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Showing posts from May, 2016

पॉलिटेक्निक है राइट ऑप्शन?

10वीं-12वींके बाद टेक्निकल कोर्स में एडमिशन लेने के इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए पॉलिटेक्निक राइट ऑप्शन हो सकता है। वैसे, आज के जॉब मार्केट में पॉलिटेक्निक से जुड़े स्टूडेंट्स की जबरदस्त डिमांड है। आइए जानते हैं, पॉलिटेक्निक में कैसे एडमिशन लिया जा सकता है और क्या हैं इसके फायदे? स्कूल की दुनिया से बाहर निकलते ही हर साल हजारों स्टूडेंट्स इंजीनियर बनने का सपना देखने लगते हैं, लेकिन कई स्टूडेंट्स महंगी फीस और अच्छे मा‌र्क्स नहीं आने की वजह से बड़े संस्थानों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का सपना पूरा नहींकर पाते। ऐसे में 12वीं के बाद बीटेक की चार साल की डिग्री की बजाय 10वीं या 12वीं के बाद तीन साल का डिप्लोमा करके भी जॉब मार्केट में कदम रखने का ऑप्शन मौजूद है। ऐसे स्टूडेंट्स के लिए पॉलिटेक्निक सुनहरा अवसर लेकर आता है। यह उन्हें तकनीकी और व्यावसायिक कोर्स का अवसर प्रदान करता है। दरअसल, ये कोर्स ऐसे होते हैं, जिसे पूरा करने के बाद खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए या फिर अच्छी जगह नौकरी करने की स्किल से लैस करता है।  क्या है पॉलिटेक्निक? आमतौर पर पॉलिटेक्निक ऑ‌र्ट्स और साइंस से संबंधित डिप्लोमा और सर…

डिकोडिंग द डिसऑर्डर में करियर

ह्यूमन बॉडी में मौजूद क्रोमोजोम्स में करीब 25 से 35 हजार के बीच जीन्स होते हैं। कई बार इन जीन्स का प्रॉपर डिस्ट्रीब्यूशन बॉडी में नहीं होता है, जिससे थैलेसेमिया, हीमोफीलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्लेफ्ट लिप पैलेट, न्यूरोडिजेनेरैटिव जैसी एबनॉर्मलिटीज या हेरेडिटरी प्रॉब्लम्स हो सकती है। इससे निपटने के लिए हेल्थ सेक्टर में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट और दूसरे इनेशिएटिव्स लिए जा रहे हैं, जिसे देखते हुए जेनेटिक काउंसलिंग का रोल आज काफी बढ गया है। अब जो लोग इसमें करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए स्कोप कहीं ज्यादा हो गए हैं।

जॉब आउटलुक

एक अनुमान के अनुसार, करीब 5 परसेंट आबादी में किसी न किसी तरह का इनहेरेटेड डिसऑर्डर पाया जाता है। ये ऐसे डिसऑर्डर्स होते हैं, जिनका पता शुरुआत में नहीं चल पाता है, लेकिन एक जेनेटिक काउंसलर बता सकता है कि आपमें इस तरह के प्रॉब्लम होने की कितनी गुंजाइश है। काउंसलर पेशेंट की फैमिली हिस्ट्री की स्टडी कर इनहेरेटेंस पैटर्न का पता लगाते हैं। वे फैमिली मेंबर्स को इमोशनल और साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी देते हैं।

स्किल्स रिक्वायर्ड

जेनेटिक काउंसलिंग के लिए सबसे इंपॉर्टेट स्किल है कम्युनिक…

फिलॉसफी के कोर्स

फिलॉसफी के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। टीचिंग के क्षेत्र में एक असिस्टेंट प्रोफेसर30000 रुपए प्रतिमाह से ऊपर वेतनमान प्राप्त करता है। इसके अलावा एक प्रोफेसर 80000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त करता है। आरकेएमवी शिमला में हर वर्ष 60 छात्राएं यह कोर्स करके निकल रही हैं। हिमाचल में इस समय 50 से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़े हैं… फिलॉसफीएक वैज्ञानिक विषय है, जिसमें सच्चाई और वास्तविकता के कारणों का पता लगाने के लिए तर्क का प्रयोग किया जाता है। एक व्यक्ति जो फिलॉसफी सीखता है, उसे फिलॉस्फर कहा जाता है और यह जीवन भर सीखी जाने वाली प्रक्रिया है। जिन्हें मेटाफिजिक्स, लॉजिक, रेशनलिज्म आदि में रुचि है, फिलॉसफी उन बुद्धिजीवियों के लिए यह उचित प्रोफेशन है। फिलॉसफी दूसरे विषयों की तरह नहीं है। दूसरी कई अकादमिक शिक्षा छात्रों को एक बेहतर कैरियर बनाने के लिए प्रदान करवाई जाती है, लेकिन फिलॉसफी इन सबसे अलग है। यह कोई ट्रेनिंग नहीं है, बल्कि जीवन भर सीखने वाली शिक्षा है। यदि आपकी रुचि इस क्षेत्र में है, तो यह एक बेहतर कैरियर विकल्प बन सकता है। फिलॉसफी की कुछ उप शाखाएं हैं, जिनमें से किसी एक को चुनकर आप…

जायके से भरपूर करियर

आज से 10-12 साल पहले तक कुकिंग स्किल्स को ज्यादा इंपॉर्र्टेस नहींदीजाती थी, लेकिन अब टाइम बदल चुका है। शेफ का रोल किचन तक लिमिटेड नहीं रहा। वह टीवी शोज होस्ट करने से लेकर बुक्स लिख रहे हैं, यानी यह एक ग्लैमरस करियर के तौर पर हमारे सामने आया है। आज शेफ का स्टेटस किसी सेलिब्रेटी से कम नहीं रह गया है। चैनल्स पर आने वाले कुकिंग से रिलेटेड रिएलिटी शोज की पॉपुलैरिटी में शेफ की अच्छी खासी भूमिका होती है। मशहूर शेफ कुणाल कपूर इसके एग्जांपल हैं। कुणाल को दूरदर्शन पर आने वाले शो दावत ने शेफ बनने के लिए इंस्पायर किया था। इनका कहना है कि जिनमें भी कुकिंग को लेकर राइट एटीट्यूड और स्पाइसेज की सही पहचान हो, वो शेफ के तौर पर अट्रैक्टिव करियर बना सकते हैं।लीडरशिप क्वॉलिटीज
शुरुआती दौर में इस इंडस्ट्री में काफी हार्ड वर्क की जरूरत होती है। अलग-अलग कंट्रीज के लोगों की डाइट की जानकारी रखनी होती है कि वे क्या खाना पसंद करते हैं। एक शेफ के लिए यह जानना भी जरूरी होता है कि इंडिया की कौन सी रेसिपीज दूसरे कंट्री की किस रेसिपी से मैच करती है। एक बार यह समझ में आ गया, तो आगे आप खुद ही सक्सेस की नई मंजिलें तय कर…

लैंडस्केपिंग आर्किटेक्चर में करियर

अगर आप बिल्डिंग निर्माण के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो लैडस्केपिंग आर्किटेक्चर आपके करियर के लिए बेहतर विकल्प होगा. यह क्षेत्र समय के साथ तेजी से विकास कर रहा है. अब बिल्डिंगों के इंटीरियर डिजाइन पर जितना ध्यान दिया जाता है उतना ही बिल्डिंग के आस-पास के आर्किटेक्चर पर.
क्या है लैंडस्केपिंग आर्किटेक्चर?
इसमें मुख्य रूप से बिल्डिंग के आउटडोर पब्लिक एरिया को प्राकृतिक रूप से डिजाइन किया जाता है, जिसमें वाटर बॉडी, स्टोन, टाइल्स, पेड़-पौधे को आकर्षक बनाया जाता है. संबंधित कोर्स: इस कोर्स को करने के लिए साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास होना जरूरी है. जिसके बाद आप इस विषय में ग्रेजुएशन तथा पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर सकते हैं. लैंडस्केपिंग कोर्स से जुड़े अन्य कोर्सेज बीआर्क, बीएससी, एग्रीकल्चर में भी एडमिशन ले सकते हैं. कहां से करें पढ़ाई?
सेंटर फॉर एनवॉयरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद
स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, नोएडा
डॉ. भानुबेन नानावती कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर फॉर वुमन, पुणे
डॉ. वाईएसपी इंस्टीट्यूट ऑफ हार्टिकल्चर एंड…

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में करियर

मैकेनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैथमेटिक्स में दिलचस्पी है, तो ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के साथ करियर को रफ्तार दे सकते हैं। अगर आप इनोवेटिव और क्रिएटिव माइंडेड हैं, तो ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का करियर अपना सकते हैं। इस फील्ड में शानदार पे-पैकेज के अलावा, जॉब की भरपूर संभावनाएं हैं। जानिए इस इनोवेटिव फील्ड में कैसे मिल सकती है आपको एंट्री.. 

भारतीयों की Rय शक्ति और गाç़डयों की सेल्स बढ़ने से ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से उभरती हुई इंडस्ट्री बन गया है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। कहते हैं कि किसी भी ऑटो कंपनी में एक जॉब क्रिएटिव होने का मतलब है, तीन से पांच इनडायरेक्ट जॉब ऑप्शंस का खुलना। जिस तरह से मार्केट में देशी-विदेशी कंपनियों की नई इनोवेटिव कारें लॉन्च हो रही हैं, उसे देखते हुए ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। अगर आपको भी कार का पैशन है। मैकेनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैथमेटिक्स में दिलचस्पी है, तो ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के साथ करियर को रफ्तार दे सकते हैं। 

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग

एक ऑटोमोबाइल इंजीनियर पर कई प्रकार की जिम्मेदारियां होत…

नर्सिग इंफॉर्मेटिक्स

तकनीक की सबसे अच्छी बात है कि उसे किसी भी चीज से जोड़ दीजिए, वह कुछ नया प्रस्तुत कर देती है। हेल्थकेयर में टेक्नोलॉजी के समावेश ने इस सेक्टर को तो तब्दील किया ही है, साथ ही इस फील्ड से जुड़े कॅरिअर में भी विकल्प पैदा किए हैं। नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स इसका एक उदाहरण है। नर्सिंग साइंस, कम्प्यूटर साइंस और इन्फॉर्मेशन साइंस के मिश्रण से बना नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स कोर्स मेडिकल और टेक्नोलॉजी को साथ मिलाकर करिअर में आगे बढ़ने का अवसर देता है। क्या है नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स नर्सिंग के साथ आईटी के इस्तेमाल ने मरीज से संबंधित सटीक आंकड़ों और उनकी देखभाल से जुड़ी सूचनाओं को एकत्र करना काफी आसान बनाया है। सरल शब्दों में समझें तो नर्सिंग प्रैक्टिस के लिए आंकड़ों, सूचनाओं और नर्सिंग से जुड़ी जानकारियों का प्रबंधन नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स करता है, ताकि बीमारी की पहचान से जुड़े फैसले लेने में आसानी हो सके। ये सभी काम इन्फॉर्मेशन स्ट्रक्चर, इन्फॉर्मेशन प्रोसेस और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की मदद से पूरे होते हैं। संक्षेप में नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स मरीजों/ उपभोक्ताओं की सीधी देखभाल के लिए प्रभावी आंकड़े जुटान…

न्यूक्लियर साइंस में करियर

दुनिया भर में ऊर्जा की जरूरत लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में नाभिकीय ऊर्जा समस्या के समाधान के रूप में उभरकर सामने आई है। उसके माध्यम से जहां ऊर्जा की बचत की जा सकती है, वहीं इसकी लागत को भी कम किया जा सकता है। दुनिया की नाभिकीय ऊर्जा पर निर्भरता बढऩे के साथ तकरीबन हर देश न्यूक्लियर साइंस पर शोध कार्यों को तरजीह देने लगा है। इसके न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स की मांग में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। 

भारत का 2025 तक विद्युत ऊर्जा के उपयोग को 25 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। भारत ने 2020 तक 20 हजार मेगावाट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों की मानें, तो नाभिकीय डील और ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों की वजह से आने वाले समय में इस क्षेत्र में एक लाख प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होगी।


क्यों हैं भविष्य का क्षेत्र

एक अनुमान के मुताबिक, आज पूरे विश्व में पचास मिलियन टन हाइड्रोजन ईंधन का उपयोग किया जाता है। अगर आंकड़ों पर गौर करें, तो ऊर्जा के रूप में उपयोग करने पर नौ मिलियन टन हाइड्रोजन बीस से तीस मिलियन कार या आठ से नौ मिलियन घरों में ऊर्जा दे सकती है। इसके उपयोग से हमारी तेल के उपर निर्भरता कम…

एनजीओ में करियर

एनजीओ- नॉन गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन यानी गैर सरकारी संगठन। एनजीओ किसी मिशन के तहत चलाए जाते हैं। सामाजिक समस्याओं को हल करना और विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गतिविधियों को बल देना एक एनजीओ का मुख्य उद्देश्य होता है। कार्यक्षेत्र के रूप में कृषि, पर्यावरण, शिक्षा, संस्कृति, मानवाधिकार, स्वास्थ्य, महिला समस्या, बाल-विकास आदि में से कोई भी चुना जा सकता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां आप नाम और दाम, दोनों कमा सकते हैं।
वह जमाना गया, जब इस क्षेत्र में आमतौर पर वे ही लोग आते थे, जो खुद के संसाधनों या सिर्फ दान वगैरह के बूते समाजसेवा करना चाहते थे। अब एनजीओ रोजगार के बढ़िया साधन बन चुके हैं। कई बार कई दूसरी नौकरियों से भी अच्छे वेतनमान पर काम यहां मिल सकता है। किसी अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले एनजीओ में बात बन जाए तो फिर बात ही क्या है। समाज सेवा का सुकून तो इसमें है ही।
इस क्षेत्र की विशिष्टता यही है कि रोजगार का साधन होने के बावजूद समाजहित की भावना इसमें सर्वोपरि होनी चाहिए। यह उन लोगों के लिए अच्छा क्षेत्र है, जो सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील हों, समाज हित के विभिन्न पहलुओं…

पृथ्वी के रहस्यों में करियर

अगर आपको पृथ्वी के रहस्यों को जानने की उत्सुकता है और आप उससे जुड़े क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो अर्थ साइंस आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। संभावनाओं के लिहाज से देखें तो इस क्षेत्र में अवसरों की कमी नहीं है। अर्थ साइंस में मुख्यत: भूगोल, जियोलॉजी और ओशियोनोग्राफी जैसे विषय होते हैं। भूगोल में जहां पृथ्वी के एरियल डिफरेंसिएशन के बारे में जानकारी दी जाती है, वहीं इसके दूसरे कारक जैसे कि मौसम, उन्नयन कोण, जनसंख्या, भूमि का इस्तेमाल आदि का अध्ययन किया जाता है। जियोलॉजी में पृथ्वी के फिजिकल इतिहास का अध्ययन किया जाता है, जैसे पृथ्वी किस तरह की चट्टानों से बनी है और इसमें लगातार किस तरह के परिवर्तन होते रहते हैं, इसका अध्ययन किया जाता है। ओशियनोग्राफी में मुख्यत: समुद्रों का अध्ययन किया जाता है। जियोफिजिक्स का पहली बार इस्तेमाल 1799 में विलियम लेंबटन ने एक सर्वे के लिए किया था। वहीं 1830 में गुरुत्व क्षेत्र का अध्ययन कर्नल जॉर्ज एवरेस्ट ने किया था। तेल के अन्वेषण के लिए पहली बार जियोफिजिक्स का प्रयोग 1923 में बर्मन ऑयल कॉरपोरेशन ने किया था। इलेक्ट्रिकल …

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस में करियर

एविएशन का नाम आते ही आसमान में उड़ने का मन करता है लेकिन यदि आप बनाना चाहते हो हो एविएशन में अपना करियर तो आप कहाँ पर अपनी लाइफ बना सकते हो। एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) में हो रहे लगातार विस्तार से रोजगार के अवसरों में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में बहुत से अवसर हैं कई लोग सोचते हैं केवल पायलट या एयर होस्टेस तक ही एविएशन में जॉब सीमित हैं,  लेकिन ऐसा कतई नही है क्योंकि इनके इलावा भी आप एविएशन में अपना करियर बना सकते हो। इसी लाइन में में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर (AME) भी बहुत अच्छा विकल्प है।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर की कार्य प्रकृति कैसी है उसका क्या काम होता है: किसी भी जहाज की तकनीकी जिम्मेदारी एएमई के ऊपर होती है। हर उड़ान के पहले एएमई जहाज का पूरी तरह से निरीक्षण करता है और सर्टिफिकेट जारी करता है कि जहाज उड़ान भरने को तैयार है। इस काम के लिए उसके पास पूरी तकनीकी टीम होती है। कोई भी विमान एएमई के फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना उड़ान नहीं भर सकता। गौरतलब है कि एक हवाईजहाज के पीछे करीब 15-20 इंजीनियर काम करते हैं। इसी से इनकी जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता है। कैसे बन…
मौसम की अनिश्चितताओं ने सदियों से लोगों को प्रभावित किया है। मौसम के व्यवहार पर कई कारणों का असर होता है। धरती के वातावरण के संपर्क में आने वाली हर चीज का प्रभाव मौसम पर पड़ता है जिसकी वजह से विश्वभर में भिन्न-भिन्न जगहों पर भिन्न-भिन्न मौसम दर्ज किया जाता है। 

वातावरण पर पड़े असर और मौसम के बदलाव के अध्ययन को मीटियरोलॉजी कहा जाता है। मीटियरोलॉजिस्ट (मौसम विशेषज्ञ) मौसम का अनुमान लगाकर भविष्यवाणी करते हैं।

धरती और उसके उपग्रहों का अध्ययन, उनकी क्रिया और उनके ट्रैक में बदलाव को दर्ज करके मौसम का अनुमान लगाने का कार्य मीटियरोलॉजिस्ट ही करते हैं। वे विशाल भौगोलिक क्षेत्र तक विस्तारित मौसम के मानचित्रों का अध्ययन करते हैं और मौसम उपग्रहों के आंकड़े हासिल कर उनसे मौसम का अनुमान लगाते हैं। 

एक मीटियरोलॉजिस्ट तापमान, हवा, आर्द्रता, नमी और हवाई जहाजों के उड़ने की स्थितियों का पूर्वानुमान करते हैं। गणित समूह से स्नातक करने के उपरांत किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से मीटियरोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कर सकते हैं। मीटियरोलॉजिकल विभाग में ज्वॉइन करने के बाद भी आपको मीटियरोलॉजी मे…