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Showing posts from January, 2018

मॉडर्न बायोलॉजी में करें रिसर्च

विभिन्न छोटी-बड़ी बीमारियों की पहचान करने वाली पैथोलॉजी के तहत आने वाली कई आधुनिक शाखाओं में रिसर्च के हैं अवसर। नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल परिसर में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैथोलॉजी, आईसीएमआर ने मॉडर्न बायोलॉजी की इन स्ट्रीम्स में रिसर्च के लिए आवेदन मंगवाए हैं । संस्थान को सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी, पुणे, बिट्स पिलानी, जामिया हमदर्द से मान्यता प्राप्त है। यहां अपना शोध कार्य करके बेहतरीन कॅरियर बना सकते हैं। प्रवेश के लिए आपको इंटरव्यू देना होगा। इसमें आवेदन की अंतिम तिथि 15 फरवरी 2016 निर्धारित की गई है।
क्या है योग्यता
लाइफ साइंस की किसी भी ब्रांच में कम से कम 60 फीसदी अंक के साथ एमएससी, एमटेक करने वाले लोग कर सकते हैं आवेदन। आवेदक के पास सीएसआईआर-यूजीसी (जेआरएफ), आईसीएमआर- जेआरएफ, डीएसटी-इंस्पायर फैलोशिप हो। अधिकतम उम्र 28 साल है। एससी, एसटी, ओबीसी, शावि, महिलाओं को छूट है। अहर्ताएं पूरी करने पर ही आवेदन करें।
कैसे होगा चयन
एनआईपी में चयन के लिए आवेदकों को सबसे पहले उनके आवेदनों में दी गई डीटेल्स के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद इन शॉर्टलिस्टेड लोगों को ईमेल के माध्यम …

मानचित्रकला क्रिएटिविटी में करियर

आज क्रिएटिविटी की एक अलग दुनिया है। इसमें  मानचित्रकला भी एक है। पिछले पांच-छह साल से लगातार मानचित्रकला  के क्षेत्र में ग्रोथ दिखाई दे रही है। डिमांड के अनुसार इस फील्ड में ट्रेंड प्रोफेशनल्स के लिए स्कोप भी बढ़ा है, लेकिन यह केवल उन्हीं के लिए है, जो अपने विषय के साथ-साथ इसमें प्रयोग होने वाली नई टेक्नोलॉजी में भी पूरी तरह से निपुण हैं। मानचित्र तथा विभिन्न संबंधित उपकरणों की रचना, इनके सिद्धांतों और विधियों का ज्ञान एवं अध्ययन मानचित्रकला  कहलाता है। मानचित्र के अतिरिक्त तथ्य प्रदर्शन के लिये विविध प्रकार के अन्य उपकरण, जैसे उच्चावचन मॉडल, गोलक, मानारेख आदि भी बनाए जाते हैं। मानचित्रकला में विज्ञान, सौंदर्यमीमांसा तथा तकनीक का मिश्रण है। इसका रूपांतर कार्टोग्राफी है जो कि  ग्रीक शब्द से बना है।
योग्यता
मानचित्रकार बनने के लिए बैचलर ऑफ कार्टोग्राफी करनी होती है। अर्थ साइंस और अन्य फिजिकल साइंस ग्रेजुएट स्टूडेंट्स भी इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। उन्हें अपनी बीएससी या बीटेक में एक विषय कार्टोग्राफी रखना चाहिए। अगर आप मानचित्रकार बनना चाहते हैं तो इससे संबंधित डिग्री या डिप्लोमा को…

सिविल इंजीनियरिंग में करियर

आज देश प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ रहा है। बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों में भी विकास की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। रियल एस्टेट के कारोबार में आई चमक ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रोशन किया है। इन्हीं में से एक प्रमुख क्षेत्र ‘सिविल इंजीनियिरग’ भी है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कदम रखने वाले अधिकांश छात्र सिविल इंजीनियरिंग की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। वह रियल एस्टेट के अलावा भी कई सारे कंट्रक्शन कार्य जैसे पुल निर्माण, सड़कों की रूपरेखा, एयरपोर्ट, ड्रम, सीवेज सिस्टम आदि को अपने कौशल द्वारा आगे ले जाने का कार्य कर रहे हैं। क्या है सिविल इंजीनियरिंग?
जब भी कोई योजना बनती है तो उसके लिए पहले प्लानिंग, डिजाइनिंग व संरचनात्मक कार्यों से लेकर रिसर्च एवं सॉल्यूशन तैयार करने का कार्य किया जाता है। यह कार्य किसी सामान्य व्यक्ति से न कराकर प्रोफेशनल लोगों से ही कराया जाता है, जो सिविल इंजीनियरों की श्रेणी में आते हैं। यह पूरी पद्धति ‘सिविल इंजीनियरिंग’ कहलाती है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षित लोगों को किसी प्रोजेक्ट, कंस्ट्रक्शन या मेंटेनेंस के ऊपर कार्य करना होता है। साथ ही इस कार्य के लिए उन…

रेडियोलॉजी में करियर

एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी आदि जैसी मेडिकल डायग्नॉस्टिक तकनीकों से आज पूरे चिकित्सा जगत का स्वरूप बदल गया है। अब शरीर के किसी भी अंदरूनी हिस्से में छिपा रोग पता लगाना आसान हो गया है। रेडियोलॉजी का क्षेत्र अब करियर के लिहाज से आकर्षक बन गया है। जॉब मार्केट में ऐसे लोगों की भारी मांग है, जिन्हें रेडिएशन से बचाव की समझ हो और जो मशीन्स की देखरेख करना जानते हों। रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर हैल्थकेयर के क्षेत्र में बेशुमार अवसर हैं। क्या है रेडियोलॉजी?
रेडियोलॉजी एक मेडिकल टेक्नोलॉजी है। इसकी मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जांच की जाती है। इससे डॉक्टरों को मरीजों की स्थिति और उनकी बीमारियों के बारे में सटीक जानकारी मिल जाती है, जिससे उन्हें कारगर इलाज करने में काफी आसानी होती है। रेडियोलॉजी दो तरह की होती है: डायग्नॉस्टिक रेडियोलॉजी और थैरापेटिक रेडियोलॉजी। डायग्नॉस्टिक रेडियोलॉजी के अंतर्गत मुख्य रूप से रेडियोग्राफी और अल्ट्रासाउंड से जुड़े टेस्ट शामिल होते हैं, जैसे एक्सरे, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी, फ्लोरोस्कोपी, पोसीट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी आदि…

फर्नीचर डिजाइनिंग में करियर

एक समय तक फर्नीचर डिजाइनिंग का काम कारपेंटर ही करते थे, लेकिन आज के दौर में यह एक अलग प्रोफेशन बन चुका है। अगर आप की भी इसमें रुचि है और आप क्रिएटिव हैं तो फर्नीचर डिजाइनर बनकर करियर संवार सकते हैं। संबंधित ट्रेनिंग हासिल कर आप किसी कंपनी में जॉब कर सकते हैं या फिर अपना कारोबार भी शुरू कर सकते हैं। इस बारे में विस्तार से जानिए

पर्सनल स्किल्स
फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आपमें क्रिएटिव और आर्टिस्टिक सेंस का मजबूत होना अति आवश्यक है, साथ ही कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी चाहिए। मार्केटिंग स्किल्स और बिजनेस की भी समझ अनिवार्य है। फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में काम करने के लिए मार्केट में डिजाइनिंग को लेकर क्या कुछ नया किया जा रहा है, उस ओर भी पैनी नजर रखनी होती है क्योंकि फर्नीचर डिजाइनर का काम एक बेजान लकड़ी में डिजाइन के जरिए उसे आकर्षक रूप देना होता है।

बढ़ रही है डिमांड
फर्नीचर डिजाइनिंग व्यवसाय अब केवल कारपेंटर का काम नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कुशल डिजाइनरों की मांग व्यापक स्तर पर बढ़ी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले पांच वर्षों में बाजार में तकरीबन एक लाख…

फिजिक्स एक्सपर्ट्स

भारत में साइंस के लिए नए दरवाजे लगातार खुलते जा रहे हैं। मेक इन इंडिया, मंगलयान और रक्षा क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान निरंतर ऐसे वैज्ञानिकों की मांग कर रहे हैं, जो फिजिक्स को गहराई से समझते हों और जिनमें कुछ नया कर दिखाने की ललक हो। इससे पहले भारत को इतने बेहतरीन प्लेटफाॅर्म के तौर पर नहीं देखा जाता था। इस बदलती स्थिति ने फिजिक्स को इस क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए एक बेहतरीन करियर के रूप में तब्दील कर दिया है। वास्तविकता में फिजिक्स को बेसिक साइंस के रूप में देखा जाता है और अंततः यह साइंस की सभी शाखाओं को किसी न किसी तरह प्रभावित करता ही है। अपनी इस विशेषता की वजह से ही अन्य क्षेत्रों में भी फिजिक्स की समझ रखने वाले विशेषज्ञों की भारी मांग पैदा हो गई है। यही वजह है कि स्पेस इंडस्ट्री से लेकर साइकिल उद्योग तक सभी, लगातार खुद को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं के लिए नए उत्पाद खोज निकालने के लिए फिजिक्स एक्सपर्ट्स की तलाश कर रहे हैं। क्या पढ़ना होगा
भारत में अब इस विषय को लेकर कई स्पेशलाइज्ड कोर्सेज की शुरुआत की जा चुकी है। इस क्षेत्र में बीएससी इन अप्लाइड फिजिक्स, फिजिकल साइंसेज, फिज…

वेस्ट मैनेजमेंट से करियर बनाएं

वेस्ट मैनेजमेंट बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है, इसे लेकर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, पर सवाल यह है, कि कितने लोग इससे परिचित हैं। कोई भी मैनेजमेंट तभी सक्सेसफुल होता है, जब उसके बारे में लोगों को अधिक से अधिक जानकारी हो। इस क्षेत्र में सफलता तभी मिलेगी जब यूथ इसे अपने करियर में शामिल करेगा। वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर भारत में कोई खास एजुकेशनल संस्थान तो नहीं हैं पर कुछ कॉलेज हैं जहां इससे जुड़े डिप्लोमा कोर्स करवाएं जाते हैं। यूथ हर नए क्षेत्र में कदम बढ़ा रहा है, ऐसे में यह नया विषय करियर बनाने के लिए अच्छा विकल्प हैं। इस क्षेत्र में करियर बनाने वालों के लिए क्या संभावनाएं और क्या टर्नओवर है, बताते हैं आपको – क्या है वेस्ट मैनेजमेंट
विकासशील देश होने के कारण भारत में वेस्टेज की मात्रा तेजी से बढ़ जा रही है। वेस्ट को उसी अनुपात में दोबारा प्रयोग में लाए जाने की प्रक्रिया वेस्ट मैनेजमेंट है। इसमें रोजाना के कचरे से हर चीज को अलग-अलग व्यवस्थित किया जाता है, इसके बाद उसे रिसाइकिल किया जाता है। जिससे गंदगी तो हटती ही है, साथ ही वेस्ट मेटेरियल का दोबारा प्रयोग हो जाता है। हमारे देश में लगभग 80 प्रतिशत…

कोशिकाओं की आणविक जीव विज्ञान में पीएचडी

डॉक्टरेट कार्यक्रम 'कोशिकाओं की आणविक जीव विज्ञान "न्यूरोसाइंसेस और आण्विक बायोसाइंसेज के लिए गौटिंगेन ग्रेजुएट स्कूल (GGNB) के एक सदस्य है। यह आणविक बायोसाइंसेज के लिए गौटिंगेन केंद्र (GZMB) द्वारा आयोजित किया जाता है और गौटिंगेन विश्वविद्यालय, biophysical रसायन विज्ञान, प्रायोगिक चिकित्सा के लिए मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के लिए मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट, और जर्मन प्राइमेट सेंटर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है।

शोध उन्मुख कार्यक्रम और अंग्रेजी में सिखाया जाता है, जो जैव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, चिकित्सा के क्षेत्र में एक मास्टर की डिग्री (या समकक्ष), या संबंधित क्षेत्रों रखने वाले छात्रों के लिए खुला है।

कार्यक्रम है जो कोशिकाओं के अध्ययन के लिए उत्साह का हिस्सा पिछले शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों से छात्रों को स्वीकार करता है। प्रशिक्षण कैसे सेल भाग्य और टोपोलॉजी निर्धारित कर रहे हैं की एक तुलनात्मक समझ प्राप्त करने के उद्देश्य से है, कैसे व्यापक जीनोमिक विश्लेषण उपकरणों को लागू करने का एक महत्वपूर्ण भावना, और स्थापित करने और सेलुलर कार्यों के लिए वैचारिक…

डर्मेटोलॉजी में करियर

डिसिन में स्पेशलाइजेशन के लिए उपलब्ध विकल्पों में ‘डर्मेटोलॉजी’ काफी लोकप्रिय हो गया है। मौजूदा वक्त में ‘फर्स्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन’ कहावत को इतनी गंभीरता से लिया जा रहा है कि व्यक्ति के रूप को व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण अंग माना जाने लगा है। इस कारण लोगों में अपने रूप और व्यक्तित्व को लेकर चिंता का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। यहां तक कि कॉलेज जाने वाले छात्र भी खुद को आकर्षक दिखाने की गरज से काफी रुपये खर्च कर रहे हैं।
अपने रूप को लेकर लोगों में गंभीरता का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि वह चेहरे पर छोटा-सा मुंहासा हो जाने भर से परेशान हो उठते हैं। कई बार वह ऐसी परेशानियों को इस कदर अपने ऊपर हावी कर लेते हैं कि घर से बाहर निकलना भी छोड़ देते हैं। ऐसे माहौल में रूप निखारने का दावा करने वाली फेयरनेस क्रीमों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। खुजली और घमौरियों (रैशेज) जैसे त्वचा संबंधी रोग आम हो चुके हैं। गर्मी और बरसात के मौसम में इनकी अधिकता काफी बढ़ जाती है। इनके सही उपचार के लिए डॉंक्टर का परामर्श जरूरी होता है। कई बार उपचार के लिए डॉंक्टर के पास कुछ दिनों या हफ्तों के अंतराल पर बार…

सीखें प्रोग्रामिंग की भाषा

अगर आप इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी फील्ड में एंट्री करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको सबसे पहले आईटी फील्ड की लैंग्वेज को समझना और सीखना जरूरी है। जानते हैं आईटी इंडस्ट्री में कौन-कौन सी लैंग्वेजेज डिमांड में हैं.. सी-लैंग्वेज सी को मदर ऑफ ऑल प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज भी कहा जाता है। सभी पॉपुलर प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज सी से ही जन्मी हैं। एटी एंड टी बेल लैब्स में काम करने के दौरान डेनिस रिची ने 1972 में इसे डेवलप किया था। सी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली लैंग्वेज है। दुनिया के बेहतरीन कंप्यूटर आर्किटेक्चर्स और ऑपरेटिंग सिस्टम्स सी-लैंग्वेज बेस्ड हैं। सी-लैंग्वेज में स्ट्रक्चर्ड प्रोग्रामिंग के साथ क्रॉस प्लेटफॉर्म प्रोग्रामिंग की भी कैपेबिलिटी है। इसके सोर्स कोड में कुछ बदलाव करके कई कंप्यूटर प्लेटफॉ‌र्म्स और ऑपरेटिंग सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि माइक्रोकंट्रोलर्स से लेकर सुपरकंप्यूटर्स में सी-लैंग्वेज का इस्तेमाल होता है।  एचटीएमएल/सीएसएस एचटीएमएल को हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज कहा जाता है, यह व‌र्ल्ड वाइड वेब के किसी भी कंटेंट की स्ट्रक्चरिंग मार्कअप लैंग्वेज…