Sunday, February 26, 2023

डांस टीचर कैसे बने

पहले कभी लोग डांस को सिर्फ रुचि या फिर बतौर शौक ही किया करते थे। प्रोफेशन के तौर पर डांस को शायद ही कोई लेता था। लेकिन वक्त बदलने के साथ ही लोगों विचार भी बदले हैं। सत्तर के दशक में डांस को कॅरियर के रूप में सम्मान के साथ नहीं देखा जाता था। साथ ही इस कला से पैसा कैसे कमाया जाए, इसके कोई खास विकल्प नही थे।

लेकिन आज के समय मे डांस के फील्ड में कैरियर के बेहतरीन अवसर हैं। आज के जमाने मे डांस में टीचिंग से लेकर फिल्मो तक मे स्वर्णिम कैरियर के अवसर हैं। इस वजह से भारी संख्या में लोग डांस के फील्ड में कैरियर बनाना चाहते हैं। इस वजह से Dance Teacher की डिमांड भी बढ़ी है।

डांस टीचर बनने के लिए उम्मीदवार को डांस से जुड़े कोर्स करने होते हैं। इसके बाद ही आप डांस टीचर बन सकते हैं।

अगर आप डांस इंस्टीट्यूट या डांस कॉलेज में डांस टीचर बनना चाहते हैं तो आपके पास डांस में बैचलर डिग्री या मास्टर डिग्री होनी चाहिए। कुछ इंस्टीट्यूट ऐसे भी Dance Teacher हायर कर लेते हैं, जिनके पास 6 महीने से 1 साल के मात्र डिप्लोमा कोर्स ही होते हैं, लेकिन उंनको डांस बहुत ही बेहतरीन आता है।

उनके टैलेंट की वजह से डिप्लोमा कोर्स के जरिए ही dance teaching के फील्ड में जॉब मिल जाती है, क्योंकि इस फील्ड में डिग्री या डिप्लोमा का विशेष महत्व नही होता है, बस आपको डांस अच्छा आता हो।

अगर आप किसी भी डिग्री कॉलेज या यूनिवर्सिटी में डांस टीचर या प्रोफेसर बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको डांस में मास्टर डिग्री हासिल करनी होगी। इसके बाद आपको यूजीसी नेट क्वालीफाई करना होगा। फिर आप डांस प्रोफेसर के तौर पर किसी भी यूनिवर्सिटी या डिग्री कॉलेज में डांस टीचर के तौर पर कैरियर बना सकते हैं।

अगर आप विभिन्न स्कूलों में डांस टीचर के तौर पर जॉब करना चाहते हैं तो आपके पास अगर डांस में डिप्लोमा या बैचलर डिग्री है तो भी आसानी से जॉब मिल सकती है।

देखिए डांस ये परफार्मिंग आर्ट्स का फील्ड है तो आपके अंदर बेहतर परफार्मेंस देने की कला और स्किल होनी चाहिए। तभी आप इस फील्ड में ऊंचाइयों तक जा सकते हैं।

डांस टीचर बनने के लिए स्टूडेंट्स को किसी भी स्ट्रीम से 12वीं पास होना चाहिए। इसके बाद डिप्लोमा इन डांस, बीए इन डांस और एमए इन डांस या इससे जुड़े अन्य कोर्स किये जा सकते हैं। चलिये आपको बताते हैं कि डांस टीचर बनने के लिए आप कौन- कौन से कोर्स कर सकते हैं।

डिप्लोमा इन डांस
डिप्लोमा इन परफार्मिंग आर्ट्स
बीए इन डांस
बीए इन परफार्मिंग आर्ट्स (डांस)
एमए इन डांस
एमए इन परफार्मिंग आर्ट्स
बीपीए
एमपीए

आज के समय मे डांस टीचर के तौर पर कैरियर के अवसरों की कमी नहीं है। इसका कारण यही है कि डांस में लोगों की रुचि बढ़ी है और इसमे कैरियर के अवसर भी बढ़े हैं। इस वजह से डांस इंस्टीट्यूट की संख्या में तेजी से ग्रोथ हो रही है। इस कारण डांस टीचर की डिमांड भी बढ़ रही है।

लगभग हर शहर में आपको डांस ट्रेनिंग के इंस्टीट्यूट मिल जाएंगे, जंहा पर आप डांस टीचर के तौर पर जॉब कर सकते हैं। इसके अलावा आज के समय मे जितने भी इंग्लिश मीडियम के स्कूल चल रहे हैं, इन सभी मे डांस टीचर की नियुक्ति की जाती है। यंहा पर भी आपके लिए कैरियर के अच्छे अवसर हैं।

आज के समय मे कुछ एडवांस और हाई लेवल के डांस स्कूल भी मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में चल रहे हैं, जंहा पर फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में कैरियर बनाने वाले स्टूडेंट्स ट्रेनिंग लेते हैं तो आप इन डांस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में भी Dance Teacher के तौर पर अपने कैरियर की शुरुआत कर सकते हैं।

अगर आपका सपना किसी डिग्री कॉलेज या यूनिवर्सिटी में डांस प्रोफेसर बनने की है तो आज के समय मे अनेक ऐसे डिग्री कॉलेज और यूनिवर्सिटीज हैं, जंहा पर डांस ने डिप्लोमा, बैचलर, मास्टर कोर्स संचालित किए जाते हैं तो इनमें भी आप डांस में नेट और पीएचडी करके प्रोफेसर बन सकते हैं।

वर्तमान समय मे डांस में कैरियर के अवसरों की कमी नही है। बस आपको अच्छा डांस आता हो। अगर आप डांस टीचर के तौर पर जॉब नहीं भी करना चाहते हैं तो आप खुद का भी डांस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोल सकते हैं।

एक तो आप डांस के फील्ड में टीचर बन सकते हैं। इसके अलावा भी इस फील्ड में काफी ज्यादा कैरियर के अवसर होते हैं। जोकीं निम्न हैं।

1: फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में कोरियोग्राफर
2: फिल्म इंडस्ट्री में बैकग्राउंड डांसर
3: डांस रियलिटी शो
4: फिटनेस और योग सेंटर्स में डांसर
5: डांस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोल सकते हैं।
6: डांस थेरेपिस्ट
7: डांस फोटोग्राफर
8: स्टेज परफॉर्मर
9: डांस टीचर
10: म्यूजिक एलबम में डांसर

Dance टीचर की सैलरी:

डांस टीचर की सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि वे किस तरह के इंस्टीट्यूट में डांस टीचर हैं। अगर आप बहुत ही हाई फाई डांस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में डांस टीचर हैं तो आप 40 से 50 हजार प्रतिमाह या इससे भी ज्यादा सैलरी प्राप्त कर सकते हैं।

अगर आप एडुकेशनल इंस्टीट्यूट में डांस टीचर हैं तो आपको 10 से 20 हजार के बीच मे सैलरी मिल सकती हैं। यदि आप किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटीज में प्रोफेसर हैं तो यूजीसी के नियमानुसार सैलरी मिलती है जोकीं 45 हजार के ऊपर ही होती है।

अगर आप फिल्म इंडस्ट्री में कोरियोग्राफर के तौर पर कार्य करते हैं तो यंहा पर आप लाखों और करोड़ों रुपए कमा सकते हैं। फिल्मो में प्रोजेक्ट के हिसाब से पेमेंट मिलता है, न कि प्रतिमाह सैलरी।

Performing Arts college in India

श्‍यामक डावर सालसा डांस कंपनी मुंबई।
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, बनारस
पंजाब यूनिवर्सिटी पटियाला
आंध्र यूनिवर्सिटी
गंधर्व महाविद्यालय नई दिल्‍ली
यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी
कत्‍थक केंद्र दिल्‍ली
इंडियन एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट्स, दिल्ली
सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी
इंस्टिट्यूट ऑफ विजुअल एंड पेरफॉर्मिमग आर्ट्स अलीगढ़
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी
MS यूनिवर्सिटी बड़ोदरा
मुम्बई यूनिवर्सिटी
बैंगलोर यूनिवर्सिटी
वनस्थली विद्यापीठ
मणिपुर यूनिवर्सिटी
दीन दयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी गोरखपुर
मद्रास यूनिवर्सिटी
असम यूनिवर्सिटी
हैदराबाद यूनिवर्सिटी

Dance Course कंहा से करना चाहिए?

अगर आप किसी डांस इंस्टीट्यूट या फिर एजुकेशनल स्कूल में डांस टीचर बनना चाहते हैं तो आप किसी भी अच्छे प्राइवेट या गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट से डांस में डिग्री या डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं।

अगर आप गवर्नमेंट या प्राइवेट डिग्री कॉलेज में डांस प्रोफेसर बनना चाहते हैं तो आप किसी डिग्री कॉलेज या यूनिवर्सिटी से बीए इन डांस या बीए इन परफार्मिंग आर्ट्स के बाद एमए इन डांस या एमए इन परफार्मिंग आर्ट्स कोर्स करें।

Dance Course fees

इस कोर्स की फीस 10 हजार से लेकर 5 लाख तक हो सकती है। अगर आप गवर्नमेंट कॉलेज से डांस में डिग्री या डिप्लोमा करते हैं तो इनकी फीस 10 हजार से 30 हजार तक पूरे कोर्स की फीस हो सकती है।

अगर आप किसी नामी प्राइवेट कॉलेज से डांस कोर्स करते हैं तो वंहा पर फ़ीस 50 हजार से शुरू होकर लाखों रुपए होती है।

उम्मीद है कि Dance Teacher Kaise Bane ये आर्टिकल आपको पसन्द आया होगा, क्योंकि यंहा पर मैंने Dance Teaching Career से संबंधित सारी जानकारी दी है, जोकीं आपके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होगी।

Thursday, February 23, 2023

12वीं के बाद 4 साल का कोर्स

हम आपको एक ऐसे कोर्स के बारे में बता रहें हैं जिसे करने के बाद आप लाखों रुपए के पैकेज में देश के अवाला विदेश में भी नौकरी कर सकते हैं। कोर्स का नाम है ऑक्यूपेशनल थैरेपी। भारत में इसकी शुरुआत भारत में 1950 में हुई थी, लेकिन आज भी इस क्षेत्र में थैरेपिस्ट की संख्या कम है। ऑक्यूपेशनल थैरापी का संबंध शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग लोगों की देखभाल से है। इसमें उनकी रोकथाम, देखभाल और पुनर्वास पर ध्यान दिया जाता है। शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर लोगों की देखभाल करने वाले प्रोफेशनल को ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट कहा जाता है। 27 अक्टूबर को विश्व ऑक्यूपेशनल थैरेपी जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
4 वर्षीय डिग्री कोर्स
प्रवेश के लिए 12वीं बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री में अच्छे प्रतिशत के साथ पास होना अनिवार्य है। ऑक्यूपेशनल थैरेपी चार वर्षीय डिग्री कोर्स है। इसमें 6 महीने की इंटर्नशिप भी अनिवार्य है। बैचलर डिग्री करने के बाद मास्टर डिग्री और डॉक्टरल डिग्री भी कर सकते हैं। मास्टर डिग्री पीडियाट्रिक्स, न्यूरोसाइंसेस, मेंटल हेल्थ, हैंड रिहैबिलिटेशन कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन में उपलब्ध है और मास्टर डिग्री करने के बाद ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट अपने स्पेशलाइजेशन को और बढ़ा सकते हैं। ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट सरकारी संस्था, प्राइवेट संस्था, विद्यालय, डे केयर सेंटर में अच्छी खासी मांग है।
आवश्यक स्किल्स
यह एक ऐसा प्रोफेशन है, जिसमें छात्रों को संवेदनशील होने से लेकर वैज्ञानिक नजरिया तक अपनाना पड़ता है, क्योंकि इसमें उन्हें मरीजों के दुःख को समझ कर उसके हिसाब से उपचार करने की जरूरत होती है। अच्छी कम्युनिकेशन स्किल, टीम वर्क, मेहनती, रिस्क उठाने और दबाव को झेलने जैसे गुण इस प्रोफेशन के लिए बहुत जरूरी हैं। अधिकांश काम मेडिकल उपकरणों के सहारे होता है, इसके लिए उनका ज्ञान बहुत जरूरी है।

आवश्यक स्किल्स

यह एक ऐसा प्रोफेशन है, जिसमें छात्रों को संवेदनशील होने से लेकर वैज्ञानिक नजरिया तक अपनाना पड़ता है, क्योंकि इसमें उन्हें मरीजों के दुःख को समझ कर उसके हिसाब से उपचार करने की जरूरत होती है। अच्छी कम्युनिकेशन स्किल, टीम वर्क, मेहनती, रिस्क उठाने और दबाव को झेलने जैसे गुण इस प्रोफेशन के लिए बहुत जरूरी हैं। अधिकांश काम मेडिकल उपकरणों के सहारे होता है, इसके लिए उनका ज्ञान बहुत जरूरी है।

कौन-कौन से कोर्स
बीएससी इन ऑक्यूपेशनल थेरेपी (ऑनर्स)
बीएससी इन ऑक्यूपेशनल थेरेपी
बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी
डिप्लोमा इन ऑक्यूपेशनल थेरेपी
एमएससी इन फिजिकल एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी

मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी

देश में प्रमुख संस्थान
नेशनल इंस्टीटय़ूट फॉर द ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड, कोलकाता
पं. दीनदयाल इंस्टीटय़ूट फॉर फिजिकली हैंडिकैप्ड, नई दिल्ली
ऑल इंडिया इंस्टीटय़ूट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन, मुंबई
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लौर
केएमसीएच कॉलेज ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी, कोयम्बटूर

यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास, चेन्नई
इन पदों पर मिल सकता है काम
ऑक्यूपेशनल थेरेपी टेक्निशियन, कंसल्टेंट, ऑक्यूपेशनल थेरेपी नर्स,  रिहैबिलिटेशन थेरेपी असिस्टेंट, स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट,  स्कूल टीचर,  लैब टेक्निशियन और मेडिकल रिकॉर्ड आदि पदों पर काम मिलता है।
फ्रीलांसर बन कर सकते हैं काम
अगर आप लोगों की मदद करने में दिलचस्पी रखते हैं तो यह फील्ड आपके लिए है। मौजूदा समय में लोग मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक समस्याओं का सामना करते हैं। ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट ऐसे विकारों को दूर करने के लिए काम है। इस फील्ड में फ्रीलांसर के तौर पर भी काम किया जा सकता है या फिर किसी संस्थान में आप जॉब पा सकते हैं।
विदेशों में भी अच्छे अवसर
विदेशों में भी इस क्षेत्र में कैरियर के अच्छे अवसर उपलब्ध हैं। अमरीका में ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट की औसत सालाना सैलरी 70 हजार डॉलर यानी करीब 50 लाख रुपए के आसपास होती है। भारत में शुरुआत में वेतन अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन कुछ साल बाद अनुभव मिलने पर काफी आकषर्क वेतन मिलता है।

Friday, February 17, 2023

डीएफए) में डिप्लोमा

जिन छात्रों को बचपन से ही गणित विषय में रूचि होती है और जिन छात्रों ने अपनी 12वीं कक्षा कॉमर्स स्ट्रीम से की हो उनके लिए फाइनेंसियल एकांउटिंग में डिप्लोमा एक अच्छा कोर्स है। डीएफए का ये कोर्स केवल एक साल की अवधि का होता है जो कि फाइनेंसियल एकाउंटिंग, स्टॉकहोल्डर्स, कर्मचारियों, मालिकों, डी बैंकों, सप्लाईयर्स, सरकारी एजेंसियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। बता दें कि डिप्लोमा इन अकाउंटिंग एंड फाइनेंस के लिए औसत वार्षिक फीस 10,000 से 5,00,000 के बीच है, जो कि इस कोर्स को कराने वाले कॉलेज पर निर्भर करती है।

 डीएफए कोर्स पूरा करने के बाद, छात्रों को बुक-कीपिंग क्लर्क, बिलिंग क्लर्क, टैक्स अकाउंटेंट, फाइनेंशियल एडवाइजर्स, फाइनेंशियल असिस्टेंट एंड अकाउंटेंट, बिजनेस कंसल्टेंट, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर, सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट, फाइनेंस मैनेजर जैसी जॉब प्रॉफाइल के लिए काम कर सकते हैं।

 इस कोर्स को पूरा करने के बाद उम्मीदवार हायर स्टडिज डिग्री कोर्स जैसे बीकॉम, बीबीए आदि में जा सकते हैं। साथ ही सर्टिफिकेशन कोर्स जैसे एसीसीए, सीपीए आदि भी कर सकते हैं।

 फाइनेंसियल एकाउंटिंग में डिप्लोमा करने के लिए एलिजिबिलिटी डिप्लोमा इन अकाउंटिंग एंड फाइनेंस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को कुछ न्यूनतम पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा, जिनमें से कुछ का उल्लेख नीचे किया गया है। • डिप्लोमा इन अकाउंटिंग एंड फाइनेंस कोर्स के लिए एलिजिबिल होने के लिए उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान से 12वीं कक्षा में पास होना चाहिए। • इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए इच्छुक उम्मीदवार के पास 12वीं कक्षा में गणित विषय होना अनिवार्य है। • फाइनेंसियल एकाउंटिंग में डिप्लोमा करने के लिए आवश्यक अंकों का प्रतिशत एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में भिन्न हो सकता है।

 फाइनेंसियल एकाउंटिंग में डिप्लोमा करने के बाद नौकरी के क्षेत्र • ई-कॉमर्स वेबसाइट्स • कमर्शियल रिसर्च सेंटर • स्टॉक एक्सचेंजिस • बिजनेस इंवेस्टमेंट कंसल्टेंट • शैक्षणिक संस्थान • बैंकिंग सेक्टर • वित्तीय एजेंसियां • ऑडिट ऑफिस
 फाइनेंसियल एकाउंटिंग डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज • आपकी बारहवीं की परीक्षा की मार्कशीट और पास सर्टिफिकेट • जन्म तिथि का प्रमाण • स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट • ट्रांसफर सर्टिफिकेट • अधिवास प्रमाण पत्र /आवासीय प्रमाण पत्र • अस्थायी प्रमाण - पत्र • चरित्र प्रमाण पत्र • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ी जाति प्रमाण पत्र • विकलांगता का प्रमाण (यदि कोई हो) • माइग्रेशन सर्टिफिकेट नोट:- फाइनेंसियल एकाउंटिंग डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन के लिए प्रत्येक कॉलेज आवश्यक दस्तावेजों की एक सूची जारी करता है। सुनिश्चित करें की आवेदन करते समय आपके पास इस सूची के सभी दस्तावेज हों। उपरोक्त सभी दस्तावोजों की सत्यापित फोटोकॉपी लेना याद रखें। नकद या डिमांड ड्राफ्ट में फीस का भुगतान करने के लिए राशि अपने साथ ले जाना न भूलें।

 फाइनेंसियल एकाउंटिंग में डिप्लोमा: कोर्स की मुख्य विशेषताएं • डीएफए कोर्स का पूरा नाम- डिप्लोमा इन फाइनेंसियल एकाउंटिंग • कोर्स का स्तर- डिप्लोमा • कोर्स की अवधि- 1 वर्ष • पात्रता- 12वीं कक्षा पास • एडमिशन- एंट्रेंस टेस्ट और मेरिट आधारित फाइनेंसियल एकाउंटिंग में डिप्लोमा: कोर्स फाइनेंसियल एकाउंटिंग में डिप्लोमा के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों द्वारा निर्धारित विषय निम्नलिखित है। • कम्युनिकेटिव इंग्लिश एंड कंप्यूटर फंडामेंटल्स • फाइनेंसियल एकाउंटिंग - I • फाइनेंसियल एकाउंटिंग - II • प्रैक्टिकल - I • प्रैक्टिकल - II • प्रैक्टिकल - III

फाइनेंसियल एकाउंटिंग में डिप्लोमा कोर्स करने के लिए एडमिशन प्रोसेस डिप्लोमा इन अकाउंटिंग एंड फाइनेंस कोर्स की एडमिशन प्रोसेस मुख्य रूप से 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर होती है। इस कोर्स में प्रवेश से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर नीचे चर्चा की गई है। • आमतौर पर इस कोर्स के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम की ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं होती है। हालांकि, विभिन्न कॉलेज अपनी प्रवेश स्तर की परीक्षाएं आयोजित कर सकते हैं। • इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, ऑनलाइन कॉलेज की वेबसाइट से या ऑफलाइन कॉलेज जाकर आवेदन फॉर्म भरना होगा। • आवेदन फॉर्म भरने के तुरंत मेरिट सूची की घोषणा की जाती है। • कुछ कॉलेज छात्रों को प्रवेश देने के लिए उनकी सामान्य योग्यता का परीक्षण करते हैं। • सामान्य योग्यता परीक्षा में एक समूह चर्चा और कॉलेज के अधिकारियों के साथ एक इंट्रव्यू किया जाता है। • एंट्रेंस टेस्ट देने वाले उम्मीदवार को, कटऑफ पास करने के इंट्रव्यू के लिए बुलाया जाएगा। • उम्मीदवार चयनित होने के बाद अपनी कॉलेज फीस सबमिट कर अपनी सीट सुरक्षित कर सकता है।

Tuesday, February 14, 2023

ICWA कोर्स क्या है

आईसीडब्ल्यूए (ICWA) कोर्स क्या है

(आईसीडब्ल्यूए (ICWA) कोर्स क्या है) ICWA कोर्स, इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा पेश किया जाने वाला न्यूनतम तीन साल का कोर्स है, जिसमें तीन चरण शामिल हैं, जैसे कि फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल। पाठ्यक्रम उन छात्रों द्वारा चलाया जाता है जो लागत प्रबंधन लेखाकार बनने का लक्ष्य रखते हैं। संस्थान अपने उम्मीदवारों में पेशेवर योग्यता विकसित करने में मदद करता है और उन्हें दुनिया भर में लागत प्रबंधन लेखाकार के रूप में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए आवश्यक शिक्षा प्रदान करता है।(आईसीडब्ल्यूए (ICWA) कोर्स क्या है)

आईसीडब्ल्यूए (ICWA) के बारे में :- आईसीडब्ल्यूए पाठ्यक्रम के सभी तीन चरण उम्मीदवारों को गहन ज्ञान सुनिश्चित करते हैं जो बदले में उन्हें उपलब्ध संसाधनों में व्यवसाय का प्रबंधन करने में मदद करता है। एक लागत प्रबंधन लेखाकार संगठन के सभी वर्गों से वित्तीय रिकॉर्ड एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने के लिए जिम्मेदार होता है।

आईसीडब्ल्यूए के लाभ:- एक लागत प्रबंधन लेखाकार संगठन के सभी वर्गों से वित्तीय रिकॉर्ड एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने के लिए जिम्मेदार होता है। पाठ्यक्रम को या तो किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ऑनलाइन माध्यम से या पत्राचार के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है।
इस कोर्स के पूरा होने के बाद, उम्मीदवार न केवल नौकरी के लिए आवश्यक शिक्षा और योग्यता प्राप्त करते हैं बल्कि वित्तीय उद्योग में विभिन्न अवसरों से भी सम्मानित होते हैं। यदि किसी उम्मीदवार की संगठन के कई विभागों के खातों के प्रबंधन में अच्छी रुचि है, तो यह पाठ्यक्रम उम्मीदवारों के लिए एकदम सही है।

आईसीडब्ल्यूए पात्रता:- पात्रता मानदंड को किसी विशेष पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्र होने के लिए प्राधिकरण द्वारा निर्धारित न्यूनतम पूर्वापेक्षाओं के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यदि उम्मीदवार बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं तो उन्हें इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा ICWAI परीक्षा को पास करना होगा। सभी चरणों के लिए पात्रता मानदंड एक दूसरे से अलग हैं। चरण के अनुसार पात्रता मानदंड नीचे चर्चा की गई है:

आईसीडब्ल्यूए फाउंडेशन पात्रता:-
  • आईसीडब्ल्यूए फाउंडेशन कोर्स को आगे बढ़ाने के लिए, छात्रों को भारत से किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से अपनी 10 वीं कक्षा को सफलतापूर्वक पूरा करना आवश्यक है।
  • 10+2 परीक्षा में बैठने वाले छात्र भी आईसीडब्ल्यूए फाउंडेशन कोर्स के लिए पात्र हैं।

आईसीडब्ल्यूए इंटरमीडिएट पात्रता:-
आईसीडब्ल्यूए इंटरमीडिएट पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए, छात्रों को भारत से किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से सफलतापूर्वक अपना 10 + 2 पूरा करना आवश्यक है।

आईसीडब्ल्यूए प्रवेश:- कोर्स में प्रवेश इंस्टिट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा के आधार पर दिया जाता है। तीनों चरणों के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं हैं। हालांकि, पिछले चरण की योग्यता परीक्षा को अगले चरण के लिए प्रवेश परीक्षा कहा जाता है, और छात्रों को इन योग्यता / प्रवेश परीक्षाओं से प्राप्त अंकों के आधार पर आंका जाता है। इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया द्वारा वर्ष में दो बार प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है, अर्थात् जून और दिसंबर।

आईसीडब्ल्यूए के बाद करियर के अवसर:- आईसीडब्ल्यूए कोर्स पूरा करने वाले उम्मीदवारों के लिए करियर के विभिन्न अवसर उपलब्ध हैं। भारतीय वित्तीय बाजार दुनिया के सबसे पुराने बाजारों में से एक है और तेजी से विकास दर के साथ इसने दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अच्छे बाजारों में भी कदम रखा है। पूंजी बाजार पहली बार मुंबई के आसपास स्थापित किया गया था जिसमें 250 सुरक्षा दलाल शामिल थे जिन्होंने 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सक्रिय वाणिज्य में भाग लिया था। आईसीडब्ल्यूए पाठ्यक्रम के पूरा होने के बाद उपलब्ध विभिन्न नौकरी पद निम्नलिखित हैं:

वित्तीय विश्लेषक:- वित्तीय विश्लेषक एक पेशेवर है जो मानक लागत स्थापित करके संचालन की लागत निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार है; परिचालन डेटा एकत्र करना। एक वित्तीय विश्लेषक योजनाओं और पूर्वानुमानों के साथ वास्तविक परिणामों की तुलना और मूल्यांकन करके वित्तीय स्थिति की पहचान करने के लिए भी जिम्मेदार होता है। वह रणनीतियों और प्रक्रियाओं को व्यवस्थित और लागू करके लागत विश्लेषण समाधानों का मार्गदर्शन करता है; रुझान और पूर्वानुमान प्रदान करना; प्रक्रियाओं और तकनीकों की व्याख्या करना; कार्रवाई की सिफारिश करना।

लागत प्रबंधक:- एक लागत प्रबंधक की स्थिति क्रेडिट नीतियों के निरंतर आवेदन सहित संपूर्ण ऋण देने की प्रक्रिया के लिए जवाबदेह होती है। एक लागत प्रबंधक के रूप में, किसी को मौजूदा ग्राहकों के क्रेडिट की समय-समय पर समीक्षा करने की आवश्यकता होती है, और खराब ऋण हानियों के साथ-साथ कंपनी की बिक्री को अनुकूलित करने के उद्देश्य से संभावित ग्राहकों की साख का आकलन भी करना होता है। एक लागत प्रबंधक की भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ उस संगठन और स्थिति के अनुसार भिन्न होती हैं जिस पर वे काम कर रहे हैं।

अनुसंधान विश्लेषक:- अनुसंधान विश्लेषक वे पेशेवर हैं जो संसाधनों, वस्तुओं और सेवाओं के लिए आर्थिक समस्याओं के मूल्यांकन के साथ-साथ डेटा, अनुसंधान प्रवृत्तियों को एकत्र और विश्लेषण करते हैं। अनुसंधान विश्लेषक विभिन्न क्षेत्रों के भीतर गुणात्मक और मात्रात्मक आर्थिक विश्लेषण दोनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं। उदाहरण के लिए, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और पर्यावरण। कुछ शोध विश्लेषकों को रोजगार के स्तर, व्यापार चक्र, विनिमय दरों, करों, मुद्रास्फीति, या ब्याज दरों की जांच के साथ-साथ उत्पादों, स्वास्थ्य देखभाल या ऊर्जा की लागत का अध्ययन करने की भी आवश्यकता होती है।

आईसीडब्ल्यूए का वेतन क्या है?:- एक प्रवेश स्तर के सीएमए पेशेवर का औसत वेतन लगभग रु. प्रति वर्ष 4 लाख, जबकि एक मध्यम स्तर के पेशेवर लगभग रु। प्रति वर्ष 6 लाख। एक अनुभवी या वरिष्ठ स्तर का पेशेवर लगभग रुपये का वेतन कमा सकता है। प्रति वर्ष 10 लाख।

Wednesday, February 8, 2023

कंप्यूटर एकाउंटिंग में करियर

 पूरी दुनिया में कंप्यूटर के बढ़ते इस्तेमाल के कारण अब हर जगह एकाउंटिंग के सभी कार्य कंप्यूटर सॉफ्टवेयर्स के जरिए ही किए जाते हैं. इसलिए, कंप्यूटर एकाउंटेंसी का कोर्स और करियर 21 वीं सदी में सबसे पसंदीदा कोर्स और करियर ऑप्शन बन गया है. पहले एकाउंट का कार्य अक्सर कॉमर्स बैकग्राउंड वाले लोग किया करते थें लेकिन अब, 12 वीं या ग्रेजुएशन के बाद CIA (सर्टिफाइड इंडस्ट्रियल अकाउंटेंट) प्लस का एडवांस कोर्स करके एकाउंटेंट का करियर शुरू किया जा सकता है. आजकल अधिकतर ऑफिसेस में एकाउंटिंग का कामकाज पहले जैसे बहीखाते और लेजर के द्वारा नहीं होता, बल्कि अब यह एडवांस्ड कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के माध्यम से होता है. कंप्यूटर एकाउंटिंग एक IT आधारित कोर्स है. अब आप केवल 10 महीने का कोर्स करके एकाउंटेंसी में मास्टर बन सकते हैं. कंप्यूटर एकाउंटेंसी में बिजनेस एकाउंटिंग, बिजनेस कम्युनिकेशन, एडवांस एकाउंट्स, एडवांस एमएस एक्सेल, टैक्सेज, आइएफआरएस, फाइनेंशियल मैनेजमेंट और इनकम टैक्स प्लानिंग की प्रैक्टिकल और जॉब ओरिएंटेड ट्रेनिंग प्रदान की जाती है.

भारत में कंप्यूटर एकाउंटिंग का ग्रोथ स्कोप 

कंप्यूटर एकाउंटिंग आज के दौर का बहुत डिमांडिंग फील्ड है. उदारीकरण के इस दौर में देश में निजी कंपनियों के विस्तार और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन के कारण कंप्यूटर एकाउंटेंसी के एक्सप‌र्ट्स की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. कंप्यूटर एकाउंटिंग एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें उम्मीदवार का करियर ग्राफ तेजी से बढ़ता है. यूँ तो ज्यादातर कॉमर्स के स्टूडेंट्स ही कंप्यूटर एकाउंटिंग के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, लेकिन दूसरे स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए भी इसके रास्ते खुले हुए हैं तथा वे अपनी रूचि के अनुसार अपनी किस्मत इस फील्ड में आजमा सकते हैं. कंप्यूटर एकाउंटिंग सिस्टम मैनेजमेंट से जुड़े निर्णय लेने के लिए फायनेंशियल डाटा को इकठ्ठा करने, रिकॉर्ड करने, डिज़ाइन की गई प्रक्रियाओं के तहत दिए गए डाटा को क्लासिफाई तथा कंट्रोल करने वाली प्रक्रियाओं का एक संग्रह है.

एकाउंटिंग में कंप्यूटर का यह है महत्त्वपूर्ण योगदान  

एकाउंटिंग ट्रांजैक्शन का रिकॉड रखने के लिए पहले बुक्स ऑफ एकाउंट्स जैसे जर्नल,कैशबुक,स्पेशल परपज बुक्स तथा लेजर और अन्य चीजों को मेंटेन करना पड़ता था. लेकिन कंप्यूटर की मदद से ये सारे काम बहुत आसान हो गए हैं. अब ये सारे काम कम्प्यूटराइज्ड एकाउंटिंग के तहत किये जाते हैं.1980 तक भारत में एकाउंटिंग से जुड़े सभी काम मैनुअली ही होते थें लेकिन कंप्यूटर के बढ़ते चलन तथा इसके द्वारा की जाने वाली फ़ास्ट और विश्वसनीय काउंटिंग की वजह से यह एकाउंटिंग की एक सख्त जरुरत वाली चीज बन गया.

किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या बोर्ड से 12 वीं कक्षा पास उम्मीदवार इस कोर्स को कर सकते हैं.

एकाउंटिंग के सभी उपर्युक्त कार्यों को करने के लिए कम्प्यूटराइज्ड एकाउंटिंग सिस्टम में कंप्यूटर टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है.कंप्यूटर डिजिटल रिसिप्ट्स और इनवायस से डाटा इकट्ठा करते हैं. अपनी विशाल मेमोरी स्पेस के कारण, वे भविष्य में उपयोग करने के लिए एकत्र किए गए डाटा को संग्रहीत करते हैं और अंततः संग्रहीत डाटा को सही और प्रभावी रूप से विभिन्न कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर की मदद से उसे मूल्यवान रिपोर्टों में परिवर्तित करते हैं.

कंप्यूटर एकाउंटिंग से मिलने वाले लाभ 

  • इसमें कंप्यूटर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है.
  • कंप्यूटर की मदद से एकाउंटिंग डाटा इंटरप्रिटेशन के बाद सटीक और कुशल परिणाम देता है.
  • इसके जरिये बहुत बड़ी मात्रा में एकाउंटिंग के डाटा संग्रहीत किये जा सकते हैं. इससे पिछले 10 वर्षों के डाटा को एकाउंटिंग डाटाबेस में संग्रहीत किया जा सकता है.
  • कंप्यूटर एकाउंटिंग सिस्टम गुणवत्तापूर्ण सटीक लेखांकन रिपोर्ट बनाती है.
  • यह बहुत बड़ी मात्रा में एकाउंटिंग डाटा की व्याख्या करने में सक्षम है.
  • इसके जरिये जर्नल एंट्रीज को लेजर एकाउंट में आसानी से परिवर्तित किया जा सकता है.
  • कंप्यूटर की मदद से एकाउंटिंग प्रोसेस का समय काफी कम हो जाता है.
  • कंप्यूटर-बेस्ड एकाउंटिंग को अपनाकर कंपनी की जरूरतों और परिवर्तनों के अनुरूप अपडेटेड रहना संभव है.

भारत में कंप्यूटर एकाउंटिंग की आवश्यकता 

वस्तुतः कम्यूटर एकाउंटिंग बहुत जटिल प्रक्रिया नहीं है. ऑर्गनाइजेशन के एकाउंटिंग सिस्टम और फायनांस से जुड़े विषयों के सही संचालन के लिए कंप्यूटर एकाउंटिंग की सख्त जरुरत पड़ती है. कंप्यूटर एकाउंटिंग को किसी भी ऑफिस में प्रोमोट करने के लिए निम्नांकित चीजों की आवश्यकता होती है 

  • एक प्रभावी एकाउंटिंग पॉलिसी किसी भी संगठन के वित्तीय कार्यों और और उसकी नैतिकता को निर्धारित करती है.
  • संतोषजनक इंटरनेट कनेक्शन के साथ (या बिना) कंप्यूटर सिस्टम
  • एक सुव्यवस्थित एकाउंटिंग डाटाबेस
  • अच्छी तरह से ट्रेंड, स्किल्ड और सक्षम एकाउंटेंट जिसके पास कंप्यूटर का पर्याप्त ज्ञान हो.
  • एक उपयुक्त एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर जो कंप्यूटर विनिर्देश के साथ-साथ संगठन की जरूरतों के अनुकूल हो.
  • एक अच्छी तरह से स्थापित और संगठित एकाउंटिंग स्ट्रक्चर और ऑपरेटिंग स्ट्रेटेजी
  • टेक्नीकल गड़बड़ी होने पर वैकल्पिक एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर की व्यवस्था

भारत में कंप्यूटर एकाउंटिंग का लगातार बढ़ता महत्व

कंप्यूटर एकाउंटिंग आज के समय की आवश्यकता है और घरेलू और वैश्विक उद्योगों द्वारा इसे अपनाया जा रहा है. इसकी हाई डिमांड को ध्यान में रखते हुए, निम्नलिखित कारणों से प्रत्येक संगठन इसको पूरा करने की कोशिश करते हैं -

  • यह डाटा को बहुत तीव्र गति से संसाधित करता है और बहुत अधिक व्यावसायिक समय बचाता है.
  • कंप्यूटर एकाउंटिंग से व्यापार में बड़ी संख्या में लेनदेन करना संभव है.
  • कंप्यूटर एकाउंटिंग अपनी सटीकता और गति के कारण बहुत जल्द कोई भी वित्तीय रिपोर्ट प्रदान कर सकता है.
  • कंप्यूटर एकाउंटिंग की यह प्रणाली मैनपावर के प्रयास को कम करती है.
  • कंप्यूटर एकाउंटिंग में कागजी कार्रवाई कम मात्रा में होती है.
  • कंप्यूटर एकाउंटिंग से चोरी और धोखाधड़ी से सुरक्षा की जा सकती है.
  • लंबी अवधि के लिए एकाउंटिंग को ऑनलाइन (क्लाउड सुविधा) संग्रहीत किया जा सकता है. यह सिस्टम स्पेस को कम करता है, रैम को गति देता है और प्रदर्शन को बढ़ाता है.

भारत में कंप्यूटर एकाउंटिंग के प्रमुख जॉब प्रोफाइल्स/ करियर ऑप्शन्स

यह लिस्ट निम्नलिखित है:

  • चार्टर्ड एकाउंटेंट
  • एकाउंटेंट/ सीनियर एकाउंटेंट
  • ऑडिटर/ ऑडिट ऑफिसर्स
  • एकाउंट्स एग्जीक्यूटिव/ सीनियर एकाउंट्स एग्जीक्यूटिव
  • एकाउंट्स असिस्टेंट/ एकाउंटिंग क्लर्क
  • कॉस्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटेंट
  • टैक्स कंसल्टेंट्स
  • कैशियर्स
  • कमर्शियल असिस्टेंट
  • बिजनेस एग्जीक्यूटिव
  • एकाउंटिंग मैनेजर/ फाइनेंस मैनेजर/ फाइनेंस ऑफिसर
  • फाइनेंशियल एडवाइज़र/ फाइनेंशियल एग्जीक्यूटिव
  • डायरेक्टर – फाइनेंस
  • स्टॉक ब्रोकर
  • एकाउंट्स एंड GST स्पेशलिस्ट
  • सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट
  • चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर
  • कंपनी सेक्रेटरी 

कंप्यूटर एकाउंटिंग के ये हैं कुछ ड्राबैक्स 

  • इससे मानव रोजगार पर प्रभाव पड़ता है. एक कंप्यूटर कई लोगों के रोजगारमुक्त करता है.
  • कंप्यूटर को लगाने के लिए अतिरिक्त व्यय करना पड़ता है.
  • एकाउंटिंग कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए स्किल्ड होने की मज़बूरी
  • यह प्रक्रिया पूरी तरह से सिस्टमबेस्ड है. इसलिए सिस्टम की विफलता पर व्यावसायिक हानि होने की संभावना रहती है.
  • गलत तरीके से फीड किये गए डाटा को एडिट करना एक बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है.

कंप्यूटर एकाउंटिंग के लिए मुख्यतः तीन प्रकार के सॉफ्टवेयर होते हैं. स्प्रेडशीट की तरह कंप्यूटर इनबिल्ट सॉफ्टवेयर, मार्केट में उपलब्ध कॉमर्सियल एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर तथा किसी भी ऑर्गनाइजेशन द्वारा अपने वित्तीय गतिविधियों के लिए बनाया गया स्पेशलाइज्ड सॉफ्टवेयर.

Sunday, February 5, 2023

सीए और सीएस में अंतर

चार्टर्ड एकाउंटेंसी क्या है?

चार्टर्ड एकाउंटेंसी एक इंटरनेशनल करियर क्षेत्र है जो इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ़ इंडिया (ICAI) द्वारा मान्यता प्राप्त है। कोर्स ऑडिट, एकाउंटिंग और फाइनेंसियल मैनेजमेंट टेक्निक्स और स्किल प्रदान करता है जो बिज़नेस और फाइनेंस सेक्टर में काम करने के इच्छुक लोगों के लिए करियर के अवसर खोलते हैं। एक चार्टर्ड एकाउंटेंट एक प्रोफेशनल हैं जो रिस्क मैनेजमेंट आस्पेक्ट का एनालिसिस करते हैं, एकाउंट्स को मेन्टेन करते हैं और साथ ही भविष्य के लिए फाइनेंसियल एडवाइज भी प्रदान करते हैं। 

कंपनी सेक्रेटरी क्या होता है?

कंपनी सेक्रेटरी एक कंपनी के मुख्य आस्पेक्ट्स में से एक होते हैं। टैक्स के मैनेजमेंट के अलावा, एक CS यह भी सुनिश्चित करता है कि आर्गेनाइजेशन लॉ, वैधानिक और नॉन-वैधानिक कार्यों का अच्छे से रखरखाव करते हैं। ICSI उन लोगों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग प्रदान करता हैं, जो बिज़नेस फर्म्स के फाइनेंसियल और लीगल आस्पेक्ट्स में अपना करियर बनाने की इच्छा रखते हैं। कोर्स लीगल आस्पेक्ट्स को संभालने और कंपनी की ब्रांड इमेज के मैनेजमेंट का ज्ञान प्रदान करता है। एक कंपनी सेक्रेटरी, कंपनी के टैक्स रिटर्न्स को पूरा करने, रिकॉर्ड रखने, बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स और एडवाइजरी बोर्ड ऑफ़ मेंबर्स और सभी कानूनी और वैधानिक रूल्स को सुनिश्चित करते हैं।

चार्टर्ड अकाउंटेंट कैसे बनें?

चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के लिए छात्रों को CA फाउंडेशन कोर्स, CA इंटरमीडिएट कोर्स और CA फाइनल कोर्स को पास करना होता है। चार्टर्ड एकाउंट्स कैसे बनें के लिए गाइड नीचे दी गई है:

CA फाउंडेशन कोर्स

इस पद के लिए इच्छुक कैंडिडेट्स को 12th पास करने के बाद CA फाउंडेशन कोर्स की तैयारी करनी होती है। इस कोर्स को पहले CPT भी कहा जाता था, जिसमें कैंडिडेट से CA के लिए एंट्रेंस टेस्ट कराया जाता था। उस समय इस कोर्स को करने के लिए कैंडिडेट को 10th के बाद ही रजिस्ट्रेशन करना होता था। लेकिन अब इसे CA फाउंडेशन कोर्स के नाम जाना जाता है, इसे करने के लिए आवेदक को 12वीं के बाद रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। यह परीक्षा हर वर्ष मई और नवंबर में आयोजित होती है।

CA इंटरमीडिएट कोर्स

CA फाउंडेशन को क्रैक कर लेने वाले कैंडिडेट के लिए दूसरा चरण CA इंटरमीडिएट कोर्स होता है। इसमें कैंडिडेट CA फाउंडेशन या ग्रेजुएशन के बाद डायरेक्ट आवेदन कर सकते हैं। किसी भी स्ट्रीम से ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले कैंडिडेट्स को CA फाउंडेशन करना ज़रूरी नहीं होता है, लेकिन इसके लिए कैंडिडेट्स को ग्रेजुएशन/पोस्ट ग्रेजुएशन में कॉमर्स स्ट्रीम में मिनिमम 55% और अन्य स्ट्रीम में 60% मार्क्स लाना बेहद ज़रूरी है।

आर्टिकलशिप

CA IPCC या इंटरमीडिएट कोर्स करने के बाद आपको किसी CA के अंतरगर्त या अपनी 3 साल की आर्टिकलशिप पूरी करनी होगी। यहाँ आपको टैक्स रिटर्न से लेकर ऑडिटिंग तक का प्रैक्टिकल नॉलेज मिलता है। यहाँ आपको CA के कार्य और जिम्मेदारियों के बारे में पता चलेगा।

CA फाइनल

कैंडिडेट जब CA इंटरमीडिएट को पास कर लेते हैं और अपनी आर्टिकलशिप पूरी कर लेते हैं या ट्रेनिंग पूरी करने से 6 महीने पहले CA फाइनल के लिए अप्लाई कर सकते हैं। यह CA बनने का अंतिम चरण होता है, जिसे पास करने के बाद कैंडिडेट को CA पद के लिए लिए अप्पोइंट कर लिया जाता है।

कंपनी सेक्रेटरी कैसे बनें?

एक महत्वाकांक्षी कंपनी सेक्रेटरी उम्मीदवार के लिए तीन चरणों को पूरा करना होता है। तीन चरणों में फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल कोर्स के लिए अप्लाई करना हैं। कंपनी सेक्रेटरी कैसे बने के लिए स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस नीचे दी गई है:

  • अपनी 12वीं तक की स्कूली शिक्षा कॉमर्स स्ट्रीम से पूरी करनी होगी।
  • 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद छात्रों को इंस्टिट्यूट ऑफ़ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ़ इंडिया में फाउंडेशन कोर्स के लिए आवेदन करना होगा। यह कोर्स आठ महीने की अवधि का होता है। प्रवेश के तीन साल के भीतर कोर्स को पास करना आवश्यक है।
  • एक बार जब छात्र ICSI फाउंडेशन कोर्स पूरा कर लेते हैं तो आप ICSI इंटरमीडिएट कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।
  • ICSI इंटरमीडिएट कोर्स पास करने के बाद छात्र ICSI के अंतिम चरण में एनरोलमेंट के लिए पात्र हैं, जो कि CS बनने की प्रक्रिया में अंतिम स्टेप है।
  • अगला कदम ट्रेनिंग पूरी करना है। कोर्स के अंतिम स्तर को पूरा करने के बाद छात्रों को शार्ट टर्म ट्रेनिंग से गुजरना चाहिए।
  • इंटरमीडिएट लेवल के दौरान और अंतिम स्तर के बाद ट्रेनिंग द्वारा प्राप्त प्रैक्टिकल नॉलेज ICSI की एसोसिएट मैम्बरशिप प्राप्त करने में मदद करती है।
  • एक बार छात्रों का सफल प्रशिक्षण पूरा हो जाने के बाद, वे एसोसिएट कंपनी सेक्रेटरी बनने के योग्य हो जाते हैं।
  • कंपनी सेक्रेटरी के करियर का मुख्य मार्ग तभी शुरू होता है, जब वे एसोसिएट कंपनी सेक्रेटरी के रूप में योग्य होते हैं।

 

कोर्स अवधि 

CA aur CS me antar के संबंध में एक और महत्वपूर्ण कोर्स की अवधि है। CA और CS दोनों कोर्स में 3 लेवल शामिल हैं, लेकिन प्रत्येक क्षेत्र की अवधि एक-दूसरे से अलग होती हैं। अगर तुलना की जाए तो CS, CA से छोटा होता है और इसे 2-3 साल में पूरा किया जा सकता है। जबकि CA को पूरा होने में 5 साल लगते हैं (प्रशिक्षण अवधि सहित)।

CA और CS के लिए योग्यता 

CA और CS दोनों ही भारत में सबसे अधिक मांग वाले करियर में से कुछ हैं और कई उम्मीदवार अपनी 12 वीं कक्षा खत्म करने के बाद CA aur CS me antar के लिए आवेदन करना शुरू करते हैं। दो कार्यक्रमों के लिए क्वालिफिकेशन प्राप्त करने के लिए आपको विस्तृत योग्यता का पालन करना होगा।

CA के लिए योग्यता 

  • आपने 10वीं के बाद की पढ़ाई कॉमर्स स्ट्रीम से पूरी की हो।
  • 12वीं में कम से कम 50% अंक प्राप्त किए हों।
  • यदि आप 12वीं के बाद CA नहीं करते हैं, तो आप अपनी ग्रेजुएशन के बाद CA के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
  • ACCA एकाउंटेंट के रूप में विचार करने के लिए आपको इन 3 योग्यता की आवश्यकता है: परीक्षा, प्रैक्टिकल अनुभव और एक एथिक मॉड्यूल। इस सर्टिफिकेट को प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों को कुल 14 पेपर पास करने होंगे। क्वालिफिकेशन प्राप्त करने से पहले उन्हें तीन साल का कार्य अनुभव पूरा करना होगा।

CS के लिए योग्यता 

  • आपने 10वीं के बाद की पढ़ाई कॉमर्स स्ट्रीम से पूरी की हो।
  • 12वीं में कम से कम 50% अंक प्राप्त किए हों।
  • यदि आप 12वीं के बाद छात्र को इंस्टिट्यूट ऑफ़ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ़ इंडिया में फाउंडेशन कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन करना होगा।

विषयों में अंतर

आगे हमारे CA aur CS me antar में, हम दोनों कोर्सेज के सिलेबस को देखेंगे। दोनों क्षेत्र एक ही डोमेन से संबंधित हैं लेकिन नॉलेज और स्किल प्रदान करते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों को पूरा करने में मदद करते हैं:

CACS
बेसिक्स ऑफ़ एकाउंटिंग कंपनी लॉ 
ऑडिट एंड असुरेन्स टैक्स लॉ 
फाइनेंसियल मैनेजमेंट एंड कॉस्टिंग इकोनॉमिक्स लेबर एंड इंडस्ट्रियल लॉ 
डायरेक्ट टैक्स जनरल एंड कमर्शियल लॉ 
मैनेजमेंट एकाउंटिंग बैंकिंग लॉ 
फाइनेंसियल एनालिसिस इंस्युरेन्स- लॉ एंड प्रैक्टिस 

करियर के अवसरों में अंतर

जो छात्र CS में अपना करियर बना रहे हैं, वे वैश्विक स्तर पर बिग कॉर्पोरेट फर्म में अवसरों की एक विस्तृत श्रृंखला तलाश सकते हैं। वे गवर्नेंस, एडमिनिस्ट्रेशन, स्टेकहोल्डर्स के साथ मीटिंग और बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स जैसे विभिन्न विभागों में नौकरी के अवसर पा सकते हैं। छात्र विभिन्न फर्म के लिए कंपनी सेक्रेटरी के रूप में स्वतंत्र रूप से काम करने के विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं।

CA में करियर बनाने वाले छात्रों के पास CS की तुलना में करियर के अधिक अवसर होते हैं। वे गवर्नमेंट आर्गेनाइजेशन, प्राइवेट फर्म्स, बैंक, लॉ फर्म, बिज़नेस इंटरप्राइजेज, सिविल सर्विसेज आदि सहित सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों का पता लगा सकते हैं। 

CA और CS की सैलरी 

CA की औसत सैलरी CS से ज्यादा है। Glassdoor के अनुसार, भारत में एक कंपनी सेक्रेटरी की औसत सैलरी 6 लाख रुपये/सालाना है जबकि भारत में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की औसत सैलरी लगभग 8 लाख रुपये/सालाना है। 

टॉप रिक्रूटर्स 

जब CA aur CS me antar के लिए नौकरी के अवसरों की बात आती है, तो ग्रेजुएट्स भारत में प्राइवेट और पब्लिक दोनों क्षेत्र में आकर्षक विकल्प पा सकते हैं। योग्य CA और CS की मांग बढ़ रही है और उम्मीदवार विविध क्षेत्रों में कई तरह के प्रोफाइल चुन सकते हैं। आइए भारत में CA और CS को रिक्रूट करने वाली टॉप कम्पनीज इस प्रकार हैं।

Wednesday, February 1, 2023

बीए अकाउंटेंसी में करियर

 बीए अकाउंटेंसी 3 साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स है। 3 साल की अवधि वाले इस कोर्स को 6 सेमेस्टर में बांटा गया है। हर साल छात्रों को दो सेमेस्टर पढ़ाए जाते हैं और इन सेमेस्टर के अंत में परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इस कोर्स में छात्रों को अकाउंटिंग में प्रोफेशनल प्रैक्टिस, मैनेजमेंट अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, टैक्सेशन और फाइनेंशियल अकाउंटिंग के साथ-साथ मैनेजमेंट, बिजनेस लॉ, इकोनॉमिक्स, बिजनेस, मैथमेटिक्स, स्टैटिसटिक्स जैसे अन्य कोर्स भी पढ़ाए जाते हैं। छात्र इस कोर्स को कक्षा 12वीं के बाद से कर सकते हैं। कोर्स करने के लिए छात्रों को कक्षा 12वीं में प्रमुख विषयों से तौर पर मैथमेटिक्स, इकोनॉमिक्स, अकाउंटिंग और बिजनेस स्टडीज पढ़ा होना जरूरी है। या सीधे तौर पर वह कॉमर्स का छात्र होना चाहिए। इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्रों के पास कई अच्छे करियार स्कोप होते हैं। छात्र आगे की पढ़ाई के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। इस कोर्स की फीस 3 हजार से 5 लाख तक जा सकती है। कोर्स फीस संस्थान आधारित होती है। सराकरी के मुकाबले प्राइवेट संस्थानों की फीस अधिक होती है। कोरिस की फीस कॉलेज की रैंकिंग पर भी आधारित होती है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्र सालाना 3 लाख से 10 लाख सकते कमा सकते हैं। आइए कोर्स की योग्यता, कॉलेज, फीस, जॉब स्कोप और सैलरी के बारे में और अधिक जानकारी दें।

 बीए अकाउंटेंसी प्रवेश प्रक्रिया इस कोर्स में छात्र मेरिट और एंट्रेंस टेस्ट (प्रवेश परीक्षा) के आधार पर दाखिला ले सकते हैं। मेरिट बेस पर दाखिला छात्रों के कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर होता है। इसके लिए छात्रों कक्षा 12वीं की परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना होता है। हर संस्थान या कॉलेज एक कट ऑफ लिस्ट जारी करता है जिसके आधार पर छात्र अपने पसंसद के कॉलेज या उनेक 12वीं के अंकों के आधार पर जो कॉलेज उन्हें अलॉट किया जाता है उसमे प्रवेश ले सकते हैं।
 प्रवेश परीक्षा के आधार पर छात्रों को कक्षा 12वीं के बाद सस्थान या कॉलेज द्वारा आयोजिता की जाने वाली परीक्षा में भाग लेना होता है। छात्रों को अपने पसंद के कॉलेज में प्रवेश लेने के लिए प्रवेश परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना होता है। परीक्षा में छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर एक शॉर्ट लिस्ट जारी की जाती है जिसके आधार पर चुने गए छात्रों को प्रवेश दिया जाता है
 शेफर्ड लीप- पोल वॉल्टिंग और हाइकिंग का मिश्रण आईपीयू सीईटी एनपीएटी सीयूईटी दोनों ही आधार पर कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए छात्रों को सबसे पहले कोर्स के लिए आवेदन करना होता है। इसके लिए छात्रों को योग्यता के आधार पर आवेदन करना होता है। छात्रों को कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन पत्र में मांगी गई साीर जानाकरी भर कर सूमिट करना है फिर मांगे गए सभी दस्तावेजों को अपलोड कर आगे आवेदन शुल्क का भुगतान कर आवेदन पत्र सबमिट करना है। इसके बाद जारी सूचना के आधार पर प्रवेश परीक्षा या कट ऑफ के जरिए छात्र कोर्स में प्रवेश ले सकता है। कोर्स की योग्यता (एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया) नीचे दिया गया है।
 बीए अकाउंटेंसी कोर्स योग्यता (एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया) किसी भी कोर्स को करने के लिए सबसे पहले उस कोर्स की एलिजिबिलिटी को बारे में जानना जरूरी है। उसकी प्रकार बीए अकाउंटेंसी कोर्स योग्यता कुछ इस प्रकार है- किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से कक्षा 12वीं पास होना अनिवार्य है। बीए अकाउंटेंसी कोर्स करने के लिए छात्र को 12वीं कक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक लाने आवशयक हैं। इसी के साथ आरक्षित श्रेणी के छात्रों के लिए अंक प्रतिशत में 5 प्रतिशत की छुट मिलती है। यानी आरक्षित श्रेणी के छात्र 45 प्रतिशत पर कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। बीए अकाउंटेंसी कोर्स के लिए छात्रों को प्रमुख विषयों से तौर पर मैथमेटिक्स, इकोनॉमिक्स, अकाउंटिंग और बिजनेस स्टडीज पढ़ा होना आवश्यक है। बीए अकाउंटेंसी के प्रकार बीए अकाउंटेंसी कोर्स दो तरह से किया जा सकता है। इस कोर्स को छात्र रेगुलर और डिस्टेंस मोड दोनों से किया जा सकता है। फुल टाइम (रेगुलर) कोर्स

 बीए अकाउंटेंसी फुल टाइम कोर्स में छत्रों को रेगुलर कॉलेज जाना होता है। इसमें पूरे साल छात्रों की क्लास होती है। लेक्चर होते हैं। इसके साथ अन्य प्रकार की गतिविधियों के माध्मय से छात्रों को काफी कुछ सीखने को मिलता है। फुल टाइम कोर्स में प्रवेश मेरिट के आधार पर और पर्वेश परीक्षा दोनों के आधार पर होता है।

 डिस्टेंस मोड (ओपन) कोर्स छात्र बीए अकाउंटेंसी डिस्टेंस मोड या ओपन से कोर्स कर सकते हैं। किस कारण वर्ष कुछ छात्र रेगुलर से कोर्स नहीं कर पाते हैं या फिर वह जॉब या डिप्लोमा के साथ इस कोर्स को ओपन से करते है। इस कोर्स में छात्रों को रेगुलर कोर्स की तरह क्लास नहीं लेनी होती हैं। हफ्ते में एक दिन की क्लास होती है उसमें भी छात्र चाहे तो वह क्लास ले सकता है। नहीं तो नहीं। छात्र को डिस्टेंस कोर्स में केवल परीक्षा के लिए जाना होता है। डिस्टेंस मोड में ज्यादतर मेरिट बेस पर दाखिला दिया जाता है। नीचे आपको टॉप कॉलेज के साथ-साथ ओपन कॉलेज और उनकी फीस भी दी गई है। बीए अकाउंटेंसी टॉप कॉलेज और उनकी फीस बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी : 3,000 रुपए कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता : 2,000 रुपए दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली : 10,000 रुपए मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई : 3,500 रुपए अलगप्पा विश्वविद्यालय, तमिलनाडु : 23,500 रुपए गुवाहाटी विश्वविद्यालय, गुवाहाटी : 20,000 रुपए लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, पंजाब : 50,000 रुपए
 बीए अकाउंटेंसी डिस्टेंस कॉलेज और उनकी फीस इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली : 13,600 रुपए अलगप्पा विश्वविद्यालय, तमिलनाडु : 20,000 रुपए मदुरै कामराज विश्वविद्यालय, मदुरै : 12,750 रुपए बीए अकाउंटेंसी कोर्स सिलेबस अकाउंटेंसी में बीए कोर्स करने की इच्छा रखने वाले छात्रओं को बाता दें कि अकाउंटेंसी कोर्स को सेमेस्टर सिस्टम के तहत 6 सेमेस्टर में बांटा गया है। मुख्यतः कोर्स को सेमेस्टर में बाट कर शिक्षा को छात्रों के लिए आसान बनाने का प्रयत्न किया गया है। बीए अकाउंटेंसी कोर्स का सिलेबस कुछ इस प्रकार है। सेमेस्टर 1 इंग्लिश फाइनेंसियल एकाउंटिंग 1 बिजनेस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क सेमेस्टर 2 इकोनॉमिक्स 1 बिजनेस मैथ्स एंड स्टैटिसटिक्स प्रिंसिपल एंड प्रैक्टिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बिजनेस कम्युनिकेशन सेमेस्टर 3 इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एंड एप्लीकेशन इन बिजनेस प्रिंसिपल ऑफ मार्केटिंग एडवांस बिजनेस मैथ सेमेस्टर 4 इकोनॉमिक्स 2 फाइनेंशियल अकाउंटिंग 2 डायरेक्ट एंड इनडायरेक्ट टैक्सेशन सेमेस्टर 5 फाइनेंशियल अकाउंटिंग 3 ऑडिटिंग इकोनॉमिक्स 3 सेमेस्टर 6 कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग एनवायरमेंटल स्टडीज प्रोजेक्ट बीए अकाउंटेंसी कोर्स के बाद स्कोप बीए अकाउंटेंसी कोर्स करने के बाद छात्र आगे की पढाई के लिए आवेदन कर सकते हैं और यदि वह सीधा नौकरी करना चाहतें है तो वह नौकरी के लिए आवेदन भ कर सकते हैं। आगे की पढ़ाई में इच्छा रखने वाले छात्र कोर्स पूरा होने के बाद नीचे दिए गए अन्य कोर्सेस के लिए आवेदन कर सकते हैं। एमए इन अकाउंटेंसी एमबीए एमकॉम पीजीडीएम आदि के लिए आवेदन कर सकते हैं। जो छात्र कोर्स पूरा होने के बाद नौकरी के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वह नीचे दी गई जॉब प्रोफाइल को देख सकते हैं। रिस्क एनालिस्ट फाइनेंशियल प्लानर इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट अकाउंट हैंडलर टैक्स एडवाइजर अकाउंटेंट भर्तिकर्ता बैंकस एमएनसी कंसलटिंग फर्म सेंसेक्स निफ्टी कमर्शियल ऑफिस जॉब प्रोफाइल और उनकी सालाना सैलरी रिस्क एनालिस्ट के तौर पर आप साल का 5 लाख आरम से कमा सकते हैं। फाइनेंशियल प्लानर के तौर पर आप साल का 7 लाख आरम से कमा सकते हैं। इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट के तौर पर आप सालाना 6 लाख तक कमा सकते हैं