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Showing posts from November, 2015

नैनो है नया करियर

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क्या आप कल्पना कर सकते हैं शक्कर के दाने के बराबर के किसी ऐसे कंप्यूटर की, जिसमें विश्व के सबसे बडे पुस्तकालय की समस्त पुस्तकों की समग्र जानकारी संग्रहीत हो या किसी ऐसी मशीन की, जो हमारी कोशिकाओं में घुसकर रोगकारक कीटाणुओं पर नजर रख सके या फिर छोटे-छोटे कार्बन परमाणुओं से बनाए गए किसी ऐसे टेनिस रैकेट की, जो साधारण रैकेट से कहीं अधिक हल्का और स्टील से कई गुना ज्यादा मजबूत हो। कपडों पर लगाए जा सकने वाले किसी ऐसे बायोसेंसर की कल्पना करके देखिए, जो जैव-युद्ध के जानलेवा हथियार एंथ्रेक्स (एक जीवाणु) के आक्रमण का पता महज कुछ मिनटों में लगा लेगा। परी-कथाओं जैसा लगता है न ये सब? पर ये कोरी कल्पना नहीं है। विज्ञान ने इन कल्पनाओं में वास्तविकता के रंग भर दिए हैं नैनोटेक्नोलॉजी के जरिए।
क्या है नैनो टेक्नोलॉजी
नैनो-टेक्नोलॉजी वह अप्लाइड साइंस है, जिसमें 100 नैनोमीटर से छोटे पार्टिकल्स पर भी काम किया जाता है। आज इस तकनीक की मदद से हर क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यदि विस्तार से जानें, तो नैनो एक ग्रीक शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है बौना। नैनोटेक्नोलॉजी में काम …

पर्दे के पीछे का कॅरियर : सिनेमेटोग्राफी

भारत विश्व में सबसे अधिक फिल्म बनाने वाले देशों में से एक है। यहां प्रतिवर्ष विभिन्न भाषाओं में लगभग 800 फिल्में बनती हैं। खास यह है कि अभिनय के अलावा इससे जुड़े तमाम तकनीकी क्षेत्रों में भी स्टूडेंट्स का रुझान देखने को मिल रहा है। यदि आपमें दृश्यों और लाइटिंग की समझ है, तो सिनेमेटोग्राफी बेस्ट है...

फिल्मी दुनिया का नाम आते ही ग्लैमर, अकूत पैसा और शोहरत जैसी चीजें आंखों के सामने घूमने लगती हैं। लेकिन, इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जरूरी संघर्र्ष की कहानी वही लोग समझ सकते हैं, जिन्होंने यहां अपना अलग स्थान हासिल किया है। लेकिन, नई पीढ़ी का न उत्साह कम है और न ही अपने पंखों को उड़ान देने में उन्हें किसी प्रकार की हिचक है। एक सिनेमा बनाने में पर्दे के पीछे और आगे बहुत सारे लोग काम करते हैं, लेकिन इनमें से कम प्रोफेशनल्स को ही लोग जानते हैं। प्यासा, कागज के फूल व साहब बीवी और गुलाम जैसी क्लासिकल फिल्मों के सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया था। अगर आप हर साल दिए जाने वाले ऑस्कर, गोल्डन ग्लोब, ग्रैमी, नेशनल फिल्म पुरस्कारों पर गौर करें, तो हर…

ऑटोमोबाइल डिजाइनर के रूप करियर

ऑटोमोबाइल डिजाइनर का सम्बन्ध सड़क पर चलने वाले वाहनों के विकास से है। वह वाहन के स्वरुप  को तैयार करता है और उसके वाह्य, आंतरिक, रंग, साज-सज्जा को रूप प्रदान करता है। छोटी कार नैनो के लांच किये जाने के बाद और भारत में मध्यवर्गीय लोगों के विशाल बाजार को देखते हुए कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी छोटी कार बनाने की घोषणा कर दी। इससे ऑटोमोबाइल डिजाइनरों की मांग देश-विदेश में काफी बढ़ गई हैं। यदि कोई टेक्निकल क्षेत्र में जॉब चाहता है, तो ऑटोमोबाइल डिजाइनर बनकर अपनी करियर को एक नई दिशा प्रदान कर सकता है।
कोर्स और योग्यता
आईआईटी (गुवाहाटी) बीटेक इन डिजाइनिंग में (चार वर्षीय) कोर्स ऑफर करती है। नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी), अहमदाबाद में इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग में चार वर्षीय कोर्स उपलब्ध है। इन सभी कोर्स (बीटेक या बीई) में बारहवीं (पीसीएम) के बाद आईआईटी-जेईई या एआईईईई क्वालीफाई करके एडमिशन लिया जा सकता है। इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर में ग्रेजुएट स्टूडेंट के लिए एडवांस इंडस्ट्रियल प्रोग्राम भी चलाया जाता है। इसमें जिओमेट्री, मॉडल बनाना, कलर ग्राफिक कॉम्पोजिशन, डिजाइनिंग प्रॉसेस आदि …

ऑडियोलॉजी के रूप में करियर

बोलने और सुनने संबंधी विकारों के अध्ययन को ऑडियोलॉजी (श्रवण विज्ञान) कहते हैं। इसके अंतर्गत वाक और श्रवण क्षमता की कमियों को जानने व समझने का प्रयास किया जाता है। इस विषय के एक्सपर्ट्स ऑडियोलॉजिस्ट कहलाते हैं। विभिन्न कारणों से पूरी दुनिया में श्रवणहीनता में वृद्धि हो रही है। ऐसे में इसके इलाज के लिए प्रोफेशनल ऑडियोलॉजिस्ट की काफी जरूरत है। सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल, चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर्स, रिहैबिलिटेशन सेंटर्स जैसी जगहों पर ऑडियोलॉजिस्ट की काफी डिमांड है। एसोचैम और दूसरे सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भविष्य में एक लाख से भी ज्यादा ऑडियोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ेगी।
कार्य
ऑडियोलॉजिस्ट किसी भी व्यक्ति के बोलने और सुनने में आ रही दिक्कतों के कारणों का पता लगाता है और उसे दूर करने का प्रयास करता है। इसकी जांच तीन तरह से होती है। ऑडियोमेट्री टेस्ट, इम्पेडेंस टेस्ट (अवरोध जांच) और बेरा टेस्ट। कितने पॉवर और कौन सा (अनालाग या डिजिटल) हियरिंग ऐड मरीज के लिए फिट रहेगा, इस बात का निर्णय एक ऑडियोलॉजिस्ट करता है। वह एक थेरेपिस्ट की भूमिका भी निभाता है। मरीज को तरह-तरह से (इशारों से या संगीत…

फाइनेंशियल एक्सपर्ट के रूप में करियर

ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व बदलाव आया है, बल्कि इसने भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर को भी नई दिशा प्रदान की है। जाहिर है, इससे कॉर्पोरेट सेक्टर में नई-नई नौकरियां सामने आ रही हैं। इसमें से कॉर्पोरेट सेक्टर में फाइनेंशियल एक्सपर्ट के रूप में करियर की शुरुआत एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। इस सेक्टर में उस समय भी संभावनाएं पर्याप्त रूप से मौजूद रहती हैं, जब दूसरे सेक्टर मंदी या अन्य कारणों से प्रभावित होते हैं। काफी व्यापक सेक्टर होने के कारण वित्त क्षेत्र में किसी भी तरह की विशेषज्ञता रखने वालों के लिए नौकरियों की कमी नहीं है। इसमें बैंकिंग, इंश्योरेंस सेक्टर, मार्केटिंग, सार्वजनिक सेक्टर, निजी व गैर सरकारी संस्थाओं के अलावा भी कई जगह पर प्लेसमेंट हो रहा है।
कार्य
फाइनेंशियल सर्विस से जुड़े प्रोफेशनल्स का मुख्य कार्य ऑर्गनाइजेशन के लिए मनी क्रिएट करना, कैश जनरेट करना और किसी भी इन्वेस्टमेंट पर अधिक से अधिक रिटर्न प्रदान करना होता है। इसके साथ ही, फाइनेंशियल प्लॉनिंग में भी इनका अहम योगदान होता है। फाइनेंस से जुड़े लोगों को किसी भी कंपनी के संपूर्…

कंप्यूटर फोरेंसिक एक्सप‌र्ट्स के रूप में करियर

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वर्तमान में साइबर क्राइम की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है और अधिकांश लोग किसी-न-किसी रूप में साइबर अपराध की चपेट में आ रहे हैं। ब्राईटन यूनिवर्सिटी के एक हालिया सर्वे में बताया गया है कि भारत बहुत तेजी से साइबर क्राइम के हब के रूप में उभर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, इस समय देश में ऐक्टिव इंटरनेट यूजर्स की संख्या लगभग साढ़े चार करोड़ है। निश्चित तौर पर जिस प्रकार से इंटरनेट के उपयोग में वृद्धि होगी, उसी अनुपात में ऑनलाइन और साइबर अपराध से जुड़े कई मामले भी प्रकाश में आगे। इन सब को देखते हुए कंप्यूटर और नेटवर्क सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है। साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाओं के कारण कंप्यूटर फोरेंसिक एक्सप‌र्ट्स की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। कंप्यूटर फोरेंसिक साइबर एक्सप‌र्ट्स क्राइम से बचाने में मदद करते हैं। इन  कंप्यूटर फोरेंसिक विशेषज्ञों को साइबर पुलिस या डिजिटल डिटेक्टिव भी कहा जाता है। जिसकी अपराध को रोकने तथा कंप्यूटर एवं इंटरनेट में रूचि हो उनके लिए फोरेंसिक साइबर एक्सप‌र्ट्स का करियर बहुत ही लाभदायक साबित हो सकता है।
कोर्स और योग्यता
साइबर लॉ से ज…

डबिंग आर्टिस्ट के रूप में करियर

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टीवी और रेडियो विज्ञापनों पर सुनाई देने वाली दिलकश आवाज हो या कार्टून कैरेक्टर्स के मजेदार डायलॉग, अपने दम पर हर किसी का ध्यान खींचने का माद्दा रखते हैं डबिंग आर्टिस्ट। वर्तमान में डबिंग आर्टिस्ट की तमाम जगहों पर अच्छी खासी मांग है।
योग्यता
डबिंग आर्टिस्ट के लिए किसी खास योग्यता की जरूरत नहीं होती। आवाज और भाषा की बदौलत लोग एंट्री पा लेते थे। लेकिन बीते कुछ समय से बतौर डबिंग आर्टिस्ट करियर बनाने के लिए कोर्स भी शुरू हो चुका है। ऐसे में कम से कम 10वीं पास अभ्यर्थियों की मांग होने लगी है।

व्यक्तिगत गुण
एक डबिंग आर्टिस्ट के लिए जरूरी है कि उसे भाषा की समझ हो। बातचीत में उतार-चढ़ाव, उच्चारण और भाषा की जानकारी अच्छी तरह होनी चाहिए। साथ ही गला साफ हो, आवाज प्रसारण योग्य हो। इसमें आवाज ही व्यक्ति की पहचान होती है। इसलिए अच्छा बोलने की कोशिश करें। साथ ही रोजमर्रा के जीवन में लोगों के बोलने के ढंग, व्यवहार तथा उनकी आदतों पर गौर करें। खुद को लोगों के साथ जोड़ें। तभी बेहतर डबिंग आर्टिस्ट बन सकते हैं।
अवसर
डबिंग आर्टिस्ट के लिए अवसर ही अवसर है। आकाशवाणी, दूरदर्शन, विभिन्न टीवी चैनल्स, …

फ्यूचर के एडवेंचर में करियर

माउंटेनियरिंग
एडवेंचर स्पोर्ट्स में सबसे पॉपुलर है माउंटेनियरिंग। इसके शौकीनों की कोई कमी नहीं है। एवरेस्ट पर पहुंचने वाली पहली महिला पर्वतारोही बिछेन्द्री पाल और आज के पर्वतारोही अर्जुन ने माउटेनियरिंग को नई दिशा दी है। अगर आप फिजिकली फिट हैं और बर्फीली चोटियों और चट्टानों पर चढने का हौसला रखते हैं, तो माउंटेनियिरंग करियर को आप चुन सकते हैं। हालांकि देश के काफी संस्थानों में माउंटेनियरिंग का कोर्स कराया जाता है, लेकिन उत्तरकाशी का नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग ट्रेनिंग में अव्वल है। देश की पहली महिला पर्वतारोही बिछेन्द्री पाल, दो बार एवरेस्ट पर अपना परचम लहराने वालीं संतोष यादव और देश के सबसे छोटे माउंटेनियर अर्जुन भी यहीं से ट्रेनिंग ले चुके हैं और यही वजह है कि इसे इंडियन माउंटेनियिरंग का मक्का भी कहा जाता है। निम के प्रिंसिपल कर्नल आई एस थापा के मुताबिक माउटेनियरिंग के बेसिक कोर्स के लिए कैंडिडेट का फिजिकली फिट होना जरूरी है। साथ ही उसकी उम्र 17 से 35 साल के बीच हो। वहीं एडवांस कोर्स के लिए उम्र 18 से 40 साल के बीच और ए ग्रेड के साथ माउंटेनियरिंग का बेसिक कोर्स …

पर्दे के पीछे का कॅरियर : सिनेमेटोग्राफी

भारतविश्वमेंसबसेअधिकफिल्मबनानेवालेदेशोंमेंसेएकहैयहांप्रतिवर्षविभिन्नभाषाओंमेंलगभग 800 फिल्मेंबनतीहैंखासयहहैकिअभिनयकेअलावाइससेजुड़े