Thursday, December 21, 2017

इम्यूनोलॉजी में पीएचडी

 हमारे शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए इसके अंदर सक्रिय प्रतिरक्षा तंत्र या इम्यून सिस्टम से जुड़ी बारीकियों का अध्ययन करने में रूचि रखने वाले कर सकते हैं, इम्यूनोलॉजी में पीएचडी के लिए आवेदन। बॉयोलॉजी के इस परिष्कृत क्षेत्र में शोध के लिए नई दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी ने आवेदन मंगवाए हैं। नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी नई दिल्ली में जेएनयू कैंपस के पास ही स्थित है। इसके रिसर्च प्रोग्राम में आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आवेदन ऑनलाइन है। अंतिम तिथि 31 दिसंबर है।
रिसर्च के विकल्प
नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी ने जिन एरियाज में रिसर्च के लिए पीएचडी के प्रस्ताव मंगवाए हैं, वे इस प्रकार हैं- इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी, जेनेटिक्स मॉलिक्यूलर एंड सेलुलर बायोलॉजी, केमिकल, स्ट्रेक्चरल एंड कंप्यूटेशनल बायोलॉजी, रीप्रोडक्शन एंड डेवलपमेंट। रिसर्च के ये सभी एरियाज इंटरडिसीप्लीनरी एरियाज हैं। रूचि होने पर आप अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
क्या है योग्यता
आवेदक ने साइंस की ब्रांच में एमएससी या एमटेक या एमबीबीएस या एमवीएससी या एमफार्म या समकक्ष कोर्स किया हो। बारहवीं और ग्रेजुएशन में उसके कम से कम 60 फीसदी अंक हों। मास्टर डिग्री में उसे कम से कम 55 फीसदी अंक मिले हों। फाइनल ईयर के छात्र भी इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कैसे होगा चयन
चयन के लिए कुल दो माध्यम निर्धारित हैं-
1. प्रवेश परीक्षा- यह नई दिल्ली, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता में होगी। 2. दिसंबर में होने वाली जेजीईईबीआईएलएस के स्कोर के जरिए। इन आवेदकों को अलग से आवेदन करना होगा।
कैसे करें आवेदन
आवेदन के लिए www.nii.res.in पर जाएं, ऑनलाइन आवेदन करें। आवेदन शुल्क जनरल/ ओबीसी/ शावि के लिए 500 रूपए है। एससी/एसटी के लिए 250 रूपए है। आवेदन 1 नवंबर से 31 दिसंबर तक कर सकते हैं।

Monday, December 18, 2017

रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट में करियर

आज जिस तेजी से दुनिया में विकास हो रहा है, उससे भी कहीं ज्यादा तेजी से एनर्जी की मांग बढ़ रही है। किसी भी इंडस्ट्री या प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले वहां की ऊर्जा की संभावनाओं की पड़ताल जरूरी होती है। जरूरतों के साथ ही अब पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी देखा जाने लगा है। तमाम पावर प्रोजेक्ट्स पर्यावरण संबंधी विषयों के चलते ही अटके पड़े हैं। इसलिए रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस्ड रहना उनकी मजबूरी है। इस क्षेत्र में भारत ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रखी हैं। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे इस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं।
बायोफ्यूल की लगातार कम होती जा रही मात्रा और देश में एनर्जी की मांग को देखते हुए एनर्जी प्रोडक्शन और उसका प्रबंधन पहली प्राथमिकता बन चुका है। सरकारी के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इस ओर विशेष जोर दे रही हैं। यही कारण है कि रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट के कोर्स की तेजी से मांग बढ़ रही है। समय के साथ-साथ ऊर्जा की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसलिए ऊर्जा के अतिरिक्त स्रोतों यानी वैकल्पिक ऊर्जा, सौर ऊर्जा, विंड एनर्जी, बायो एनर्जी, हाइड्रो एनर्जी आदि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा पर्यावरण के मुद्दों को देखते हुए भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी योजना बना रखी है, क्योंकि सरकार का इरादा अगले साल तक 55 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन का है। कॉरपोरेट कंपनियां भी इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं।
क्या है रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट
मौजूदा प्रौद्योगिकी के अलावा नई तकनीक को अपना कर रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) के उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बिजली की मांग के एक बड़े हिस्से की आपूर्ति व प्रदूषण में कमी के साथ-साथ हजारों करोड़ रुपये की बचत भी की जा सके। इसलिए सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने पर बल दिया है।
कौन से हैं कोर्स
इसमें जो भी कोर्स हैं, वे पीजी अथवा मास्टर लेवल के हैं। छात्र उन्हें तभी कर सकते हैं, जब उन्होंने किसी विश्वविद्यालय या मान्यताप्राप्त संस्थान से बीटेक, बीई या बीएससी सरीखा कोर्स किया हो। एमएससी फिजिक्स के छात्रों को यह क्षेत्र सबसे अधिक भाता है।
एमबीए कोर्स
कई बिजनेस संस्थानों में एनर्जी मैनेजमेंट या पावर मैनेजमेंट जैसे एमबीए कोर्स भी ऑफर किए जा रहे हैं। इनको ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है। रिसर्च करने के लिए मास्टर होना जरूरी है।
कौन से हैं प्रमुख कोर्स
  • एमएससी इन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एमएससी इन फिजिक्स/एनर्जी स्टडीज
  • एमटेक इन एनर्जी स्टडीज
  • एमटेक इन एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमटेक इन एनर्जी टेक्नोलॉजी
  • एमटेक इन रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमई इन एनर्जी इंजीनियरिंग
  • पीजी डिप्लोमा इन एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमबीए इन रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमफिल इन एनर्जी
जरूरी गुण
  • आवश्यक स्किल्स
  • लॉजिकल व एनालिटिकल स्किल्स
  • कठिन परिश्रम से न भागना
  • मेहनती व अनुशासन में रहना
  • नई चीजें सीखने के लिए तत्पर रहना
  • कठिन परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता
वेतनमान
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में डिप्लोमाधारी युवाओं को शुरू-शुरू में 25-30 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिलती है। इस क्षेत्र में जैसे-जैसे वे समय व्यतीत करते जाते हैं, उनकी आमदनी भी बढ़ती जाती है।
अनुभव से बढ़ेगी सैलरी
अमूमन 3-4 साल के अनुभव के बाद यह सेलरी बढ़ कर 50-55 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाती है। कई ऐसे प्रोफेशनल्स हैं, जो इस समय 5-6 लाख रुपये सालाना सेलरी पैकेज पा रहे हैं। टीचिंग व विदेश जाकर काम करने वाले प्रोफेशनल्स की सेलरी भी काफी अच्छी होती है। इस क्षेत्र के जानकार प्रोफेशनल्स को अकसर सेलरी के लिए ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि आज भी इस क्षेत्र में मांग की तुलना में करियर प्रोफेशनल्स की भारी कमी है।
यहां पर मिल सकता है काम
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर से संबंधित सरकारी व निजी उद्योगों में करियर के तमाम विकल्प मौजूद हैं।
पर्याप्त संभावनाएं
देश में रिन्यूएबल एनर्जी की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। इससे लगभग 1.79 लाख मेगावॉट बिजली पैदा की जा सकती है। इसके अंतर्गत एचआर मैनेजमेंट, ऑपरेशन, फाइनेंस, मार्केटिंग तथा स्ट्रैटिजिक मैनेजमेंट जैसे कार्य शामिल हैं। इसमें प्रोफेशनल्स एनर्जी कॉर्पोरेशन के मैनेजमेंट में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह क्षेत्र भले ही अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर करियर की संभावनाएं मौजूद हैं।
संस्थान
- यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ, लखनऊ
वेबसाइट- www.lkouniv.ac.in
- यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे, पुणे
वेबसाइट- www.unipune.ac.in
- आईआईटी दिल्ली, नई दिल्ली
वेबसाइट- www.iitd.ac.in
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, तिरुचिरापल्ली
वेबसाइट- www.nitt.edu
- राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल
वेबसाइट- www.rgpv.ac.in
- इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट (डीम्ड यूनिवर्सिटी), इलाहाबाद
वेबसाइट- www.shiats.edu.in
- पेट्रोलियम कंजर्वेशन रिसर्च एसोसिएशन, नई दिल्ली
वेबसाइट- www.pcra.org

Sunday, December 17, 2017

क्रिएटिव राइटिंग में स्कोप

लेखक बनने में कोई स्कोप नहीं है.. क्या राइटिंग करके फैमिली मैनेज कर सकते हैं। अगर बैकग्राउंड अच्छा नहीं तो राइटिंग में सस्टेन करना मुश्किल है। आम धारणा है कि लेखन रईसों का पेशा है, जबकि सच्चाई यह नहीं है।
एक दशक तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का कार्य करने के बाद लेखन की ओर मुड़े अनिल अनंतस्वामी का कहना है, ‘लेखक होने का सबसे बड़ा फायदा है कि इससे आपकी एकाग्रता में विकास होता है। यदि आप दुनिया के बारे में कौतुहल रखते हैं तो लेखन आपको अपनी प्रतिक्रियाओं को सटीक तरीके से सामने रखने में मदद करता है।’ इसलिए यदि आप लेखन का प्रयास कर रहे हैं तो इसके लक्षण आपके जीवन की शुरुआत से ही दिख जाते हैं।
संभावित विकल्प
पत्रकारिता: एक पत्रकार के तौर पर कई स्तरों पर कार्य किया जा सकता है, जिनमें एक स्तंभकार, फ्रीलांस जर्नलिस्ट, एडिटर और सब एडिटर आदि प्रमुख होते हैं। इसके अलावा, एक रिपोर्टर या फोटोजर्नलिस्ट का कार्य भी होता है।
स्क्रिप्ट राइटिंग: लेखन का यह विकल्प उन लोगों के लिए आदर्श है, जो कौतुहल से जीवन के प्रत्येक पक्ष को देखते हैं। हालांकि, अपने लिखे हुए कार्य के व्यावसायिक पक्ष को हमेशा ध्यान में रखना होता है। इस कार्य में फिल्म लेखन आदि भी शामिल होते हैं।
कॉपीराइटिंग: एडवर्टाइजर्स को उत्पाद की मार्केटिंग के लिए चुटीली टैगलाइन्स चाहिए होती हैं। यदि आपके अंदर अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर है और आप चुटीले संवाद भी खोज लेते हैं तो कॉपीराइटिंग आपके लिए एक आदर्श पेशा है। इस कार्य के लिए पैसा भी अच्छा मिलता है, लेकिन काम का दबाव भी अधिक होता है।
कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस: पर्सनल रिलेशंस इंडस्ट्री या कॉरपोरेट कम्युनिकेशन फर्म्स जैसे अपेक्षाकृत नए क्षेत्रों में लेखकों के लिए जगह है। कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस में मूलत: क्लाइंट्स या कस्टमर्स के लिए जरूरी डेटा को व्यवस्थित करना होता है। इसमें हैंडआउट्स, ब्रोशर्स, प्रेस रिलीज, नोटिफिकेशंस आदि लिखने होते हैं। कॉरपोरेट कम्युनिकेशन का प्रमुख फोकस छवि निर्माण होता है, इसलिए यह जॉब खास है।
वेब कंटेंट: इंटरनेट की शुरुआत और प्रसिद्धि के साथ ही वेबसाइट कंटेंट के कार्य में भी लेखकों की भारी मांग उठी है। हालांकि, वेबसाइट कंटेंट लेखन में पाठकों को समझना होता है, चूंकि मॉनीटर पर लंबे और जटिल वाक्य पढ़ना और समझना कठिन होता है, इसलिए कंटेंट को चुस्त बनाना होता है। चूंकि अधिकांश पाठक कंटेंट को जल्दी समझना चाहते हैं, लिहाजा लेख को सबहेडिंग्स, बुलेट्स और सही पैराग्राफ्स में बांटना जरूरी होता है।
टेक्निकल/साइंटिफिक राइटिंग: गैजेट्स और उनकी तकनीकी विशेषताओं को सर्वसाधारण भाषा में समझाने वाले और तकनीकी सोच-समझ रखने वाले लेखकों की भी बहुत मांग है। वैज्ञानिक लेखन में शोधकर्ताओं से उनके आकलन को लिखने संबंधी सहयोग भी करना होता है। यह खासा चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के तथ्य एक दूसरे से विरोधाभासी नहीं लगने चाहिए।
घोस्ट राइटिंग: घोस्ट राइटर अन्य लोगों के लिए लेखन करके अपने हुनर को चमकाता है। इसका मतलब कि घोस्ट राइटर अन्य किसी व्यक्ति द्वारा बताए गए तथ्यों को करीने से लिखता है। इस कार्य में सिलेब्रिटीज की जीवनियां, संस्मरण, पुस्तकें, पत्रिकाओं के आलेख आदि शामिल हैं।
लेखन क्षेत्र में अंग्रेजी या जर्नलिज्म/मास कम्युनिकेशन में डिग्री की मदद से भी इस पेशे में नौकरी मिल जाती है। इसके अलावा, क्रिएटिव राइटिंग में पत्रचार कोर्स करके भी लेखन के पेशे में कदम रखा जा सकता है। उपरोक्त सभी विकल्पों के आधार पर इस क्षेत्र में शुरुआती वेतन भी 10 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह मिल सकता है। अनुभव और मेहनत से कार्य करने पर वेतन कहीं अधिक हो सकता है।
यह भी ध्यान देना जरूरी है कि लेखन में एक कोर्स करने के बाद ही कार्य समाप्त नहीं हो जाता। अपने हुनर को चमकाने का कार्य हमेशा चलता रहता है। भाषा के बारे में कौतुहल बनाए रखना, संप्रेषण के नए तरीके और नए शब्द सीखना बेहद जरूरी है। इसके लिए आम लेखन पढ़ना ही जरूरी नहीं, बल्कि विचार प्रधान लेखन पढ़ना अधिक जरूरी होता है। सामाजिक गतिविधियों के बारे में जानना भी जरूरी है।
यदि आप लेखन क्षेत्र में जाना चाहते हैं तो इसके लिए प्रतिबद्धता और धैर्य की बहुत जरूरत होती है। इन गुणों को अपनाने के बाद आप देखेंगे कि आप अपने करियर के शीर्ष पर पहुंच चुके हैं।
क्रिएटिव राइटिंग
इग्नू (मास कम्युनिकेशन/जर्नलिज्म)
संस्थान
सेंट जेवियर्स, मुंबई
आईआईएमसी, दिल्ली
आईपी कॉलेज ऑफ गल्र्स, दिल्ली यूनिवर्सिटी
दिल्ली यूनिवर्सिटी (जर्नलिज्म-ऑनर्स)
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली
आईपी यूनिवर्सिटी, दिल्ली
बॉम्बे यूनिवर्सिटी
क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बंगलौर
सिम्बॉयसिस सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्टडीज, पुणे
सेंट्रल यूनिवर्सिटी
जय हिंद कॉलेज, मुंबई
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
इंग्लिश/हिन्दी ऑनर्स
दिल्ली यूनिवर्सिटी
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (फॉरेन लैंग्वेज)
फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
बॉम्बे यूनिवर्सिटी
केंद्रीय हिन्दी संस्थान

Wednesday, December 13, 2017

मानचित्रकला क्रिएटिविटी की दुनिया

आज क्रिएटिविटी की एक अलग दुनिया है। इसमें  मानचित्रकला भी एक है। पिछले पांच-छह साल से लगातार मानचित्रकला  के क्षेत्र में ग्रोथ दिखाई दे रही है। डिमांड के अनुसार इस फील्ड में ट्रेंड प्रोफेशनल्स के लिए स्कोप भी बढ़ा है, लेकिन यह केवल उन्हीं के लिए है, जो अपने विषय के साथ-साथ इसमें प्रयोग होने वाली नई टेक्नोलॉजी में भी पूरी तरह से निपुण हैं। मानचित्र तथा विभिन्न संबंधित उपकरणों की रचना, इनके सिद्धांतों और विधियों का ज्ञान एवं अध्ययन मानचित्रकला  कहलाता है। मानचित्र के अतिरिक्त तथ्य प्रदर्शन के लिये विविध प्रकार के अन्य उपकरण, जैसे उच्चावचन मॉडल, गोलक, मानारेख आदि भी बनाए जाते हैं। मानचित्रकला में विज्ञान, सौंदर्यमीमांसा तथा तकनीक का मिश्रण है। इसका रूपांतर कार्टोग्राफी है जो कि  ग्रीक शब्द से बना है।
योग्यता
मानचित्रकार बनने के लिए बैचलर ऑफ कार्टोग्राफी करनी होती है। अर्थ साइंस और अन्य फिजिकल साइंस ग्रेजुएट स्टूडेंट्स भी इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। उन्हें अपनी बीएससी या बीटेक में एक विषय कार्टोग्राफी रखना चाहिए। अगर आप मानचित्रकार बनना चाहते हैं तो इससे संबंधित डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करके इस फील्ड में एंट्री करें। कार्टोग्राफी में बैचलर डिग्री के अलावा ज्योग्राफी, जियोलॉजी, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, अर्थ साइंस और फिजिकल साइंस के ग्रेजुएट भी इसमें करियर बना सकते हैं।
मानचित्रकार  की खूबियां
मानचित्रकार साइंटिफिकल, टेक्नोलॉजिकल और ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन को डायग्राम, चार्ट, स्प्रेडशीट और मैप के रूप में पेश करता है। इसमें डिजिटल मैपिंग और ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) सबसे ज्यादा काम में आता है। साथ ही अन्य कौशल का होना भी जरूरी है, जैसे- भूगोल के लिए जुनून, उत्कृष्ट डिजाइन और आईटी कौशल, अच्छी स्थानिक जागरूकता, विश्लेषणात्मक कौशल आदि।
अवसर
मैप का इस्तेमाल एक इंडिविजुअल से लेकर इंडस्ट्रियल पर्पज तक के लिए किया जाने लगा है, इसलिए प्लानर्स, यूटिलिटी कंपनियों, स्टेट एजेंसीज, कंस्ट्रक्शन कंपनियों, सर्वेयर्स, आर्किटेक्ट्स सभी को मानचित्रकार  की जरूरत पड़ती है। इस तरह वेदर फोरकास्टिंग, ट्रैवल एंड टूरिज्म, ज्योलॉजिकल, मिनिरल एक्सप्लोरेशन, मिल्रिटी डिपार्टमेंट, पब्लिशिंग हाउसेज में जॉब के अच्छे मौके हैं। इस कोर्स को करने के बाद रोजगार की कोई समस्या नहीं होती। बहरहाल मानचित्र के बढ़ते हुए प्रयोग को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह क्षेत्र रोजगार की दृष्टि से काफी सुरक्षित है। साथ ही इससे संबंधित निम्न नौकरियां यह भी हैं-मैपिंग तकनीशियन, मैप लाइब्रेरियन, अधिकारी चार्टिग, भौगोलिक सूचना प्रणाली अधिकारी, भूविज्ञानी, भूभौतिकीविद्, ग्राफिक डिजाइनर, जल सर्वेक्षण सर्वेयर, भूमापक सॉफ्टवेयर इंजीनियर।
टेक्निकल जानकारी
वैसे तो मैप बनाने का आर्ट तकरीबन 7 हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। पहले मैप बनाने वाले ज्यादातर वक्त फील्ड में बिताते थे और फिर हाथ से मैप बनाते थे, लेकिन अब यह काम कंप्यूटर के जरिए किया जाता है। इसलिए कंप्यूटर स्किल्स के अलावा ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम और डिजिटल मैपिंग तकनीकी जानकारी रखनी होगी।
मानचित्रकार  एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स होता है, जिसके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक है।
वेतन
शुरुआती दौर में इसमें 15 से 20 हजार रुपये महीना आसानी से कमाया जा सकता है। हालांकि यह संस्थान पर काफी निर्भर करता है। विदेश से अनुभव प्राप्त कार्टोग्राफर 5-10 लाख रुपये प्रति माह भी कमा लेते हैं।
संस्थान
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जामिया नगर, नई दिल्ली 
इंस्टीटय़ूट ऑफ जियोइन्फॉर्मेटिक्स एंड रिमोट सेंसिंग, कोलकाता
मद्रास विश्वविद्यालय
पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद
नेशनल एटलस एंड थीमैटिक मैपिंग ऑर्गनाइजेशन, कोलकाता
जिम्मेदारियां: मानचित्रकार मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र (स्थानीय अधिकारियों, सरकारी एजेंसियों, रक्षा मंत्रालय, संरक्षण ट्रस्टों और कंपनियों), सर्वेयर और प्रकाशन कंपनियों के लिए काम करते हैं। काम के मुताबिक उन्हें अपना आउटपुट देना होता है।

Monday, December 11, 2017

पृथ्वी के रहस्यों में करियर

अगर आपको पृथ्वी के रहस्यों को जानने की उत्सुकता है और आप उससे जुड़े क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो अर्थ साइंस आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। संभावनाओं के लिहाज से देखें तो इस क्षेत्र में अवसरों की कमी नहीं है।
अर्थ साइंस में मुख्यत: भूगोल, जियोलॉजी और ओशियोनोग्राफी जैसे विषय होते हैं। भूगोल में जहां पृथ्वी के एरियल डिफरेंसिएशन के बारे में जानकारी दी जाती है, वहीं इसके दूसरे कारक जैसे कि मौसम, उन्नयन कोण, जनसंख्या, भूमि का इस्तेमाल आदि का अध्ययन किया जाता है। जियोलॉजी में पृथ्वी के फिजिकल इतिहास का अध्ययन किया जाता है, जैसे पृथ्वी किस तरह की चट्टानों से बनी है और इसमें लगातार किस तरह के परिवर्तन होते रहते हैं, इसका अध्ययन किया जाता है। ओशियनोग्राफी में मुख्यत: समुद्रों का अध्ययन किया जाता है।
जियोफिजिक्स का पहली बार इस्तेमाल 1799 में विलियम लेंबटन ने एक सर्वे के लिए किया था। वहीं 1830 में गुरुत्व क्षेत्र का अध्ययन कर्नल जॉर्ज एवरेस्ट ने किया था। तेल के अन्वेषण के लिए पहली बार जियोफिजिक्स का प्रयोग 1923 में बर्मन ऑयल कॉरपोरेशन ने किया था। इलेक्ट्रिकल सर्वे पहली बार 1933 में भारत में नीलोर और सिंघबम जिले में पीपमेयर और केलबोफ द्वारा किया गया। पहली बार किसी भारतीय, एमबीआर राव ने 1937 में मैसूर में जमे सल्फाइड अयस्क के लिए इसका प्रयोग किया। जियोफिजिक्स की शिक्षा पहली बार 1949 में आंध्र और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने उपलब्ध की थी।
आंध्र विश्वविद्यालय ने शुरुआत में बीएससी और बाद में एमएससी स्तर के कोर्स को प्रारंभ किया। साथ ही इसमें हाइडोस्फीयर, जियोस्फीयर, बायोस्फीयर और क्राइसोस्फीयर के बारे में जानकारी मिलती है। बायोस्फीयर में जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और इकोलॉजी से जुड़े विषय सम्मिलित होते हैं, वहीं एटमॉस्फिरक साइंस में मौसम, मेटोलॉजी, क्लाइमेटोलॉजी से जुड़ी जानकारी दी जाती है। वहीं इसमें पृथ्वी की परतें कैसे बनीं, इसमें लगातार होने वाली हलचलों, भूकंप, ज्वालामुखी का अध्ययन किया जाता है।
कोर्स : ज्यादातर क्षेत्रों में अर्थ साइंस मास्टर लेवल का कोर्स है। इस क्षेत्र में भूगोल और जियोलॉजी में अवसरों की संभावनाएं ज्यादा हैं। भूगोल और जियोलॉजी में पोस्टग्रेजुएट प्रोगाम करने के लिहाज से यह आवश्यक है कि आपने स्नातक स्तर पर इन विषयों की पढ़ाई की हो। पोस्टग्रेजुएट स्तर पर इस कोर्स को करने के लिए किसी विशेषज्ञ क्षेत्र को लेते हैं। पढ़ाई के दौरान प्रोजेक्ट वर्क की भूमिका काफी अहम होती है। इसमें करियर बनाने के लिए आप अर्थ साइंस एमएससी टेक अप्लाइड जियोलॉजी, अप्लाइड जियोफिजिक्स में कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए स्नातक स्तर पर आपके पास जियोलॉजी और फिजिक्स होनी चाहिए। वहीं पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड एमएससी आप अप्लायड जियोलॉजी, एक्सप्लोरेशन जियोफिजिक्स में कर सकते हैं। इसमें दाखिला बारहवीं के बाद आपको आईआईटी के माध्यम से मिल सकता है। इसके अलावा बीटेक के बाद आप अप्लायड जियोलॉजी में एमटेक कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको गेट परीक्षा का स्कोर कार्ड दिखाना होगा। साथ ही ओशियोनोग्राफी और मेरिन साइंस के भी कई कोर्स संचालित होते हैं।
अवसर : इस कोर्स को करने के बाद अवसरों की कमी नहीं है। प्राइवेट और सरकारी दोनों सेक्टरों में ही जॉब की संभावनाएं मौजूद है। आप जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, ऑयल एंड नेचुरल गैस कमीशन, एटॉमिक मिनरल डिपार्टमेंट, सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड, पत्तनों और बंदरगाहों, खदान कंपनियों, स्टेट जियोलॉजिकल डिपार्टमेंट और इंडियन मेटोलॉजिकल डिपार्टमेंट में कर सकते हैं। इसके अलावा आप प्राइवेट कंपनियों जैसे कि रिलायंस, स्कमबर्गर और सेल में काम कर सकते हैं। साथ ही इसके बाद शोधार्थी, शिक्षक के रूप में भी आप अपने करियर को संवार सकते हैं। पर्यावरण से जुड़ी कई कंपनियां उनके क्वांटिटेटिव बैकग्राउंड के कारण उन्हें नौकरी देती है

Sunday, December 10, 2017

फैशन इंडस्ट्री में ऑप्शन

फैशन डिज़ाइनिंग को आम तौर पर कॅरियर का एक आप्शन भर माना जाता है. जबकि ऐसा नहीं है, दरअसल यह एक ऐसी कला है जो ड्रेस और एक्सेसरीज़ की मदद से किसी इनसान की लाइफ स्टाइल को सामने लाती है. क्या है फैशन डिजाइनिंग? मॉडर्न फैशन के अंतर्गत दो मूल विभाग हैं. पहला वर्ग है वस्त्रों को डिज़ाइन करना और दूसरा रेडी-टू-वियर अर्थात तैयार पोशाकें. इन दोनो वर्गों मे फैशन डिज़ाइनिंग का इस्तेमाल प्रथम वर्ग मे किया जाता है. वर्तमान समय मे फैशन शो इसी के बूते चल रहे हैं. इन शो के ज़रिए ही फैशन डिज़ाइनर्स की सृजनात्मकता और रचनात्मकता का पता चलता है. अहमियत रंग और बुनावट की यदि किसी को टेक्सटाइल, पैटर्न, कलर कोडिंग, टेक्सचर आदि का अच्छा ज्ञान हो तो फैशन डिज़ाइनिंग को कॅरियर के रूप मे अपनाने मे उसे बिल्कुल हिचकना नहीं चाहिए. उसकी सफलता को कोई गुंजाइश नहीं रह जाती और उसका नाम फैशन इंडस्ट्री मे तहलका मचा सकता है. खासकर भारत जैसे देश में जहाँ के फैशन मे पश्चिमी सभ्यता का भी संगम है, और इसी मिलन ने फैशन इंडस्ट्री को एक नयी दिशा और पहचान दी है. फॅशन डिज़ाइनिंग मे रंगों के संयोजन और कपड़े के आधार पर उसकी बुनाई का बड़ा महत्व है. एक तरह से ये ही फैशन डिज़ाइनिंग का सार है. इन की बिनाह पर ही लुक्स संभव हो सकते हैं. इसके बाद व्यावसायिक कुशलता, कट, डिज़ाइन, सहायक सामग्री मिलकर ही पोशाक का मूल स्वरूप तय कर सकते हैं. मौसम के साथ बदलता है फैशन का भी मिजाज यह भी ज़रूरी है की इसे पूरी विधि के साथ संपूर्ण किया जाए. प्लान तैयार करके, ब्लू प्रिंट्स ड्रॉ करने के बाद ही फाइनल आउटकम प्राप्त होगा. डिज़ाइन की सफलता स्वाभाविक रूप से उसकी फिनिशिंग फैशन डिज़ाइनिंग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ये है कि फैशन किसी ना किसी थीम पर निर्भर करता है. जैसे: मौसम, लोगों की पसंद विशेष आदि. अगर आपने गौर किया हो तो फैशन प्रमुखत: मौसम के अनुसार होता है. उदाहरण के लिए सर्दी के मौसम मे आपको उसी के अनुरूप रंग और फैब्रिक देखने को मिलेगा. इसके साथ ही ऊनी कपड़े, पोलो नेक, नीले और ब्राउन देखने को मिलेंगे. इसके विपरीत गर्मियों में आपको कैज़ुअल, कॉटन और सफ़ेद रंग मिलेंगे. चौकन्ना बनिए, क्या है इन और क्या है आउट! फैशन कभी भी स्थाई नही होता है. समय के साथ इसमे परिवर्तन होते रहते हैं. वर्तमान ने स्पेगेटी का फैशन गया और हॉल्टर नेक्स चल रहे हैं. स्कर्ट चलन में हैं और पैंटसूट्स का दौर जा चुका है. इसीलिए परिवर्तन की गति को देखते हुए, इस फील्ड मे आने वाले हर इंसान को चौकन्ना रहना होगा. और इस बात के लिए कि क्या पहना जाना चाहिए और क्या नही? फैशन का प्रमुख केंद्र सेलिब्रिटीज़, सोशलाइट्स, मॉडल्स आदि रहे हैं. ग्लैमर है तो चुनौती भी कम नहीं... कुल मिलकर फैशन डिज़ाइनिंग बहुत ही चुनौती भरा और ग्लैमर से भरपूर भरा व्यवसाय है, जिसमे राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर आयोजन होते हैं. जैसे: आईएमजी फैशन वीक, लक्मे फैशन वीक आदि. बहुत से फैशन डिज़ाइनिंग इन्स्टिट्यूट जैसे: नॅशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ डिज़ाइन, अहमदाबाद, नॅशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नालॉजी, सोफिया पॉलिटेक्निक आदि. 

Thursday, December 7, 2017

पर्यावरण विज्ञान में बनाए कॅरि‍यर

पर्यावरण को हो रही क्षति चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। यह क्षति इस सीमा तक पहुंच गई है कि हम प्रतिदिन कम के कम एक बार तो अवश्य भूमंडलीय तापन, जलवायु परिवर्तन, हिम पिघलने, अम्ल बारिश या प्रदूषण जैसे शब्द सुनने को मिलता है। पर्यावरणीय मामलों पर जानकारी बढ़ने से भूमंडल की सुरक्षा प्रत्येक राष्ट्र, उद्योग, गैर सरकारी संगठन, बुद्धिजीवी और आम व्यक्ति का सामान्य उद्देश्य एवं जिम्मेदारी बन गई है। इस परिदृश्य में पर्यावरण इंजीनियरी या विज्ञान उन व्यक्तियों के लिए करियर का श्रेष्ठ विकल्प है जो पर्यावरण की सुरक्षा तथा धारणीय विकास का दायित्व उठाना चाहते हैं।पर्यावरण विज्ञान पर्यावरण का अध्ययन है। इसमें मानव पर्यावरण संबंध तथा उसके प्रभाव सहित पर्यावरण के विभिन्न घटक तथा पहलू शामिल है। इस क्षेत्र में व्यवसायी, प्राकृतिक पर्यावरण के संकट की चुनौतियों का सामाना करने के प्रयत्न करते हैं। वे सभी व्यक्ति पर्यावरण विज्ञानी होते हैं जिनका अभियान पर्यावरण-प्रकृति पर्यावरण के विभिन्न स्तरों पर परिरक्षा, बहाली और सुधार करना होता है।शैक्षिक विषय के रूप में पर्यावरण विज्ञानी एक ऐसा अंतरविषयीय शैक्षिक क्षेत्र है जो भौतिकीय तथा जैविकीय विज्ञानों को जोड़ता है। इसमें परिस्थितिकी, भौतिकी रसायनविज्ञान, जीवविज्ञान तथा भू विज्ञान शामिल है। पर्यावरण इंजीनियरी पर्यावरण के संरक्षण से संबंधित है। यह पर्यावरण का संरक्षण करने के लिए विज्ञान तथा इंजीनियरी के सिद्धांतों का अनुप्रयोग है। पर्यावरण विज्ञान कई क्षेत्रों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संबंधित है। इस विषय के स्नातक तथा स्नातकोत्तर कई उद्योगों जैसे निर्माण, रसायनिक, विनिर्माण एवं ऊर्जा के क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।दुनिया भर के बड़े औद्योगिक संगठनों ने पर्यावरण को हो रही क्षति से बचाने के लिए सीएसआर कार्य शुरू किए हैं। पर्यावरण के परीक्षण से संबंधित सीएसआर अपनाने वाली कंपनियां पर्यावरण विज्ञान स्नातकों तथा इंजीनियरों को रोजगार उपलब्ध कराती है। इसके अतिरिक्त गैर लाभभोगी संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर
रहे हैं।
सरकारी संगठनों में अवसरों की बात करें तो प्राकृतिक संसाधनों के कार्यों से जुड़े विभाग इन व्यवसायियों को रोजगार दे सकते हैं। चाहे वे प्रदूषण नियंत्रण की नीति तैयार करने, वन एवं वन्य जीन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों की परिरक्षा या ऊराजा के वैकल्पिक स्रोतों के विकास से संबंध हों, उनके प्रयासों की स्पष्ट रूप से उपेक्षा नहीं की जा सकती। अनुसंधान, परामर्श और शिक्षा शास्त्र के भी इस क्षेत्र में अवसर हैं।
पर्यावरण विज्ञानी
इनका कार्य पर्यावरण पर मानव के कार्यकलापों के प्रभाव को समझना तथा परिस्थितिक प्रणाली को क्षति पहुंचाने वाली चुनौतियों का समाधान खोजना है। वे प्रौद्योगिकी विकास जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान करते हैं और पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रिया अपनाने का परामर्श देते हैं।
पर्यावरण इंजीनियर
वे कूड़ा प्रबंधन, लीन मैन्युफैक्चर, पुनः शोधन, उत्सर्जन नियंत्रण, पर्यावरण धारणीय जैसे इंजीनियरी पहलुओं एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य मामलों से जुड़े कार्य करते हैं। वहीं दूसरी ओर पर्यावरण समर्थक पर्यावरण मामलों तथा नीतियों पर सरकारी कार्मिकों, विधिकर्ताओं एवं संबंधित गैर सरकारी संगठनों को परामर्श देते हैं।
पर्यावरण शिक्षाविद्
ये वे शिक्षाविद् होते हैं जो पर्यावरण विज्ञान या परिस्थितिकी या जल विज्ञान आदि जैसे समवर्गी विषय पढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त पर्यावरण जीवन विज्ञानी, पर्यावरण माडलर, पर्यावरण पत्रकार एवं पर्यावरण से जुड़े प्रौद्योगिकीविद् आदि कुछ अन्य भूमिकाएं भी है।
क्रेडेंशियल्स
पर्यावरण विज्ञान विषय स्नातक (बीएससी), मास्टर (एमएससी) एवं पीएचडी स्तर पर पढ़ाया जाता है। इस विषय पर कुछ एमएससी कार्यक्रमों में पर्यावरण अध्ययन, आपदा प्रबंधन, परिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा धारणीय विकास जैसी विशेषताएं शामिल हैं। पर्यावरण इंजीनियरी विषय बीई/बीटेक तथा एमई/एमटेक कार्यक्रमों के रूप में पढ़ाया जाता है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम पर्यावरण ज्योमेटिक्स एवं जल तथा पर्यावरण प्रौद्योगिकी जैसी विशेषज्ञताओं के साथ चलाए जाते हैं। इनके अतिरिक्त सिविल इंजीनियरी, यांत्रिकी इंजीनियरी, रासायनिक इंजीनियरी, वास्ताकला, भू भौतिकी, महासागर विज्ञान, वनस्पतिविज्ञान, प्राणिविज्ञान, वन्य जीवड वायुमंडल विज्ञान तथा विधि जैसी शैक्षिक पृष्ट भूमि वाले स्नातक भी इस क्षेत्र में आ सकते हैं। यह क्षेत्र सामाजिक विज्ञान, मानविकी, जनसंख्या अद्ययन एवं प्रबंधन के स्नातकों के लिए भी खुला है।
आकर्षक वेतन
कार्य की भूमिका के आधार पर एक स्नातक डिग्री धारी उम्मीदवार 15 हजार से 30 हजार तक वेतन पा सकता है। स्नातकोत्तर व्यक्ति को करीब 35 हजार से 50 हजार रुपए तक का वेतन दिया जाता है। वैज्ञानिक या सलाहकार के रूप में कार्य करने वाले पीएचडी उम्मीदवार 50 हजार से 75 हजार तक वेतन पा सकता है।
कौशल
इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए विवरण पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे खास बात यह है कि इस क्षेत्र में सही समय पर सही निर्णय लेने के लिए उद्देश्य के बारे में निश्चिंतता, फोकस और दूर दृष्टि होना जरूरी है। सशक्त तकनीक कौशल के अतिरिक्त अच्छा संचार एवं अंतर वैयक्तिक कौशल होना आवश्यक है। समाधान निकालने के लिए तार्किक कौशल एवं संकल्पनात्मक तथा ज्ञान को प्रयोग में लाने की क्षमता होना अनिवार्य है। इस क्षेत्र में आने वाली सामान्य बाधाओं तथा असफलता के बावजूद धैर्य तथा दृढ़ता बनाए रखने की जरूरत होती है।
चुनौतियां
किसी भी अन्य क्षेत्र की तरह पर्यावरण व्यवसासियों को भी अपने दायित्वों के निर्वहन में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चुनौतियों एवं उनके निदान से संबंधित सूचना एवं अनुसंधान का अपर्याप्त होना ऐसी ही एक चुनौती है, इसके अतिरिक्त पर्यावरण मामलों की जानकारी होने के बावजूद सरकारों, निगमों एवं व्यक्तियों की प्रतिक्रिया, इन चुनौतियों का निदान करने के लिए वांछित स्तर से कहीं पीछे हैं। उन्हें समझाना तथा उनमें परिवर्तन लाना सहज नहीं है। आधारिक संरचनाओं की अपर्याप्पता तथा निधि का अभाव अन्य महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।
पर्यावरण अध्ययन एक उद्गामी, प्रभावनीय और शानदार क्षेत्र है। पर्यावरण का सामाना करने वाली आज की चुनौतियों को पूरा करने के लिए नव प्रवर्तित सोच रखने वाले प्रशिक्षत व्यवसायियों तथा पर्यावरण से जुड़े मामलों के प्रति अति संवेदनशील व्यक्तियों की आवश्यकता है। इसलिए जो प्राकृतिक पर्यावरण में सुधार लाकर मानव जीवन स्तर में वृद्धि लाना चाहते हैं। उनके लिए यह क्षेत्र करिअर का उपयुक्त विकल्प है।

Saturday, December 2, 2017

नर्सिग इंफॉर्मेटिक्स में करियर

तकनीक की सबसे अच्छी बात है कि उसे किसी भी चीज से जोड़ दीजिए, वह कुछ नया प्रस्तुत कर देती है। हेल्थकेयर में टेक्नोलॉजी के समावेश ने इस सेक्टर को तो तब्दील किया ही है, साथ ही इस फील्ड से जुड़े कॅरिअर में भी विकल्प पैदा किए हैं। नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स इसका एक उदाहरण है। नर्सिंग साइंस, कम्प्यूटर साइंस और इन्फॉर्मेशन साइंस के मिश्रण से बना नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स कोर्स मेडिकल और टेक्नोलॉजी को साथ मिलाकर करिअर में आगे बढ़ने का अवसर देता है।
क्या है नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स
नर्सिंग के साथ आईटी के इस्तेमाल ने मरीज से संबंधित सटीक आंकड़ों और उनकी देखभाल से जुड़ी सूचनाओं को एकत्र करना काफी आसान बनाया है। सरल शब्दों में समझें तो नर्सिंग प्रैक्टिस के लिए आंकड़ों, सूचनाओं और नर्सिंग से जुड़ी जानकारियों का प्रबंधन नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स करता है, ताकि बीमारी की पहचान से जुड़े फैसले लेने में आसानी हो सके। ये सभी काम इन्फॉर्मेशन स्ट्रक्चर, इन्फॉर्मेशन प्रोसेस और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की मदद से पूरे होते हैं। संक्षेप में नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स मरीजों/ उपभोक्ताओं की सीधी देखभाल के लिए प्रभावी आंकड़े जुटाने में नर्स की मदद करता है।
नर्सिंग साइंस, कम्प्यूटर साइंस और इन्फॉर्मेशन साइंस के मिश्रण से बना नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स कोर्स, मेडिकल और टेक्नोलॉजी को साथ मिलाकर करिअर में आगे बढ़ने का अवसर देता है।
प्रवेश कैसे करें
मान्यता प्राप्त संस्थानों से नर्सिंग में बैचलर डिग्री/डिप्लोमा के आधार पर कई संस्थान इस पढ़ाई के लिए प्रवेश देते हैं।
क्या पढ़ना होगा
क म्प्यूटर हार्डवेयर, सॉ फ्टवेयर, प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, नेटवर्क्‍स के साथ नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स के कॉन्सेप्ट व टर्मिनोलॉजी, केयर मैनेजमेंट प्रिंसिपल आदि का अध्ययन इस विषय की पढ़ाई में शामिल है। कहां पढ़ें - संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ स्कूल ऑफ टेलीमेडिसिन एंड बायोमेडिकल इन्फॉर्मेटिक्स में आप नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स में डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया में इंटीग्रेटिड एमएसी एंड पीएचडी में इलेक्टिव विषय के रूप में नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स पढ़ी जा सकती है।
नर्सिंग इन्फॉर्मेटिक्स नर्स, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से लैस रजिस्टर्ड नर्स होते हैं, जो नर्सिंग और क म्प्यूटर साइंस के समावेश से स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के लिए क्लीनिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम को डिजाइन, डेवलप और इम्प्लीमेंट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपने नर्सिंग ज्ञान की बदौलत ये पेशेवर हेल्थकेयर सिस्टम की सफल डिजाइनिंग और इ म्पलीमेंटेशन के लिए बेहद अहम होते हैं। दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों को सिस्टम के इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करना, इस सिस्टम के माध्यम से रोगी का मेडिकल रिकॉर्ड तैयार करना और रोगी से संबंधित सभी जानकारियों को अपडेट रखना भी इन्हीं की जि मेदारी होती है। एक इन्फॉर्मेटिक्स नर्स का लक्ष्य ऐसे सिस्टम को डिजाइन और इ म्पलीमेंट करना होता है, जो डॉक्यूमेंटेशन एक्यूरेसी में सुधार करे, अनावश्यक काम को खत्म करे, एक्यूरेसी बढ़ाए और क्लीनिकल डाटा एनालिसिस को इनेबल बनाए। इन्फॉर्मेटिक्स नर्स ऐसे रिसोर्स, डिवाइस और मेथड तैयार करते हैं, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में सिक्योरिंग, स्टोरेज, र्रिटीवल और इन्फॉर्मेशन का सही इस्तेमाल हो सके। एक पेशेवर की भूमिकाएं अलग- अलग क्षेत्रों में अलग- अलग होती हैं। वे बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर, हेल्थ इन्फॉर्मेशन मैनेजर किसी संस्थान में नियुक्त हो सकते हैं, नर्सो के लिए सॉ फ्टवेयर डिजाइन कर सकते हैं या उसमें मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, उनके कामों में नर्सों को प्रशिक्षित करना, किसी संस्थान के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम लिखना या क्लीनिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम इ म्प्लीमेंट करना भी शामिल होता है।

Friday, December 1, 2017

प्रयोगशाला के बाहर भी अच्छे अवसर

साइंस के हरेक विषय की खासियत है कि वह अपनी अलग-अलग शाखाओं में कॅरिअर और रिसर्च के ढेरों बेहतरीन अवसर देता है। केमिस्ट्री भी ऐसा ही एक विषय है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाला यह विज्ञान नौकरी के मौकों से भरपूर है। साथ ही परम्परागत सोच रखने वालों को भी अब यह समझ आ गया है कि केमिस्ट्री प्रयोगशाला के बाहर भी ढेरों अवसर पैदा कर रही है और इंडस्ट्री आधारित बेहतरीन जॉब प्रोफाइल्स उपलब्ध करवा रही है। ऐसे में भविष्य के लिहाज से यह एक सुरक्षित विकल्प है।
क्या पढ़ना होगा
केमिस्ट्री में रुचि रखने वाले स्टूडेंट्स 12वीं कक्षा(साइंस) अच्छे अंकों से पास करने के बाद केमिकल साइंस में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड मास्टर्स प्रोग्राम का विकल्प चुन सकते हैं या फिर केमिस्ट्री में बीएससी/बीएससी(ऑनर्स)डिग्री कोर्स चुन सकते हैं। आगे चलकर एनालिटिकल केमिस्ट्री, इनऑर्गनिक केमिस्ट्री, हाइड्रोकेमिस्ट्री, फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री, पॉलिमर केमिस्ट्री, बायोकेमिस्ट्री, मेडिकल बायोकेमिस्ट्री और टेक्सटाइल केमिस्ट्री में स्पेशलाइजेशन के जरिए आप एक मजबूत करियर की शुरुआत कर सकते हैं।
काम और रोजगार के अवसर :लैब के बाहर और भीतर केमिस्ट्री अपने आपमें काम के अनेक अवसर समेटे हुए है-
ऊर्जा एवं पर्यावरण
रसायनों के मिश्रण या रासायनिक प्रतिक्रियाओं से ऊर्जा पैदा करने के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। इन बदलावों ने बड़ी संख्या में रसायन तकनीशियनों की बाजार मांग पैदा कर दी है। ढेरों कंपनियां ऐसी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए कैम्पस प्लेसमेंट आयोजित रही हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर लगातार पर्यावरण को नुकसान न करने वाले उत्पाद बनाने का दबाव बना हुआ है। ऐसे में संबंधित रसायनों पर लगातार रिसर्च हो रहा है अाैर इस तरह के उत्पाद बनाने वाले प्रतिभाशाली प्रोफेशनल्स की जरूरत बढ़ती जा रही है। खासकर रेजीन उत्पाद संबंधी क्षेत्रों में उत्कृष्ट रसायनविद् को बढ़िया पैकेज मिल रहा है।
लाइफ स्टाइल एंड रिक्रिएशन
नए उत्पादों की खोज और पुराने उत्पादों को बेहतर बनाने की दौड़ ने नए रसायनों के मिश्रण और आइडियाज के लिए बाजार में जगह बनाई है। लाइफ स्टाइल प्रॉडक्ट्स जिनमें काॅस्मेटिक्स से लेकर एनर्जी ड्रिंक्स तक शामिल हैं, ने केमिस्ट्री स्टूडेंट्स के लिए अच्छे मौके उत्पन्न किए हैं। इस क्षेत्र में रुचि रखने वालों को हाउस होल्ड गुड्स साइंटिस्ट, क्वालिटी एश्योरेंस केमिस्ट, एप्लीकेशन्स केमिस्ट और रिसर्चर जैसे पदों पर काम करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। 
ह्यूमन हेल्थ
रक्षा उत्पादों के बाद ड्रग एंड फार्मा इंडस्ट्री दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाला उद्योग है। इसी के चलते फार्मेसी और ड्रग इंडस्ट्री में फार्मासिस्ट और ड्रगिस्ट की भारी मांग मार्केट में लगातार बनी रहने वाली है। इसके अलावा मेडिसिनल केमिस्ट, एसोसिएट रिसर्चर, एनालिटिकल साइंटिस्ट और पाॅलिसी रिसर्चर जैसे पदों पर भी रसायनविदों की जरूरत रहती है।
जॉब प्रोफाइल
रसायन विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में पारंगत विशेषज्ञ एनालिटिकल केमिस्ट, शिक्षक, लैब केमिस्ट, प्रॉडक्शन केमिस्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट मैनेजर, आर एंड डी डायरेक्टर, केमिकल इंजीनियरिंग एसोसिएट, बायोमेडिकल केमिस्ट, इंडस्ट्रियल रिसर्च साइंटिस्ट, मैटेरियल टेक्नोलाॅजिस्ट, क्वालिटी कंट्रोलर, प्रॉडक्शन आॅफिसर और सेफ्टी हेल्थ एंड इन्वाइरॅनमेंट स्पेशलिस्ट जैसे पदों पर काम कर सकते हैं। फार्मास्यूटिकल, एग्रोकेमिकल, पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक मैन्यूफैक्चरिंग, केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, पेंट मैन्यूफैक्चरिंग, टैक्सटाइल्स, फोरेंसिक और सिरेमिक्स जैसी इंडस्ट्रीज में पेशेवरों की मांग बनी हुई है।

यहां से कर सकते हैं कोर्स
>>यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई, मुंबई
>>दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
>>सेंट जेवियर्स काॅलेज, मुम्बई
>>कोचीन यूनिवर्सिटी आॅफ साइंस एंड टेक्नोलाॅजी, केरल
>>इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी, खड़गपुर
>>लोयोला काॅलेज, चेन्नई

Wednesday, November 29, 2017

एस्ट्रोनॉमी में करियर

एस्ट्रोनॉमी के फील्ड में जाने के लिए फिजिक्स और मैथ्स के साथ ग्रेजुएशन करना जरूरी है। पीजी लेवल पर आपके पास विषय के तौर पर एस्ट्रोनॉमी या फिजिक्स का होना जरूरी है। अगर आपने इसमें पीएच.डी. कर रखी है तो और भी अच्छी बात है। एस्ट्रोनॉमर या एस्ट्रोनॉट आदि बनने या स्पेस रिसर्च में काम करने के लिए आपको ज्वाइंट एंट्रेंस स्क्रीनिंग टेस्ट (जेईएसटी) देना पड़ेगा। पीजी लेवल पर एस्ट्रोनॉमी या एस्ट्रोफिजिक्स में एमएससी के लिए देश में नीचे दिए गए संस्थान उपलब्ध हैं।

इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, बेंग्लुरू, www.iiap.ernet.in
आंध्र यूनिवर्सिटी, विशाखापट्टनम
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ जियोमैग्नेटिज्म, www.iigm.res.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस, बेंग्लुरू, www.iisc.ernet.in
इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, गणेशखिंड, पुणे www.iucaa.ernet.in
सत्येन्द्र नाथ बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंस, कोलकाता, www.bose.res.in
इंस्टीटय़ूट ऑफ फिजिक्स, भुवनेश्वर www.iopb.res.in
नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स, टाटा इंस्टीटय़ूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) पुणे और बेंग्लुरू www.tifr.res.in
आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीटयूट ऑफ ऑब्सव्रेशनल साइंसेज, नैनीताल, www.csr.ernet.in
बिरला इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज, पिलानी
ओस्मानिया यूनिवर्सिटी, सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडी इन एस्ट्रोनॉमी, हैदराबाद
पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला
इसके अलावा इग्नू से फिजिक्स में ग्रेजुएशन, पीजी और डॉक्टरेट कर सकते हैं। इग्नू के अलावा भी डिस्टेंस एजुकेशन के अधिकृत केंद्रों से इसकी शिक्षा ले सकते हैं। इग्नू एस्ट्रोफिजिक्स में एमएससी- पीएचडी भी
कराता है।
मैं दसवीं का छात्र हूं और लॉन टेनिस में करियर बनाना चाहता हूं। मुझे सरकारी और प्राइवेट स्पोर्ट्स एकेडमी के बारे में बताएं। साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), ओएनजीसी, पीएसपीबी और झारखंड की सेंट्रल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में दाखिले की संभावनाओं की जानकारी भी दें।
सुधांशु, वैशाली
देश में अलग -अलग खेलों के लिए कई प्राइवेट एकेडमी हैं, जैसे टेनिस के लिए 
महेश भूपति टेनिस एकेडमी
टीम टेनिस
पेनिनसुला टेनिस एकेडमी, नई दिल्ली 
सीरी फोर्ट, नई दिल्ली 
नेशनल टेनिस एकेडमी, गुड़गांव
एस टेनिस एकेडमी, अहमदाबाद

www.acetennisacademy.com
एसपीटी स्पोर्ट्स  www.sptindia.com
ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन, नई दिल्ली
मैं ग्यारहवीं का छात्र हूं और एनडीए में करियर बनाना चाहता हूं। इसके लिए कौन-सी परीक्षा पास करनी होती है। यह परीक्षा क्या मैं ग्यारहवीं में भी दे सकता हूं । मुझे यह भी बताएं कि उत्तराखंड राज्य में यह परीक्षा कहां कराई जाती है?
दिपांशु, अल्मोड़ा


आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में भर्ती के लिए यूपीएससी साल में दो बार एनडीए की परीक्षा आयोजित करता है। उसके लिए निम्न योग्यताओं का होना जरूरी है
अभ्यर्थी को भारत (कुछ शर्तों के साथ नेपाल और भूटान के लोग भी) का नागरिक होना चाहिए।
उसे अविवाहित होना चाहिए।
उसकी उम्र सोलह साल छह महीने से लेकर उन्नीस साल के बीच होनी चाहिए।
आर्मी में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी का इंटर पास होना जरूरी है। अगर नेवी या एयर फोर्स में जाना चाहते हैं तो इंटर में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स सब्जेक्ट का होना अनिवार्य है।
इंटर की परीक्षा में शामिल होने जा रहे लोग भी एनडीए का एग्जाम दे सकते हैं। एग्जाम के दो हिस्से होते हैं, पहला लिखित और दूसरा इंटरव्यू और फिजिकल ट्रेनिंग। लिखित परीक्षा पास करने के बाद आप इंटरव्यू और फिजिकल ट्रेनिंग के पात्र हो जाते हैं। ग्रेजुएशन के बाद सीडीएस एग्जाम के जरिए भी सेना में शामिल हुआ जा सकता है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इसका परीक्षा केंद्र है। अधिक जानकारी के लिए इसकी वेबसाइट (www.upsc.gov.in) देख सकते हैं।
मैंने सीबीएसई बोर्ड से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स सब्जेक्ट्स से इस साल 88% से इंटर पास किया है। मैं मरीन इंजीनियरिंग में करियर बनाना चाहता हूं। मुझे बताएं कि इस कोर्स के लिए कौन-कौन से संस्थान हैं और उनमें दाखिले की क्या प्रक्रिया है? 
आशीष कुमार, हजारीबाग
मरीन इंजीनियरिंग में समुद्री जहाज के निर्माण और इसके काम करने के तरीके सिखाए जाते हैं। एक मरीन इंजीनियर को समुद्र में जहाज को पूरी तरह कंट्रोल करना आना चाहिए। मरीन इंजीनियरिंग में डिग्री लेने के बाद मर्चेट नेवी या किसी शिपिंग कंपनी में काम किया जा सकता है। इसके अलावा इंजन प्रोडक्शन फर्म्स, शिप बिल्डिंग फर्म्स, रिसर्च बॉडीज और शिप डिजाइन फर्म्स में भी रोजगार के अवसर मिलते हैं। मरीन इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक करने के बाद असिस्टेंट इंजीनियर की परीक्षा दे सकते हैं। इसमें बेचलर डिग्री के लिए पीसीएम ग्रुप में इंग्लिश के साथ इंटर करना जरूरी है। उसके बाद इन संस्थानों से चार साल का कोर्स कर सकते हैं।
मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीटय़ूट, कोलकाता, http://www.merical.ac.in
मरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीटय़ूट, मुंबई
इंटरनेशनल मरीन कम्युनिकेशन सेंटर, चेन्नई
इंडियन मरीन कॉलेज, हैदराबाद

Saturday, November 25, 2017

राजनीतिक विज्ञान में करियर

राजनीति विज्ञान एक सामाजिक विज्ञान है, जो राजनीति के सिद्धांत और व्यवहार तथा राजनीतिक व्यवस्था के विवेचन एवं विश्लेषण से जुड़ा हुआ है। इस विषय के कई उपभाग हैं । जैसे-राजनीतिक सिद्धांत, लोक नीति, राष्ट्रीय राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध,  तुलनात्मक राजनीति आदि। इससे पता चलता है कि यह विषय व्यापक क्षेत्र को कवर करता है तथा इस विषय का अध्ययन करने के बाद विविध क्षेत्रों में एवं विभिन्न भूमिकाओं में कार्य करने का अवसर मिल सकता है…
राजनीति अपने पुरातन स्वरूप में बड़े बदलाव कर रही है, जो पूरी दुनिया की सामाजिक संरचनाओं को भी प्रभावित कर रही है। ढेरों ऐसे संगठन इस बदलाव को समझने और नई रणनीतियों को बनाने के लिए बन रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। तमाम राजनीतिक दल अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए नए तरीके और आइडियाज पर काम कर रहे हैं। थिंक टैंक और संगठन तक में आधुनिक तौर तरीकों से बदलाव किए जा रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की बाजार में मांग पैदा हो रही है जो इन बदलावों को बेहतर तरीके से समझते हों या राजनीतिक समझ को बेहतर करने में सक्षम हों। पॉलिटिकल साइंटिस्ट और थिंक टैंक जैसे नए पदनामों के साथ राजनीति विज्ञान ने आधुनिक दुनिया में बेहतर करियर बनाने के ढेरों नए अवसर पैदा किए हैं। राजनीतिक सिद्धांत, लोकनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक संबंध और तुलनात्मक राजनीति जैसे क्षेत्र उनका स्वागत करने के लिए हाथ पसारे खड़े हैं।
क्या पढ़ना होगा
राजनीति विज्ञान में स्नातक के अलावा इंटेलेक्चुअल प्रॅपर्टी राइट्स, इंटरनेशनल रिलेशंस, लोकल गवर्नेंस, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, पॉलिटिक्स, पब्लिक पॉलिसी में स्नातकोत्तर, एमफिल और पीएचडी की जा सकती है। क्षेत्र विशेष में अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए मिनिस्ट्री, पंचायती राज, इंडियन पॉलिटिकल सिस्टम और गुड गवर्नेंस में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज भी भारत में उपलब्ध हैं।
सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं
राजनीति विज्ञान सिर्फ  विचार समझने और विकसित करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि उसे प्रचारित और प्रसारित करने तक आगे बढ़ चुकी है। यह जनमत निर्माण के लिए सोचने से आगे लिखने और बेहतर वक्ता होने तक की मांग करती है इसलिए इस क्षेत्र में करियर निर्माण के लिए सोचने वाले युवाओं को अपने पूरे व्यक्तित्व पर भी काम करना होगा। इस विधा में महारत रखने वाले उम्मीदवारों के लिए लॉ फर्म्स, मार्केटिंग रिसर्च फम्स, फील्ड रिसर्च, लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी जैसे पुलिस एवं न्यायालय आदि, पब्लिशिंग फर्म्स, राजनीतिक दल और विभिन्न व्यवसायों में ढेरों बेहतरीन जॉब ऑफर्स इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा वे पॉलिसी एनालिस्ट, पॉलिटिकल कंमेटेटर, पॉलिटिकल राइटर, सर्वे कंडक्टर, प्री पोल एनालिस्ट, पब्लिक अफेयर्स रिसर्च एनालिस्ट, पब्लिक ओपिनियन एनालिस्ट, कैम्पेन वर्कर, कैम्पेन डिजाइनर, विभिन्न मीडिया समूहों या अखबार में पॉलिटिकल कॉरसपॉन्डेंट या बिजनेस एडमिनिस्ट्रेटर जैसे पद संभाल सकते हैं।
यहां से कर सकते हैं कोर्स
*     हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला
*     पीजी कालेज, धर्मशाला(हिमाचल प्रदेश)
*     राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर
*     राजकीय सनातकोत्तर महाविद्यालय, सरकाघाट
*     राजकीय महाविद्यालय, बैजनाथ
*     दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
*     हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद
*     कलकत्ता विश्वविद्यालय, प. बंगाल
*     पुणे श्विवविद्यालय, पुणे
*     बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
*     हिंदू कालेज, दिल्ली
*     पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
राजनीति विज्ञान का अन्य समाज विज्ञानों से संबंध
समाजशास्त्रों में पारस्परिक अंतर्निर्भरता पाई जाती है। कोई भी एक समाज विज्ञान समाज का उचित एवं समग्र अध्ययन नहीं कर सकता। इसलिए तमाम समाजशास्त्र आपस में संबंधित हैं और अंतर्शास्त्रीय अध्ययन पद्धति ने फिर से समाजशास्त्रों के इस संबंध को उभार दिया है। आज राजनीतिक अर्थशास्त्र, राजनीतिक नैतिकता, राजनीतिक इतिहास, राजनीतिक समाजशास्त्र, राजनीतिक मनोविज्ञान तथा राजनीतिक भूगोल आदि विभिन्न राजनीति विज्ञान की नई शाखाओं का खुलना इस बात का प्रतीक है कि राजनीति विज्ञान अन्य समाज विज्ञानों से संबंध स्थापित किए बिना नहीं चल सकता।
बदलता स्वरूप
यूनानी विचारकों के समय से लेकर आधुनिक काल तक के विभिन्न चिन्तकों, सिद्धांतवेत्ताओं और विश्लेषकों के योगदानों से राजनीति विज्ञान के रूप, अध्ययन सामग्री एवं उसकी परंपराएं समय-समय पर परिवर्तित होती रही हैं। तद्नुरूप इस विषय का निरंतर विकास होता रहा है। इस विकासक्रम में राजनीति विज्ञान के अध्ययन के संबंध में दो प्रमुख दृष्टिकोणों का उदय हुआ है। परंपरागत दृष्टिकोण एवं आधुनिक दृष्टिकोण। पारंपरिक या परंपरागत दृष्टिकोण राज्य प्रधानता का परिचय देता है जबकि आधुनिक दृष्टिकोण प्रक्रिया प्रधानता का।
वेतनमान
इस क्षेत्र में वेतनमान इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस पद पद हैं और क्या आप का क्षेत्र सरकारी है या निजी क्षेत्र में आप कार्यरत हैं। स्कूल में अध्यापन कार्य में आरंभ में 10 से 15 हजार तक वेतन मिलता है। कालेज में 35 से 40 हजार तक वेतनमान है।
महत्त्व
राजनीति विज्ञान का महत्त्व इस तथ्य से प्रकट होता है कि आज राजनीतिक प्रक्रिया का अध्ययन राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की राजनीति को समझने के लिए आवश्यक है। प्रक्रिया के अध्ययन से ही वास्तविक राजनीति एवं उनके भीतर अवस्थित तथ्यों का ज्ञान संभव है।
अवसरों की  भरमार
सिविल सेवा
राजनीति विज्ञान सिविल सेवा और राज्य सिविल परीक्षाओं में एक ऑप्शनल विषय के रूप में काफी लोकप्रिय है। पढ़ने में सुविधाजनक होने, आसानी से पाठ्य सामग्री और कोचिंग की सुविधा उपलब्ध होने के कारण कम परिश्रम में अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। सामान्य अध्ययन (जनरल स्टडी) प्री एवं मुख्य परीक्षा के 25 फीसदी प्रश्न राजनीति शास्त्र से जुड़े होते हैं। इसके अलावा राजनीति विज्ञान देश-विदेश की घटनाओं के विश्लेषण के साथ ही निबंध लेखन को भी आसान बनाता है।
कानून
पॉलिटिकल साइंस का बैकग्राउंड लॉ करने के लिए अच्छा माना जाता है। एलएलबी करके कानून के क्षेत्र में स्थान बना सकते हैं।
समाज सेवा
राजनीति विज्ञान का अध्ययन समाज के विभिन्न अवयव, राजनीति संगठन आदि को समझने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है और इस प्रकार यह समाज सेवा और राजनीति के क्षेत्र में कार्य करने के लिए बहुत ही सहयोगी साबित हो सकता है। यह एक ऐसा विषय है, जो समाज सेवा के लिए प्रेरित करता है। समाज सेवा के जरिए जनप्रतिनिधि बना जा सकता है और लोकतंत्र को मजबूत करने में एक सशक्त भूमिका अदा की जा सकती है। राजनीति विज्ञान विषय में ग्रेजुएट होने पर एक बेहतर वक्ता तथा जनप्रतिनिधि बनने में सुविधा होती है।
राजनीतिक विश्लेषक
राजनीति विज्ञान में पीजी की डिग्री हासिल करने एवं राजनीतिक दर्शन, अंतरराष्ट्रीय संबंध, संविधान में दिलचस्पी रखने वाला राजनीतिक विश्लेषक बन सकता है। दूतावासों और स्वयंसेवी संगठनों में भी बेहतर अवसर हो सकते हैं। उच्च शिक्षा हासिल करके चुनाव विश्लेषक भी बना जा सकता है। इसके अलावा एमफिल या पीएचडी करने और किसी प्रोजेक्ट का अनुभव हासिल करने के बाद स्वतंत्र रूप से किसी सामाजिक विषय पर प्रोजेक्ट अपने हाथ में ले सकते हैं। कई राजनीतिक अनुसंधान एवं विश्लेषण संस्थानों में प्रतिष्ठित पदों पर कार्य करने का अवसर मिल सकता है।
उच्च शिक्षा में संभावनाएं
यदि राजनीति विज्ञान से बीए ऑनर्स करने के बाद बीएड करते हैं, तो किसी सरकारी या गैर सरकारी संस्थानों में इस विषय के शिक्षक बन सकते हैं। वहीं एमए करने के बाद नेट व पीएचडी करके किसी भी कालेज में लेक्चरर या प्रोफेसर भी बन सकते हैं।
पत्रकारिता
राजनीति विज्ञान का ज्ञान देश-विदेश की घटनाओं का विश्लेषण एवं समीक्षा करने में सक्षम बनाता है। मास कम्युनिकेशन और पत्रकारिता का कोर्स करके प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में नौकरी की तलाश की जा सकती है।
और भी हैं विकल्प
राजनीति विज्ञान से ऑनर्स करने के बाद बैंक, न्यायिक सेवा, भारतीय प्रशासनिक सेवा, विदेश सेवा, मानवाधिकार, वकालत, एमबीए, रिसर्च इंस्टीच्यूट, वर्ल्ड ट्रेड आर्र्गेनाइजेशन, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, पब्लिक रिलेशन आदि में भी नौकरी की तलाश की जा सकती है।
किस तरह का काम
किसी भी विषय की पढ़ाई करने वाला छात्र राजनीति विज्ञान को अपना सकता है। इसके लिए देश से संबंधित मसलों की गहन खोज-परख तथा जांच-पड़ताल करने की जरूरत होती है। राजनीति विज्ञान विभिन्न सरकारी विभागों की वित्तीय गतिविधियों पर नियंत्रण करने का अवसर देता है। बजट और उसकी प्रक्रिया के निर्धारण, उसकी विशेषताओं, उद्देश्यों तथा बजट के विभिन्न सिद्घांतों तथा बजट लागू करने में राजनीतिक विज्ञान का अपना महत्त्व होता है। यह कर्मचारी को संस्थान की अवधारणा तथा संगठन में मानव व्यवहार के आकलन में भी मदद करता है।
अर्थ एवं परिभाषा
‘राजनीति’ का पर्यायवाची अंग्रेजी शब्द ‘पॉलिटिक्स’ यूनानी भाषा के ‘पॉलिस’ शब्द से बना है जिसका अर्थ नगर अथवा राज्य है। प्राचीन यूनान में प्रत्येक नगर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में संगठित होता था और पॉलिटिक्स शब्द से उन नगर राज्यों से संबंधित शासन की विद्या का बोध होता था। धीरे-धीरे नगर राज्यों का स्थान राष्ट्रीय राज्यों ने ले लिया अतः राजनीति भी राज्य के विस्तृत रूप से संबंधित विद्या हो गई। संक्षेप में राजनीति विज्ञान के अन्तर्गत राज्य, सरकार तथा अन्य सम्बंधित संगठनों व संस्थाओं काए मानव के राजनीतिक जीवन के संदर्भ में अध्ययन किया जाता है।
परिचय
राजनीति विज्ञान का उद्भव अत्यन्त प्राचीन है। यूनानी विचारक अरस्तू को राजनीति विज्ञान का पितामह कहा जाता है। यूनानी चिंतन में प्लेटो का आदर्शवाद एवं अरस्तू का बुद्धिवाद समाहित है। राजनीति शास्त्र या राजनीति विज्ञान अत्यन्त प्राचीन विषय है। प्रारंभ में इसे स्वतंत्र विषय के रूप में नहीं स्वीकारा गया। राजनीति विज्ञान का अध्ययन नीतिशास्त्र, दर्शनशास्त्र, इतिहास,एवं विधि शास्त्र आदि की अवधारणाओं के आधार पर ही करने की परंपरा थी। आधुनिक समय में इसे न केवल स्वतंत्र विषय के रूप में स्वीकारा गया अपितु सामाजिक विज्ञानों के सन्दर्भों में इसका पर्याप्त विकास भी हुआ।
शैक्षणिक योग्यता
12वीं के बाद राजनीति विज्ञान में स्नातक डिग्री ली जा सकती है और उसके बाद स्नातकोत्तर किया जा सकता है। पीएचडी का विकल्प भी इसमें खुला है। जो विद्यार्थी कला क्षेत्र में स्नातक करना चाहते हैं, वे राजनीति विज्ञान में ऑनर्स कर सकते हैं या पास कोर्स में एक विषय के रूप में इसे रख सकते हैं।
अध्ययन का विस्तृत क्षेत्र
राजनीति विज्ञान एक सामाजिक अध्ययन  है जो सरकार और राजनीति के अध्ययन से संबंधित है। राजनीति विज्ञान में ये तमाम बातें शामिल हैं। राजनीतिक चिंतन, राजनीतिक सिद्धांत, राजनीतिक दर्शन, राजनीतिक विचारधारा, संस्थागत या संरचनागत ढांचा, तुलनात्मक राजनीति, लोक प्रशासन, अंतरराष्ट्रीय कानून और संगठन आदि।

Thursday, November 23, 2017

ट्रांसपोर्ट में करियर

पिछले कुछ सालों में परिवहन के क्षेत्र में काफी विकास हुआ है और इसी के मददेनजर रोजगार के भी काफी मौके सामने आए हैं. ट्रांसपोर्ट सेक्शन में भारी निवेश के चलते बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में लोगों को नौकरी पर रखा जा रहा है. अब इसमें करियर के लिहाज से प्राइवेट और सरकारी जॉब्स की काफी ऐसी पॉजिशन्स भी हैं जिसकी आज के युवाओं को दरकार है. 
रोड टांसपोर्ट क्लर्क: रोड टांसपोर्ट कंपनियों के प्रशासनिक काम के लिए क्लर्क की जरूरत होती है. इनके कामों में ग्राहकों से पूछताछ, लेखा-जोखा, स्टाफ का प्रबंधन और यात्रियों के सड़क परिवहन से जुडें प्रशासनिक काम शामिल होते हैं. इसके लिए समय-समय पर सरकार वैकेंसी निकालती है.
रोड टांसपोर्ट मैनेजर:रोड टांसपोर्ट मैनेजर का काम वाहनों के सही और सुरक्षित संचालन करने का होता है.संक्षेप में कहें तो इसका काम यात्रियों की सुरक्षा का है.
रेल मार्ग संचालक: रेलमार्ग संचालक माल गाड़ी और यात्री गाड़ी दोनों के बीच कोऑर्डिनेट करता है.
रेलवे इंजीनियर: रेलवे इंजीनियर रेलमार्गों, पुलों पटरियों के निर्माण जैसी टेक्निकल गतिविधियों से जुड़े होते हैं.
लोकोमोटिव इंजीनियर : लोकोमोटिव इंजीनियर एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन में चलने वाली यात्री और माल गाड़ी में अपने लोकोमोटिव की यांत्रिक स्थिति की जांच जैसे काम करता है.
आव्रजन और सीमा शुल्क विभाग: आव्रजन विभाग पर बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर पहुंचने वाले लोगों के प्रवेश के अधिकार की जांच करना होता है. इसी तरह सीमा शुल्क विभाग बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर ऐसी वस्तुओं की आवाजाही की जांच करता है जिन पर शुल्क लगता है.

इसके अलावा विमानन और मर्चेंट नेवी, ट्रांसपोर्ट डिजाइनर, ट्रांसपोर्ट प्लानर भी शामिल हैं.
कहां से करें कोर्स
ट्रांसपोर्ट सेक्शन में टेकेनिकल नॉलेज की जरूरत होती है. इसलिए इसकी पढ़ाई अच्छे संस्थान से करनी चाहिए.
(1) एरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक, परिवहन प्रणाली इंजीनियरिंग में एमटेक और पीएचडी जैसे प्रोग्राम्स आईआईटी में कराए जाते हैं.
(2) ट्रांसपोर्ट प्लानिंग में बैचलर्स और मास्टर्स डिग्री योजना और वास्तुकला  विश्वविद्यालय से हासिल कर सकते हैं.
(3) ट्रांसपोर्ट और ऑटोमोबाइल डिजाइन में पीजी डिप्लोमा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद से कर सकते हैं. 
(4) रेल परिवहन और प्रबंधन में डिप्लोमा इंस्टीट्यूट ऑफ रेल ट्रांसपोर्ट से कर सकते हैं.
(5) लॉजिस्टिक्स और नौवहन, लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह में डिप्लोमा इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ लॉजिस्टिक्स, चेन्नई से भी कर सकते हैं.