Saturday, September 26, 2015

होम साइंस में भी संभव है बेहतर कॅरियर और रोजगार की तलाश

दसवीं या बारहवीं पास करने वाले छात्रों के लिए साइंस, कॉमर्स और ह्यूमेनिटीज स्ट्रीम के बाद होम साइंस के रूप में एक और विकल्प होता है। करियर के लिहाज से यह विकल्प छात्रों और अभिभावकों के बीच बहुत ज्यादा चर्चित नहीं है। इसकी वजह कुछ गलत धारणाएं हैं, जो होम साइंस स्ट्रीम में मौजूद अवसरों की जानकारी न होने से छात्रों और अभिभावकों में बनी हैं। आज के कॉलम में पढ़िए होम साइंस स्ट्रीम और उससे जुड़े तरक्की के आयामों के बारे में।
क्या है होम साइंस स्ट्रीम
यह एक ऐसी स्ट्रीम है, जिसे भ्रांतिवश सही संदर्भो में न समझकर सिर्फ लड़कियों के लिए मान लिया जाता है। काफी अभिभावक लड़कियों की शिक्षा को जरूरी मानते हैं, लेकिन वह इससे भी ज्यादा अहमियत इस बात को देते हैं कि लड़कियां घर और उसके कामकाज को संभालन में ज्यादा कुशल हों। होम साइंस की पढ़ाई में होम मैनेजमेंट के प्रशिक्षण के अलावा कई तरह के रोजगारों में उपयोगी कौशल का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसलिए यह कहना ठीक नहीं है कि यह स्ट्रीम सिर्फ लड़कियों के लिए ही उपयोगी है। इस स्ट्रीम के तहत मिलने वाले प्रशिक्षण का लाभ लड़के भी रोजगार कुशलता (इंप्लॉयबिलिटी स्किल) बढ़ाने में कर सकते हैं।
बदलती सामाजिक परिस्थितियों में घर और पारिवारिक जीवन के कल्याण और उनकी देखरेख के लिए आधुनिक ढंग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युक्त होम मैनेजमेंट जरूरी है। इस जरूरत को पूरा करने की शिक्षा और उपयोगी प्रशिक्षण देने का कार्य होम साइंस करता है। यह ‘बेहतर जीवनशैली’ पर केंद्रित शिक्षा है और इसकी अवधारणा का मूल बिंदु पारिवारिक पारिस्थितिकी (इकोसिस्टम) का निर्माण है।
होम साइंस का विषय क्षेत्र
इस स्ट्रीम के पाठय़क्रम में साइंस और ह्यूमेनिटीज के विषय भी शामिल होते हैं। इस कारण इस स्ट्रीम का अध्ययन क्षेत्र काफी व्यापक होता है। इसमें केमिस्ट्री, फिजिक्स, फिजियोलॉजी, बायोलॉजी, हाइजिन, इकोनॉमिक्स, रूरल डेवलपमेंट, चाइल्ड डेवलपमेंट, सोशियोलॉजी एंड फैमिली रिलेशन्स, कम्यूनिटी लिविंग, आर्ट, फूड, न्यूट्रिशन, क्लॉथिंग, टेक्सटाइल्स और होम मैनेजमेंट आदि विषय शामिल होते हैं।
10वीं के बाद है उपलब्ध
विषय के रूप में होम साइंस सीबीएसई और ज्यादातर राज्य बोर्डो में 11वीं और 12वीं कक्षा के स्तर पर उपलब्ध है। कॉलेज के स्तर पर इस विषय की उपलब्धता को देखें, तो यह देश के काफी विश्वविद्यालयों में तीन वर्षीय बैचलर डिग्री पाठय़क्रम के रूप में पढ़ाया जा रहा है। इस विषय के साथ बीए या बीएससी डिग्री हासिल की जा सकती है। होम साइंस में ग्रेजुशन के बाद इस विषय में मास्टर डिग्री की पढ़ाई करने के अलावा फैशन डिजाइनिंग, डाइटिटिक्स, काउंसलिंग, सोशल वर्क, डेवलपमेंट स्टडीज, इंटरप्रिन्योरशिप, मास कम्यूनिकेशन और कैटरिंग टेक्नोलॉजी आदि विषयों में भी पोस्ट ग्रेजुएशन किया जा सकता है। इस विषय के छात्रों के पास बीएड करने का भी विकल्प रहता है।
होम साइंस के प्रमुख पांच क्षेत्र
- फूड एंड न्यूट्रिशन ’रिसोर्स मैनेजमेंट
- ह्यूमन डेवलपमेंट ’फैब्रिक एंड अपेरल साइंस
- कम्यूनिकेशन एंड एक्सटेंशन
इन क्षेत्रों के अलावा कुछ अन्य विषय भी होम साइंस के पाठय़क्रमों में शामिल होते हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-इंटरप्रिन्योरशिप, फैमिली लाइफ एजुकेशन, चाइल्ड डेवलपमेंट, टेक्सटाइल डिजाइनिंग, होम इकोनॉमिक्स, माइक्रोबायोलॉजी, पर्सनालिटी डेवलपमेंट, फूड प्रिजर्वेशन और फैशन डिजाइनिंग।
उपलब्ध पाठय़क्रम
- डिप्लोमा इन होम साइंस ’बीएससी (होम साइंस) ’बीएससी (ऑनर्स) होम साइंस
- बीएचएससी ’बीएससी (ऑनर्स)फूड एंड न्यूट्रिशन ’बीएससी (ऑनर्स) ह्यूमन डेवलपमेंट
- एमएससी (होम साइंस) ’पीएचडी
जरूरी गुण
- विश्लेषणात्मक सोच ’प्रायोगिक और तार्किक दृष्टिकोण ’वैज्ञानिक सूझबूझ ’चीजों को व्यवस्थित करने का हुनर - सौंदर्यबोध और रचनाशीलता
- प्रभावी संवाद कौशल
- विवेक के साथ घरेलू जुड़े कार्यों को करने में रुझान हो
- संतुलित नजरिया
रोजगार के मौके
- टेक्सटाइल के क्षेत्र में मर्चेडाइजर या डिजाइनर
- हॉस्पिटल और खाद्य क्षेत्र में न्यूट्रिशनिस्ट या डाइटिशियन
- टूरिस्ट रिजोर्ट, रेस्टोरेंट और होटल में हाउस कीपिंग कार्य की देखरेख
- शैक्षणिक या कामकाजी संस्थानों में कैंटरिंग सुविधा देने का कार्य
- खाद्य उत्पादों के निर्माण और विकास कार्यों का पर्यवेक्षण
- रिसोर्स मैनेजमेंट
- फैमिली काउंसलर
- सोशल वर्क और ह्यूमन डेवलपमेंट
- अनुसंधान और शिक्षण कार्य
- टेक्सटाइल, फूड, बेकिंग और कंफेक्शनरी के क्षेत्र में स्वरोजगार
संबंधित संस्थान
- दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- यूनिवर्सिटी ऑफ बॉम्बे, मुंबई
- आचार्य एनजी रंगा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
- इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इंस्टीटय़ूट, इलाहाबाद
- चंद्रशेखर आजाद यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, कानपुर
- यूनिवर्सिटी ऑफ कैलकटा, कोलकाता
- राजस्थान एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, बीकानेर
- राजेंद्र एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, पूसा
- नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, फैजाबाद
- गोविंद बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर
- महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, उदयपुर
- सीएसके हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, पालमपुर