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Showing posts from July, 2018

रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट में करियर

आज जिस तेजी से दुनिया में विकास हो रहा है, उससे भी कहीं ज्यादा तेजी से एनर्जी की मांग बढ़ रही है। किसी भी इंडस्ट्री या प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले वहां की ऊर्जा की संभावनाओं की पड़ताल जरूरी होती है। जरूरतों के साथ ही अब पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी देखा जाने लगा है। तमाम पावर प्रोजेक्ट्स पर्यावरण संबंधी विषयों के चलते ही अटके पड़े हैं। इसलिए रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस्ड रहना उनकी मजबूरी है। इस क्षेत्र में भारत ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रखी हैं। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे इस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं। बायोफ्यूल की लगातार कम होती जा रही मात्रा और देश में एनर्जी की मांग को देखते हुए एनर्जी प्रोडक्शन और उसका प्रबंधन पहली प्राथमिकता बन चुका है। सरकारी के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इस ओर विशेष जोर दे रही हैं। यही कारण है कि रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट के कोर्स की तेजी से मांग बढ़ रही है। समय के साथ-साथ ऊर्जा की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसलिए ऊर्जा के अतिरिक्त स्रोतों यानी वैकल्पिक ऊर्जा, सौर ऊर्जा, विंड एनर्जी, बायो एनर्जी, हाइड्रो एनर्जी आदि पर विशेष ध्यान दिया जा …

जंगल में संवारें करिअर

आज बढ़ती आबादी व निर्बाध रूप से हो रहे निर्माण कार्यों का कारण धरती से जंगल खत्म होते जा रहे हैं। जंगल धरती की ऐसी प्राकृतिक संपदा है जो धरती पर मनुष्यों व जीव-जंतुओं के जीवन को आसान व रहने योग्य बनाते हैं। जंगल सैकड़ों जीव जंतुओं को ही नहीं, जड़ी-बूटियों को भी आश्रय देते हैं। जंगल पर्यावरण के लिहाज से ही नहीं, किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद जरूरी है। दुनिया भर में जंगलों को बचाने पर बहुत जोर दिया जा रहा है, मुहिम चलाई जा रही है, पौधरोपण किया जा रहा है। इसके लिए खासतौर से ट्रेंड व्यक्तियों जैसे कि फारेस्टरी स्पेशलिस्ट, फारेस्टरी मैनेजमेंट एक्सपर्ट और फॉरेस्ट ऑफिसर्स की मांग बढ़ती जा रही है।

कार्य क्षेत्र
फॉरेस्टरी के अंतर्गत जंगलों की सुरक्षा, लकड़ी की जरुरतों को पूरा करने के लिए वृक्षों की खेती, उन्हें आग, बीमारी और अतिक्रमण रोकने से संबंधित कार्यों फारेस्टर को दक्षता प्राप्त होती है। इनके कार्यों में जीव-जंतुओं के बिहेवियर को समझना, पेड़-पौधों की साइंटिफिक तौर पर जांच करना, कीड़े-मकोड़ों से पौधों की सुरक्षा करना आदि प्रमुखता से शामिल होता है। इसके अलावा जानवरों, पेड़ों व प्र…

आर्कियोलॉजी में कॅरिअर

हजारों साल पहले मानव जीवन कैसा रहा होगा? किन-किन तरीकों से जीवन से जुड़े अवशेषों को बचाया जा सकता है? एक सभ्यता, दूसरी सभ्यता से कैसे अलग है? क्या हैं इनकी वजहें? ऐसे अनगिनत सवालों से सीधा सरोकार होता है आर्कियोलॉजिस्ट्स का। 

अगर आप भी देश की धरोहर और इतिहास में रुचि रखते हैं तो आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में एक अच्छे करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें आपको नित नई चीजें जानने को तो मिलेंगी ही, सैलरी भी अच्छी खासी है। आर्कियोलॉजी के अंतर्गत पुरातात्विक महत्व वाली जगहों का अध्ययन एवं प्रबंधन किया जाता है। 

हेरिटेज मैनेजमेंट के तहत पुरातात्विक स्थलों की खुदाई का कार्य संचालित किया जाता है और इस दौरान मिलने वाली वस्तुओं को संरक्षित कर उनकी उपयोगिता का निर्धारण किया जाता है। इसकी सहायता से घटनाओं का समय, महत्व आदि के बारे में जरूरी निष्कर्ष निकाले जाते हैं। 

जरूरी योग्यता
एक बेहतरीन आर्कियोलॉजिस्ट अथवा म्यूजियम प्रोफेशनल बनने के लिए प्लीस्टोसीन पीरियड अथवा क्लासिकल लैंग्वेज, मसलन पाली, अपभ्रंश, संस्कृत, अरेबियन भाषाओं में से किसी की जानकारी आपको कामयाबी की राह पर आगे ले जा सकती है।

पर्सनल स्किल
आर्…

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में करियर

एक व्यवसाय के रुप में पुस्तकालयाध्यक्षता (लाइब्रेरियनशिप) रोजगार के विविध अवसर प्रदान करती है। पुस्तकालय तथा सूचना-विज्ञान में आज करियर की अनेक संभावनाएं हैं। अर्हताप्राप्त लोगों को विभिन्न पुस्तकालयों तथा सूचना केन्द्रों में रोजगार दिया जाता है। प्रशिक्षित पुस्तकालय व्यक्ति अध्यापक तथा लाइब्रेरियन दोनों रूप में रोजगार के अवसर तलाश कर सकते हैं। वास्तव में, अपनी रुचि तथा पृष्ठभूमि के अनुरूप पुस्तकालय की प्रकृति चयन करना संभव है। लाइब्रेरियनशिप में पदनाम पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन), प्रलेखन अधिकारी, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, उप पुस्तकालयाध्यक्ष, वैज्ञानिक (पुस्तकालय विज्ञान/प्रलेखन), पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, ज्ञान प्रबंधक/अधिकारी सूचना कार्यपालक, निदेशक/सूचना सेवा अध्यक्ष, सूचना अधिकारी तथा सूचना विश्लेषक हो सकते हैं। 

• स्कूल, 
• कॉलेज, विश्वविद्यालयों में; 
• केन्द्रीय सरकारी पुस्तकालयों में; 
• बैंकों के प्रशिक्षण केन्द्रों में; 
• राष्ट्रीय संग्रहालय तथा अभिलेखागारों में; 
• विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों में; 
• आई.सी.ए.आर., सी.एस.आई.आर., डी.आर.डी.ओ., आई.सी.एस.एस.आर…

मृदा विज्ञान में कॅरिअर

मिट्टी वैज्ञानिक या मृदा वैज्ञानिक का प्राथमिक कार्य फसल की बेहतरीन उपज के लिए मृदा का विश्लेषण करना है। मृदा वैज्ञानिक मृदा प्रदूषण का विश्लेषण भी करते हैं जो उर्वरकों और औद्योगिक अपशिष्ट से उत्पन्न होता है। इन अपशिष्टों को उत्पादक मृदा में परिवर्तित करने के लिए वे उपयुक्त तरीके और तकनीक भी विकसित करते हैं। इन पेशेवरों के कार्यक्षेत्र में बायोमास प्रोडक्शन के लिए तकनीक का इस्तेमाल भी शामिल है। वनस्पति पोषण, वृद्धि व पर्यावरण गुणवत्ता के लिए भी वे कार्य करते हैं। उवर्रकों का उपयोग सुझाने में भी इनकी भूमिका अहम होती है। मिट्टी के विशेषज्ञ के रूप में वे मृदा प्रबंधन पर मार्गदर्शन करते हैं। चूंकि मृदा वैज्ञानिक शोधकर्ता, डिवलपर व सलाहकार होते हैं इसलिए वे अपने ज्ञान का इस्तेमाल बेहतरीन मृदा प्रबंधन के लिए करते हैं। 

योग्यता
इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों को मुख्यत: सॉइल केमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, फ़िज़िक्स, पिडालजी, मिनरोलजी, बायोलॉजी, फर्टिलिटी, प्रदूषण, पोषण, बायोफर्टिलाइजर, अपशिष्ट उपयोगिता, सॉइल हेल्थ एनालिसिस आदि विषयों का अध्ययन करना चाहिए। छात्र सॉइल साइंस में बैचलर…

प्रशिक्षण एवं नियोजन में करियर

हाल ही में, प्रशिक्षण एवं नियोजन अधिकांश संगठनों में भले ही उनकी स्थिति कैसी भी हो, एक अग्रणी विभाग के रूप में उभरा है। यह कार्पोरेट जगत में तथा मानव संसाधन की प्रत्येक स्तर पर विकास आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली शैक्षिक संस्थाओं में एक अत्यधिक महत्व का विभाग बन गया है। प्रशिक्षण एवं नियोजन विभाग का मूल कार्य संगठन में विभिन्न पणधारियों (स्टेक होल्डर्स) की प्रशिक्षण- आवश्यकताओं का पता लगाना और विभिन्न क्षमताओं में चुनौतियों को स्वीकार करने में उन्हें तैयार करने के लिए आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण का आयोजन करना है। उदाहरण के लिए, कार्पोरेट जगत में यह विभाग पूरे संगठन के लिए अभिरुचि प्रशिक्षण, व्यवहार कौशल विकास तथा तकनीकी प्रशिक्षण का आयोजन करता है; जबकि शैक्षिक संस्थाओं में यह विभाग सामूहिक विचार-विमर्श, मौखिक प्रस्तुति तथा रोजगार साक्षात्कार के संबंध में छात्रों के कौशल के विकास पर अधिक बल देता है। यह विभाग विभिन्न उद्योगों तथा कार्पोरेट कंपनियों से सम्पर्क भी बनाए रखता है और उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और कैम्पस भर्ती कार्यक्रमों के लिए आमंत्रित करता है।

प्रशिक्षण एवं नियोजन विभाग के त…

ऑटोमोबाइल में करियर

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से परिवर्तन हुए हैं। भारत में स्वदेशी और विदेशी, दोनों ऑटोमोबाइल कंपनियां, अब अपनी प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकियों में बदलाव लाने पर ध्यान केन्द्रित कर रही हैं ताकि बेहतर उत्पाद तैयार किए जा सकें और बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ा सकें। इसे देखते हुए प्रशिक्षित ऑटोमोबाइल इंजीनियरियों की मांग बढ़ गयी है। 2011-12 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार सितम्बर 2011 को समाप्त हुई एक वर्ष की अवधि में रोजगार प्रदान करनेवाले उद्योगों में ऑटोमोबाइल उद्योग का तीसरा स्थान था। कैरियर के विकल्प के रूप में ऑटोमोबाइल इंजीनियरी के क्षेत्र में व्यवसायियों के लिए निश्चित रूप से शानदार संभावनाएं हैं। 

ऑटोमोबाइल इंजीनियरी वस्तुतः इंजीनियरी की विभिन्न शाखाओं के तत्वों का सम्मिश्रण है, जैसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक्स, सॉफ्ट और कम्प्यूटर साइंस। 

इस उद्योग में ऑटोमोबाइल के डिजाइन, विनिर्माण, परीक्षण और रख-रखाव जैसे कार्यों को अंजाम देना होता है, सबसे रेखांकित किया जाता है, जिसमें वाहनों के निर्माण के लिए उपयुक्त कल-पुर्जों की डिजाइनिंग, उनका चयन और उनके इस्त…

फॉरेंसिक अकाउंटिंग में करियर

देश में आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सत्यम (अब महिंद्रा सत्यम) में हुए बड़े वित्तीय घोटाले का मामला हो या फिर आए दिन सामने आने वाले आर्थिक साइबर अपराधों, मनी लॉन्डरिंग, बीमा, बैंकिंग और निवेश से संबंधित घोटालों आदि के खुलासे की बात, इनकी प्रभावी जांच के लिए फॉरेंसिक अकाउंटिंग की जरूरत होती है। बढ़ते आर्थिक अपराधों के इस दौर में फॉरेंसिक अकाउंटिंग के पेशेवरों का महत्व और उनकी मांग काफी बढ़ गई है। इस कारण इसे भविष्य के लिहाज से रोजगार का एक बेहतरीन विकल्प माना जा सकता है। क्या है फॉरेंसिक अकाउंटिंगयह अकाउंटिंग की ही एक शाखा है, जिसमें कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए अकाउंटिंग के सिद्धांतों के साथ ऑडिटिंग और जांच-पड़ताल के हुनर का इस्तेमाल किया जाता है। यह काम करने वाले पेशेवरों को फॉरेंसिक अकाउंटेंट कहा जाता है। वह अनुभवी ऑडिटर होते हैं और वित्तीय घपलों का पता लगाने के लिए किसी व्यावसायिक संस्थान (कंपनी, फर्म) के खातों (अकाउंट्स) पर निगरानी रखने का कार्य करते हैं। फॉरेंसिक अकाउंटिंग के लिए सबसे जरूरी होती है अकाउंटिंग की अच्छी जानकारी। इसके बाद ऑडिटिंग, रिस्क असेसमेंट और फ्र…