Sunday, September 27, 2015

साउंड इंजीनियरिंग: करियर की मीठी धुन

अगर आपको इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर काम करने में आनंद आता है, म्यूजिक और साउंड इफेक्ट्स आपको आकर्षित करते हैं तो आप साउंड इंजीनियिरग के क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। यह प्रोफेशन अपने अंदर कई खूबियों को समेटे है। इसमें करियर की संभावनाओं के बारे में बता रही हैं नमिता सिंह

करीब पांच साल पूर्व डैनी बॉयल की स्लमडॉग मिलियनेयर ने शानदार तरीके से म्यूजिक एवं साउंड का अवॉर्ड जीता। इस उपलब्धि से देश को न सिर्फ शानदार म्यूजिक बनाने वाली शक्ति के रूप में जाना गया, बल्कि इस फिल्म ने लोगों को साउंड इंजीनियिरग जैसे प्रोफेशन के प्रति आकर्षित भी किया। आज यह प्रोफेशन अपनी अलग पहचान बना चुका है और लोग इस ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

क्या है साउंड इंजीनियरिंग
सिनेमैटोग्राफर एवं कैमरामैन की तरह साउंड इंजीनियरों को भी डायरेक्टर के धुंधले विचारों को मूर्त रूप देना होता है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक व मैकेनिकल उपकरणों की सहायता से किसी भी आवाज को कैप्चर करने, रिकॉर्डिंग करने, कॉपी करने, उनमें एडिटिंग करने, मिक्सिंग करने एवं उसे नया रूप देने सरीखे कार्य किए जाते हैं। इसके अंतर्गत प्रोडक्शन एवं पोस्ट प्रोडक्शन जैसे कार्यों को अंजाम दिया जाता है। प्रोडक्शन में किसी भी घटना अथवा कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग की जाती है, जबकि पोस्ट प्रोडक्शन में रिकॉर्डिग किए गए मटेरियल को अंतिम रूप दिया जाता है। फिल्म में लोकेशन पर पहुंच कर आवाज को रिकॉर्ड करना होता है। उसके बाद इंजीनियरों द्वारा उसमें साउंड इफेक्ट्स डाले जाते हैं। म्यूजिक इंजीनियर, इफेक्ट्स इंजीनियर, री-रिकॉर्डिंग मिक्सर आदि उसमें अपनी क्रिएटिविटी दिखाते हैं। सामान्यत: इस इंडस्ट्री में लोग फिल्मी स्कूल से आते हैं, फिर भी कला के धनी लोगों के लिए रास्ते खुले हुए हैं।

कोर्स से मिलती है सहायता
साउंड इंजीनियिरग कोर्स के दौरान उन सभी तकनीकी एवं रोचक बिन्दुओं को बताया जाता है, जो साउंड रिकॉर्डिग, एडिटिंग एवं मिक्सिंग में प्रयोग किए जाते हैं। इसमें छात्र बेसिक थ्योरी एवं आवाज की फ्रीक्वेंसी से लेकर रिकॉर्डिग की बारीकियों, पोस्ट प्रोडक्शन, लाइव साउंड एवं ब्रॉडकास्टिंग में सहायक बनने आदि का गुण सीखते हैं।

यह कोर्स सिर्फ साउंड मिक्सिंग, स्पेशल इफेक्ट्स देने जैसे तकनीकी बिन्दुओं में ही पारंगत नहीं बनाता, बल्कि कोर्स के दौरान छात्र रिकॉर्डिंग टूल्स एवं माइक्रोफोन आदि का प्रयोग भी कुशलता से करना सीखते हैं।

किस रूप में हैं अवसर
स्टूडियो इंजीनियर
साउंड रिकॉर्डिस्ट
ब्रॉडकास्ट इंजीनियर
साउंड एडिटर
री-रिकॉर्डिंग मिक्सर
डायलॉग एडिटर
म्यूजिक एडिटर
साउंड इफेक्ट्स एडिटर
मास्टरिंग इंजीनियर
लोकेशन साउंड इंजीनियर

काम का समय
इस क्षेत्र में प्रोफेशनल्स को लंबी अवधि तक काम करने के लिए खुद को तैयार रखना पड़ता है, क्योंकि कार्य दोपहर से शुरू होकर मध्यरात्रि तक चलता है, जबकि फिल्मों में यह टाइमिंग शूटिंग शेडय़ूल एवं पोस्ट प्रोडक्शन के हिसाब से तय होता है।

शैक्षिक योग्यता
इसमें करियर आरंभ करने के लिए सबसे पहला कदम साउंड इंजीनियरिंग में डिग्री अथवा डिप्लोमा का होना आवश्यक है। साइंस बैकग्राउंड इसमें छात्रों की अधिक मदद कर सकता है, क्योंकि इसके जरिए तकनीकी चीजों को आसानी से हैंडिल किया जा सकता है। हालांकि यह जरूरी भी नहीं है। जो भी कोर्स चलन में हैं, उन्हें देखते हुए कहा जा सकता है कि छात्रों के लिए ग्रेजुएशन के बाद ही राह खुलती है।

आवश्यक स्किल्स
इस क्षेत्र में प्रवेश करने के इच्छुक लोगों की म्यूजिक में रुचि होनी आवश्यक है। साथ ही यह टेक्निकल नॉलेज एवं क्रिएटिविटी का संयोजन भी मांगता है।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रॉनिक एवं मैकेनिकल उपकरणों के साथ काम करने का लगाव भी छात्र को आगे तक ले जाता है। इसमें सफलता की बुनियाद काफी हद तक टीम वर्क के आधार पर रखी जाती है। अत: छात्र में कम्युनिकेशन स्किल्स का होना बहुत जरूरी है।

एजुकेशन लोन
छात्रों को प्रमुख राष्ट्रीयकृत, प्राइवेट अथवा विदेशी बैंकों द्वारा एजुकेशन लोन प्रदान किया जाता है। छात्र को जिस संस्थान में एडमिशन कराना होता है, वहां से जारी एडमिशन लेटर, हॉस्टल खर्च, ट्यूशन फीस एवं अन्य खचरें को ब्योरा बैंक को देना होता है। अंतिम निर्णय बैंक को करना होता है।

संभावनाएं
कोर्स करने के पश्चात फिल्म, टीवी, रेडियो, एडवरटाइजिंग एवं ब्रॉडकास्टिंग, मल्टीमीडिया आर्गेनाइजेशन आदि में जॉब कर सकते हैं। इसमें छात्र सर्वप्रथम रिकॉर्डिग इंजीनियर के असिस्टेंट के तौर पर करियर आरंभ कर सकते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ साउंड की विभिन्न विधाओं में पारंगतता हासिल हो जाती है, जिसके पश्चात खुद का रिकॉर्डिंग स्टूडियो स्थापित किया जा सकता है।

वेतनमान
रेडियो, टीवी आदि में ज्वाइन करने पर सेलरी 10,000 से 15,000 रुपए प्रतिमाह अर्जित की जा सकती है। फिल्मों में ज्वाइन करने पर करीब 1500 से 6000 रुपए प्रतिदिन मिल सकते हैं। यह आमदनी फिल्म के बजट के हिसाब से तय होती है। धीरे-धीरे जब इस क्षेत्र में उनका नाम हो जाता है, तब उस दौरान पैसे की कोई बाधा सामने नहीं आती।

सक्सेस स्टोरी
प्रेक्टिकल नॉलेज आती है काम
मैं गुड़गांव का रहने वाला हूं। बारहवीं के बाद मैंने पुणे स्थित एक संस्थान से बीटेक कोर्स ज्वाइन किया। कोर्स के दौरान मुझे इंजीनियरिंग के कई अन्य विकल्पों के बारे में पता चला। कोर्स समाप्त होते ही मैं गुड़गांव चला आया और नौकरी तलाशनी शुरू की। नौकरी में शुरू से ही मेरा मन नहीं लगता था। मेरी ज्यादा रुचि म्यूजिक में थी। फिर मैंने सोचा कि क्यों न साउंड इंजीनियरिंग में ही करियर बनाया जाए। मैंने घर बैठ कर ही इंटरनेट आदि के सहारे इसकी पढ़ाई और बेसिक चीजों को जानना शुरू कर दिया। फिर यूके जाकर मास्टर डिग्री हासिल की। इसके अलावा बारीकियों से अवगत होने के लिए बर्कले से तीन माह का ऑनलाइन शॉर्ट टर्म कोर्स भी किया। नौकरी के चक्कर में न पड़ कर मैंने गुड़गांव में ही अपना स्टूडियो लगा लिया। आज मेरे पास तीन साल से भी ज्यादा का अनुभव हो गया है। मैं इस प्रोफेशन से पूरी तरह से संतुष्ट हूं। इस क्षेत्र में आने वाले छात्रों से मैं यही कहूंगा कि कोर्स के दौरान प्रेक्टिकल नॉलेज जरूर हासिल करें।
नितिन गुप्ता, साउंड इंजीनियर, गुड़गांव

एक्सपर्ट्स व्यू
कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है
कोर्स समाप्त कर इस इंडस्ट्री में आने वाले छात्रों को पहले छह माह की ट्रेनिंग लेनी होती है। साथ ही इसमें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि स्टूडियो अथवा सेट पर परिस्थितियां बदलती रहती हैं तथा कदम-कदम पर सावधानी बरतनी पडम्ती है। बारीक से बारीक चीजों पर पैनी नजर रखनी पड़ती है। काम के दौरान एक प्रतिशत की लापरवाही भी आपको बाहर का रास्ता दिखा सकती है। इस क्षेत्र में काम बहुत है। बस आपके सम्पर्क अच्छे होने चाहिए। यदि आपका काम अच्छा है और आप मेहनती हैं तो कम्पनी आपको कभी अपने से दूर नहीं जाने देगी। लड़कियों के लिए इस क्षेत्र में कोई मनाही नहीं है, लेकिन उनकी संख्या कम ही देखने को मिलती है।
सैफ, साउण्ड एडिटर, मुंबई

फैक्ट फाइल
प्रमुख संस्थान

फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटय़ूट ऑफ इंडिया, पुणे
वेबसाइट: www.ftindia.com
सत्यजीत राय फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटय़ूट, कोलकाता
वेबसाइट: www.srfti.gov.in
एमजीआर गवर्नमेंट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटय़ूट, चेन्नई
एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन, नोएडा
वेबसाइट: www.aaft.com
गवर्नमेंट फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटय़ूट, बेंगलुरू
केल्ट्रॉन एडवांस्ड ट्रेनिंग सेंटर, त्रिवेंद्रम
विस्लिंग वुड्स इंटरनेशनल, मुंबई

फायदे व नुकसान
चुनौतीपूर्ण एवं रोचकता से भरा काम
एक समय के बाद आकर्षक सेलरी पैकेज
जरा-सी लापरवाही से भारी नुकसान
संतुष्टि न होने पर लम्बे समय तक कार्य