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Showing posts from November, 2016

पॉलीमर साइंस में करियर

आज की जिंदगी में प्लास्टिक कुछ इस तरह रचा-बसा है कि उसके बिना जिंदगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती. यदि हम आसपास नजर डालें तो कम से कम दस में से आठ चीजें प्लास्टिक निर्मित मिलेंगी. 

प्लास्टिक, फाइबर और रबर- तीनों ही किसी न किसी रूप में एक ही फैमिली से हैं और इन सभी का निर्माण पॉलीमर की मदद से होता है. प्लास्टिक-पॉलीमर उत्पादों की लिस्ट काफी लंबी है. 

पॉलिमर कपड़े, रेडियो, टीवी, सीडी, टायर, पेंट, दरवाजे और चिपकाने वाले पदार्थ इसी उद्योग की देन हैं. अकेले ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में 75 प्रतिशत पार्ट्स इसी उद्योग की मदद से बनाए जाते हैं. 

इतना ही नहीं, हवाई जहाज में भी प्लास्टिक का ही परिमार्जित रूप इस्तेमाल होता है. आंकड़ों पर नजर डालें तो प्लास्टिक की खपत के मामले में चीन के बाद भारत का दूसरा नंबर है. 

प्लास्टिक इंडस्ट्री में भारत का प्रतिवर्ष 4,000 करोड़ रुपये का कारोबार है. अकेले पैकेजिंग इंडस्ट्री में ही बड़ी तादाद में प्लास्टिक का उपयोग होता है. इसमें हर साल 30 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है. 

दुनिया में हर एक व्यक्ति औसतन साल में 30 किलोग्राम प्लास्टिक का उपयोग करता है, …

प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में करियर

वर्तमान समय में प्लास्टिक आदमी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो गया है। आम आदमी की जरूरतों से लेकर उद्योग जगत तक में प्लास्टिक का प्रयोग दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग ने प्लास्टिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र को बहुत व्यापक बना दिया है। इंडस्ट्री का निरंतर विस्तार होने के कारण इसमें विशेषज्ञों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट का कार्य इस इंडस्ट्री में बहुत ही महत्वपूर्ण है। कार्य
प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट रॉ मैटीरियल को विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजार कर प्रोडक्ट्स का निर्माण करते हैं। वे शोध व अनुसंधान का कार्य भी करते हैं। इन्हीं कार्यों के फलस्वरूप हर दिन नए प्रकार के प्रोडक्ट्स बाजार में लॉन्च होते हैं। योग्यता
बीटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में प्रवेश पाने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथमेटिक्स विषयों के साथ 10+2 में कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी है। एमटेक या पीजी  डिप्लोमा करने के लिए केमिकल इंजीनियरिंग/ प्लास्टिक रबर टेक्नोलॉजी/ मैकेनिकल इंजीनियरिंग/ टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में बीटेक/ बीई डिग्री या डिप्लोमा आवश्यक है। फिजिक्स अथवा के…

पर्यावरण विज्ञान में करिअर

पर्यावरण को हो रही क्षति चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। यह क्षति इस सीमा तक पहुंच गई है कि हम प्रतिदिन कम के कम एक बार तो अवश्य भूमंडलीय तापन, जलवायु परिवर्तन, हिम पिघलने, अम्ल बारिश या प्रदूषण जैसे शब्द सुनने को मिलता है। पर्यावरणीय मामलों पर जानकारी बढ़ने से भूमंडल की सुरक्षा प्रत्येक राष्ट्र, उद्योग, गैर सरकारी संगठन, बुद्धिजीवी और आम व्यक्ति का सामान्य उद्देश्य एवं जिम्मेदारी बन गई है। इस परिदृश्य में पर्यावरण इंजीनियरी या विज्ञान उन व्यक्तियों के लिए करियर का श्रेष्ठ विकल्प है जो पर्यावरण की सुरक्षा तथा धारणीय विकास का दायित्व उठाना चाहते हैं।पर्यावरण विज्ञान पर्यावरण का अध्ययन है। इसमें मानव पर्यावरण संबंध तथा उसके प्रभाव सहित पर्यावरण के विभिन्न घटक तथा पहलू शामिल है। इस क्षेत्र में व्यवसायी, प्राकृतिक पर्यावरण के संकट की चुनौतियों का सामाना करने के प्रयत्न करते हैं। वे सभी व्यक्ति पर्यावरण विज्ञानी होते हैं जिनका अभियान पर्यावरण-प्रकृति पर्यावरण के विभिन्न स्तरों पर परिरक्षा, बहाली और सुधार करना होता है।शैक्षिक विषय के रूप में पर्यावरण विज्ञानी एक ऐसा अंतरविषयीय शैक्षिक क्षेत…

Genetic Counsellor डिकोडिंग द डिसऑर्डर

ह्यूमन बॉडी में मौजूद क्रोमोजोम्स में करीब 25 से 35 हजार के बीच जीन्स होते हैं। कई बार इन जीन्स का प्रॉपर डिस्ट्रीब्यूशन बॉडी में नहीं होता है, जिससे थैलेसेमिया, हीमोफीलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्लेफ्ट लिप पैलेट, न्यूरोडिजेनेरैटिव जैसी एबनॉर्मलिटीज या हेरेडिटरी प्रॉब्लम्स हो सकती है। इससे निपटने के लिए हेल्थ सेक्टर में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट और दूसरे इनेशिएटिव्स लिए जा रहे हैं, जिसे देखते हुए जेनेटिक काउंसलिंग का रोल आज काफी बढ गया है। अब जो लोग इसमें करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए स्कोप कहीं ज्यादा हो गए हैं।

जॉब आउटलुक

एक अनुमान के अनुसार, करीब 5 परसेंट आबादी में किसी न किसी तरह का इनहेरेटेड डिसऑर्डर पाया जाता है। ये ऐसे डिसऑर्डर्स होते हैं, जिनका पता शुरुआत में नहीं चल पाता है, लेकिन एक जेनेटिक काउंसलर बता सकता है कि आपमें इस तरह के प्रॉब्लम होने की कितनी गुंजाइश है। काउंसलर पेशेंट की फैमिली हिस्ट्री की स्टडी कर इनहेरेटेंस पैटर्न का पता लगाते हैं। वे फैमिली मेंबर्स को इमोशनल और साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी देते हैं।

स्किल्स रिक्वायर्ड

जेनेटिक काउंसलिंग के लिए सबसे इंपॉर्टेट स्…

वेटरिनरी डॉक्टर के रूप में करियर

पशु-पक्षियों में होने वाली बीमारियों का पता लगाना, सही तरीके से इलाज कर उन्हें उनकी तकलीफों से छुटकारा दिलाना ही वेटरिनरी साइंस है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में पशुओं की संख्या विश्व में सबसे अधिक है। इनकी देखभाल व इलाज के लिए वर्तमान में वेटरिनरी डॉक्टरों की भारी संख्या में कमी है। यदि किसी की जानवरों, पक्षियों के देखभाल और साथ ही चिकित्सा में रूचि है तो उसके लिए वेटरिनरी डॉक्टर का पेशा कल्याण, प्रतिष्ठा और पैसा के हिसाब से बहुत ही शानदार हो सकता है।
कार्य
वेटरिनरी डॉक्टर्स का कार्य पशुओं के स्वास्थ्य का खयाल रखना, उन्हें बीमारियों से छुटकारा दिलाना, उनके रहन-सहन व खानपान में सुधार करना तथा उनकी उत्पादन तथा प्रजनन क्षमता बढ़ाना होता है। इसके अलावा पशुओं से मनुष्यों में होने वाले रोगों से बचाव के लिए चिकित्सीय उपाय ढूंढने का कार्य भी करते हैं।
योग्यता
वेटरिनरी साइंस में गे्रजुएशन के लिए प्रवेश परीक्षा होती है। इस परीक्षा में आवेदन के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी विषयों में 50 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं पास करना अनिवार्य है। यह परीक्षा वेटरिनरी काउंसिल ऑफ इंडिया क…

ऐप डेवलपर में करियर

एक स्मार्टफोन कितना भी शानदार और नई टेक्नोलॉजी से अपग्रेडेड क्यों न हो, जब तक उसमें लेटेस्ट ऐप्स न चलते हों, ग्राहक उसे खरीदने में झिझकते हैं। इन ऐप्स के कारण ही स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसी के साथ बढ़ रहे हैं, ऐप डेवलपमेंट में करियर बनाने के अवसर। अगर आपको भी स्मार्टफोन्स की लेटेस्ट ऐप्स के बारे में जानने और उनके टेक्निकल पहलुओं को समझने में दिलचस्पी है, तो आप बन सकते हैं बेहतरीन ऐप डेवलपर। एक अनुमान के मुताबिक स्मार्टफोन्स का बाजार मोबाइल ऐप्स के कारण दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है। साफ है कि लोग अपनी सुविधा के लिए हर काम में मोबाइल ऐप्स को इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। यही कारण है कि आज फैशन से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा तक के लिए कई ऐप्स बाजार में अपनी जगह तो बना ही चुके हैं, ऐप डेवलपर्स के लिए भी उपलब्‍ध‍ियों के नए दरवाजे खुल रहे हैं। अगर आपको भी इन मोबाइल ऐप्स के फंक्शन और टेक्नोलॉजी को जानने व समझने में रुचि है, तो आप ऐप डेवेलपर के तौर पर करियर बना सकते हैं। एम्स, रायपुर में 80 पद खाली, 10 नवंबर तक करें आवेदन क्या है काम? ऐप डेवलपर…

माइक्रोबायोलॉजी में करियर

आज रॉकेट साइंस से लेकर नैनो टेक्नोलॉजी तक, स्टूडेंट्स के लिए भविष्य संवारने के तमाम अवसर हैं। ऎसी ही एक फील्ड है माइक्रोबायोलॉजी -
क्या है माइक्रोबायोलॉजी
यह बायोलॉजी की एक ब्रांच है जिसमें प्रोटोजोआ, ऎल्गी, बैक्टीरिया, वायरस जैसे सूक्ष्म जीवाणुओं (माइक्रोऑर्गेनिज्म) का अध्ययन किया जाता है।
इसमें माइक्रोबायोलॉजिस्ट इन जीवाणुओं (माइक्रोब्स) के इंसानों, पौधों व जानवरों पर पड़ने वाले पॉजीटिव व निगेटिव प्रभाव को जानने की कोशिश करते हैं। बीमारियों की वजह जानने में ये मदद करते हैं।
जीन थेरेपी तकनीक के जरिये वे इंसानों में होने वाले सिस्टिक फिब्रियोसिस, कैंसर जैसे दूसरे जेनेटिक डिसऑर्डर्स के बारे में भी पता लगाते है।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट आसपास के एरिया, इंसान, जानवर या फील्ड लोकेशन से सैंपल एकत्र करते हैं। फिर उन पर माइक्रोब्स को ग्रो करते हैं और स्टैंडर्ड लैबोरेट्री टेक्निक से विशेष माइक्रोब को अलग करते हैं। मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट खासतौर पर इस तरह की प्रक्रिया अपनाते हैं।
सैलरी पैकेज
माइक्रोबायोलॉजिस्ट की सैलरी उसके स्पेशलाइजेशन पर डिपेंड करती है। शुरूआत में एक फ्रेशर 15 से …

रिहैबिलिटेशन थेरेपी में करियर

जो लोग मेडिकल फील्ड में करियर बनाने के साथ-साथ समाज के लिए भी कुछ करना चाहते हैं, वे रिहैबिलिटेशन थेरेपिस्ट के रूप में इस सफर की शुरुआत कर सकते हैं। आज इंडिया में जिस तरह से स्पोर्ट्स इंजरीज, आर्थराइटिस, स्ट्रोक, सेरिब्रल पाल्सी, ट्रॉमेटिक ब्रेन सर्जरी, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी आदि के मामले बढ़ रहे हैं, उन्हें देखते हुए हेल्थकेयर सेक्टर में एक्सपर्ट्स या स्पेशलिस्ट मेडिकल प्रोफेशनल्स की मांग में भी तेजी आई है मसलन-फिजियोथेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनलिस्ट आदि। लेकिन इनमें अगर रिहैबिलिटेशन थेरेपिस्ट की बात करें, तो वह मरीजों को संपूर्ण रूप से किसी भी तरह के ट्रॉमा से निकालने में मददगार साबित होते हैं।
बेसिक स्किल्स
एक सक्सेसफुल रिहैबिलिटेशन थेरेपिस्ट बनने के लिए युवाओं के पास धैर्य के साथ-साथ अच्छी कम्युनिकेशन और एनालिटिकल स्किल होनी जरूरी है। इसके अलावा, एकेडमिक और रिसर्च बैकग्राउंड भी स्ट्रॉन्ग होना चाहिए। कैंडिडेट को मोटिवेटेड भी होना होगा। उन्हें स्पीच थेरेपिस्ट, रिहैबिलिटेशन काउंसलर आदि से तालमेल रखना आना चाहिए।
एजुकेशनल क्वालिफिकेशन
रिहैबिलिटेशन थेरेपिस्ट बनने के लिए इस फील्ड में ब…

एमएलटी में करियर

डॉक्टर नहीं बन सेके तो क्या, मेडिकल फील्ड में और भी ऑप्शन हैं। आप के लिए माइक्रोबायो, बायोटेक या एमएललटी जैसे कोर्स हैं। लेकिन करियर स्कोप के लिहाज से एमएलटी (मेडिकल लैबोरेट्री टेक्नोलॉजी) कोर्स करियर प्रोस्पेक्ट के लिहाज से ज्यादा बढि़या कहा जा सकता है। इसके कई फायदे हैं। एमएलटी में बीएससी करने के बाद आप आगे एनाटोमी समेत नॉन क्लीनिकल साइंस के तमाम सब्जेक्ट की पढ़ाई कर सकते हैं जो एडवांटेज माइक्रोबायो या बायोटेक की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को नहीं है। 
कई ऑप्शन 
यह एक ऐसा फील्ड है जिसमें सरकारी और प्राइवेट, दोनों सेक्टरों में करियर बनाने के पर्याप्त अवसर हैं। आप अपना करियर बखूबी संवार सकते हैं। लैब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कई कोर्स हैं। जैसे, बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेट्री टेक्नोलॉजी (बीएमएलटी), डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेट्री टेक्नोलॉजी (डीएमएलटी), सर्टिफिकेट कोर्स। बीएससी के बाद आपके पास किसी सब्जेक्ट में स्पेशयलाइजेशन का भी अवसर होता है। 
जिपमेर, पुद्दुचेरी के एक्स स्टूडेंट और चितरंजन रेल फैक्ट्री के अस्पताल में कार्यरत मनोरंजन कुमार बताते हैं कि मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस…