Tuesday, July 7, 2015

इंस्ट्रुमेंटेंशन एंड कंट्रोल इंजीनियरिंग

आज इंजीनियंरिंग, सांइस और टेक्नोलॉजी का कोई भी क्षेत्र इंस्ट्रुमेंटेंशन से अछूता नहीं है। बदलते समय के साथ हर प्रक्रिया स्वचालित हो रही है। ऐसे में कंपोनेंट और सब सिस्टम लेवल पर इंस्ट्रुमेंट का एकीकृत होना भी स्वाभाविक है। अगर आप उपलब्ध सुविधाओं का प्रयोग करते हुए चीजों को बेहतर बनाने के साथ उनहें बरकरार भी कर सकते हैं, तो आप इंस्ट्रुमेंटेंशन एंड कंटेल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना भविषय तलाश सकते हैं। 

कार्यक्षेत्र

इंस्ट्रुमेंटेंशन और कंट्रोल इंजीनियरिंग की प्रकृति इंटर डिसिप्लिनरी होती है। यह इंस्ट्रुमेंट्स और कंटेल मैकेनिज्म से डील करती है। इंस्ट्रुमेंटेंशन एंड कंट्रोल इंजीनियर का मुख्य काम टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल करते हुए इंस्ट्रुमेंट की परेशानी को ठीक करना तथा उसके डिजाइन पर फोकस करना होता है। इंस्ट्रुमेंटेंशन और कंट्रोल इंजीनियर इंडस्ट्रियल इंडस्ट्री जैसे मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थ, फूड प्रोडक्शन आदि क्षेत्रों में काम करते हैं। 

व्यक्तिगत गुण

नेताजी सुभाष इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दि‍ल्‍ली के प्रोफेसर एपी मित्तल बताते हैं कि इंस्ट्रुमेंटेंशन एंड कंट्रोल इंजीनियर का कोर्स करने वाले छात्रों में सबसे जरूरी विश्लेषणात्मक गुण होना चाहिए। इसके साथ ही अगर छात्र प्रोजेक्ट मैनेजमेंट स्किल और टेक्निकल निपुण हो तो बेहतर रहता है। इस क्षेत्र में इंजीनियर को कई लोगों से संपर्क करना तथा उनसे काम करवाना होता है, इसलिए उसमें नेतृत्व करने की क्षमता, टीमवर्क व कम्युनिकेशन योगयता बेहतर होने चाहिए। आपको एक टीम के अंतर्गत काम करना आना चाहिए। इसके अतिरिक्त आपमें हर तरह की परेशानियों से निपटने की क्षमता व प्रैक्टिकल होना जरूरी है।

कोर्सेस

इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आपका 12वीं में गणित, भौतिक विज्ञान व रसायन विज्ञान में 50 प्रतिशत अंक आना अनिवार्य है। इसके बाद आप चार वर्षीय बीई या बीटेक में प्रवेश ले सकते हैं। इसके पश्चात आप दो वर्षीय एमई और एमटेक कर सकते हैं। अगर आप चाहें तो पीएचडी भी कर सकते हैं। वैसे आईआईटी और कुछ राज्य प्रवेश परीक्षाओं के द्वारा इंजीनियरिंग में प्रवेश देते हैं।

संभावनाएँ

इस क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। आज के दौर में हर सेक्टर को इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरों की आवश्यकता पड़ती है। आप अपनी रूचि अनुसार टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों, एनर्जी कंपनियों, रिसोर्सेज कंपनियों, फूड प्रॉडक्शन, रिसर्च लैबोरेट्री में नौकरियाँ तलाश सकते हैं।

वेतन

इस क्षेत्र में शुरुआती दौर में एक इंजीनियर 9000 से 13000 रुपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकता है। सरकारी सेक्टर में प्रारंभिक आमदनी 5000 से 9000 रुपए प्रतिमाह होती है। सीनियर इंजीनियर कहीं पर भी आसानी से 30000 से 50000 रुपए प्रतिमाह कमा सकते हैं।

प्रमुख संस्थान: 

आईआईटी, चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, मुंबई, बेंगलुरु, रुड़की

इंडियन इंस्टिटयूट ऑफ इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद

इंडियन इंस्टिटयूट ऑफ इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, ग्वालियर

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ सांइस, बेंगलुरु

बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची, पिलाई

नेताजी सुभाष इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली

जेएसएस एकेडमिक ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, नोएडा

आईईसी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ग्रेटर नोएडा

Monday, July 6, 2015

हॉस्पिटल मैनेजमेंट में बनाएं अपना करियर

देशभर में अस्पतालों की तादाद बढ़ रही है और कई सुविधाओं से लैस बड़े और शानदार अस्पतालों की भी। इसके साथ ही ऐसे लोगों की जरूरत भी महसूस की जा रही है जो अस्पतालों को मैनेज करने में माहिर हों, यानी हॉस्पिटल मैनेजमेंट के गुर जानते हों। मेडिकल या नॉन मेडिकल बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स भी इस फील्ड में अपना करियर बना सकते हैं। ग्रैजुएशन या हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री या डिप्लोमा होना जरूरी है। अगर किसी फ्रेश ग्रैजुएट ने हेल्थ सविर्स या हॉस्पिटल एडमिन में मास्टर डिग्री का कोर्स अप्लाई किया है तो वह आने वाले दिनों में अपना प्रफेशनल करियर असिस्टेंट हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर या मैनेजर के तौर पर शुरू कर सकता है। अस्पताल के अलग-अलग विभागों जैसे कि फ्रंट ऑफिस, पब्लिक रिलेशन, फायनैंस, क्वॉलिटी कंट्रोल आदि में मैनेजर पद के लिए ओपनिंग हैं। समय के साथ जैसे जैसे आप एक्सपीरियंस हासिल करते हैं, आप चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर यानी सीईओ की पोस्ट तक भी पहुंच सकते हैं। ये लोग किसी अस्पताल की गवर्निंग बॉडी या बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स को रिपोर्ट करते हैं। यानी आपमें लगन और अनुभव हो तो इसमें आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।
हॉस्पिटल मैनेजमेंट प्रबंधन का एक ऐसा क्षेत्र है, जो करियर के कई रास्ते खोलता है। अगर आप भी प्रबंधन के क्षेत्र में ऐसे करियर विकल्प की तलाश कर रहे हैं, जिसमें आपके लिए अवसरों की कमी न हो तो हॉस्पिटल मैनेजमेंट का करियर आपके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
क्या है हॉस्पिटल मैनेजमेंट
अमेरिका में हुए सर्वे के अनुसार हॉस्पिटल मैनेजमेंट दस शीर्ष करियर में शामिल है, जो स्वास्थ्य सेवाओं के आपूर्तिकर्ता व मांगने वालों के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है। अस्पताल प्रबंधक अस्पताल के प्रबंधन में सुधार, बाहरी रोगियों की चिकित्सा आदि का प्रबंधन करते हैं। वे अपने सहायकों की टीम द्वारा प्रशासकीय कार्यो जैसे योजना समन्वयन व हॉस्पिटल के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। इस क्षेत्र में तरक्की करने के लिए हॉस्पिटल मैनेजर के पास वित्तीय व सूचना विषयक उच्च जानकारी एवं डाटा की व्याख्या करने और विभिन्न विभागों व रोगियों के बीच सूचनाओं के तालमेल का गुण होना चाहिए।  
अवसर
सरकारी अस्पताल तथा प्राइवेट अस्पताल दोनों अस्पताल प्रबंधकों की नियुक्ति करते हैं। एक फ्रेशर अगर चाहे तो किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं या किसी अस्पताल में बतौर असिस्टेंट हॉस्पिटल मैनेजर करियर शुरू कर सकता है। इसके अलावा उसके पास कई क्षेत्रों में मैनेजर बनने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। अनुभवी व सीनियर हॉस्पिटल प्रबंधक सीईओ के पद पर भी पहुंच सकते हैं। जिन्होंने हॉस्पिटल मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री की हो तथा जिनके पास 4-5 साल का अनुभव हो, वे लेक्चरर बन सकते हैं। कई वर्षो के अनुभव के बाद अपना नर्सिग होम तथा हॉस्पिटल भी खोल सकते हैं।
कौन कर सकता है यह कोर्स
हॉस्पिटल मैनेजमेंट में स्नातक डिग्री पाने के लिए 12वीं में बायोलॉजी में कम से कम 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। अगर कोई चाहे तो स्नातक डिग्री पाने के बाद हॉस्पिटल मैनेजमेंट में एमबीए या स्नातकोत्तर तथा डिप्लोमा कोर्स भी कर सकता है। स्नातकोत्तर कोर्सेज करने के लिए योग्यता संस्थान के अनुसार भिन्न हो सकती है। इस क्षेत्र में मुख्यत: प्रोफेशनल कोर्स बैचलर ऑफ हॉस्पिटल मैनेजमेंट, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन हॉस्पिटल मैनेजमेंट, मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, एमबीए इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन और एमडी या एम फिल इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन उपलब्ध हैं। इन सबके अलावा करीबन 70 मान्यताप्राप्त प्रोग्राम इस क्षेत्र में उपलब्ध हैं। कुछ इंस्टीटय़ूट हॉस्पिटल मैनेजमेंट में शॉर्ट टर्म कोर्सेज, सर्टिफिकेट, डिप्लोमा तथा कॉरेसपॉन्डेंस कोर्सेज दूरस्थ शिक्षा द्वारा भी मुहैया कराते हैं।
कैसे होता है चयन
हॉस्पिटल प्रबंधन में हॉस्पिटल प्रबंधन स्नातक (बीएचए) में प्रवेश मुख्यत: 12वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर ही होता है। इसके अलावा ग्रुप डिस्कशन तथा इंटरव्यू के आधार पर भी चयन किया जाता है।
कितने साल का होता है कोर्स
बीबीएम तथा बीएचए का कोर्स जहां 3 साल का होता है, वहीं एमबीए तथा हॉस्पिटल प्रबंधन में मास्टर्स (एमएचए) करने के लिए दो साल की अवधि निर्धारित है, जो चार छमाही में बंटा होता है। हॉस्पिटल प्रबंधन में स्नातकोत्तर प्रोफेशनल प्रोगाम 11 माह का होता है तथा ईएमबीए, पीजीडीएचएम तथा एडीएचएम जैसे कोर्सेज करने के लिए एक साल की अवधि सुनिश्चित है।
प्रमुख संस्थान
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली
www.aiims.edu
डेल्ही पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली
www.dpmii ndia.com
अपोलो इंस्टीटय़ूट अफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, हैदराबाद
www.apolloiha.ac.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ सोशल वेलफेयर और मैनेजमेंट, कोलकाता
www.iiswbm.edu
टाटा इंस्टीटय़ूट ऑफ सोशल साइंस, मुम्बईwww.tiss.edu
वेतन
भारत में एक जूनियर हॉस्पिटल मैनेजर 15,000 रुपए प्रतिमाह कमा सकता है, वहीं एक अनुभवी तथा प्रशिक्षित हॉस्पिटल मैनेजर प्रतिमाह 60,000 रुपए से अधिक अर्जित कर सकता है। हॉस्पिटल प्रबंधक के लेक्चरर का पारिश्रमिक प्रतिमाह कम से कम 25,000 रुपए होता है। आगे चल कर इसमें अच्छी- खासी आमदनी हो सकती है।

Sunday, July 5, 2015

इंटीरियर डिजाइनिंग: अपने हाथों से सजाएं अपना करियर

महानगरों में ही नहीं, छोटे शहरों और कस्बों में भी लोग अपने घरों, दफ्तरों और विभिन्न समारोहों को इंटीरियर की दृष्टि से व्यवस्थित करने लगे हैं, इसलिए यह काम एक बेहतर स्वरोजगार का माध्यम बनता जा रहा है। आप भी अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। कैसे, बता रहे हैं प्रेम बरेलवी

इंटीरियर डिजाइनिंग के प्रति लोगों का रुझान इस हद तक बढ़ चुका है कि लोग खुद किसी स्पेस को डिजाइन करने की अपेक्षा प्रशिक्षित इंटीरियर डिजाइनर की मदद लेना पसंद करने लगे हैं। सामाजिक समारोहों के अलावा आजकल लोगों में व्यक्तिगत समारोहों, घर और अपने कार्यालय को सजाने का भी चलन बढ़ा है। यही कारण है कि इंटीरियर डिजाइनर की मांग खूब होने लगी है।

इंटीरियर डिजाइनिंग में स्थान की प्लानिंग करने के साथ-साथ अंदरूनी जगह की सजावट की जाती है। सजावट चाहे घर की हो, दफ्तर की हो, होटल की हो, भवन की या फिर शोरूम की, इंटीरियर डिजाइनर का काम उसे अच्छे से अच्छा लुक देना होता है। इंटीरियर डिजाइनिंग में खासतौर से योजना, डिजाइन, निर्माण, पुनर्निर्माण, पुनरुद्धार और साज-सज्जा आदि पर ध्यान देना होता है। किसी भी स्थान की इंटीरियर डिजाइनिंग का मुख्य उद्देश्य सही बजट में सही वातावरण तैयार करना होता है।

इस क्षेत्र में यों तो बहुत से अवसर हैं, लेकिन अगर आप इस काम को स्वरोजगार के रूप में अपनाते हैं तो यह क्षेत्र आपके लिए फायदे वाला साबित हो सकता है। इस काम में पढ़ाई से ज्यादा काम आती है आपकी क्रिएटिविटी। एक इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए कलात्मकता, प्रबंधकीय दक्षता, कला, तार्किक बुद्धि, नई-नई सोच, तुरंत बदलाव करने की क्षमता और तकनीकी पारस्परिकता का मेल होना बहुत जरूरी है। इंटीरियर डिजाइनर को अपने विचारों, हुनर तथा काम से हर तरह के ग्राहक को संतुष्ट करना होता है। इसमें आप मॉडर्न आर्ट का काफी अच्छे से इस्तेमाल कर सकते हैं। जो कला में रुचि रखते हैं, वे इस क्षेत्र में अच्छा मुकाम पा सकते हैं। एक इंटीरियर डिजाइनर को बिल्डर्स, आर्किटेक्ट, कॉन्ट्रेक्टर, प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन से सामंजस्य बिठाना पड़ता है। इंटीरियर डिजाइनिंग में एक ही फील्ड में स्पेशलाइजेशन भी किया जा सकता है। आप फिल्मों और थिएटर के अलावा विभिन्न मेलों में ठेके पर इंटीरियर के काम की तलाश कर सकते हैं। जो लोग बदलते ट्रैंड को अच्छी तरह समझते हैं और उसी हिसाब से अपने काम में बदलाव लाते रहते हैं, वे इस क्षेत्र में और भी अच्छा करियर बना सकते हैं।

जगह का चुनाव
इंटीरियर डिजाइनर का काम शुरू करने के लिए वैसे तो एक छोटे से ऑफिस टाइप कमरे की जरूरत होती है, लेकिन अगर आप सजावट का सामान भी रखना चाहते हैं तो एक गोदाम की जरूरत पड़ेगी। आप यह काम कहीं भी कर सकते हैं। बस इतना ध्यान रहे कि आप जहां भी बैठें, आपके पास ग्राहक आसानी से आ सकें और आप वहां से अपने काम का अच्छी तरह प्रचार कर सकें।

आमदनी
इंटीरियर का काम करीब पांच-छह महीने बाद बाजार पकड़ पाता है, यानी पांच-छह महीने तक आपको बहुत कम आमदनी हो सकती है। हां, आपका ऑफिस और गोदाम खर्च आराम से निकल आएगा। अगर आप बाजार में जल्दी पकड़ बना लेते हैं तो एक-दो महीने में ही आपको अच्छी आमदनी होने लगेगी।

यह काम ऐसा है, जो एक बार जम गया तो कभी ठप नहीं होगा। फिर भी कम लागत पर शुरुआत में आप 10 से 25 हजार रुपए कमा सकते हैं। अगर काम अच्छा चल गया तो हर महीने 50 हजार से एक लाख रुपए महीने तक आमदनी हो सकती है। बड़े स्तर पर काम करने पर आमदनी भी अधिक होगी, लेकिन यह आपके काम के चलने पर ही निर्भर करेगी।

जरूरी उपकरण
आजकल डिजाइनिंग का काम तो कंप्यूटर द्वारा होने लगा है, अत: इस काम को शुरू करने के लिए सबसे पहली प्राथमिकता तो कंप्यूटर ही है। इसके अलावा चित्रकला के काम आने वाली प्राथमिक चीजें जैसे सादा कागज, पेंसिल, रबड़ आदि की जरूरत होगी। प्लास, पेचकस, कारपेंटर के उपकरण और बिल्डिंग मैटीरियल की भी जरूरत होती है।

लागत
इंटीरियर डिजाइनिंग के काम के लिए आपको कम से कम 50-60 हजार रुपए की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा आपको ऑफिस बनाने के लिए अलग से पैसा लगाना पड़ेगा। इसके बाद आपको हर महीने ऑफिस खर्च की जरूरत पड़ेगी। अधिक पैसा लगाने की इस काम में सीमा नहीं है, फिर भी बड़े स्तर पर दो से पांच लाख रुपए में आपका काम शुरू हो सकता है, जो आपके ऑफिस और गोदाम के खर्चे के अतिरिक्त भी हो सकता है।

फैक्ट फाइल
कोर्स
इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स अधिकतर आर्ट स्कूल कराते हैं। भारत में इसके डिप्लोमा और डिग्री कोर्स उपलब्ध हैं। इन कोर्सेज में विद्यार्थी को बिल्डिंग में आंतरिक और बाहरी साज-सज्जा के अलावा उसकी बनावट के हिसाब से बेहतर से बेहतर लुक देना सिखाया जाता है। कुछ संस्थान बिल्डिंग बनाने और उसमें सज्जा के लिए बनाई जाने वाली चीजों का निर्माण करना भी सिखाते हैं।

योग्यता
इंटीरियर डिजाइनिंग का किसी भी कोर्स  के लिए गणित, कला, अंग्रेजी में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं पास होना जरूरी है। इसके अलावा आपकी कला में रुचि और चित्रकला का ज्ञान, कंप्यूटर की प्राथमिक जानकारी और सृजन क्षमता का होना आवश्यक है।

प्रवेश
डिप्लोमा या डिग्री कोर्स करने के लिए प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी, जिसमें आपकी तार्किक, बौद्घिक और सृजन क्षमता की जांच के अलावा गणित, हिंदी, अंग्रेजी, कला और विज्ञान के सामान्य ज्ञान की परख की जाती है। कुछ प्राइवेट संस्थान बिना प्रवेश परीक्षा के ही प्रवेश दे देते हैं।

फीस
इंटीरियर डिजाइनिंग के कोर्सेज की फीस डिप्लोमा कोर्सेज में समयावधि तथा संस्थान और डिग्री कोर्सेज में संस्थान के हिसाब से अलग-अलग है। सरकारी संस्थान जहां 5 से 20 हजार में एक साल के डिप्लोमा और डिग्री कोर्स कराते हैं, वहीं प्राइवेट संस्थान 15 हजार रुपए महीने से लेकर एक-डेढ़ लाख रुपये साल तक वसूलते हैं।

लोन
इंटीरियर डिजाइनिंग का काम और इसकी पढ़ाई, दोनों के लिए ही बैंक से लोन मिल जाता है। पढ़ाई के लिए सभी बैंक लोन नहीं देते। काम शुरू करने के लिए लोन लेने पर आपको बैंक की प्राथमिक शर्तों का पालन करना होगा, जो अधिकतर आरबीआई द्वारा निर्धारित होती हैं। इसके अलावा आपको जरूरी दस्तावेज जमा कराने होंगे। लोन आप अपने स्तर पर बैंक से संपर्क करके सीधे लेने के अलावा प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत भी ले सकते हैं।

कुछ प्रमुख संस्थान

मीराबाई पॉलिटेक्निक, महारानी बाग, नई दिल्ली

साउथ दिल्ली पॉलिटेक्निक फॉर वुमन, नई दिल्ली
वेबसाइट-www.polytechnic-sdpw.com

एमेटी स्कूल आफ फैशन टेक्नोलॉजी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
वेबसाइट- www.amity.edu

अकेडमी ऑफ आर्ट एंड डिजाइन, नवी मुंबई, महाराष्ट्र
वेबसाइट- www.designcareer.in
नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ फैशन डिजाइन, चंडीगढ़



Friday, July 3, 2015

मरीन इंजीनियरिंग में करियर

आप इंडियन मर्चेंट नेवी, नौसेना, जहाज निर्माण कंपनियों तथा जहाजों का निरीक्षण करने वाली सोसाइटियों में नौकरियाँ तलाश सकते हैं। इसके अलावा शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसी कई लीडिंग शिपिंग कंपनियाँ भी मरीन इंजीनियरों की सेवाएँ लेती हैं। अगर आप विदेशों में भविष्य तलाशने वाले छात्र इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन द अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग में भी काम कर सकते हैं। वह फ्रेशर व ट्रेनिंग लेने वाले छात्रों को नौकरी देते हैं। इसके अलावा फ्रांस और यूके में भी नौजवान मरीन इंजीनियरों की माँग बनी रहती है।

क्या कहती है रिपोर्ट:
चाइना शिप बिल्डिंग की इंडस्ट्री रिपोर्ट के मुताबिक जहाज निर्माण उद्योग में पिछले साल की अपेक्षा ५२.२ प्रतिशत का उछाल आया है। वहीं एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार मरीन इंजीनियरों की मांग हमेशा बनी रहेगी। जिसका कारण दिनोदिन टेक्नोलॉजी का विस्तार और सस्ती जहाज यात्रा है।

वेतन:
इस क्षेत्र में प्रारंभिक रूप में भी काफी अच्छा वेतन पैकेज होता है। मर्चेंट नेवी में बतौर जूनियर इंजीनियर काम करने वाला व्यक्ति भी 25000 से 30000 रुपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकता है। एक मरीन इंजीनियर शुरुआती स्तर पर भी ७.५ से १० लाख रुपए प्रतिवर्ष अर्जन करता है।

चुनौतियाँ:
मरीन इंजीनियरिंग बहुत ही चुनौती भरा करियर है। मरीन इंजीनियरिंग का काम सिर्फ जहाजों के निर्माण से ही नहीं बल्कि लोगों की जान से भी जुड़ा होता है। मरीन इंजीनियर को अपने काम में कोताही बरतने की छूट नहीं होती है।

डॉ. सुभाशिष्ट माझी के अनुसार मरीन इंजीनियर को छह सात महीने तक घर से दूर पानी के जहाज पर रहना पड़ता है जिसके चलते बहुत कम लोग अपने बच्चों को मरीन इंजीनियरिंग का कोर्स कराते हैं। यह इस क्षेत्र की बहुत बड़ी चुनौती है हालाँकि इस क्षेत्र में करियर बहुत ब्राइट है।

इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी नगण्य होना दूसरी चुनौती है। यह अवधारणा है कि यह क्षेत्र महिलाओं के लिए अनुकूल नहीं है। इसी मिथक को दूर करने के लिए सरकार ने लड़कियों के लिए ट्यूशन फीस १ लाख की जगह २० हजार रखी है।

कोर्सेस:
चार वर्षीय बी.ई.बी. टेक मरीन इंजीनियरिंग

दो वर्षीय एम ई मरीन इंजीनियरिंग

पीएच.डी

बीएससी, नॉटिकल साइंस

प्रमुख संस्थान:

ट्रेनिंग शिप चाणक्य कार्वे, नवी मुंबई

मरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट, कोलकाता और मुंबई

इंटरनेशनल मरीनटाइम इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली

इंदिरा गाँधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास।

Thursday, July 2, 2015

वेब डिजाइनिंग अपना करियर खुद कीजिए डिजाइन

वेब डिजाइनिंग एक कला है। अगर आप कलात्मक सोच के साथ-साथ डिजाइनिंग में रुचि रखते हैं और कंप्यूटर से खेलने के शौकीन हैं तो आपके लिए वेब डिजाइनिंग में करियर के बेहतर मौके उपलब्ध हो सकते हैं।

यूं तो वेब डिजाइनिंग आईटी का ही एक हिस्सा है, लेकिन एक वेब डिजाइनर को एक आईटी से भी बेहतर और रचनात्मक भूमिका निभानी पड़ती है। आप जितने ज्यादा कल्पनाशील होंगे, छोटी से छोटी जगह में जितनी अधिक और महत्वपूर्ण जानकारी समेटने में कुशल होंगे, आपकी प्रसिद्घि एक वेब डिजाइनर के रूप में उतनी ही अधिक होगी।

लोगों के मन की बात समझें
लोगों के मन में आप तभी जगह बना सकते हैं, जब उनकी जरूरत को समझते हुए आप उनके हिसाब से या उनकी सोच से बेहतर वेबसाइट तैयार कर दें और वह भी कम से कम समय में। इसके लिए आपको ज्यादा से ज्यादा पढ़ने के साथ-साथ दूसरी वेबसाइट्स को भी बार-बार ध्यान से देखना और समझना होगा। नए-नए प्रयोग करने होंगे। इस फील्ड में आजकल डीओएम, एचटीएमएल, जावा स्क्रिप्ट और सीएमएस आदि तकनीक अधिक प्रचलित हैं।

नकल न करें
क्रिएटिविटी ही आपको इस क्षेत्र में आगे ले जा सकती है। दूसरों की नकल करना या उनके आधार पर वेबसाइट्स बनाना आपके करियर में बहुत बड़ा रोड़ा बन सकता है।

चेंज स्क्रीन है शगल
आजकल वेबसाइट बनवाने वाले अधिकतर लोग सोचते हैं कि उनकी वेबसाइट की स्क्रीन हर रोज चेंज होती रहे, वह भी खूबसूरती के साथ। चेंज स्क्रीन वाली वेबसाइट आजकल लोगों को खूब भाती है। इसके लिए आपको वीडियो या फोटो एडिटिंग की जानकारी होनी चाहिए। वेबसाइट के हिसाब से आपको उस पर लगाई गई स्क्रीन को भी बनाना या चुनना होगा। नए-नए तरीके से डिजाइन करने वालों और वेबसाइट को सूट करने वाले खिलते रंगों को चुनने के साथ-साथ प्लेसिंग के सौंदर्य की परख रखने वालों के लिए इस क्षेत्र में पैसा ही पैसा है।

अपनी वेबसाइट बनाना जरूरी
एक वेब डिजाइनर की जब तक अपनी वेबसाइट नहीं होगी, लोगों में उसके काम का सही मैसेज नहीं जाएगा। साथ ही आपकी वेबसाइट जितनी आकर्षक होगी, लोग उतने ही आपके काम से ज्यादा प्रभावित होंगे, जिससे आपका काम बढ़ेगा।

लोगो है महत्वपूर्ण
वेब डिजाइनिंग में अति महत्वपूर्ण है वेबसाइट का लोगो। वेबसाइट कंपनी की हो या किसी अन्य ब्रांड के प्रचार के लिए बनाई जाए, उसका लोगो ऐसा होना चाहिए कि वेबसाइट देखने वाले को एक ही नजर में अपनी ओर आकर्षित करे और उससे जुड़ने या उसका ग्राहक बनने के लिए प्रेरित करे। कोई भी कंपनी अपनी पहचान, अपना बैकग्राउंड, अपने कार्य और संचालन का ब्यौरा वेबसाइट के माध्यम से दर्शाती है। इसमें उसका लोगो महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

क्या-क्या होता है सीखना
एक वेब डिजाइनर को टेम्पलेट, लोगो, पोर्टफोलियो, वेबसाइट, ग्राफिक, बैनर डिजाइनिंग के साथ-साथ एनिमेशन, फ्लैश, वेबसाइट मेंटनेंस, मूवी मेकिंग, ई-कॉमर्स वेबसाइट, एडोब फोटोशॉप, एडोब इलस्ट्रेटर, कोरल ड्रॉ, एचटीएमएल, जावा स्क्रिप्ट, वर्ड प्रेस, ब्लॉगिंग, सोशल मीडिया आदि सब अच्छे से सीखना होता है।

कोर्सेज: वेब डिजाइनिंग के क्षेत्र में कई तरह के कोर्सेज उपलब्ध हैं। इनमें एडवांस्ड सर्टिफिकेशन इन वेब डिजाइन एंड इंटरएक्टिव मल्टीमीडिया, डिप्लोमा इन ग्राफिक एंड डिजाइन, सर्टिफिकेट इन वेबसाइट डिजाइन एंड मैनेजमेंट, डिप्लोमा एंड सर्टिफिकेट कोर्स इन वेब डिजाइन एंड वेब प्रोडक्शन, बीएससी इन मल्टीमीडिया, ग्राफिक एंड वेब डिजाइन जैसे शॉर्ट टर्म कोर्सेज के अलावा डिप्लोमा इन एडवांस्ड लेवल, वेब डिजाइनिंग एंड वेब प्रोडक्शन जैसे कोर्स प्रमुख हैं।

योग्यता: वेब डिजाइनिंग के किसी भी कोर्स में प्रवेश लेने के लिए कम से कम पचास प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास होना जरूरी है। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा करने के लिए वेब डिजाइनिंग में ग्रेजुएट या वेब डिजाइनिंग में डिप्लोमा के अलावा किसी भी सब्जेक्ट में ग्रेजुएट होना जरूरी है। कुछ इंस्टीट्यूट 10वीं पास छात्रों को भी वीडियो एडिटिंग के कोर्स में प्रवेश दे देते हैं।

संभावनाएं: प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया, मल्टी नेशनल कंपनियों, मार्केटिंग फर्म आदि में वेब डिजाइनर के लिए अवसर हैं। ऑडियो विजुअल मीडिया, डिजाइन स्टूडियो में भी अच्छे अवसर हैं। आप अपना ऑफिस खोल कर स्वतंत्र तरीके से भी काम कर सकते हैं। अच्छे वेब डिजाइनर को प्रोडक्शन को-ऑर्डिनेटर, वेब मास्टर, साइट डेवलपर्स, वेब मीडिया डिजाइनर, वेब प्रोडक्शन मैनेजर एवं इंटरेक्टिव प्रोडक्शन आर्टिस्ट के पद पर नौकरी मिल सकती है।

आमदनी
वेब डिजाइनिंग में शुरुआत में 15 से 25 हजार रुपए तक मिल जाते हैं। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता जाता है, वेतन में भी बढ़ोतरी होती जाती है। अगर आप मेहनती हैं तो वेब डिजाइनिंग के काम से ही आप 1.5 से 2.5 लाख रुपए महीने तक वेतन पा सकते हैं। अपना काम करेंगे तो आमदनी आपको मिलने वाले काम पर निर्भर करेगी। डिजाइनर एक वेबसाइट डिजाइन करने के  दो-ढाई हजार से 25-30 हजार तक चार्ज करते हैं।

प्रमुख संस्थान
इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी, मैदान गढ़ी, नई दिल्ली, वेबसाइट-www-ignou-ac-in

जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जामिया नगर, नई दिल्ली
वेबसाइट- www-jmi-ac-in

नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद वेबसाइट-www-nid-edu
टीजीसी एनिमेशन एंड मल्टीमीडिया, नई दिल्ली वेबसाइट-www-tgcindia-com
दिल्ली स्वरोजगार समिति, झंडेवालान, नई दिल्ली


Tuesday, June 30, 2015

मौसम विज्ञान में हैं शानदार अवसर


मौसम जितने मोहक और मादक होते हैं, उनसे जुड़े करियर भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। कल तक यह माना जाता था कि मौसम का संबंध केवल खेती-किसानी से ही है तो अब यह धारणा पुरानी हो चुकी है। सैटेलाइट के इस युग में सुनामी तूफान से बचाने की कवायद से लेकर एयरलाइंस की उड़ानों, जहाजों के परिवहन से लेकर खेल मैदानों की हलचल में मौसम विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यही कारण है कि सरकारी विभागों से लेकर मौसम विज्ञान की भविष्यवाणी करने वाली प्रयोगशालाओं, अंतरिक्ष विभाग और टेलीविजन चैनल पर मौसम विज्ञान एक अच्छे करियर की दावत दे रहा है। यदि आपको हवा, बादल, समुद्र, बरसात, धुँध-कोहरे, आँधी-तूफान और बिजली में दिलचस्पी है तो मौसम विज्ञान का क्षेत्र न केवल आपकी इन क्षेत्रों की जिज्ञासाओं की पूर्ति करेगा, बल्कि एक शानदार करियर भी प्रदान करेगा, जो बदलते मौसम की तरह ही मोहक होगा।

बहुआयामी करियर 
मौसम विज्ञान के इतने अधिक आयाम हैं कि इस क्षेत्र में अध्ययन कर अपनी अभिरुचि के अनुसार परिचालन, अनुसंधान तथा अनुप्रयोग अर्थात ऑपरेशंस-रिसर्च या एप्लिकेशंस के क्षेत्र में बहुआयामी करियर बनाया जा सकता है। ऑपरेशंस के तहत मौसम उपग्रहों, राडार, रिमोट सेंसर तथा एयर प्रेशर, टेम्प्रेचर, एनवायरमेंट, ह्यूमिडिटी से संबंधित सूचनाएँ एकत्रित कर मौसम की भविष्यवाणी की जाती है।

यह भविष्यवाणी समुद्र में आने वाले तूफान तथा चक्रवाती हवाओं से मछुआरों तथा समुद्री राह में चलने वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर जान-माल के नुकसान से बचाने का कार्य करती है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए क्लाइमेटोलॉजी, हाइड्रोमेट्रोलॉजी, मेरिन मीट्रिओलॉजी तथा एविएशन मीट्रिओलॉजी में विशेषज्ञता हासिल करना होता है। शोध-कार्य के लिए मौसम विज्ञान में काफी अच्छी संभावनाएँ हैं।

मौसम के आधार पर ही उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा जाता है, फसलों का आकलन किया जाता है और अब तो खेल के मैदान में खिलाड़ी भी मौसम का हाल जानकर ही खेलने या न खेलने का निर्णय लेने लगे हैं। मौसम विज्ञान से जुड़े शोधार्थी मौसम के विशेष अवयवों हवा, नमी, तापमान संबंधी सूचनाओं और आँकड़ों का विश्लेषण करते हैं तथा यह तय करते हैं कि मौसम का मिजाज कैसा रहेगा।

मौसम विज्ञान का एप्लिकेशंस क्षेत्र वातावरण के संरचनात्मक अवयवों उनके प्रभावों अर्थात एप्लिकेशंस का अध्ययन कर एनवायरमेंट पर रिपोर्ट तैयार करते हैं जो न केवल सरकारी विभागों के लिए महत्वपूर्ण होती है, बल्कि टीवी चैनल पर मौसम की सूचना देने के काम भी आती है। इसके माध्यम से मछुआरों से लेकर आकाश में उड़ने वाले हवाई जहाजों को मौसम के बिगड़ते मिजाज से अवगत करा जोखिम से बचाया जा सकता है।

कैसे हैं अवसर मौसम विज्ञानियों के लिए?
औद्योगीकरण के इस युग में मौसम विज्ञान का महत्व कुछ ज्यादा ही ब़ढ़ गया है। इस क्षेत्र में बतौर इंडस्ट्रीयल मीट्रिओलॉजिस्ट अर्थात औद्योगिक मौसम विज्ञानी के रूप में आकर्षक करियर बनाया जा सकता है। ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण प्रदूषण के प्रति आज सारी दुनिया इतनी जागरूक हो गई है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें मौसम विज्ञानियों का सर्वाधिक महत्व है।

यही कारण है कि आज की परिस्थिति में मौसम विज्ञानियों के लिए सारी दुनिया में शानदार प्रतिष्ठापूर्ण करियर बनाने के अवसर उपलब्ध हैं। उद्योग के अतिरिक्त अंतरिक्ष, कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में भी इस क्षेत्र में अच्छे अवसर मौजूद हैं। स्पेशलाइजेशन के इस दौर में मौसम भविष्यवक्ता के रूप में एम्प्लायमेंट के बेहतरीन अवसर सामने दिखाई देते हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित मौसम विज्ञान कार्यालयों और प्रयोगशालाओं के अतिरिक्त सिविल एविएशन, शिपिंग, सेना में मौसम सलाहकार के पद उपलब्ध हैं।

कर्मचारी चयन आयोग द्वारा नागपुर, चेन्नाई, कोलकाता और नई दिल्ली स्थित मौसम विभागों में भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाएँ आयोजित की जाती हैं, जिसमें फिजिक्स विषय लेकर स्नातक उपाधि प्राप्त युवा आवेदन कर सकते हैं। इस परीक्षा में फिजिक्स, मैथ्स का एक पर्चा होता है तथा दूसरा प्रश्न-पत्र जनरल नॉलेज और इंग्लिश पर आधारित होता है। दोनों पेपर ऑब्जेक्टिव होते हैं। चुने गए प्रत्याशियों को मौसम विज्ञान विभाग द्वारा अपने खर्च से प्रशिक्षण देकर नियुक्ति प्रदान की जाती है।

क्या खासियत होनी चाहिए मौसम विज्ञानी में?
मौसम का मिजाज जानना एक विशेष कार्य है, जिसके लिए व्यक्ति में कुछ विशेष गुणों का होना फायदेमंद माना जाता है। आमतौर पर मौसम संबंधी आँकड़ों का संकलन और विश्लेषण का कार्य प्रयोगशालाओं में होता है। कई प्रयोगशालाएँ दूरस्थ बनी होती हैं जैसे अंटार्कटिका की प्रयोगशालाएँ। इसलिए इस क्षेत्र में करियर बनाने वालों को एकाकी स्थानों पर रहने का अभ्यस्त होना चाहिए।

इस कार्य के लिए ऑफिस की तरह 10 से 5 का समय भी निर्धारित नहीं है। कई बार घंटों खाली बैठे रहना होता है तो कई बार चौबीसों घंटे व्यस्त रहना पड़ता है, जिसके लिए पर्याप्त धैर्य की आवश्यकता होती है। आपातकालीन स्थिति में इस क्षेत्र पर भारी दबाव आता है। साथ ही इसमें टीम वर्क के रूप में काम करना भी अपेक्षित है। इसलिए ये सब काम किसी चुनौती से कम नहीं हैं। इसीलिए इस क्षेत्र का चयन ऐसे युवाओं को ही करना चाहिए, जो चुनौतीपूर्ण और साहसिक कार्य करने में दिलचस्पी रखते हों।

क्या हो योग्यता?
मौसम विज्ञान एक ऑपरेशंस-रिसर्च और एप्लिकेशंस का क्षेत्र है इसलिए इसमें प्रवेश के लिए कम से कम मौसम विज्ञान अथवा पर्यावरण विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर उपाधि तो होनी ही चाहिए। इसके लिए स्नातक स्तर पर पीसीएम विषय होना आवश्यक है। हमारे यहाँ कई विश्वविद्यालयों में इस विषय की पढ़ाई होती है।

मौसम विज्ञान संचालित करने वाले प्रमुख संस्थान
- भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरू
- आईआईटी खड़गपुर
- पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला
- आंध्रा यूनिवर्सिटी, विशाखापट्टनम
- मणिपुर यूनिवर्सिटी इम्फाल
- देवी अहिल्या विवि इंदौर-पर्यावरण विज्ञान
- अरतियार विश्वविद्यालय कोयम्बटूर
- कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी
- एमएस यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा, बड़ौदा
- शिवाजी यूनिवर्सिटी विद्यानगर, कोल्हापुर

Monday, June 29, 2015

साइबर लॉ एक्सपर्ट इंटरनेट के डिटेक्टिव


आज शायद ही कोई स्टूडेंट या प्रोफेशनल हो, जिसका ई-मेल एकाउंट या सोशल वेबसाइटï्स पर कोई प्रोफाइल न हो। इंटरनेट पर समय बिताने या काम करने वाले लोगों की संख्या भी दिनों-दिन बढ़ रही है। अब तो मोबाइल और स्मार्टफोन यूजर्स भी इसमें शामिल हो गए हैं। हालांकि इसके साथ साइबर क्राइम का खतरा भी बढ़ रहा है। पर्सनल एकाउंट की हैकिंग से लेकर वायरस के प्रसार, स्टॉकिंग, साइबर वॉर, साइबर टेररिज्म, साइबर फ्रॉड जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। साइबर रिलेटेड केसेज बढ़ रहे हैं। अगर आप आइटी के साथ-साथ लॉ में भी इंट्रेस्ट रखते हैं, तो साइबर लॉ फील्ड में लुक्रेटिव करियर बना सकते हैं।
क्या है साइबर लॉ?
डिजिटल इंफॉर्मेशन एवं कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी ने एक नए कानूनी कार्यक्षेत्र को जन्म दिया है, जिसे साइबर लॉ कहते हैं। साइबर लॉ के तहत इंटरनेट और साइबर स्पेस से जुड़े मामले सुलझाए जाते हैं। इसके एक्सपर्ट छोटे-बड़े साइबर क्राइम की रोकथाम के अलावा उसकी जांच में सहायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, सॉफ्टवेयर
पेटेंट, नेट बैंकिंग से जुड़े कानूनी मामले भी यही देखते हैं।
एजुकेशनल क्वालिफिकेशन
साइबर लॉ एक्सपर्ट बनने के लिए आपके पास लॉ की डिग्री या मास्टर्स होना आवश्यक है। वैसे, कोई भी लॉयर, आइटी प्रोफेशनल, आइटी सिक्योरिटी पर्सनल, मैनेजमेंट प्रोफेशनल साइबर लॉ में पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री या डिप्लोमा करके साइबर लॉ एक्सपर्ट बन सकता है। देश में आज ऐसे कई कॉलेज या इंस्टीट्यूट्स हैं, जहां से आप साइबर लॉ में शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कोर्स कर सकते हैं। आप चाहें तो ऑनलाइन कोर्स भी कर सकते हैं।
टेक्निकल स्किल्स
साइबर लॉ एक नया और तेजी से उभरता हुआ फील्ड है, इसलिए जो लोग इसमें करियर बनाने का इरादा रखते हैं, उन्हें हर संभव मेहनत के लिए तैयार रहना होगा। एक सफल साइबर लॉ एक्सपर्ट होने के लिए आइटी की गहरी जानकारी और दिलचस्पी होने के साथ-साथ साइबर स्पेस की बेहतर समझ होना जरूरी है। साथ ही, साइबर लॉ से जुड़े प्रॉब्लम्स की एनालिसिस और उन्हें सॉल्व करने की क्षमता हो। इसलिए आपको वर्चुअल वल्र्ड की तमाम तकनीकी जटिलताओं का अहसास होना जरूरी है। इसके अलावा, जिनके पास इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, कॉमर्शियल और सिविल लॉ की स्पेशलाइजेशन होगी और जो समय-समय पर खुद को एडवांस टेक्नोलॉजी से अपडेट करते रहेंगे, उन्हें करियर ग्रोथ में मदद मिलेगी।
करियर स्कोप
इंडिया के अलावा पूरी दुनिया में साइबर लॉ एक्सपट्र्स के लिए काफी स्कोप है। आज कंपनीज अपने डाटा को डिजिटली स्टोर कर रही हैं। दूसरी ओर ई-बैंकिंग, ई-कॉमर्स, ई-टिकटिंग और ई-गवर्नेंस आदि की लोकप्रियता बढ़ रही है। ऐसे में साइबर अपराध और विवाद भी बढ़ रहे हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए निजी आइटी, कंप्यूटर या इंटरनेट बेस्ड कंपनीज से लेकर सरकारी एजेंसीज साइबर लॉ एक्सपट्र्स को हायर कर रही हैं। एक साइबर लॉयर किसी लॉ फर्म, पुलिस डिपार्टमेंट, बैंक, टेक्नोलॉजी फर्म या कॉरपोरेट ऑर्गेनाइजेशन में साइबर कंसल्टेंट, रिसर्च असिस्टेंट या एडवाइजर के रूप में काम कर सकता है।
सैलरी पैकेज
साइबर लॉ एक्सपर्ट का सैलेरी पैकेज उसके एक्सपीरियंस और एक्सपर्टीज पर निर्भर करता है। फ्रेशर को शुरुआत में 10 से 25 हजार रुपये मिलते हैं, जबकि अनुभवी साइबर लॉ एक्सपर्ट महीने में 50 हजार रुपये आसानी से कमा सकता है। किसी रिप्यूटेड फर्म को ज्वाइन करते हैं, तो उससे सही करियर ग्रोथ मिलती है।
प्रमुख इंस्टीट्यूट्स
-एशियन स्कूल ऑफ साइबर लॉ, मुंबई
-इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट, दिल्ली
-एनएएलएसएआर, हैदराबाद
-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद,
-एमिटी लॉ स्कूल, दिल्ली
एक्सपर्टीज के साथ बढ़ाएं कदम
साइबर स्पेस को संचालित करने वाले कानून को साइबर लॉ कहते हैं। सभी इंटरनेट यूजर्स इस कानून के दायरे में आते हैं। इस तरह साइबर लॉ एक टेक्नो-लीगल फील्ड है, जिसमें टेक्नोलॉजी के साथ-साथ कानून की जानकारी होना बेहद जरूरी है। इस तरह पूरी एक्सपर्टीज के साथ आप साइबर लिटिगेशन में सुनहरा करियर बना सकते हैं। मार्केट में डिमांड को देखते हुए एक्सपट्र्स की कमी भी है, जिससे यह और ज्यादा लुक्रेटिव करियर च्वाइस बन सकता है।