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Showing posts from September, 2016

रेडियोलॉजी में करियर

एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी आदि जैसी मेडिकल डायग्नॉस्टिक तकनीकों से आज पूरे चिकित्सा जगत का स्वरूप बदल गया है। अब शरीर के किसी भी अंदरूनी हिस्से में छिपा रोग पता लगाना आसान हो गया है। रेडियोलॉजी का क्षेत्र अब करियर के लिहाज से आकर्षक बन गया है। जॉब मार्केट में ऐसे लोगों की भारी मांग है, जिन्हें रेडिएशन से बचाव की समझ हो और जो मशीन्स की देखरेख करना जानते हों। रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर हैल्थकेयर के क्षेत्र में बेशुमार अवसर हैं। क्या है रेडियोलॉजी?
रेडियोलॉजी एक मेडिकल टेक्नोलॉजी है। इसकी मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जांच की जाती है। इससे डॉक्टरों को मरीजों की स्थिति और उनकी बीमारियों के बारे में सटीक जानकारी मिल जाती है, जिससे उन्हें कारगर इलाज करने में काफी आसानी होती है। रेडियोलॉजी दो तरह की होती है: डायग्नॉस्टिक रेडियोलॉजी और थैरापेटिक रेडियोलॉजी। डायग्नॉस्टिक रेडियोलॉजी के अंतर्गत मुख्य रूप से रेडियोग्राफी और अल्ट्रासाउंड से जुड़े टेस्ट शामिल होते हैं, जैसे एक्सरे, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी, फ्लोरोस्कोपी, पोसीट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी आदि।…

न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में करियर

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भारत-अमेरिकी न्यूक्लियर डील के बाद देश में न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) के उत्पादन में अत्यधिक बढ़ोतरी की संभावनाएँ देश-विदेश के इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा जताई जा रही हैं। फिलहाल देश के कुल ऊर्जा उत्पादन में परमाणु रिएक्टरों के जरिए मात्र तीन प्रतिशत विद्युत ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।
बायोफ्यूल की लगातार घटती मात्रा और देश में बढ़ती ऊर्जा की माँग देखते हुए ऊर्जा उत्पादन पर बल देना सरकार की प्राथमिकता बन गया है। इसी सोच के तहत वर्ष 2050 तक परमाणु रिएक्टरों के माध्यम से कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा उत्पादित करने की दीर्घकालिक योजना तैयार की गई है। इसी क्रम में वर्ष 2020 तक बीस हजार मेगावाट विद्युत का अतिरिक्त उत्पादन परमाणु ऊर्जा स्रोतों से किया जाएगा।
जाहिर है, ऐसे परमाणु रिएक्टरों के निर्माण कार्य से लेकर इनके संचालन और रख-रखाव तक में ट्रेंड न्यूक्लियर प्रोफेशनल की बड़े पैमाने पर आवश्यकता पड़ेगी। इस प्रकार के कोर्स देश के चुनींदा संस्थानों में फिलहाल उपलब्ध हैं लेकिन समय की मांग देखते हुए यह कहा जा सकता है कि न सिर्फ सरकारी बल्कि निजी क्षेत्र के संस्थान भी इ…

टॉक्सीकोलॉजी में करियर

मेडिकल टॉक्सीकोलॉजी, टॉक्सीकोलॉजी की वो ब्रांच है जिसे फिजिशियन द्वारा ऑपरेट किया जाता है. मेडिकल टॉक्सीकोलॉजी का फोकस डायग्नोसिस, मेडिकेशन, पर्यावरण के जहरीले टॉक्सीन की रोकथाम और मैनेजमेंट पर होता है. टॉक्सीकोलॉजी में मनुष्य, पशु, पौधों और पर्यावरण पर जहरीली चीजों की वजह से होने वालों नुकसानों के प्रभाव का अध्ययन करता है. इनका काम केमिकल, नुकसानदायक गैसों के इफेक्ट की स्टडी करना है. जहरीले पदार्थों और रेडिएशन का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है इसका निरीक्षण टॉक्सीकॉलॉजिस्ट ही करते हैं. 
कहां मिलेगी नौकरी
फॉरेंसिक टॉक्सीकोलॉजी में भी जॉब के कई मौके हैं. फॉरेंसिक टॉक्सीकोलॉजी एक टीम होती है जो क्राइम की इंवेस्टीगेशन करती है. इसके अलावा आप फार्मास्युटिकल, केमिकल, एग्रीकल्चरल, कॉस्मेटिक, एकेडमिक इंस्टिट्यूट, गवर्नमेंट एजेंसियों, टॉक्सीकोलॉजी लैब्स में भी नौकरी पा सकते हैं. कहां से कर सकते हैं कोर्स
डॉ बी आर राव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सीकोलॉजी रिसर्च, लखनऊ
इंडियन वेटरिनरी रिसर्च इंस्टिट्यूट, बरेली
जामिया हमदर्द, दिल्ली
सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टिट्यूट, लखनऊ कित…

ओशनोग्राफी में करियर

आपको जोखिम लेना पसंद है और लीक के हटकर कुछ करने की चाहत है, तो आप ओशनोग्राफी के फील्ड में कदम रख सकते हैं। ओशनोग्राफी का आशय समुद्र विज्ञान से है। इसके अंतर्गत समुद्र तथा इसमें पाए जाने वाले जीव-जंतुओं के बारे में अध्ययन किया जाता है। वैसे, यह तो हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी के दो-तिहाई से अधिक हिस्से में समुद्र है। दरअसल, यह एक ऐसा विज्ञान है जिसमें बायोलॉजी, केमिस्ट्री, जियोलॉजी, मेटियोरोलॉजी और फिजिक्स के सिद्धांत लागू होते हैं। यह एक रोमांच से भरा क्षेत्र है, जहां आपको हमेशा कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।

क्वालिफिकेशन
विज्ञान विषयों जुड़े स्टूडेंट्स ओशनोग्राफी का कोर्स कर सकते हैं। इसके हर क्षेत्र में गणित की जरूरत पड़ती है, लेकिन मैरीन रिसर्च के लिए पोस्ट ग्रेजुएट या डॉक्टरेट की उपाधि होना जरूरी है। इसके अधिकतर कोर्स तीन वर्षीय होते हैं। समुद्र विज्ञान असल में एक अंत: विषयक अध्ययन है, जिसमें जीव विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान तथा मौसम विज्ञान को भी काफी हद तक शामिल किया जाता है।

यह मूलत: शोध एवं अनुसंधान पर आधारित प्रोफेशनल विषय है। इसमें अधिकांश समय समुद्र की लहरों एवं …

एमएससी निरूपण विज्ञान में बनाएं करियर

एमएससी निरूपण विज्ञान नए उत्पादों को तैयार करने के विज्ञान के क्षेत्र में ज्ञान की गहराई में की पेशकश, अभिनव इन दोनों क्षेत्रों, विशिष्ट और ब्रिटेन में अद्वितीय है, इन नई दवाओं और कंज्यूमर केयर उत्पादों, पेंट, खाद्य पदार्थ या तेजी से बढ़ उपभोक्ता वस्तुओं रहे हैं। कार्यक्रम में आप अलग अलग-अलग सामग्री के मिश्रण से तैयार उत्पादों को बनाने के सिद्धांतों को समझने के लिए अनुमति देगा। दवा उद्योग से वर्तमान उदाहरण पर ड्राइंग, और अकादमिक स्टाफ के औद्योगिक अनुभव का उपयोग करते हैं, तो आप भी इस तरह के उपभोक्ता उत्पादों और सौंदर्य प्रसाधन के रूप में तैयार करने के विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक रूप से प्रासंगिक समस्याओं के लिए इन सिद्धांतों को लागू होंगे। इस कार्यक्रम के व्यावहारिक प्रयोगशाला आधारित जांच और सेमिनारों के पूरक एक व्याख्यान श्रृंखला शामिल है। मामले के अध्ययन के लिए एक ही रास्ता है कि एक औद्योगिक सेटिंग simulates में एक टीम के हिस्से के रूप में काम कर रहे अपनी रचनात्मकता और समस्या को हल करने के लिए बढ़ाने का मौका प्रदान करते होंगे। अनुसंधान के अनुभव की विविधता के साथ कर्मचारिय…

सिविल इंजीनियरिंग में करियर

आज देश प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ रहा है। बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों में भी विकास की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। रियल एस्टेट के कारोबार में आई चमक ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रोशन किया है। इन्हीं में से एक प्रमुख क्षेत्र ‘सिविल इंजीनियिरग’ भी है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कदम रखने वाले अधिकांश छात्र सिविल इंजीनियरिंग की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। वह रियल एस्टेट के अलावा भी कई सारे कंट्रक्शन कार्य जैसे पुल निर्माण, सड़कों की रूपरेखा, एयरपोर्ट, ड्रम, सीवेज सिस्टम आदि को अपने कौशल द्वारा आगे ले जाने का कार्य कर रहे हैं। क्या है सिविल इंजीनियरिंग?जब भी कोई योजना बनती है तो उसके लिए पहले प्लानिंग, डिजाइनिंग व संरचनात्मक कार्यों से लेकर रिसर्च एवं सॉल्यूशन तैयार करने का कार्य किया जाता है। यह कार्य किसी सामान्य व्यक्ति से न कराकर प्रोफेशनल लोगों से ही कराया जाता है, जो सिविल इंजीनियरों की श्रेणी में आते हैं। यह पूरी पद्धति ‘सिविल इंजीनियरिंग’ कहलाती है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षित लोगों को किसी प्रोजेक्ट, कंस्ट्रक्शन या मेंटेनेंस के ऊपर कार्य करना होता है। साथ ही इस का…

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग रफ्तार का करियर

अर्थव्यवस्था की रफ्तार का पता इससे भी चलता है कि कौन-कौन से वाहन किस संख्या में सड़कों पर फिलवक्त दौड़ रहे हैं। इस सेक्टर को चलाने व आगे ले जाने वाले लोगों में ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स भी हैं, जो डिजाइन, कम्फर्ट, इकॉनोमी, पावरफुल इंजन के साथ न केवल इस इंडस्ट्री को चलाते हैं, बल्कि अपने करियर को भी एक अनोखी रफ्तार देते हैं। इसी से जुड़ा है ऑटो कम्पोनेंट का तेजी से बढ़ता दायरा और यही वजह है कि ऑटोमोबाइल इंजीनियरों की मांग में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। एक तेज रफ्तार करियर के रूप में इसे चुना जा सकता है। ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग यानी ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग या व्हीकल इंजीनियरिंग आज का सबसे चुनौती-भरा करियर है, जिसमें संभावनाओं की सीमा नहीं है। इंजीनियरिंग की यह शाखा कार, ट्रक, मोटरसाइकिल, स्कूटर जैसे वाहनों के डिजाइन, विकास, निर्माण, परीक्षण और मरम्मत व सर्विस से जुड़ी होती है। ऑटोमोबाइल के निर्माण व डिजाइनिंग के सम्यक मेल के लिए ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं जैसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, सॉफ्टवेयर तथा सेफ्टी इंजीनियरिंग की मदद से काम को अंजाम देते हैं।
एक बेहतरीन …

Genetic Counsellor डिकोडिंग द डिसऑर्डर

ह्यूमन बॉडी में मौजूद क्रोमोजोम्स में करीब 25 से 35 हजार के बीच जीन्स होते हैं। कई बार इन जीन्स का प्रॉपर डिस्ट्रीब्यूशन बॉडी में नहीं होता है, जिससे थैलेसेमिया, हीमोफीलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्लेफ्ट लिप पैलेट, न्यूरोडिजेनेरैटिव जैसी एबनॉर्मलिटीज या हेरेडिटरी प्रॉब्लम्स हो सकती है। इससे निपटने के लिए हेल्थ सेक्टर में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट और दूसरे इनेशिएटिव्स लिए जा रहे हैं, जिसे देखते हुए जेनेटिक काउंसलिंग का रोल आज काफी बढ गया है। अब जो लोग इसमें करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए स्कोप कहीं ज्यादा हो गए हैं।

जॉब आउटलुक

एक अनुमान के अनुसार, करीब 5 परसेंट आबादी में किसी न किसी तरह का इनहेरेटेड डिसऑर्डर पाया जाता है। ये ऐसे डिसऑर्डर्स होते हैं, जिनका पता शुरुआत में नहीं चल पाता है, लेकिन एक जेनेटिक काउंसलर बता सकता है कि आपमें इस तरह के प्रॉब्लम होने की कितनी गुंजाइश है। काउंसलर पेशेंट की फैमिली हिस्ट्री की स्टडी कर इनहेरेटेंस पैटर्न का पता लगाते हैं। वे फैमिली मेंबर्स को इमोशनल और साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी देते हैं।

स्किल्स रिक्वायर्ड

जेनेटिक काउंसलिंग के लिए सबसे इंपॉर्टेट स्किल है कम्युनिक…

रसायन विज्ञान में B.S. कार्यक्रम

आईआईटी बंबई में रसायन विज्ञान विभाग के 5 साल एकीकृत एमएससी की पेशकश की है लगभग 30 वर्षों के लिए अब डिग्री। इस साल के रूप में, हम एक संशोधित और होनहार बी एस / बी एस + M.Sc पेशकश करने के लिए बेहद उत्साहित हैं। रसायन विज्ञान में कार्यक्रम। उसी के लिए पाठ्यक्रम वर्तमान छात्रों से प्रतिक्रिया के साथ शिक्षकों द्वारा विकसित किया गया है, और इससे पहले कार्यक्रम की अखंडता को बरकरार रखे हुए है, जबकि यह अधिक एकजुट, लचीला बनाने और निवेश छात्र उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक मौका देता है। हमारे पाठ्यक्रम Chemistry- भौतिक, जैविक, और अकार्बनिक के तीन मुख्य शाखाओं दोनों सैद्धांतिक और प्रायोगिक में एक में गहराई से समझ प्रदान करता है। यह भी अन्य fields- भौतिक विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग, और humanities- में एक प्रारंभिक आधार प्रदान करता है और आप ऐच्छिक और नाबालिगों के माध्यम से आगे का पता लगाने के लिए अनुमति देता है। एक ही समय में, यह दोनों विभाग ऐच्छिक और सम्मान के माध्यम से चौड़ाई और गहराई में रसायन विज्ञान के भीतर विकल्पों की एक श्रृंखला की अनुमति देता है। इन सुविधाओं है कि पारंपरिक परास्ना…

डर्मेटोलॉजी में करियर

डिसिन में स्पेशलाइजेशन के लिए उपलब्ध विकल्पों में ‘डर्मेटोलॉजी’ काफी लोकप्रिय हो गया है। मौजूदा वक्त में ‘फर्स्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन’ कहावत को इतनी गंभीरता से लिया जा रहा है कि व्यक्ति के रूप को व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण अंग माना जाने लगा है। इस कारण लोगों में अपने रूप और व्यक्तित्व को लेकर चिंता का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। यहां तक कि कॉलेज जाने वाले छात्र भी खुद को आकर्षक दिखाने की गरज से काफी रुपये खर्च कर रहे हैं।
अपने रूप को लेकर लोगों में गंभीरता का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि वह चेहरे पर छोटा-सा मुंहासा हो जाने भर से परेशान हो उठते हैं। कई बार वह ऐसी परेशानियों को इस कदर अपने ऊपर हावी कर लेते हैं कि घर से बाहर निकलना भी छोड़ देते हैं। ऐसे माहौल में रूप निखारने का दावा करने वाली फेयरनेस क्रीमों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। खुजली और घमौरियों (रैशेज) जैसे त्वचा संबंधी रोग आम हो चुके हैं। गर्मी और बरसात के मौसम में इनकी अधिकता काफी बढ़ जाती है। इनके सही उपचार के लिए डॉंक्टर का परामर्श जरूरी होता है। कई बार उपचार के लिए डॉंक्टर के पास कुछ दिनों या हफ्तों के अंतराल पर बार-…