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Showing posts from September, 2015

सुगंध चिकित्सा में करियर

ब्रिटेन और यूरोप में लोकप्रियता हासिल करने के बाद सुगंध चिकित्सा ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। जहां तक भारत की बात की है तो हमारी सभ्यता में प्राचीनकाल से ही सुगंध चिकित्सा का बोलबाला रहा है। आयुर्वेद में सुगंधित तेलों से शरीर की मालिश करने की विधि का उपयोग होता है। इसके अलावा इत्र, धूप, अगरबत्ती जैसी वस्तुएं भी भारतीय सभ्यता से बहुत लंबे समय से जुड़ी हुई हैं। आज सुगंध चिकित्सा पद्धति न सिर्फ इलाज, बल्कि रोजगार के लिहाज से भी भारत में व्यापक संभावनाओं से भरी है।

बढ़ती लोकप्रियता
प्राकृतिक चीजों के प्रति बढ़ते रुझान के कारण आज सेहत सुधार में भी सुगंध चिकित्सा का इस्तेमाल किया जाने लगा है। भारत में सुगंध चिकित्सा के माध्यम से प्रकृति की ओर वापसी की धारणा को फिर से प्रचलित करने का श्रेय अगर किसी को दिया जाए तो इस कतार में शहनाज हुसैन, ब्लॉसम कोचर और भारती तनेजा जैसे नाम सामने आते हैं। वर्तमान में आलम यह है कि विज्ञान के विकास के चलते आज यह क्षेत्र बेहद विस्तृत हो गया है और एक इंडस्ट्री के रूप में तब्दील हो चुका है। आज भारी संख्या में लोग अपनी …

वेडिंग प्लानर : करियर की शानदार प्लानिंग

आज के युग में युवा पीढी अपने करियर को लेकर सजग हो गयी है. हर कोई करियर के क्षेत्र में एक दूसरे से आगे बढना चाहता है. युवाओ के लिये करियर बनाने के लिये कई रास्ते है और वह किसी भी क्षेत्र को चुन कर अपना करियर बना सकता है. इंडियन वेडिंग इंडस्ट्री युवाओं के इन्हीं सपनों को पूरा करने का एक मौका दे रही है. आज बडी तादाद में युवा, वेडिंग प्लानर के तौर पर अपने करियर का आगाज कर रहे हैं, क्योंकि वेडिंग प्लानिंग में उन्हें अपनी क्रिएटिविटी को पेश करने का सुनहरा अवसर मिल रहा है. आज के दौर में अगर आपके पास क्रिएटिव आइडिया है और उसे हकीकत में बदलने का हुनर आता है, तो अपनी मनपसंद फील्ड में ऊंची उडान भरने के लिए पूरा आकाश है. इन दिनों अधिकतर युवा अपने पैशन को फॉलो करते हुए ऎसा करियर चुन रहे हैं, जिसमें काम करने का अपना एक अलग मजा हो. जहां मेहनत हो, तो साथ में पैसा भी भरपूर हो. कोर्स और ट्रेनिंग - वैसे तो इस फील्ड में आने के लिए किसी विशेष एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की जरूरत नहीं होती, लेकिन ग्रेजुएशन करना अच्छा रहेगा. इंडिया में कुछ इंस्टीट्यूट्स हैं, जो वेडिंग प्लानिंग में सर्टिफिकेट या डिप्लोमा कोर्स संच…

साउंड इंजीनियरिंग: करियर की मीठी धुन

अगर आपको इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर काम करने में आनंद आता है, म्यूजिक और साउंड इफेक्ट्स आपको आकर्षित करते हैं तो आप साउंड इंजीनियिरग के क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। यह प्रोफेशन अपने अंदर कई खूबियों को समेटे है। इसमें करियर की संभावनाओं के बारे में बता रही हैं नमिता सिंह

करीब पांच साल पूर्व डैनी बॉयल की स्लमडॉग मिलियनेयर ने शानदार तरीके से म्यूजिक एवं साउंड का अवॉर्ड जीता। इस उपलब्धि से देश को न सिर्फ शानदार म्यूजिक बनाने वाली शक्ति के रूप में जाना गया, बल्कि इस फिल्म ने लोगों को साउंड इंजीनियिरग जैसे प्रोफेशन के प्रति आकर्षित भी किया। आज यह प्रोफेशन अपनी अलग पहचान बना चुका है और लोग इस ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

क्या है साउंड इंजीनियरिंग
सिनेमैटोग्राफर एवं कैमरामैन की तरह साउंड इंजीनियरों को भी डायरेक्टर के धुंधले विचारों को मूर्त रूप देना होता है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक व मैकेनिकल उपकरणों की सहायता से किसी भी आवाज को कैप्चर करने, रिकॉर्डिंग करने, कॉपी करने, उनमें एडिटिंग करने, मिक्सिंग करने एवं उसे नया रूप देने सरीखे कार्य किए जाते हैं। इसके अंतर्गत प्रोडक्शन एवं पोस्ट प्रोडक्शन जैस…

होम साइंस में भी संभव है बेहतर कॅरियर और रोजगार की तलाश

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दसवीं या बारहवीं पास करने वाले छात्रों के लिए साइंस, कॉमर्स और ह्यूमेनिटीज स्ट्रीम के बाद होम साइंस के रूप में एक और विकल्प होता है। करियर के लिहाज से यह विकल्प छात्रों और अभिभावकों के बीच बहुत ज्यादा चर्चित नहीं है। इसकी वजह कुछ गलत धारणाएं हैं, जो होम साइंस स्ट्रीम में मौजूद अवसरों की जानकारी न होने से छात्रों और अभिभावकों में बनी हैं। आज के कॉलम में पढ़िए होम साइंस स्ट्रीम और उससे जुड़े तरक्की के आयामों के बारे में।
क्या है होम साइंस स्ट्रीम
यह एक ऐसी स्ट्रीम है, जिसे भ्रांतिवश सही संदर्भो में न समझकर सिर्फ लड़कियों के लिए मान लिया जाता है। काफी अभिभावक लड़कियों की शिक्षा को जरूरी मानते हैं, लेकिन वह इससे भी ज्यादा अहमियत इस बात को देते हैं कि लड़कियां घर और उसके कामकाज को संभालन में ज्यादा कुशल हों। होम साइंस की पढ़ाई में होम मैनेजमेंट के प्रशिक्षण के अलावा कई तरह के रोजगारों में उपयोगी कौशल का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसलिए यह कहना ठीक नहीं है कि यह स्ट्रीम सिर्फ लड़कियों के लिए ही उपयोगी है। इस स्ट्रीम के तहत मिलने वाले प्रशिक्षण का लाभ लड़के भी रोजगार कुशलता (इंप…

एस्ट्रोनॉमी में बनाएं अपना कॅरियर

आसमान में लाखों जगमगाते एवं टिमटिमाते तारों को निहारना दिमाग को सुकून से भर देता है। इन्हें देखने पर मन में यही आता है कि अगली रात में पुन: आने का वायदा कर जगमगाते हुए ये सितारे आखिर कहां से आते हैं और कहां गायब हो जाते हैं?  हालांकि,  इसी तरह के कई अन्य सवालों जैसे उल्कावृष्टि, ग्रहों की गति एवं इन पर जीवन जैसे रहस्यों से ओत-प्रोत बातें सोचकर व्यक्ति खामोश रह जाता है। एस्ट्रोनॉमी (Astronomy) या खगोल विज्ञान वह करियर है, जो इन सभी रहस्यों, सवालों एवं गुत्थियों को सुलझाता है। अगर आप ब्रह्मांड (Universe) के रहस्यों से दो-चार होकर अंतरिक्ष को छूना चाहते हैं तो यह करियर आपके लिए बेहतर है। वैसे भी कल्पना चावला (Kalpana Chawla), राकेश शर्मा (Rakesh Sharma) तथा सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) जैसे प्रतिभावान एस्ट्रोनॉट (Astronaut) के कारण आज यह करियर युवाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
एस्ट्रोनॉमी (Astronomy) क्या है
एस्ट्रोनॉमी (Astronomy) वह विज्ञान है, जो पृथ्वी के वातावरण से परे अंतरिक्ष (Space) से संबंधित है। यह ब्रह्मांड में उपस्थित खगोलीय पिंडों (Celestial Bodies) की ग…

अतीत की खोज बनाएगा भविष्य

हजारों साल पहले मानव जीवन कैसा रहा होगा? किन-किन तरीकों से जीवन से जुड़े अवशेषों को बचाया जा सकता है? एक सभ्यता, दूसरी सभ्यता से कैसे अलग है? क्या हैं इनकी वजहें? ऐसे अनगिनत सवालों से सीधा सरोकार होता है आर्कियोलॉजिस्ट्स का।

अगर आप भी देश की धरोहर और इतिहास में रुचि रखते हैं तो आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में एक अच्छे करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें आपको नित नई चीजें जानने को तो मिलेंगी ही, सैलरी भी अच्छी खासी है। आर्कियोलॉजी के अंतर्गत पुरातात्विक महत्व वाली जगहों का अध्ययन एवं प्रबंधन किया जाता है।

हेरिटेज मैनेजमेंट के तहत पुरातात्विक स्थलों की खुदाई का कार्य संचालित किया जाता है और इस दौरान मिलने वाली वस्तुओं को संरक्षित कर उनकी उपयोगिता का निर्धारण किया जाता है। इसकी सहायता से घटनाओं का समय, महत्व आदि के बारे में जरूरी निष्कर्ष निकाले जाते हैं।


जरूरी योग्यता
एक बेहतरीन आर्कियोलॉजिस्ट अथवा म्यूजियम प्रोफेशनल बनने के लिए प्लीस्टोसीन पीरियड अथवा क्लासिकल लैंग्वेज, मसलन पाली, अपभ्रंश, संस्कृत, अरेबियन भाषाओं में से किसी की जानकारी आपको कामयाबी की राह पर आगे ले जा सकती …

एग्रिकल्चरल इंजीनियरिंग में करियर

एग्रिकल्चरल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में मौजूद अवसरों के बारे में आमतौर पर स्टूडेंट्स को कम ही मालूम होता है। वैसे भी जिन क्षेत्रों के बारे में खूब जानकारी मौजूद है, हम उन्हीं में अपना करियर बनाना चाहते हैं। नए और अपेक्षाकृत कम पॉपुलर क्षेत्रों में करियर बनाने के बारे में हम सोचते ही नहीं हैं। अगर आप एग्रिकल्चरल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो यहां आपके लिए कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं।

जैसा कि नाम से ही जाहिर है एग्रिकल्चरल इंजीनियरिंग में एग्रिकल्चर, फूड और बायॉलजिकल सिस्टम्स में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई जाती है। एग्रिकल्चरल इंजीनियर्स एग्रिकल्चरल प्रॉडक्शन और प्रॉसेसिंग के क्षेत्र में इंजीनियरिंग साइंस और टेकनॅलजी में तमाम तरह के डेवलपमेंट करते हैं। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का मैनेजमेंट भी इनकी जिम्मेदारी में शामिल होता है। एग्रिकल्चरल प्रॉडक्शन बढ़ाने के लिए ये लोग अपनी स्किल्स का इस्तेमाल करते हैं।

एग्रिकल्चरल इंजीनियर्स को इस तरह से ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे वे मिट्टी, पानी और फसलों आदि पर अपने इंजीनियरिंग सिद्धांतों का उपयोग कर …

टेलीकॉम इंडस्ट्री में एंट्री

हर तरफ आसमान छूता हुआ टॉवर .. रिलायंस, एयरटेल, बीएसएनएल, टाटा इंडिकॉम.. दिखाई पड़ रहा है, जो
दिन-ब-दिन मजबूत होते भारतीय दूरसंचार या टेलिकॉम क्षेत्र की सफलता की कहानी को बयां करता है। दूरसंचार देश के शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों की शक्ल-ओ-सूरत को भी बहुत तेजी से बदल रहा है। भारत में नई-नई कंपनियां भी आ रही हैं और अब तीसरी पीढ़ी की सेवाएं (थ्रीजी) भी शुरू हो चुकी हैं। खास बात यह है कि उपभोक्ताओं की संख्या भी लगातार बढ़ती ही जा रही है। सिर्फ फरवरी 2009 में इंडस्ट्री ने 1.3 करोड़ उपभोक्ताओं को जोड़ा। एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2010 तक भारत में तकरीबन 500 मिलियन (50 करोड़) मोबाइल यूजर हो जाएंगे। इस क्षेत्र में व्याप्त संभावनाओं को देखते हुए माना जा रहा है कि करियर के लिहाज से यह सेक्टर आने वाले दिनों में भी काफी हॉट रहेगा। टेलिकॉम सेक्टर में तीव्र विकास के साथ ही इसमें रोजगार के अवसर में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। माना जा रहा है कि, इस क्षेत्र में नए ऑपरेटर द्वारा कारोबार की शुरुआत और पुराने ऑपरेटर द्वारा नए क्षेत्र में विस्तार की वजह से टेलिकॉम सेक्टर में इस साल करीब…

आयुर्वेद में कैरियर

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की विशेषता यह है कि इसमें रोग का उपचार इस प्रकार किया जाता है कि रोग जड़ से नष्ट हो जाए और दोबारा उत्पन्न न हो। तमाम सुख-सुविधाओं के रहते हुए भी स्वास्थ्य की बिगड़ती स्थिति आज मुनष्य के लिए चिंता का सबब बन गई है…
आज समस्त विश्व का ध्यान आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली की ओर आकर्षित हो रहा है। इसके लाभों को देखते हुए विदेशी भी भारत की अनेक जड़ी- बूटियों का उपयोग अपनी चिकित्सा पद्धति में कर रहे हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की विशेषता यह है कि इसमें रोग का उपचार इस प्रकार किया जाता है कि रोग जड़ से नष्ट हो जाए और दोबारा उत्पन्न न हो। तमाम सुख-सुविधाओं के रहते हुए भी स्वास्थ्य की बिगड़ती स्थिति आज मुनष्य के लिए चिंता का सबब बन गई है। आधुनिकता ने आयाम तो कई स्थापित कर लिए, पर स्वास्थ्य का स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। आजकल कई चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित हैं और आयुर्वेद भी उनमें से एक है। इस पद्धति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमें रोग को जड़ से नष्ट करने पर जोर दिया जाता है। आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह कला, विज्ञा…

होम्योपैथ एक तेजी से उभरता कॅरियर

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होम्योपैथी इलाज की एक ऐसी पद्धति है, जो इन दिनों तेजी से लोकप्रिय हो रही है और यह लोकप्रियता केवल मरीजों के बीच ही नहीं बढ़ रही है, बल्कि जो लोग डॉक्टर बनना चाहते हैं, वे भी इसमें रुचि ले रहे हैं। होम्योपैथी में मौजूद करियर ऑप्शंस के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं: 
होम्योपैथी डॉक्टर को हर कोई पसंद करता है। ऐसा क्यों है, इसके पीछे तमाम कारण हैं। सबसे बड़ी वजह तो यही है कि ये डॉक्टर मीठी गोलियों से इलाज करते हैं और दूसरा कारण यह कि बगैर मरीज को देखे केवल लक्षणों के आधार पर भी कई बार ये इलाज कर देते हैं। भले ही होम्योपैथी डॉक्टर आपको मीठी गोलियां देता हो, लेकिन इस पद्धति से इलाज करना उतना आसान नहीं है। 
होम्योपैथी में इलाज की पद्धति का आधार यह है कि संसार में हर व्यक्ति का अलग मेंटल, फिजिकल और इमोशनल सेटअप होता है। ऐसे में आप तब तक किसी मरीज का इलाज नहीं कर सकते, जब तक कि आप उसके पूरे सेटअप को न जान लें। इस पद्धति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रोगी को ट्रीट करने में भरोसा करती है, केवल रोग को नहीं। इसमें दिल के रोगों के अलावा बढ़ती उम्र, वायरल और फंगल इंफेक्शन, गठिया, स्ट्रेस, अस्थम…

ऑक्यूपेशनल थेरेपी: सेवा और संवेदना की झप्पी

ऑक्यूपेशनल थेरेपी के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। आइए जानते हैं इस क्षेत्र के बारे में-
बदलती जीवनशैली और काम के सिलसिले में भागमभाग के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर कई तरह के प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहे हैं, जिनमें शारीरिक व मानसिक अशक्तता प्रमुखता से शामिल हैं। इनसे निजात पाने के लिए उन्हें एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ रही है। संबंधित एक्सपर्ट विभिन्न विधियों से इलाज करते हुए उन्हें समस्या से मुक्ति दिलाते हैं। साथ ही उन्हें मानसिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं। कई बार डॉंक्टर के देख लेने के बाद इनकी जरूरत पड़ती है तो कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें डॉंक्टर के देखने से पहले ही इनकी सेवा ली जाती है। खासकर मेडिकल और ट्रॉमा सेंटर इमरजेंसी व फ्रैक्चर मैनेजमेंट में तो इनकी विशेष जरूरत पड़ती है। यह पूरा ताना-बाना ऑक्यूपेशनल थेरेपी के अंतर्गत बुना जाता है। इससे जुड़े प्रोफेशनल्स को ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट नाम दिया गया है। इनका काम फिजियोथेरेपिस्ट से मिलता-जुलता है। यही कारण है कि मेडिकल व फिटनेस एरिया में इनकी भारी मांग है।
ऑक्यूपेशनल थेरेपी की जरूरत
ऑक्यूपेशनल थेरेपी …

मेडिकल टूरिज्म में कैरियर संभावनाएं

पिछले कुछ वर्षों से भारत मेडिकल टूरिज्म के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन बना हुआ है। सस्ते और क्वालिटी मेडिकल सर्विसेज के कारण दुनियाभर से लोग यहां इलाज करवाने आ रहे हैं। हर साल लाखों की संख्या में आने वाले मेडिकल टूरिस्ट की वजह से इस फील्ड में जॉब के मौके भी खूब देखे जा रहे हैं। अगर आप इस फील्ड से रिलेटेड डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर लेते हैं, तो इसमें शानदार करियर बना सकते हैं…देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और जॉब क्रिएशन में इंडियन हेल्थकेयर इंडस्ट्री का बड़ा रोल माना जा रहा है। ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन, बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज की एक ज्वाइंट रिपोर्ट के अनुसार, 2020 तक हेल्थकेयर सेक्टर में करीब 40 मिलियन से ज्यादा जॉब जेनरेट होने का अनुमान है। उम्मीद की जा रही है कि दुनिया के दूसरे विकसित देशों के मुकाबले भारत में उपलब्ध सस्ते मेडिकल ट्रीटमेंट और एजुकेशन सर्विसेज के कारण यह मेडिकल टूरिज्म का ग्लोबल हब बन सकता है। हर साल लाखों की तादाद में मेडिकल ट्रैवलर्स या टूरिस्ट्स भारत का दौरा करते हैं। करीब 60 से ज्यादा देशों के मरीज इंडिया इला…

क्लिनिकल रिसर्च को बनायें अपना करियर

जब कोई नई दवा लांच करने की तैयारी होती है, तो दवा लोगों के लिए कितनी सुरक्षित और असरदार है, इसके लिए क्लीनिकल ट्रायल होता है। भारत की जनसंख्या और यहां उपलब्ध सस्ते प्रोफेशनल की वजह से यह कारोबार तेजी से फलने-फूलने लगा है। यदि आप भी इस बढ़ते हुए बाजार का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो क्लीनिकल ट्रायल या क्लीनिकल रिसर्च से जुड़े कोर्स कर सकते हैं…
क्लीनिकल रिसर्च एक ऐसा प्रोसेस है, जिसके माध्यम से तमाम नई दवाओं को बाजार में लांच करने से पहले उन्हें जानवरों और इनसानों पर टेस्ट किया जाता है। मोटे तौर पर किसी दवा को लैब से केमिस्ट की शॉप तक पहुंचने में 12 साल का वक्त लग जाता है। जानवरों पर प्री-क्लीनिकल टेस्ट करने के बाद इन दवाओं को इनसानों पर टेस्ट किया जाता है। जिसके तीन फेज होते हैं। टेस्टिंग के लिए इन तीनों फेजों में पहले के मुकाबले ज्यादा संख्या में लोगों को शामिल किया जाता है। इन तीनों फेजों का टेस्ट हो जाने के बाद कंपनी सभी नतीजों को एफडीए या टीपीडी को सौंप देती है, जिसके आधार पर एनडीए(न्यू ड्रग अप्रूवल) मिलता है। एक बार एनडीए हासिल हो जाने के बाद कंपनी उस ड्रग को मार्केट मे…

ऑप्टोमेट्री में संवारें भविष्य

आँखें हैं तो जहान है।' यह उक्ति शायद इसीलिए कही जाती है क्योंकि आँखों के माध्यम से ही दुनिया के रंगों और प्रकृति की छटाओं के दर्शन किए जा सकते हैं। लेकिन ऐसे करोड़ों लोग हैं जो किसी न किसी तरह के नेत्र रोग से ग्रस्त होकर इस दुनिया को देखनहीं पाते हैं। ऐसे में नेत्र रोग विशेषज्ञ वह शख्स होता है, जो सूनी आँखों को रोशन कर नेत्रहीनों की जिंदगी में उजियारा भर सकता है।

बहुत डिमांड है ऑप्थल्मोलॉजिस्ट की
भारत में करीब एक करोड़ लोग अंधत्व के शिकार हैं। इनमें से अधिकांश दृष्टिहीन लोग ऐसे हैं जो छोटे-मोटे नेत्र रोगों का शिकार होकर इस स्थिति को पहुँचे हैं। यदि उन्हें समय पर नेत्र चिकित्सा मिल जाती तो उन्हें दृष्टिहीन होने से बचाया जा सकता था। लेकिन योग्य क्वालिफाइड नेत्र रोग विशेषज्ञ के अभाव में अंधत्व बढ़ा है।

लेकिन अब धीरे-धीरे हालात सुधरे हैं और लोगों की नेत्र सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने से नेत्र रोग विशेषज्ञों की माँग बढ़ी है। फिर भी माँग की तुलना में पूर्ति कम है। यही कारण है कि नेत्र रोग विशेषज्ञों की साख भी बढ़ी है और करियर निर्माण के अवसर भी खूब बढ़े हैं।

क्या करते हैं ऑप्थल्मोलॉ…

फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट हेल्थ भी, वेल्थ भी

फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट में कैरियरआमतौर पर यह समझा जाता है कि मेडिसिन की दुनिया डॉक्टरों, मरीजों के इलाज और दवाएं देने तक ही सीमित है लेकिन नहीं। मेडिसिन यानी फार्मास्युटिकल का क्षेत्र आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ती इंडस्ट्री में से एक है। यही कारण है कि आज इसमें दवाओं के वितरण, मार्केटिंग, पब्लिक रिलेशंस, फार्मा मैनेजमेंट आदि में स्किल्ड लोगों की मांग में काफी तेजी आ गई है। भारत जैसी विशाल आबादी और बेरोजगारी वाले देश में यह क्षेत्र भी जॉब की दृष्टि से संभावनाओं से भरा हुआ है। यदि आपने बीएससी, बीफार्मा या डीफार्मा करके फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट में डिप्लोमा कर लिया, तो फिर राष्ट्रीय/बहुराष्ट्रीय कंपनियों में विभिन्न पदों पर नौकरियां बाहें पसारे खड़ी है। खास बात तो यह है कि इस फील्ड में आकर्षक वेतन भी मिल रहा है और प्रोग्रेस की संभावनाएं भी भरपूर हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मा मार्केटिंग, लखनऊ के निदेशक प्रो. ऋषि मोहन कहते हैं कि सामान्य उत्पादों की मार्केटिंग के लिए जहां सीधे डीलर या कस्टमर से संपर्क करना होता है, वहीं दवाओं की मार्केटिंग में डॉक्टर एक अहम कड़ी होता …