Saturday, July 9, 2016

पर्यावरण इंजीनियरिंग में कैरियर

पर्यावरण इंजीनियर नगर निगम की जल आपूर्ति और औद्योगिक अपशिष्ट उपचार प्रणाली को भी डिजाइन करते हैं । साथ ही साथ स्थानीय और विश्वव्यापी प्रदूषण के मुद्दों से मुखातिब होते हैं जैसे  अम्ल वर्षा , ग्लोबल वार्मिंग ,ओजोन क्षरण, जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण…
आज पूरी दुनिया पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रही है । जलवायु परिवर्तन की समस्या के कारण  पूरी मानवता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं । ऐसे में, जब कि हर जगह हरित अर्थव्यवस्था और हरित रोजगार की बातें हो रही हैं । पर्यावरण इंजीनियरिंग एक ऐसा ही क्षेत्र है जो व्यक्ति को पर्यावरण हितैषी रोजगार उपलब्ध करवाता है और प्राकृतिक संसाधनों की  गुणवत्ता का स्तर सुधारने में योगदान भी देता है । पर्यावरण की गंभीर होती स्थिति ने पर्यावरण इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रोजगार की काफी संभावनाएं उपलब्ध करवा दी हैं। पर्यावरण इंजीनियरिंग हवा, पानी और भूमि संसाधनों में सुधार करने और प्रदूषित स्थानों को सुधारने के लिए विज्ञान और इंजीनियरिंग के सिद्धांतों का अनुप्रयोग है। पर्यावरण इंजीनियर खतरनाक-अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था करते हैं पर्यावरणीय खतरों का मूल्यांकन करते हैं, इन खतरों के  रोकथाम, के लिए योजना बनाते हैं और  सलाह मुहैया कराते हैं । पर्यावरण इंजीनियर नगर निगम की जल आपूर्ति और औद्योगिक अपशिष्ट उपचार प्रणाली को भी डिजाइन करते हैं । साथ ही साथ स्थानीय और विश्वव्यापी प्रदूषण के मुद्दों से मुखातिब होते हैं जैसे  अम्ल वर्षा, ग्लोबल वार्मिंग,ओजोन क्षरण जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण ।  लोगों को पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा और उत्पादों की ओर आकर्षित करना पर्यावरण इंजीनियरिंग का मुख्य क्षेत्र है ।
पर्यावरण इंजीनियरिंग के कार्य-क्षेत्र
पर्यावरण इंजीनियरिंग में कई प्रभाग हैं । प्रदूषक रासायनिक, जैविक ,थर्मल, रेडियोधर्मी और यांत्रिक भी हो सकते हैं  । इसलिए पर्यावरण इंजीनियरिंग का क्षेत्र बहुत व्यापक हो जाता है । इसमें प्रमुख रुप से निम्न  क्षेत्र शामिल हैं। कृषि इंजीनियरिंग जीवविज्ञान, रसायन इंजीनियरिंग, रसायन विज्ञान सिविल इंजीनियरिंग पारिस्थितिकी भूगोल भूविज्ञान खतरनाक अपशिष्ट जल उपचार
पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन 
इस खंड में इंजीनियर और वैज्ञानिक पर्यावरणीय स्थितियों पर भौतिक, रासायनिक, जैविक, सांस्कृतिक और सामाजिक आर्थिक घटकों  के प्रभाव का आकलन करते हैं ।  यह  मूल्यांकन करने के लिए वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग सिद्धांतों का प्रयोग किया जाता है ।
योग्यता
पर्यावरण इंजीनियरिंग को कैरियर बनाने के  इच्छुक अभ्यर्थी को प्लस के बाद पर्यावरण इंजीनियरिंग में बीएसी कर सकते हैं । पोस्ट ग्रेजुएशन में  पर्यावरण इंजीनियरिंग में बीएसी करने वालों के साथ बीई अथवा बीटेक डिग्रीधारक भी प्रवेश ले सककते हैं। इसके अतिरिक्त पर्यावरण इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डिप्लोमा भी अभ्यर्थियों के बीच काफी लोकप्रिय है ।
संभावनाएं
पर्यावरण इंजीनियरिंग में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदूषण नियंत्रक संस्थाओं में डिजायनर अथवा प्लानर  के रुप में आप कैरियर संवार सकते हैं। सरकारी और निजी संस्थाओं में रिसर्चर की  नियुक्ति आकर्षक वेतनमान पर की जाती है। विश्वविद्यालय स्तर पर प्राध्यापक के
रुप में भी आप अपने कैरियर की शुरुआत कर सकते हैं।
वेतनमान
कैरियर के शुरुआती दौर में एक पर्यावरण इंजीनियर को आसानी से 25 से 30 हजार रुपए मिल जाते हैं। पर्यावरण इंजीनियरिंग में एम टेक कर चुके लोगों का वेतनमान प्रायः 35 से 50 हजार रुपए तक होता है।
संस्थान
* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हौज खास, नई दिल्ली
* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर
* रुड़की विश्वविद्यालय, रुड़की
* दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
* मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर