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Showing posts from May, 2018

वाइल्ड लाइफ कन्जर्वेशनिस्ट

अगर आपको वन क्षेत्र और जंगली जीव-जन्तुओं से प्यार है, वन क्षेत्र  में समय बिताने में आपको आनंद आता है तो आप इस क्षेत्र में अपना बेहतर भविष्य बना सकते हैं। वाइल्ड लाइफ कन्जर्वेशनिस्ट बन कर आप अपनेकरियर को नए आयाम दे सकते हैं। कैसे पहुंचें मुकाम परकिसी भी बायोलॉजिकल क्षेत्र में बैचलर के बाद एन्वायर्नमेंटल साइंस या वाइल्ड लाइफ बायोलॉजी तथा कन्जर्वेशन या इकोलॉजी में मास्टर्स करना अच्छा रहेगा। इस क्षेत्र में इस विशेषज्ञता के साथ आप अर्थपूर्ण रिसर्च वर्क कर पाएंगे। योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से विज्ञान विषयों के साथ स्नातक डिग्री अनिवार्य है। कहां से करें कोर्स वाइल्ड लाइफ में मास्टर डिग्री या पीएचडी कर सकते हैं। वाइल्ड लाइफ कन्जर्वेशन में मास्टर डिग्री कराने वाले दो संस्थान हैं। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तथा नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज। इन्हें वाइल्ड लाइफ कन्जर्वेशन सोसायटी तथा सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ स्टडीज का सहयोग प्राप्त है।   पारिश्रमिकएंट्री लेवल पर रिसर्चर या जूनियर रिसर्च फेलो को 9 से 12 हजार प्रतिमाह के बीच पारिश्रमिक मिलता है। पोस्ट डॉक्टोरल छात्रों/सीनि…

BMS में कैरियर

आज के इस मार्केटिंग के दौर में कई मल्टीनेशनल कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं. इन अलग-अलग मल्टीनेशनल कंपनियों में मैनेजमेंट के छात्रों के लिए ढ़ेरों करियर के विकल्प हैं. मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की चाह रखनेवाले छात्रों के लिए बीएमएस एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकता है. 12वीं के बाद बीएमएस में तीन साल की बैचलर डिग्री लेकर आप मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं. आइए BMS में कैरियर के बारे में विस्तार से जानते हैं. BMS में कैरियर - बीएमएस का मतलब है 'बैचलर इन मैनेजमेंट स्टडीज '. बीएमएस कोर्स के दौरान मैनेजमेंट के बारे में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल नॉलेज भी दी जाती है. बीएमएस में थ्योरी के अंतर्गत कॉमर्स, ऑर्गेनाइजेशनल बिहैवियर, मैथ्स और मार्केटिंग फाइनेंस जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. जबकि प्रैक्टिकल नॉलेज के लिए कई सारे प्रोजेक्ट दिए जाते हैं. इस दौरान छात्रों को सिखाया जाता है कि कैसे बिजनेस की फील्ड में अलग-अलग हालात का सामना करना पड़ता है. BMS में कैरियर - एडमिशन के लिए ज़रूरी शर्तें इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए बारहवीं में कम से कम 45 प्रतिश…

केमिस्‍ट्री में करियर

हम बहुत सी ऐसी चीजें लेते हैं, जो केमिकल प्रोसेस के जरिए बनी होती हैं। दवाई हो या कॉस्मेटिक्स सभी केमिकल प्रक्रिया के जरिए ही अपना स्वरूप पाते हैं। साइंस की एक प्रमुख ब्रांच होने के चलते केमिस्ट्री एक तरफ  भौतिकी तो दूसरी तरफ  बायोलॉजी को लेते हुए सभी चीजों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। वैसे केमिस्ट्री के जरिये जब आप तमाम प्रयोग कर कुछ नए तत्त्व बनाते हैं तो यह प्रक्रिया बहुत ही रोमांचकारी होती है। इस फील्ड में काम करने पर आपको पॉलिमर साइंस, फूड प्रोसेसिंग, एनवायरन्मेंट मानिटरिंग, बायो टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में करियर निर्माण का मौका मिलता है। साइंस के हरेक विषय की खासियत है कि वह अपनी अलग-अलग शाखाओं में करियर और रिसर्च के ढेरों बेहतरीन अवसर देता है। केमिस्ट्री भी ऐसा ही एक विषय है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाला यह विज्ञान नौकरी के मौकों से भरपूर है। साथ ही परंपरागत सोच रखने वालों को भी अब यह समझ आ गया है कि केमिस्ट्री प्रयोगशाला के बाहर भी ढेरों अवसर पैदा कर रही है और इंडस्ट्री आधारित बेहतरीन जॉब प्रोफाइल्स उपलब्ध करवा रही है। ऐसे में भविष्य के लिहाज से यह…

कमर्शियल पायलट में करियर

कमर्शियल पायलट का काम बेशक रोमांचकारी है, पर यह बेहद जिम्मेदारी और समझदारी की मांग भी करता है। यदि आप इस जिम्मेदारी को उठाने का साहस खुद में पाते हैं तो एविएशन क्षेत्र का यह महत्वपूर्ण काम आपको एक अच्छा करियर बनाने का अवसर प्रदान कर सकता है। कैसे, बता रहे हैं वेदव्रत काम्बोज एविएशन सेक्टर में हाल की तमाम उठा-पटक के बावजूद भारत में यह क्षेत्र तेजी से विकास कर रहा है। यदि इस विकास को आंकड़ों में आंका जाए तो यह सेक्टर 25 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है। नई-पुरानी लगभग सभी एयरलाइंस जहाजों के नए बेड़े बनाने में जुटी हैं। इसके अलावा देश के बड़े उद्योगपतियों का निजी विमान रखने की ओर रुझान बढ़ रहा है। जब इंडस्ट्री विकास करेगी और विमानों की संख्या में इजाफा होगा तो कमर्शियल पायलटों की मांग भी बढ़ेगी। फिलहाल भारत में कमर्शियल पायलट मांग के हिसाब से काफी कम हैं। परिणामस्वरूप उपलब्ध पायलटों को ऊंचे से ऊंचे वेतन पर रखा जा रहा है। अगर आपने 12वीं साइंस (फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथमेटिक्स) से की हुई है या करने जा रहे हैं तो आपके लिए यहां अच्छे अवसर हैं। एक कमर्शियल पायलट का काम हालांकि काफी रोमांच…

फर्नीचर डिजाइनिंग में करियर

एक समय तक फर्नीचर डिजाइनिंग का काम कारपेंटर ही करते थे, लेकिन आज के दौर में यह एक अलग प्रोफेशन बन चुका है। अगर आप की भी इसमें रुचि है और आप क्रिएटिव हैं तो फर्नीचर डिजाइनर बनकर करियर संवार सकते हैं। संबंधित ट्रेनिंग हासिल कर आप किसी कंपनी में जॉब कर सकते हैं या फिर अपना कारोबार भी शुरू कर सकते हैं। इस बारे में विस्तार से जानिए

पर्सनल स्किल्स
फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आपमें क्रिएटिव और आर्टिस्टिक सेंस का मजबूत होना अति आवश्यक है, साथ ही कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी चाहिए। मार्केटिंग स्किल्स और बिजनेस की भी समझ अनिवार्य है। फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में काम करने के लिए मार्केट में डिजाइनिंग को लेकर क्या कुछ नया किया जा रहा है, उस ओर भी पैनी नजर रखनी होती है क्योंकि फर्नीचर डिजाइनर का काम एक बेजान लकड़ी में डिजाइन के जरिए उसे आकर्षक रूप देना होता है।

बढ़ रही है डिमांड
फर्नीचर डिजाइनिंग व्यवसाय अब केवल कारपेंटर का काम नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कुशल डिजाइनरों की मांग व्यापक स्तर पर बढ़ी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले पांच वर्षों में बाजार में तकरीबन एक लाख…

जियोस्पेशल टेक्नोलॉजी में करियर

जियोइंफॉर्मेटिक्स के बढ़ते महत्व का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अब यह सरकारी और निजी क्षेत्र के संगठनों में बड़े निर्णयों का आधार बनने लगा है। इसकी मदद से मिलिट्री, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क प्लानिंग, एग्रीकल्चर, मीटिअरोलॉजी, ओशियनोग्राफी और मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट से संबंधित कार्य पहले की तुलना में काफी सुगम हो गए है।

त आपके शहर, घर और पसंदीदा जगहों की सेटेलाइट तस्वीरों की हो या फिर उस जीपीएस तकनीक की, जिसकी मदद से आप कोई पता तलाशते हैं, किसी अनजाने क्षेत्र में जाने के लिए आसान रास्ता ढूंढ़ते हैं या कोई नजदीकी होटल खोजते हैं। कुछ साल पहले तक कोरी कल्पना लगने वाली ये तकनीकें अब हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। यह सब संभव हुआ है जियोस्पेशल टेक्नोलॉजी के कारण।
क्या है यह तकनीक
जीआईएस या जियोमेटिक्स एक नई वैज्ञानिक अवधारणा है, जिसका इस्तेमाल जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन साइंस या जियोस्पेशल इंफॉर्मेशन स्टडीज में होता है। अकादमिक रूप से यह जियोइंफॉर्मेटिक्स विषय की एक शाखा है। इस विषय के सिद्धांतों को आधार बनाकर तैयार की गई तकनीकों को जियोस्पेशल टेक्नोलॉजी कहा जाता है। इस तकनीक की मदद से सभी…

न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में करियर

भारत-अमेरिकी न्यूक्लियर डील के बाद देश में न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) के उत्पादन में अत्यधिक बढ़ोतरी की संभावनाएँ देश-विदेश के इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा जताई जा रही हैं। फिलहाल देश के कुल ऊर्जा उत्पादन में परमाणु रिएक्टरों के जरिए मात्र तीन प्रतिशत विद्युत ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।
बायोफ्यूल की लगातार घटती मात्रा और देश में बढ़ती ऊर्जा की माँग देखते हुए ऊर्जा उत्पादन पर बल देना सरकार की प्राथमिकता बन गया है। इसी सोच के तहत वर्ष 2050 तक परमाणु रिएक्टरों के माध्यम से कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा उत्पादित करने की दीर्घकालिक योजना तैयार की गई है। इसी क्रम में वर्ष 2020 तक बीस हजार मेगावाट विद्युत का अतिरिक्त उत्पादन परमाणु ऊर्जा स्रोतों से किया जाएगा।
जाहिर है, ऐसे परमाणु रिएक्टरों के निर्माण कार्य से लेकर इनके संचालन और रख-रखाव तक में ट्रेंड न्यूक्लियर प्रोफेशनल की बड़े पैमाने पर आवश्यकता पड़ेगी। इस प्रकार के कोर्स देश के चुनींदा संस्थानों में फिलहाल उपलब्ध हैं लेकिन समय की मांग देखते हुए यह कहा जा सकता है कि न सिर्फ सरकारी बल्कि निजी क्षेत्र के संस्थान भी इ…

साइबर लॉ एक्सपर्ट इंटरनेट के डिटेक्टिव

आज शायद ही कोई स्टूडेंट या प्रोफेशनल हो, जिसका ई-मेल एकाउंट या सोशल वेबसाइटï्स पर कोई प्रोफाइल न हो। इंटरनेट पर समय बिताने या काम करने वाले लोगों की संख्या भी दिनों-दिन बढ़ रही है। अब तो मोबाइल और स्मार्टफोन यूजर्स भी इसमें शामिल हो गए हैं। हालांकि इसके साथ साइबर क्राइम का खतरा भी बढ़ रहा है। पर्सनल एकाउंट की हैकिंग से लेकर वायरस के प्रसार, स्टॉकिंग, साइबर वॉर, साइबर टेररिज्म, साइबर फ्रॉड जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। साइबर रिलेटेड केसेज बढ़ रहे हैं। अगर आप आइटी के साथ-साथ लॉ में भी इंट्रेस्ट रखते हैं, तो साइबर लॉ फील्ड में लुक्रेटिव करियर बना सकते हैं। क्या है साइबर लॉ? डिजिटल इंफॉर्मेशन एवं कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी ने एक नए कानूनी कार्यक्षेत्र को जन्म दिया है, जिसे साइबर लॉ कहते हैं। साइबर लॉ के तहत इंटरनेट और साइबर स्पेस से जुड़े मामले सुलझाए जाते हैं। इसके एक्सपर्ट छोटे-बड़े साइबर क्राइम की रोकथाम के अलावा उसकी जांच में सहायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, सॉफ्टवेयर पेटेंट, नेट बैंकिंग से जुड़े कानूनी मामले भी यही देखते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन साइबर लॉ एक्सपर्ट बनने के लिए आप…

मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, एफएमसीजी

लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एेसी प्रक्रिया है, जिसमें जानकारी, गुड्स और अन्य संसाधनों को शुरुआत से लेकर सप्लाई तक कस्टमर की जरूरतों के अनुसार मैनेज किया जाता है। अन्य शब्दों मंे कहें, तो यह खरीद, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और मटीरियल के डिस्ट्रीब्यूशन को मैनेज करना है। सप्लाई चेन मैनेजमेंट इसका ही एक हिस्सा है, जिसमें इंवेंट्री, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, मटीरियल हैंडलिंग और पैकेजिंग भी शामिल है। घर, ऑफिस अौर फैक्टरी में होने वाले मटीरियल की सप्लाई की जिम्मेदारी लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कंपनी की होती है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, एफएमसीजी और ई-कॉमर्स में तेजी के कारण लॉजिस्टिक्स मार्केट के 2020 तक सालाना 12.17 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है। भारत फिलहाल लॉजिस्टिक्स में जीडीपी का 14.4 फीसदी खर्च करता है, जो विकसित देशों में हाेने वाले 8 फीसदी खर्च से कहीं ज्यादा है। नेशनल स्किल डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल भारत के लॉजिस्टिक्स मार्केट में 1.7 करोड़ एम्प्लाॅई काम कर रहे हैं और 2022 तक 1.11 करोड़ अतिरिक्त एम्प्लॉई की आवश्यकता होगी। देश के फ्रेट ट्रांसपोर्ट मार्केट के 2020 तक 13.35…

हार्डवेयर, नेटवर्किग में करियर

कम्प्यूटर के बढ़ते इस्तेमाल और इंटरनेट विस्तार ने उन लोगों के लिए नौकरियों के असीमित अवसर पैदा किए हैं जिनकी रुचि कम्प्यूटर्स में है। वर्चुअल दुनिया में कम्प्यूटर की भूमिका काफी एडवांस्ड हो चुकी है, जहां अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग प्रोफेशनल्स की जरूरत है। इन्हीं कामों के बीच हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग एक ऐसा फील्ड है, जो कुशल कम्प्यूटर प्रशिक्षितों के लिए बेहतर अवसर पैदा कर रहा है। ऐसे समझें हार्डवेयर और नेटवर्किंग को दो या अधिक कम्प्यूटर सिस्टम्स के समूह को डेटा और इंफॉर्मेशन शेयर करने के लिए जोड़ने का काम कम्प्यूटर नेटवर्किंग में शामिल होता है। कम्प्यूटर हार्डवेयर रिसर्च और कम्प्यूटर नेटवर्क डेवलपमेंट कंट्रोल से जुड़े प्रोफेशनल्स को हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग इंजीनियर्स कहा जाता है। ये हार्डवेयर की मैन्यूफैक्चरिंग और इंस्टॉलेशन को डिजाइन और सुपरवाइज करने का काम भी करते हैं। वर्तमान में नेटवर्किंग कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोमेडिसिन, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, सुपर कम्प्यूटिंग और डिफेंस के फील्ड में क्रांति ला रही है। ईथरनेट से जुड़े सेंसर्स और कंट्रोलर्स के आने के बाद कंपनियां अपने फैक्ट्र…

केमिस्ट्री में अवसर

साइंस के हरेक विषय की खासियत है कि वह अपनी अलग-अलग शाखाओं में कॅरिअर और रिसर्च के ढेरों बेहतरीन अवसर देता है। केमिस्ट्री भी ऐसा ही एक विषय है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाला यह विज्ञान नौकरी के मौकों से भरपूर है। साथ ही परम्परागत सोच रखने वालों को भी अब यह समझ आ गया है कि केमिस्ट्री प्रयोगशाला के बाहर भी ढेरों अवसर पैदा कर रही है और इंडस्ट्री आधारित बेहतरीन जॉब प्रोफाइल्स उपलब्ध करवा रही है। ऐसे में भविष्य के लिहाज से यह एक सुरक्षित विकल्प है। क्या पढ़ना होगा केमिस्ट्री में रुचि रखने वाले स्टूडेंट्स 12वीं कक्षा(साइंस) अच्छे अंकों से पास करने के बाद केमिकल साइंस में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड मास्टर्स प्रोग्राम का विकल्प चुन सकते हैं या फिर केमिस्ट्री में बीएससी/बीएससी(ऑनर्स)डिग्री कोर्स चुन सकते हैं। आगे चलकर एनालिटिकल केमिस्ट्री, इनऑर्गनिक केमिस्ट्री, हाइड्रोकेमिस्ट्री, फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री, पॉलिमर केमिस्ट्री, बायोकेमिस्ट्री, मेडिकल बायोकेमिस्ट्री और टेक्सटाइल केमिस्ट्री में स्पेशलाइजेशन के जरिए आप एक मजबूत करियर की शुरुआत कर सकते हैं। काम और रोजगार के अवसर :लैब के बा…