Sunday, March 13, 2016

पेट्रोलियम इंजीनियरिंग: मौके ही मौके

जिस तेजी से देश विकास की ओर बढ़ रहा है, उसी तेजी से औद्योगिक और निजी कारणों से ऊर्जा जरूरतें भी बढ़ रही हैं। गैस और कच्चे तेल के रूप में आयात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पाद रिफाइनरियों में परिष्कृत होने के बाद हम तक पहुंचते हैं। देश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेल और गैस को पहुंचाने के लिए कई पाइपलाइन परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। पेट्रोलियम उद्योग तकनीकी और कारोबारी विकास के क्रम में लगातार मजबूत हो रहा है। विदेशों में भी भारतीय कंपनियां तेल की खोज और उत्पादन में अपने हाथ आजमा रही हैं। इससे उनका कार्य क्षेत्र भी विस्तृत हो रहा है। इस विस्तार में इंजीनियरिंग पेशेवरों विशेषकर पेट्रोलियम इंजीनियरों के लिए काफी मौके हैं।
क्या है पेट्रोलियम इंजीनियरिंगपेट्रोलियम उत्पादों, मसलन कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) और प्राकृतिक गैस (नेचुरल गैस) का उत्पादन और उन्हें इस्तेमाल योग्य बनाने का कार्य पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की मदद से किया जाता है। इसके माध्यम से यह भी पता लगाया जाता है कि किसी पेट्रोलियम भंडार के स्त्रोत में उत्पादन योग्य पेट्रो पदार्थ की मात्रा कितनी है। यह अनुमान लगाने के लिए पेट्रोलियम इंजीनियर को धरती की गहराइयों में उच्च दाब के बीच मौजूद तेल, गैस और पानी के भौतिक गुणों का अध्ययन करना होता है।
प्रमुख कोर्सबीई/ बीटेक पेट्रोलियम इंजीनियरिंग
बीटेक अप्लाइड पेट्रोलियम इंजीनियरिंग
बीटेक पेट्रोकैमिकल इंजीनियरिंग
बीटेक पेट्रोलियम रिफाइनिंग एंड पेट्रोकैमिकल्स इंजीनियरिंग
बीटेक पेट्रोलियम रिफाइनिंग इंजीनियरिंग
बीटेक पेट्रोलियम रिजरवॉयर एंड प्रोडक्शन इंजीनियरिंग
एमई/ एमटेक पेट्रोलियम इंजीनियरिंग
एमटेक पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन
एमटेक पेट्रोलियम रिफाइनरी इंजीनियरिंग
एमटेक पेट्रोलियम रिफाइनिंग एंड पेट्रोकैमिकल इंजीनियरिंग
योग्यता
बैचलर कोर्स
बारहवीं में विज्ञान विषयों (फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्स जरूरी) की पढ़ाई करने वाले छात्र पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के बैचलर कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इसके लिए अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में शामिल होना होगा। आईआईटी (जेईई) और आईआईटी (एडवांस्ड) की परीक्षा में प्राप्त स्कोर से इस कोर्स में दाखिला मिलेगा।
मास्टर्स कोर्सपेट्रोलियम इंजीनियरिंग या उससे संबंधित विषयों में इंजीनियरिंग की बैचलर डिग्री हासिल करने के बाद मास्टर्स कोर्स में प्रवेश लिया जा सकता है। कैमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद भी इस कोर्स में प्रवेश लिया जा सकता है। इस कोर्स में दाखिले प्रवेश परीक्षा के आधार पर ही होते हैं।
संभावनातेल क्षेत्र की खोज और उत्पादन कार्य में पेट्रोलियम इंजीनियर के लिए नए अवसर उभर रहे हैं। देश की पेट्रोलियम कंपनियां इसके लिए अपना निवेश बढ़ा रही हैं। देश के तटीय इलाकों में तेल और गैस के नए क्षेत्रों के होने की संभावना मौजूद है। तेल आयात में बढ़ोत्तरी के साथ शोधन क्षमता में वृद्धि करने का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। देश की कई तेल कंपनियां अपनी रिफाइनरियों की क्षमता बढ़ाने पर काम रही हैं। ऐसे में तेल उद्योग का यह क्षेत्र पेट्रोलियम इंजीनियरों के लिए आने वाले समय में काफी मांग सृजित करेगा।
इन पदों पर मिलेगा कामरिजरवॉयर इंजीनियर
टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर
पेट्रोलियम टेक्नोलॉजिस्ट एंड ड्रिलिंग इंजीनियर
प्रोसेस इंजीनियर

वेतनकोर्स करने के बाद पहली नौकरी में वेतन का स्तर कंपनी की बाजार स्थिति और कारोबार पर निर्भर करता है। बैचलर डिग्री के बाद औसत वेतन 30 हजार रुपये मासिक होता है। मास्टर्स कोर्स करने या कुछ वर्षो का अनुभव हासिल करने के बाद आसानी से 50 से 60 हजार रुपये के बीच वेतन मिलने लगता है।
प्रमुख संस्थान
राजीव गांधी इंस्टीटय़ूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, रायबरेली, उत्तर प्रदेश
http://www.rgipt.ac.in/
इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद, झारखंडhttp://www.ismdhanbad.ac.in/
यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज, देहरादून, उत्तराखंडhttp://www.upes.ac.in/
डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी, सागर, मध्य प्रदेशhttp://www.dhsgsu.ac.in/
बीआर अंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटीhttp://dbatuonline.com
भारतीदसन इंस्टीटय़ूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, तमिलनाडुhttp://www.bdu.ac.in/