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Showing posts from 2017

इम्यूनोलॉजी में पीएचडी

हमारे शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए इसके अंदर सक्रिय प्रतिरक्षा तंत्र या इम्यून सिस्टम से जुड़ी बारीकियों का अध्ययन करने में रूचि रखने वाले कर सकते हैं, इम्यूनोलॉजी में पीएचडी के लिए आवेदन। बॉयोलॉजी के इस परिष्कृत क्षेत्र में शोध के लिए नई दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी ने आवेदन मंगवाए हैं। नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी नई दिल्ली में जेएनयू कैंपस के पास ही स्थित है। इसके रिसर्च प्रोग्राम में आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आवेदन ऑनलाइन है। अंतिम तिथि 31 दिसंबर है।
रिसर्च के विकल्प नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी ने जिन एरियाज में रिसर्च के लिए पीएचडी के प्रस्ताव मंगवाए हैं, वे इस प्रकार हैं- इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी, जेनेटिक्स मॉलिक्यूलर एंड सेलुलर बायोलॉजी, केमिकल, स्ट्रेक्चरल एंड कंप्यूटेशनल बायोलॉजी, रीप्रोडक्शन एंड डेवलपमेंट। रिसर्च के ये सभी एरियाज इंटरडिसीप्लीनरी एरियाज हैं। रूचि होने पर आप अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। क्या है योग्यता आवेदक ने साइंस की ब्रांच में एमएससी या एमटेक या एमबीबीएस या एमवीएससी या एमफार्म या समकक्ष कोर्स किया हो। बारहवीं और ग्रेजुएशन मे…

रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट में करियर

आज जिस तेजी से दुनिया में विकास हो रहा है, उससे भी कहीं ज्यादा तेजी से एनर्जी की मांग बढ़ रही है। किसी भी इंडस्ट्री या प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले वहां की ऊर्जा की संभावनाओं की पड़ताल जरूरी होती है। जरूरतों के साथ ही अब पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी देखा जाने लगा है। तमाम पावर प्रोजेक्ट्स पर्यावरण संबंधी विषयों के चलते ही अटके पड़े हैं। इसलिए रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस्ड रहना उनकी मजबूरी है। इस क्षेत्र में भारत ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रखी हैं। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे इस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं। बायोफ्यूल की लगातार कम होती जा रही मात्रा और देश में एनर्जी की मांग को देखते हुए एनर्जी प्रोडक्शन और उसका प्रबंधन पहली प्राथमिकता बन चुका है। सरकारी के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इस ओर विशेष जोर दे रही हैं। यही कारण है कि रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट के कोर्स की तेजी से मांग बढ़ रही है। समय के साथ-साथ ऊर्जा की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसलिए ऊर्जा के अतिरिक्त स्रोतों यानी वैकल्पिक ऊर्जा, सौर ऊर्जा, विंड एनर्जी, बायो एनर्जी, हाइड्रो एनर्जी आदि पर विशेष ध्यान दिया जा …

क्रिएटिव राइटिंग में स्कोप

लेखक बनने में कोई स्कोप नहीं है.. क्या राइटिंग करके फैमिली मैनेज कर सकते हैं। अगर बैकग्राउंड अच्छा नहीं तो राइटिंग में सस्टेन करना मुश्किल है। आम धारणा है कि लेखन रईसों का पेशा है, जबकि सच्चाई यह नहीं है। एक दशक तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का कार्य करने के बाद लेखन की ओर मुड़े अनिल अनंतस्वामी का कहना है, ‘लेखक होने का सबसे बड़ा फायदा है कि इससे आपकी एकाग्रता में विकास होता है। यदि आप दुनिया के बारे में कौतुहल रखते हैं तो लेखन आपको अपनी प्रतिक्रियाओं को सटीक तरीके से सामने रखने में मदद करता है।’ इसलिए यदि आप लेखन का प्रयास कर रहे हैं तो इसके लक्षण आपके जीवन की शुरुआत से ही दिख जाते हैं। संभावित विकल्प पत्रकारिता: एक पत्रकार के तौर पर कई स्तरों पर कार्य किया जा सकता है, जिनमें एक स्तंभकार, फ्रीलांस जर्नलिस्ट, एडिटर और सब एडिटर आदि प्रमुख होते हैं। इसके अलावा, एक रिपोर्टर या फोटोजर्नलिस्ट का कार्य भी होता है।
स्क्रिप्ट राइटिंग: लेखन का यह विकल्प उन लोगों के लिए आदर्श है, जो कौतुहल से जीवन के प्रत्येक पक्ष को देखते हैं। हालांकि, अपने लिखे हुए कार्य के व्यावसायिक पक्ष को हमेशा ध्यान में रखना होता …

मानचित्रकला क्रिएटिविटी की दुनिया

आज क्रिएटिविटी की एक अलग दुनिया है। इसमें  मानचित्रकला भी एक है। पिछले पांच-छह साल से लगातार मानचित्रकला  के क्षेत्र में ग्रोथ दिखाई दे रही है। डिमांड के अनुसार इस फील्ड में ट्रेंड प्रोफेशनल्स के लिए स्कोप भी बढ़ा है, लेकिन यह केवल उन्हीं के लिए है, जो अपने विषय के साथ-साथ इसमें प्रयोग होने वाली नई टेक्नोलॉजी में भी पूरी तरह से निपुण हैं। मानचित्र तथा विभिन्न संबंधित उपकरणों की रचना, इनके सिद्धांतों और विधियों का ज्ञान एवं अध्ययन मानचित्रकला  कहलाता है। मानचित्र के अतिरिक्त तथ्य प्रदर्शन के लिये विविध प्रकार के अन्य उपकरण, जैसे उच्चावचन मॉडल, गोलक, मानारेख आदि भी बनाए जाते हैं। मानचित्रकला में विज्ञान, सौंदर्यमीमांसा तथा तकनीक का मिश्रण है। इसका रूपांतर कार्टोग्राफी है जो कि  ग्रीक शब्द से बना है।
योग्यता
मानचित्रकार बनने के लिए बैचलर ऑफ कार्टोग्राफी करनी होती है। अर्थ साइंस और अन्य फिजिकल साइंस ग्रेजुएट स्टूडेंट्स भी इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। उन्हें अपनी बीएससी या बीटेक में एक विषय कार्टोग्राफी रखना चाहिए। अगर आप मानचित्रकार बनना चाहते हैं तो इससे संबंधित डिग्री या डिप्लोमा को…

पृथ्वी के रहस्यों में करियर

अगर आपको पृथ्वी के रहस्यों को जानने की उत्सुकता है और आप उससे जुड़े क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो अर्थ साइंस आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। संभावनाओं के लिहाज से देखें तो इस क्षेत्र में अवसरों की कमी नहीं है। अर्थ साइंस में मुख्यत: भूगोल, जियोलॉजी और ओशियोनोग्राफी जैसे विषय होते हैं। भूगोल में जहां पृथ्वी के एरियल डिफरेंसिएशन के बारे में जानकारी दी जाती है, वहीं इसके दूसरे कारक जैसे कि मौसम, उन्नयन कोण, जनसंख्या, भूमि का इस्तेमाल आदि का अध्ययन किया जाता है। जियोलॉजी में पृथ्वी के फिजिकल इतिहास का अध्ययन किया जाता है, जैसे पृथ्वी किस तरह की चट्टानों से बनी है और इसमें लगातार किस तरह के परिवर्तन होते रहते हैं, इसका अध्ययन किया जाता है। ओशियनोग्राफी में मुख्यत: समुद्रों का अध्ययन किया जाता है। जियोफिजिक्स का पहली बार इस्तेमाल 1799 में विलियम लेंबटन ने एक सर्वे के लिए किया था। वहीं 1830 में गुरुत्व क्षेत्र का अध्ययन कर्नल जॉर्ज एवरेस्ट ने किया था। तेल के अन्वेषण के लिए पहली बार जियोफिजिक्स का प्रयोग 1923 में बर्मन ऑयल कॉरपोरेशन ने किया था। इलेक्ट्रिकल सर्वे पहली बार …

फैशन इंडस्ट्री में ऑप्शन

फैशन डिज़ाइनिंग को आम तौर पर कॅरियर का एक आप्शन भर माना जाता है. जबकि ऐसा नहीं है, दरअसल यह एक ऐसी कला है जो ड्रेस और एक्सेसरीज़ की मदद से किसी इनसान की लाइफ स्टाइल को सामने लाती है. क्या है फैशन डिजाइनिंग? मॉडर्न फैशन के अंतर्गत दो मूल विभाग हैं. पहला वर्ग है वस्त्रों को डिज़ाइन करना और दूसरा रेडी-टू-वियर अर्थात तैयार पोशाकें. इन दोनो वर्गों मे फैशन डिज़ाइनिंग का इस्तेमाल प्रथम वर्ग मे किया जाता है. वर्तमान समय मे फैशन शो इसी के बूते चल रहे हैं. इन शो के ज़रिए ही फैशन डिज़ाइनर्स की सृजनात्मकता और रचनात्मकता का पता चलता है. अहमियत रंग और बुनावट की यदि किसी को टेक्सटाइल, पैटर्न, कलर कोडिंग, टेक्सचर आदि का अच्छा ज्ञान हो तो फैशन डिज़ाइनिंग को कॅरियर के रूप मे अपनाने मे उसे बिल्कुल हिचकना नहीं चाहिए. उसकी सफलता को कोई गुंजाइश नहीं रह जाती और उसका नाम फैशन इंडस्ट्री मे तहलका मचा सकता है. खासकर भारत जैसे देश में जहाँ के फैशन मे पश्चिमी सभ्यता का भी संगम है, और इसी मिलन ने फैशन इंडस्ट्री को एक नयी दिशा और पहचान दी है. फॅशन डिज़ाइनिंग मे रंगों के संयोजन और कपड़े के आधार पर उसकी बुनाई का बड़ा…

पर्यावरण विज्ञान में बनाए कॅरि‍यर

पर्यावरण को हो रही क्षति चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। यह क्षति इस सीमा तक पहुंच गई है कि हम प्रतिदिन कम के कम एक बार तो अवश्य भूमंडलीय तापन, जलवायु परिवर्तन, हिम पिघलने, अम्ल बारिश या प्रदूषण जैसे शब्द सुनने को मिलता है। पर्यावरणीय मामलों पर जानकारी बढ़ने से भूमंडल की सुरक्षा प्रत्येक राष्ट्र, उद्योग, गैर सरकारी संगठन, बुद्धिजीवी और आम व्यक्ति का सामान्य उद्देश्य एवं जिम्मेदारी बन गई है। इस परिदृश्य में पर्यावरण इंजीनियरी या विज्ञान उन व्यक्तियों के लिए करियर का श्रेष्ठ विकल्प है जो पर्यावरण की सुरक्षा तथा धारणीय विकास का दायित्व उठाना चाहते हैं।पर्यावरण विज्ञान पर्यावरण का अध्ययन है। इसमें मानव पर्यावरण संबंध तथा उसके प्रभाव सहित पर्यावरण के विभिन्न घटक तथा पहलू शामिल है। इस क्षेत्र में व्यवसायी, प्राकृतिक पर्यावरण के संकट की चुनौतियों का सामाना करने के प्रयत्न करते हैं। वे सभी व्यक्ति पर्यावरण विज्ञानी होते हैं जिनका अभियान पर्यावरण-प्रकृति पर्यावरण के विभिन्न स्तरों पर परिरक्षा, बहाली और सुधार करना होता है।शैक्षिक विषय के रूप में पर्यावरण विज्ञानी एक ऐसा अंतरविषयीय शैक्षिक क्षेत…

नर्सिग इंफॉर्मेटिक्स में करियर

तकनीक की सबसे अच्छी बात है कि उसे किसी भी चीज से जोड़ दीजिए, वह कुछ नया प्रस्तुत कर देती है। हेल्थकेयर में टेक्नोलॉजी के समावेश ने इस सेक्टर को तो तब्दील किया ही है, साथ ही इस फील्ड से जुड़े कॅरिअर में भी विकल्प पैदा किए हैं। नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स इसका एक उदाहरण है। नर्सिंग साइंस, कम्प्यूटर साइंस और इन्फॉर्मेशन साइंस के मिश्रण से बना नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स कोर्स मेडिकल और टेक्नोलॉजी को साथ मिलाकर करिअर में आगे बढ़ने का अवसर देता है।
क्या है नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स नर्सिंग के साथ आईटी के इस्तेमाल ने मरीज से संबंधित सटीक आंकड़ों और उनकी देखभाल से जुड़ी सूचनाओं को एकत्र करना काफी आसान बनाया है। सरल शब्दों में समझें तो नर्सिंग प्रैक्टिस के लिए आंकड़ों, सूचनाओं और नर्सिंग से जुड़ी जानकारियों का प्रबंधन नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स करता है, ताकि बीमारी की पहचान से जुड़े फैसले लेने में आसानी हो सके। ये सभी काम इन्फॉर्मेशन स्ट्रक्चर, इन्फॉर्मेशन प्रोसेस और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की मदद से पूरे होते हैं। संक्षेप में नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स मरीजों/ उपभोक्ताओं की सीधी देखभाल के लिए प्रभावी आंकड़े जुटाने…

प्रयोगशाला के बाहर भी अच्छे अवसर

साइंस के हरेक विषय की खासियत है कि वह अपनी अलग-अलग शाखाओं में कॅरिअर और रिसर्च के ढेरों बेहतरीन अवसर देता है। केमिस्ट्री भी ऐसा ही एक विषय है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाला यह विज्ञान नौकरी के मौकों से भरपूर है। साथ ही परम्परागत सोच रखने वालों को भी अब यह समझ आ गया है कि केमिस्ट्री प्रयोगशाला के बाहर भी ढेरों अवसर पैदा कर रही है और इंडस्ट्री आधारित बेहतरीन जॉब प्रोफाइल्स उपलब्ध करवा रही है। ऐसे में भविष्य के लिहाज से यह एक सुरक्षित विकल्प है।
क्या पढ़ना होगा
केमिस्ट्री में रुचि रखने वाले स्टूडेंट्स 12वीं कक्षा(साइंस) अच्छे अंकों से पास करने के बाद केमिकल साइंस में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड मास्टर्स प्रोग्राम का विकल्प चुन सकते हैं या फिर केमिस्ट्री में बीएससी/बीएससी(ऑनर्स)डिग्री कोर्स चुन सकते हैं। आगे चलकर एनालिटिकल केमिस्ट्री, इनऑर्गनिक केमिस्ट्री, हाइड्रोकेमिस्ट्री, फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री, पॉलिमर केमिस्ट्री, बायोकेमिस्ट्री, मेडिकल बायोकेमिस्ट्री और टेक्सटाइल केमिस्ट्री में स्पेशलाइजेशन के जरिए आप एक मजबूत करियर की शुरुआत कर सकते हैं। काम और रोजगार के अवसर :लैब के बाहर…

एस्ट्रोनॉमी में करियर

एस्ट्रोनॉमी के फील्ड में जाने के लिए फिजिक्स और मैथ्स के साथ ग्रेजुएशन करना जरूरी है। पीजी लेवल पर आपके पास विषय के तौर पर एस्ट्रोनॉमी या फिजिक्स का होना जरूरी है। अगर आपने इसमें पीएच.डी. कर रखी है तो और भी अच्छी बात है। एस्ट्रोनॉमर या एस्ट्रोनॉट आदि बनने या स्पेस रिसर्च में काम करने के लिए आपको ज्वाइंट एंट्रेंस स्क्रीनिंग टेस्ट (जेईएसटी) देना पड़ेगा। पीजी लेवल पर एस्ट्रोनॉमी या एस्ट्रोफिजिक्स में एमएससी के लिए देश में नीचे दिए गए संस्थान उपलब्ध हैं।

इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, बेंग्लुरू, www.iiap.ernet.in
आंध्र यूनिवर्सिटी, विशाखापट्टनम
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ जियोमैग्नेटिज्म, www.iigm.res.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस, बेंग्लुरू, www.iisc.ernet.in
इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, गणेशखिंड, पुणे www.iucaa.ernet.in
सत्येन्द्र नाथ बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंस, कोलकाता, www.bose.res.in
इंस्टीटय़ूट ऑफ फिजिक्स, भुवनेश्वर www.iopb.res.in
नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स, टाटा इंस्टीटय़ूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) पुणे और बेंग्लुरू www.tifr.res.in
आर्यभट्ट …

रेडियोलॉजी में करियर

एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी आदि जैसी मेडिकल डायग्नॉस्टिक तकनीकों से आज पूरे चिकित्सा जगत का स्वरूप बदल गया है। अब शरीर के किसी भी अंदरूनी हिस्से में छिपा रोग पता लगाना आसान हो गया है। रेडियोलॉजी का क्षेत्र अब करियर के लिहाज से आकर्षक बन गया है। जॉब मार्केट में ऐसे लोगों की भारी मांग है, जिन्हें रेडिएशन से बचाव की समझ हो और जो मशीन्स की देखरेख करना जानते हों। रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर हैल्थकेयर के क्षेत्र में बेशुमार अवसर हैं।
क्या है रेडियोलॉजी?
कल टेक्नोलॉजी है। इसकी मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जांच की जाती है। इससे डॉक्टरों को मरीजों की स्थिति और उनकी बीमारियों के बारे में सटीक जानकारी मिल जाती है, जिससे उन्हें कारगर इलाज करने में काफी आसानी होती है। रेडियोलॉजी दो तरह की होती है: डायग्नॉस्टिक रेडियोलॉजी और थैरापेटिक रेडियोलॉजी। डायग्नॉस्टिक रेडियोलॉजी के अंतर्गत मुख्य रूप से रेडियोग्राफी और अल्ट्रासाउंड से जुड़े टेस्ट शामिल होते हैं, जैसे एक्सरे, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी, फ्लोरोस्कोपी, पोसीट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी आदि। थैरापेटिक रेडियोल…

राजनीतिक विज्ञान में करियर

राजनीति विज्ञान एक सामाजिक विज्ञान है, जो राजनीति के सिद्धांत और व्यवहार तथा राजनीतिक व्यवस्था के विवेचन एवं विश्लेषण से जुड़ा हुआ है। इस विषय के कई उपभाग हैं । जैसे-राजनीतिक सिद्धांत, लोक नीति, राष्ट्रीय राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध,  तुलनात्मक राजनीति आदि। इससे पता चलता है कि यह विषय व्यापक क्षेत्र को कवर करता है तथा इस विषय का अध्ययन करने के बाद विविध क्षेत्रों में एवं विभिन्न भूमिकाओं में कार्य करने का अवसर मिल सकता है…
राजनीतिअपने पुरातन स्वरूप में बड़े बदलाव कर रही है, जो पूरी दुनिया की सामाजिक संरचनाओं को भी प्रभावित कर रही है। ढेरों ऐसे संगठन इस बदलाव को समझने और नई रणनीतियों को बनाने के लिए बन रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। तमाम राजनीतिक दल अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए नए तरीके और आइडियाज पर काम कर रहे हैं। थिंक टैंक और संगठन तक में आधुनिक तौर तरीकों से बदलाव किए जा रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की बाजार में मांग पैदा हो रही है जो इन बदलावों को बेहतर तरीके से समझते हों या राजनीतिक समझ को बेहतर करने में सक्षम हों। पॉलिटिकल साइंटिस्ट और थिंक टैंक जैसे नए पदनामों के साथ …