डिजास्टर मैनेजमेंट में करियर

इन दिनों पूरी दुनिया में प्राकृतिक आपदाओं का दौर जारी है। बाढ़ के कारण चीन और पाकिस्तान जैसे देशों में हजारों लोगों की जान चली गई। वहीं लेह में बादल फटने के सैंकड़ों लोग मारे गए। हालांकि सूखा, बाढ़, चक्रवाती तूफानों, भूकम्प, भूस्खलन, वनों में लगनेवाली आग, ओलावृष्टि और ज्वालामुखी फटने जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, न ही इन्हें रोका जा सकता है लेकिन इनके प्रभाव को एक सीमा तक जरूर कम किया जा सकता है, जिससे जान-माल का कम से कम नुकसान हो। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में डिजॉस्टर मैनेजनेंट यानी आपदा प्रबंधन से जुड़े लोग माहिर होते हैं। प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए आने वाले समय में यह हॉट करियर ऑप्शन हो सकता है। 

डिजास्टर मैनेजमेंट की जरूरत क्यों?

हर साल प्राकृतिक आपदाओं के कारण दुनिया भर में हजारों-लाखों लोगों की जान चली जाती है। इस मामले में भारत भी काफी संवेदनशील देश है। देश के कई हिस्से में हर साल बाढ़ की समस्या आम है। भारत में बहुत से क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के लिए अति संवेदनशील हैं। एक अनुमानित आंकडा बताता है कि पिछले बीस सालों में पूरे विश्व में जमीन खिसकने, भूकंप, बाढ, सुनामी, बर्फ की चट्टान सरकने और चक्रवात जैसी आपदाओं में लगभग तीस लाख से अधिक लोगों की जान चली गई। विश्व भर में आईं प्राकृतिक आपदाओं में लगभग 90 प्रतिशत विकासशील देशों के हिस्से पडीं। देश की 70 प्रतिशत खेतिहर जमीन सूखे की आशंका की जद में है। वहीं कुल जमीन का 60 फीसदी हिस्सा भूकंप के प्रति संवेदनशील है, 12 प्रतिशत बाढ और 8 प्रतिशत चक्रवात के लिए। जब प्राकृतिक आपदाओं का पैमाना इतना बड़ा हो तो आपदा प्रबंधन से जुड़े लोगों की जरूरत होती ही है, ताकि जान-मान का नुकसान कम से कम हो।

क्या करते हैं पेशेवर ?
आपदा प्रबंधन से जुड़े पेशेवर प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जीवन बहाल करने का कार्य करते हैं। यह प्रबंधक ऐसे विशेषज्ञ लोगों के समूह का मुखिया होता है, जिनकी सेवाएं आपदा के समय अनिवार्य होती है। जैसे-डॉक्टर, नर्स, सिविल इंजीनियर, दूरसंचार विशेषज्ञ, वास्तुशिल्प, इलेक्ट्रीशियन इत्यादि। आपदा प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती आपदाग्रस्त सीमा-क्षेत्र और होनेवाली क्षति का आकलन करना है। इससे इस क्षेत्र का कार्य अत्यधिक वैज्ञानिक प्रक्रिया का रूप ले लेता है। आपदाग्रस्त क्षेत्रों की भौगोलिक एवं आर्थिक स्थितियों के कारण चुनौती और भी बढ़ जाती है।

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के केंद्र सरकार और राज्य सरकारें आवश्यक धन उपलब्ध कराती हैं। इन सबमें मुख्य सरकारी एजेंसी के रूप में गृह मंत्रालय बडी भूमिका निभाता है। वह आपदा के समय डिजास्टर मैनेजमेंट का कार्य संभालता है। कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय सूखे और अकाल के वक्त अपनी जिम्मेदारियां निभाता है। वहीं, अन्य विपदाओं के लिए दूसरे मंत्रालय भी जिम्मेदार होते हैं, जैसे- हवाई दुर्घटनाओं के लिए सिविल एविएशन मिनिस्ट्री, रेल दुर्घटनाओं के लिए रेल मंत्रालय, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा मंत्रालय आदि भी विभिन्न प्रकार की विपदाओं के समय जिम्मेदारियां निभाते हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट में प्रशिक्षित लोग आपदा के वक्त बहुमूल्य होते हैं।

कौन बन सकता है आपदा प्रबंधक?

कोई भी व्यक्ति यह कार्य कर सकता है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति दिन-प्रतिदिन अपने-अपने स्तर पर आपदा प्रबंधन का कार्य करते हैं। यदि किसी व्यक्ति के मन में जनसेवा का भाव है और वह अत्यधिक दबाव तथा तनावपूर्ण स्थितियों में कार्य कर सकता है। उसका जोश बना रहता है तथा आपदा एवं भारी खतरे होने के बावजूद वह पूरे उत्साह से दिन भर कार्य कर सकता है, तो वह व्यक्ति प्रभावी आपदा प्रबंधक बन सकता है।

पहल सरकार की
भारत सरकार ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की। मानव संसाधन मंत्रालय ने दसवीं पंचवर्षीय परियोजना में डिजास्टर मैनेजमेंट को स्कूल और प्रोफेशनल एजुकेशन में शामिल किया था। वर्ष 2003 में पहली बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने आठवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान विषय के पाठ्यक्रम में इसे जोडा। फिर आगे की कक्षाओं में और सरकारी व गैर सरकारी उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में भी डिजास्टर मैनेजमेंट की पढ़ाई होनी लगी।

किस तरह के कोर्स

देश के कई प्रबंधन संस्थान डिजास्टर मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट से लेकर पीजी डिप्लोमा लेवल के कोर्स संचालित करते हैं। वहीं कई विश्वविद्यालय डिग्री लेवल कोर्स भी ऑफर कर रहे हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट के कोर्स रेगुलर और डिस्टेंस लर्निग के माध्यम से भी कर सकते हैं।
भारतीय पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संस्थान, नई दिल्ली एक ऐसा ही संस्थान है। यहां आपदा प्रबंधन में दो वर्ष का स्नातकोत्तर दूरवर्ती अध्ययन शिक्षा कार्यक्रम चलाया चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के लिए न्यूनतम योग्यता किसी भी विषय में स्नातक है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने आपदा प्रबंधन का प्रमाण-पत्र कार्यक्रम शुरू किया है। देश में आपदा की गहनता में वृद्धि तथा अंतराल में होनेवाली कमी को ध्यान में रखते हुए छह माह का पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। भोपाल गैस त्रासदी के बाद आपदा प्रबंधन संस्थान (डीएमआई) की स्थापना की गई। यहां खतरनाक तत्वों के प्रबंधन, जोखिम विश्लेषण, स्थल पर तथा स्थल से बाहर आपात स्थितियों की योजना बनाने एवं प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं।

योग्यता

सर्टिफिकेट कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता बारहवीं पास है, जबकि मास्टर डिग्री या पीजी डिप्लोमा के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक है। इस कोर्स में एडमिशन लेने वालों में हर परिस्थिति में काम करने का जज्बा जरूर होना चाहिए। कुछ संस्थान प्रोफेशनल के लिए भी सर्टिफिकेट कोर्स चलाते हैं।

पाठ्यक्रम
डिजास्टर मैनेजमेंट के तहत रिस्क असेसमेंट ऐंड प्रिवेंटिव स्ट्रैटेजीज, लेजिस्लेटिव स्ट्रक्चर्स फॉर कंट्रोल ऑफ डिजास्टर मिटिगेशन, ऐप्लिकेशन ऑफ जीआईएस इन डिजास्टर मैनेजमेंट, रेस्क्यू आदि विषय आते हैं। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन भी किया जा सकता है, जैसे- माइनिंग, केमिकल डिजास्टर और टेक्निकल डिजास्टर वगैरह।

करियर की संभावनाएं

डिजास्टर मैनेजमेंट के क्षेत्र में आम तौर पर सरकारी नौकरियों में, आपातकालीन सेवाओं में, लॉ इन्फोर्समेंट, लोकल अथॉरिटीज, रिलीफ एजेंसीज, गैर सरकारी प्रतिष्ठानों और यूनाइटेड नेशन जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों में नौकरियों की अच्छी संभावनाएं हैं। प्राइवेट सेक्टर में भी आपको जॉब मिल सकती है, जैसे केमिकल, माइनिंग, पेट्रोलियम जैसी रिस्क इंडस्ट्रीज में। आमतौर पर इन इंडस्ट्रीज में डिजास्टर मैनेजमेंट सेल होता है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं रेडक्रॉस और यूएन प्रतिष्ठान भी प्रशिक्षित पेशेवर को काम पर रखते हैं। अनुभव हासिल करने के बाद खुद की कंपनी या फिर एजेंसी भी खोली जा सकती है।

इंस्टीट्यूट वॉच

u इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू), नई दिल्ली

u नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी, दार्जिलिंग

u इंटरनेशनल सेंटर ऑफ मद्रास यूनिवर्सिटी, चेन्नई

u सिक्किम मनिपाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ, मेडिकल ऐंड टेक्नोलॉजिकल साइंसेज, गंगटोक

u इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी ऐंड एनवायरनमेंट, नई दिल्ली

u नेशनल सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट, इंद्रप्रस्थ एस्टेट, रिंग रोड, नई दिल्ली

u सेंटर फॉर सिविल डिफेंस कॉलेज, नागपुर

u एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन ट्रेनिंग ऐंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, हैदराबाद

u डिजास्टर मिटिगेशन इंस्टीट्यूट, अहमदाबाद

u एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन ट्रेनिंग ऐंड रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद

u सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट, पुणे

u एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, नोएडा

u नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, पटना

u राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद।

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