शानदार करियर के चमकते विकल्प


अक्सर छोटी उम्र में छात्र ‍विषय का चयन कर लेते हैं लेकिन 12वीं के बाद उनके मन में ये सवाल उमड़ते हैं कि इस विषय से संबंधित किस क्षेत्र में उनके लिए ज्यादा स्कोप है। कई बार जानकारी के अभाव में वे गलत दिशा में आगे बढ़ जाते हैं। आपके मन में भी अगर ऐसे ही सवाल हैं तब आइए जानते हैं करियर काउंसलर ‍सचिन भटनागर से कि युवा 12वीं के बाद किन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं। पेश है सचिन भटनागर जी से इस विषय पर की गई बात। 

फीजिक्स, कैमेस्टी, मैथ्स (पीसीएम) में क्या संभावनाएं हैं? 
पीसीएम सब्जेक्ट में अधिकांश युवाओ का टार्गेट इंजीनियरिंग होता है। इसकी प्रवेश परीक्षाएं होती हैं। इसमें 12वीं के मेरिट प्रतिशत का भी एडवांटेज इसमें मिलता है। इंजीनियरिंग में ‍करियर की काफी संभावनाएं होती हैं। पीसीएम के बाद फार्मेसी, कृषि, हार्टीकल्चर, डेयरी टेक्नालॉजी, बॉयो टेक्नोलॉजी, बॉयो इंर्फोमेटिक्स, जैनेटिक्स जैसे क्षेत्र में भी करियर बनाया जा सकता है। 

बीसीए के बाद एमसीए भी किया जा सकता है। 12वीं के बाद एनडीए की परीक्षा भी दी जा सकती है। पीसीएम विषय के विद्यार्थियों के लिए सेना के अंगों में अवसर होते हैं। पीसीएम विषय के वि
द्यार्थियों के लिए मरिन इंजीनियरिंग, पेट्रोलियम, माइनिंग जैसे उभरते क्षेत्र भी हैं जिनमें करियर की काफी संभावनाएं हैं। पीसीएम विषय में ड्राइंग में रुचि हो तो आर्किटेक्ट भी बना जा सकता है। 

बॉयोलॉजी (जीव विज्ञान) के क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए करियर के क्या अवसर हैं? 
बॉयोलॉजी विषय में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का पहला सपना मेडिकल में जाने होता है। मेडिकल में जाने के लिए प्रवेश परीक्षाएं होती है। एलोपैथी में एमबीबीएस, एमडीएस किया जा सकता है। मेडिकल में हौम्योपैथी, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, सिद्धा, यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में भी करियर बनाया जा सकता है। फॉर्मेसी, डेयरी टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, हार्टीकल्चर में भी करियर के उजले अवसर हैं। 
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बॉयो टेक्नॉलॉजी, बॉयो इन्फार्मेटिक्स ऐसे उभरते क्षेत्र हैं जिनमें ‍करियर बनाया जा सकता है। माइक्रो बॉयोलॉजी में भी करियर के उजले अवसर रहते हैं। पैरामेडिकल व फीजियोथैरेपी के कोर्स भी किए जा सकते हैं। इनमें 12वीं के प्रतिशत के आधार पर या प्रवेश परीक्षा के माध्यम से इन कोर्सों को किया जा सकता है।

नर्सिंग का कोर्स भी किया जा सकता है। मेडिकल टूरिज्म के बढ़ने के कारण हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन का पांच वर्षीय कोर्स भी किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस कॉलेज से आप कोर्स कर रहे हों अगर वह अच्‍छा है तो करियर संभावनाएं बढ़ जाती हैं। 

लॉ में वकालत के अलावा और क्या अवसर हैं? 
लॉ वर्तमान में टॉप टेन करियर्स में आता है। लॉ का क्षेत्र बहुआयामी है। इसमें करियर के कई अवसर मौजूद हैं। अनुभव के बाद इसमें टीचिंग क्षेत्र में जाकर प्रोफेसर भी बना जा सकता है। फाइनेंस के क्षेत्र जैसे इनकम टैक्स, सेल टैक्स, टैक्सेशन में भी करियर बनाया जा सकता है। कॉर्पोरेट लॉयर भी बना जा सकता है। इसमें भी काफी अच्छे पैकेजेस होते हैं। 

आजकल लीगल प्रोसेस आउट सोर्सिंग भी एक नया क्षेत्र है, जिसमें विदेशों की कंपनियों लॉ का कार्य भारत में एजेंसियों से करवाती हैं। इसके अलावा कुछ साल प्रैक्टिस के बाद आप सिविल जज की एक्जाम भी दे सकते हैं। जज बनने के बाद भी उजले अवसर होते हैं। 

हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील के अंडर प्रै‍िक्टस करने से भी आपको बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। शुरुआत में सीखने पर ज्यादा ध्यान दें, जिससे आपकी जड़ें मजबूत हों ताकि आप एक ठोस ‍करियर बना पाएं। लॉ में ग्रेज्युएशन और अनुभव के बाद प्रोफेसर के रूप में भी करियर बनाया जा सकता है। इसमें शिक्षा के क्षेत्र में विदेशों में भी अवसर उपलब्ध हैं। 
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कॉर्पोरेट कल्चर को देखते हुए करियर की क्या तैयारियां होना चाहिए? 
सबसे पहले तो अंग्रेजी का ज्ञान होना आवश्यक है। कम्प्यूटर और इंटरनेट पर कार्य करने का ज्ञान। टीम में कार्य करने की आदत, कार्य के प्रति ईमानदारी, सीखने की उत्सुकता आदि आजकल कॉर्पोरेट कल्चर में सहायक है। आजकल सभी जगहों पर इन गुणों को देखा जाता है। 

वर्तमान में ऐसा कौनसा क्षेत्र है जहा ‍करियर की असीम संभावनाएं हैं?
करियर के वर्तमान में हजारों ऑप्शन है। यह कहना ठीक नहीं होगा कि कौनसा करियर अच्छा है, कौनसा खराब। यह सभी निर्भर करता है कि हमारी क्या योग्यता है। जैसे स्पोर्ट्‍स का क्षेत्र ले लें, उसमें भी पैसा, फेम सभी कुछ है। संगीत के क्षेत्र में काफी पैसा। हमें हमारी योग्यता, हमारी स्कील्स, रुचि जैसी चीजों पर ध्यान देना होगा। हमारी स्कूली शिक्षा बहुत अच्छी हो। ईमानदारी, मेहनती, प्रयासरत रहें, ये सभी चीजें सफल करियर के लिए आधार होती हैं।

प्रशासनिक सेवाओं में जाने की क्या तैयारियां करनी चाहिए?
प्रशासनिक सेवाओं के लिए प्री में योग्यता (एप्टीट्यूट) टेस्ट लिया जाता है। इसके अंदर काफी विषय होते हैं। हिन्दी-अंग्रेजी पकड़ होना चाहिए। हमारा सामान्य ज्ञान, तार्किक क्षमता, अच्छे से निर्णय लेने की क्षमता, अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रख पाते हैं तो हम एक बेहतर प्रशासनिक अधिकारी बन सकते हैं। इसके लिए प्री, मेन्स और इंटरव्यू तीनों का सामना करना पड़ता है। 

तैयारी फर्स्ट ईयर से ही करना जरूरी है। फाइनल ईयर में अध्ययनरत रहते हुए इसकी परीक्षा देनी होती है। एक अच्छा गुरु होना आवश्यक है, जो आपका मार्गदर्शन करे। कॉलेज के अलावा प्रतियोगी परीक्षा‍‍ओं की तैयारी के लिए कोचिंग इंस्टीट्‍यूट भी ज्वॉइन कर हम अपनी तैयारी कर सकते हैं।


12वीं के बाद स्टूडेंट्स असमंजस में रहते हैं कि आगे क्या करें और क्या नहीं? एेसी स्थिति में कई बार गलत जानकारी के कारण वे गलत दिशा में बढ़ जाते हैं, जिससे उनका करियर भी चौपट हो जाता है। आइए, आपको आट्र्स सब्जेक्ट से जुड़े कुछ ऐसे ही कोर्स के बारे में बताते हैं, जहां 12वीं के बाद आपका फ्यूचर बेहतर हो सकता है...

आमतौर पर 12वीं के बाद स्टूडेंट्स के मन में यही खयाल आता है कि साइंस या कॉमर्स से ग्रेजुएशन करेंगे, तो भविष्य में नौकरी की अच्छी संभावनाएं रहेंगी, लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है। आज आट्र्स सब्जेक्टर से ग्रेजुएशन करने वाले स्टूडेंट्स के लिए भी करियर के कई रास्ते खुल चुके हैं। बीए (साइकोलॉजी) करने के बाद एमए साइकोलॉजी कर लें, तो साइकोलॉजिस्ट के रूप में करियर बनाया जा सकता है। बीए सोशलॉजी से करने के बाद एनजीओ, सामाजिक संगठनों जॉब की तलाश की जा सकती है। वहीं एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) में भी युवाओं के लिए करियर का एक अच्?छा ऑप्शन है। सिविल सर्विसेज, जर्नलिज्म आदि क्षेत्रों में भी आट्र्स से विषय से पढ़ाई के बाद करियर बनाया जा सकता है। अगर आप फॉरेन लैंग्वेज का कोर्स कर लेते हैं, तो ट्रैवल एंड  टूरिज्म विभाग में भी रोजगार की संभावनाएं होती हैं। आइए, आपको बताते हैं 12वीं के बाद आट्र्स सब्जेक्ट में कहां है करियर के ऑप्शंस...

म्यूजिक फील्ड
तमाम टेलीविजन चैनल्स पर हो रहे म्यूजिकल टैलेंट हंट शो के प्रति युवाओं का उत्साह आज देखते ही बनता है। कुछ वर्ष पहले तक म्यूजिक को हॉबी या पार्ट-टाइम के रूप में ही अपनाया जाता था, लेकिन मनोरंजन की दुनिया में आई क्रांति के कारण इस क्षेत्र के प्रति युवाओं में जबरदस्त क्रेज देखा जाने लगा है। खास बात यह है कि ग्लोबल म्यूजिक इंडस्ट्री आज वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से विकास कर रहे क्षेत्रों में से एक है। यहां आप प्ले बैक सिंगर, पॉप स्टार, एजेंट्स और प्रोड्यूसर के रूप में करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इसके अलावा, कॉपीराइटर, रिकॉर्डिंग टेक्नीशियन, म्यूजिक थैरेपी, प्रोडक्शन, प्रमोशन, मैनेजमेंट के साथ-साथ परफॉर्मेंस के क्षेत्र में भी करियर की तलाश कर सकते हैं। 12वीं करने के बाद आप बीए इन म्यूजिक कोर्स में एंट्री ले सकते हैं। देखा जाए, तो इस तरह के कोर्स करने वाले स्टूडेंट की आने वाले दिनों में डिमांड रहने की संभावनाएं हैं।
इंस्टीट्यूट
-अजमेर म्यूजिक कॉलेज, अजमेर-बनस्थली विद्यापीठ, बनस्थली, राजस्थान-बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, बिहार- गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर, पंजाब

हेयर स्टाइल 
इन दिनों लोगों में फैशन का खूब पैशन है। इसलिए लोग अपने हेयर स्टाइल के प्रति काफी सजग हो गए हैं। यही वजह है कि बाजार में संभावनाओं को देखते हुए कुछ संस्थानों ने इससे जुड़े कोर्स शुरू किए हैं। आप 12वीं पास करने के बाद इस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।
इंस्टीट्यूट 
-पॉलिटेक्निक फॉर वूमन, साउथ एक्सटेंशन-1, नई दिल्ली-हबीब्स हेयर एकेडमी, साउथ एक्सटेंशन-2 नई दिल्ली-मैन्स वल्र्ड इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली।

ब्यूटी कल्चर
फैशन के इस दौर में हर कोई सुंदर दिखना चाहता है और लोगों की इसी चाहत की वजह से ब्यूटी कल्चर का कारोबार काफी बढ़ रहा है। यदि आप ऑफबीट करियर में कदम रखना चाहते हैं, तो ब्यूटी कल्चर से जुड़े कोर्स 12वीं के बाद भी कर सकते हैं। इस फील्ड में आज करियर की बेहतरीन संभावनाएं देखी जा रही हैं।
इंस्टीट्यूट 
-अहिमसा वूमन पॉलिटेक्निक, नई दिल्ली-लोयला इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन, लोयला कॉलेज, चेन्नई

वीडियो प्रोडक्शन 
इन दिनों वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ी है। कुछ यूनिवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट ने वीडियो प्रोडक्शन के जुड़े कोर्स की शुरुआत की है। इसमें छात्रों को स्क्रिप्टिंग, कैमरा हैंडलिंग, वीडियो एडिटिंग, प्री-प्रोडक्शन, प्रोडक्शन, पोस्ट प्रोडक्शन जैसी जानकारी दी जाती है। 12वीं के बाद वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है।
इंस्टीट्यूट
-गुरुगोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली -जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, मुंबई-भारतीय विद्या भवन, कर्नाटक
रेडियो जॉकी
रेडियो के प्रति लोगों की दीवानगी आज भी कम नहीं हुई है। खासकर एफएम रेडियो चैनल्स के आने से रेडियो की लोकप्रियता एक बार फिर शिखर पर पहुंच गई है। एफएम रेडियो चैनल्स की बढ़ते दायरे की वजह से इस क्षेत्र में रेडिया जॉकी के लिए असीम अवसर देखे जा रहे हैं। रेडियो पर म्यूजिकल प्रोग्राम की एंकरिंग करने वाले रेडियो जॉकी की कोशिश होती है कि श्रोता को प्रोग्राम्स के साथ बांध कर रख सकें। यदि आप भी रेडियो जॉकी जैसे एक्साइटिंग करियर में कदम रखना चाहते हैं, तो दमदार आवाज के साथ कम्युनिकेशन स्किल भी बेहतर होनी चाहिए। 12वीं के बाद भी रेडिया जॉकी के कोर्स में दाखिला ले सकते हैं।
इंस्टीट्यूट
-जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, मुंबई-एकेडमी ऑफ रेडियो मैनेजमेंट, दिल्ली-एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एेंड टेलीविजन, नोएडा-एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन-एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, चेन्नई

लैंग्वेज
उदारीकरण के बाद दो देशों के बीच बिजनेस और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का दौर बढऩे लगा है। एेसे में उन लोगों के लिए करियर का नया रास्ता खुल गया है, जो फॉरेन लैंग्वेज की अच्छी जानकारी रखते हैं। फॉरेन लैंग्वेज से जुड़े कोर्स आप 12वीं के बाद भी कर सकते हैं। इस फील्ड से जुडे़ लोगों के लिए ट्रांसलेटर, इंटरप्रिटेटर्स, ऑनलाइन कंटेंट रायटर, टूर ऑपरेटर, इंस्ट्रक्टर आदि के रूप में जॉब के असीम अवसर हैं।
इंस्टीट्यूट
-पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़-भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली-स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर और कल्चर स्टडीज, जेएनयू, नई दिल्ली-स्कूल ऑफ फॉरेन लैंग्वेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी

मास कम्युनिकेशन
करियर के लिहाज से मास कम्युनिकेशन उभरता हुआ क्षेत्र है। अगर भाषा पर अच्छी पकड़ है और अंग्रेजी का ज्ञान भी है, तो 12वीं के बाद मास कम्युनिकेशन से संबंधित कोर्स कर सकते हैं। खास बात यह है कि इससे संबंधित कोर्स में किसी भी स्ट्रीम के स्टूडेंट्स एडमिशन ले सकते हैं। मास कम्युनिकेशन से संबंधित कोर्स करने के बाद आप जर्नलिस्ट के अलावा, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, कंटेंट राइटर, वेब कंटेंट राइटर आदि बन सकते हैं।
इंस्टीट्यूट 
-आईआईएमसी, नई दिल्ली
-जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
-दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
-पटना यूनिवर्सिटी, पटना

फैशन कम्युनिकेशन
इन दिनों फॉरेन और डोमेस्टिक ब्रांड की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। इसलिए कंपनियां लोगों को लुभाने के लिए यूनीक ब्रांड आइडेंटिटीज डेवलप करती है और इसके लिए जरूरत होती है फैशन कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स की। वैसे, फैशन कम्युनिकेशन प्रोग्राम उन लोगों को बेहतरीन मौका उपलब्ध करवाता है, जो अपना करियर फैशन बिजनेस, रिटेल मर्चेंडाइजिंग, कम्युनिकेशन फील्ड जर्नलिज्म, टेलीविजन, इवेंट मैनेजमेंट आदि में बनाना चाहते हैं। इस कोर्स में आप बेसिक ऑफ डिजाइन, टेक्निकल ड्राइंग, फैशन स्टडीज, प्रिंसिपल ऑफ मार्केटिंग, फैशन स्टाइल, फैशन जर्नलिज्म और पोर्टफोलियो डेवलपमेेंट के बारे में बताया जाता है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद स्टूडेंट मार्केटिंग, मैनेजमेंट, एंट्रप्रोन्योरशिप, ब्रोडकास्ट प्रोडक्शन, फैशन जर्नलिज्म, विजुअल मर्चेंडाइजिंग आदि फील्ड में जॉब तलाश सकते हैं। 12वीं के बाद आप फैशन कम्युनिकेशन कोर्स में एंट्री ले सकते हैं।
इंस्टीट्यूट
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली।
-सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट, नोएडा।

 राजनीति विज्ञान 
यदि आपको राजनीति में रुचि है, तो आप राजनीति विज्ञान को अपना मुख्य विषय चुन सकते हैं। करियर की दृष्टि से राजनीति विज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस विषय में आप राजनीति की बारीकियों को अच्छी तरह समझ सकते हैं। इस विषय के साथ आईएएस और आईपीएस परीक्षा में भी सफलता पाई जा सकती है। राजनीति विज्ञान सोशल साइंस का हिस्सा है। इस विषय में भविष्य बनाने की चाह रखने वाले युवाओं को चाहिए कि सर्वप्रथम वह यह देखे की उनका इस विषय के प्रति रुझान है या नहीं। इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को विभिन्न एजेंसियों और सरकारी विभागों में रखा जाता है। राज्य स्तर पर कई राजनीति विज्ञानी शहरी नियोजन, स्वास्थ्य योजना तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था में रखे जाते हैं। चूंकि राजनीति विज्ञानी के कार्य जटिल होते हैं और सामाजिक समस्याओं का उपयुक्त समाधान ढूंढना कठिन होता है, इसलिए अच्छी सूचना एवं व्यापक ज्ञान होना आवश्यक होता है।
 इंस्टीट्यूट
-दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली-जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली-पटना यूनिवर्सिटी, पटना-लखनऊ यूनिवर्सिटी, लखनऊ- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद

दर्शनशास्त्र
अगर आप 12वीं के बाद इस सब्जेक्ट में एडमिशन लेते हैं, तो करियर के कई रास्ते खुल जाते हैं। दरअसल, यह सब्जेक्ट स्टूडेंट्स का एमबीए करने की राह दिखाता है। एमबीए करने या सिविल सर्विस परीक्षा में दर्शनशास्त्र को एक विषय के रूप में रखने के लिए स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर पर स्टूडेंट्स दर्शनशास्त्र की पढ़ाई कर रहे हैं। आट्र्स के विषयों में दर्शनशास्त्र का महत्व इसलिए भी बढ़ रहा है, क्योंकि छात्र इसमें लॉजिक की पढ़ाई करते हैं। इसके पेपर कैट या फिर सिविल परीक्षा की तैयारी में मददगार साबित होते हैं।
इंस्टीट्यूट्स
-दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली-जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली-पटना यूनिवर्सिटी, पटना-लखनऊ यूनिवर्सिटी, लखनऊ-इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद

मनोविज्ञान
आट्र्स सब्जेक्ट में मनोविज्ञान काफी पॉपुलर कोर्स है। 12वीं के बाद इस कोर्स में एडमिशन लिया जा सकता है। इसमें स्टूडेंट्स 90 फीसदी से अधिक अंक लाकर भी इसलिए दाखिला ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें यह विषय स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, कॉरपोरेट जगत आदि सभी जगह नौकरी का अवसर दिला रहा है। कॉरपोरेट कंपनियों के एचआर विभाग में मनोविज्ञान के स्टूडेंट्स की जरूरत पड़ रही है। अस्पतालों में मनोविज्ञान के विशेषज्ञ या स्कूल में काउंसलिंग के लिए इसकी जरूरत पड़ रही है। स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग अनिवार्य बनती जा रही है, इसलिए जगह-जगह काउंसलर रखे जा रहे हैं। वृद्धाश्रम हों या मनोचिकित्सा से जुड़े संस्थान, सभी जगह मनोविज्ञान के स्टूडेंट्स की अच्छी-खासी मांग है। इसके अलावा सर्वे और रिसर्च के काम में भी इनके लिए अवसर है।
इस्टीट्यूट
-लोयला कॉलेज, चेन्नई-सेंट स्टीफन कॉलेज, नई दिल्ली-लेडी श्री राम कॉलेज, नई दिल्ली-सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई

अर्थशास्त्र
सबसे ज्यादा जिस विषय के लिए मारामारी मची है, वह है अर्थशास्त्र। बाजारवाद के दौर में राष्ट्रीय कंपनी हो या अंतरराष्ट्रीय कंपनी, बैकिंग हो या फाइनेंस सेक्टर, सभी जगह अर्थशास्त्र के स्टूडेंट्स और एक्सपर्ट की मांग हो रही है। इनकी मांग रिसर्च प्लानिंग, अर्बन मैनेजमेंट, रूरल मैनेजमेंट, फॉरेन ट्रेड, इंटरनेशनल रिलेशंस आदि के क्षेत्रों में हैं। इसके अलावा, डेवलपमेंट बैंकों, कॉमर्शियल बैंकों और इंवेस्टमेंट बैंकों में भी अर्थशास्त्र के स्टूडेंट्स की मांग रहती है। इतना ही नहीं, प्लानिंग कमिशंस और ऑर्गनाइजेशंस, जिनका संबंध डाटा कलेक्शन और इंटरप्रिटेशन से हैं, उन्हें भी इकोनॉमिक्स से जुडे़ स्टूडेंट्स की जरूरत होती है। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में करियर बनाने से पहले स्टूडेंट्स यह देख लें कि इस विषय के प्रति उनमें रुचि कितनी है। अगर आपकी रुचि इस विषय में नहीं है, लेकिन आप मार्केट में डिमांड को देखते हुए इस फील्ड में आना चाहते हैं, तो आपको बचना चाहिए। अगर इकोनॉमी से जुड़ी चीजों में आपकी दिलचस्पी है, तभी आप इस फील्ड में कदम रखें।
इंस्टीट्यूट वॉच
-दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, नई दिल्ली -सेंटर फॉर इकोनॉमिक स्टडीज एंड प्लानिंग, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली -इंडियन स्टेटस्टिकल इंस्टीट्यूट (आईएसआई), कोलकाता एवं दिल्ली -इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च

इतिहास 
इतिहास में वह सब कुछ दर्ज है, जो विश्व की विभिन्न सभ्यताओं ने अपने विकास के क्रम में किया। एक इतिहासकार शिल्प तथ्यों, वस्तु भग्नावशेषों, स्मारक अवशेषों, भवन अवशेषों, प्राचीन मुद्राओं, जीवाष्मों, प्राचीन पुस्तकों, शिलालेखों, मंदिरों, मूर्तियों, ताम्र पत्रों, गुफा चित्रों, ऐतिहासिक घटनाओं के अभिलेखों की पहचान करता है और उनका बारीक अध्ययन करता है। उस संबंध में एक तार्किक और प्रामाणिक निष्कर्ष सामने रखता है। इन्हीं निष्कर्षों के कारण हम यह जान पाते हैं कि अतीत में घटी विभिन्न घटनाओं के पीछे क्या था? 12वीं के बाद इतिहास विषय में स्नातक कर सकते हैं और उसके बाद स्नातकोत्तर किया जा सकता है। पीएचडी भी कर सकते हैं। इतिहास में ऑनर्स के साथ पास कोर्स भी होता है। इतिहास में जो विषय पढ़ाए जाते हैं, वे इस प्रकार हैं- प्राचीन, मध्य और आधुनिक काल का इतिहास, उसकी शासन प्रणालियों, उस समय के राजवंशों, साम्राज्यों, धार्मिक व्यवस्थाओं के साथ भाषा व लिपि के बारे में पढ़ाया जाता है।
इंस्टीट्यूट
 -दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली -पटना यूनिवर्सिटी, पटना-लखनऊ यूनिवर्सिटी, लखनऊ-इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद

भूगोल
12वीं के बाद आप भूगोल से स्नातक करते हैं, तो करियर के कई रास्ते खुल जाते हैं। आप अर्बन प्लानर के रूप में करियर बना सकते हैं। आज शहरों की योजना बनाने में भूगोल विशेषज्ञों की अहम भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसके लिए भू-स्वामियों, टाउनशिप बनाने वाली कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना पड़ता है। इस विषय से जुड़े स्टूडेंट्स कार्टोग्राफर के रूप में भी काम करने का अवसर होता है। कार्टोग्राफी (नक्शा बनाना) के कोर्स की पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए  मीडिया, बुक पब्लिशर, एटलस प्रकाशकों, सरकारी एजेंसियों में बेहतर अवसर हो सकते हैं। इसके अलावा, जीआईएस स्पेशलिस्ट के तौर पर काम कर सकते हैं। आज ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) अथवा जियोग्राफिक इन्फार्मेशन सिस्टम के बढ़ते उपयोग से भूगोल के साथ कम्प्यूटर एवं मल्टीमीडिया के जानकार लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढऩे लगे हैं। देश-विदेश में स्थित मौसम के बारे में पूर्व सूचना देने वाली सरकारी सेवाओं के अलावा, मीडिया के मौसम प्रोग्राम, उड्डयन विभाग आदि में मौसम विज्ञान विशेषज्ञ एक्सपर्ट की मांग रहती है। इसी प्रकार शिपिंग कंपनियों में भी इनकी सेवाएं ली जाती हैं। जहां तक कोर्स की बात है, तो ग्रेजुएशन स्तर पर भूगोल से बीए अथवा बीए ऑनर्स कोर्स के बारे में सोचा जा सकता है। इसके बाद एमए (भूगोल) के साथ जीआईएस सरीखे कोर्स को भी साथ-साथ कर सकते हैं। देश की प्राय: सभी यूनिवर्सिटी में भूगोल पर आधारित कोर्सेज हैं।
इंस्टीट्यूट 
-दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
-गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर
-यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर, मैसूर
-बीआईटी (मेसरा), रांची

इंश्योरेंस              
अगर आप ऐसे  करियर की तलाश में हैं, जहां आपका भविष्य सुरक्षित हो, तो इंश्योरेंस के क्षेत्र में कदम बढ़ा सकते हैं। इन दिनों इस क्षेत्र में करियर की बेहतरीन संभावनाएं हैं, क्योंकि सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियां तो अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार कर ही रही हैं, विदेशी कंपनियों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। ऐसी स्थिति में यदि आप इंश्योरेंस से जुड़े कोर्स कर लेते हैं, तो आपका फ्यूचर बेहतर हो सकता है। आमतौर पर 12वीं पास स्टूडेंट्स इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। आप चाहें, तो 12वीं के बाद बीए (इंश्योरेंस) में एडमिशन ले सकते हैं। देश के कई प्रमुख संस्थानों में इंश्योरेंस से जुड़े कोर्स उपलब्ध हैं। यहां आप डिप्लोमा, सर्टिफिकेट से लेकर डिग्री और मास्टर डिग्री कोर्स भी उपलब्ध हैं। कुछ कॉलेज बीए (इंश्योरेंस) कोर्स ऑफर कर रहे हैं, जिसकी अवधि तीन वर्ष है।
इंस्टीट्यूट
-आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी, हैदराबाद-द इंस्टीट्यूट ऑफ इंश्योरेंस ऐंड रिस्क मैनेजमेंट -नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर -दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली-सिंबायोसिस सेंटर ऑफ डिस्टेंस लर्निंग, पुणे

लॉ
10+2 के बाद लॉ की पढ़ाई शुरू की जा सकती है। कई यूनिवर्सिटीज और प्राइवेट कॉलेजों में पांच वर्षीय बीए एलएलबी कोर्स कराया जाता है। एंट्रेंस एग्जाम में बैठने के लिए 10+2 में कम से कम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए। देश के विभिन्न ‘नेशनल लॉ स्कूल्स’ में एडमिशन ‘कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट’ (सीएलएटी) के माध्यम से होता है। अन्य संस्थान लॉ कोर्सेज के लिए अलग-अलग एंट्रेंस एग्जाम्स आयोजित करते हैं। ‘कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट’ में आमतौर पर इंग्लिश, लॉजिकल रीजनिंग, लीगल रीजनिंग, मैथमेटिक्स और जनरल नॉलेज से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। इन दिनों लॉ के क्षेत्र से जुड़े लोगों की मार्केट में अच्छी डिमांड है। देश में अदालतें बेशक कम हों, लेकिन मुकदमों की तादाद लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसीलिए वकीलों की मांग भी बढ़ती जा रही है। देश का कानून इतना व्यापक है कि स्पेशलाइजेशन की जरूरत बढ़ जाती है। बिल्कुल मेडिकल फील्ड की तरह। आप अपनी रुचि के अनुसार, किसी विशेष क्षेत्र के कानून के विशेषज्ञ के रूप में पहचान बना सकते हैं। यह क्षेत्र एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ, कॉन्सटिट्यूशन लॉ, फैमिली लॉ, इंटरनेशनल लॉ, साइबर लॉ, लेबर लॉ, पेटेंट लॉ, एन्वायरन्मेंटल लॉ, टैक्स लॉ आदि में से कुछ भी हो सकता है। कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस के अलावा, केंद्र व राज्य सरकार की जॉब्स, टीचिंग, कॉरपोरेट कंपनियों में लीगल एडवाइजर के रूप में भी करियर बनाया जा सकता है। इन दिनों लीगल एक्सपर्ट की मांग न केवल भारत में, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी लगातार बढ़ रही है।
इंस्टीट्यूट 
-नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु-एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद-नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल-डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, लखनऊ- नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ, रांची

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी 
फोटोग्राफी संचार का एेसा एकमात्र माध्यम है, जिसमें भाषा की जरूरत नहीं होती। शायद ठीक ही कहा जाता है कि एक फोटो दस हजार शब्दों के बराबर होता है। फोटोग्राफी एक कला है, जिसमें विजुअल कमांड के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान भी जरूरी है और इस कला को वही समझ सकता है, जिसे मूक भाषा आती हो। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी एक एेसा ही फील्ड है, जहां एक तरफ जंगल का रोमांच है, तो वहीं दूसरी तरफ खतरे भी कम नहीं हैं। इसे करियर चुनने से पहले वाइल्ड लाइफ के नियम-कायदों की जानकारी होना भी बेहद जरूरी है, पर इससे भी ज्यादा जरूरी है क्रिएटिविटी। बारहवीं के बाद इस क्षेत्र में प्रवेश किया जा सकता है। फोटोग्राफी का कोर्स सरकारी और निजी स्तर पर कई संस्थान कराते हैं। एक अच्छा वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर बनने के लिए बेसिक फोटोग्राफी की जानकारी होना बेहद जरूरी है। हालांकि एक साधारण डिजिटल कैमरा लेकर शौकिया तौर पर शुरुआत की जा सकती है। एक-दो साल का अनुभव हो जाने के बाद डिजिटल एसएलआर खरीद कर प्रोफेशनल एंट्री की जा सकती है।
इंस्टीट्यूट
-इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर डेवलेपमेंट इन एजुकेशन एंड एडवांस्ड स्टडीज, अहमदाबाद-जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद-कॉलेज ऑफ आट्र्स, तिलक मार्ग, दिल्ली-एजेके मास कम्युनिकेशन सेंटर, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली

हिंदी
अब हिंदी केवस राजभाषा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह बना रही है। चाहे वह अध्यापन का कार्य हो या कॉल सेंटर्स, टूरिज्म और इंटरप्रेटर का, सभी में अवसर ही अवसर हैं। 12वीं के बाद आप हिंदी ऑनर्स कर सकते हैं।  हिंदी से बीए व बीएड करने के बाद स्कूलों में हिंदी अध्यापक की नौकरी मिल जाती है। कॉलेज के स्तर पर अध्यापन करने वाले छात्रों को एमए के बाद एमफिल और पीएचडी करने के बाद कॉलेज में प्रवक्ता का पद मिल जाता है। पीएचडी होल्डर कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर देश में कहीं भी लेक्चरर की नौकरी पा सकते हैं। अध्यापन के लंबे अनुभव पर वे रीडर व प्रोफेसर भी बन सकते हैं। हिंदी से स्नातक करने वालों के लिए मीडिया एक बड़ा अवसर लेकर आया है। फिल्म और टीवी सीरियल में भी आप अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। यदि आपको शब्दों से खेलने में मजा आता है, तो आपको यहां भी काम मिल सकता है और आपकी कल्पना उड़ान भरती है, तो स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर आप यहां कोशिश कर सकते हैं। हिंदी भाषा और साहित्य के छात्र लिंग्विस्टिक का भी कोर्स कर सकते हैं और अच्छी नौकरी पा सकते हैं। इसके साथ ही अगर हिंदी में अच्छी पकड़ है, तो क्रिकेट कमेंटरी से लेकर फैशन जगत व एड एजेंसी और एनजीओ में भी करियर बनाया जा सकता है।
इंस्टीट्यूट
-दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
-पटना यूनिवर्सिटी, पटना
-लखनऊ यूनिवर्सिटी, लखनऊ
-इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद

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