Thursday, March 31, 2022

पैरामेडिक्स इमरजेंसी एंड हेल्थकेय कोर्स

पूरी दुनिया कोविड-19 (COVID-19) के खिलाफ जंग लड़ रही है. इस लड़ाई में डॉक्टरों के साथ पैरामेडिक्स से जुड़े प्रोफेशनल्स भी फ्रंटलाइन पर हैं. पैरामेडिक्स इमरजेंसी एंड हेल्थकेयर से जुड़े प्रोफेशनल्स होते हैं. इनका काम किसी रोग की पहचान और हर तरीके से मरीज की देखभाल में डॉक्टरों की मदद करना होता है.

इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स डॉक्टर और नर्सों को इफेक्टिव मेडिकल केयर देने में मदद करते हैं. हेल्थकेयर सेक्टर में कई तरह के  पैरामेडिक्स कार्य करते हैं.इनमें इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियंस, लैब टेक्नीशियंस, रेडियोलॉजी टेक्नीशियंस, ऑप्टोमेट्रिस्ट्स, ईसीजी टेक्नीशियंस शामिल हैं. इन दिनों देश में पैरामेडिक्स से जुड़े ट्रेंड प्रोफेशनल्स की काफी डिमांड है. आइए जानते हैं कि इस फील्ड में करियर किस तरह बना सकते हैं-

कैसे बनें पैरामेडिक्स

भारत में पैरामेडिकल कॉलेजों द्वारा पैरामेडिकल साइंसेज के फील्ड में अलग-अलग तरह के कोर्स संचालित किए जाते हैं. ये कोर्स 6 महीने से लेकर 3 साल तक के होते हैं. वहीं कोर्स को पूरा करने में कितना समय लगेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन-सा कोर्स चुनते हैं. इन कॉलेजों में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, बैचलर, मास्टर डिग्री कोर्स तो हैं ही, साथ ही आप चाहें तो पीएचडी प्रोग्राम्स में भी एडमिशन ले सकते हैं.

प्रमुख डिप्लोमा कोर्स

 -डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन मेडिकल एक्स-रे टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन मेडिकल रिकॉर्ड्स टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन डायलेसिस टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन हेल्थ इंस्पेक्टर
 -डिप्लोमा इन डेंटल मैकेनिक्स
 -डिप्लोमा इन डेंटल हाइजिन

नौकरियों के अवसर

कोर्स को पूरा करने के बाद गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स, प्राइवेट क्लिनिक्स, ट्रॉमा सेंटर जैसी जगहों पर जॉब कर सकते हैं. यहां आप मेडिकल प्रोफेशनल्स  मेडिकल लैब टेक्नीशियंस, रेडियोग्राफी टेक्नीशियंस, रेडियोलॉजिस्टर, फिजियोथेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट और ऑडियोलॉजिस्ट्स, डायलिसिस थेरेपिस्ट्स, इमरजेंसी टेक्नीशियंस, इमरजेंसी केयर प्रैक्टिसनर्स, कार्डियक टेक्नीशियंस, रेसपिरेटरी थेरेपिस्ट जैसी पोस्ट पर काम कर सकते हैं. इसके साथ विदेश में भी इन प्रोफेशनल्स की काफी डिमांड होती है.  

क्वालिफिकेशन

किसी भी बोर्ड या यूनिवर्सिटी से साइंस स्ट्रीम ( फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) में 12वीं पास स्टूडेंट्स पैरामेडिक्स से जुड़े कोर्स में दाखिला ले सकते हैं

पर्सनल स्किल्स

-रोटेशनल शिफ्ट में काम करने की क्षमता.
-प्रेजेंस ऑफ माइंड, ताकि इमरजेंसी में सही डिसीजन ले सकें.
-फिजिकली फिट हों. घायल व्यक्ति के साथ उपचार से संबंधित उचित प्रीकॉशन ले सकें.
-पैरा-मेडिसिन फील्ड में काम किया हो और मेडिकल इक्विपमेंट की मेंटेनेंस  की अच्छी समझ हो. साथ ही इमरजेंसी व्हीकल के ऑपरेशन की भी अच्छी समझ होना जरूरी है.
-बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स का होना भी जरूरी है.

सैलरी पैकेज

पैरामेडिक्स फील्ड में सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस ऑर्गनाइजेशन से जुड़े हैं. साथ ही सैलरी आपकी स्किल्स और अनुभव पर भी निर्भर करती है. शुरुआत में सैलरी 3 लाख से 5 लाख रुपए प्रति वर्ष तक होगी, जो एक्सीपीरियंस और आपकी स्किल्स के हिसाब से बढ़ती जाती है.

ऑल इंडिया इंस्टीस्ट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स)
www.aiims.edu
-इग्नू.-इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी
www.ignou.ac.in
-राजीव गांधी पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट
www.rgpcindia.com
-दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट
www.dpmiindia.com
-मौलाना इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज
www.moulanahospital.com

Sunday, March 27, 2022

ऑप्टोमेट्रिस्ट मेंकरियर

क्वालीफिकेशन 
इस कोर्स के लिए न्यूनतम क्वालीफिकेशन है साइंस स्ट्रीम से 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास होना। फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलाजी/ मैथ्स से 12वीं पास स्टूडैंट्स ऑप्टोमेट्री से रिलेटेड कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। ऑप्टोमेट्री में बैचलर डिग्री, बी.एससी. या फिर डिप्लोमा कोर्स के लिए रास्ते खुल जाते हैं। डिप्लोमा कोर्स की अवधि है दो वर्ष और बैचलर डिग्री कोर्स चार वर्ष का होता है। बैचलर डिग्री में तीन साल की पढ़ाई और एक साल की इंटर्नशिप होती है। इंटर्नशिप के तहत स्टूडैंट्स को किसी क्लीनिक या अस्पताल में आंख के डॉक्टर के अधीन काम करना होता है। इसमें एडमिशन आई.सी.ई.टी. एग्जाम में पास होने के बाद ही होता है। आमतौर पर इस कोर्स में आंखों की देखभाल से संबंधित विषयों को पढ़ाया जाता है। साथ ही कस्टमर को किस तरह का चश्मा पहनना है, कॉन्टैक्ट लैंस, लो-विजन डिवाइसेज एवं विजन थैरेपी, आई एक्सरसाइज आदि की ट्रेनिंग दी जाती है।

कार्यक्षेत्र
ऑप्टोमेट्रिस्ट या ऑप्टोमेट्रिक फिजीशियन आंखों की देखभाल और आंखों की जांच में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के रख-रखाव आदि के विशेषज्ञ होते हैं। सर्जरी और दूसरी बड़ी जिम्मेदारी वाले काम उनके जिम्मे नहीं होते हैं। वे सभी उपचार ऑप्टिकल उपकरणों से करते हैं। इसके अलावा वे कलर ब्लाइंडनैस, दूर और नजदीक की कम रोशनी, मायोपिया, जैनेटिक प्रॉब्लम्स का इलाज भी करते हैं। उनका कार्य आंखों की जांच कर चश्मा या लैंस देना तो है ही, साथ ही उन्हें खुद बनाते भी हैं।

 

अवसर
कोर्स कम्प्लीट करने के बाद ऑप्टोमेट्रिस्ट के पास जॉब ऑप्शंस की कोई कमी नहीं है। कोर्स करने के बाद स्टूडैंट्स स्वयं की प्रैक्टिस कर सकते हैं, जैसे आई सर्जन करते हैं। ऑप्थोमोलिस्ट के रूप में किसी शोरूम में काम कर सकते हैं या फिर आंखों के हॉस्पिटल में कार्य की तलाश कर सकते हैं। इसके अलावा, उनके पास ऑप्टिकल लैंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट आदि खोलने का भी ऑप्शन होता है। इस फील्ड से जुड़े प्रोफैशनल्स कॉन्टैक्ट लैंस, लैंस इंडस्ट्री या फिर आई डिपार्टमैंट में काम कर सकते हैं।  कार्पोरेट सैक्टर में आंखों से संबंधित प्रोडक्ट्स बनाने वाली कम्पनी में प्रोफैशनल्स सर्विस एग्जीक्यूटिव के पद पर काम कर सकते हैं। गौरतलब है कि आंखों के डॉक्टरों को ट्रेंड असिस्टैंट की बहुत जरूरत पड़ती है जो कुशल तरीके से चश्मा, लैंस और दूसरे नेत्र उपकरण बना सकें। इसके अलावा, आंखों के उपचार में आने वाली चीजों का रख-रखाव भी जरूरी होता है। सरकारी नियमों के अनुसार, ऑप्टिकल दुकानों में भी ट्रेंड ऑप्टीशियन को ही रखने का प्रावधान है इसलिए वहां भी ऑप्टोमेट्रिस्ट के लिए अवसर होता है। इस तरह देखा जाए तो आने वाले दिनों में इस फील्ड में भरपूर नौकरियां होंगी।

पारिश्रमिक
अगर आप किसी अच्छे इंस्टीच्यूट से कोर्स करते हैं तो शुरूआती दौर में आप 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह सैलरी की उम्मीद कर सकते हैं। कुछ वर्ष का वर्क एक्सपीरियंस हासिल कर लेते हैं तो सैलरी अच्छी हो सकती है। इसके अलावा आपके पास अपना कार्य शुरू करने का भी अवसर होता है। 

 

प्रमुख संस्थान
ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ मैडीकल साइंसेज, नई दिल्ली

दिल्ली पैरामैडीकल एंड मैनेजमैंट इंस्टीच्यूट, नई दिल्ली

गांधी आई हॉस्पिटल, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश 

बी.आर.डी. मैडीकल कॉलेज, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

इंदिरा गांधी मैडीकल कॉलेज, शिमला, हिमाचल प्रदेश

Tuesday, March 22, 2022

फिजियोथेरेपी में बनाएं करियर

आज के समय में पैरा मेडिकल फील्ड काफी बढ़ रहा है। यही वजह है कि फिजियोथेरेपी में करियर ही काफी संभावनाएं हैं। आज कई बीमारियों के इलाज के लिए फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी सबसे खास बात है कि इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। फिजियोथेरेपी चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा जिसकी मदद से शरीर के बाहरी हिस्से का इलाज किया जाता है। इसके माध्यम से कई स्तरों में इलाज किया जाता हैं।

कोर्स :

फिजियोथेरेपी में आप डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई कर सकते हैं। बैचलर कोर्स का समय लगभग साढ़े चार साल का होता है। आखिरी के छह महीने में इस कोर्स के दौरान इंटर्नशिप करवायी जाती है। वहीं मास्टर्स कोर्स दो साल का होता है और इसके लिए आपको फिजियोथेरेपी में बैचलर्स की डिग्री होना आवश्यक है। आप न्यूरोलॉजिकल फिजियोथेरेपी, पिडियाट्रिक फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी, ऑर्थेपेडिक फिजियोथेरेपी, ऑब्सेक्ट्रिक्स फिजियोथेरेपी, पोस्ट ऑपरेटिव फिजियोथेरेपी, कार्डियोवस्कुलर फिजियोथेरेपी में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। 

जरूरी स्किल्स :

  • बेहतर कम्यूनिकेशन स्किल 
  • समस्या समाधान स्किल
  • सहनशक्ति और जूझरू व्यक्तित्व
  • आत्मविश्वास और सेल्फ मोटिवेटड

कोर्स फीस :

फिजियोथेरेपी बोर्ड की फीस लगभग 30 हजार से लेकर अलग-अलग यूनिवर्सिटियों के नियम अनुसार अलग-अलग है। कई यूनिवर्सिटियां छात्रवृत्ति भी प्रदान करती हैं।

सैलरी :

शुरुआत में आपको 10 से 15 हजार रुपये महीने सैलरी के रूप में मिल सकती हैं। धीरे-धीरे अनुभव के बाद इस क्षेत्र में पैसे भी ज्यादा मिलने लगते हैं। कई जगहों पर इंटर्नशिप के दौरान भी पैसे मिलते हैं और बाद में वह छात्र को अपने यहां नौकरी पर रख भी लेते हैं। अनुभव होने के बाद आप अपना खुद का क्लीनिक भी खोल सकते हैं या किसी बड़े हॉस्पिटल में फिजियोथेरिपिस्ट के तौर पर काम कर सकते हैं।

एडमिशन के लिए योग्यता :

बैचलर कोर्स में दाखिले के लिए आपको इंटर (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) 50 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण होना जरूरी है। वहीं मास्टर्स में आपके पास फिजियोथेरेपी में बैचलर्स की डिग्री का होना जरूरी है। 

एंट्रेंस एग्जाम :

फिजियोथेरेपी कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले एंट्रेंस एग्जाम से गुजरना होगा। अलग-अलग यूनिवर्सिटियां अलग-अलग समय अपने अपने एंट्रेस एग्जाम का आयोजन करती हैं। इसके लिए मार्च से लेकर जून महीने तक में फॉर्म आते हैं। इसके बाद एंट्रेंस एग्जाम में आए नंबर के आधार पर दाखिला दिया जाता है। ज्यादा जानकारी के लिए आप दिए गए कॉलेजों की वेबसाइट पर देख सकते हैं।

फिजियोथेरेपी कॉलेज :

  • अपोलो फिजियोथेरेपी कॉलेज, हैदराबाद 
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंस्टिट्यूट फॉर फिजिकली हैंडिकैप्ड, नई दिल्ली  
  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च, पटना 
  • पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ 
  • एसडीएम कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, कर्नाटक 
  • महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एजुकेशन, केरल 
  • के.जे. सौम्या कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, मुंबई 
  • डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन, तमिलनाडु 
  • जे.एस.एस. कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, मैसूर

Saturday, March 19, 2022

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स

Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स 3 साल और 6 महीने का डिप्लोमा स्तर का कार्यक्रम है जो आयुर्वेदिक नर्सिंग देखभाल में व्यापक ज्ञान और कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है। इसमें 3 साल पढ़ाई और 6 महीने का इंटर्नशिप होता है इस कोर्स में पाठ्यक्रम आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों और व्यापक आयुर्वेदिक उपचार उपचार से संबंधित है। पाठ्यक्रम आयुर्वेदिक दवा और समग्र उपचार तकनीक के सिद्धांतों को उनके कल्याण और स्वास्थ्य देखभाल अभ्यास में शामिल करने के इच्छुक छात्रों के लिए है।

अगर आप कोई ऐसी नौकरी करना चाहते हैं,जिसमें आपको अच्छी सैलरी के साथ-साथ मान सम्मान भी प्राप्त हो, तो आप नर्सिंग का कोर्स कर सकते हैं। नर्सिंग के कोर्स में विभिन्न प्रकार की ब्रांच होती है, जिनमें से आप अपनी पसंद की ब्रांच में कोर्स कर सकते हैं और नर्सिंग की फील्ड में अपना अच्छा कैरियर बना सकते हैं। नर्सिंग की फील्ड में आपको लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल करनी पड़ती है, जिसमें बीमार या फिर एक्सीडेंट में घायल हुए मरीजों की देखभाल करना शामिल होता है। हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में नर्सिंग का कोर्स किए हुए व्यक्तियों की हमेशा डिमांड बनी रहती है।

Diploma in Ayurvedic Nursing Important Point

Diploma in Ayurvedic Nursing एक उन्नत कार्यक्रम है जो प्राकृतिक उपचार के इस प्राचीन रूप के पीछे सिद्धांतों, अवधारणाओं और विचारों को शामिल करता है। यह Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स सिर्फ में केवल आयुर्वेदिक पेशेवरों को तैयार करता है जो लोगों को आयुर्वेदिक तरीको से प्रदान की जाने वाली देखभाल के साथ एक स्वस्थ, संतुलित जीवन जीने में सीखने में मदद कर सकते हैं।

Duration3 years 6 Month Internship
Eligibility10+2 Science with Biology
Age limit17 to 25 year
Annual FeeApprox 50,000/-
Semester FeeApprox 27,000/-

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स कैसे करें?

अगर आप नर्सिंग का कोर्स करना चाहते हैं तो आप डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स कर सकते हैं और हॉस्पिटल अथवा स्वास्थ्य से संबंधित फील्ड में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं।आपकी इंफॉर्मेशन के लिए बता दें कि अस्पताल के सभी डिपार्टमेंट नर्सिंग में शामिल होते हैं।

नर्सिंग सिर्फ टेक्निकल इंफॉर्मेशन ही नहीं बल्कि यह पीड़ित रोगियों के लिए पॉजिटिव वातावरण बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर आपको डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स करना है, तो आपको यह पता होना चाहिए कि, Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स कैसे करते हैं? इस आर्टिकल में आपको इसी बात की जानकारी प्राप्त होने वाली है।

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स क्या है?

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स कुल 3 साल और 6 महीने का एक डिप्लोमा लेवल का कोर्स होता है। इस कोर्स का सिलेबस आयुर्वेद के मूल सिद्धांत और आयुर्वेद की ट्रीटमेंट से जुड़ा होता है। जैसा कि आप जानते हैं कि वर्तमान के समय में आयुर्वेद नर्स की डिमांड काफी तेजी से बढ़ रही है।

आयुर्वेदिक हॉस्पिटल और आयुर्वेदिक क्लिनिकल सेंटर की बढ़ती हुई संख्या के कारण रोगी लोगों को अच्छी और प्रोफेशनल ट्रीटमेंट प्रदान करने के लिए अनुभवी नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता होती है, इसीलिए यह एक अच्छा कैरियर ऑप्शन साबित हो सकता है,क्योंकि इसमें प्राइवेट और गवर्नमेंट दोनों ही फील्ड में काफी शानदार कैरियर है।

Diploma in Ayurvedic Nursing क्वालिफिकेशन

अगर डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालीफिकेशन के बारे में बात करें तो इंडिया के किसी भी सर्टिसाइड स्कूल से जिन विद्यार्थियों ने कम से कम 40 परसेंट अंकों के साथ बारहवीं की एग्जाम को केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स जैसे सब्जेक्ट के साथ पास किया है, वह इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स करने के लिए उम्र सीमा क्या है?

इंडिया के लगभग तमाम राज्यों में इस कोर्स को अलग-अलग इंस्टीट्यूट के द्वारा करवाया जाता है। इसीलिए हर राज्य में इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए भिन्न भिन्न। age लिमिट तय की गई है। सामान्य तौर पर इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए कम से कम उम्र 17 साल और अधिक से अधिक उम्र 25 साल तक तय होती है।

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स में जॉब की संभावनाएं।

जो भी अभ्यर्थी डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स पूरा कर लेते हैं, उनके पास निम्न जॉब अपॉर्चुनिटी होती है।

  • आयुर्वेदिक नर्स
  • आयुर्वेदा हीलर
  • हेल्थ केयर एडमिनिस्ट्रेटर
  • आयुर्वेदा ड्रगिस्ट
  • आयुर्वेदा टूर ऑपरेटर
  • आयुर्वेदिक हेल्थ सुपरवाइजर
  • आयुर्वैदिक हर्ब प्रोड्यूजिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन •आयुर्वेदिक फार्मिंग
  • आयुर्वेद मेडिकल मैन
  • आयुर्वेदिक डायटिशियन

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स की फीस कितनी है?

हमने आपको पहले भी यह बात बताई है कि हर राज्य में अलग-अलग इंस्टिट्यूट के द्वारा इस कोर्स को करवाया जाता है, इसीलिए यह निश्चित तौर पर तो नहीं कहा जा सकता है कि कौन से इंस्टिट्यूट के द्वारा इस कोर्स के लिए कितनी फीस तय की गई है, परंतु यह बात तो तय है कि गवर्नमेंट कॉलेज की तुलना में प्राइवेट कॉलेज में इस कोर्स की फीस ज्यादा होती है।अगर हम सरकारी कॉलेज में इस कोर्स की फीस के बारे में बात करें, तो इसकी सालाना फीस तकरीबन ₹25000 से लेकर ₹28000 के आसपास तक होती है, वहीं प्राइवेट कॉलेज में Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स की फीस सालाना तौर पर तकरीबन ₹35,000 से लेकर ₹48,000 के आसपास होती है।

Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स में एडमिशन के लिए कौन से डॉक्यूमेंट लगेंगे?

किसी भी प्रकार के कोर्स में एडमिशन लेने के लिए जब आप ऑनलाइन फॉर्म भरते हैं, तो आपको कुछ डॉक्यूमेंट भी ऑनलाइन फॉर्म भरते समय पेश करने पड़ते हैं अथवा फॉर्म भरने के बाद आपको कुछ डॉक्यूमेंट पेश करने पड़ते हैं।डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स में एडमिशन लेने के लिए भी आपको कुछ डॉक्यूमेंट की आवश्यकता पड़ेगी।

  • बारहवीं कक्षा पास की मार्कशीट
  • डेट ऑफ बर्थ का प्रूफ
  • स्कूल का लिविंग सर्टिफिकेट
  • ट्रांसफर सर्टिफिकेट
  • कैरेक्टर सर्टिफिकेट
  • माइग्रेशन सर्टिफिकेट
  • डोमिसाइल सर्टिफिकेट
  • रेजिडेंशियल प्रूफ
  • प्रोविजनल सर्टिफिकेट
  • आरक्षण का सर्टिफिकेट

जब किसी कॉलेज के द्वारा डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग के कोर्स में एडमिशन के लिए नोटिफिकेशन जारी की जाती है,तो उस नोटिफिकेशन में यह भी बताया जाता है कि इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए कौन से डॉक्यूमेंट लगेंगे। ऐसे में आपको उस नोटिफिकेशन में जो भी डॉक्यूमेंट बताए हैं,उसे अवश्य तैयार कर लेना चाहिए, ताकि आपको एडमिशन लेते समय किसी भी प्रकार की प्रॉब्लम का सामना ना करना पड़े।

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स करने के बाद नौकरी कहां मिलेगी?

जब महिला अथवा पुरुष अभ्यर्थी डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स कंप्लीट कर लेंगे, तो उसके बाद उन्हें आयुर्वेदिक हॉस्पिटल, मेडिकल की दुकान, फार्मास्यूटिकल कंपनी, मेडिकल यूनिवर्सिटी,  ब्लड बैंक, मेडिकल इक्विपमेंट सेल्स कंपनी, पब्लिक हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, आयुर्वेदिक क्लीनिक में आसानी से नौकरी प्राप्त हो जाएगी।

इसके साथ ही अगर किसी व्यक्ति के पास इन्वेस्टमेंट करने के लिए पैसे हैं,तो वह अपना खुद का आयुर्वेदिक क्लीनिक खोल सकता है और उसके द्वारा भी पैसे कमा सकता है।इसके अलावा व्यक्ति चाहे तो अपना खुद का आयुर्वेदिक मेडिकल भी खोल सकता है और उसके द्वारा भी पैसे कमा सकता है।

Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स बेस्ट कॉलेज

  • दिल्ली डिग्री कॉलेज,हरियाणा
  • भारत इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल टेक्नोलॉजी,नई दिल्ली
  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वैदिक फार्मास्यूटिकल साइंस, गुजरात
  • देश भगत आयुर्वैदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल,पंजाब
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंस एंड रिसर्च, दिल्ली
  • संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, पंजाब
  • श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड पैरामेडिकल साइंस, हरियाणा
  • पंजाब पैरामेडिकल साइंस, पंजाब
  • प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, झारखंड
  • इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एजुकेशन एंड रिसर्च, राजस्थान
  • डीएस इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, उत्तर प्रदेश
  • उत्तरांचल युनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, उत्तराखंड

Diploma in Ayurvedic Nursing Syllabus

इंडिया में अधिकतर यूनिवर्सिटी के द्वारा डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग के कोर्स में नीचे दिए गए विषयों का अध्ययन करवाया जाता है।

इंट्रोडक्शन टू आयुर्वेदाइंट्रोडक्शन टू संस्कृत
रस शास्त्रप्राथमिक चिकित्सा
फार्मास्यूटिकल बायोलॉजीफार्मास्यूटिकल एनालिसिस
फार्मास्यूटिकल केमेस्ट्रीद्रब्यागुना विजीनानम
टॉक्सिकोलॉजीपैथॉफिजियोलॉजी
फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंगफार्मोकोलॉजी
फिजिकल फार्मेसीशरीर क्रिया विज्ञान
इंडस्ट्रियल फार्मेसीBhaishajya Kalpana

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग में क्या पढ़ाया जाता है?

Diploma in Ayurvedic Nursing के कोर्स में अभ्यर्थियों को आयुर्वेदिक मेडिसिन के बारे में विस्तार से बताया तथा पढ़ाया जाता है। डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग के कोर्स में अभ्यर्थी आयुर्वेदिक दवाइयों की केमिकल प्रॉपर्टी,उनके कंपोजिशन के बारे में जानकारी हासिल करते हैं, साथ ही यह भी जानते हैं कि कौन सी दवाई कितने अमाउंट में पेशेंट को देनी चाहिए। इस कोर्स में विद्यार्थियों को थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों करवाया जाता है।

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स में एडमिशन पाने की प्रक्रिया क्या है?

जो भी अभ्यर्थी इस कोर्स में एडमिशन पाना चाहते हैं उन्हें इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए मिनिमम क्वालीफिकेशन को पूरा करना पड़ेगा, जो की 12वीं कक्षा को साइंस के विषयों के साथ पास होना है।अधिकतर कॉलेज इस कोर्स में एडमिशन मेरिट लिस्ट के बेस के आधार पर ही देते हैं। इसके अलावा कुछ कॉलेज ऐसे होते हैं, जो खुद की एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन करते हैं और जो अभ्यर्थी एंट्रेंस एग्जाम को पास करते हैं, उन्हें ही इस कोर्स में एडमिशन देते हैं।

Friday, March 11, 2022

मेडिकल लैबरेटरी टेक्निशन करियर

मेडिकल लैब टेस्ट से डॉक्टर्स को बीमारियों का पता लगाने से लेकर के उसके उपचार के तरीके में मदद मिलती है। माइक्रो आर्गेनिज्म स्क्रीनिंग, सेल काउंटिंग आदि की जानकारी भी मेडिकल लैब टेक्नॉलजी से ही मिलती है। सैंपलिंग, टेस्टिंग, रिपोर्टिंग, इन्वेस्टिगेशन में इनकी अहम भूमिका होती है।

मेडिकल लैबरेटरी टेक्निशन (Medical laboratory technician), डाक्टरों के निर्देश पर काम करते हैं। मशींस के रख-रखाव से लेकर लैबरेटरी में नमूनों की जांच और विश्लेषण में काम आने वाला घोल भी लैब टेक्निशन ही बनाते हैं। इन्हें मेडिकल साइंस के साथ-साथ लैब सुरक्षा नियमों और जरूरतों के बारे में पूरी जानकारी होती है। लैब टेक्निशन नमूनों की जांच का काम करते हैं। जांच के दौरान एमएलटी (Medical laboratory technician) कुछ सैंपलों को आगे की जांच या फिर जरूरत के अनुसार उन्हें सुरक्षित भी रख लेता है।
कोर्स एवं योग्यता
सर्टिफिकेट इन मेडिकल लैब टेक्नॉलीजी (सीएमएलटी) यह छह महीने का कोर्स है जिसके लिए योग्यता है 10वीं पास। वहीं डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नॉलजी के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। बीएससी इन एमएलटी के लिए 12वीं विज्ञान विषयों यानी फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायॉलजी के साथ पास होना जरूरी है। कोर्स की अवधि है तीन वर्ष। एमएससी इन मेडिकल लैबरेटरी टेक्नॉलजिस्ट (एमएलटी-Medical laboratory technician) प्रोग्राम में प्रवेश करने के लिए अभ्यर्थी के पास पहले हाई स्कूल डिप्लोमा होना चाहिए। इसके बाद दो साल का एसोसिएट प्रोग्राम करना होता है। यह प्रोग्राम कम्यूनिटी कॉलेज, टेक्निक्ल स्कूल, वकेशनल स्कूल या यूनिवर्सिटी द्वारा कराया जाता है।

अवसर
ज्यादातर प्रांतों में क्लिक लैबरेटरी टेक्निशन के लिए कोई प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होती लेकिन कुछ राज्यों में इन टेक्निशन के पास काम करने के लिए प्रमाण पत्र होना जरूरी है। प्रमाण पत्र वाले तकनीशनों के लिए इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं होती हैं। आप किसी भी मेडिकल लैबरेटरी, हॉस्पिटल, पैथोलॉजिस्ट के साथ काम कर सकते हैं। ब्लड बैंक में इनकी खासी डिमांड रहती है। आप बतौर रिसर्चर व कंसल्टेंट के अलावा खुद का क्लिनिक खोल सकते हैं।

आमदनी
सामान्य तौर पर एक एमएलटी (Medical laboratory technician) का वेतन दस हजार से शुरू होता है जबकि पैथोलॉजिस्ट को तीस हजार से चालीस हजार तक सैलरी मिल जाती है। साथ ही योग्यता और तजुर्बे के आधार पर उनके वेतन में इजाफा होता चला जाता है। देष के साथ साथ विदेशों में भी इनकी खासी डिमांड है।

Monday, March 7, 2022

आज के दौर में टेक्नोलॉजी बहुत आगे बढ़ चुकी, लगभग हर क्षेत्र में मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मेडिकल भी एक ऐसा ही क्षेत्र है जिसमें बहुत सी आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल रोगों के बारे में पता करने के लिए हो रहा है। वैसे तो सबसे बढ़िया मेडिकल कोर्स एमबीबीएस माना जाता है लेकिन अगर आप बिना एमबीबीएस किए बिना मेडिकल सेक्टर में जाना चाहते हैं तो आप किसी पैरामेडिकल कोर्स को कर सकते हैं। जिसमे MRI टेक्निशियन कोर्स भी अच्छा माना जाता है.

जब भी आप किसी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में जाते हैं तो कभी ना कभी आपने MRI कराया होगा, MRI का फुल फॉर्म मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग होता है और जब भी आप इस टेस्ट को करवाते हैं तो इसके बाद आपको एक रिपोर्ट दी जाती है। इस रिपोर्ट की मदद से ही डॉक्टर आपका सही से उपचार कर पाते हैं।

यदि आप यह जानने में रुचि रखते हैं कि MRI डेली टेक्नीशियन कोर्स कैसे किया जाता है तो इस आर्टिकल में बने रहे, इस आर्टिकल में आपको इस कोर्स के बारे में सभी जरूरी जानकारी दी जाएगी।

MRI टेक्निशियन कोर्स क्या होता है?

MRI टेक्निशियन एक ऐसा कोर्स होता है जिसके बाद आप किसी भी निजी या सरकारी अस्पताल के साथ-साथ कुछ अन्य जगहों पर MRI टेक्निशियन का काम कर सकते हैं।

इस कोर्स में आपको रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दी जाती है। अगर आप एक MRI टेक्नीशियन बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपके पास नीचे दिए हुए कोर्सों के विकल्प होंगे और इनमें से किसी भी कोर्स को करने के बाद आप एक MRI टेक्निशियन बन जाएंगे –

  • बैचलर ऑफ रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी
  • डिप्लोमा इन रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी
Course Diploma in MRI Technician
Duration 1 Year 
Eligibility 10+2 Pass with 10+2 Pass with PCB/PCM
Employment Sectors diagnostic labs, medical imaging labs, radiography centres and hospitals or clinics etc. 
Job Profiles MRI technicians 

MRI टेक्निशियन का क्या काम होता है?

एमआरआई टेक्निशियन किसी बीमारी का कारण पता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, एक MRI टेक्निशियन MRI मशीन के साथ साथ और भी अन्य मशीनों को चला सकता है और इन मशीनों के द्वारा मरीजों का टेस्ट किया जाता है। MRI टेक्निशियन कोर्स करने के बाद आप निम्नलिखित पदों पर काम कर सकते हैं

  • रेडियोलॉजी टेक्निशियन
  • MRI टेक्निशियन
  • रेडियोलॉजी नर्स
  • अल्ट्रासाउंड टेक्नीशियन
  • सीटी स्कैन टेक्निशियन

रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट को मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के साथ काम करना पड़ता है जो स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डायग्नाॅस्टिक इमेजेस को विकसित करने में मदद करता है। रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में, आपको मस्तिष्क या किसी भी मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं में इमेज के प्रोडक्शन में मदद करनी होगी। या खेल की चोटों से संबंधित मुद्दों, आदि में।

MRI Technician Qualification 

अगर आप हमारे टेक्नीशियन का कोर्स करना चाहते हैं तो इसके लिए आपने कम से कम 12वीं पास किया होना चाहिए और इसी के साथ आपने विज्ञान वर्ग से 12वीं पास किया होना चाहिए। अगर आप डिप्लोमा कोर्स करना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको 12वीं कक्षा विज्ञान वर्ग (साइंस स्ट्रीम) के साथ पास करनी होगी

भारत में कुछ कॉलेज ऐसे भी हैं जहां आप दसवीं के बाद भी डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं हालांकि अगर आप बैचलर ऑफ रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी का कोर्स करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको आपकी दसवीं परीक्षा में कम से कम 50% अंक होने चाहिए।

MRI टेक्निशियन कोर्स करने के लिए उम्र सीमा क्या है?

एमआरआई टेक्निशियन बनने के लिए आप डिप्लोमा डिग्री कोर्स कर सकते हैं और इन दोनों ही कोर्स को करने के लिए आपकी एज कम से कम 17 वर्ष होनी चाहिए, 17 वर्ष की आयु से अधिक जो भी व्यक्ति इस कोर्स को करना चाहता है, वह इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकता है।

MRI Technician Salery 

अगर आप MRI टेक्निशियन कोर्स के बाद अच्छी सैलरी पाना चाहते हैं तो आपको किसी अच्छे हॉस्पिटल या फिर किसी अच्छे मेडिकल सेंटर में नौकरी के लिए अप्लाई करना होगा। MRI टेक्निशियन कोर्स करने के बाद अगर आप किसी अच्छी जगह पर नौकरी करते हैं तो शुरुआत में आपकी मासिक सैलरी 25,000 तक हो सकती है, इसी के साथ जैसे-जैसे आपका एक्सपीरियंस पड़ेगा तो आपकी सैलरी भी बढ़ाई जा सकती है।

MRI टेक्निशियन कोर्स के लिए टॉप कॉलेज कौन से है?

MRI टेक्निशियन कोर्स 1 बेहतरीन कोर्स है, जिसको करने के बाद आप अच्छी नौकरी पा सकते हैं, हालांकि जब भी आप इस कोर्स को करें तो कॉलेज के बारे में जरूरी जानकारी इकट्ठा कर ले। ज्यादातर लोग इस कोर्स को किसी अच्छे कॉलेज से करना चाहते हैं लेकिन उन्हें इस कोर्स के लिए टॉप Colleges के बारे में जानकारी नहीं होती, नीचे कुछ कॉलेजों की लिस्ट दी गई है जो कि MRI टेक्निशियन कोर्स के लिए टॉप के लिए मुख्य कॉलेज हैं –

  • Tripura Institute Of Paramedical Sciences, Agartala
  • Mahatma Gandhi University, Kottayam
  • Postgraduate Institute of Medical Sciences, Chandigarh
  • University College of Medical Science and GTB Hospital, Shahadra, Delhi
  • Christian Medical College, Vellore
  • Rajiv Gandhi University of Health Sciences, Bangalore

MRI टेक्निशियन कोर्स कैसे करें?

अगर आप एक MRI Technician बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको यह कोर्स करना होगा लेकिन अक्सर लोग इस कोर्स को करने की प्रक्रिया अच्छे से समझ नहीं पाते हैं। नीचे इस कोर्स को करने से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया के बारे में बताया गया है।

#1. साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास करना है जरूरी।

अगर आप सच में MRI टेक्नीशियन कोर्स करने के इच्छुक हैं तो इसके लिए सबसे पहले आपको विज्ञान वर्ग से 12वीं पास करनी होगी। आपको 12वीं की परीक्षा में अच्छे अंक लाने होंगे और अगर आप 50% से अधिक अंक लाते हैं तो आप इस कोर्स को कर पाएंगे।

#2. एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करें।

भारत में बहुत से ऐसे कॉलेज हैं जिनमें एंट्रेंस एग्जाम के जरिए MRI टेक्निशियन कोर्स में एडमिशन दिया जाता है, अगर आप इस कोर्स को करके अच्छी सैलरी पाना चाहते हैं तो आपको एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी हेतु किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन लेना होगा, इसके अलावा आप किसी कॉलेज में डायरेक्ट एडमिशन भी ले पाएंगे।

#3. कॉलेज से संपर्क में रहें।

अगर आप एंट्रेंस एग्जाम दे चुके हैं या फिर किसी कॉलेज में डायरेक्ट एडमिशन लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कॉलेज के संपर्क में रहना होगा, कॉलेज के संपर्क में रहकर आप मेरिट लिस्ट के बारे में जान पाएंगे और इससे आप को एंट्रेंस एग्जाम के जरिए उस कॉलेज में एडमिशन लेने में आसानी होगी।

#3. MRI Technician कोर्स में एडमिशन लें।

इसके बाद आपको किसी गवर्नमेंट या प्राइवेट कॉलेज में MRI Technician कोर्स में एडमिशन लेना होगा, एडमिशन लेने के बाद आपके कोर्स के अनुसार आपको रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी के बारे में पढ़ाया जाएगा। पढ़ाई के दौरान आपको हर सेमेस्टर में होने वाले एग्जाम में अच्छे अंक लाने होंगे।

#4. MRI Technician डिग्री प्राप्त करें।

अगर आपके MRI Technician कोर्स की अवधि पूरी हो चुकी है तो आप अपने कॉलेज या यूनिवर्सिटी से डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। इस कोर्स को पूरा करने के बाद डिग्र सर्टिफिकेट लेना बहुत जरूरी होता है, इस डिग्री या सर्टिफिकेट की मदद से ही आपको नौकरी दी जाएगी।

Saturday, March 5, 2022

डिप्लोमा इन कार्डियोलाजी टेक्नीशियन

मेडिकल फील्ड में करियर बनाने के लिए वैसे तो कई ऑप्शन हैं, उन्हीं में से एक है कार्डिएक केयर टेक्निशन। ये एक मेडिकल प्रफेशनल्स की तरह काम करते हैं जो बीमारी का पता लगाने के लिए मरीजों का टेस्ट्स करते हैं और इलाज खोजन में डॉक्टरों की मदद करते हैं। ये एक तरह से यह विशेषज्ञों के आंख और हाथ होते हैं।

हॉस्पिटल में बतौर टेक्निशन काम करने के लिए कुछ प्रैक्टिकल स्किल्स का होना बेहद जरूरी है क्योंकि यह ऑपरेशन के समय डॉक्टर के दाएं हाथ की तरह काम करता है। इसलिए सभी परिस्थितियों से निपटने और मशीनों की जानकारी रखना इनके लिए भी जरूरी होता है, जैसे मॉनिटर और रिकॉर्डर में तार जोड़ने के बारे में ज्ञान और बेहतर कनेक्शन सुनिश्चित करने के लिए रीदम स्ट्रीप या लीड ट्रेसिंग रिकॉर्ड करने का ज्ञान, ईसीजी वेवफॉर्म की पहचान करना, आर्टफैक्ट फ्री-ट्रेसिंग और सही लीड लगाने जैसी क्षमता होनी चाहिए।
जरूरी योग्यता
इस फील्ड में कोर्स करने के लिए कैंडिडेट का किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से 12वीं में साइंस से पास होना जरूरी है। इसके अलावा कई कॉलेज इस फील्ड में सर्टिफिकेट कोर्सेज भी उपलब्ध करते हैं, जिसे मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास कैंडिडेट भी करके करियर बना सकता है। अगर कैंडिडेट इस फील्ड में निपुणता हासिल करना चाहता है तो वह 12वीं के बाद बैचलर ऑफ साइंस इन कार्डियक केयर टेक्नॉलजी भी कर सकता है। 

सैलरी कितनी
पैरामेडिकल की बढ़ती मांग को देखते हुए देश में ही नही बल्कि विदेशों से भी पैरामेडिक्स की डिमांड आ रही है। देश भर में सरकारी के अलावा प्राइवेट अस्पतालों की बढ़ती कतारों से जॉब की कोई कमी नहीं दिखती। जहां तक वेतन की बात है तो शुरुआती तौर पर एक कार्डिएक केयर टेक्निशन, मासिक 20 से 30 हज़ार रुपये तक कमा सकता है और अनुभव के आधार पर इसमें बढ़ोतरी होती जाती है। इसके अलावा कैंडिडेट सरकारी अस्पतालों में भी परीक्षा देकर आसानी से नौकरी पा सकता है। 

संस्थान
 दिल्ली पैरामेडिकल ऐंड मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली
www.dpmiindia.com 

 क्रैडल इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली
www.cmi-hm.com
महर्शि मर्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी, अम्बाला, हरियाणा
www.mmumullana.org

 शिवालिक इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल टेक्नॉलजी, चंडीगढ़
www.shivalikinstitute.org
(संस्थानों के नाम सिर्फ संकेत के लिए )

Wednesday, March 2, 2022

रेडियोलॉजी टैक्नीशियन

मैडीकल का दायरा सिर्फ डॉक्टर या नर्स तक सीमित नही है, इसमें कई लोग जुड़े होते हैं। उन्हीं में से एक है, रेडियोलॉजी टैक्नीशियन। आजकल हर छोटी-बड़ी बीमारी का आकलन करने के लिए एक्स-रे किया जाता है। यह कार्य रेडियोलॉजिस्ट करते हैं। वर्तमान समय में यह क्षेत्र काफी तेजी से उभर रहा है। करियर बनाने के लिए इस क्षेत्र में बेहतरीन संभावनाएं हैं।
कार्यक्षेत्र
रेडियोलॉजिस्ट शरीर के विभिन्न अंगों का एक्स-रे करते हैं। एक्स-रे करते वक्त मरीज तथा आसपास के लोगों पर रेडियोएक्टिव किरणों का साइड इफैक्ट न हो, इस बात की निगरानी भी रखते हैं। इसके अलावा वे रेडियोग्राफिक उपकरणों की देखभाल तथा रोगियों के रिकॉर्ड्स भी मेंटेन करते हैं । 
कोर्स
रेडियोलॉजी टैक्नीशियन बनने के लिए कई तरह के कोर्स उपलब्ध  हैं। इसमें सर्टीफिकेट कोर्स से लेकर डिप्लोमा, डिग्री और मास्टर्स तक के कोर्स उपलब्ध हैं जैसे बी.एस.सी. इन रेडियोलॉजी (3 साल), सर्टीफिकेट इन रेडियोग्राफी (1 साल), डिप्लोमा इन एक्स-रे टैक्नीशियन (1 साल), पी.जी. डिप्लोमा इन रेडियो थैरेपी टैक्नोलॉजी (2 साल) आदि। 
योग्यताएं
इस क्षेत्र से संबंधित स्नातक डिग्री, सर्टीफिकेट, तथा डिप्लोमा कोर्स करने के लिए फिजिक्स, कैमिस्ट्री व बॉयोलॉजी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं पास होना जरूरी है। यदि आप साइंस विषयों में स्नातक हैं, तो पी.जी. डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं।  गौरतलब है कि इसमें प्रवेश मुख्यत: बारहवीं पास अंकों के आधार पर ही होता है, लेकिन कुछ संस्थान एंट्रैंस टैस्ट व इंटरव्यू के आधार पर भी चयन करते हैं । 
करियर  
इस क्षेत्र में स्नातक रेडियोग्राफर, रेडियोलॉजिक प्रौद्योगिकीविद, वैज्ञानिक प्रयोगशाला सहायक, क्लीनिक सहायक, एक्स-रे तकनीशियन, अल्ट्रासाऊंड विशेषज्ञों के रूप में काम कर सकते हैं। डॉक्टर रेडियोलाजिस्ट से एम.आर.आई. और एंजियोग्राफी व इलाज परीक्षण के सभी प्रकार की मदद लेते हैं। 
अवसर
यह करियर विकल्प के तौर पर लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए उपयुक्त है। रेडियो इमेजिंग में एक साल के लंबे कार्यक्रम में  दो सीमैस्टर होते हैं। कोर्स के दौरान छात्रों को शरीर रचना विज्ञान, शरीर विज्ञान, विकिरण भौतिकी, इमेजिंग भौतिकी और रेडियोग्राफिक स्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है। सफल स्नातकों के लिए सरकारी और निजी  दोनों क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं। रेडियोलॉजिस्ट बनने के बाद आप किसी भी नर्सिंग होम, अस्पताल, डाइग्नॉस्टिक सैंटर, अत्याधुनिक अस्पताल या फिर खुद का काम शुरू कर सकते हैं।
सैलरी
भारत में रेडियोलॉजी टैक्नीशियन की शुरूआती सैलरी 8 से 10 हजार रुपए प्रतिमाह होती है। वहीं एक अनुभवी व प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट 15 हजार से 20 हजार रुपए प्रतिमाह प्राप्त कर सकता है।
प्रमुख संस्थान 
ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ मैडीकल साइंसेज, नई दिल्ली 
टाटा मैमोरियल हास्पिटल, मुंबई 
क्रिश्चियन मैडीकल स्कूल,  वैल्लूर, तमिलनाडु
बी.जे. मैडीकल कॉलेज, अहमदाबाद, गुजरात