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Showing posts from April, 2018

बाॅयोफिजिक्स में कैरियर

बाॅयोफिजिक्स उभरता हुआ क्षेत्र है और इसमें जॉब की संभावनाएं भी काफी अच्छी हैं। कैसी मिल सकती है इस फील्ड में एंट्री और क्या है फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट, आइए नजर डालते हैं। बाॅयोफिजिक्स, फिजिक्स और बाॅयोलॉजी के बीच का ब्रिज है, जिसमें जैविक प्रक्रिया में भौतिकी के उपयोग का अध्ययन किया जाता है। इसके अंतर्गत मोल्यूक्यूलर बाॅयोफिजिक्स, फिजियोलॉजिकल बाॅयोफिजिक्स, मेडिकल फिजिक्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, जीन- प्रोटीन इंजीनियरिंग, बायो इंफॉर्मेटिक्स आदि का अध्ययन किया जाता है, जिनके विकास से मेडिसिन और मेडिकल तकनीक के विकास को दिशा मिलती है। इसमें करियर के विषय के बारे में लखनऊ के आईटी कॉलेज के बायोफिजिक्स के प्रोफेसर डॉ रवि कुमार बता रहे हैं... बीमारियों के इलाज में मिलती है मदद बाॅयोफिजिक्स से जैविक स्तर पर कैंसर सहित विभिन्न बीमारियों के बढ़ने के संबंध में होने वाले अध्ययन में मदद मिलती है। मोल्यूक्यूलर बाॅयोफिजिक्स का दूसरा क्षेत्र है, जिसमें सैद्धांतिक और कम्प्यूटेशनल तकनीक के प्रयोग से अणु के व्यवहार का प्रतिरूप तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल बीमारियों के अध्ययन और उनके इलाज के काम आते हैं। बाॅय…

आधारिक संरचना प्रबंधन में कॅरियर

हमारा देश बहुत तेजी से आर्थिक विकास की डगर पर आगे बढ़ रहा है। क्रयशक्ति क्षमता के आधार पर तो भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। इसे देखते हुए अपने देश के विकास को गति देने के लिए आधारिक संरचना का द्रुत गति से विकास बहुत जरूरी हो गया है। इस प्रक्रिया में, एक ओर शहरी आधारिक संरचना का विकास तो दूसरी ओर ग्रामीण आधारिक संरचना का विकास जरूरी है। इसमें उन परिष्कृत आधारिक संरचना का विकास तथा प्रबंधन तकनीकों का पता लगाने और उन्हें लागू करने की जरूरत है जो आधुनिकीकरण की बदलती हुई माँग को पूरा करें। दूसरी ओर गाँवों तथा ग्रामीण जनसंख्या को शेष देश से जोड़ने की आवश्यकता है। ग्रामीण परिवहन, ग्रामीण आवास, विद्युत वितरण तथा सिंचाई सुविधाओं की एक सम्पूर्ण नए दृष्टिकोण से समीक्षा की जानी चाहिए। गौरतलब है कि सार्वजनिक आधारिक संरचना एवं सार्वजनिक-निजी सहभागिता वाली आधारिक संरचना के अतिरिक्त हमारे पास विकसित विश्व के अनुरूप ढलती निजी आधारिक संरचनाएँ जैसे मकान, दुकान, कार्यालय तथा मॉल हैं। इन सबको देखते हुए हमारे देश की केन्द्र सरकार ने निजी संस्थानों तथा विदेशी प्रत्यक्ष नि…

उगाएं धन की वनस्पति

पौधे और फूल न केवल हमारे उद्यानों में सुंदरता फैलाते हैं और हमारे जीवन को ताजगी देते हैं बल्कि हमारी बुनियादी आवश्यकताओं तथा औषधियों के लिए महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक सामग्रियों के रूप में कार्य करते हैं। पौधे ऐसे रासायनिक कारखाने होते हैं जो मनुष्य के लिए उपयोगी सभी प्रकार के उत्पाद देते हैं। भोजन के अतिरिक्त पौधे कागज, भवन सामग्री, द्रव्यों, गोंद, कपड़ों, औषधियों और कई अन्य उत्पादों के लिए कच्चा माल देते हैं। उदाहरण के लिए एलोवेरा पौधा क्रीम तथा चिकित्सा द्रव्यों में प्रयोग में लाया जाता है। इन सब बातों का अध्ययन वनस्पति विज्ञान में किया जाता है। वनस्पति विज्ञान में वनस्पति जगत में पाए जाने वाले सब पेड़-पौधों का अध्ययन होता है। जीव विज्ञान का यह एक प्रमुख अंग है। दूसरा प्रमुख अंग प्राणी विज्ञान है। सभी जीवों को जीवन निर्वाह करने, वृद्धि करने, जीवित रहने और जनन के लिए भोजन या ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। यह ऊर्जा सूर्य से प्राप्त होती है। सूर्य में परमाणु के विखंडन या तरंगों के रूप में चलकर यह ऊर्जा पृथ्वी पर आती है। केवल पौधों में ही इस ऊर्जा के ग्रहण करने की क्षमता विद्यमान है। पृथ्वी क…

इम्यूनोलॉजी में पीएचडी

हमारे शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए इसके अंदर सक्रिय प्रतिरक्षा तंत्र या इम्यून सिस्टम से जुड़ी बारीकियों का अध्ययन करने में रूचि रखने वाले कर सकते हैं, इम्यूनोलॉजी में पीएचडी के लिए आवेदन। बॉयोलॉजी के इस परिष्कृत क्षेत्र में शोध के लिए नई दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी ने आवेदन मंगवाए हैं। नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी नई दिल्ली में जेएनयू कैंपस के पास ही स्थित है। इसके रिसर्च प्रोग्राम में आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आवेदन ऑनलाइन है। अंतिम तिथि 31 दिसंबर है।
रिसर्च के विकल्प नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी ने जिन एरियाज में रिसर्च के लिए पीएचडी के प्रस्ताव मंगवाए हैं, वे इस प्रकार हैं- इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी, जेनेटिक्स मॉलिक्यूलर एंड सेलुलर बायोलॉजी, केमिकल, स्ट्रेक्चरल एंड कंप्यूटेशनल बायोलॉजी, रीप्रोडक्शन एंड डेवलपमेंट। रिसर्च के ये सभी एरियाज इंटरडिसीप्लीनरी एरियाज हैं। रूचि होने पर आप अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। क्या है योग्यता आवेदक ने साइंस की ब्रांच में एमएससी या एमटेक या एमबीबीएस या एमवीएससी या एमफार्म या समकक्ष कोर्स किया हो। बारहवीं और ग्रेजुएशन में…

सिविल इंजीनियरिंग में करियर

आज देश प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ रहा है। बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों में भी विकास की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। रियल एस्टेट के कारोबार में आई चमक ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रोशन किया है। इन्हीं में से एक प्रमुख क्षेत्र ‘सिविल इंजीनियिरग’ भी है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कदम रखने वाले अधिकांश छात्र सिविल इंजीनियरिंग की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। वह रियल एस्टेट के अलावा भी कई सारे कंट्रक्शन कार्य जैसे पुल निर्माण, सड़कों की रूपरेखा, एयरपोर्ट, ड्रम, सीवेज सिस्टम आदि को अपने कौशल द्वारा आगे ले जाने का कार्य कर रहे हैं। क्या है सिविल इंजीनियरिंग?जब भी कोई योजना बनती है तो उसके लिए पहले प्लानिंग, डिजाइनिंग व संरचनात्मक कार्यों से लेकर रिसर्च एवं सॉल्यूशन तैयार करने का कार्य किया जाता है। यह कार्य किसी सामान्य व्यक्ति से न कराकर प्रोफेशनल लोगों से ही कराया जाता है, जो सिविल इंजीनियरों की श्रेणी में आते हैं। यह पूरी पद्धति ‘सिविल इंजीनियरिंग’ कहलाती है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षित लोगों को किसी प्रोजेक्ट, कंस्ट्रक्शन या मेंटेनेंस के ऊपर कार्य करना होता है। साथ ही इस कार्य के लिए उनक…

कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में करियर

आज के दौर में संचार जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। चाहे मोबाइल हो या टीवी यह हर इनसान की जरूरत है। क्या आप ऐसे जीवन की कल्पना कर सकते हैं जहाँ मोबाइल काम ना करे। अपने मन पंसद प्रोग्रामों को देखने के लिए आपके पास टेलीविजन ही ना हो। ऐसे जीवन की कल्पना करना भी आपको कितना डरावना लगता है ना। 

आपकी सुविधाओं को हकीकत में बदलने का काम किया है इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन इंजीनियरों ने। इनकी कला की बदौलत ही आज हर व्यक्ति पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ है। अगर आप चाहें तो इस क्षेत्र में अपना भविष्य तलाश सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग का क्षेत्र बहुत ही विस्तृत व चुनौतीपूर्ण है। इसके अंतर्गत माइक्रोवेव और ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, डिजिटल सिस्टंस, सिग्नल प्रोसेसिंग, टेलीकम्युनिकेशन, एडवांस्ड कम्युनिकेशन, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इंजीनियरिंग की यह शाखा रोजमर्रा की जिंदगी में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। साथ ही इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल, पॉवर सिस्टम ऑपरेशंस, कम्युनिकेशन सिस्टम आदि क्षेत्रों में भी इसके महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता।

इस क्षेत्र में करियर बनाने की…

एनर्जी इंजीनियरिंग में करियर

एनर्जी इंजीनियरिंग का कोर्स इन दिनों काफी पॉपुलर हो रहा है। यदि भविष्य की बात करें, तो इसकी मांग आगे भी बनी रहेगी। यदि आप इससे संबंधित कोर्स कर लेते हैं, तो करियर के लिहाज से बेहतर हो सकता है। योग्यता व कोर्स इस क्षेत्र में करियर की संभावनाएं तलाशने वाले छात्रों को बीई या बीटेक करने के लिए 12वीं में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान व गणित होना आवश्यक है। अगर आप चाहें, तो बीटेक करने के बाद एमटेक भी कर सकते हैं। अधिकतर संस्थानों में एडमिशन प्रवेश परीक्षाओं द्वारा दिया जाता है। वैसे एनर्जी में दक्षता या स्पेशलाइजेशन अंडर ग्रेजुएट स्तर पर उतना लोकप्रिय नहीं है, जितना पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर। मास्टर्स कोर्स में ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों और ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों में सुधार पर अधिक जोर दिया जाता है। संभावनाएं जलवायु में बदलाव और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में बढी जागरूकता के चलते नौकरियों के बाजार में ऊर्जा इंजीनियरिंग की बहुत मांग है। विभिन्न सरकारी संस्थानों, खासकर विभिन्न राज्यों की नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसियों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की काफी मांग है। सरकार ने उद्योगों के लिए अब ऊर्जा …

पॉलिटेक्निक है राइट ऑप्शन

10वीं-12वींके बाद टेक्निकल कोर्स में एडमिशन लेने के इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए पॉलिटेक्निक राइट ऑप्शन हो सकता है। वैसे, आज के जॉब मार्केट में पॉलिटेक्निक से जुड़े स्टूडेंट्स की जबरदस्त डिमांड है। आइए जानते हैं, पॉलिटेक्निक में कैसे एडमिशन लिया जा सकता है और क्या हैं इसके फायदे? स्कूल की दुनिया से बाहर निकलते ही हर साल हजारों स्टूडेंट्स इंजीनियर बनने का सपना देखने लगते हैं, लेकिन कई स्टूडेंट्स महंगी फीस और अच्छे मा‌र्क्स नहीं आने की वजह से बड़े संस्थानों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का सपना पूरा नहींकर पाते। ऐसे में 12वीं के बाद बीटेक की चार साल की डिग्री की बजाय 10वीं या 12वीं के बाद तीन साल का डिप्लोमा करके भी जॉब मार्केट में कदम रखने का ऑप्शन मौजूद है। ऐसे स्टूडेंट्स के लिए पॉलिटेक्निक सुनहरा अवसर लेकर आता है। यह उन्हें तकनीकी और व्यावसायिक कोर्स का अवसर प्रदान करता है। दरअसल, ये कोर्स ऐसे होते हैं, जिसे पूरा करने के बाद खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए या फिर अच्छी जगह नौकरी करने की स्किल से लैस करता है।  क्या है पॉलिटेक्निक? आमतौर पर पॉलिटेक्निक ऑ‌र्ट्स और साइंस से संबंधित डिप्लोमा और सर्ट…

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में करियर

मैकेनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैथमेटिक्स में दिलचस्पी है, तो ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के साथ करियर को रफ्तार दे सकते हैं। अगर आप इनोवेटिव और क्रिएटिव माइंडेड हैं, तो ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का करियर अपना सकते हैं। इस फील्ड में शानदार पे-पैकेज के अलावा, जॉब की भरपूर संभावनाएं हैं। जानिए इस इनोवेटिव फील्ड में कैसे मिल सकती है आपको एंट्री.. 

भारतीयों की Rय शक्ति और गाç़डयों की सेल्स बढ़ने से ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से उभरती हुई इंडस्ट्री बन गया है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। कहते हैं कि किसी भी ऑटो कंपनी में एक जॉब क्रिएटिव होने का मतलब है, तीन से पांच इनडायरेक्ट जॉब ऑप्शंस का खुलना। जिस तरह से मार्केट में देशी-विदेशी कंपनियों की नई इनोवेटिव कारें लॉन्च हो रही हैं, उसे देखते हुए ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। अगर आपको भी कार का पैशन है। मैकेनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैथमेटिक्स में दिलचस्पी है, तो ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के साथ करियर को रफ्तार दे सकते हैं। 

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग

एक ऑटोमोबाइल इंजीनियर पर कई प्रकार की जिम्मेदारियां होत…

न्यूट्रिशनिस्ट में करियर

संतुलित डाइट के महत्व से तो हर कोई वाकिफ है लेकिन अपनी उम्र, शारीरिक क्षमता, कार्य की प्रकृति और दैनिक रुटीन के हिसाब से डाइट कैसी होनी चाहिए, इसको लेकर अध‍िकांश लोग भ्रमित रहते हैं। सही डाइट से जुड़ी हमारी शंकाएं दूर करते हैं डायटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट। अगर आप हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ रोमांचक करियर चाहते हैं, तो यह फील्ड आपके लिए बढ़िया है।  लोगों की बदली जीवनशैली और खानपान की खराब आदतों का सबसे ज्यादा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसीलिए हाल के दिनों में लोगों के बीच बैलेंस्ड डाइट को लेकर जागरूकता बढ़ी है। हालांकि बैलेंस्ड डाइट व्यक्ति विशेष की अपनी जरूरतों पर आधारित होती है, इसीलिए इसे लेकर लोगों में अक्सर भ्रम भी रहता है। इसी भ्रम को दूर करके फूड न्यूट्रिएंट्स के हिसाब से हमें सुझाव देते हैं डायटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट। अगर आपको भी फूड साइंस और न्यूट्रिशन में रुचि है, तो आप इसमें करियर प्लान कर सकते हैं। इस तरह मिलेगी पैशन से कामयाबी क्या है न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स? यह फूड साइंस से जुड़ा एक ऐसा कोर्स है, जिसमें फूड न्यूट्रिएंट्स के बारे में अध्ययन किया जाता है। इसी के आधार पर बड़े स…

ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मौका

अगर आप रेडियो या टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग इंजीनियरिंग में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो आप इसके लिए ज्यादा सोचिए मत। आपको बता दें कि ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की ही ब्रांच है। इसे रेडियो, टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग में सिग्नल स्ट्रेंथ, साउंड व कलर्स रेंज के लिए डिवाइस की देखरेख के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड ऑडियो इंजीनियरिंग भी शामिल हैं। वहीं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के दो प्रमुख एरिया, ऑडियो इंजीनियरिंग और रेडियो फ्रीक्वेंसी इंजीनियरिंग भी ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग से संबंधित हैं। योग्यता ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग कोर्स में मुख्य विषय के तौर पर नहीं पढ़ाया जाता है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड ऑडियो इंजीनियरिंग में चार वर्षीय बैचलर्स कोर्स कर चुके उम्मीदवार पीजी स्तर पर इसमें स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। वहीं, सीधे ब्रॉडकास्टिंग फर्म्स के स…

सिविल इंजीनियरिंग में करियर

आज देश प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ रहा है। बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों में भी विकास की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। रियल एस्टेट के कारोबार में आई चमक ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रोशन किया है। इन्हीं में से एक प्रमुख क्षेत्र ‘सिविल इंजीनियिरग’ भी है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कदम रखने वाले अधिकांश छात्र सिविल इंजीनियरिंग की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। वह रियल एस्टेट के अलावा भी कई सारे कंट्रक्शन कार्य जैसे पुल निर्माण, सड़कों की रूपरेखा, एयरपोर्ट, ड्रम, सीवेज सिस्टम आदि को अपने कौशल द्वारा आगे ले जाने का कार्य कर रहे हैं। क्या है सिविल इंजीनियरिंग?जब भी कोई योजना बनती है तो उसके लिए पहले प्लानिंग, डिजाइनिंग व संरचनात्मक कार्यों से लेकर रिसर्च एवं सॉल्यूशन तैयार करने का कार्य किया जाता है। यह कार्य किसी सामान्य व्यक्ति से न कराकर प्रोफेशनल लोगों से ही कराया जाता है, जो सिविल इंजीनियरों की श्रेणी में आते हैं। यह पूरी पद्धति ‘सिविल इंजीनियरिंग’ कहलाती है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षित लोगों को किसी प्रोजेक्ट, कंस्ट्रक्शन या मेंटेनेंस के ऊपर कार्य करना होता है। साथ ही इस कार्य के लिए उनक…

साइबर एक्सपर्ट्स में कैरियर

आज लगभग हर क्षेत्र में इंटरनेट या कम्प्यूटर का उपयोग होने लगा है और इस पर लोगों की निर्भरता भी लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन कुछ लोग इसका बेजा इस्तेमाल भी करने लगे हैं। हैकर्स दूसरों के अकाउंट और महत्वपूर्ण डाटा को आसानी से उड़ा ले जाते हैं। हालांकि शुरू-शुरू के दिनों में इंटरनेट का इस्तेमाल महज रिसर्च और महत्वपूर्ण सूचनाओं को हासिल करने के उद्द्ददेश्य से ही किया जा रहा था, पर अब जिस तरह से इंटरनेट का प्रयोग तेजी से बढ़ने लगा है, कुछ उसी रफ्तार से साइबर क्राइम भी बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए साइबर लॉ और इसके एक्सपर्ट्स की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है।

साइबर क्राइमपूरी दुनिया में साइबर स्पेस का अपना एक कानून है, जिसका मकसद इंटरनेट के माध्यम से होने वाले अपराधों पर लगाम लगाना है। इंटरनेट के जरिए अंजाम दिए जाने वाले अपराधों के हाइटेक रूप को ही साइबर क्राइम कहा जाता है। इसके अंतर्गत इंटरनेट द्वारा क्रेडिट कार्ड चोरी, ब्लैकमेलिंग, स्टॉकिंग, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क  फ्रॉड, पोर्नोग्राफी आदि जैसी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। साइबर लॉ एक्सपर्ट्स की बढ़ती डिमांडइन दिनों में जैसे-जैसे कम्प्…