Friday, January 27, 2023

Counting And Auditing में बनाएं करियर

इस क्षेत्र पर अभी तक किसी भी तरह की मंदी का कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। इसका कारण यह है कि मंदी और तेजी दोनों समय में कंपनियों को इनकी जरूरत पड़ती है। काउंटिंग और ऑडिटिंग एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी जरूरत सभी को पड़ती है, इसमें आपको किसी संस्था में रोजाना होने वाले लेन-देन का हिसाब रखने के अलावा अकाउंटिंग बुक्स की समीक्षा करनी होती है। कंपनियां ऑडिटिंग खुद करती हैं या इसके लिए किसी बाहरी संस्था की मदद लेती हैं।

लेकिन इन पेशों में हिसाब-किताब ही नहीं और भी काफी कुछ करना होता है। मोटे तौर पर अकाउंटेंट्स या ऑडिटर्स किसी कंपनी का वित्तीय रिकॉर्ड तैयार करते हैं और उसकी जांच करते हैं। अकाउंटेंट के किए काम की जांच करना ही ऑडिटर का मुख्य काम होता है।
एजुकेशन व योग्‍यता
इस क्षेत्र में आने के लिए आपका 12वीं पास करना जरूरी है। इसके बाद आप 12वीं में प्राप्त अंकों और तय मापदंडों के आधार पर बनी मेरिट लिस्ट के अनुसार किसी कॉलेज में बैचलर या डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। वहीं कुछ प्रवेश परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन व साक्षात्कार के बाद प्रवेश देते हैं। आगे अकाउंटेंट या ऑडिटर के पेशे में बेहतर मुकाम पाने के लिए लाइसेंस व सर्टिफिकेशन अर्जित करने पड़ते हैं।
आईसीएआई सर्टिफिकेशन (ICAI Certification)
अगर आप चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहते हैं तो 12वीं पास करने के बाद कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट दे सकते हैं। यह परीक्षा साल में दो बार जून और दिसंबर में आयोजित की जाती है। ग्रेजुएशन के आधार पर प्रवेश लेने वाले छात्रों को सीपीटी देना तब अनिवार्य होता है, जब कॉमर्स ग्रेजुएट ने 55 फीसदी से कम अंक प्राप्त किए हों या साइंस व आर्ट्स ग्रेजुएट ने 60 फीसदी से कम अंक प्राप्त किए हों।
सर्टिफाइड इंटरनल ऑडिटर (Certified Internal Auditor)
वहीं अगर आप अन्‍य देशों में एक ऑडिटर के तौर पर काम करने के लिए योग्य होना चाहते हैं तो आपके पास सर्टिफाइड इंटरनल ऑडिटर होना जरूरी है। यह सर्टिफिकेशन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल ऑडिटर्स द्वारा कराया जाता है।
एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट्स (Association of Chartered Certified Accountants)
वहीं अगर आपने एसीसीए कोर्स किया तो आप अकाउंटिंग और फाइनेंस में बेहतर प्रबंधन के लिए तैयार हो सकते हैं। 12वीं पास के लिए इस सर्टिफिकेशन की अवधि तीन साल है। कॉमर्स ग्रेजुएट के लिए इसकी अवधि दो से ढाई साल होती है। इस सर्टिफिकेशन के जरिए मैनेजमेंट अकाउंटिंग एग्जीक्यूटिव, अकाउंट एग्जीक्यूटिव, क्रेडिट असिस्टेंट, असिस्टेंट फ्यूचर्स ट्रेड, असिस्टेंट टैक्स ऑफिसर आदि पदों पर काम मिलेगा।

सर्टिफाइड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (Certified Management Accountant)
किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड पर नजर रखने वाले अकाउंटेंट का सर्टिफाइड मैनेजमेंट अकाउंटेंट होना अनिवार्य है। सीएमए अमेरिका के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अकाउंटेंट प्रमाणपत्र जारी करता है और इसकी अवधि छह माह की होती है। जबकि सीएमए इंडिया के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया प्रमाणपत्र जारी करता है, जिसका कोर्स तीन से चार साल की अवधि का होता है
ऑडिटिंग व अकाउंटेंसी में करियर ऑप्‍शन (Career Options in Auditing and Accountancy)
एक ऑडिटर्स के पास इंटरनल ऑडिटर, एक्सटर्नल ऑडिटर, गवर्नमेंट ऑडिटर, फॉरेंसिक ऑडिटर आदि बनने के मौके होते हैं। यह मौके मेन्युफैक्चरिंग सेक्टर, इंश्योरेंस व बैंकिंग सेक्टर, कॉर्पोरेट, पब्लिक सेक्टर, एनजीओ आदि में मिल सकते हैं।
सरकारी क्षेत्र में प्रवेश (Government Sector Entry)
अगर आप कर्मचारी चयन आयोग के माध्‍यम से सरकार के विभिन्‍न ऑडिटर्स व अकाउंटेंट के पदों पर करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको एसएससी की प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी। सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों, आयकर या सीमा शुल्क कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र की किसी भी इकाई जैसे बिजली बोर्ड आदि में भी नौकरी मिल सकती है।

सैलरी
इन क्षेत्रों में अच्छी डिग्री और बढ़िया अनुभव के साथ कमाई के मौके बेहतर होते जाते हैं। भारत के प्राइवेट सेक्‍टर में एक ऑडिटर की औसत सैलरी पांच से दस लाख रुपये सालाना और अकाउंटेंट के तौर पर तीन से पांच लाख रुपये सालाना हो सकती है। वहीं पद व कंपनी के अनुरूप वेतन बढ़ता है।


Sunday, January 22, 2023

ग्रेजुएशन के बाद भी कर सकते हैं सीए

कॉमर्स करने वाले ज्‍यादातर छात्रों का सपना ग्रेजुएशन के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) कोर्स करना होता है। हालांकि सभी को पता है कि यह इतना आसान नहीं है। इसके लिए छात्रों को कठिन परीक्षा से होकर गुजरना पड़ता है। CA का काम वित्तीय लेखा-जोखा तैयार करना, वित्तीय सलाह देना, ऑडिट अकाउंट का विश्लेषण करना और टैक्स से संबंधित काम करना होता है। साथ ही टैक्स के भुगतान का हिसाब-किताब भी CA के जिम्मे ही होता है। यह एक बहुत ही अच्छी पोस्ट है। किसी भी अकाउंटेंट का स्टेटस डॉक्टर इंजीनियर से कम नहीं होता।

CA बनने के लिए आपको 12वी के बाद सीपीटी परीक्षा को पास करना होता है। सीपीटी (CPT) परीक्षा को पास करने के बाद आप आईपीसीसी (IPCC) परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। हालांकि कई बार छात्र सीपीटी की परीक्षा देने से चूक जाते हैं, लेकिन आप अपना ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद भी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। यदि आप ग्रेजुएट छात्र है तो आप सीधा आईपीसीसी में प्रवेश कर सकते हैं। आईपीसीसी में सीधा प्रवेश पाने के लिए आपको ग्रेजुएशन में 55 फीसदी अंक होने चाहिए जब के अन्य ग्रेजुएशन के लिए 60 फीसदी अंक होना अनिर्वाय है।
कितने साल का कोर्स है (Course Details)
ग्रेजुएशन के बाद CA का कोर्स करने की न्यूनतम अवधि 3 वर्ष है, क्योंकि आप खुद को पंजीकृत करने के 9 महीने बाद सीधे आईपीसीसी परीक्षा दे सकते हैं। जिसके बाद आपको चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के लिए 2.5 - 3 साल की आर्टिकलशिप भी पूरी करनी होगी। वहीं यदि आपके पास सीपीटी परीक्षा से छूट प्राप्त करने के लिए जरूरी अंक है तो आप सीपीटी छूट प्राप्त करके स्नातक के बाद सीधे CA के साथ अपना आर्टिकलशिप शुरू कर सकते हैं और आगे आईपीसीसी परीक्षा दे सकते हैं।
कोर्स की फीस (Course Fees) 
ग्रेजुएशन के बाद CA करने की फीस लगभग 19 हजार से 27 हजार रुपये है। इसमें पंजीकरण शुल्क, लेख पंजीकरण शुल्क, पाठ्यक्रम शुल्क और सूचना प्रौद्योगिकी शुल्क शामिल हैं। वहीं आपकी फीस इस बात पर भी निर्भर करता है कि इन परीक्षाओं को पास करने के लिए कितने अटेंप्ट लेते हैं और अगर आप CA की कोचिंग लेना चाहते हैं तो इसमें आपको 50 हजार से लेकर 2 लाख रूपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
सीए का कार्य (Duties of aChartered Accountant)
  1. फाइनेंशियल सिस्टम और बजट का मैनेजमेंट करना।
  2. फाइनेंशियल ऑडिट करना।
  3. वित्तीय सलाह प्रदान करना।
  4. क्लाइंट के साथ संपर्क करना, फाइनेंशियल जानकारी और सलाह देना।
  5. कंपनी के सिस्टम का रिव्यू और जोखिम का एनालिसिस करना।
  6. फाइनेंसियल जानकारी और सिस्टम की जांच करने के लिए टेस्ट करना।
  7. टैक्स प्लनिंग पर ग्राहकों को सलाह देना।
  8. अकाउंटिंग रिकॉर्ड्स को मेंटेन करना और छोटे बिजनेस के लिए अकाउंट मैनेजमेंट इनफार्मेशन तैयार करना।
  9. फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर क्लाइंट को सलाह देना।
  10. बिजनेस में इम्प्रूवमेंट लाने के लिए क्लाइंट को सलाह देने के साथ दिवालियापन से निपटने के तरीके बताना
  11. धोखाधड़ी का पता लगाना और उससे निपटना।
  12. इंटरनल और एक्सटर्नल ऑडिटर के साथ मिलकर किसी भी गड़बड़ी से निपटना।
  13. मंथली और एनुअली अकाउंट के साथ फाइनेंसियल स्टेटमेंट तैयार करना।


करियर ऑप्‍शन (Career Options)
CA का कोर्स पूरा करने के बाद आप आसानी से किसी भी मल्टीनेशनल कंपनी में चार्टर्ड अकाउंटेंट की जॉब शुरू कर सकते हैं। इन कंपनियों में आप फाइनेंस, अकाउंट्स एवं टैक्स डिपार्टमेंट में फाइनेंस मैनेजर, अकाउंट्स मैनेजर, फाइनेंशियल बिजनेस एनालिस्ट, ऑडिटिंग व इंटरनल ऑडिटिंग, स्पेशल ऑडिट्स सहित चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर, सीईओ, फाइनेंस डायरेक्टर, फाइनेंशियल कंट्रोलर, चीफ अकाउंटेंट, चीफ इंटरनल ऑडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम कर सकते हैं। यही नहीं, CA के लिए खुद की प्रैक्टिस की जा सकती है। जहां तक नौकरी का सवाल है तो देश में जितने भी फाइनेंशियल सेक्टर हैं, वहां CA के लिए संभावनाएं हैं। एक चार्टर्ड एकाउंटेंट को काम की कभी कमी नहीं पड़ती।

सैलरी (Salary)
एक CA का करियर जितना शानदार होता है, उतना ही सैलरी भी शानदार होती है। CA का काम बहुत मेहनत और जिम्मेदारी वाला होता है। इसी वजह से उसे दिन के 9 से 10 घंटे काम करना पड़ता है। कोर्स के बाद एक CA जूनियर लेवल पर 20 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह और सीनियर लेवल पर 50 से 70 हजार रुपये प्रतिमाह कमा सकता है। वहीं 2-3 वर्ष का अनुभव रखने वाले CA को 1 लाख रुपये प्रतिमाह के करीब सैलरी मिल सकती है।

Tuesday, January 17, 2023

मेडिकल रेकॉर्ड में बनाएं करियर

मेडिकल रेकॉर्ड साइंस किसी इंसान के मेडिकल रेकॉर्ड से जुड़ा है। इसमें आपकी बुनियादी जानकारी जैसे आपका नाम और जन्मतिथि, मेडिकल टेस्ट, इलाज, दवा और आपके स्वास्थ्य के बारे में डॉक्टर द्वारा की गई टिप्पणी का रेकॉर्ड होता है। इसमें सिर्फ आपके शारीरिक स्वास्थ्य का ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का भी रेकॉर्ड रखा जाता है। 

क्या करना पड़ता है?

स्वास्थ्य संबंधित अच्छे इन्फर्मेशन सिस्टम के रखरखाव के लिए मरीज के रेकॉर्ड, उससे संबंधित डेटा को संग्रह करना, सांख्यिकीय तकनीक का इस्तेमाल कर उसका विश्लेषण करना, मेडिको लीगल पहलू को समझना और स्वास्थ्य संबंधित संवैधानिक कानूनों की समझ होनी जरूरी है। मेडिकल रेकॉर्ड्स टेक्नॉलजी या हेल्थ इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी इन चीजों से संबंधित है। मेडिकल रेकॉर्ड साइंस की फील्ड में कई रोल्स में जॉब ऑफर की जाती है जैसे मेडिकल रेकॉर्ड टेक्निशन, मेडिकल रेकॉर्ड एग्जिक्युटिव, लैबरेटरी इक्विपमेंट टेक्निशन, मेडिकल रीसिप्शनिस्ट, मेडिकल कोडर, बिलिंग एंड कोडिंग टेक्निशन, हेल्थ इन्फर्मेशन टेक्निशन और मेडिकल ऑफिस मैनेजर। सभी रोल्स कुछ हद तक किसी व्यक्ति का मेडिकल रेकॉर्ड से संबंधित है। कुछ लोगों का काम किसी व्यक्ति के मेडिकल रेकॉर्ड को कोडिंग की भाषा में बदलना है।
कैसे बनाएं करियर?
आप मेडिकल रेकॉर्ड साइंस में बैचलर डिग्री ले सकते हैं या पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा कर सकते हैं। 

बैचलर डिग्री
बैचलर डिग्री 3 साल की होगा जिसमें दाखिले के लिए 12वीं फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स/बायॉलजी के साथ पास होना जरूरी है। कुछ संस्थान और कॉलेज अपनी प्रवेश परीक्षा लेते हैं। कोर्स की फीस संस्थान के मुताबिक अलग-अलग होती है। वैसे एक औसत फीस 20,000 रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक होती है। 

पोस्टग्रैजुएट डिप्लोमा
पोस्टग्रैजुएट डिप्लोमा प्रोग्राम को पूरा करने की न्यूनतम अवधि 1 साल होती है और अधिकतम अवधि 2 साल होती है। भारत या विदेश में हेल्थकेयर या लाइफ साइंस इंडस्ट्री में काम कर रहे लोग यह शॉर्ट टर्म प्रोग्राम कर सकते हैं। लाइफ साइंस के ग्रैजुएट या साइंस में एमएससी करने वाले और जीव विज्ञान से ग्रैजुएशन कर रहे या करने वाले कैंडिडेट्स भी यह कोर्स कर सकते हैं। 

मेडिकल रेकॉर्ड साइंस में कोर्स कराने वाले कॉलेज
अल्लुरी सीताराम राजू अकैडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज
* एलुरु अपोलो इंस्टिट्यूट ऑफ हॉस्पिटल मैनेजमेंट एंड अलाइड साइंस, चेन्नई 
* क्रिस्चन इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च, नगालैंड
* डॉ.एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी, चेन्नई 
* जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी, दिल्ली
* जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, पुडुचेरी
* एसआरएम यूनिवर्सिटी, चेन्नई

जरूरी स्किल्स या कौशल 
* स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रक्रियाओं से अवगत होना
* संवाद कौशल
* आत्मविश्वास
* सतर्क और सजग
* अनुशासन

कहां मिलेगी जॉब 
* आउटपेशेंट केयर सेंटर्स मल्टि फैकल्टी हॉस्पिटल्स
* हेल्थ केयर सेंटर्स और क्लिनिक्स
* गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स
* नर्सिंग होम
मेडिकल राइटिंग डॉक्टर ऑफिस
* मेडिकल कॉलेज/यूनिवर्सिटी
* डायग्नोस्टिक सेंटर 
* मेडिकल इंश्योरेंस सेंटर 

सैलरी 
इस फील्ड में सैलरी योग्यता, अनुभव और एरिया के मुताबिक सैलरी मिलती है। शुरुआती सैलरी 10 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक है

Tuesday, January 10, 2023

12वीं के बाद मेडिसिन में बना सकते हैं करियर,

इंडिया में मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एमबीबीएस अंडरग्रेजुएट डिग्री डिग्री है, जिसका लक्ष्‍य छात्रों को मेडिसिन की फील्ड में ट्रेंड करना है। एमबीबीएस पूरी होने के बाद छात्र किसी भी पेसेंट को डायग्नोस करने के बाद उन्हें मेडिसिन्स प्रिस्क्राइब करने के योग्य बन जाते हैं, यह डिग्री मेडिसिन के क्षेत्र में प्राथतिक मानी जाती है। हालांकि मेडिसिन के क्षेत्र में माहरत हासिल करने के लिए छात्रों को काफी मेहनत करनी पड़ती है। 



मेडिसिन में क्‍या है कोर्सेज और उन को कैसे करें
इंडिया में आमतौर पर स्टूडेंट्स 12वीं क्लास पास करने के बाद कोर मेडिकल कोर्सेज में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। यहां उन कोर्सेज की लिस्ट दी जा रही है जो मेडिकल डिग्री प्राप्त करने के लिए स्टूडेंट्स चुन सकते हैं, ताकि उनके शानदार करियर का निर्माण हो सके।

अंडरग्रेजुएट कोर्सेज
छात्र 12वीं के बाद मेडिसिन में अंडरग्रेजुएट कोर्स पूरा कर सकते हैं, इसकें बाद छात्रों को एमबीबीएस डॉक्टर का शानदार टाइटल मिल जाता है। एमबीबीएस बैचलर ऑफ़ मेडिसिन का संक्षिप्त रूप है1 एमबीबीएस कोर्स की अवधि 5 वर्ष की होती है जिसमें डिग्री प्रोग्राम पूरा करने के लिए 6 माह की ट्रेनिंग भी शामिल है।
पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज
मेडिसिन की फील्ड में पोस्ट ग्रेजुएशन को एमडी डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन के तौर पर जाना जाता है। यह मेडिसिन की फील्ड में सुपर-स्पेशलाइजेशन है और इस कोर्स की अवधि 3 वर्ष की है।

डॉक्टोरल कोर्सेज
डीएम बनने के लिए छात्र हायर स्टडीज जारी रख सकते हैं, इसके बाद डीएम की डिग्री पीएचडी की डिग्री के समकक्ष है। डॉक्टोरल कोर्स की अवधि 3-4 वर्ष की है। यह अवधि यूनिवर्सिटी गाइडलाइन्स के अनुसार थीसिस पूरी करने के लिए लगने वाले समय पर भी निर्भर करती है।
कैसे लें मेडिकल कॉलेजेस में एडमिशन
किसी भी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन प्राप्त करने के लिए छात्रों में कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। इस प्रोफेशन के लिए आपमें न केवल प्रोफेशनल कमिटमेंट ही होनी चाहिए बल्कि, किसी रोगी का जीवन बचाने का जज्बा भी होना चाहिए। हम आपको बताएंगे कि मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए किन एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया की जरूरत पड़ेगी
अंडरग्रेजुएट कोर्स
अंडरग्रेजुएट कोर्स को एमबीबीएस के नाम से जाना जाता है। यह 12वीं क्लास में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पढ़ने वाले वे छात्र कर सकते हैं, जिन्‍हें 12वीं में कम से कम 55 फीसदी मार्क्स प्राप्त हुए हैं। ऐसे छात्र एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए एंट्रेंस एग्जाम दे सकते हैं।

पोस्टग्रेजुएट कोर्स
डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन या एमडी की डिग्री प्राप्त करने के लिए, छात्र के पास एमबीबीएस की डिग्री और इंटर्नशिप का अनुभव अवश्य होना चाहिए।

डॉक्टोरल कोर्स
डॉक्टोरल या डीएम का कोर्स वह कोर्स है जो यूएस की कई यूनिवर्सिटीज सफल छात्रों को प्रदान करती हैं। यह डिग्री पीएचडी के समकक्ष डिग्री है। जिन डॉक्टर्स के पास एमडी की डिग्री होती है, वे यह कोर्स कर सकते हैं।

क्‍या मिलती है सैलरी
किसी एमबीबीएस डॉक्टर को अपने करियर की शुरुआत में लगभग 3.4 लाख सैलरी मिलती है जैसे-जैसे उनका अनुभव और नॉलेज बढ़ते जाते हैं, वैसे- वैसे सैलारी बढ़ती है।
कैसे होता है एंट्रेंस एग्जाम्स
  • एमबीबीए
  • ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंट्रेंस टेस्ट
  • जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च टेस्‍ट
  • क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम
  • ऑल इंडिया प्री-मेडिकल प्री-डेंटल टेस्ट
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय प्री-मेडिकल टेस्ट
  • मणिपाल विश्वविद्यालय एडमिशन टेस्ट

पोस्टग्रेजुएट के लिए एग्जाम्स
ऑल इंडिया पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम
दिल्ली यूनिवर्सिटी पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम

डॉक्टोरल कोर्स एग्जाम-
  • एनईईटी- एसएस
  • जेआईपीएमईआर डीएम

Friday, January 6, 2023

हेल्थ इंस्पेक्टर की है इस फील्ड में भारी डिमांड,

सरकारी नौकरी में हेल्थ इंस्पेक्टर पद की काफी वैल्यू है. इनका क्षेत्र काफी विस्तृत है इसलिए नौकरी के भी अपार मौके हैं. गवर्नमेंट सेक्टर में हेल्थ इंस्पेक्टर की पोस्ट केंद्र और राज्य सरकार से संबंधित विभिन्न मंत्रालयों एवं स्वास्थ मिशन के अंतर्गत आने वाले हेल्थ डिपार्टमेंट या परिवार एवं बाल कल्याण विभाग में आती हैं. यह जनता और सरकारी विभाग के बीच की अहम कड़ी होता है. सरकारी के अलावा प्राइवेट फील्ड में भी कई सारी नौकरियां हैं. इस फील्ड को जितना एक्सप्लोर करेंगे उतनी ही सफलता की राहें खुलती जाएंगी.

इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए कैंडिडेट अपने स्टेट के डायरेक्टोरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन एंड इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग से मान्यता प्राप्त किसी भी संस्थान या पॉलीटेक्निक संस्थान से एक साल के हेल्थ सैनिटरी कोर्स में पढ़ाई कर सकते हैं. इस कोर्स में बारहवीं के अंकों के आधार पर दाखिला मिलता है.

हेल्थ इंस्पेक्टर के लिए कितनी होनी चाहिए योग्यता
हेल्थ इंस्पेक्टर बनने के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं या 12वीं कम से कम 50 प्रतिशत मार्क्स के साथ पास होना चाहिए.
कुछ संस्थानों में इसके समक्ष में सेनेटरी इंस्पेक्टर का डिप्लोमा भी अनिवार्य माना जाता है.
इसके अतिरिक्त उम्मीदवार की फिजिकल फिटनेस भी देखी जाती है. जिसके लिए उसे फिटनेस एग्जाम भी देना होता है.
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सभी मापदंड में परफेक्ट पाए गए तो हेल्थ इंस्पेक्टर बनने के लिए उचित कैंडिडेट माने जाएंगे.

हेल्थ इंस्पेक्टर के लिए चयन प्रक्रिया
हेल्थ इंस्पेक्टर की पोस्ट के लिए कैंडिडेट का चयन तीन तरह की प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद होता है. इन परीक्षाओं में  सबसे पहले उम्मीदवार का शैक्षणिक रिकॉर्ड देखा जाता है. सभी मापदंड में खरा उतरने के बाद कैंडिडेट की लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट के आधार पर चयन किया जाता है. प्राइवेट संस्थान में नौकरी इंटरव्यू और ऐकडेमिक क्वालिफिकेशन के आधार पर मिलती है .

कोर्स की फीस
12वीं के बाद हेल्थ इंस्पेक्टर की पढ़ाई करने के लिए सर्टिफिकेट या डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं .ये एक साल का कोर्स होता है. इसके अतिरिक्त भारत के कुछ संस्थान इसका डिग्री कोर्स भी कराते हैं. डिप्लोमा कोर्स की फीस 15000 से 20000 तक की सालाना फीस होती है, किसी बड़े संस्थान से इस कोर्स की फीस 40,000 से ₹65000 तक भी हो सकती है. सरकारी संस्थान से इस कोर्स की पढ़ाई करना चाहते हैं तो एक साल की फीस ₹5000 से ₹12000 तक भरनी होती है

कितनी मिलती है हेल्थ इंस्पेक्टर को सैलरी?
1.हेल्थ इंस्पेक्टर को सरकारी नौकरी में राज्य स्तर के अनुसार सैलरी अलग-अलग दी जाती है. इन्हें सरकारी नॉर्म्स के अनुसार तय सैलरी पे कमीशन के आधार पर सैलरी मिलती है.
2.इसके अतिरिक्त उन्हें अन्य भुगतान जैसे एचआरए व ट्रेवल अलाउंस जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं .
3.प्राइवेट सेक्टर में जॉब करने पर शुरआती दौर में सैलरी थोड़ी कम होती है. अनुभव के बाद सैलरी में ठीकठाक बढ़ोत्तरी हो सकती है .
4.प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत हेल्थ इंस्पेक्टर को शुरुआत में 12 से 20 हजार के बीच में सैलरी मिलती है.  5.करीब चार से पांच साल के अनुभव के बाद 25 से 30 हजार के बीच पहुंच सकती है. समय के साथ सैलरी बढ़ती जाती है .