Posts

Showing posts from May, 2017

एथिकल हैकिंग में करियर

वचरुअल दुनिया का दायरा जिस तरह दिन-दुनी रात-चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है, आईटी (इफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) आधारित सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी परेशानी का सबब बन रही हैं। हर रोज दुनिया के किसी न किसी कोने में नेटवर्क, वेबसाइट और ई-मेल अकाउंट्स की सुरक्षा दांव पर लगी होती है। इंटरनेट पर साइबर अपराध के मामलों में चिंताजनक रफ्तार से वृद्धि देखी जा रही है
इन मामलों में किसी व्यक्ति या संस्था के कंप्यूटर सिस्टम में सेंध लगाकर संवेदनशील डाटा चुराने से लेकर पासवर्ड चोरी करने, भद्दे ई-मेल भेजने और ई-मेल अकाउंट को हैक करने जैसी घटनाएं शामिल होती हैं। इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों से सूचनाओं को अवैध ढंग से प्राप्त करने वालों को हैकर कहा जाता है। मगर जब यही काम कंप्यूटर सिस्टम के सुरक्षा उपायों को जांचने और उसे पुख्ता बनाने के उद्ेदश्य से किया जाता है, तो उसे एथिकल हैकिंग कहते हैं। इस कार्य को करने वाले पेशेवर एथिकल हैकर के नाम से जाने जाते हैं। साइबर अपराधों की बढ़ती तादाद के बीच मूल्यवान इंफॉर्मेशन सिस्टम की सुरक्षा के लिए एथिकल हैकरों की मांग जोर पकड़ रही है। इस कारण यह पेशा नौकरी की आक…

ड्रामा मे करियर

Image
अभिनय, निर्देशन, डिजाइन या थियेटर से जुड़े अन्य क्षेत्रों मे करियर बनाने का शौक यदि आप भी अपने मन में पाले बैठे हैं और अपने इस शौक को पेशेवर ट्रेनिंग के जरिए निखारना चाहते हैं तो इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के डिप्लोमा इन ड्रमैटिक आर्ट्स में आवेदन कर सकते हैं। इस संस्थान में आवेदन वेबसाइट से फॉर्म डाउनलोड करके भी किया जा सकता है और पोस्ट से मंगवाकर भी। इस कोर्स में आवेदन की अंतिम तिथि 8 मई 2015 रखी गई है। चयन प्रक्रिया में ऑडिशन, वर्क शॉप और फिटनेस टैस्ट होगा। एनएसडी दिल्ली नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत आने वाला एक स्वायत्त संस्थान है। इसकी स्थापना संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष 1959 मे की थी। थियेटर की विभिन्न विधाओं में कलाकारों के हुनर को प्रशिक्षण के जरिए निखारने वाले इस संस्थान से फिल्म और थियेटर जगत की कई दिग्गज हस्तियां प्रशिक्षण ले चुकी हैं। यह संस्थान नई दिल्ली में स्थित है। थिएटर ट्रेनिंग में इस संस्थान का विश्वभर में एक अहम स्थान है। आप भी यहां थिएटर ट्रेनिंग लेकर अपना कौशल निखार सकते हैं और अच्छा करियर बना …

टॉय डिजाइनिंग में कैरियर

खिलौने सभी बच्चों को बेहद पसंद होते हैं। ये सिर्फ खेलने के नजरिए से नहीं बल्कि उनके मानसिक विकास में भी मदद करते हैं। वैसे भी आजकल बाजार में इतने नए-नए खिलौने आ गए हैं कि कई बार लेने से पहले सोचना पड़ता है। कहते हैं अपने अंदर का बच्चा कभी न मरने दें और खिलौनों की दुनिया का यह नया स्वरूप खिलौने के निर्माण में कैरियर की भी ढेरों संभावनाएं पैदा करता है।
टॉय डिजाइनर का काम खिलौनों से बच्चों का मनोरंजन तो हो ही, साथ ही, ऐसे खिलौने बनाना भी है जिनसे बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा भी मिले। टॉय डिजाइनिंग
खिलौने भी दो प्रकार के होते हैं - एक जिनसे बच्चे कुछ सीखते हैं और जिसे परिवार के साथ भी खेला जा सकता है, दूसरा सिर्फ मौज-मस्ती के लिए। पुराने समय में खिलौने प्राकृतिक चीजों से बनते थे जैसे लकड़ी, पत्थर या मिट्टी लेकिन आजकल यह प्लास्टिक, फर और अन्य कृत्रिम पदार्थ।
टॉय डिजाइनर खिलौनों को डिजाइन करते हैं और फिर बनाते हैं। उनका काम शुरू होता है ड्रॉइंग, स्केचिंग या कंप्यूटर से मॉडल तैयार करने से, फिर यह तय करना कि खिलौने का हर हिस्सा कैसे बनना है और फिर उसका एक नमूना तैयार करना।
खि…

एग्रो-फॉरेस्ट्री में करियर

फॉरेस्ट्री के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ एक्सप्लोर किया जाना बाकी है। इसमें नए इनोवेटिव रिसर्च की जरूरत है। फॉरेस्ट्री से ही जुड़ा फील्ड है एग्रो-फॉरेस्ट्री, जिसमें कृषि उत्पाद, वन पैदावार और आजीविका के क्रिएशन, कंजर्वेशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट की जानकारी दी जाती है। फॉरेस्ट्री या एग्रीकल्चर या प्लांट साइंसेज में ग्रेजुएट एग्रो-फॉरेस्ट्री में मास्टर्स कर सकते हैं। इसके लिए यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस एग्जाम देना होगा या फिर मेरिट के आधार पर भी दाखिला मिल सकता है। एग्रो फॉरेस्ट्री प्रोफेशनल्स बैंकिंग सेक्टर के अलावा कृषि विज्ञान केंद्र, आइटीसी जैसी प्लांटेशन कंपनी या बायो-फ्यूअल इंडस्ट्री में काम कर सकते हैं। डॉ. अरविंद बिजलवान, असि. प्रोफेसर (टेक्निकल फॉरेस्ट्री), आइआइएफएम, भोपाल लाइफ का सेकंड चांस भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग करने के बाद मैं टीसीएस मुंबई में जॉब कर रही थी। हर दिन कंप्यूटर के सामने एक-सा काम करते हुए मन नहींलग रहा था। बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट-सी गई थी। तब खुद से सवाल पूछा कि आखिर ये मैं क्या कर रही ह…

एयरोनॉटिकल इंजीनियर में करियर

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का क्षेत्र इंजीनियरिंग शिक्षा का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। इसमें करियर निर्माण की बहुत ही उजली संभावनाएं हैं। इसके तहत नागरिक उड्डयन, स्पेस रिसर्च, डिफेंस टेक्नोलॉजी आदि के क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास किया जाता है। यह क्षेत्र डिजाइनिंग, निर्माण, विकास, परीक्षण, ऑपरेशंस तथा कमर्शियल व मिलिट्री एयरक्राफ्ट के पुर्जों के साथ-साथ अंतरिक्ष यानों, उपग्रहों और मिसाइलों के विकास से भी संबंध‍ित है।
एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग ने विश्व का परिदृश्य ही बदल दिया है। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नई व आकर्षक
संभावनाओं की कोई सीमा नहीं है। एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के तहत डिजाइनिंग, नेविगेशनल गाइडेंस एंड कंट्रोल सिस्टम, इंस्ट्रूमेंटेशन व कम्युनिकेशन अथवा प्रोडक्शन मैथड के साथ ही साथ वायुसेना के विमान, यात्री
विमान, हेलिकॉप्टर और रॉकेट से जुड़े कार्य शामिल हैं।
क्या है काम?
एयरोनॉटिकल इंजीनियर के प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं: यात्री विमान के यंत्रों, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का रखरखाव एवं प्रबंधन, विमान संबंधी रेडियो और रडार का संचालन, उड़ने से पहले विमा…

जोअलॉजी: जीव-जंतुओं संग पाएं मंजिल

जीव-जंतु प्रेमियों को निश्चय ही उनके साथ समय बिताना अच्छा लगताहै। आप अपने इसी प्रेम को अपने करियर में भी बदल सकते हैं। प्राणि विज्ञानया जोअलॉजी जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जिसमें जीव-जंतुओं का वैज्ञानिकअध्ययन किया जाता है। इसमें प्रोटोजोआ, मछली, सरीसृप, पक्षियों के साथ-साथस्तनपायी जीवों के बारे में अध्ययन किया जाता है। इसमें हम न सिर्फजीव-जंतुओं की शारीरिक रचना और उनसे संबंधित बीमारियों के बारे में जानतेहैं, बल्कि मौजूदा जीव-जंतुओं के व्यवहार, उनके आवास, उनकी विशेषताओं, पोषणके माध्यमों, जेनेटिक्स व जीवों की विभिन्न जातियों के विकास के साथ-साथविलुप्त हो चुके जीव-जंतुओं के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।
अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि प्राणि विज्ञान में किस-किस प्रकारके जीवों का अध्ययन किया जाता है। जवाब है, इस पाठय़क्रम के तहत आप लगभगसभी जीवों, जिनमें समुद्री जल जीवन, चिडियाघर के जीव-जंतु, वन्य जीवों, यहां तक कि घरेलू पशु-पक्षियों के जीव विज्ञान एवं जेनेटिक्स का अध्ययनकरते हैं। आइए जानते हैं कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने का पहला पड़ाव क्याहै?
प्राणि विज्ञान के क्षेत्र में आने क…