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Showing posts from May, 2015

फैशन डिजाइनिंग में है बेहतर करियर

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फैशन डिजाइनरों की मांग आज सिर्फ पेरिस और लंदन में ही नहीं है बल्कि अब तो इसके एक्सपर्ट छोटे शहरों में भी छाये हुए हैं. इससे संबंधित कोर्स करने के बाद इसकी व्यापकता का पता चलता है और फिर आप जान पाते हैं कि वर्तमान में किस तरह के फैशन का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है. करियर का बेहतर आप्शन

आये दिन बाजार में फैशन के नये डिजाइन, नए तरीके का कलर कंबिनेशन देखने को मिलता है. इस कारण फैशन डिजाइन का क्रेज दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है. हमेशा कुछ न कुछ नया करने की ख्वाहिश रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह करियर का बेहतर आप्शन है.

यहां हमेशा नया करने का मौका भी है और इसके माध्यम से खुद को स्थापित करने का अवसर भी. फैशन डिजाइनिंग में रुचि रखने वालों को राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) के कोर्स नई राह दिखाते हैं.

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) डिजाइन शिक्षा, व्यावहारिक शोध, प्रशिक्षण, डिजाइन परामर्शी सेवाएं के अलावा कई क्षेत्रों में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है. पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा

वर्ष 1961 में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन इस स्वायत्त संस्थान की स्थापना की गई. एनआईडी में ग्रेजुएशन डिप्…

एनिमेशन ब्राइट करियर का क्रिएटिव स्केच

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बाजार का बढ़ता ग्राफ हमारे देश में मल्टीमीडिया एवं एनिमेशन इंडस्ट्री सबसे ज्यादा तेजी से आगे बढ़ने वाले क्षेत्रों में से एक मानी जा रही है। इसका प्रमाण एसोचैम और डेलोइट द्वारा किया एक ताजा अध्ययन है, जिसके मुताबिक यह इंडस्ट्री 30 फीसद की विकास दर के साथ आगे बढ़ रही है और विकास की इस गति को देखते हुए इसके वर्ष 2013 तक वर्तमान 556 करोड़ से बढ़कर 1,154 करोड़ रुपए की इंडस्ट्री हो जाने की उम्मीद की जा रही है। डेलोइट इंडिया कंपनी के डायरेक्टर संदीप विश्वास के अनुसार, भारतीय गेमिंग मार्केट भी अनुमानतः 1,089 करोड़ रुपए का है और 50 फीसद की सालाना बढ़ोत्तरी के साथ इसके वर्ष 2013 तक 59,252 करोड़ रुपए हो जाने की उम्मीद की जा रही है। आउटसोर्सिंग की राह पर प्रगति की यह रफ्तार भावी एनिमेटर्स के लिए बेहद शुभ मानी जा रही है। इस फील्ड में जो जितना काबिल होगा, वह कामयाबी की सीढ़ियां उतनी ही ज्यादा चढ़ेगा। ग्रीन गोल्ड एनिमेशन प्रालि के संस्थापक और एमडी राजीव चिलाका कहते हैं, पिछले दस वर्षों से भारत में एनिमेशन सेक्टर लगातार प्रगति कर रहा है। इंजीनियरिंग ग्रेजुएट होने के बावजूद चिलाका एक कामयाब एनिमेशन डायरेक्टर है…

करिअर के लिए कैसा है स्पीच थेरपी कोर्स ?

ऑडियोलॉजी ऐंड स्पीच थेरपी किस प्रकार का कोर्स है और करिअर बनाने के लिहाज से इसका क्या महत्व है ?
आरती भार्गव , रोहिणी 
ऑडियोलॉजिस्ट का काम ऐसे लोगों का इलाज़ करना होता है , जिनकी सुनने की शक्ति में किसी न किसी प्रकार की कमी होती है , जबकि स्पीच थेरपिस्ट उन रोगियों का इलाज करते हैं , जिन्हें बोलने या उच्चारण आदि में कठिनाई होती है या जो हकलाते हैं। ये दोनों स्पेशलाइजेशन एक ही सिक्के के दो पहलुओं के समान हैं। यही कारण है कि एक ही कोर्स के माध्यम से दोनों की ट्रेनिंग दी जाती है। हमारे देश में इस प्रकार की समस्याओं का सामना करने वाली आबादी की तुलना में इलाज़ करने वाले ट्रेंड लोगों की संख्या बेहद कम है , इसलिए आने वाले समय में इनकी मांग निश्चित रूप से बढ़ेगी। इस प्रकार के कोर्स बीएससी (ऑडियोलॉजी ऐंड स्पीच थेरपी) ,बीएससी (हियरिंग , लैंग्विज ऐंड थेरपी) , बीएससी (स्पीच एंड हियरिंग) आदि के रूप में विभिन्न संस्थानों में चलाए जाते हैं। 

इस बारे में और जानकारी प्राप्त करने के लिए पीजी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च (सेक्टर-12 ,चंडीगढ़) से संपर्क कर सकते हैं। मूल रूप से यह पैरामेडिकल कोर्स …

एलपीओ क्या है?

लीगल आउटसोर्सिन्ग प्रफेशनल को एलपीओ कहा जाता है। विदेशी लीगल कंपनियों के इस क्षेत्र से संबंधित कामों को भारत में कार्यरत एलपीओ इंटरनेट के जरिए पूरा करके भेजते हैं। तमाम भारतीय लीगल कंपनियां और नामी वकील भी इन्हें काम सौंपते हैं। इन कामों में केस की संपूर्ण फाइल तैयार करने से लेकर विभिन्न ऐतिहासिक फैसलों के संदर्भ की सूची तक तैयार करना शामिल हो सकता है। इस प्रकार का ट्रेंड निरंतर बढ़ता जा रहा है और आमतौर से लीगल एजुकेशन की बैकग्राउंड वाले युवा ही इसमें सफल हो पाते हैं। 

हालांकि, इनके लिए भी इस क्षेत्र के कार्यकलापों की औपचारिक ट्रेनिंग ली जानी आवश्यक है। फिलहाल प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट्स ही एलपीओ ट्रेनिंग दे रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए इंटरनेट अथवा दैनिक समाचार-पत्र देख सकते हैं। 

12वीं पास कर चुकी हूं। डिस्टेंस एजुकेशन से कोई प्रफेशनल कोर्स करना चाहाती हूं। कृपया मार्गदर्शन करें। नीलम कपूर, आर के पुरम 

देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में ट्रडिशनल अंडरग्रेजुएट कोर्स के साथ-साथ अब तमाम विषयों में प्रफेशनल कोर्सेज की शुरुआत भी बडे़ पैमाने पर की गई है। ये कोर्सेज विज्ञान, वाणिज्य और कल…

साइंस के स्टूडेंट्स के लिए वरदान KVPI

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (के. वी. पी. वाई.) का मुख्य उद्देश्य प्रतिभावान विद्यार्थियों की खोज कर उन्हें मूलभूत विज्ञान में अनुसंधान में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह फेलोशिप सिर्फ उन्हीं स्टूडेंट्स को दी जाती है जो साइंस सब्जेक्ट के साथ अपना करियर बनाने के लिए आगे पढ़ना चाहते हैं। योजना में वे स्टूडेंट्स आवेदन कर सकते हैं, जो अभी 11वीं, 12वीं और प्रथम वर्ष स्नातक (B.Sc./B.S./B.Stat./B.Math./Int.) क्लास में मूलभूत विज्ञान (गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान तथा जीव-विज्ञान) का पढ़ रहे हैं। इसके तहत तीन वर्ग बनाए गए हैं, पहला एसए वर्ग है जिसमें 11वीं के छात्र, एसएक्स में 12वीं और एसबी में साइंस स्नातक प्रथम वर्ष के स्टूडेंट्स शामिल किए गए हैं। योजना की शुरुआत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा 1999 में की गई थी।

यह स्कॉलरशिप मिलेगी

तीनों ही वर्गों के लिए निर्धारित विषय में जितने साल का कोर्स है उतने साल फेलोशिप दी जाएगी। यूजी के पाठ्यक्रमों में पहले से तीसरे साल तक 5000 रुपये प्रतिमाह स्कॉलरशिप मिलेगी। जबकि 20,000 रुपये कंटिन्जेंसी ग्रांट के रूप में स्टेशनर…

बीएलएड रजिस्ट्रेशन शुरू, 21 जून को एंट्रेंस

डीयू ने अपने चार साल के इंटीग्रेटिड बैचलर ऑफ एलिमेंटरी एजुकेशन (B.EL.ED) के लिए रजिस्ट्रेशन शेड्यूल जारी कर दिया है। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस शुरू हो गया है और 9 जून तक ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है। एजुकेशन डिपार्टमेंट की वेबसाइट cie.du.ac.in पर ऑनलाइन फॉर्म दे दिया गया है और ई-प्रॉस्पेक्ट्स भी जारी कर दिया गया है।
बीएलएड का एंट्रेंस टेस्ट 21 जून को दोपहर 2 से 5 बजे तक होगा। जहां जनरल व ओबीसी कैटिगरी के स्टूडेंट्स के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 500 रुपये है वहीं एससी, एसटी व पीडब्ल्यूडी कैटिगरी के स्टूडेंट्स के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 250 रुपये होगी।ऑनलाइन पेमेंट डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किया जा सकता है।

सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग के लिए क्वालीफाई करने वाले कैंडिडेट्स की लिस्ट 2 जुलाई को जारी की जाएगी। 8 जुलाई से काउंसलिंग शुरू हो जाएगी जहां एडमिशन के तीन राउंड होंगे और 20 जुलाई से क्लासेज शुरू हो जाएंगी।

गौरतलब है कि बीएलएड का कोर्स अदिति महाविद्यालय, इंस्टिट्यूट ऑफ होम इकनॉमिक्स, गार्गी कॉलेज, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, लेडी श्री राम कॉलेज, जीसस एंड मेरी कॉलेज, मिरांडा हाउस और माता सु…

एग्जीबिशन डिजाइनिंग में भी हैं करियर के शानदार मौके

विभिन्न एग्जीबिशन के लिए स्टॉल्स, बूथ, पैवेलियन, थीम ईवेंट के सेट्स आदि को डिजाइन करने की कला है एग्जीबिशन डिजाइनिंग। किसी खास कॉन्सेप्ट को विशिष्ट तकनीक व रचनाशीलता के माध्यम से इस तरह जीवंत बना देना कि उस स्टॉल, बूथ की तरफ लोग बरबस खिंचे चले आएं, इसी का नाम है एग्जीबिशन डिजाइनिंग। एक एग्जीबिशन की पूरी जिम्मेदारी एग्जीबिशन डिजाइनर के कंधों पर होती है। यातायात, सुरक्षा और दूसरी सभी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए जगह का चुनाव करना, उत्पाद चुनना, कौनसा स्टॉल कहां लगेगा यह तय करना, ग्राहकों को कैसे आकर्षित करना है, इन सभी चीजों की व्यवस्था एग्जीबिशन डिजाइनर ही करता है, लेकिन एक डिजाइनर के इन सभी दायित्वों से ऊपर होता है एग्जीबिशन की साज-सज्जा यानी डेकोरेशन करना, ताकि लोगों को उसकी तरफ आकर्षित किया जा सके। इसके लिए एक एग्जीबिशन डिजाइनर अपने क्लाइंट के आइडिया व जरूरतों और अपनी कल्पना शक्ति की बदौलत एग्जीबिशन और डिस्प्ले स्टैंड के लिए स्टॉल्स, बूथ आदि को डिजाइन करता है।
तैयार करने होते हैं रचनात्मक और सटीक डिजाइन
डिजाइन को तैयार करने के लिए एक डिजाइनर थ्रीडी मैक्स, कोरल ड्रॉ, फोटोशॉप, ऑटो कैड…

Career in पुरातत्त्व विज्ञान

परिचय पुरातत्त्व विज्ञान एक अंतःविषय है, जिसमें ऐतिहासिक मानव बसाव या समाज का अध्ययन किया जाता है. ऐतिहासिक जगहों के सर्वेक्षण, खुदाई से निकले अवशेष जैसे बरतन, हथियार, गहने, रोजमर्रा की चीजें, पेड़-पौधे, जानवर, मनुष्यों के अवशेष, स्थापत्य कला आदि से ऐतिहासिक मानव-संस्कृति को जाना जाता है. खुदाई से निकली कलाकृतियाँ और स्मारकों का विश्लेषण किया जाता है. पुरातत्त्ववेत्ता इन कलाकृतियाँ और स्मारकों के साथ-साथ इस विश्लेषण को रिकॉर्ड में रखता है. भविष्य में ये सामग्रियां संदर्भ के काम आती हैं. छोटी से छोटी, अमहत्त्वपूर्ण चीज जैसे टूटे हुए बरतन, मानव हड्डी आदि भी एक अनुभवी पुरातत्त्ववेता को बहुत कुछ कह जाता है. पुरातात्त्विक खोजों के निष्कर्ष हमारे पहले की जानकारी में एक नया आयाम जोड़ते हैं. खुदाई से निकली वस्तुओं को एकत्रित करना और उनका विश्लेषण करना हरेक पुरातत्त्ववेता का कर्तव्य होता है, भले ही उसकी विशिष्टता किसी और विषय में हो. पारम्परिक तरीके से सामग्रियां एकत्रित करने के आलावा पुरातत्त्ववेता नई तकनीक का भी इस्तेमाल करता है, जैसे जीन-अध्ययन, कार्बन डेटिंग, तापलेखन (थर्मोग्राफी), सैटेलाइट…