Monday, August 13, 2018

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस में करियर

एविएशन का नाम आते ही आसमान में उड़ने का मन करता है लेकिन यदि आप बनाना चाहते हो हो एविएशन में अपना करियर तो आप कहाँ पर अपनी लाइफ बना सकते हो। एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) में हो रहे लगातार विस्तार से रोजगार के अवसरों में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में बहुत से अवसर हैं कई लोग सोचते हैं केवल पायलट या एयर होस्टेस तक ही एविएशन में जॉब सीमित हैं,  लेकिन ऐसा कतई नही है क्योंकि इनके इलावा भी आप एविएशन में अपना करियर बना सकते हो। इसी लाइन में में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर (AME) भी बहुत अच्छा विकल्प है।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर की कार्य प्रकृति कैसी है उसका क्या काम होता है: किसी भी जहाज की तकनीकी जिम्मेदारी एएमई के ऊपर होती है। हर उड़ान के पहले एएमई जहाज का पूरी तरह से निरीक्षण करता है और सर्टिफिकेट जारी करता है कि जहाज उड़ान भरने को तैयार है। इस काम के लिए उसके पास पूरी तकनीकी टीम होती है। कोई भी विमान एएमई के फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना उड़ान नहीं भर सकता। गौरतलब है कि एक हवाईजहाज के पीछे करीब 15-20 इंजीनियर काम करते हैं। इसी से इनकी जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता है।

कैसे बन सकते हो आप एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बन सकते हो: जैसे की पायलट बनने के लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है वैसे ही एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनने के लिए भी लाइसेंस लेना पड़ता है। यह लाइसेंस डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन द्वारा प्रदान किया जाता है। कोई भी संस्थान, जो इससे संबंधित कोर्स कराता है, उसे भारत सरकार के विमानन मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले डीजीसीए से इसके लिए अनुमति लेनी होती है। जो इंस्टिट्यूट इससे मान्यता प्राप्त हैं उनसे भी आप ये लाइसेंस हासिल कर सकते हैं।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनने के लिए क्या शैक्षणिक योग्यता की आवश्कयता होनी चाहिए: जो विद्यार्थी इस कोर्स के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथेमेटिक्स विषयों की पढ़ाई जरूरी है। पीसीएम से 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग से संबंधित पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते हैं। कोर्स के दौरान मैकेनिकल इंजीनियरिंग और वैमानिकी की विभिन्न शाखाओं के बारे में जानकारी दी जाती है।
एविएशन सेक्टर में कहाँ मिलेंगे अवसर: ऐसे तकनीकी प्रोफेशनल्स के लिए देश-विदेश में सभी जगह मौके हैं। एयर इंडिया, इंडिगो, इंडियन एयरलाइन्स, जेट एयरवेज, स्पाइस जेट, गो एयर जैसे एयरलाइंस में तो मौके मिलते ही हैं, इसके अलावा देश के तमाम हवाईअड्डों और सरकारी उड्डयन विभागों में भी रोजगार के बेहतरीन अवसर उपलब्ध होते हैं। भारत में ही करीब 450 कंपनियां हैं, जो इस क्षेत्र में रोजगार प्रदान करती हैं। एएमई का शुरुआती वेतन 20-30 हजार हो सकता है, जिसमें अनुभव और विशेष शिक्षा के साथ बढ़ोतरी होती जाती है। इसके साथ-2 आप विदेशी या प्राइवेट कंपनियो जो प्राइवेट एयरक्राफ्ट की सुविधा उपलब्ध कराती उनमे भी आप अपना करियर चुन सकते हो
देश में कौन कौनसे मुख्य संस्थान हैं जहाँ पर एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर के लिए कोर्स किया जा सकता है: जो संस्थान संबंधित कोर्स कराने का इच्छुक होता है, उसको डीजीसीए से मान्यता लेनी होती है। ऐसे कुछ प्रमुख संस्थान हैं-
  • जेआरएन इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
  • भारत इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स, पटना एयरपोर्ट, पटना
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स साइंस, कोलकाता
  • एकेडमी ऑफ एविएशन इंजीनियरिंग, बेंगलुरु
  • आंध्र प्रदेश एविएशन एकेडमी, हैदराबाद

Tuesday, August 7, 2018

अर्थसाइंस से बनाएं सुनहरा भविष्य

अर्थसाइंस एक तरह से जियोलॉजी की ही अगली कड़ी है। इस कोर्स को बाजार की आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर ही तैयार किया गया है,
पृथ्वी के उदगम, विकास और इसके अंदर और बाहर चलने वाली हलचलों को जानना खासा रोचक है। क्या अन्य ग्रहों पर कोई जीवन है? चन्द्रमा, मंगल, बृहस्पति और अन्य ग्रहों पर क्या संसाधन उपलब्ध हैं? इनमें क्या बदलाव आ रहे हैं? सिकुड़ते ग्लेशियरों का महासागरों और जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? इस तरह की तमाम बातें और अनसुलझी पहेलियों के बारे में डाटा एकत्र करने का काम भूवैज्ञानिक करते हैं, उसका विश्लेषण करते हैं और एक निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास करते हैं।
आज जब पूरे विश्व की धरती को लेकर तरह-तरह की खबरें आ रही हैं, इसे समझने और उसकी तह तक जाने के लिए ऐसे विशेषज्ञों की अच्छी-खासी जरूरत पड़ रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस क्षेत्र में कुशल वैज्ञानिक और विशेषज्ञों की मांग को ध्यान में रखते हुए अर्थसाइंस का पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू किया है। खास बात यह कि एमएससी इन अर्थसाइंस नाम से प्रचारित इस कोर्स में प्रवेश का दरवाजा बारहवीं कक्षा के बाद ही खोला गया है। पांच साल के इस कोर्स को पूरा करने के बाद सीधे करियर अपनाने या चुनने का मौका मिलता है।
क्या है कोर्स में?
इस कोर्स में पहले तीन साल स्नातक स्तर की पढ़ाई होती है। इसके बाद सीधे एमएससी में दाखिला मिलता है। कुल 10 सेमेस्टर हैं। इसमें अर्थसाइंस के विविध पहलुओं जैसे भूभौतिकी, जल विज्ञान, समुद्र विज्ञान, वातावरणीय विज्ञान, ग्रहीय विज्ञान, मौसम विज्ञान, पर्यावरणीय विज्ञान और मृदा विज्ञान को व्यापक तौर पर पढ़ने व समझने का मौका मिलता है। महाद्वीपों के खिसकने, पर्वतों के बनने, ज्वालामुखी फटने के क्या कारण हैं, वैश्विक पर्यावरण किस तरह परिवर्तित हो रहा है, पृथ्वी प्रणाली कैसे काम करती है, हमें औद्योगिक कूड़े का निपटान कैसे और कहां करना चाहिए, भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए समाज की ऊर्जा और पानी की बढ़ती मांग को कैसे पूरा किया जा सकता है, जिस तरह विश्व की जनसंख्या बढ़ रही है, क्या हम उसके लिए पर्याप्त खाद्य तैयार कर सकते हैं तथा किस प्रकार खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं, ये सब चीजें अर्थसाइंस के अध्ययन क्षेत्र में हैं।
भूवैज्ञानिक समस्याओं को सुलझाने और संसाधन प्रबंधन, पर्यावरणीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा मानव कल्याण के लिए सरकारी नीतियों को तैयार करने में प्रयुक्त अनिवार्य सूचना या डाटाबेस उपलब्ध कराते हैं। कोर्स के दौरान खनन, तेल व प्राकृतिक गैस, भूजल, कोयला, जियो तकनीक, जीआईएस व रिमोट सेंसिंग, पर्यावरण अध्ययन, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन जैसे कई क्षेत्रों को जानने और समझने का अवसर दिया जाता है। इनसे जुडे क्षेत्रों में से एक क्षेत्र में छात्रों को आगे चल कर स्पेशलाइजेशन चुनना होता है। यह काम एमएससी स्तर पर होता है। एमएससी में चार पेपर थ्योरी के हैं। इसके अलावा कई पेपर वैकल्पिक हैं, जिसमें से छात्र किसी एक को चुन कर अपना करियर बना सकता है।
कोर्स के दौरान छात्रों को दो तरह की ट्रेनिंग भी दी जाती है। पहले स्तर पर हर साल छात्रों को फील्ड ट्रिप पर भेजा जाता है। एमएससी स्तर पर समर ट्रेनिंग और समर इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग के अलावा डिजर्टेशन का काम पूरा करना होता है। यहां फील्ड वर्क के बहुत विकल्प हैं।
शाखाएं
अर्थसाइंस की कई शाखाएं हैं। इनमें पर्यावरण अध्ययन, माइनिंग, जियोटेक्नोलॉजी, डिजास्टर मैनेजमेंट, एटमॉसफेरिक साइंस, जियोहैजर्डस, क्लाइमेट चेंज, ओशनोग्राफी, रिमोट सेंसिंग, एप्लायड हाइड्रोजियोलॉजी, काटरेग्राफी और जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम आदि प्रमुख हैं।
अवसर हैं कहां
कोर्स के छात्र के लिए राज्य और केन्द्र सरकार में जियोलॉजिस्ट बनने के कई अवसर हैं। एमएससी पास छात्रों के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा समय-समय पर जियोलॉजिस्ट की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की जाती है। सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड भी इस कोर्स के छात्रों को काम करने का अवसर मुहैया कराता है। इसमें हाइड्रोजियोलॉजिस्ट के रूप में उसी स्केल पर नियुक्ति होती है, जिस स्केल पर जियोलॉजिस्ट की। इनके अलावा पीएचडी करने के बाद साइंटिस्ट पद पर भर्ती होती है। ये सभी पद ग्रेड ए स्तर के अधिकारी के हैं। रिसर्च संस्थाओं के अलावा आजकल निजी कंपनियों में एग्जिक्यूटिव के रूप में भी क्लास वन पद पर इसके विशेषज्ञ रखे जा रहे हैं।
ओएनजीसी, वेदांता, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड, ईएसएसआर, केर्न इंडिया जैसी कई कंपनियां हैं, जहां इनकी मांग है। पीएचडी करने वालों के लिए रिसर्च एसोसिएट और अध्यापन के भी मौके हैं। इसके अलावा इनकी मांग देश में जहां पेयजल के लिए काम हो रहा है या फिर सीमेंट, माइनिंग आदि के कामों में इस कोर्स के छात्रों की मांग है।
दाखिला कैसे
इसमें बारहवीं की मेरिट के आधार पर दाखिला दिया जाता है। साइंस के छात्र के लिए बारहवीं में भौतिकी, गणित और रसायनशास्त्र पढ़ा होना जरूरी है, तभी उसे दाखिला दिया जाता है। हंसराज कॉलेज इस कोर्स की कट ऑफ लिस्ट निकाल कर मेरिट के हिसाब से दाखिला देता है। आईआईटी प्रवेश परीक्षा पास करने वाले को कट ऑफ में 5 फीसदी की छूट दी जाती है। ओबीसी वर्ग के लिए कट ऑफ में दस फीसदी तक रियायत है।
फैक्ट फाइल
कोर्स कराने वाले संस्थान
इस कोर्स की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में होती है। हालांकि दाखिला हंसराज कॉलेज में हो रहा है। वहां छात्रों को मुख्य पेपर के लिए नहीं, बल्कि उसके साथ पढ़ाए जाने वाले स्पेशलाइजेशन पेपरों के लिए जाना होता है। मुख्य कोर्स की पढ़ाई और क्लास जियोलॉजी विभाग में होती है। कुल 25 सीटें हैं।
विश्वविद्यालय में इसके अलावा जियोलॉजी ऑनर्स का कोर्स रामलाल आनंद कॉलेज में चलाया जा रहा है, लेकिन अर्थसाइंस का सिलेबस इससे थोड़ा भिन्न है। यह कोर्स इसके अलावा देश में आईआईटी खड़गपुर और रुड़की में चलाया जा रहा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय, हंसराज कॉलेज
आईआईटी, खड़गपुर और रुड़की
पांडिचेरी यूनिवसिटी, पुड्डुचेरी
इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
फैक्ट फाइल
स्कॉलरशिप
इस कोर्स में आईआईटी संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आयोजित गेट पास करने के बाद छात्रों को 8 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। एमएससी के बाद एमफिल या पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने के लिए जेआरएफ यानी जूनियर रिसर्च फेलोशिप के रूप में करीब 20 हजार रुपये मिलते हैं।
एमफिल स्तर पर केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में सरकार की ओर से करीब तीन हजार रुपए प्रतिमाह स्कॉलरशिप दी जाती है।
पीएचडी में यह राशि पांच हजार प्रतिमाह है। अर्थ विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्य के लिए अन्य सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं भी स्कॉलरशिप देती हैं। यह रिसर्च कार्यों, पीएचडी या पोस्ट डॉक्टरेट फेलोशिप के लिए दी जाती है।
वेतन
इस कोर्स के छात्रों को रिसर्च संस्थान 30 हजार से लेकर 40 हजार तक के पैकेज पर ले जा रही हैं। निजी क्षेत्रों में युवाओं की सैलरी स्किल को देखते हुए तय की जाती है। जियोलॉजिस्ट का वेतनमान भी 40 हजार रुपये से 50 हजार रुपये है।
कॉलेज शिक्षण और रिसर्च एसोसिएट के रूप में वेतनमान शुरुआती तौर पर 40 से 45 हजार रुपये है।
कोचिंग संस्थान
कोर्स में दाखिला आमतौर पर 12वीं के अंकों के आधार पर होता है। भौतिकी, रसायनशास्त्र और गणित की पृष्ठभूमि से लैस छात्रों को ही इंटीग्रेटेड एमएससी अर्थसाइंस में दाखिला मिलता है। अगर चाहें तो बारहवीं के बोर्ड में इन विषयों में अच्छे अंक लाने के लिए कोचिंग संस्थान की मदद ले सकते हैं। अपने पास किसी स्तरीय कोचिंग का चुनाव कर सकते हैं। जो छात्र आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफल होकर इधर आना चाहते हैं, वे भी कोचिंग की मदद ले सकते हैं।
एजुकेशन लोन
कॉलेज में इससे जुड़े कोर्स में दाखिले की फीस बहुत कम है, इसलिए लोन की जरूरत नहीं पड़ती। विदेश में पीचएडी की पढ़ाई के लिए बैंक में लोन आदि की व्यवस्था है।
अवसर 
स्नातक की डिग्री हासिल कर चुके छात्रों के लिए बीएड करने के बाद शिक्षण, टूरिज्म में सर्टिफिकेट कोर्स करके टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी आदि में काम के अवसर मिलते हैं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर बैंक व अन्य निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों में नौकरी कर सकते हैं। सरकारी क्षेत्र की ओर देखें तो यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होकर आईएएस, आईपीएस बन सकते हैं।
अगर इतिहास की अच्छी समझ है तो ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनने वाले धारावाहिक या फिल्म में पटकथा लेखन का काम कर सकते हैं। एमए, एमफिल करने के बाद कॉलेजों में अध्यापन का काम करने के काफी अवसर हैं। पुरातत्व विभाग से डिप्लोमा कोर्स करने के बाद केन्द्र व राज्य सरकार के संग्रहालयों में काम किया जा सकता है।

Friday, August 3, 2018

गाड़ि‍यों की लुक डिजाइन में कर‍ियर

जब भी बात गाड़ियों के लुक की होती है, तो कुछ गाड़ियां खुद ही हमारे जहन में आ जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी डिजाइनिंग उस समय के हिसाब से बिल्कुल 'हटकर' और कंफर्ट लेवल को ध्यान में रखकर की गई होती है। गाड़ियों के इसी ओवरऑल लुक की डिजाइनिंग करते हैं ऑटोमोटिव इंजीनियर्स। अगर आपको भी वाहनों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात आकर्षित करती है, तो आप भी ऑटोमोटिव डिजाइनर बन सकते हैं।
क्या है ऑटोमोटिव डिजाइन?
ऑटोमोबाइल्स के अपीयरेंस और फंक्शनैलिटी को डिजाइन करने की प्रक्रिया ऑटोमोटिव डिजाइनिंग कहलाती है। इसमें कार, बाइक, ट्रक, बस आदि हर सेग्मेंट के वाहन शामिल हैं। इसके तहत गाड़ियों की इंटीरियर व एक्सटीरियर डिजाइन, कलर स्कीम और शेप पर भी काम किया जाता है।
जॉब प्रोफाइल
किसी भी ऑटोमोबाइल को बनाने के लिए बेसिक आइडिया की जरूरत होती है। आइडिया जनरेशन ही ऑटोमोटिव डिजाइनर की प्रमुख जिम्मदारी है। इंजीनियर्स और डिजाइनर्स की टीम इस आइडिया पर चर्चा करती है और फिर कॉन्सेप्ट तैयार हो जाने पर डिजाइनर्स सॉफ्टवेयर की मदद से गाड़ी का बेसिक स्केच बनाते हैं, जो 3डी होता है। इसमें वाहन की हर बेसिक डीटेल शामिल होती है। साथ ही इंटीरियर और एक्सटीरियर की कलर स्कीम की जानकारी भी देनी होती है। डिजाइन फाइनल होने के बाद गाड़ी का स्केल मॉडल बनाया जाता है।
जरूरी स्किल
ऑटोमोटिव डिजाइनर बनने की सबसे पहली शर्त तो यह है कि आपमें सड़क पर चलने वाली हर गाड़ी के लिए पैशन होना चाहिए। साथ ही आपके पास वाहनों के निर्माण और उनकी फंक्शनैलिटी के बारे में बेसिक जानकारी भी होनी चाहिए। सृजनात्मकता के साथ ही आपमें ड्रॉइंग और स्कल्पचर बनाने में रुचि भी होनी चाहिए।
कौन-से कोर्स?
इस उद्योग में करियर बनाने के लिए डिजाइनिंग में बैचलर्स की डिग्री होनी जरूरी है। आप चाहें, तो डिजाइनिंग में मास्टर्स करके अपना ज्ञान और बढ़ा सकते हैं। इससे जॉब पाने की संभावना भी बढ़ जाती है। वैसे इस उद्योग में सर्वाइवल और करियर ग्रोथ के लिए डिजाइन स्किल्स ही मायने रखती हैं। आप चाहें, तो कोर्स पूरा करने के बाद किसी कंपनी में इंटर्नशिप करके डिजाइनिंग की बारीकियां सीख सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
ऑटोमोटिव डिजाइनर बड़े ऑटोमोबाइल निर्माताओं के कॉन्सेप्ट एंड डिजाइनिंग डिपार्टमेंट में काम करते हैं। अगर बात पे-पैकेज की करें, तो यह फील्ड काफी आकर्षक है। ज्यादातर कंपनियां ऑटोमोटिव डिजाइनर्स को अच्छा पैकेज देती हैं। भारत में आम तौर पर इस फील्ड में 5 लाख रुपए के वार्षिक पैकेज से शुरूआत होती है। अनुभव के साथ यह बढ़ता जाता है।