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Showing posts from January, 2017

जोअलॉजी में कॅरियर

जीव-जंतु प्रेमियों को निश्चय ही उनके साथ समय बिताना अच्छा लगताहै। आप अपने इसी प्रेम को अपने करियर में भी बदल सकते हैं। प्राणि विज्ञानया जोअलॉजी जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जिसमें जीव-जंतुओं का वैज्ञानिकअध्ययन किया जाता है। इसमें प्रोटोजोआ, मछली, सरीसृप, पक्षियों के साथ-साथस्तनपायी जीवों के बारे में अध्ययन किया जाता है। इसमें हम न सिर्फजीव-जंतुओं की शारीरिक रचना और उनसे संबंधित बीमारियों के बारे में जानतेहैं, बल्कि मौजूदा जीव-जंतुओं के व्यवहार, उनके आवास, उनकी विशेषताओं, पोषणके माध्यमों, जेनेटिक्स व जीवों की विभिन्न जातियों के विकास के साथ-साथविलुप्त हो चुके जीव-जंतुओं के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।
अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि प्राणि विज्ञान में किस-किस प्रकारके जीवों का अध्ययन किया जाता है। जवाब है, इस पाठय़क्रम के तहत आप लगभगसभी जीवों, जिनमें समुद्री जल जीवन, चिडियाघर के जीव-जंतु, वन्य जीवों, यहां तक कि घरेलू पशु-पक्षियों के जीव विज्ञान एवं जेनेटिक्स का अध्ययनकरते हैं। आइए जानते हैं कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने का पहला पड़ाव क्याहै?
प्राणि विज्ञान के क्षेत्र में आने क…

प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में करियर

वर्तमान समय में प्लास्टिक आदमी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो गया है। आम आदमी की जरूरतों से लेकर उद्योग जगत तक में प्लास्टिक का प्रयोग दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग ने प्लास्टिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र को बहुत व्यापक बना दिया है। इंडस्ट्री का निरंतर विस्तार होने के कारण इसमें विशेषज्ञों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट का कार्य इस इंडस्ट्री में बहुत ही महत्वपूर्ण है। कार्य
प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट रॉ मैटीरियल को विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजार कर प्रोडक्ट्स का निर्माण करते हैं। वे शोध व अनुसंधान का कार्य भी करते हैं। इन्हीं कार्यों के फलस्वरूप हर दिन नए प्रकार के प्रोडक्ट्स बाजार में लॉन्च होते हैं। योग्यता
बीटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में प्रवेश पाने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथमेटिक्स विषयों के साथ 10+2 में कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी है। एमटेक या पीजी  डिप्लोमा करने के लिए केमिकल इंजीनियरिंग/ प्लास्टिक रबर टेक्नोलॉजी/ मैकेनिकल इंजीनियरिंग/ टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में बीटेक/ बीई डिग्री या डिप्लोमा आवश्यक है…

पर्यावरण विज्ञान में कॅरिअर

मनुष्य, भगवान की कृतियों में से सबसे बुद्धिमान माना जाता है, प्रकृति और उसके सद्भाव के लिए सबसे ज्यादा नुकसान का कारण है। ओजोन रिक्तीकरण, सदाबहार विनाश, अम्ल वर्षा, जैव विविधता और उष्णकटिबंधीय वनों की कटाई की हानि सब एक बिंदु है जहां वे या तो अपरिवर्तनीय या बहुत कम करने के लिए महंगा लग रहे करने के लिए आए हैं। नकारात्मक परिणामों को देखने के लिए सभी के लिए देखते हैं – समुद्र के स्तर से बढ़ रहा है, भूमि क्षरण स्पष्ट है, और अधिक अक्सर या नदी और तटीय क्षेत्रों, लंबे समय से तैयार की सूखे की तीव्र बाढ़ है, अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन पहले से ही हमें प्रभावित कर रहा शुरू कर दिया है। पर्यावरण वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए एक स्थायी जीवन शैली को बनाए रखने और पर्यावरण मॉडलिंग और क्षति को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग के सिद्धांतों और अवधारणाओं के नए अनुप्रयोगों के साथ आने के लिए विभिन्न पर्यावरणीय कारकों को मापने के लिए काम करते हैं, तकनीकी समाधान प्रदान करते हैं। पर्यावरण विज्ञान में कॅरिअर के सभी शोध, निगरानी और हमारे वायुमंडलीय, स्थलीय और जलीय पर्यावरण को …