Friday, March 11, 2022

मेडिकल लैबरेटरी टेक्निशन करियर

मेडिकल लैब टेस्ट से डॉक्टर्स को बीमारियों का पता लगाने से लेकर के उसके उपचार के तरीके में मदद मिलती है। माइक्रो आर्गेनिज्म स्क्रीनिंग, सेल काउंटिंग आदि की जानकारी भी मेडिकल लैब टेक्नॉलजी से ही मिलती है। सैंपलिंग, टेस्टिंग, रिपोर्टिंग, इन्वेस्टिगेशन में इनकी अहम भूमिका होती है।

मेडिकल लैबरेटरी टेक्निशन (Medical laboratory technician), डाक्टरों के निर्देश पर काम करते हैं। मशींस के रख-रखाव से लेकर लैबरेटरी में नमूनों की जांच और विश्लेषण में काम आने वाला घोल भी लैब टेक्निशन ही बनाते हैं। इन्हें मेडिकल साइंस के साथ-साथ लैब सुरक्षा नियमों और जरूरतों के बारे में पूरी जानकारी होती है। लैब टेक्निशन नमूनों की जांच का काम करते हैं। जांच के दौरान एमएलटी (Medical laboratory technician) कुछ सैंपलों को आगे की जांच या फिर जरूरत के अनुसार उन्हें सुरक्षित भी रख लेता है।
कोर्स एवं योग्यता
सर्टिफिकेट इन मेडिकल लैब टेक्नॉलीजी (सीएमएलटी) यह छह महीने का कोर्स है जिसके लिए योग्यता है 10वीं पास। वहीं डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नॉलजी के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। बीएससी इन एमएलटी के लिए 12वीं विज्ञान विषयों यानी फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायॉलजी के साथ पास होना जरूरी है। कोर्स की अवधि है तीन वर्ष। एमएससी इन मेडिकल लैबरेटरी टेक्नॉलजिस्ट (एमएलटी-Medical laboratory technician) प्रोग्राम में प्रवेश करने के लिए अभ्यर्थी के पास पहले हाई स्कूल डिप्लोमा होना चाहिए। इसके बाद दो साल का एसोसिएट प्रोग्राम करना होता है। यह प्रोग्राम कम्यूनिटी कॉलेज, टेक्निक्ल स्कूल, वकेशनल स्कूल या यूनिवर्सिटी द्वारा कराया जाता है।

अवसर
ज्यादातर प्रांतों में क्लिक लैबरेटरी टेक्निशन के लिए कोई प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होती लेकिन कुछ राज्यों में इन टेक्निशन के पास काम करने के लिए प्रमाण पत्र होना जरूरी है। प्रमाण पत्र वाले तकनीशनों के लिए इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं होती हैं। आप किसी भी मेडिकल लैबरेटरी, हॉस्पिटल, पैथोलॉजिस्ट के साथ काम कर सकते हैं। ब्लड बैंक में इनकी खासी डिमांड रहती है। आप बतौर रिसर्चर व कंसल्टेंट के अलावा खुद का क्लिनिक खोल सकते हैं।

आमदनी
सामान्य तौर पर एक एमएलटी (Medical laboratory technician) का वेतन दस हजार से शुरू होता है जबकि पैथोलॉजिस्ट को तीस हजार से चालीस हजार तक सैलरी मिल जाती है। साथ ही योग्यता और तजुर्बे के आधार पर उनके वेतन में इजाफा होता चला जाता है। देष के साथ साथ विदेशों में भी इनकी खासी डिमांड है।

Monday, March 7, 2022

आज के दौर में टेक्नोलॉजी बहुत आगे बढ़ चुकी, लगभग हर क्षेत्र में मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मेडिकल भी एक ऐसा ही क्षेत्र है जिसमें बहुत सी आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल रोगों के बारे में पता करने के लिए हो रहा है। वैसे तो सबसे बढ़िया मेडिकल कोर्स एमबीबीएस माना जाता है लेकिन अगर आप बिना एमबीबीएस किए बिना मेडिकल सेक्टर में जाना चाहते हैं तो आप किसी पैरामेडिकल कोर्स को कर सकते हैं। जिसमे MRI टेक्निशियन कोर्स भी अच्छा माना जाता है.

जब भी आप किसी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में जाते हैं तो कभी ना कभी आपने MRI कराया होगा, MRI का फुल फॉर्म मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग होता है और जब भी आप इस टेस्ट को करवाते हैं तो इसके बाद आपको एक रिपोर्ट दी जाती है। इस रिपोर्ट की मदद से ही डॉक्टर आपका सही से उपचार कर पाते हैं।

यदि आप यह जानने में रुचि रखते हैं कि MRI डेली टेक्नीशियन कोर्स कैसे किया जाता है तो इस आर्टिकल में बने रहे, इस आर्टिकल में आपको इस कोर्स के बारे में सभी जरूरी जानकारी दी जाएगी।

MRI टेक्निशियन कोर्स क्या होता है?

MRI टेक्निशियन एक ऐसा कोर्स होता है जिसके बाद आप किसी भी निजी या सरकारी अस्पताल के साथ-साथ कुछ अन्य जगहों पर MRI टेक्निशियन का काम कर सकते हैं।

इस कोर्स में आपको रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दी जाती है। अगर आप एक MRI टेक्नीशियन बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपके पास नीचे दिए हुए कोर्सों के विकल्प होंगे और इनमें से किसी भी कोर्स को करने के बाद आप एक MRI टेक्निशियन बन जाएंगे –

  • बैचलर ऑफ रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी
  • डिप्लोमा इन रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी
Course Diploma in MRI Technician
Duration 1 Year 
Eligibility 10+2 Pass with 10+2 Pass with PCB/PCM
Employment Sectors diagnostic labs, medical imaging labs, radiography centres and hospitals or clinics etc. 
Job Profiles MRI technicians 

MRI टेक्निशियन का क्या काम होता है?

एमआरआई टेक्निशियन किसी बीमारी का कारण पता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, एक MRI टेक्निशियन MRI मशीन के साथ साथ और भी अन्य मशीनों को चला सकता है और इन मशीनों के द्वारा मरीजों का टेस्ट किया जाता है। MRI टेक्निशियन कोर्स करने के बाद आप निम्नलिखित पदों पर काम कर सकते हैं

  • रेडियोलॉजी टेक्निशियन
  • MRI टेक्निशियन
  • रेडियोलॉजी नर्स
  • अल्ट्रासाउंड टेक्नीशियन
  • सीटी स्कैन टेक्निशियन

रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट को मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के साथ काम करना पड़ता है जो स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डायग्नाॅस्टिक इमेजेस को विकसित करने में मदद करता है। रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में, आपको मस्तिष्क या किसी भी मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं में इमेज के प्रोडक्शन में मदद करनी होगी। या खेल की चोटों से संबंधित मुद्दों, आदि में।

MRI Technician Qualification 

अगर आप हमारे टेक्नीशियन का कोर्स करना चाहते हैं तो इसके लिए आपने कम से कम 12वीं पास किया होना चाहिए और इसी के साथ आपने विज्ञान वर्ग से 12वीं पास किया होना चाहिए। अगर आप डिप्लोमा कोर्स करना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको 12वीं कक्षा विज्ञान वर्ग (साइंस स्ट्रीम) के साथ पास करनी होगी

भारत में कुछ कॉलेज ऐसे भी हैं जहां आप दसवीं के बाद भी डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं हालांकि अगर आप बैचलर ऑफ रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी का कोर्स करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको आपकी दसवीं परीक्षा में कम से कम 50% अंक होने चाहिए।

MRI टेक्निशियन कोर्स करने के लिए उम्र सीमा क्या है?

एमआरआई टेक्निशियन बनने के लिए आप डिप्लोमा डिग्री कोर्स कर सकते हैं और इन दोनों ही कोर्स को करने के लिए आपकी एज कम से कम 17 वर्ष होनी चाहिए, 17 वर्ष की आयु से अधिक जो भी व्यक्ति इस कोर्स को करना चाहता है, वह इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकता है।

MRI Technician Salery 

अगर आप MRI टेक्निशियन कोर्स के बाद अच्छी सैलरी पाना चाहते हैं तो आपको किसी अच्छे हॉस्पिटल या फिर किसी अच्छे मेडिकल सेंटर में नौकरी के लिए अप्लाई करना होगा। MRI टेक्निशियन कोर्स करने के बाद अगर आप किसी अच्छी जगह पर नौकरी करते हैं तो शुरुआत में आपकी मासिक सैलरी 25,000 तक हो सकती है, इसी के साथ जैसे-जैसे आपका एक्सपीरियंस पड़ेगा तो आपकी सैलरी भी बढ़ाई जा सकती है।

MRI टेक्निशियन कोर्स के लिए टॉप कॉलेज कौन से है?

MRI टेक्निशियन कोर्स 1 बेहतरीन कोर्स है, जिसको करने के बाद आप अच्छी नौकरी पा सकते हैं, हालांकि जब भी आप इस कोर्स को करें तो कॉलेज के बारे में जरूरी जानकारी इकट्ठा कर ले। ज्यादातर लोग इस कोर्स को किसी अच्छे कॉलेज से करना चाहते हैं लेकिन उन्हें इस कोर्स के लिए टॉप Colleges के बारे में जानकारी नहीं होती, नीचे कुछ कॉलेजों की लिस्ट दी गई है जो कि MRI टेक्निशियन कोर्स के लिए टॉप के लिए मुख्य कॉलेज हैं –

  • Tripura Institute Of Paramedical Sciences, Agartala
  • Mahatma Gandhi University, Kottayam
  • Postgraduate Institute of Medical Sciences, Chandigarh
  • University College of Medical Science and GTB Hospital, Shahadra, Delhi
  • Christian Medical College, Vellore
  • Rajiv Gandhi University of Health Sciences, Bangalore

MRI टेक्निशियन कोर्स कैसे करें?

अगर आप एक MRI Technician बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको यह कोर्स करना होगा लेकिन अक्सर लोग इस कोर्स को करने की प्रक्रिया अच्छे से समझ नहीं पाते हैं। नीचे इस कोर्स को करने से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया के बारे में बताया गया है।

#1. साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास करना है जरूरी।

अगर आप सच में MRI टेक्नीशियन कोर्स करने के इच्छुक हैं तो इसके लिए सबसे पहले आपको विज्ञान वर्ग से 12वीं पास करनी होगी। आपको 12वीं की परीक्षा में अच्छे अंक लाने होंगे और अगर आप 50% से अधिक अंक लाते हैं तो आप इस कोर्स को कर पाएंगे।

#2. एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करें।

भारत में बहुत से ऐसे कॉलेज हैं जिनमें एंट्रेंस एग्जाम के जरिए MRI टेक्निशियन कोर्स में एडमिशन दिया जाता है, अगर आप इस कोर्स को करके अच्छी सैलरी पाना चाहते हैं तो आपको एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी हेतु किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन लेना होगा, इसके अलावा आप किसी कॉलेज में डायरेक्ट एडमिशन भी ले पाएंगे।

#3. कॉलेज से संपर्क में रहें।

अगर आप एंट्रेंस एग्जाम दे चुके हैं या फिर किसी कॉलेज में डायरेक्ट एडमिशन लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कॉलेज के संपर्क में रहना होगा, कॉलेज के संपर्क में रहकर आप मेरिट लिस्ट के बारे में जान पाएंगे और इससे आप को एंट्रेंस एग्जाम के जरिए उस कॉलेज में एडमिशन लेने में आसानी होगी।

#3. MRI Technician कोर्स में एडमिशन लें।

इसके बाद आपको किसी गवर्नमेंट या प्राइवेट कॉलेज में MRI Technician कोर्स में एडमिशन लेना होगा, एडमिशन लेने के बाद आपके कोर्स के अनुसार आपको रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी के बारे में पढ़ाया जाएगा। पढ़ाई के दौरान आपको हर सेमेस्टर में होने वाले एग्जाम में अच्छे अंक लाने होंगे।

#4. MRI Technician डिग्री प्राप्त करें।

अगर आपके MRI Technician कोर्स की अवधि पूरी हो चुकी है तो आप अपने कॉलेज या यूनिवर्सिटी से डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। इस कोर्स को पूरा करने के बाद डिग्र सर्टिफिकेट लेना बहुत जरूरी होता है, इस डिग्री या सर्टिफिकेट की मदद से ही आपको नौकरी दी जाएगी।

Saturday, March 5, 2022

डिप्लोमा इन कार्डियोलाजी टेक्नीशियन

मेडिकल फील्ड में करियर बनाने के लिए वैसे तो कई ऑप्शन हैं, उन्हीं में से एक है कार्डिएक केयर टेक्निशन। ये एक मेडिकल प्रफेशनल्स की तरह काम करते हैं जो बीमारी का पता लगाने के लिए मरीजों का टेस्ट्स करते हैं और इलाज खोजन में डॉक्टरों की मदद करते हैं। ये एक तरह से यह विशेषज्ञों के आंख और हाथ होते हैं।

हॉस्पिटल में बतौर टेक्निशन काम करने के लिए कुछ प्रैक्टिकल स्किल्स का होना बेहद जरूरी है क्योंकि यह ऑपरेशन के समय डॉक्टर के दाएं हाथ की तरह काम करता है। इसलिए सभी परिस्थितियों से निपटने और मशीनों की जानकारी रखना इनके लिए भी जरूरी होता है, जैसे मॉनिटर और रिकॉर्डर में तार जोड़ने के बारे में ज्ञान और बेहतर कनेक्शन सुनिश्चित करने के लिए रीदम स्ट्रीप या लीड ट्रेसिंग रिकॉर्ड करने का ज्ञान, ईसीजी वेवफॉर्म की पहचान करना, आर्टफैक्ट फ्री-ट्रेसिंग और सही लीड लगाने जैसी क्षमता होनी चाहिए।
जरूरी योग्यता
इस फील्ड में कोर्स करने के लिए कैंडिडेट का किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से 12वीं में साइंस से पास होना जरूरी है। इसके अलावा कई कॉलेज इस फील्ड में सर्टिफिकेट कोर्सेज भी उपलब्ध करते हैं, जिसे मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास कैंडिडेट भी करके करियर बना सकता है। अगर कैंडिडेट इस फील्ड में निपुणता हासिल करना चाहता है तो वह 12वीं के बाद बैचलर ऑफ साइंस इन कार्डियक केयर टेक्नॉलजी भी कर सकता है। 

सैलरी कितनी
पैरामेडिकल की बढ़ती मांग को देखते हुए देश में ही नही बल्कि विदेशों से भी पैरामेडिक्स की डिमांड आ रही है। देश भर में सरकारी के अलावा प्राइवेट अस्पतालों की बढ़ती कतारों से जॉब की कोई कमी नहीं दिखती। जहां तक वेतन की बात है तो शुरुआती तौर पर एक कार्डिएक केयर टेक्निशन, मासिक 20 से 30 हज़ार रुपये तक कमा सकता है और अनुभव के आधार पर इसमें बढ़ोतरी होती जाती है। इसके अलावा कैंडिडेट सरकारी अस्पतालों में भी परीक्षा देकर आसानी से नौकरी पा सकता है। 

संस्थान
 दिल्ली पैरामेडिकल ऐंड मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली
www.dpmiindia.com 

 क्रैडल इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली
www.cmi-hm.com
महर्शि मर्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी, अम्बाला, हरियाणा
www.mmumullana.org

 शिवालिक इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल टेक्नॉलजी, चंडीगढ़
www.shivalikinstitute.org
(संस्थानों के नाम सिर्फ संकेत के लिए )

Wednesday, March 2, 2022

रेडियोलॉजी टैक्नीशियन

मैडीकल का दायरा सिर्फ डॉक्टर या नर्स तक सीमित नही है, इसमें कई लोग जुड़े होते हैं। उन्हीं में से एक है, रेडियोलॉजी टैक्नीशियन। आजकल हर छोटी-बड़ी बीमारी का आकलन करने के लिए एक्स-रे किया जाता है। यह कार्य रेडियोलॉजिस्ट करते हैं। वर्तमान समय में यह क्षेत्र काफी तेजी से उभर रहा है। करियर बनाने के लिए इस क्षेत्र में बेहतरीन संभावनाएं हैं।
कार्यक्षेत्र
रेडियोलॉजिस्ट शरीर के विभिन्न अंगों का एक्स-रे करते हैं। एक्स-रे करते वक्त मरीज तथा आसपास के लोगों पर रेडियोएक्टिव किरणों का साइड इफैक्ट न हो, इस बात की निगरानी भी रखते हैं। इसके अलावा वे रेडियोग्राफिक उपकरणों की देखभाल तथा रोगियों के रिकॉर्ड्स भी मेंटेन करते हैं । 
कोर्स
रेडियोलॉजी टैक्नीशियन बनने के लिए कई तरह के कोर्स उपलब्ध  हैं। इसमें सर्टीफिकेट कोर्स से लेकर डिप्लोमा, डिग्री और मास्टर्स तक के कोर्स उपलब्ध हैं जैसे बी.एस.सी. इन रेडियोलॉजी (3 साल), सर्टीफिकेट इन रेडियोग्राफी (1 साल), डिप्लोमा इन एक्स-रे टैक्नीशियन (1 साल), पी.जी. डिप्लोमा इन रेडियो थैरेपी टैक्नोलॉजी (2 साल) आदि। 
योग्यताएं
इस क्षेत्र से संबंधित स्नातक डिग्री, सर्टीफिकेट, तथा डिप्लोमा कोर्स करने के लिए फिजिक्स, कैमिस्ट्री व बॉयोलॉजी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं पास होना जरूरी है। यदि आप साइंस विषयों में स्नातक हैं, तो पी.जी. डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं।  गौरतलब है कि इसमें प्रवेश मुख्यत: बारहवीं पास अंकों के आधार पर ही होता है, लेकिन कुछ संस्थान एंट्रैंस टैस्ट व इंटरव्यू के आधार पर भी चयन करते हैं । 
करियर  
इस क्षेत्र में स्नातक रेडियोग्राफर, रेडियोलॉजिक प्रौद्योगिकीविद, वैज्ञानिक प्रयोगशाला सहायक, क्लीनिक सहायक, एक्स-रे तकनीशियन, अल्ट्रासाऊंड विशेषज्ञों के रूप में काम कर सकते हैं। डॉक्टर रेडियोलाजिस्ट से एम.आर.आई. और एंजियोग्राफी व इलाज परीक्षण के सभी प्रकार की मदद लेते हैं। 
अवसर
यह करियर विकल्प के तौर पर लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए उपयुक्त है। रेडियो इमेजिंग में एक साल के लंबे कार्यक्रम में  दो सीमैस्टर होते हैं। कोर्स के दौरान छात्रों को शरीर रचना विज्ञान, शरीर विज्ञान, विकिरण भौतिकी, इमेजिंग भौतिकी और रेडियोग्राफिक स्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है। सफल स्नातकों के लिए सरकारी और निजी  दोनों क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं। रेडियोलॉजिस्ट बनने के बाद आप किसी भी नर्सिंग होम, अस्पताल, डाइग्नॉस्टिक सैंटर, अत्याधुनिक अस्पताल या फिर खुद का काम शुरू कर सकते हैं।
सैलरी
भारत में रेडियोलॉजी टैक्नीशियन की शुरूआती सैलरी 8 से 10 हजार रुपए प्रतिमाह होती है। वहीं एक अनुभवी व प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट 15 हजार से 20 हजार रुपए प्रतिमाह प्राप्त कर सकता है।
प्रमुख संस्थान 
ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ मैडीकल साइंसेज, नई दिल्ली 
टाटा मैमोरियल हास्पिटल, मुंबई 
क्रिश्चियन मैडीकल स्कूल,  वैल्लूर, तमिलनाडु
बी.जे. मैडीकल कॉलेज, अहमदाबाद, गुजरात


Friday, February 25, 2022

ऑफथल्मिक टेक्निशन में करियर

एक ऑफथल्मिक असिस्टेंट का काम आंखों की जांच के साथ-साथ ट्रीटमेंट व बचाव का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा क्लिनिकल डेटा इकट्ठा करना, मरीज के रिकॉर्ड को संभालने का जिम्मा भी असिस्टेंट का होता है। इसके तहत कई तरह के आंखों से संबंधित क्लिनिकल फंक्शन किए जाते हैं। ऑफथल्मिक असिस्टेंट, आंखों के डॉक्टर को मरीज की हिस्ट्री, विभिन्न तरह की टेक्निकल जांच करने में मदद करता है।

संभावनाएं
दुनिया की आबादी तेजी से बढ़ रही है। जिस तेजी से आबादी बढ़ रही है, उसी हिसाब से लोगों में स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं भी पैदा हो रही हैं। साथ ही नई टेक्नॉलजी ने भी लोगों में आंख से जुड़ीं समस्याएं पैदा की हैं। मौजूदा समय में लोगों का स्क्रीन से ज्यादा वास्ता पड़ता है जिससे आंख में दिक्कत होती है। 

क्या होनी चाहिए योग्यता
ऑफथल्मिक टेक्निशन बनने के लिए आपको डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करना जरूरी है। डिप्लोमा कोर्स 2 साल का होता है। इस कोर्स को करने के लिए अभ्यर्थी को कम से कम 12वीं पास होना चाहिए और उसने फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायॉलजी जैसे विषयों को पढ़ा हो। दरअसल, साइंस के स्टूडेंट्स के लिए यह फील्ड बहुत मुफीद है।

इस फील्ड में कांट्रैक्ट और रिफ्रैक्टिव सर्जरी, ग्लूकोमा ट्रीटमेंट, मेडिकल रेटिना ऑपथैलमॉलजी और न्यूरो ऑपथैमॉलजी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस कोर्स के तहत ऑक्यूलर फार्माकॉलजी, केराटोमेटरी, आई मसल्स, रेफ्राक्टोमेटरी, विजुअल एक्युटी वगैरह पढ़ाया जाता है। डिप्लोमा इन ऑफथलमॉलजी दो वर्ष का कोर्स है। पहले सेमिस्टर में एक वर्ष तक थिअरी और प्रैक्टिकल कराया जाता है, फिर 6 महीने तक मोबाइल यूनिट के जरिए प्रशिक्षण दिया जाता है और अगले 6 महीने प्राइमरी हेल्थ क्लिनिक में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें 17 से 35 वर्ष तक की उम्र के अभ्यार्थी ऐडमिशन ले सकते हैं।

कोर्स डीटेल्स
इस फील्ड में डिप्लोमा, बैचलर, मास्टर और डॉक्टोरल कोर्स कर सकते हैं जिसकी डीटेल नीचे दी गई है।
डिप्लोमा कोर्सेज
* ऑफथलमॉलजी में डिप्लोमा 
* ऑफथलमिक टेक्नॉलजी में डिप्लोमा 

बैचलर कोर्स
* एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी)

मास्टर कोर्स 
* ऑफथलमॉलजी सर्जरी में मास्टर
* ऑफथलमॉलजी मेडिसिन में डॉक्टर
* ऑफथलमॉलजी में पोस्टग्रैजुएट डिप्लोमा 
* क्लिनिकल ऑफथलमॉलजी में पोस्टग्रैजुएट सर्टिफिकेट प्रोग्राम

डॉक्टोरल कोर्स
* मास्टर ऑफ फिलॉसफी इन ऑफथलमॉलजी
* डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी प्रोग्राम इन ऑफथलमॉलजी 

प्रमुख संस्थान
* ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली 
* शिवालिक इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल टेक्नॉलजी, चंडीगढ़ 
* पैरामेडिकल कॉलेज, दुर्गापुर
भारतीय विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी मेडिकल कालेज, पुणे
* अमृता स्कूल ऑफ मेडिसिन, कोयंबटूर
* आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे 
* क्रिस्चन मेडिकल कॉलेज, वेल्लुरु
* डीवाई पाटिल मेडिकल कॉलेज, नवी मुंबई
* इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट 
* भारती विद्यापीठ कॉमन एंट्रेंस टेस्ट

जॉब प्रोफाइल 
* ऑफथलमॉलजिस्ट
* ऑफथलमॉलजी सर्जन 
* प्रफेसर/लेक्चरर
* ईएनटी स्पेशलिस्ट
* क्लिनिकल असिस्टेंट
* मेडिकल कंसल्टेंट

रिक्रूटर 
* एसआईएमएस हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड
* श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल, देहरादून
* वायलटरेज, बेंगलुरु 
* चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय
* फॉर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड

* ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जोधपुर 

Tuesday, February 22, 2022

आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन में करियर

आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन में सवारें अपना करियर: आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन जिसे हम अंग्रेजी में इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन कहते हैं, एक चिकित्सा निदेशक चिकित्सक की देखरेख में सेटिंग्स की एक किस्म में काम करते हैं। इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन हॉस्पिटल या हॉस्पिटल के बाहर आपातकालीन चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित प्रदाता होते हैं। इमरजेंसी चिकित्सकों को आपात स्थितियों में जैसे कोई दुर्घटना का क्षेत्र, या आपदा क्षेत्र में जल्द से जल्द प्रतिक्रिया लेने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। ये तकनीशियन ज्यादातर एम्बुलेंस में ही पाए जाते हैं क्योंकि आपातकालीन स्तिथियों में एम्बुलेंस  ही सबसे पहले पहुँचती है और ये तकनीशियन इसी स्तिथि के लिए प्रशिक्षित किये जाते हैं। एम्बुलेंस, सरकारी और अस्पतालों में सेवाओं के अलावा ये दमकल विभागों और पुलिस विभाग में भी काम करते हैं। तकनीशियन अभ्यास के एक सीमित दायरे के तहत कार्य करते हैं। ये चिकित्सा निदेशक की निगरानी में काम करते हैं।

नेचर ऑफ़ वर्क 

इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन का काम भावनात्मक रूप के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी मांग में है। इन्हें सप्ताहांत, इमरजेंसी केयर असिस्टेंट्स, पैरामैडिक, पुलिस और अग्निशमन के साथ संयोजन के रूप में काम करना पड़ता है। इन तकनीशियन को आम तौर पर अस्पताल परिवहन सेवाओंएम्बुलेंस सेवाओंबचाव और आग विभागोंऔर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के लिए कार्यरत किया जाता है। कई बार आपात स्थिति के दौरान तकनीशियन के कंधो  पर जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ जाता है और काम काफी तनावपूर्ण भी हो जाता है। इस पेशे में काम करने की वजह से ये चोटों और संक्रामक रोगों के संपर्क में भी आ जाते है लेकिन यह करियर लोगों की जान बचाने के बाद एक मानसिक संतुष्टि भी देता है।

कर्तव्य और उत्तरदायित्व

आपदा क्षेत्र में पहुंचकर पीड़ितो को हॉस्पिटल पहुँचाने से पहले उनका प्राथमिक उपचार करते हैं, पीड़ित की हालात का मूल्यांकन करके उनके उपचार का निर्धारण करते हैं, पीड़ित की हालत को स्थिर करने के लिए उनके घाव में पट्टी बांधते हैं, बहते हुए खून को नियंत्रित करते हैं, इस्तेमाल हो रहे चिकित्सा उपकरणों का ध्यान रखना और ख़राब होने पर उन्हें समय पर बदलना, हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में पीड़ित को जल्द से जल्द पहुँचाना, पीड़ित की ट्रीटमेंट और उसको दी जाने वाली दवाइयों की रिपोर्ट तैयार करना, किसी संक्रमित पीड़ित को लाने के बाद एम्बुलेंस की सफाई करना और उसे जीवाणु रहित बनाना, एम्बुलेंस में इस्तेमाल हुए कम्बल और कपड़ो को हटाकर साफ़ कपड़े लगाना, पीड़ित के परिवार वालो को सहानुभूति देते हुए उन्हें शांत रखना, मेडिकल एजेंसीज द्वारा आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में हिस्सा लेना और चिकित्सा से सम्बंधित नयी चीजो को सीखना एक इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन का काम होता है।

कोर्स एवं योग्यता 

डीपीएमआई की प्रिंसिपल अरूणा सिंह के मुताबिक इस कोर्स में डिप्लोमा के लिए अभ्यर्थी का किसी भी संकाय वा किसी भी मान्यताप्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है। कोर्स के दौरान उन्हें आपातकालीन स्थिति या किसी भी तरह की आपदा की स्थिति में किस तरह समुचित मेडिकल सुविधाओं का प्रबंध करना है, उनकी तीमारदारी और सेवा कैसे की जाती है उसकी सीख दी जाती है। वे आपदा या महामारी फैलने की स्थिति में कैसे और किस हद तक तत्पर रहें। उन्हें महामारी या आपदा पर नियंत्रण करने, जख्मी होने, या उनका उपचार कैसे किया जाए व उससे कैसे निपटा जाए उसकी ट्रेनिंग दी जाती है। इस फील्ड में आप एसएससी के द्वारा भी परीक्षा देकर किसी भी सरकारी पद के लिए आवेदन कर सकते है।

अवसर 

इस कोर्स के बाद अभ्यर्थी के लिए सरकारी और गैरसरकारी विभागों में कई अवसर खुल जाते हैं। आपदा स्तिथि में सबसे ज्यादा जरुरत मेडिकल सहयोगियों की होती है जिसमे यही तकनीशियन मेडिकल सुविधाएँ प्रदान कराने में काम आते हैं। इस कोर्स के बाद सरकारी एम्बुलेंस सेवाओं में, सरकारी अस्पतालो के आपातकालीन विभागों में, गैर सरकारी संस्थाओं में अभ्यर्थी रोजगार प्राप्त कर सकता है।

Sunday, February 20, 2022

जीएनएम कोर्स

 जीएनएम एक ऐसा कोर्स है, जिसके माध्यम से आप चिकिसा के फील्ड में सुनहरा कैरियर बना सकते हैं। चूंकि Nurse मेडिकल फील्ड का एक बहुत ही अहम और महत्वपूर्ण पद होता है, इसलिए इसमे कैरियर के अवसरों की कमी नही होती है। अगर किसी कैंडिडेट का सपना मेडिकल फील्ड में कैरियर बनाकर मरीजो की सेवा करना है, तो ऐसे लोगों के लिए GNM Career के लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है।

जीएनएम कोर्स की फुल फॉर्म जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी होती है। जीएनएम Nursing का डिप्लोमा कोर्स होता है। नृसिंग के फील्ड में Career बनाने की चाहत रखने वाले कैंडिडेट्स के लिए ये काफी अच्छा कोर्स होता है। जीएनएम के पाठ्यक्रम विवरण रोगी की देखभाल और नैदानिक उपचार से संबंधित अध्ययन कराया जाता है। इसको पैरामेडिकल कोर्स भी कहा जाता है। कोर्स के दौरान और कोर्स कंप्लीट करने के बाद 6 महीने की इंटर्नशिप भी करनी होती है

इस कोर्स को करने के लिए कैंडिडेट को फिजीक्स, केमेस्ट्री और बायोलॉजी और इंग्लिश सब्जेक्ट से 12th पास होना चाहिए। इसके बाद GNM Course में एडमिशन लिया जा सकता है।

GNM Course Duration

इस कोर्स की अवधि 3 बर्ष होती है। जिसमे 6 महीने कोर्स के बाद में इंटर्नशिप करना अनिवार्य होता है। इस तरह से ये कोर्स इंटर्नशिप सहित 3 बर्ष 6 महीने का होता है।

GNM Nursing Course Qualification

इस कोर्स को करने के लिए अभ्यार्थी की उम्र कम से कम 17 बर्ष होनी चाहिए और कैंडिडेट ने 12वीं PCB ग्रुप से किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड की हो और साथ ही 12th में इंग्लिश सब्जेक्ट भी रहा हो। इस कोर्स में एडमिशन के लिए कैंडिडेट के 12th में कम से कम 45% मार्क्स होने चाहिए।

इस कोर्स की औसतन फीस 30 हजार से लेकर 4 लाख के बीच पूरे कोर्स की होती है। इसकी फीस इस बात पर निर्भर करती है, कि आप किस तरह के Nursing College से GNM कर रहे हैं। अलग-अलग कॉलेजों में फीस का क्राइटेरिया भिन्न-भिन्न होता है। अगर आप सरकारी संस्थानों से इस कोर्स को करते हैं तो वंहा पर सालाना फीस 10 से 15 हजार के आसपास होती है। अच्छे प्राइवेट संस्थानो में 70 हजार से लेकर 1 लाख प्रतिबर्ष के बीच फीस होती है। कुछ कॉलेज ऐसे भी होते हैं, जोकीं अच्छे होने का दिखावा करते हैं, लेकिन वास्तव में अच्छे नही होते है और फीस काफी ज्यादा होती है। इसलिए एडमिशन लेते समय कॉलेज का चुनाव बहुत ही होशियारी से करें।

GNM Nursing Admission Prosess

जीएनएम कोर्स में एडमिशन डायरेक्ट भी मिल जाता है और एंट्रेंस एग्जाम के माध्यम से भी एडमिशन मिल जाता है। Government College में तो एंट्रेंस एग्जाम पास करने में बाद मेरिट के आधार पर एडमिशन होता है। प्राइवेट संस्थानो में तो डायरेक्ट ही एडमिशन मिल जाता है।

GNM Course Entrance Exam

चलिये अब हम आपको जीएनएम Course के एंट्रेंस एग्जाम के बारे में भी बता देते हैं। जिनके माध्यम से आप सरकारी Nursing College से Course को कर सकते हैं।

केजीएमयू नृसिंग एंट्रेंस एग्जाम