इसके साथ साइबर क्राइम का खतरा भी बढ़ रहा है। पर्सनल एकाउंट की हैकिंग से लेकर वायरस के प्रसार, स्टॉकिंग, साइबर वॉर, साइबर टेररिज्म, साइबर फ्रॉड जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। साइबर रिलेटेड केसेज बढ़ रहे हैं। अगर आप आइटी के साथ-साथ लॉ में भी इंट्रेस्ट रखते हैं, तो साइबर लॉ फील्ड में लुक्रेटिव करियर बना सकते हैं। क्या है साइबर लॉ? डिजिटल इंफॉर्मेशन एवं कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी ने एक नए कानूनी कार्यक्षेत्र को जन्म दिया है, जिसे साइबर लॉ कहते हैं। साइबर लॉ के तहत इंटरनेट और साइबर स्पेस से जुड़े मामले सुलझाए जाते हैं। इसके एक्सपर्ट छोटे-बड़े साइबर क्राइम की रोकथाम के अलावा उसकी जांच में सहायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, सॉफ्टवेयर पेटेंट, नेट बैंकिंग से जुड़े कानूनी मामले भी यही देखते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन साइबर लॉ एक्सपर्ट बनने के लिए आप…

पेशेवर पायलट: रोमांच भी करियर भी

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नई दिल्ली। पायलट ’ शब्द जोखिम, ग्लैमर, विशेष भत्तों और ऊंची उड़ान से जुड़ा है। वस्तुत: इस करियर में अत्याधिक आकर्षण है, जबकि अन्य सामान्य नौकरियों में इसका अभाव है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सफलता की ऊंची उड़ान भरने के लिए इच्छुक पायलट को अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है, जिसमें बहुत कम लोग सफल हो पाते हैं।

यद्यपि यह करियर बहुत पुराना है, फिर भी इस क्षेत्र में नए-नए अवसर मिलते रहते हैं। आज तो भारत के आकाश में घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों की भरमार होती जा रही है। एयर इंडिया ने सबसे पहले सन 1948 में लंदन की उड़ान भरी थी और आज भारत का सिविल तथा वाणिज्यिक एयरवे क्षेत्र काफी विस्तृत हो चुका है।

पायलट के लिए आवश्यक गुणः-

अगले पांच वर्षों के भीतर वाणिज्यिक पायलट की आवश्यकता दोगुनी हो जाएगी। व्यावसायिक (पेशेवर) पायलट का कार्य काफी मानसिक दबाव वाला होता है, क्योंकि उसके कंधों पर सैकड़ों यात्रियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे पायलट को केवल उड़ान प्रक्रिया से ही भली-भांति परिचित नहीं होना चाहिए बल्कि उसे मौसम-विज्ञान, वायु-संचालन, अत्याधिक अधुनातन उपकरण व यांत्रिकी की जटिलताओं का भी ज्ञान …

Career in विज्ञापन

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सन्देश को लोगों तक पहुंचने  की कला ही विज्ञापन है. साधारणतः विज्ञापन किसी उत्पाद, सेवा अथवा सामाजिक मुद्दे के बारे में लोगों को जागरूक करते हैं. विज्ञापन विभाग किसी भी उद्योग  के उन प्रमुख विभागों में से एक होता है जो आज के कॉर्पोरेट परिवेश में उद्योग को प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाता है. भारतीय विज्ञापन उद्योग आज प्रगति के उस पथ पर अग्रसर है जहाँ ये अगले कुछ वर्षों में हज़ारों युवाओं को रोज़गार प्रदान करेगा. तेज़ी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था में विज्ञापन का क्षेत्र रोज़गार की नई  संभावनाओ को लेकर आया है. विज्ञापन एजेंसियों को ऐसे मौलिक एवं प्रतिभावान लोगों की सदैव खोज रहती है जो समूह में काम करने के साथ ही अपने स्वतंत्र विचारों को प्रस्तुत कर सके. चरणबद्ध प्रक्रिया विज्ञापन कम्पनियाँ अपने विभागों के विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग शैक्षिक पृष्भूमि के लोगों को नियोजित करती हैं. शुरूआत करने के लिए आपके पास किसी विशेष क्षेत्र में पेशेवर डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए. इसके अलावा, भाषा पर मजबूत पकड़ और उच्च कोटि की संवाद क्षमता आपको इस क्षेत्र का महारथी बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

विज…

Career in पोषण एवं आहारिकी (न्यूट्रीशन एंड डायटेटिक्स

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परिचय बारहवीं के उपरान्त ही पोषण एवं आहारिकी का कोर्स आपको एक रोमांचक करियर प्रदान कर सकता है. गृह विज्ञान अथवा होटल प्रबंधन में डिग्री आपको पोषण एवं आहारिकी का उच्च-स्तर का ज्ञान करा सकती हैं. भारत में पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र में वैसे तो महिलाएं ही पदार्पण करती हैं परन्तु आजकल अवसरों की अधिकता होने के कारण पुरुष भी इस क्षेत्र में करियर बनाने लगे हैं. चरणबद्ध प्रक्रिया साधारणतः पोषण एवं आहारिकी कोर्स का मुख्य उद्देश्य होता है- पोषण एवं आहार से जुड़ी परेशानियों को जनसँख्या के एक तबके को लेकर चिह्नित करना. देश में मौजूद पोषण एवं आहार से जुडी समस्याओं के नियंत्रण के लिए सामाजिक, आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सक्षम विधिओं का विकास करना.पोषण एवं आहार से जुडी योजनाओं के प्रबंधन व प्रशासन के लिए नयी तकनीकों का विकास करना तथा उन्हें ज़मीनी स्तर पर लागू करना.पोषण के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देकर भावी वैज्ञानिकों की एक पौध तैयार करना.पोषण से जुड़े मुद्दों पर सरकार एवं अन्य स्वस्थ्य संस्थानों को समय-समय पर सलाह देते रहना.  पदार्पण स्कूली शिक्षा ख़त्म करने के पश्चात आप पोषण एवं आहारिकी में स्ना…

Genetic Counsellor डिकोडिंग द डिसऑर्डर

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ह्यूमन बॉडी में मौजूद क्रोमोजोम्स में करीब 25 से 35 हजार के बीच जीन्स होते हैं। कई बार इन जीन्स का प्रॉपर डिस्ट्रीब्यूशन बॉडी में नहीं होता है, जिससे थैलेसेमिया, हीमोफीलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्लेफ्ट लिप पैलेट, न्यूरोडिजेनेरैटिव जैसी एबनॉर्मलिटीज या हेरेडिटरी प्रॉब्लम्स हो सकती है। इससे निपटने के लिए हेल्थ सेक्टर में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट और दूसरे इनेशिएटिव्स लिए जा रहे हैं, जिसे देखते हुए जेनेटिक काउंसलिंग का रोल आज काफी बढ गया है। अब जो लोग इसमें करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए स्कोप कहीं ज्यादा हो गए हैं।
जॉब आउटलुक
एक अनुमान के अनुसार, करीब 5 परसेंट आबादी में किसी न किसी तरह का इनहेरेटेड डिसऑर्डर पाया जाता है। ये ऐसे डिसऑर्डर्स होते हैं, जिनका पता शुरुआत में नहीं चल पाता है, लेकिन एक जेनेटिक काउंसलर बता सकता है कि आपमें इस तरह के प्रॉब्लम होने की कितनी गुंजाइश है। काउंसलर पेशेंट की फैमिली हिस्ट्री की स्टडी कर इनहेरेटेंस पैटर्न का पता लगाते हैं। वे फैमिली मेंबर्स को इमोशनल और साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी देते हैं।
स्किल्स रिक्वायर्ड
जेनेटिक काउंसलिंग के लिए सबसे इंपॉर्टेट स्किल है कम्युनिक…

कॅरियर के लिए बीमा का क्षेत्र भी बेहतर

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मेट्रो के बाद ग्रामीण इलाकों की तरफ इंश्योरेंस के बढ़ते कदम से इस क्षेत्र में कॅरियरके नए रास्ते खुलने लगे हैं. भारत की आधी से अधिक आबादी अभी भी 20-60 आयु वर्ग के दायरे में आते हैं। यही वजह है कि इंश्योरेंस सेक्टर की रफ्तार इस दौर में भी कायम है। अब स्थिति यह है कि इस प्रोफेशन से हाई प्रोफाइललोग भी जुड़ने लगे हैं।
योग्यता 12वींके बाद इंश्योरेंस के क्षेत्र में कॅरियरबनाया जा सकता है। इसके बाद आप बीए (इंश्योरेंस) में एडमिशनले सकते हैं या फिर एजेंट के रूप में कॅरियरकी शुरुआत कर सकते हैं। यदि आपने साइंस सब्जेक्ट से 12वींपास किया है, तो बीएससीएक्चुरिअल साइंस में एंट्री ले सकते हैं।
कोर्सेज इंश्योरेंस में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट से लेकर डिग्री और मास्टर डिग्री कोर्स तक उपलब्ध हैं। कोर्स की अवधि अलग-अलग है। कुछ कॉलेजबीए (इंश्योरेंस) कोर्स ऑफरकर रहे हैं, जिसकी अवधि तीन वर्ष है। वैसे, सर्टिफाइडरिस्क ऐंडइंश्योरेंस मैनेजमेंट में पीजीडिप्लोमा भी कर सकते हैं। इस कोर्स की अवधि अमूमन तीन साल की होती है। यदि इंश्योरेंस ऐंडरिस्क मैनेजमेंट में डिप्लोमा करना चाहते हैं, तो इसकी अवधि एक वर्ष की है। वैसे, डिस्टेंसल…