फैशन की दुनिया में करियर

ऐसी है फैशन की दुनिया, जहां कभी शाम ढलती ही नहीं है। यही वजह है कि आज के युवाओं में फैशन को लेकर पैशन है। दिल्ली फैशन वीक, पेरिस, मिलान और न्यूयॉर्क में आकर्षण परिधानों में रैंप पर कैटवॉक करती हुई मॉडल और हर डिजाइन पर लोगों की तालियों की बरसात! सही में यही डिजाइनर की सफलता की कहानी बयां करती है। लोगों को सुंदर बनाने का जुनून आपमें है, तो फैशन डिजाइनिंग का क्षेत्र आपका इंतजार कर रहा है। आज भारतीय फैशन की दुनिया से निकलकर रितु बेरी, मनीष मलहोत्रा, रोहित बल जैसे तमाम डिजाइनर दुनिया भर में अपने हुनर का डंका बजा रहे हैं।

एंट्री
इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करना जरूरी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, पर्ल के अलावा और भी कई इंस्टीट्यूट्स हैं, जहां से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया जा सकता है। फैशन डिजाइनिंग के अंडर ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। निफ्ट जैसे इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए रिटेन एग्जाम, ग्रुप डिसक्शन और पर्सनल इंटरव्यू के दौर से गुजरना पड़ता है। पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए किसी भी विषय में स्नातक होना आवश्यक है।

फैशन डिजाइनिंग का क्षेत्र तीन ब्रांचों में विभाजित है-गारमेंट डिजाइन, लेदर डिजाइन और एक्सेसरीज व ज्यूलॅरी डिजाइन। इसके अलावा, फैशन बिजनेस मैनेजमेंट, फैशन रिटेल मैनेजमेंट, फैशन मार्केटिंग, डिजाइन प्रोडक्शन मैनेजमेंट आदि कोर्स में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। इन सभी क्षेत्रों में मान्यता प्राप्त संस्थानों से ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स किए जा सकते हैं।

फैशन डिजाइनिंग का क्रेज
टीवी सीरियल और फिल्म के दीवानों की देश में कमी नहीं है। खासकर टीवी सीरियल की पैठ तो आज घर-घर में हो चुकी है। टीवी सीरियल्स और फिल्मों में डिजाइन कपड़ों को देख कर लोगों का के्रज फैशन के प्रति अब देखते ही बनता है। यह भी एक वजह है, जिससे पिछले कुछ वर्षों में फैशन इंडस्ट्री में काफी उछाल आया है। उद्योग चैंबर एसोचैम के मुताबिक, भारतीय फैशन इंडस्ट्री वर्ष 2012 तक 7 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगी। जिस तरह से लोगों में आज फैशन एक्सेसिरीज के प्रति दीवानगी बढ़ती जा रही है, उससे इस क्षेत्र का फलक और बड़ा होने की उम्मीद है।

फैशन की दुनिया
अक्सर लोगों को यह लगता है डिजाइनर सपनों की दुनिया में विचरण करते रहते हैं। लेकिन असलियत यह है कि उसका काम काफी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि बाजार की मांग के अनुरूप किसी खास प्रोडक्ट, सीजन और प्राइस को ध्यान में रखकर उसे काम करना पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में यह क्षेत्र तेजी से बदला है। देखा जाए, तो कुछ साल पहले तक भारत में एक भी ऐसा फैशन डिजाइनर नहीं था, जिसे वैश्विक स्तर पर पहचाना जाए। लेकिन आज रितु कुमार, रितु बेरी, रोहित बहल, सुनीत वर्मा, जेजे वालिया, तरुण तहिलियानी जैसे नामों की चर्चा दुनिया भर में होती है। रितु बेरी ने तो हॉलीवुड की बड़े स्टार निकोलस किडमन और कैट होम्स के कपड़े भी डिजाइन कर चुकी हैं।

नौकरी के मौके
क्रिएटिव लोगों के लिए यहां मौकों की कमी नहीं है। फैशन डिजाइनिंग का जॉब काफी चकाचौंध भरा होता है। यहां हमेशा कुछ नया करने की चुनौती होती है। इस समय फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में गारमेंट और एक्सेसरीज डिजाइनर की काफी डिमांड है। फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद फैशन हाउस और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में रोजगार के अच्छे अवसर हैं। यहां आप प्रोडक्शन, फैशन मार्केटिंग, डिजाइन प्रोडक्शन मैनेजमेंट, फैशन मीडिया, क्वालिटी कंट्रोल, फैशन एक्सेसिरीज डिजाइन और ब्रांड प्रमोशन में काम कर सकते हैं। इसके अलावा, कॉस्ट्यूम डिजाइनर, फैशन कंसल्टेंट, टेक्निकल डिजाइनर, ग्राफिक डिजाइनर, प्रोडक्शन पैटर्न मेकर, फैशन कॉर्डिनेटर आदि के रूप में भी शानदार करियर बना सकते हैं।

जरूरी तैयारी
इस फील्ड में एंट्री करने के पहले यह जरूरी है कि अपना एक पोर्टफोलियो कर लें। इसके लिए जरूरी है कि आप किसी प्रोफेशनल फोटोग्राफर के पास जाकर अपनी कुछ अच्छी तस्वीरें खिंचवाएं, ताकि आपका अच्छा पोर्टफोलियो तैयार हो सके। आप इस पोर्टफोलियो को किसी एडवरटाइजिंग एजेंसी, जरूरत के मुताबिक मॉडलों को उपलब्ध कराने वाली कोऑर्डिनेटिंग एजेंसी या किसी फैशन डिजाइनर को दिखाकर अपनी मॉडलिंग की राह आगे बढ़ा सकते हैं। मॉडलिंग में विकल्प मॉडलिंग कई तरह की होती है। व्यापक तौर पर इसे रैंप मॉडलिंग, टेलीविजन मॉडलिंग और प्रिंट मॉडलिंग बांटा जा सकता है।

टेलीविजन मॉडलिंग: इसमें आपको मूवी कैमरों के सामने मॉडलिंग करनी पड़ती है। जिसका इस्तेमाल टीवी विज्ञापनों, सिनेमा, वीडियो, इंटरनेट आदि में किया जाता है। प्रिंट मॉडलिंग: इसमें स्टिल फोटोग्राफर्स मॉडल्स की तस्वीरें उतारते हैं, जिनका इस्तेमाल अखबार, ब्रोशर्स, पत्रिकाओं, कैटलॉग, कैलेंडरों आदि में किया जाता है।

शोरूम मॉडलिंग: शोरूम मॉडल्स आमतौर पर निर्यातकों, गारमेंट निर्माताओं और बड़े रिटेलरों के लिए काम करते हुए खरीदारों के सामने फैशन के नवीनतम रुझानों को प्रदर्शित करते हैं।

रैंप मॉडलिंग: इसमें मॉडल्स को दर्शकों के सामने गारमेंट्स व ऐसेसरीज प्रदर्शित करनी होती है। यह प्रदर्शनी, फैशन शो या किसी शोरूम की बात भी हो सकती है। रैंप मॉडल की खड़े होने, चलने की शैली और बॉडी लैंग्वेज बेहतर होनी चाहिए।

सैलॅरी की चमक
फैशन डिजाइनिंग में सैलॅरी भी काफी बेहतर है। शुरू-शुरू में आपकी सैलॅरी 10,000 से 14,000 रुपये महीने हो सकती है। लेकिन दो-तीन साल में जब आप डिजाइनिंग में कुशल हो जाते हैं, तो सैलॅरी काफी बढ़ जाती है। जब आप इस फील्ड में एक बार जाने-पहचाने नाम बन जाते हैं, तो लाखों में कमाई कर सकते हैं।

इंस्टीट्यूट वॉच
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन, चंडीगढ़
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई, गांधीनगर, बेंगलुरु
-नॉर्थ इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, मोहाली
-पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन, नई दिल्ली
-गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ गारमेंट टेक्नोलॉजी
-एफडीडीआई, नोएडा
-सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन

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