Friday, March 18, 2016

हैल्थ कम्युनिकेशन में करियर

आज हैल्थ कम्युनिकेशन सर्वाधिक तेजी से विकासित हो रहा कम्युनिकेशन फील्ड है। हैल्थ कम्युनिकेशन के तहत आमतौर पर जनता तक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी सूचना एवं स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न विषयों पर जनता सहित स्वास्थ्य कर्मियों में जागरूकता फैलाने का कार्य किया जाता है। 

क्या है हैल्थ कम्युनिकेशन
साधारण शब्दों में कहें तो इस क्षेत्र का मुख्य कार्य लोगों को जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के बारे में जागरूक करना तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कार्य करना होता है।

कम्युनिकेशन यानी संचार जनस्वास्थ्य का एक अहम हिस्सा है। इसके बिना हम न तो कभी इस बारे में जागरूक हो पाते कि धूम्रपान के कितने खतरे हैं तथा न ही इस तथ्य को जान पाते कि दूषित सूई के इस्तेमाल से भी एच.आई.वी./एड्स फैलता है। 
इसके तहत रोगियों एवं हैल्थ कर्मियों के मध्य संबंध सुधारना, जन स्वास्थ्य अभियानों की योजना तैयार करना एवं उनका आयोजन तथा स्वस्थ जीवनशैली को मीडिया में प्रचारित करना भी शामिल है। हैल्थ कम्युनिकेशन का मकसद केवल जनता को स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में जागरूक करना ही नहीं है बल्कि स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने वाले स्थलों की पहचान करने में उनकी सहायता करना भी है। 
जन स्वास्थ्य संचार विशेषज्ञ अच्छी तरह जानते हैं कि प्रभावी संचार में लोगों की धारणाओं, विश्वास एवं आदतों को बदलने की ताकत होती है। वे प्रभावित करने वाले संदेशों के माध्यम से लोगों तक पहुंच कर उन्हें महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दों के बारे में अवगत करते हैं। समाचार पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टी.वी., फिल्मों, इंटरनैट, मोबाइल कम्युनिकेशन, थिएटर से लेकर मनोरंजन के पारम्परिक तौर-तरीकों आदि का प्रयोग जनता तक पहुंच बनाने के लिए किया जाता है।  इन दिनों हैल्थ कम्युनिकेशन एक्सपर्ट्स मोबाइल संदेशों, ब्लॉग्स, सोशल नैटवर्किंग वैबसाइट्स आदि नवीनतम विधियों का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। 

एक उम्दा एवं बेहतर ढंग से किए जाने वाले हैल्थ कम्युनिकेशन के प्रयास में लोगों का गहरा जुड़ाव होता है। इसकी मदद से लोग उपयुक्त जानकारी एवं जागरूकता के आधार पर सोच-समझ कर सही फैसले ले सकते हैं। 

कोर्स एवं योग्यता
कई विश्वविद्यालयों के कम्युनिकेशन विभाग हैल्थ कम्युनिकेशन को अपने एक विषय के रूप में पढ़ा रहे हैं। इन कोर्सों में दाखिले की योग्यता आमतौर पर बायोलॉजी विषय सहित बैचलर डिग्री होती है। वैसे बैचलर डिग्री स्तर पर विषयों की अनिवार्यता विश्वविद्यालयों  के अपने मापदंडों पर भी निर्भर करती है। 

इस विषय के कोर्स करवाने वाले मैडीकल संस्थान आमतौर पर मैडीकल के छात्रों को ही दाखिले में प्राथमिकता देते हैं। प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला प्रवेश परीक्षा तथा साक्षात्कार के आधार पर दिया जाता है। अब तो कई मैनेजमैंट इंस्टीच्यूट्स भी हैल्थ कम्युनिकेशन को हैल्थ मैनेजमैंट के एक विषय के रूप में पढ़ा रहे हैं। 

पाठ्यक्रम
इन कोर्सों में आमतौर पर कम्युनिकेशन ट्रेनिंग, पब्लिक रिलेशन्स, कम्युनिकेशन रिसर्च, मीडिया राइटिंग एवं रिर्पोटिंग सिखाई जाती है। हैल्थ कम्युनिकेशन के छात्र स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में जनता की समझ को आकार देने में सक्षम कम्युनिकेशन एवं मीडिया के महत्व बारे सीखते हैं। वे हैल्थ एडवोकेसी, स्वास्थ्य संबंधी संदेश तैयार करना तथा हैल्थकेयर सर्विसेज को प्रोत्साहित करने की रणनीतियां तैयार करने का ज्ञान भी प्राप्त करते हैं।

अवसर
इस विषय में कोर्स करने के बाद छात्र हैल्थ एजुकेटर, स्कूल हैल्थ केयर एडमिनिस्ट्रेटर, मैडीकल ग्रांट्स राइटर, हैल्थ कम्युनिकेटर, क्लीनिक पब्लिक रिलेशन्स एग्जीक्यूटिव, हैल्थ कम्युनिकेशन एनालिस्ट, रिसर्च एनालिस्ट, मैडीकल ट्रेनिंग सुपरवाइजर, हैल्थ डिवैल्पमैंट एजैंसियों में कम्युनिकेशन मैनेजर, होस्पाइस मैनेजर, हैल्थ केयर काऊंसलर, हैल्थ एडवोकेट आदि के रूप में नियुक्त हो सकते हैं। 
उपरोक्त विभिन्न पदों पर वे सरकारी स्वास्थ्य संगठनों, एजैंसियों एवं विभागों, अकादमिक एवं शोध संगठनों, अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों, मीडिया संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य कर रहे गैर-सरकारी संगठनों में आसानी से रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।

पारिश्रमिक
इस फील्ड में पारिश्रमिक युवाओं की योग्यता, विशेषज्ञता के स्तर तथा उनके नियोक्ता पर निर्भर करता है। आमतौर पर शुरूआती स्तर पर युवाओं को 10 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह मिल सकते हैं। 

प्रमुख संस्थान

इंस्टीच्यूट ऑफ हैल्थ, मैनेजमैंट एंड रिसर्च, जयपुर, राजस्थान (दिल्ली, बेंगलूर एवं कोलकाता में भी संस्थान की शाखाएं हैं)

टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुम्बई, महाराष्ट्र

मणिपाल यूनिवर्सिटी, मैंगलोर, कर्नाटक