Friday, October 30, 2015

रेशम उद्योग में करियर

रेशम मनुष्य के परिचित सबसे पुराने तन्तुओं में से एक है और दुनिया में सबसे अधिक प्यारा तन्तु है । अपनी भव्यता की वजह से रेशम वस्त्र सदियों से निरपवाद रूप से वस्त्रों की रानी के रूप में विख्यात है । विलासिता, लालित्य, किस्म, प्राकृतिक चमक, रंगों की ओर सहज आकर्षण और चटकीला रंग, हल्के वजन, कमजोर गर्मी प्रवाहक तत्व, लचीलापन तथा उत्कृष्ट वस्त्र विन्यास इसकी कुछ विशेषताएं हैं ।भारत में, रेशम को प्राचीन काल से एक पवित्र तन्तु माना जाता है और कोई भी धार्मिक समारोह रेशम के उपयोग के बिना पूरा नहीं होता ।
सम्भावनाएं
रेशम उद्योग के विस्तार को देखते हुए इसमें रोजगार की काफी संभावनाएं हैं और आने वाले दिनों में इसका कारोबार और फलेगा-फूलेगा । फैशन उद्योग के काफी करीब होने के कारण भी इसमें हमेशा अवसर बने रहते हैं । देश में लम्बी अवधि में कच्चे सिल्क और कपास की उपलब्धता सुनिश्चित करने की रणनीति के तहत कपड़ा मंत्रालय इन उत्पादों की खरीद विदेश से करने की योजना बना रहा है । 

सिल्क उत्पादन के मामले में भारत का स्थान विश्व में दूसरा है, जो कुल वैश्विक उत्पादन में करीब 18 फीसदी का योगदान करता है लेकिन दुनिया में सिल्क का सबसे बड़ा उपभोक्ता है ।  भारत में मलबरी सिल्क उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य हैं कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर । कुल सिल्क उत्पादन में इन राज्यों की हिस्सेदारी कुल मिलाकर 92 फीसदी है । साल 2010-11 में देश में 1,63,060 टन कच्चे सिल्क का उत्पादन हुआ था ।
योग्यता
विभिन्न विश्वविद्यालयों में सेरिकल्चर के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जहां इसके विभिन्न पहलुओं से रू-ब-रू होकर छात्र न सिर्फ सिल्क उत्पादन में अपना योगदान दे सकते हैं, बल्कि अपने करियर को भी एक बेहतरीन सिल्की टच दे सकते हैं ।

कोर्स 
बी.एससी. इन सेरिकल्चर या बी.एससी. इन सिल्क टैक्नोलॉजी जैसे कोर्स कहीं तीन साल तो कहीं चार साल की अवधि के हैं । इन कोर्सों के तहत सिल्क प्रोडक्शन के बारे में छात्रों को पूरी जानकारी दी जाती है । पहले वर्ष में छात्रों को फाऊंडेशन कोर्स पढ़ना होता है । उसमें बॉयोलॉजी, कैमिस्ट्री, फिजिक्स, इलैक्ट्रॉनिक्स, एन्वायरनमैंटल साइंस आदि की पढ़ाई होती है । इसके बाद बॉटनी, जूलॉजी, कैमिस्ट्री के साथ सेरिकल्चर की पढ़ाई होती है ।  

इसी दौरान छात्रों को मृदा विज्ञान के बारे में भी बताया जाता है । बी.एससी. या एम.एससी. कोर्सों में प्रैक्टीकल पर भी काफी बल दिया जाता है । कालेज या संस्थान सिल्क उत्पादन के बारे में जानकारी देने के लिए मल्बरी गार्डन से युक्त होते हैं । मल्बरी सिल्क कीट की खुराक है । गार्डन में कीट पालन, कुकुन बनाने की प्रक्रिया और फिर उससे सिल्क के रेशे बनाने की विधि से छात्रों को अवगत कराया जाता है । इसके अलावा सिल्क की क्वालिटी , डाइंग व उसकी प्रिटिंग प्रक्रिया के बारे में भी बखूबी जानकारी दी जाती है ।

दाखिला
सेरिकल्चर में बी.एससी. में दाखिला 12वीं में प्राप्त हुए अंकों के आधार पर होता है । छात्र के लिए यह जरूरी है कि उसने 12वीं में भौतिकी, रसायन और बॉयोलॉजी (बॉटनी) की पढ़ाई की हो । कई संस्थानों में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है और फिर तय सीटों के मुताबिक दाखिला दिया जाता है । 

बी.एससी. कोर्स पूरा करने के बाद छात्र आगे एम.एससी.भी कर सकते हैं । वे बॉयोटैक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बॉटनी, जूलॉजी, जैनेटिक्स आदि में एम.एससी. कर विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं । लाइफ साइंस के अन्य छात्रों की तरह ही सेरिकल्चर के छात्रों को भी इन विषयों में एम.एससी. स्तर पर बराबर अवसर मिलता है । इसके बाद रिसर्च के मौके भी उपलब्ध होते हैं । 

रोजगार के अवसर
इस फील्ड में बी.एससी. करने के बाद छात्र चाहें तो आगे की पढ़ाई कर सकते हैं, अन्यथा वे टैक्सटाइल डिजाइन, फैशन टैक्नोलॉजी, एक्सपोर्ट हाऊस, स्मॉल स्केल इंडस्ट्री आदि में काम कर सकते हैं । एम.एससी. व पी.एचडी. करके अध्यापन क्षेत्र में भी जा सकते हैं । इसके अलावा साइंटिस्ट बनने के अवसर भी मिल सकते हैं ।

कई सरकारी संस्थानों, जैसे दिल्ली स्थित सैंट्रल सिल्क बोर्ड, सिल्क एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल, नाबार्ड, कृषि विज्ञान केन्द्र आदि में भी मौके मिल सकते हैं । प्रत्येक राज्य में सेरिकल्चर निदेशालय भी होते हैं, जहां प्रोजैक्ट मैनेजर, सहायक निदेशक, रिसर्च ऑफिसर, मार्कीटिंग अधिकारी आदि के रूप में काम करने का मौका मिलता है । यदि छात्र चाहें तो कोर्स करने के बाद खुद अपना व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं ।

केन्द्रीय रेशम प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्थान, बेंगलूर मडिवाला, बेंगलूर में स्थित यह देश का एक प्रमुख रेशम पर शोध करने तथा प्रशिक्षण प्रदान करने वाला सरकारी संस्थान है । इसके प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लक्ष्य रेशम उत्पादन विभाग के कर्मचारियों से लेकर उद्यमियों, छात्रों, फैशन डिजाइनरों, धागाकारों, रंगाईकारों, एंठनकारों, बुनकरों, निचले स्तर के कार्यकारों आदि को प्रशिक्षण दिलाना है । संस्थान द्वारा प्रस्तुत प्रशिक्षण कार्यक्रम में केन्द्रीय रेशम बोर्ड और जापान अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता अभिकरण के संयुक्त रूप से प्रायोजित तृतीय देशी प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल हैं ।
अन्य प्रमुख संस्थान
- शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टैक्नोलॉजी, जम्मू
- दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
- बाबा साहब भीमराव अंबेदकर यूनिवर्सिटी, लखनऊ
- यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज, बेंगलूर
- सैंट्रल सेरिकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट, मैसूर