Monday, August 13, 2018

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस में करियर

एविएशन का नाम आते ही आसमान में उड़ने का मन करता है लेकिन यदि आप बनाना चाहते हो हो एविएशन में अपना करियर तो आप कहाँ पर अपनी लाइफ बना सकते हो। एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) में हो रहे लगातार विस्तार से रोजगार के अवसरों में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में बहुत से अवसर हैं कई लोग सोचते हैं केवल पायलट या एयर होस्टेस तक ही एविएशन में जॉब सीमित हैं,  लेकिन ऐसा कतई नही है क्योंकि इनके इलावा भी आप एविएशन में अपना करियर बना सकते हो। इसी लाइन में में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर (AME) भी बहुत अच्छा विकल्प है।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर की कार्य प्रकृति कैसी है उसका क्या काम होता है: किसी भी जहाज की तकनीकी जिम्मेदारी एएमई के ऊपर होती है। हर उड़ान के पहले एएमई जहाज का पूरी तरह से निरीक्षण करता है और सर्टिफिकेट जारी करता है कि जहाज उड़ान भरने को तैयार है। इस काम के लिए उसके पास पूरी तकनीकी टीम होती है। कोई भी विमान एएमई के फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना उड़ान नहीं भर सकता। गौरतलब है कि एक हवाईजहाज के पीछे करीब 15-20 इंजीनियर काम करते हैं। इसी से इनकी जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता है।

कैसे बन सकते हो आप एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बन सकते हो: जैसे की पायलट बनने के लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है वैसे ही एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनने के लिए भी लाइसेंस लेना पड़ता है। यह लाइसेंस डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन द्वारा प्रदान किया जाता है। कोई भी संस्थान, जो इससे संबंधित कोर्स कराता है, उसे भारत सरकार के विमानन मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले डीजीसीए से इसके लिए अनुमति लेनी होती है। जो इंस्टिट्यूट इससे मान्यता प्राप्त हैं उनसे भी आप ये लाइसेंस हासिल कर सकते हैं।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनने के लिए क्या शैक्षणिक योग्यता की आवश्कयता होनी चाहिए: जो विद्यार्थी इस कोर्स के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथेमेटिक्स विषयों की पढ़ाई जरूरी है। पीसीएम से 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग से संबंधित पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते हैं। कोर्स के दौरान मैकेनिकल इंजीनियरिंग और वैमानिकी की विभिन्न शाखाओं के बारे में जानकारी दी जाती है।
एविएशन सेक्टर में कहाँ मिलेंगे अवसर: ऐसे तकनीकी प्रोफेशनल्स के लिए देश-विदेश में सभी जगह मौके हैं। एयर इंडिया, इंडिगो, इंडियन एयरलाइन्स, जेट एयरवेज, स्पाइस जेट, गो एयर जैसे एयरलाइंस में तो मौके मिलते ही हैं, इसके अलावा देश के तमाम हवाईअड्डों और सरकारी उड्डयन विभागों में भी रोजगार के बेहतरीन अवसर उपलब्ध होते हैं। भारत में ही करीब 450 कंपनियां हैं, जो इस क्षेत्र में रोजगार प्रदान करती हैं। एएमई का शुरुआती वेतन 20-30 हजार हो सकता है, जिसमें अनुभव और विशेष शिक्षा के साथ बढ़ोतरी होती जाती है। इसके साथ-2 आप विदेशी या प्राइवेट कंपनियो जो प्राइवेट एयरक्राफ्ट की सुविधा उपलब्ध कराती उनमे भी आप अपना करियर चुन सकते हो
देश में कौन कौनसे मुख्य संस्थान हैं जहाँ पर एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर के लिए कोर्स किया जा सकता है: जो संस्थान संबंधित कोर्स कराने का इच्छुक होता है, उसको डीजीसीए से मान्यता लेनी होती है। ऐसे कुछ प्रमुख संस्थान हैं-
  • जेआरएन इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
  • भारत इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स, पटना एयरपोर्ट, पटना
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स साइंस, कोलकाता
  • एकेडमी ऑफ एविएशन इंजीनियरिंग, बेंगलुरु
  • आंध्र प्रदेश एविएशन एकेडमी, हैदराबाद

Tuesday, August 7, 2018

अर्थसाइंस से बनाएं सुनहरा भविष्य

अर्थसाइंस एक तरह से जियोलॉजी की ही अगली कड़ी है। इस कोर्स को बाजार की आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर ही तैयार किया गया है,
पृथ्वी के उदगम, विकास और इसके अंदर और बाहर चलने वाली हलचलों को जानना खासा रोचक है। क्या अन्य ग्रहों पर कोई जीवन है? चन्द्रमा, मंगल, बृहस्पति और अन्य ग्रहों पर क्या संसाधन उपलब्ध हैं? इनमें क्या बदलाव आ रहे हैं? सिकुड़ते ग्लेशियरों का महासागरों और जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? इस तरह की तमाम बातें और अनसुलझी पहेलियों के बारे में डाटा एकत्र करने का काम भूवैज्ञानिक करते हैं, उसका विश्लेषण करते हैं और एक निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास करते हैं।
आज जब पूरे विश्व की धरती को लेकर तरह-तरह की खबरें आ रही हैं, इसे समझने और उसकी तह तक जाने के लिए ऐसे विशेषज्ञों की अच्छी-खासी जरूरत पड़ रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस क्षेत्र में कुशल वैज्ञानिक और विशेषज्ञों की मांग को ध्यान में रखते हुए अर्थसाइंस का पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू किया है। खास बात यह कि एमएससी इन अर्थसाइंस नाम से प्रचारित इस कोर्स में प्रवेश का दरवाजा बारहवीं कक्षा के बाद ही खोला गया है। पांच साल के इस कोर्स को पूरा करने के बाद सीधे करियर अपनाने या चुनने का मौका मिलता है।
क्या है कोर्स में?
इस कोर्स में पहले तीन साल स्नातक स्तर की पढ़ाई होती है। इसके बाद सीधे एमएससी में दाखिला मिलता है। कुल 10 सेमेस्टर हैं। इसमें अर्थसाइंस के विविध पहलुओं जैसे भूभौतिकी, जल विज्ञान, समुद्र विज्ञान, वातावरणीय विज्ञान, ग्रहीय विज्ञान, मौसम विज्ञान, पर्यावरणीय विज्ञान और मृदा विज्ञान को व्यापक तौर पर पढ़ने व समझने का मौका मिलता है। महाद्वीपों के खिसकने, पर्वतों के बनने, ज्वालामुखी फटने के क्या कारण हैं, वैश्विक पर्यावरण किस तरह परिवर्तित हो रहा है, पृथ्वी प्रणाली कैसे काम करती है, हमें औद्योगिक कूड़े का निपटान कैसे और कहां करना चाहिए, भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए समाज की ऊर्जा और पानी की बढ़ती मांग को कैसे पूरा किया जा सकता है, जिस तरह विश्व की जनसंख्या बढ़ रही है, क्या हम उसके लिए पर्याप्त खाद्य तैयार कर सकते हैं तथा किस प्रकार खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं, ये सब चीजें अर्थसाइंस के अध्ययन क्षेत्र में हैं।
भूवैज्ञानिक समस्याओं को सुलझाने और संसाधन प्रबंधन, पर्यावरणीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा मानव कल्याण के लिए सरकारी नीतियों को तैयार करने में प्रयुक्त अनिवार्य सूचना या डाटाबेस उपलब्ध कराते हैं। कोर्स के दौरान खनन, तेल व प्राकृतिक गैस, भूजल, कोयला, जियो तकनीक, जीआईएस व रिमोट सेंसिंग, पर्यावरण अध्ययन, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन जैसे कई क्षेत्रों को जानने और समझने का अवसर दिया जाता है। इनसे जुडे क्षेत्रों में से एक क्षेत्र में छात्रों को आगे चल कर स्पेशलाइजेशन चुनना होता है। यह काम एमएससी स्तर पर होता है। एमएससी में चार पेपर थ्योरी के हैं। इसके अलावा कई पेपर वैकल्पिक हैं, जिसमें से छात्र किसी एक को चुन कर अपना करियर बना सकता है।
कोर्स के दौरान छात्रों को दो तरह की ट्रेनिंग भी दी जाती है। पहले स्तर पर हर साल छात्रों को फील्ड ट्रिप पर भेजा जाता है। एमएससी स्तर पर समर ट्रेनिंग और समर इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग के अलावा डिजर्टेशन का काम पूरा करना होता है। यहां फील्ड वर्क के बहुत विकल्प हैं।
शाखाएं
अर्थसाइंस की कई शाखाएं हैं। इनमें पर्यावरण अध्ययन, माइनिंग, जियोटेक्नोलॉजी, डिजास्टर मैनेजमेंट, एटमॉसफेरिक साइंस, जियोहैजर्डस, क्लाइमेट चेंज, ओशनोग्राफी, रिमोट सेंसिंग, एप्लायड हाइड्रोजियोलॉजी, काटरेग्राफी और जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम आदि प्रमुख हैं।
अवसर हैं कहां
कोर्स के छात्र के लिए राज्य और केन्द्र सरकार में जियोलॉजिस्ट बनने के कई अवसर हैं। एमएससी पास छात्रों के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा समय-समय पर जियोलॉजिस्ट की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की जाती है। सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड भी इस कोर्स के छात्रों को काम करने का अवसर मुहैया कराता है। इसमें हाइड्रोजियोलॉजिस्ट के रूप में उसी स्केल पर नियुक्ति होती है, जिस स्केल पर जियोलॉजिस्ट की। इनके अलावा पीएचडी करने के बाद साइंटिस्ट पद पर भर्ती होती है। ये सभी पद ग्रेड ए स्तर के अधिकारी के हैं। रिसर्च संस्थाओं के अलावा आजकल निजी कंपनियों में एग्जिक्यूटिव के रूप में भी क्लास वन पद पर इसके विशेषज्ञ रखे जा रहे हैं।
ओएनजीसी, वेदांता, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड, ईएसएसआर, केर्न इंडिया जैसी कई कंपनियां हैं, जहां इनकी मांग है। पीएचडी करने वालों के लिए रिसर्च एसोसिएट और अध्यापन के भी मौके हैं। इसके अलावा इनकी मांग देश में जहां पेयजल के लिए काम हो रहा है या फिर सीमेंट, माइनिंग आदि के कामों में इस कोर्स के छात्रों की मांग है।
दाखिला कैसे
इसमें बारहवीं की मेरिट के आधार पर दाखिला दिया जाता है। साइंस के छात्र के लिए बारहवीं में भौतिकी, गणित और रसायनशास्त्र पढ़ा होना जरूरी है, तभी उसे दाखिला दिया जाता है। हंसराज कॉलेज इस कोर्स की कट ऑफ लिस्ट निकाल कर मेरिट के हिसाब से दाखिला देता है। आईआईटी प्रवेश परीक्षा पास करने वाले को कट ऑफ में 5 फीसदी की छूट दी जाती है। ओबीसी वर्ग के लिए कट ऑफ में दस फीसदी तक रियायत है।
फैक्ट फाइल
कोर्स कराने वाले संस्थान
इस कोर्स की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में होती है। हालांकि दाखिला हंसराज कॉलेज में हो रहा है। वहां छात्रों को मुख्य पेपर के लिए नहीं, बल्कि उसके साथ पढ़ाए जाने वाले स्पेशलाइजेशन पेपरों के लिए जाना होता है। मुख्य कोर्स की पढ़ाई और क्लास जियोलॉजी विभाग में होती है। कुल 25 सीटें हैं।
विश्वविद्यालय में इसके अलावा जियोलॉजी ऑनर्स का कोर्स रामलाल आनंद कॉलेज में चलाया जा रहा है, लेकिन अर्थसाइंस का सिलेबस इससे थोड़ा भिन्न है। यह कोर्स इसके अलावा देश में आईआईटी खड़गपुर और रुड़की में चलाया जा रहा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय, हंसराज कॉलेज
आईआईटी, खड़गपुर और रुड़की
पांडिचेरी यूनिवसिटी, पुड्डुचेरी
इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
फैक्ट फाइल
स्कॉलरशिप
इस कोर्स में आईआईटी संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आयोजित गेट पास करने के बाद छात्रों को 8 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। एमएससी के बाद एमफिल या पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने के लिए जेआरएफ यानी जूनियर रिसर्च फेलोशिप के रूप में करीब 20 हजार रुपये मिलते हैं।
एमफिल स्तर पर केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में सरकार की ओर से करीब तीन हजार रुपए प्रतिमाह स्कॉलरशिप दी जाती है।
पीएचडी में यह राशि पांच हजार प्रतिमाह है। अर्थ विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्य के लिए अन्य सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं भी स्कॉलरशिप देती हैं। यह रिसर्च कार्यों, पीएचडी या पोस्ट डॉक्टरेट फेलोशिप के लिए दी जाती है।
वेतन
इस कोर्स के छात्रों को रिसर्च संस्थान 30 हजार से लेकर 40 हजार तक के पैकेज पर ले जा रही हैं। निजी क्षेत्रों में युवाओं की सैलरी स्किल को देखते हुए तय की जाती है। जियोलॉजिस्ट का वेतनमान भी 40 हजार रुपये से 50 हजार रुपये है।
कॉलेज शिक्षण और रिसर्च एसोसिएट के रूप में वेतनमान शुरुआती तौर पर 40 से 45 हजार रुपये है।
कोचिंग संस्थान
कोर्स में दाखिला आमतौर पर 12वीं के अंकों के आधार पर होता है। भौतिकी, रसायनशास्त्र और गणित की पृष्ठभूमि से लैस छात्रों को ही इंटीग्रेटेड एमएससी अर्थसाइंस में दाखिला मिलता है। अगर चाहें तो बारहवीं के बोर्ड में इन विषयों में अच्छे अंक लाने के लिए कोचिंग संस्थान की मदद ले सकते हैं। अपने पास किसी स्तरीय कोचिंग का चुनाव कर सकते हैं। जो छात्र आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफल होकर इधर आना चाहते हैं, वे भी कोचिंग की मदद ले सकते हैं।
एजुकेशन लोन
कॉलेज में इससे जुड़े कोर्स में दाखिले की फीस बहुत कम है, इसलिए लोन की जरूरत नहीं पड़ती। विदेश में पीचएडी की पढ़ाई के लिए बैंक में लोन आदि की व्यवस्था है।
अवसर 
स्नातक की डिग्री हासिल कर चुके छात्रों के लिए बीएड करने के बाद शिक्षण, टूरिज्म में सर्टिफिकेट कोर्स करके टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी आदि में काम के अवसर मिलते हैं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर बैंक व अन्य निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों में नौकरी कर सकते हैं। सरकारी क्षेत्र की ओर देखें तो यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होकर आईएएस, आईपीएस बन सकते हैं।
अगर इतिहास की अच्छी समझ है तो ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनने वाले धारावाहिक या फिल्म में पटकथा लेखन का काम कर सकते हैं। एमए, एमफिल करने के बाद कॉलेजों में अध्यापन का काम करने के काफी अवसर हैं। पुरातत्व विभाग से डिप्लोमा कोर्स करने के बाद केन्द्र व राज्य सरकार के संग्रहालयों में काम किया जा सकता है।

Friday, August 3, 2018

गाड़ि‍यों की लुक डिजाइन में कर‍ियर

जब भी बात गाड़ियों के लुक की होती है, तो कुछ गाड़ियां खुद ही हमारे जहन में आ जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी डिजाइनिंग उस समय के हिसाब से बिल्कुल 'हटकर' और कंफर्ट लेवल को ध्यान में रखकर की गई होती है। गाड़ियों के इसी ओवरऑल लुक की डिजाइनिंग करते हैं ऑटोमोटिव इंजीनियर्स। अगर आपको भी वाहनों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात आकर्षित करती है, तो आप भी ऑटोमोटिव डिजाइनर बन सकते हैं।
क्या है ऑटोमोटिव डिजाइन?
ऑटोमोबाइल्स के अपीयरेंस और फंक्शनैलिटी को डिजाइन करने की प्रक्रिया ऑटोमोटिव डिजाइनिंग कहलाती है। इसमें कार, बाइक, ट्रक, बस आदि हर सेग्मेंट के वाहन शामिल हैं। इसके तहत गाड़ियों की इंटीरियर व एक्सटीरियर डिजाइन, कलर स्कीम और शेप पर भी काम किया जाता है।
जॉब प्रोफाइल
किसी भी ऑटोमोबाइल को बनाने के लिए बेसिक आइडिया की जरूरत होती है। आइडिया जनरेशन ही ऑटोमोटिव डिजाइनर की प्रमुख जिम्मदारी है। इंजीनियर्स और डिजाइनर्स की टीम इस आइडिया पर चर्चा करती है और फिर कॉन्सेप्ट तैयार हो जाने पर डिजाइनर्स सॉफ्टवेयर की मदद से गाड़ी का बेसिक स्केच बनाते हैं, जो 3डी होता है। इसमें वाहन की हर बेसिक डीटेल शामिल होती है। साथ ही इंटीरियर और एक्सटीरियर की कलर स्कीम की जानकारी भी देनी होती है। डिजाइन फाइनल होने के बाद गाड़ी का स्केल मॉडल बनाया जाता है।
जरूरी स्किल
ऑटोमोटिव डिजाइनर बनने की सबसे पहली शर्त तो यह है कि आपमें सड़क पर चलने वाली हर गाड़ी के लिए पैशन होना चाहिए। साथ ही आपके पास वाहनों के निर्माण और उनकी फंक्शनैलिटी के बारे में बेसिक जानकारी भी होनी चाहिए। सृजनात्मकता के साथ ही आपमें ड्रॉइंग और स्कल्पचर बनाने में रुचि भी होनी चाहिए।
कौन-से कोर्स?
इस उद्योग में करियर बनाने के लिए डिजाइनिंग में बैचलर्स की डिग्री होनी जरूरी है। आप चाहें, तो डिजाइनिंग में मास्टर्स करके अपना ज्ञान और बढ़ा सकते हैं। इससे जॉब पाने की संभावना भी बढ़ जाती है। वैसे इस उद्योग में सर्वाइवल और करियर ग्रोथ के लिए डिजाइन स्किल्स ही मायने रखती हैं। आप चाहें, तो कोर्स पूरा करने के बाद किसी कंपनी में इंटर्नशिप करके डिजाइनिंग की बारीकियां सीख सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
ऑटोमोटिव डिजाइनर बड़े ऑटोमोबाइल निर्माताओं के कॉन्सेप्ट एंड डिजाइनिंग डिपार्टमेंट में काम करते हैं। अगर बात पे-पैकेज की करें, तो यह फील्ड काफी आकर्षक है। ज्यादातर कंपनियां ऑटोमोटिव डिजाइनर्स को अच्छा पैकेज देती हैं। भारत में आम तौर पर इस फील्ड में 5 लाख रुपए के वार्षिक पैकेज से शुरूआत होती है। अनुभव के साथ यह बढ़ता जाता है।

Monday, July 30, 2018

रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट में करियर

आज जिस तेजी से दुनिया में विकास हो रहा है, उससे भी कहीं ज्यादा तेजी से एनर्जी की मांग बढ़ रही है। किसी भी इंडस्ट्री या प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले वहां की ऊर्जा की संभावनाओं की पड़ताल जरूरी होती है। जरूरतों के साथ ही अब पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी देखा जाने लगा है। तमाम पावर प्रोजेक्ट्स पर्यावरण संबंधी विषयों के चलते ही अटके पड़े हैं। इसलिए रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस्ड रहना उनकी मजबूरी है। इस क्षेत्र में भारत ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रखी हैं। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे इस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं।
बायोफ्यूल की लगातार कम होती जा रही मात्रा और देश में एनर्जी की मांग को देखते हुए एनर्जी प्रोडक्शन और उसका प्रबंधन पहली प्राथमिकता बन चुका है। सरकारी के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इस ओर विशेष जोर दे रही हैं। यही कारण है कि रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट के कोर्स की तेजी से मांग बढ़ रही है। समय के साथ-साथ ऊर्जा की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसलिए ऊर्जा के अतिरिक्त स्रोतों यानी वैकल्पिक ऊर्जा, सौर ऊर्जा, विंड एनर्जी, बायो एनर्जी, हाइड्रो एनर्जी आदि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा पर्यावरण के मुद्दों को देखते हुए भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी योजना बना रखी है, क्योंकि सरकार का इरादा अगले साल तक 55 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन का है। कॉरपोरेट कंपनियां भी इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं।
क्या है रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट
मौजूदा प्रौद्योगिकी के अलावा नई तकनीक को अपना कर रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) के उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बिजली की मांग के एक बड़े हिस्से की आपूर्ति व प्रदूषण में कमी के साथ-साथ हजारों करोड़ रुपये की बचत भी की जा सके। इसलिए सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने पर बल दिया है।
कौन से हैं कोर्स
इसमें जो भी कोर्स हैं, वे पीजी अथवा मास्टर लेवल के हैं। छात्र उन्हें तभी कर सकते हैं, जब उन्होंने किसी विश्वविद्यालय या मान्यताप्राप्त संस्थान से बीटेक, बीई या बीएससी सरीखा कोर्स किया हो। एमएससी फिजिक्स के छात्रों को यह क्षेत्र सबसे अधिक भाता है।
एमबीए कोर्स
कई बिजनेस संस्थानों में एनर्जी मैनेजमेंट या पावर मैनेजमेंट जैसे एमबीए कोर्स भी ऑफर किए जा रहे हैं। इनको ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है। रिसर्च करने के लिए मास्टर होना जरूरी है।
कौन से हैं प्रमुख कोर्स
  • एमएससी इन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एमएससी इन फिजिक्स/एनर्जी स्टडीज
  • एमटेक इन एनर्जी स्टडीज
  • एमटेक इन एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमटेक इन एनर्जी टेक्नोलॉजी
  • एमटेक इन रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमई इन एनर्जी इंजीनियरिंग
  • पीजी डिप्लोमा इन एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमबीए इन रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमफिल इन एनर्जी
जरूरी गुण
  • आवश्यक स्किल्स
  • लॉजिकल व एनालिटिकल स्किल्स
  • कठिन परिश्रम से न भागना
  • मेहनती व अनुशासन में रहना
  • नई चीजें सीखने के लिए तत्पर रहना
  • कठिन परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता
वेतनमान
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में डिप्लोमाधारी युवाओं को शुरू-शुरू में 25-30 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिलती है। इस क्षेत्र में जैसे-जैसे वे समय व्यतीत करते जाते हैं, उनकी आमदनी भी बढ़ती जाती है।
अनुभव से बढ़ेगी सैलरी
अमूमन 3-4 साल के अनुभव के बाद यह सेलरी बढ़ कर 50-55 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाती है। कई ऐसे प्रोफेशनल्स हैं, जो इस समय 5-6 लाख रुपये सालाना सेलरी पैकेज पा रहे हैं। टीचिंग व विदेश जाकर काम करने वाले प्रोफेशनल्स की सेलरी भी काफी अच्छी होती है। इस क्षेत्र के जानकार प्रोफेशनल्स को अकसर सेलरी के लिए ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि आज भी इस क्षेत्र में मांग की तुलना में करियर प्रोफेशनल्स की भारी कमी है।
यहां पर मिल सकता है काम
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर से संबंधित सरकारी व निजी उद्योगों में करियर के तमाम विकल्प मौजूद हैं।
पर्याप्त संभावनाएं
देश में रिन्यूएबल एनर्जी की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। इससे लगभग 1.79 लाख मेगावॉट बिजली पैदा की जा सकती है। इसके अंतर्गत एचआर मैनेजमेंट, ऑपरेशन, फाइनेंस, मार्केटिंग तथा स्ट्रैटिजिक मैनेजमेंट जैसे कार्य शामिल हैं। इसमें प्रोफेशनल्स एनर्जी कॉर्पोरेशन के मैनेजमेंट में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह क्षेत्र भले ही अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर करियर की संभावनाएं मौजूद हैं।
संस्थान
- यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ, लखनऊ
वेबसाइट- www.lkouniv.ac.in
- यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे, पुणे
वेबसाइट- www.unipune.ac.in
- आईआईटी दिल्ली, नई दिल्ली
वेबसाइट- www.iitd.ac.in
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, तिरुचिरापल्ली
वेबसाइट- www.nitt.edu
- राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल
वेबसाइट- www.rgpv.ac.in
- इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट (डीम्ड यूनिवर्सिटी), इलाहाबाद
वेबसाइट- www.shiats.edu.in
- पेट्रोलियम कंजर्वेशन रिसर्च एसोसिएशन, नई दिल्ली
वेबसाइट- www.pcra.org

Wednesday, July 25, 2018

जंगल में संवारें करिअर

आज बढ़ती आबादी व निर्बाध रूप से हो रहे निर्माण कार्यों का कारण धरती से जंगल खत्म होते जा रहे हैं। जंगल धरती की ऐसी प्राकृतिक संपदा है जो धरती पर मनुष्यों व जीव-जंतुओं के जीवन को आसान व रहने योग्य बनाते हैं। जंगल सैकड़ों जीव जंतुओं को ही नहीं, जड़ी-बूटियों को भी आश्रय देते हैं। जंगल पर्यावरण के लिहाज से ही नहीं, किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद जरूरी है। दुनिया भर में जंगलों को बचाने पर बहुत जोर दिया जा रहा है, मुहिम चलाई जा रही है, पौधरोपण किया जा रहा है। इसके लिए खासतौर से ट्रेंड व्यक्तियों जैसे कि फारेस्टरी स्पेशलिस्ट, फारेस्टरी मैनेजमेंट एक्सपर्ट और फॉरेस्ट ऑफिसर्स की मांग बढ़ती जा रही है।

कार्य क्षेत्र


फॉरेस्टरी के अंतर्गत जंगलों की सुरक्षा, लकड़ी की जरुरतों को पूरा करने के लिए वृक्षों की खेती, उन्हें आग, बीमारी और अतिक्रमण रोकने से संबंधित कार्यों फारेस्टर को दक्षता प्राप्त होती है। इनके कार्यों में जीव-जंतुओं के बिहेवियर को समझना, पेड़-पौधों की साइंटिफिक तौर पर जांच करना, कीड़े-मकोड़ों से पौधों की सुरक्षा करना आदि प्रमुखता से शामिल होता है। इसके अलावा जानवरों, पेड़ों व प्रकृति की खूबसूरती को बचाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। 

शैक्षिक योग्यता


फारेस्टरी से संबंधित ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन और डिप्लोमा स्तर के कई कोर्स हैं। यहां तक कि आप फारेस्टरी में पीएचडी भी कर सकते हैं। ऐसे व्यक्ति जिन्होंने इंटरमीडिएट स्तर पर फिजिक्स, केमेस्ट्री, और बायोलॉजी की पढ़ाई की है वे बीएससी फारेस्टरी का कोर्स करने के बाद फारेस्ट मैनेजमेंट, कमर्शियल फारेस्टरी, फारेस्ट इकोनामिक्स, वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, वाइल्ड लाइफ साइंस, वेटेरिनरी साइंस आदि कोर्स कर सकते हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ फारेस्ट मैनेजमेंट, नेहरू नगर भोपाल फारेस्ट मैनेजमेंट का कोर्स कराता है। इसके बाद आप किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से पीएचडी भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं फॉरेस्ट्री में बैचलर डिग्री लेने के बाद आप यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित इंडियन फारेस्ट सर्विस की परीक्षा में भी शामिल हो सकते हैं।

अतिरिक्त योग्यता


इस प्रोफेशन में करिअर मजबूत बनाने के लिए आपको फिजिकली भी मजबूत होना जरूरी है, इसके साथ ही आपका प्रकृति प्रेमी होना इस प्रोफेशन में सोने पे सुहागा साबित होगा। अगर आप घूमने-फिरने के शौकीन हैं, एडवेंचर पसंद करते हैं और चुस्त दुरुस्त हैं तो यह आपके करिअर को और आगे ले जाने में मदद करेगी। आप में धैर्य और वैज्ञानिक चेतना, प्रकृति से लगाव जैसे गुण हैं तो आपको फरेस्टरी के अध्ययन और उससे संबंधित कार्य में आनंद आएगा।

कोर्स और संस्थान


इस प्रोफेशन में करिअर को बुलंदियों पर पहुंचाने के लिए छात्रों को बीएससी फारेस्टरी या एमएससी फारेस्टरी में प्रवेश लेना होता है। कई संस्थान इसमें प्रवेश के लिए परीक्षा का भी आयोजन करते हैं। 

1. Agricultural College And Research Institute Coimbatore, Tamil Nadu
2. Birsa Agricultural University, Kanke, Ranchi
3. College of Agricultural Engineering & Technology, Ch. Charan Singh Haryana Agricultural University, Hisar
4. College of Agricultural Engineering, Punjab Agriculture University, Hisar
5. College of Agricultural Engineering, Punjab Agriculture University, Ludhiana
6. College of Horticulture & Forestry, Solan Himachal Pradesh
7. Gujarat Agricultural University, Faculty of Agriculture, Sardar Krushinagar Banaskantha
8. Jawaharlal Nehru Krishi Vishwavidyalaya, Faculty of Agricultural Engineering, Krishi Nagar, Agartala, Jabalpur – फीचर डेस्क

रोजगार के अवसर अनेक


फारेस्टर्स का काम विशेषता के आधार पर ऑफिस, लेबोरेटरी या फील्ड कहीं भी हो सकता है। संबंधित कोर्स करने के बाद आप सरकारी और गैरसरकारी संगठनों के अतिरिक्त प्लांटेशन की फील्ड में कार्यरत कारपोरेट कंपनी में भी जॉब पा सकते हैं। इतना ही नहीं विभिन्न इंडस्ट्री में इंडीस्ट्रियल और एग्रीकल्चरल कंसल्टेंट के रूप में भी नौकरी के अवसर होते हैं। इसके अलावा अनेक शोध संस्थानों, जूलाजिकल पार्कों, आदि में नौकरी की संभावना होती है। इसके अतिरिक्त फारेस्ट और वाइल्ड लाइफ कन्वर्जेशन से संबंधित विशेषज्ञ के तौर पर आप काम कर सकते हैं।

फारेस्टर


एक सफल फारेसटर का काम जंगल और जंगली जीवों की सुरक्षा करना, लैंड स्केप मैनेजमेंट, जंगल व प्रकृति से संबंधित अध्ययन और रिपोर्ट को तैयार करना होता है।

डेंड्रोलाजिस्ट


डेंड्रोलाजिस्ट मुख्य रूप से लकड़ी और पेड़ों की साइंटिफिक स्टडी करते हैं। इनके कार्यों में पौधों को बीमारियों से बचाने का जिम्मा होता है। 

एंथोलाजिस्ट


इनका काम एनीमल बिहेवियर का वैज्ञानिक अध्ययन करना होता है। ये चिड़ियाघर, एक्वेरियम और लेबोरेटरी में जानवरों की हेल्दी हैबिट्स डिजाइन करने का काम भी करते हैं। इन्हें जानवरों का सबसे करीबी माना जाता है। 

एंटोमोलाजिस्ट


एंटोमोलाजिस्ट कीड़े मकोड़े से होने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए अध्ययन करते हैं। यह एक तरीके से पौधों की सुरक्षा का जिम्मा उठाते हैं।

सिल्वीकल्चररिस्ट


इनका काम जंगलों के विस्तार के लिए विभिन्न पौधों को तैयार करना है और उनके विकास की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर होती है।

फारेस्ट रेंज ऑफिसर


इनका काम जंगलों, अभ्यारण्य, गार्डेन की सुरक्षा करना होता है। इनका चयन इंडियन फारेस्ट सर्विसेस के तहत होता है।

जू क्यूरेटर


जू क्यूरेटर चिड़ियाघर में जानवरों की दिनचर्या को जांचता है और उनके कल्याण और प्रशासन के लिए जिम्मेदार होते हैं।  

Thursday, July 19, 2018

आर्कियोलॉजी में कॅरिअर

हजारों साल पहले मानव जीवन कैसा रहा होगा? किन-किन तरीकों से जीवन से जुड़े अवशेषों को बचाया जा सकता है? एक सभ्यता, दूसरी सभ्यता से कैसे अलग है? क्या हैं इनकी वजहें? ऐसे अनगिनत सवालों से सीधा सरोकार होता है आर्कियोलॉजिस्ट्स का। 

अगर आप भी देश की धरोहर और इतिहास में रुचि रखते हैं तो आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में एक अच्छे करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें आपको नित नई चीजें जानने को तो मिलेंगी ही, सैलरी भी अच्छी खासी है। आर्कियोलॉजी के अंतर्गत पुरातात्विक महत्व वाली जगहों का अध्ययन एवं प्रबंधन किया जाता है। 

हेरिटेज मैनेजमेंट के तहत पुरातात्विक स्थलों की खुदाई का कार्य संचालित किया जाता है और इस दौरान मिलने वाली वस्तुओं को संरक्षित कर उनकी उपयोगिता का निर्धारण किया जाता है। इसकी सहायता से घटनाओं का समय, महत्व आदि के बारे में जरूरी निष्कर्ष निकाले जाते हैं। 

जरूरी योग्यता


एक बेहतरीन आर्कियोलॉजिस्ट अथवा म्यूजियम प्रोफेशनल बनने के लिए प्लीस्टोसीन पीरियड अथवा क्लासिकल लैंग्वेज, मसलन पाली, अपभ्रंश, संस्कृत, अरेबियन भाषाओं में से किसी की जानकारी आपको कामयाबी की राह पर आगे ले जा सकती है।

पर्सनल स्किल


आर्कियोलॉजी ने केवल दिलचस्प विषय है बल्कि इसमें कार्य करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए यह चुनौतियों से भरा क्षेत्र भी है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए अच्छी विशेलषणात्मक क्षमता, तार्किक सोच, कार्य के प्रति समर्पण जैसे महत्वपूर्ण गुण जरूर होेने चाहिए। कला की समझ और उसकी पहचान भी आपको औरों से बेहतर बनाने में मदद करेगी। इसके अलावा आप में चीजों और उस देशकाल को जानने की ललक भी होनी चाहिए। 

संभावनाएं व वेतन


आर्कियोलॉजिस्ट की मांग सरकारी और निजी हर क्षेत्र में है। इन दिनों कॉरपोरेट हाउसेज में भी नियुक्ति हो रही है। वे अपने रिकॉर्ड्स के रख-रखाव के लिए एक्सपर्ट की नियुक्ति करते हैं। इसी तरह रिचर्स के लिए भी इसकी मांग रहती है। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया में आर्कियोलॉजिस्ट पदों के लिए संघ लोक सेवा आयोग हर वर्ष परीक्षा आयोजित करता है। राज्यों के आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट में भी असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट की मांग भी रहती है। वहीं नेट क्वालीफाई करके लेक्चररशिप भी कर सकते हैं। आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में किसी भी पद पर न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपए है। उसके बाद वेतन का निर्धारण पद और अनुभव के आधार पर होता है।

कोर्सेज


आर्कियोलॉजी से जुड़े रेगुलर कोर्स जैसे पोस्ट ग्रेजुएशन, एमफिल या पीएचडी देश के अलग-अलग संस्थानों में संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि हेरिटेज मैनेजमेंट और आर्किटेक्चरल कंजरवेशन से जुड़े कोर्स केवल गिने-चुने संस्थानों में ही पढ़ाए जा रहे हैं। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया की फंक्शनल बॉडी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी में दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स की पढ़ाई होती है। अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के आधार पर इस कोर्स में दाखिला दिया जाता है। इसी तरह गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी नई दिल्ली से एफिलिएटेड इंस्टीट्यूट, दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज रिसर्च एंड मैनेजमेंट, आर्कियोलॉजी और हेरिटेज मैनेजमेंट में दो वर्षीय मास्टर कोर्स का संचालन होता  

Wednesday, July 18, 2018

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में करियर

एक व्यवसाय के रुप में पुस्तकालयाध्यक्षता (लाइब्रेरियनशिप) रोजगार के विविध अवसर प्रदान करती है। पुस्तकालय तथा सूचना-विज्ञान में आज करियर की अनेक संभावनाएं हैं। अर्हताप्राप्त लोगों को विभिन्न पुस्तकालयों तथा सूचना केन्द्रों में रोजगार दिया जाता है। प्रशिक्षित पुस्तकालय व्यक्ति अध्यापक तथा लाइब्रेरियन दोनों रूप में रोजगार के अवसर तलाश कर सकते हैं। वास्तव में, अपनी रुचि तथा पृष्ठभूमि के अनुरूप पुस्तकालय की प्रकृति चयन करना संभव है। लाइब्रेरियनशिप में पदनाम पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन), प्रलेखन अधिकारी, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, उप पुस्तकालयाध्यक्ष, वैज्ञानिक (पुस्तकालय विज्ञान/प्रलेखन), पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, ज्ञान प्रबंधक/अधिकारी सूचना कार्यपालक, निदेशक/सूचना सेवा अध्यक्ष, सूचना अधिकारी तथा सूचना विश्लेषक हो सकते हैं। 

• स्कूल, 
• कॉलेज, विश्वविद्यालयों में; 
• केन्द्रीय सरकारी पुस्तकालयों में; 
• बैंकों के प्रशिक्षण केन्द्रों में; 
• राष्ट्रीय संग्रहालय तथा अभिलेखागारों में; 
• विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों में; 
• आई.सी.ए.आर., सी.एस.आई.आर., डी.आर.डी.ओ., आई.सी.एस.एस.आर., आई.सी.एच.आर, आई.सी.एम.आर, आई.सी.एफ.आर.ई. आदि जैसे अनुसंधान तथा विकास केंद्रों में; 
• विदेशी दूतावासों तथा उच्चायोगों में; 
• विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनेस्को, संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व बैंक आदि जैसे अंतर्राष्ट्रीय केन्द्रों में; 
• मंत्रालयों तथा अन्य सरकारी विभागों के पुस्तकालयों में; 
• राष्ट्रीय स्तर के प्रलेखन केंद्रों में; 
• पुस्तकालय नेटवर्क में; 
• समाचार पत्रों के पुस्तकालय में ; 
• न्यूज चैनल्स में; 
• रेडियो स्टेशन के पुस्तकालयों में; 
• सूचना प्रदाता संस्थाओं में इंडेक्स, सार संदर्भिका आदि तैयार करने वाली प्रकाशन कंपनियों में डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया आदि जैसी विभिन्न डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना में 
• प्रशिक्षण अकादमियों में

विस्तृत तथा विशेष ज्ञान प्रदान करने में पुस्तकालयों की भूमिका को व्यापक रूप में स्वीकार किया जाता है। आज के संदर्भ में पुस्तकालयों को दो विशिष्ट भूमिकाएं निभानी हैं। पहली, सूचना तथा ज्ञान के स्थानीय केंद्र के रूप में कार्य करने की और दूसरी राष्ट्रीय एवं विश्व ज्ञान के स्थानीय केंद्र के रूप में। राष्ट्रीय आयोग के विचाराधीन कुछ मामले निम्नलिखित हैं : 

• पुस्तकालयों का सांस्थानिक ढांचा नेटवर्किंग
• शिक्षा, प्रशिक्षण तथा अनुसंधान पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण एवं कम्प्यूटरीकरण, 
• निजी तथा व्यक्तिगत संकलनों का रख-रखाव, और 
• बदल रही आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्टाफ की आवश्यकताएं 

इस आयोग ने, भारत में पुस्तकालय नेटवर्क को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय पुस्तकालय आयोग का गठन करने की सिफारिश की है। संस्कृति विभाग ने एक केन्द्रीय क्षेत्र योजना के रुप में एक राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन (एनएमएल) स्थापित करने का प्रस्ताव किया है। एन.एम.एल. संस्कृति विभाग के अधीन पुस्तकालयों को शामिल करेगा और इसके कार्य निम्नलिखित होंगे। राष्ट्रीय पुस्तकालय गणना, संस्कृति विभाग के अधीन पुस्तकालयों की नेटवर्किंग सहित आधुनिकीकरण, ज्ञान केंद्रों तथा डिजिटल पुस्तकालयों की स्थापना करना। हाल ही में राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन के अधीन देश भर में इंटरनेट की सुविधा युक्त कम्प्यूटर वाले 7000 पुस्तकालय स्थापित करने का प्रस्ताव है।

यह सिफारिश की गई थी कि पुस्तकालय एवं सूचना सहायक के स्तर पर प्रारंभिक भर्ती सीधे की जाए। इसके लिए योग्यता अपेक्षा स्नातक तथा बीएलआईएससी डिग्री होगी। 

इस तरह पुस्तकालयाध्यक्षता (लाइब्रेरियनशिप) के अवसर उज्जवल हैं। पुस्तकालय एवं सूचना-विज्ञान (एलआईएस) में करियर बहु-आयामी, उज्जवलशील है और समृद्धि तथा प्रगति के समाज के ज्ञान आधार को समृद्ध करने वाला है। 

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में पाठ्यक्रम


• पुस्तकालय एव सूचना विज्ञान में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (सीएलआईएससी या सी.लिब.) पात्रता 10+2
पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में डिप्लोमा पाठ्यक्रम (डी.एल.आई.एस.सी. या डी.लिब) पात्रता : 10+2 
• पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में स्नातक (बी.एल.आई.एस.सी. या बी.लिब.)पात्रता : किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय में किसी भी विषय में स्नातक ।
• पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में मास्टर (एम.एल.आई.एस.सी. या एम. लिब.) पात्रता : किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से बी.एल.आई.एस.सी अथवा बी.लिब. 
• पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में एम.फिल. पात्रता : किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से एम.एल.आई.एस.सी. अथवा एम.लिब. 
• पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में पीएचडी पात्रता : किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से एम.एल.आई.एस.सी. 

विभिन्न पाठ्यक्रमों में पाठ्यक्रम के नाम तथा अर्हता अंक अलग-अलग विश्वविद्यालय में अलग-अलग हो सकते हैं। पहले इस विषय को पुस्तकालय विज्ञान कहा जाता था किंतु अब सूचना के विस्तार के कारण पुस्तकालय विज्ञान सूचना विज्ञान में परिवर्तित हो रहा है। 

कुछ विश्वविद्यालयों ने पाठ्यक्रम के नाम में यह शब्द जोड़ा है, किंतु पुस्तकालय शब्द नहीं हटाया है। इस तरह कुछ विश्वविद्यालय निम्नलिखित डिग्री प्रदान करते हैं- पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में स्नातक (बी.एल.आई.एस.सी.) और पुस्तकालय तथा सूचना विज्ञान में मास्टर (एम-एल.आई.एस.सी.), पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में एम.फिल और पुस्तकालय तथा सूचना विज्ञान में पीएचडी। 

कुछ विश्वविद्यालय निम्नलिखित डिग्री प्रदान करते हैं : पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक (बी.लिब.) और पुस्तकालय विज्ञान में मास्टर (एम.लिब.) पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में एम.फिल और पुस्तकालय विज्ञान में पीएचडी। 

सूचना तैयार करने, भंडार करने, उसमें सुधार करने तथा उसे प्रचार-प्रसार के लिए पुस्तकालयों तथा सूचना केन्दों में अब कम्प्यूटर तथा सूचना प्रौद्योगिकी का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर.) नई दिल्ली के अधीन निस्केयर सूचना विज्ञान में एसोशिएटशिप (एआईएस) प्रदान करने के लिए एक दो वर्षीय कार्यक्रम संचालित करता है और प्रलेखन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (डीआरटीसी), भारतीय सांख्यिकी संस्थान (बंगलौर) में प्रलेखन तथा सूचना विज्ञान में एसोशिएटशिप (एडीईएस) चलाता है। यह अवार्ड एमएलआईएससी डिग्री के समकक्ष रूप में मान्यताप्राप्त भी है। इन दोनों पाठ्यक्रमों की रोजगार बाजार में अच्छी प्रतिष्ठा है। पुस्तकालयों में कम्प्यूटर तथा सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते हुए प्रयोग को ध्यान में रखते हुए भारत में भी कई विश्वविद्यालयों ने मुख्य रुप से सूचना प्रौद्योगिकी तथा कम्प्यूटर पर बल देते हुए विभिन्न पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं। 

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में पाठ्यक्रम (एलआईएस) प्रस्तुत करने वाले विश्वविद्यालय


लगभग 80 विश्वविद्यालय विभाग एलआईएस पाठ्यक्रम चलाते हैं। यह पाठ्यक्रम सुदूर अध्ययन पद्धति द्वारा भी उपलब्ध है। दो संस्कृत विश्वविद्यालय अर्थात के.एस. दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय (बिहार) और सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (वाराणसी) क्रमशः पुस्तकालय विज्ञान शास्त्री (9 महीने) और ग्रंथालय विज्ञान शास्त्री (एक वर्षीय) पाठ्यक्रम चलाते हैं। संस्कृत भाषा का ज्ञान एक अनिवार्य अपेक्षा है। एलआईएस निम्नलिखित विश्वविद्यालयों/संस्थानों में उपलब्ध हैं: 

• अलगप्पा विश्वविद्यालय, कराइकुड़ी
• अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
• इलाहाबाद विश्वविद्यालय 
• अन्नामलाई विश्वविद्यालय अन्नालाईनगर
• अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा
• बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ
• बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
• बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी
• देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
• डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा
• डॉ. हरिसिंह गौड़ विश्वविद्यालय, सागर
• गुलबर्ग विश्वविद्यालय, गुलबर्ग
• गुरू घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर
• गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर
• डॉ. हरिसिंह गौड़ विश्वविद्यालय, सागर
• एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर-गढ़वाल
• जादवपुर विश्वविद्यालय, कलकत्ता
• जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
• जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर
• कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़
• जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
• कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र
• नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
• पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय, शिलांग
• पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर
• पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
• पटना विश्वविद्यालय, पटना
• पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला
• रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर
• सम्बलपुर विश्वविद्यालय, सम्बलपुर
• एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, मुंबई
• दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
• हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद
• जम्मू विश्वविद्यालय जम्मू (तवी) 
• कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर
• लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
• मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नै
• मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर
• पुणे विश्वविद्यालय, पुणे
• राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
• विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन
• उ.प्र. राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद (सुदूर शिक्षा) 
• इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (सुदूर शिक्षा) 

पुस्तकालय तथा सूचना व्यवसाय में वेतन


वेतन संगठनों की प्रकृति के आधार पर भिन्न-भिन्न है। अनेक कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों ने पुस्तकालय-स्टाफ के लिए विअआ वेतनमान लागू किए हैं। केन्द्रीय सरकार की बड़ी संस्थापनाओं की संघटक इकाइयां जैसे वैज्ञानिक एवं औद्योगिकी अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वैज्ञानिक स्टाफ पर यथा लागू वेतनमान देती है। कार्य-निष्पादन के आवधिक अंतराल पर मूल्यांकन के आधार पर उन्नति के अवसर इस कार्य को आकर्षक बनाते हैं।

अच्छा शैक्षिक रिकार्ड तथा कम्प्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी में पर्याप्त कौशल रखने वाले व्यक्ति इस व्यवसाय में आकर्षक करियर बना सकते हैं