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Showing posts from June, 2018

सुगंध चिकित्सा में करियर

करियर के क्षेत्र में आ रहे बदलावों के चलते आज ऐसे विकल्पों का बोलबाला है, जो अपने आप में विशेषज्ञता रखते हैं। यह विकल्प पूरी तरह से प्रोफेशनल होते हैं। इन्हीं में से एक विकल्प है सुगंध चिकित्सा (स्मैल थैरेपी) का। ब्रिटेन और यूरोप में लोकप्रियता हासिल करने के बाद सुगंध चिकित्सा ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। 

जहाँ तक भारत की बात की जाए तो हमारी सभ्यता में प्राचीनकाल से ही सुगंध चिकित्सा का बोलबाला रहा है। भारत इत्र, सुगंधित तेलों और इनका उत्पादन करने वाली इंडस्ट्री का अपना एक विशेष महत्व है। आयुर्वेद में सुगंधित तेलों से शरीर की मालिश करने की विधि का उपयोग होता है इसके अलावा इत्र, धूप, अगरबत्ती जैसी वस्तुएँ भी भारतीय सभ्यता से बहुत लंबे समय से जुड़ी हुई हैं। 

आज सुगंध चिकित्सा न सिर्फ इलाज, बल्कि रोजगार के लिहाज से भी भारत में व्यापक संभावनाओं भरे विकल्प के तौर पर विकसित हो रही है। 

नेचुरल चीजों के प्रति बढ़ते रुझान के कारण आज सेहत सुधार में भी सुगंध चिकित्सा का इस्तेमाल किया जाने लगा है। भारत में सुगंध चिकित्सा के माध्यम से प्रकृति की ओर वापसी की धारणा को फिर…

कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में करियर

आज के दौर में संचार जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। चाहे मोबाइल हो या टीवी यह हर इनसान की जरूरत है। क्या आप ऐसे जीवन की कल्पना कर सकते हैं जहाँ मोबाइल काम ना करे। अपने मन पंसद प्रोग्रामों को देखने के लिए आपके पास टेलीविजन ही ना हो। ऐसे जीवन की कल्पना करना भी आपको कितना डरावना लगता है ना। 

आपकी सुविधाओं को हकीकत में बदलने का काम किया है इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन इंजीनियरों ने। इनकी कला की बदौलत ही आज हर व्यक्ति पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ है। अगर आप चाहें तो इस क्षेत्र में अपना भविष्य तलाश सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग का क्षेत्र बहुत ही विस्तृत व चुनौतीपूर्ण है। इसके अंतर्गत माइक्रोवेव और ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, डिजिटल सिस्टंस, सिग्नल प्रोसेसिंग, टेलीकम्युनिकेशन, एडवांस्ड कम्युनिकेशन, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इंजीनियरिंग की यह शाखा रोजमर्रा की जिंदगी में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। साथ ही इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल, पॉवर सिस्टम ऑपरेशंस, कम्युनिकेशन सिस्टम आदि क्षेत्रों में भी इसके महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता।

इस क्षेत्र में करियर बनाने की…

चिप डिजाइन में करियर

टेक्‍नोलॉजी ने जहां लोगों के जीवन को सरल और आधुनिक बना दिया है, वहीं टेक्‍नोलॉजी के कई क्षेत्रों में करियर के शानदार विकल्‍प भी उभ्‍ार कर सामने आए हैं। टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में जो प्रगति हुई है उसमें चिप डिजाइनिंग इंडस्‍ट्री ने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। अगर आप भी इंजीनियरिंग में रूचि रखते हैं और साथ ही चैलेंजिंग काम करना चाहते हैं तो चिप डिजाइनिंग में करियर बना सकते हैं। चिप सिलिकॉन का एक छोटा और पतला टुकड़ा होता है जो मशीनों के लिए इंटीग्रेटेड सर्किट बेस का काम करता है। चिप डिजाइनिंग की मदद से बड़े आकार के उपकरणों को भी छोटे आकार में बदला जा सकता है। बढ़ रही है डिमांड  चिप डिजाइन के रूप में आप एक सुनहरा करियर बना सकते हैं। इसकी हर सेक्‍टर में मांग है। एक चिप डिजाइनर का मुख्‍य काम छोटी-बड़ी इलेक्‍ट्रॉनिक डिवाइसेस की कार्यक्षमता को बढ़ाना और उसे आसान बनाना है। मोबाइल, टीवी रिमोट से लेकर कंज्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, ऑटोमोबाइल सेक्‍टर तक में चिप का इस्‍तेमाल हो रहा है। आप इस इंडस्ट्री से डिजाइन इंजीनियर, प्रोडक्ट इंजीनियर, टेस्ट इंजीनियर, सिस्टम्स इंजीनियर, प्रॉसेस इंजीनियर, पैकेजिंग …

फूड टेक्नोलॉजी में करिअर

खाद्यविज्ञान में खाद्य- सामग्रियों के चुनाव, संरक्षण, प्रसंस्करण, डिब्बाबंद (पैकेजिंग), वितरण और उपभोग की तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाती है। ऐसे में जाहिर सी बात है करियर की संभावनाएं अपार है क्योंकि खाना और खिलाना तो चलता ही रहता है
बदलती जीवनशैली और व्यस्तता के कारण आज लोगों की खानपान की आदतें और शौक भी बदल गए हैं। ऐसे में खाने-पीने की चीजों में जो भी उन्हें आसान जरिया या विकल्प मौजूद मिलता है, उसी को आदत बना लेते हैं। इसी में है डिब्बा बंद भोजन और पेय पदार्थ जिस पर लोग आज निर्भर होने लगे हैं। ऐसी स्थिति में इन खाद्य पदार्थों का चलन बढ़ने के कारण युवाओं के लिए फूड टेक्नोलॉजी बेहतरीन करियर ऑप्शन के रूप में सामने आया है। खाद्यविज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए खाद्य-सामग्रियों के चुनाव, संरक्षण, प्रसंस्करण, डिब्बाबंद (पैकेजिंग), वितरण और उपभोग की तकनीकों को ही खाद्य प्रौद्योगिकी (फूड टेक्नोलॉजी) कहते हैं। खाद्य विज्ञान खाद्य के सभी तकनीकी पहलुओं से जुड़ा एक ऐसा विषय क्षेत्र है, जो फसल की कटाई से शुरू होता है तथा इसके पकाने और खपत के साथ समाप्त होता है। योग्यता- फूड प्रोसेसि…

आधारिक संरचना प्रबंधन में कॅरियर

हमारा देश बहुत तेजी से आर्थिक विकास की डगर पर आगे बढ़ रहा है। क्रयशक्ति क्षमता के आधार पर तो भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। इसे देखते हुए अपने देश के विकास को गति देने के लिए आधारिक संरचना का द्रुत गति से विकास बहुत जरूरी हो गया है। इस प्रक्रिया में, एक ओर शहरी आधारिक संरचना का विकास तो दूसरी ओर ग्रामीण आधारिक संरचना का विकास जरूरी है। इसमें उन परिष्कृत आधारिक संरचना का विकास तथा प्रबंधन तकनीकों का पता लगाने और उन्हें लागू करने की जरूरत है जो आधुनिकीकरण की बदलती हुई माँग को पूरा करें। दूसरी ओर गाँवों तथा ग्रामीण जनसंख्या को शेष देश से जोड़ने की आवश्यकता है। ग्रामीण परिवहन, ग्रामीण आवास, विद्युत वितरण तथा सिंचाई सुविधाओं की एक सम्पूर्ण नए दृष्टिकोण से समीक्षा की जानी चाहिए। गौरतलब है कि सार्वजनिक आधारिक संरचना एवं सार्वजनिक-निजी सहभागिता वाली आधारिक संरचना के अतिरिक्त हमारे पास विकसित विश्व के अनुरूप ढलती निजी आधारिक संरचनाएँ जैसे मकान, दुकान, कार्यालय तथा मॉल हैं। इन सबको देखते हुए हमारे देश की केन्द्र सरकार ने निजी संस्थानों तथा विदेशी प्रत्यक्ष नि…

कंप्यूटर इंजीनियर में करियर

कंप्यूटर इंजीनियरिंग उन विषयों में से है, जिनमें आज छात्रों का रुझान सबसे ज्यादा है। इसकी एक बड़ी वजह इस क्षेत्र में बहुत अधिक नौकरियों का होना है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग दो विषयों पर आधारित है- कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर हार्डवेयर। इंजीनियर इन दोनों के ज्ञान का उपयोग कंप्यूटर का डिजाइन तैयार करने और उसे विकसित करने में करते हैं। जो इंजीनियर कंप्यूटर के उपकरण तैयार करते हैं, वे हार्डवेयर इंजीनियर होते हैं और जो कंप्यूटर के चलाने के लिए विभिन्न प्रोग्राम तैयार करते हैं, वे सॉफ्टवेयर इंजीनियर होते हैं। कंप्यूटर इंजीनियर के कार्य
हार्डवेयर इंजीनियर को कंप्यूटर के सभी पार्ट्स की जानकारी होना आवश्यक है। सॉफ्टवेयर इंस्टालेशन की जानकारी, पार्ट्स रिपेयरिंग, कंप्यूटर का रखरखाव और कंप्यूटर के साथ जुड़ी अन्य चीजों की जानकारी जैसे प्रिंटर, सीपीयू, मॉडम इत्यादि की जानकारी होनी आवश्यक है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर सॉफ्टवेयर्स की प्रोग्रामिंग और डिजाइनिंग करते है। कंप्यूटर में इंस्टॉल किए जाने वाले सभी सॉफ्टवेयर्स को सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही बनाते हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर को हार्डवेयर्स के बारे में अतिरिक्त ज…

फार्मेसी क्षेत्र में बनाएं करियर

फार्मेसी एक ऐसा सेक्टर है जहां आपके पास करियर के कई विकल्प हैं। आज भारत क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में भी ग्लोबल हब बन कर उभर रहा है। यदि आपकी दिलचस्पी चिकित्सा और सेहत से जुड़े क्षेत्र में है तो आप फार्मेसी के क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। 
शैक्षणिक योग्यता विज्ञान विषय के साथ बारहवीं परीक्षा पास करने के बाद दो साल के डी फार्मा कोर्स या चार साल के बी फार्मा कोर्स कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित कई संस्थान/ महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय अंडरग्रेजुएट कोर्स करवाने के अलावा एम. फार्मा कोर्स भी करवाते हैं। बारहवीं के बाद सीधे डिप्लोमा किया जा सकता है। कुछ कॉलेजों में फार्मेसी में फुलटाइम कोर्स संचालित हैं। इसके साथ-साथ पीजी डिप्लोमा इन फार्मास्युटिकल एवं हेल्थ केयर मार्केटिंग, डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग, एडवांस डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग एवं पीजी डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग जैसे कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। इन पाठयक्रमों की अवधि छह माह से एक वर्ष के बीच है। इन पाठयक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम योग्यता बीएससी, बीफार्मा अथव…

रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट में करियर

आज जिस तेजी से दुनिया में विकास हो रहा है, उससे भी कहीं ज्यादा तेजी से एनर्जी की मांग बढ़ रही है। किसी भी इंडस्ट्री या प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले वहां की ऊर्जा की संभावनाओं की पड़ताल जरूरी होती है। जरूरतों के साथ ही अब पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी देखा जाने लगा है। तमाम पावर प्रोजेक्ट्स पर्यावरण संबंधी विषयों के चलते ही अटके पड़े हैं। इसलिए रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस्ड रहना उनकी मजबूरी है। इस क्षेत्र में भारत ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रखी हैं। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे इस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं। बायोफ्यूल की लगातार कम होती जा रही मात्रा और देश में एनर्जी की मांग को देखते हुए एनर्जी प्रोडक्शन और उसका प्रबंधन पहली प्राथमिकता बन चुका है। सरकारी के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इस ओर विशेष जोर दे रही हैं। यही कारण है कि रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट के कोर्स की तेजी से मांग बढ़ रही है। समय के साथ-साथ ऊर्जा की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसलिए ऊर्जा के अतिरिक्त स्रोतों यानी वैकल्पिक ऊर्जा, सौर ऊर्जा, विंड एनर्जी, बायो एनर्जी, हाइड्रो एनर्जी आदि पर विशेष ध्यान दिया जा …

मॉडर्न बायोलॉजी में करें रिसर्च,

विभिन्न छोटी-बड़ी बीमारियों की पहचान करने वाली पैथोलॉजी के तहत आने वाली कई आधुनिक शाखाओं में रिसर्च के हैं अवसर। नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल परिसर में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैथोलॉजी, आईसीएमआर ने मॉडर्न बायोलॉजी की इन स्ट्रीम्स में रिसर्च के लिए आवेदन मंगवाए हैं । संस्थान को सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी, पुणे, बिट्स पिलानी, जामिया हमदर्द से मान्यता प्राप्त है। यहां अपना शोध कार्य करके बेहतरीन कॅरियर बना सकते हैं। प्रवेश के लिए आपको इंटरव्यू देना होगा। इसमें आवेदन की अंतिम तिथि 15 फरवरी 2016 निर्धारित की गई है।
क्या है योग्यता
लाइफ साइंस की किसी भी ब्रांच में कम से कम 60 फीसदी अंक के साथ एमएससी, एमटेक करने वाले लोग कर सकते हैं आवेदन। आवेदक के पास सीएसआईआर-यूजीसी (जेआरएफ), आईसीएमआर- जेआरएफ, डीएसटी-इंस्पायर फैलोशिप हो। अधिकतम उम्र 28 साल है। एससी, एसटी, ओबीसी, शावि, महिलाओं को छूट है। अहर्ताएं पूरी करने पर ही आवेदन करें।
कैसे होगा चयन
एनआईपी में चयन के लिए आवेदकों को सबसे पहले उनके आवेदनों में दी गई डीटेल्स के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद इन शॉर्टलिस्टेड लोगों को ईमेल के माध्यम से …