Tuesday, March 14, 2017

स्पा थैरेपी में करियर

बात करियर की करें तो आजकल विकल्पों की तो जैसे भरमार है। ऐसे में बड़ा मुश्किल हो जाता है खुद के लिए एक बेहतर करियर का चुनाव करना। अगर आप कुछ हटकर करना चाहते हैं तो स्पा थैरेपी में अपने हाथ आजमा सकते हैं। स्वस्थ रहने और स्वस्थ दिखने की चाह सभी की होती है। आज ऐसी कई थेरेपी मौजूद हैं, जिनके इस्तेमाल से न सिर्फ शरीर, बल्कि मन भी स्वस्थ रहता है। यही कारण है कि अब देश में वेलनेस इंडस्ट्री जोर पकड़ रही है और बतौर बिजनेस सामने आ रही है। इसी का एक हिस्सा है स्पा थेरेपी। कुशल लोगों की कमी से जूझ रही इस इंडस्ट्री में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं।
स्पा थेरेपी क्या है?
स्पा थेरेपी में मसाज, हाइड्रो थेरेपी, हाथों तथा पैरों के उपचार तथा चेहरे के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट शामिल है। इन थेरेपीज के माध्यम से हमारी मांसपेशियां, हड्डियां, पाचन प्रणाली, श्वसन प्रणाली, भावनात्मक, दिमागी और नाड़ी तंत्र बेहतर प्रदर्शन करते हैं। इनसे थकान, भारीपन, मांसपेशियों की कठोरता आदि समस्याएं खत्म होती हैं।

योग्यता
हालांकि क्वालिफाइड स्पा थेरेपिस्ट बनने के लिए कई कोर्स हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्रशिक्षण लेना ही बेहतर होता है। आप हाईस्कूल करने के बाद भी कोर्सेज में प्रवेश ले सकते हैं।

इस फील्ड में वही सफल हो सकता है, जो क्लाइंट की जरूरतों को समझ सके। क्लाइंट से विनम्र भाव से बात करने और उसकी आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर उनकी पूर्ति करने में सफल हो सके। इसके अलावा कपड़े साफ रखने से लेकर चलने-फिरने के स्टाइल तक में आपको ध्यान बरतने की जरुरत है। फुल टाइम स्पा थेरेपिस्ट का काम आठ से दस घंटे का होता है और सुबह की तुलना में शाम को अधिक काम रहता है। साथ ही वीकएंड में भी काम की अधिकता रहती है।

कोर्स में क्या करवाया जाता है
छात्रों को विभिन्न तरह की मसाज और स्पा थेरेपी के बारे में पढ़ाया जाता है और मसाज के जरिये उन स्थितियों को जांचने के बारे में भी बताया जाता है, जिनका इलाज करना है। कोर्स में एरोमा थेरेपी, मसल स्टिम्युलेशन, सेनिटेशन आदि को भी शामिल किया जाता है।

वेतन
स्पा थेरेपिस्ट में नए प्रशिक्षुओं को 10 से 14 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। कुछ साल अनुभव प्राप्त करने के बाद उन्हें आसानी से 14 से 20 हजार रुपये मासिक मिल जाते हैं। यदि वे प्रबंधन के हिस्से हो जाते हैं तो उन्हें 30-80 हजार रुपये तक मिलते हैं।

अवसर
कोर्स करने के बाद इसमें जॉब की कमी नहीं रहती। ऐसे में जरूरी है कि आप खुद को कैसे अपडेट रखते हैं और क्लाइंट्स को किस तरह प्रभावित कर पाते हैं। स्पा थेरेपिस्ट को मसाज, ब्यूटी सैलून, हॉलिस्टिक हेल्थ क्लिनिक, फिटनेस सेंटर में नियुक्त किया जाता है।

इसके अलावा उन्हें खिलाडियों को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए खेल टीमों और स्पोर्ट्स क्लबों में भी रखा जाता है। नौकरी करने का मन न होने पर स्पा थेरेपिस्ट स्वतंत्र रूप से भी काम कर सकते हैं। अपनी इस भूमिका में वह क्लाइंट के घर जाकर या उसके कार्यस्थल पर पहुंच कर अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

Monday, March 13, 2017

फिलॉसफी के कोर्स

फिलॉसफी के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। टीचिंग के क्षेत्र में एक असिस्टेंट प्रोफेसर 30000 रुपए प्रतिमाह से ऊपर वेतनमान प्राप्त करता है। इसके अलावा एक प्रोफेसर 80000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त करता है। आरकेएमवी शिमला में हर वर्ष 60 छात्राएं यह कोर्स करके निकल रही हैं। हिमाचल में इस समय 50 से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़े हैं
फिलॉसफी एक वैज्ञानिक विषय हैजिसमें सच्चाई और वास्तविकता के कारणों का पता लगाने के लिए तर्क का प्रयोग किया जाता है। एक व्यक्ति जो फिलॉसफी सीखता हैउसे फिलॉस्फर कहा जाता है और यह जीवन भर सीखी जाने वाली प्रक्रिया है। जिन्हें मेटाफिजिक्सलॉजिकरेशनलिज्म आदि में रुचि हैफिलॉसफी उन बुद्धिजीवियों के लिए यह उचित प्रोफेशन है। फिलॉसफी दूसरे विषयों की तरह नहीं है। दूसरी कई अकादमिक शिक्षा छात्रों को एक बेहतर कैरियर बनाने के लिए प्रदान करवाई जाती हैलेकिन फिलॉसफी इन सबसे अलग है। यह कोई ट्रेनिंग नहीं हैबल्कि जीवन भर सीखने वाली शिक्षा है। यदि आपकी रुचि इस क्षेत्र में हैतो यह एक बेहतर कैरियर विकल्प बन सकता है। फिलॉसफी की कुछ उप शाखाएं हैंजिनमें से किसी एक को चुनकर आप बेहतर कैरियर बना सकते हैंवे हैं-  एस्थेटिक्स ः यह मुख्य रूप से  सौंदर्यरुचि और भावनात्मक सार्थकता पर आधारित शिक्षा है। एस्थेटिक्स मुख्य रूप से फिलॉसफी आफ आर्ट से संबंधित है। एपिस्टमोलॉजी ः इस शाखा में प्रकृति से लगावविश्वास और ज्ञान के बारे में बताया जाता है। एथिक्स ः यह अच्छेकीमती और सही की शिक्षा है। इसमें अप्लायड नीति शास्त्र की शिक्षा भी दी जाती है। लॉजिक ः इसमें अच्छे तर्क-वितर्क की शिक्षा दी जाती हैवाद-विवाद के जरिए तर्कों को आंका जाता है। मेटाफिजिक्स ः यह शाखा वास्तविकता की असली पहचान की शिक्षा देती है।
शैक्षणिक योग्यता 
फिलॉसफी विषय में प्रवेश के लिए छात्र का बारहवीं पास होना आवश्यक होता है। इस कोर्स को करने की अवधि तीन साल की है। कई संस्थानों द्वारा इस कोर्स में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। फिलॉसफी के मुख्य कोर्सों में आप बीएएमएएमफिल और पीएचडी आदि कर सकते हैं। डाक्टर आफ फिलॉसफी में प्रवेश पाने के लिए छात्र का संबंधित विषय में एमफिल होना आवश्यक है। 
कोर्स 
फिलॉसफी के कोर्स आप दुनिया के किसी भी हिस्से से कर सकते हैं। एथिक्स और एस्थेटिक्स भी इस कोर्स का हिस्सा हैं। लॉजिक एक दूसरा हिस्सा हैजो फिलॉसफी के कोर्स में छात्रों को करवाया जाता है। भारत में कई सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा फिलॉसफी में कोर्स करवाए जाते हैं। इसके मुख्य कोर्सों में आप बीए इन फिलॉसफीअंडरग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफीपोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी,  मास्टर डिग्री इन फिलॉसफीपीएचडी इन फिलॉसफीमास्टर आफ फिलॉसफी (लॉ)डाक्टर आफ फिलॉसफी (पार्ट टाइम)मास्टर आफ फिलॉसफी (एमफिल) इन इकोनोमिक्सबीए (ऑनर्स) इन फिलॉसफी और डिप्लोमा इन फिलॉसफी एंड रिलीजन आदि कोर्स भी कर सकते हैं। बीए करने के बाद आप लिंग्विस्टिक्ससोशियोलॉजीसाइकोलॉजी और यहां तक कि इतिहास के क्षेत्रों में आप उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। 
रोजगार की संभावनाएं  
इस कोर्स को करने के बाद ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए सरकारीकारपोरेट क्षेत्रों में कई कैरियर विकल्प उपलब्ध रहते हैं। कारपोरेट क्षेत्र में एक फिलॉसफी ग्रेजुएट मैनपावर डिवेलपमेंट मैनेजर और मैनपावर सर्विसेज को-आर्डिनेटर के रूप में नौकरी प्राप्त कर सकता है। सरकारी क्षेत्र में आप एक आर्किविस्ट के रूप में काम कर सकते हैं। एक कंसल्टिंग फिलॉस्फर की मांग उनके विचारों और फिलॉसफी की वजह से पूरी दुनिया में रहती है। इसके अलावा एक फिलॉस्फर जर्नलिज्म और पब्लिशिंग इंडस्ट्री में एक राइटर और एडीटर के रूप में रोजगार प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही आप रिसर्च में भी जा सकते हैं। एक ग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करने वाला दूसरे अन्य कई क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त कर सकता है। इस क्षेत्र में निपुण व्यक्ति सरकारी और निजी फर्मों में बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी और निजी स्कूलों में भी फिलॉसफी के क्षेत्र में ढेरों संभावनाएं हैं। इसके अलावा कालेजों और विश्वविद्यालयों में भी आप बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आप एक प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही आप भारत के अलावा विदेशों में अच्छे वेतनमान पर नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आप कारपोरेट क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त करके बेहतर कमाई भी कर सकते हैं।
वेतनमान 
फिलॉसफी के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। टीचिंग के क्षेत्र में एक असिस्टेंट प्रोफेसर 30000 रुपए प्रतिमाह से ऊपर वेतनमान प्राप्त करता है। इसके अलावा एक प्रोफेसर 80000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त करता है। 
कोर्स 
1.    बीए इन फिलॉसफी 
2.    अंडरग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी 
3.    पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी   
4.    मास्टर डिग्री इन फिलॉसफी 
5.    पीएचडी इन फिलॉसफी 
6.    मास्टर आफ फिलॉसफी (लॉ)  
7.    डाक्टर आफ फिलॉसफी (पार्ट टाइम)  
8.    मास्टर आफ फिलॉसफी (एमफिल) इन    इकोनोमिक्स  
9.    बीए (ऑनर्स) इन फिलॉसफी 
10. डिप्लोमा इन फिलॉसफी एंड रिलीजन 
संस्थान 
1.  राजकीय कन्या महाविद्यालयशिमला 
2.  गवर्नमेंट डिग्री कालेजनालागढ़
3. महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटीरोहतक 
4.  एसआर गवर्नमेंट कालेज फार वूमेनअमृतसर 
5.  गुरु नानक देव यूनिवर्सिटीअमृतसर 
6.  पंजाबी यूनिवर्सिटीपटियाला 
7.  देव समाज कालेज फार वूमनफिरोजपुर 
8. डीएवी कालेज फार वूमनअमृतसर 
9. पंजाब यूनिवर्सिटीचंडीगढ़ 
10. कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटीकुुरुक्षेत्र 
11. गवर्नमेंट नेशनल कालेजसिरसा 
12. दिल्ली विश्वविद्यालयदिल्ली

Friday, March 10, 2017

Genetic Counsellor डिकोडिंग द डिसऑर्डर



ह्यूमन बॉडी में मौजूद क्रोमोजोम्स में करीब 25 से 35 हजार के बीच जीन्स होते हैं। कई बार इन जीन्स का प्रॉपर डिस्ट्रीब्यूशन बॉडी में नहीं होता है, जिससे थैलेसेमिया, हीमोफीलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्लेफ्ट लिप पैलेट, न्यूरोडिजेनेरैटिव जैसी एबनॉर्मलिटीज या हेरेडिटरी प्रॉब्लम्स हो सकती है। इससे निपटने के लिए हेल्थ सेक्टर में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट और दूसरे इनेशिएटिव्स लिए जा रहे हैं, जिसे देखते हुए जेनेटिक काउंसलिंग का रोल आज काफी बढ गया है। अब जो लोग इसमें करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए स्कोप कहीं ज्यादा हो गए हैं।

जॉब आउटलुक

एक अनुमान के अनुसार, करीब 5 परसेंट आबादी में किसी न किसी तरह का इनहेरेटेड डिसऑर्डर पाया जाता है। ये ऐसे डिसऑर्डर्स होते हैं, जिनका पता शुरुआत में नहीं चल पाता है, लेकिन एक जेनेटिक काउंसलर बता सकता है कि आपमें इस तरह के प्रॉब्लम होने की कितनी गुंजाइश है। काउंसलर पेशेंट की फैमिली हिस्ट्री की स्टडी कर इनहेरेटेंस पैटर्न का पता लगाते हैं। वे फैमिली मेंबर्स को इमोशनल और साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी देते हैं।

स्किल्स रिक्वायर्ड

जेनेटिक काउंसलिंग के लिए सबसे इंपॉर्टेट स्किल है कम्युनिकेशन। इसके अलावा, कॉम्पि्लकेटेड सिचुएशंस से डील करने का पेशेंस। एक काउंसलर का नॉन-जजमेंटल होना भी जरूरी है, ताकि सब कुछ जानने के बाद मरीज अपना डिसीजन खुद ले सके। उन्हें पेशेंट के साथ ट्रस्ट बिल्ड करना होगा।

करियर अपॉच्र्युनिटीज

अगर इस फील्ड में ऑप्शंस की बात करें, तो हॉस्पिटल में जॉब के अलावा प्राइवेट प्रैक्टिस या इंडिपेंडेंट कंसलटेंट के तौर पर काम कर सकते हैं। इसी तरह डायग्नॉस्टिक लेबोरेटरीज में ये फिजीशियन और लैब के बीच मीडिएटर का रोल निभा सकते हैं। कंपनीज को एडवाइज देने के साथ टीचिंग में भी हाथ आजमा सकते हैं। वहीं, जेनेटिक रिसर्च प्रोजेक्ट्स में स्टडी को-ओर्डिनेटर के तौर पर काम कर सकते हैं। बायोटेक और फार्मा इंडस्ट्री में भी काफी मौके हैं।

क्वॉलिफिकेशन

जेनेटिक काउंसलर बनने के लिए बायोलॉजी, जेनेटिक्स और साइकोलॉजी में अंडरग्रेजुएट की डिग्री के साथ-साथ लाइफ साइंस या जेनेटिक काउंसलिंग में एमएससी या एमटेक की डिग्री होना जरूरी है।

सैलरी

जेनेटिक काउंसलिंग के फील्ड में फाइनेंशियल स्टेबिलिटी भी पूरी है। हालांकि जॉब प्रोफाइल और सेक्टर के मुताबिक सैलरी वैरी करती है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाला प्रोफेशनल महीने में 50 हजार रुपये तक अर्न कर सकता है, जबकि गवर्नमेंट डिपार्टमेंट में काम करने वाले महीने में 25 से 40 हजार के बीच अर्न कर सकते हैं।

ट्रेनिंग

-गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर


-कामिनेनी इंस्टीट्यूट, हैदराबाद


-संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट, लखनऊ


-सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु


-महात्मा गांधी मिशन, औरंगाबाद


-जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली


-सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली


एक्सपर्ट बाइट

जेनेटिक काउंसलिंग इंडिया में काफी तेजी से पॉपुलर हो रहा है। एप्लीकेशन के नजरिए से इसमें बहुत स्कोप है। नई लेबोरेटरीज खुल रही हैं, जिनके लिए जेनेटिक काउंसलर्स की काफी डिमांड है। वैसे, ट्रेडिशनल हॉस्पिटल्स के अलावा फार्मा कंपनीज में, कॉरपोरेट एनवॉयरनमेंट के बीच काम करने के पूरे मौके मिलते हैं। अब तक मेडिकल प्रोफेशन से जुडे स्टूडेंट्स ही इसमें आते थे, लेकिन अब नॉन-मेडिकल स्टूडेंट्स भी आ रहे हैं।

Thursday, March 9, 2017

ऐप डेवलपर में करियर

एक स्मार्टफोन कितना भी शानदार और नई टेक्नोलॉजी से अपग्रेडेड क्यों न हो, जब तक उसमें लेटेस्ट ऐप्स न चलते हों, ग्राहक उसे खरीदने में झिझकते हैं। इन ऐप्स के कारण ही स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसी के साथ बढ़ रहे हैं, ऐप डेवलपमेंट में करियर बनाने के अवसर। अगर आपको भी स्मार्टफोन्स की लेटेस्ट ऐप्स के बारे में जानने और उनके टेक्निकल पहलुओं को समझने में दिलचस्पी है, तो आप बन सकते हैं बेहतरीन ऐप डेवलपर।
एक अनुमान के मुताबिक स्मार्टफोन्स का बाजार मोबाइल ऐप्स के कारण दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है। साफ है कि लोग अपनी सुविधा के लिए हर काम में मोबाइल ऐप्स को इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। यही कारण है कि
आज फैशन से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा तक के लिए कई ऐप्स बाजार में अपनी जगह तो बना ही चुके हैं, ऐप डेवलपर्स के लिए भी उपलब्‍ध‍ियों के नए दरवाजे खुल रहे हैं। अगर आपको भी इन मोबाइल ऐप्स के फंक्शन और
टेक्नोलॉजी को जानने व समझने में रुचि है, तो आप ऐप डेवेलपर के तौर पर करियर बना सकते हैं।
क्या है काम?
ऐप डेवलपर्स उन सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स या प्रोग्रामर्स को कहते हैं, जो ऐप्स की डिजाइनिंग, डेवलपमेंट और टेस्टिंग का काम किसी एक या सभी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम्स के लिए करते हैं। मोबाइल ऐप ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है, जो मोबाइल उपकरणों पर चलता है। कुछ मोबाइल ऐप्स सिर्फ किसी खास मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे आईओएस, विंडोज या एंड्रॉयड पर ही रन करते हैं। इन्हें नेटिव मोबाइल ऐप्स कहते हैं। जबकि कुछ ऐप्स
मोबाइल वेब-बेस्ड ऐप्स होते हैं, जो हर तरह के मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करते हैं।
कौन-से कोर्स?
इस फील्ड में करियर बनाने के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और कम्प्यूटर वि‍षय होना जरूरी हैं। इसके बाद आप इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीटेक या एमसीए कर सकते हैं। ऐप डेवलपर्स के पास सी, सी++ व ऑब्जेक्टिव सी जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस में प्रोफीशिएंसी होनी जरूरी है। ऐप डेवलपिंग कोर्स में आपको यूआई डिजाइन के बेसिक्स सिखाए जाते हैं। आप किसी एक ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए ऐप डेवलपिंग में स्पेशलाइजेशन भी कर सकते हैं।
जरूरी स्किल्स
एक ऐप डेवलपर को कम्प्यूटर और प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस में रुचि होना जरूरी है। चूंकि आपका पूरा दिन मोबाइल ऐप की जरूरतों को लिखने और उन्हें समझने में जाएगा, इसलिए आपमें धैर्य और टेक्निकल व डिजाइनिंग आस्पेक्ट्स को समझने की क्षमता होनी चाहिए। इसके अलावा आपमें यूजर एक्सपीरियंस जानने के लिए बेहतर
कम्युनिकेशन स्किल्स होनी भी जरूरी है।
वर्क प्रोफाइल
ऐप डेवलपर्स की तीन मुख्य भूमिकाएं होती हैं:
मोबाइल यूआई डिजाइनर: ये प्रोफेशनल्स किसी ऐप के कलात्मक और क्रिएटिव दोनों पहलुओं पर काम
करते हैं।
यूजर एक्सपीरियंस एंड यूजेबिलिटी एक्सपर्ट: ये ह्यूमन इंटरैक्शन को समझते हुए मैट्रिक्स के इस्तेमाल के तरीके को आसान बनाते हैं।
एप्लिकेशन डेवलपर या इंजीनियर: ये ऑपरेटिंग सिस्टम के हिसाब से ऐप्स की प्रोग्रामिंग और आर्किटेक्चर पर काम करते हैं। 
भविष्य की संभावनाएं
आप बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनीज जैसे टीसीएस, माइक्रोसॉफ्ट, ओरैकल, एसएपी, सीमैंटेक, एचसीएल आदि के
लिए काम कर सकते हैं। अब तो दूसरी कॉर्पोरेट कंपनीज भी ऐप्स डिजाइन करने के लिए ऐप डेवपलर्स को हायर करती हैं। 
कमाई कितनी?
बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनीज में शुरुआती एनुअल पैकेज 5-6 लाख रुपए तक होगा। अनुभव प्राप्त करने के बाद आपका
एनुअल पैकेज 15-20 लाख रुपए तक हो सकता है। इस क्षेत्र की खासियत है कि इसमें अनुभव के साथ सैलरी में वृद्धि तेजी से होती है और विदेश में काम करने का मौका भी मिलता है।
प्रमुख संस्थान
आईएसएम यूनिवर्सिटी 
सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग
इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस नेटवर्क टेक्नोलॉजी
इंटरनेशनल अकेडमी फॉर सर्टिफिकेशन एंड ट्रेनिंग
सीमएजु: स्कूल ऑफ प्रो-एक्सप्रेशनिज्म 
एनआईआईटी

Monday, March 6, 2017

न्यूक्लियर साइंस में करियर

दुनिया भर में ऊर्जा की जरूरत लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में नाभिकीय ऊर्जा समस्या के समाधान के रूप में उभरकर सामने आई है। उसके माध्यम से जहां ऊर्जा की बचत की जा सकती है, वहीं इसकी लागत को भी कम किया जा सकता है। दुनिया की नाभिकीय ऊर्जा पर निर्भरता बढऩे के साथ तकरीबन हर देश न्यूक्लियर साइंस पर शोध कार्यों को तरजीह देने लगा है। इसके न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स की मांग में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है।

भारत का 2025 तक विद्युत ऊर्जा के उपयोग को 25 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। भारत ने 2020 तक 20 हजार मेगावाट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों की मानें, तो नाभिकीय डील और ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों की वजह से आने वाले समय में इस क्षेत्र में एक लाख प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होगी।


क्यों हैं भविष्य का क्षेत्र

एक अनुमान के मुताबिक, आज पूरे विश्व में पचास मिलियन टन हाइड्रोजन ईंधन का उपयोग किया जाता है। अगर आंकड़ों पर गौर करें, तो ऊर्जा के रूप में उपयोग करने पर नौ मिलियन टन हाइड्रोजन बीस से तीस मिलियन कार या आठ से नौ मिलियन घरों में ऊर्जा दे सकती है। इसके उपयोग से हमारी तेल के उपर निर्भरता कम हो जाएगी। आज भारत में विद्युत उत्पादन का करीब 3 प्रतिशत नाभिकीय ऊर्जा से होता है। इस क्षेत्र के विकास के लिए भारत सरकार ने कमर कस ली है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले दो दशकों में यह कारोबार 100 बिलियन डॉलर का हो जाएगा।


इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी और न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप की हरी झंडी मिलने के बाद प्राइवेट सेक्टर की कई कंपनियां भी इस क्षेत्र में आ सकती हैं। जानकारों का मानना है कि न्यूक्लियर इंडस्ट्री अब काफी हद तक ग्लोबल हो चुकी है और कोई भी देश इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए दूसरों से अलग-थलग रहते हुए सिर्फ अपने आप पर निर्भर नहीं रह सकता। यह चीन और भारत जैसे देशों के संदर्भ में भी उतना ही सही है, जितना अमेरिका या यूरोप के संदर्भ में। उनका यह भी कहना है कि इस सेक्टर में शोध की व्यापक संभावनाएं हैं। वैसे देखा जाए, तो भारत पहले ही दुनिया में परमाणु शक्ति-संपन्न राष्ट्र का दर्जा हासिल कर चुका है। फिलहाल हमारे देश में 17 एटॉमिक पावर स्टेशन हैं। इसके अलावा छह और निर्माणाधीन हैं।

कैसी होनी चाहिए योग्यता

न्यूक्लियर इंजीनियरिंग क्षेत्र में एक अच्छी बात यह है कि यहां काम शुरू करने के लिए आपको न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट होना जरूरी नहीं है। फिजिक्स, केमिस्ट्री या मैथ्स विषय के डिग्रीधारी भी इससे जुड़े कुछ कार्यों के योग्य हो सकते हैं। इसमें विशेषज्ञता हासिल करने के लिए आप अमेरिका या कनाडा जैसे देश के किसी प्रतिष्ठित संस्थान से मास्टर्स डिग्री कर सकते हैं। वर्ल्ड न्यूक्लियर यूनिवर्सिटी जैसे कई अंतरराष्ट्ररीय संस्थान हैं, जो न्यूक्लियर एजुकेशन को मजबूती देने और न्यूक्लियर साइंस व टेक्नोलॉजी में भविष्य का नेतृत्व तैयार करने की दिशा में कार्यरत हैं। इस फील्ड में विज्ञान की मूलभूत जानकारियां, अपग्रेड होती तकनीक, विज्ञान की सामाजिक उपयोगिता के बारे में जानकारी होना जरूरी है। इस कोर्स का मुख्य मकसद ऐसे इंजीनियरों को तैयार करना है, जो नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्र में विशेषज्ञ हों।


कार्य का स्वरूप

एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट के काम में इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन, प्रोटॉन जैसे सब-एटॉमिक पार्टिकल्स और विज्ञान में उनके प्रभाव और उपयोगिता के बारे में अध्ययन करना शामिल है। वे विभिन्न उद्देश्यों के लिहाज से इन सबएटॉमिक पार्टिकल्स को काम में लाने और इस्तेमाल के तौर-तरीकों का अध्ययन करते हैं। इसके अलावा, नाभिकीय ऊर्जा और नाभिकीय हथियारों के निर्माण के लिए विखंडन प्रक्रिया का अध्ययन करते हैं। परमाणु विज्ञानी सेफ्टी प्रोटोकॉल्स, परिष्कृत तकनीकों को तैयार करते हैं और नाभिकीय रिएक्शनों के नए इस्तेमाल संबंधी परीक्षणों को भी अंजाम देते हैं। दूसरी ओर नाभिकीय इंजीनियर लेबोरेट्रीज, इंडस्ट्रीज और यूनिवर्सिटीज के लिए नाभिकीय प्रक्रियाओं से संबंधित उपकरण और प्रणाली तैयार करते हैं ताकि नाभिकीय ऊर्जा के फायदे समाज तक पहुंच सकें। वे न्यूक्लियर फिजिक्स के सिद्धांतों के आधार पर एटॉमिक न्यूक्लियर के विश्लेषण संबंधी कार्य से जुड़े होते हैं।

इसमें नाभिकीय विखंडन सिस्टम्स और इसके घटकों खासकर नाभिकीय रिएक्टर्स, नाभिकीय पावर प्लांट्स और नाभिकीय हथियारों का उचित रखरखाव भी शामिल है। आज परमाणु विज्ञानी परमाणुओं और परमाणविक पदार्र्थों की विशेषताओं को जांचने के लिए परिष्कृत प्रयोगात्मक व सैद्धांतिक औजारों का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ-साथ वे प्रकृति के बुनियादी संतुलन के आधार, सुपरनोवा की प्रकृति और कॉस्मॉस में पदार्थों की उत्पत्ति जैसे महत्वपूर्ण अंतर्विषयक सवालों के जवाब तलाशने में लगे हैं। नाभिकीय विज्ञान लगातार दूसरे क्षेत्रों पर भी अपना प्रभाव छोड़ रहा है। न्यूक्लियर साइंस में पीएचडी करने वाले आधे से ज्यादा अभ्यर्थी अपनी ट्रेनिंग के लिए मेडिसिन, इंडस्ट्री और नेशनल डिफेंस जैसे अहम क्षेत्रों को चुनते हैं।

शानदार अवसर हैं यहां

इस क्षेत्र में आने वाले समय में करियर की नई संभावनाएं पैदा होंगी। पर्यावरण और चिकित्सा के क्षेत्र में इसका स्कोप तेजी से बढ़ा है। लेकिन इसका सबसे प्रमुख इस्तेमाल ऊर्जा के रूप में है। नाभिकीय विखंडन के द्वारा ऊर्जा का उत्पादन करना एक बड़ी चुनौती है। नाभिकीय शिक्षा के क्षेत्र में डिपॉर्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी बढ़-चढ़ कर काम कर रहा है। भारत में नाभिकीय तकनीक का यह प्रमुख क्षेत्र है और वह सारे नाभिकीय स्टेशनों के डिजाइन, निर्माण और ऑपरेशन का काम देखता है। इसमें भíतयों का काम भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, मुंबई देखता है।


डीएई का ट्रेनिंग कोर्स एक वर्ष की समय सीमा का होता है और इसमें इंजीनियर और वैज्ञानिकों का चयन राष्ट्रीय स्तर की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से होता है। करियर के लिहाज से आप विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर सकते हैं। पावर जनरेशन में न्यूक्लियर रिएक्टर की डिजाइनिंग, कार्य विधि और उसकी सुरक्षा से जुड़े क्षेत्र में भी कई मौके हैं। मेडिसन करियर में डायगोनिस्टक इमेजिंग जैसे एक्सरे, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग, अल्ट्रासाउंड, डायगोनिस्टक फोटोग्राफर के रूप में करियर बना सकते हैं। कृषि तथा खाद्य इंडस्ट्री में नाभिकीय तकनीक के इस्तेमाल द्वारा उन्नत तथा रोगविहीन फसलों के उत्पादन में रोजगार के अवसर बनते हैं।

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मुताबिक, अमेरिका में हर साल न्यूक्लियर मेडिकल प्रक्रियाओं के संदर्भ में बीस लाख से ज्यादा विशेषज्ञों की जरूरत रहती है। परमाणु विज्ञानी अस्पतालों और मेडिकल रिसर्च फर्म्स में रोजगार पा सकते हैं। इसके अलावा, अनुसंधान व विकास से जुड़े कई और कार्यक्रमों व संस्थानों में भी उन्हें रोजगार मिल सकता है। यदि वे चाहें, तो न्यूक्लियर पावर प्लांट्स, सरकारी एजेंसियों, राष्ट्ररीय प्रतिरक्षा तंत्र के अलावा विभिन्न न्यूक्लियर व स्पेस संबंधी प्रोग्रामों को संचालित करने वाली राष्ट्ररीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी जुड़ सकते हैं।


शोध में मौका

नई जनरेशन के न्यूक्लियर पावर रिएक्टर डिजाइन तैयार करना, विखंडन के लिए रिएक्टर के डिजाइन तैयार करना, स्पेस एक्सप्लोरेशन के लिए नए पावर सोर्स बनाना सरीखे कई कामों में शोध जारी है। इसके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों में रेडियोएक्टिव पदार्थ का उत्पादन, उसके औद्योगिक और चिकित्सकीय प्रयोग के क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी के रिसर्च और डेवलपमेंट के कई प्रोगाम संचालित होते हैं। जिनमें म्यूटेशन ब्रीडिंग, फसलों का जेनेटिक इंप्रूवमेंट, जमीन का आइसोटोप की सहायता से अध्ययन, कीटनाशकों के अवशेषों का विश्लेषण शामिल होता है।

क्या सोचते हैं लोग

इस क्षेत्र के बारे में लोगों की आमतौर पर धारणा यह है कि न्यूक्लियर साइंटिस्ट या न्यूक्लियर इंजीनियर के तौर पर कार्य करना बेहद खतरनाक है। हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स को कई मामलों में नाभिकीय पदार्र्थों के सीधे संपर्क में नहीं आना पड़ता। इसके अलावा नाभिकीय पावर प्लांट्स की बात करें तो यहां भी रेडियोएक्टिव उत्सर्जनों की मात्रा बहुत कम होती है और सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाता है, लिहाजा किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। कर्मचारियों के लिए कार्य संबंधी सुरक्षित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए ऑक्युपेशनल सेफ्टी व स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा नाभिकीय व्यवस्थाओं पर कड़ी निगाह रखी जाती है।


सैलरी पैकेज

न्यूक्लियर साइंस के क्षेत्र में सैलरी अच्छी होती है। अंतरराष्ट्ररीय स्तर पर एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट की औसत सैलरी 50,000 डॉलर तक हो सकती है। इस क्षेत्र से जुड़े ज्यादातर कार्यों में आपको आगे बढऩे के भी अच्छे अवसर मिलते हैं। चूंकि न्यूक्लियर साइंटिस्ट की अलग-अलग इंडस्ट्रीज में काफी मांग है, लिहाजा ग्रेजुएट्स के लिए यहां विकल्प चुनने के भी अनेक अवसर मौजूद हैं।

इंस्टीट्यूट वॉच

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दिल्ली विश्वविद्यालय।
www.du.ac.in


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गुरु जांभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार।
www.gju.ernet.in


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होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट।
www.hbni.ac.in


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आईआईटी, कानपुर, मुंबई, गुवाहाटी, दिल्ली, चेन्नई।
www.iitk.ac.in


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एनआईएसईआर, भुवनेश्वर।
niser.ac.in


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बीएचयू, वाराणसी।
www.bhu.ac.in


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बीआईटीएस, पिलानी।
www.bits-pilani.ac.in


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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ माइंस, धनबाद।
www.ismdhanbad.ac.in
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