Saturday, March 25, 2017

: करियर के लिहाज से रेडियोलॉजी



एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी आदि जैसी मेडिकल डायग्नॉस्टिक तकनीकों से आज पूरे चिकित्सा जगत का स्वरूप बदल गया है। अब शरीर के किसी भी अंदरूनी हिस्से में छिपा रोग पता लगाना आसान हो गया है। रेडियोलॉजी का क्षेत्र अब करियर के लिहाज से आकर्षक बन गया है। जॉब मार्केट में ऐसे लोगों की भारी मांग है, जिन्हें रेडिएशन से बचाव की समझ हो और जो मशीन्स की देखरेख करना जानते हों। रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर हैल्थकेयर के क्षेत्र में बेशुमार अवसर हैं।
क्या है रेडियोलॉजी?
रेडियोलॉजी एक मेडिकल टेक्नोलॉजी है। इसकी मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जांच की जाती है। इससे डॉक्टरों को मरीजों की स्थिति और उनकी बीमारियों के बारे में सटीक जानकारी मिल जाती है, जिससे उन्हें कारगर इलाज करने में काफी आसानी होती है। रेडियोलॉजी दो तरह की होती है: डायग्नॉस्टिक रेडियोलॉजी और थैरापेटिक रेडियोलॉजी। डायग्नॉस्टिक रेडियोलॉजी के अंतर्गत मुख्य रूप से रेडियोग्राफी और अल्ट्रासाउंड से जुड़े टेस्ट शामिल होते हैं, जैसे एक्सरे, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी, फ्लोरोस्कोपी, पोसीट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी आदि। थैरापेटिक रेडियोलॉजी में रेडियो तरंगों द्वारा उपचार किया जाता है।
वर्क प्रोफाइल
रेडियोलॉजिस्ट भी चिकित्सक ही होते हैं। स्पेशलाइजेशन की वजह से ये रेडियोलॉजी तकनीक के कुशल जानकार बन जाते हैं यानी इन्हें रेडियोलॉजी के सुरक्षित इस्तेमाल की बारीक जानकारी होती है। एक रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर ये शरीर के विभिन्न अंगों का एक्सरे करते हैं। रेडियो इमेज का विश्लेषण और इंटरप्रिटेशन करते हैं। इसके अलावा, इन पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होती है कि एक्सरे करते समय मरीज या आसपास के लोगों पर रेडियोएक्टिव किरणों का कोई बुरा असर न हो। यही नहीं, ऐसे प्रोफेशनल्स को रेडियोग्राफिक उपकरणों और मरीजों के रेकॉर्ड्स को मेन्टेन रखने का काम भी करना होता है।
पर्सनल स्किल
कुशल रेडियोलॉजिस्ट बनने के लिए मेहनती, धैर्यवान, मिलनसार और सेवाभावी होना चाहिए। इसके अलावा कम्प्यूटर स्किल, अच्छी कम्युनिकेशन स्किल और टीम भावना होना भी जरूरी है। इस क्षेत्र में शिफ्ट-वाइज भी काम करना पड़ सकता है। इसलिए आपको दिन-रात किसी भी समय काम करने के लिए तैयार रहना होगा। मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है।
जॉब के अवसर
रेडियोलॉजी के जानकारों के लिए हैल्थ सेक्टर में ढेर सारे अवसर हैं। ऐसे प्रोफेशनल्स की मांग सरकारी अस्पतालों के अलावा प्राइवेट अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, क्लीनिक्स, इमेजिंग सेंटर्स, आर्मी के मेडिकल कोर, रिसर्च फील्ड तथा शैक्षणिक संस्थानों में हमेशा रहती है। रेडियोलॉजिस्ट के लिए विदेशों में भी जॉब के बहुत अवसर हैं। अमेरिका, योरप, अफ्रीका तथा खाड़ी के देशों में ऐसे लोगों के लिए रेडियो इमेजिंग तकनीशियन, रेडियोग्राफर, रेडियोलॉजिस्ट, प्रयोगशाला सहायक, क्लीनिक सहायक, एक्सरे तकनीशियन या अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ के तौर पर जॉब के स्कोप हैं। चाहें, तो खुद का डायग्नॉस्टिक सेंटर भी खोल सकते हैं।
कोर्स व क्वॉलिफिकेशन
यह करियर फील्ड लड़कों व लड़कियों दोनों के लिए उपयुक्त है। रेडियोलॉजी या रेडिएशन फिजिक्स में आप पीजी, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। बीएससी या डिप्लोमा कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता 50 प्रतिशत अंकों के साथ फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी विषयों से 12वीं पास होना है। यदि आप बीएससी हैं, तो एमएससी या पीजी डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को शरीर रचना विज्ञान, शरीर विज्ञान, विकिरण भौतिकी, इमेजिंग भौतिकी, रेडियोग्राफी आदि की जानकारी दी जाती है।
सैलरी पैकेज
रेडियोलॉजिस्ट का सैलरी पैकेज सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में काफी अच्छा होता है। शुरूआत में इन्हें 15 हजार से 20 हजार रुपए प्रति माह मिल जाते हैं। अनुभव के बाद सैलरी और आकर्षक हो जाती है।

Tuesday, March 14, 2017

स्पा थैरेपी में करियर

बात करियर की करें तो आजकल विकल्पों की तो जैसे भरमार है। ऐसे में बड़ा मुश्किल हो जाता है खुद के लिए एक बेहतर करियर का चुनाव करना। अगर आप कुछ हटकर करना चाहते हैं तो स्पा थैरेपी में अपने हाथ आजमा सकते हैं। स्वस्थ रहने और स्वस्थ दिखने की चाह सभी की होती है। आज ऐसी कई थेरेपी मौजूद हैं, जिनके इस्तेमाल से न सिर्फ शरीर, बल्कि मन भी स्वस्थ रहता है। यही कारण है कि अब देश में वेलनेस इंडस्ट्री जोर पकड़ रही है और बतौर बिजनेस सामने आ रही है। इसी का एक हिस्सा है स्पा थेरेपी। कुशल लोगों की कमी से जूझ रही इस इंडस्ट्री में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं।
स्पा थेरेपी क्या है?
स्पा थेरेपी में मसाज, हाइड्रो थेरेपी, हाथों तथा पैरों के उपचार तथा चेहरे के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट शामिल है। इन थेरेपीज के माध्यम से हमारी मांसपेशियां, हड्डियां, पाचन प्रणाली, श्वसन प्रणाली, भावनात्मक, दिमागी और नाड़ी तंत्र बेहतर प्रदर्शन करते हैं। इनसे थकान, भारीपन, मांसपेशियों की कठोरता आदि समस्याएं खत्म होती हैं।

योग्यता
हालांकि क्वालिफाइड स्पा थेरेपिस्ट बनने के लिए कई कोर्स हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्रशिक्षण लेना ही बेहतर होता है। आप हाईस्कूल करने के बाद भी कोर्सेज में प्रवेश ले सकते हैं।

इस फील्ड में वही सफल हो सकता है, जो क्लाइंट की जरूरतों को समझ सके। क्लाइंट से विनम्र भाव से बात करने और उसकी आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर उनकी पूर्ति करने में सफल हो सके। इसके अलावा कपड़े साफ रखने से लेकर चलने-फिरने के स्टाइल तक में आपको ध्यान बरतने की जरुरत है। फुल टाइम स्पा थेरेपिस्ट का काम आठ से दस घंटे का होता है और सुबह की तुलना में शाम को अधिक काम रहता है। साथ ही वीकएंड में भी काम की अधिकता रहती है।

कोर्स में क्या करवाया जाता है
छात्रों को विभिन्न तरह की मसाज और स्पा थेरेपी के बारे में पढ़ाया जाता है और मसाज के जरिये उन स्थितियों को जांचने के बारे में भी बताया जाता है, जिनका इलाज करना है। कोर्स में एरोमा थेरेपी, मसल स्टिम्युलेशन, सेनिटेशन आदि को भी शामिल किया जाता है।

वेतन
स्पा थेरेपिस्ट में नए प्रशिक्षुओं को 10 से 14 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। कुछ साल अनुभव प्राप्त करने के बाद उन्हें आसानी से 14 से 20 हजार रुपये मासिक मिल जाते हैं। यदि वे प्रबंधन के हिस्से हो जाते हैं तो उन्हें 30-80 हजार रुपये तक मिलते हैं।

अवसर
कोर्स करने के बाद इसमें जॉब की कमी नहीं रहती। ऐसे में जरूरी है कि आप खुद को कैसे अपडेट रखते हैं और क्लाइंट्स को किस तरह प्रभावित कर पाते हैं। स्पा थेरेपिस्ट को मसाज, ब्यूटी सैलून, हॉलिस्टिक हेल्थ क्लिनिक, फिटनेस सेंटर में नियुक्त किया जाता है।

इसके अलावा उन्हें खिलाडियों को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए खेल टीमों और स्पोर्ट्स क्लबों में भी रखा जाता है। नौकरी करने का मन न होने पर स्पा थेरेपिस्ट स्वतंत्र रूप से भी काम कर सकते हैं। अपनी इस भूमिका में वह क्लाइंट के घर जाकर या उसके कार्यस्थल पर पहुंच कर अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

Monday, March 13, 2017

फिलॉसफी के कोर्स

फिलॉसफी के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। टीचिंग के क्षेत्र में एक असिस्टेंट प्रोफेसर 30000 रुपए प्रतिमाह से ऊपर वेतनमान प्राप्त करता है। इसके अलावा एक प्रोफेसर 80000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त करता है। आरकेएमवी शिमला में हर वर्ष 60 छात्राएं यह कोर्स करके निकल रही हैं। हिमाचल में इस समय 50 से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़े हैं
फिलॉसफी एक वैज्ञानिक विषय हैजिसमें सच्चाई और वास्तविकता के कारणों का पता लगाने के लिए तर्क का प्रयोग किया जाता है। एक व्यक्ति जो फिलॉसफी सीखता हैउसे फिलॉस्फर कहा जाता है और यह जीवन भर सीखी जाने वाली प्रक्रिया है। जिन्हें मेटाफिजिक्सलॉजिकरेशनलिज्म आदि में रुचि हैफिलॉसफी उन बुद्धिजीवियों के लिए यह उचित प्रोफेशन है। फिलॉसफी दूसरे विषयों की तरह नहीं है। दूसरी कई अकादमिक शिक्षा छात्रों को एक बेहतर कैरियर बनाने के लिए प्रदान करवाई जाती हैलेकिन फिलॉसफी इन सबसे अलग है। यह कोई ट्रेनिंग नहीं हैबल्कि जीवन भर सीखने वाली शिक्षा है। यदि आपकी रुचि इस क्षेत्र में हैतो यह एक बेहतर कैरियर विकल्प बन सकता है। फिलॉसफी की कुछ उप शाखाएं हैंजिनमें से किसी एक को चुनकर आप बेहतर कैरियर बना सकते हैंवे हैं-  एस्थेटिक्स ः यह मुख्य रूप से  सौंदर्यरुचि और भावनात्मक सार्थकता पर आधारित शिक्षा है। एस्थेटिक्स मुख्य रूप से फिलॉसफी आफ आर्ट से संबंधित है। एपिस्टमोलॉजी ः इस शाखा में प्रकृति से लगावविश्वास और ज्ञान के बारे में बताया जाता है। एथिक्स ः यह अच्छेकीमती और सही की शिक्षा है। इसमें अप्लायड नीति शास्त्र की शिक्षा भी दी जाती है। लॉजिक ः इसमें अच्छे तर्क-वितर्क की शिक्षा दी जाती हैवाद-विवाद के जरिए तर्कों को आंका जाता है। मेटाफिजिक्स ः यह शाखा वास्तविकता की असली पहचान की शिक्षा देती है।
शैक्षणिक योग्यता 
फिलॉसफी विषय में प्रवेश के लिए छात्र का बारहवीं पास होना आवश्यक होता है। इस कोर्स को करने की अवधि तीन साल की है। कई संस्थानों द्वारा इस कोर्स में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। फिलॉसफी के मुख्य कोर्सों में आप बीएएमएएमफिल और पीएचडी आदि कर सकते हैं। डाक्टर आफ फिलॉसफी में प्रवेश पाने के लिए छात्र का संबंधित विषय में एमफिल होना आवश्यक है। 
कोर्स 
फिलॉसफी के कोर्स आप दुनिया के किसी भी हिस्से से कर सकते हैं। एथिक्स और एस्थेटिक्स भी इस कोर्स का हिस्सा हैं। लॉजिक एक दूसरा हिस्सा हैजो फिलॉसफी के कोर्स में छात्रों को करवाया जाता है। भारत में कई सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा फिलॉसफी में कोर्स करवाए जाते हैं। इसके मुख्य कोर्सों में आप बीए इन फिलॉसफीअंडरग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफीपोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी,  मास्टर डिग्री इन फिलॉसफीपीएचडी इन फिलॉसफीमास्टर आफ फिलॉसफी (लॉ)डाक्टर आफ फिलॉसफी (पार्ट टाइम)मास्टर आफ फिलॉसफी (एमफिल) इन इकोनोमिक्सबीए (ऑनर्स) इन फिलॉसफी और डिप्लोमा इन फिलॉसफी एंड रिलीजन आदि कोर्स भी कर सकते हैं। बीए करने के बाद आप लिंग्विस्टिक्ससोशियोलॉजीसाइकोलॉजी और यहां तक कि इतिहास के क्षेत्रों में आप उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। 
रोजगार की संभावनाएं  
इस कोर्स को करने के बाद ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए सरकारीकारपोरेट क्षेत्रों में कई कैरियर विकल्प उपलब्ध रहते हैं। कारपोरेट क्षेत्र में एक फिलॉसफी ग्रेजुएट मैनपावर डिवेलपमेंट मैनेजर और मैनपावर सर्विसेज को-आर्डिनेटर के रूप में नौकरी प्राप्त कर सकता है। सरकारी क्षेत्र में आप एक आर्किविस्ट के रूप में काम कर सकते हैं। एक कंसल्टिंग फिलॉस्फर की मांग उनके विचारों और फिलॉसफी की वजह से पूरी दुनिया में रहती है। इसके अलावा एक फिलॉस्फर जर्नलिज्म और पब्लिशिंग इंडस्ट्री में एक राइटर और एडीटर के रूप में रोजगार प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही आप रिसर्च में भी जा सकते हैं। एक ग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करने वाला दूसरे अन्य कई क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त कर सकता है। इस क्षेत्र में निपुण व्यक्ति सरकारी और निजी फर्मों में बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी और निजी स्कूलों में भी फिलॉसफी के क्षेत्र में ढेरों संभावनाएं हैं। इसके अलावा कालेजों और विश्वविद्यालयों में भी आप बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आप एक प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही आप भारत के अलावा विदेशों में अच्छे वेतनमान पर नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आप कारपोरेट क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त करके बेहतर कमाई भी कर सकते हैं।
वेतनमान 
फिलॉसफी के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। टीचिंग के क्षेत्र में एक असिस्टेंट प्रोफेसर 30000 रुपए प्रतिमाह से ऊपर वेतनमान प्राप्त करता है। इसके अलावा एक प्रोफेसर 80000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त करता है। 
कोर्स 
1.    बीए इन फिलॉसफी 
2.    अंडरग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी 
3.    पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी   
4.    मास्टर डिग्री इन फिलॉसफी 
5.    पीएचडी इन फिलॉसफी 
6.    मास्टर आफ फिलॉसफी (लॉ)  
7.    डाक्टर आफ फिलॉसफी (पार्ट टाइम)  
8.    मास्टर आफ फिलॉसफी (एमफिल) इन    इकोनोमिक्स  
9.    बीए (ऑनर्स) इन फिलॉसफी 
10. डिप्लोमा इन फिलॉसफी एंड रिलीजन 
संस्थान 
1.  राजकीय कन्या महाविद्यालयशिमला 
2.  गवर्नमेंट डिग्री कालेजनालागढ़
3. महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटीरोहतक 
4.  एसआर गवर्नमेंट कालेज फार वूमेनअमृतसर 
5.  गुरु नानक देव यूनिवर्सिटीअमृतसर 
6.  पंजाबी यूनिवर्सिटीपटियाला 
7.  देव समाज कालेज फार वूमनफिरोजपुर 
8. डीएवी कालेज फार वूमनअमृतसर 
9. पंजाब यूनिवर्सिटीचंडीगढ़ 
10. कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटीकुुरुक्षेत्र 
11. गवर्नमेंट नेशनल कालेजसिरसा 
12. दिल्ली विश्वविद्यालयदिल्ली

Friday, March 10, 2017

Genetic Counsellor डिकोडिंग द डिसऑर्डर



ह्यूमन बॉडी में मौजूद क्रोमोजोम्स में करीब 25 से 35 हजार के बीच जीन्स होते हैं। कई बार इन जीन्स का प्रॉपर डिस्ट्रीब्यूशन बॉडी में नहीं होता है, जिससे थैलेसेमिया, हीमोफीलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्लेफ्ट लिप पैलेट, न्यूरोडिजेनेरैटिव जैसी एबनॉर्मलिटीज या हेरेडिटरी प्रॉब्लम्स हो सकती है। इससे निपटने के लिए हेल्थ सेक्टर में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट और दूसरे इनेशिएटिव्स लिए जा रहे हैं, जिसे देखते हुए जेनेटिक काउंसलिंग का रोल आज काफी बढ गया है। अब जो लोग इसमें करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए स्कोप कहीं ज्यादा हो गए हैं।

जॉब आउटलुक

एक अनुमान के अनुसार, करीब 5 परसेंट आबादी में किसी न किसी तरह का इनहेरेटेड डिसऑर्डर पाया जाता है। ये ऐसे डिसऑर्डर्स होते हैं, जिनका पता शुरुआत में नहीं चल पाता है, लेकिन एक जेनेटिक काउंसलर बता सकता है कि आपमें इस तरह के प्रॉब्लम होने की कितनी गुंजाइश है। काउंसलर पेशेंट की फैमिली हिस्ट्री की स्टडी कर इनहेरेटेंस पैटर्न का पता लगाते हैं। वे फैमिली मेंबर्स को इमोशनल और साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी देते हैं।

स्किल्स रिक्वायर्ड

जेनेटिक काउंसलिंग के लिए सबसे इंपॉर्टेट स्किल है कम्युनिकेशन। इसके अलावा, कॉम्पि्लकेटेड सिचुएशंस से डील करने का पेशेंस। एक काउंसलर का नॉन-जजमेंटल होना भी जरूरी है, ताकि सब कुछ जानने के बाद मरीज अपना डिसीजन खुद ले सके। उन्हें पेशेंट के साथ ट्रस्ट बिल्ड करना होगा।

करियर अपॉच्र्युनिटीज

अगर इस फील्ड में ऑप्शंस की बात करें, तो हॉस्पिटल में जॉब के अलावा प्राइवेट प्रैक्टिस या इंडिपेंडेंट कंसलटेंट के तौर पर काम कर सकते हैं। इसी तरह डायग्नॉस्टिक लेबोरेटरीज में ये फिजीशियन और लैब के बीच मीडिएटर का रोल निभा सकते हैं। कंपनीज को एडवाइज देने के साथ टीचिंग में भी हाथ आजमा सकते हैं। वहीं, जेनेटिक रिसर्च प्रोजेक्ट्स में स्टडी को-ओर्डिनेटर के तौर पर काम कर सकते हैं। बायोटेक और फार्मा इंडस्ट्री में भी काफी मौके हैं।

क्वॉलिफिकेशन

जेनेटिक काउंसलर बनने के लिए बायोलॉजी, जेनेटिक्स और साइकोलॉजी में अंडरग्रेजुएट की डिग्री के साथ-साथ लाइफ साइंस या जेनेटिक काउंसलिंग में एमएससी या एमटेक की डिग्री होना जरूरी है।

सैलरी

जेनेटिक काउंसलिंग के फील्ड में फाइनेंशियल स्टेबिलिटी भी पूरी है। हालांकि जॉब प्रोफाइल और सेक्टर के मुताबिक सैलरी वैरी करती है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाला प्रोफेशनल महीने में 50 हजार रुपये तक अर्न कर सकता है, जबकि गवर्नमेंट डिपार्टमेंट में काम करने वाले महीने में 25 से 40 हजार के बीच अर्न कर सकते हैं।

ट्रेनिंग

-गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर


-कामिनेनी इंस्टीट्यूट, हैदराबाद


-संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट, लखनऊ


-सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु


-महात्मा गांधी मिशन, औरंगाबाद


-जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली


-सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली


एक्सपर्ट बाइट

जेनेटिक काउंसलिंग इंडिया में काफी तेजी से पॉपुलर हो रहा है। एप्लीकेशन के नजरिए से इसमें बहुत स्कोप है। नई लेबोरेटरीज खुल रही हैं, जिनके लिए जेनेटिक काउंसलर्स की काफी डिमांड है। वैसे, ट्रेडिशनल हॉस्पिटल्स के अलावा फार्मा कंपनीज में, कॉरपोरेट एनवॉयरनमेंट के बीच काम करने के पूरे मौके मिलते हैं। अब तक मेडिकल प्रोफेशन से जुडे स्टूडेंट्स ही इसमें आते थे, लेकिन अब नॉन-मेडिकल स्टूडेंट्स भी आ रहे हैं।