ऑटोमोबाइल में करियर

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से परिवर्तन हुए हैं। भारत में स्वदेशी और विदेशी, दोनों ऑटोमोबाइल कंपनियां, अब अपनी प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकियों में बदलाव लाने पर ध्यान केन्द्रित कर रही हैं ताकि बेहतर उत्पाद तैयार किए जा सकें और बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ा सकें। इसे देखते हुए प्रशिक्षित ऑटोमोबाइल इंजीनियरियों की मांग बढ़ गयी है। 2011-12 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार सितम्बर 2011 को समाप्त हुई एक वर्ष की अवधि में रोजगार प्रदान करनेवाले उद्योगों में ऑटोमोबाइल उद्योग का तीसरा स्थान था। कैरियर के विकल्प के रूप में ऑटोमोबाइल इंजीनियरी के क्षेत्र में व्यवसायियों के लिए निश्चित रूप से शानदार संभावनाएं हैं। 

ऑटोमोबाइल इंजीनियरी वस्तुतः इंजीनियरी की विभिन्न शाखाओं के तत्वों का सम्मिश्रण है, जैसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक्स, सॉफ्ट और कम्प्यूटर साइंस। 

इस उद्योग में ऑटोमोबाइल के डिजाइन, विनिर्माण, परीक्षण और रख-रखाव जैसे कार्यों को अंजाम देना होता है, सबसे रेखांकित किया जाता है, जिसमें वाहनों के निर्माण के लिए उपयुक्त कल-पुर्जों की डिजाइनिंग, उनका चयन और उनके इस्तेमाल की विदियों का निर्धारण किया जाता है। विभिन्न स्तरों पर उत्पाद की जांच-परख की जाती है। सुरक्षा सुनिश्चित करने और तत्संबंधी स्थिति में सुधार लाने के लिए क्रैश परीक्षणों का भी आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त बेचे गए वाहनों के लिए मरम्मत सेवाएं प्रदान करना और बाजार की जरूरतों के मुताबिक वाहनों में निरंतर सुधार और उन्हें अद्यतन बनाने के प्रयास करना भी ऑटोमोबाइल इंजीनियर के कार्यों का हिस्सा है। 

रोजगार


ऑटोमोबाइल उद्योग में वे कंपनियां शामिल हैं, जो बाइकों, स्कूटरों, मोटर साइकलों, ऑटो, कारों, ट्रकों, ट्रैक्टरों, रक्षा वाहनों और बसों का विनिर्माण करती हैं। इस क्षेत्र की कुछ प्रमुख कंपनियों में मारुति, टाटा मोटर्स, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, अशोक लेलैंड, हिन्दुस्तान मोटर्स और बजाज ऑटो, ह्यूंदई, फोर्ड, फिएट, टोयटा, होंडा, स्कोडा, वोल्क्सवैगन, ऑडी, रेनौल्ट और बीएमडब्ल्यू जैसे नाम शामिल हैं। 

ऑटोमोबाइल उद्योग और उसके साथ ऑटोमोबाइल हिस्से पुर्जे (कम्पोनेन्ट) उद्योग, सक्षम ऑटोमोबाइल इंजीनियरों के लिए विविध प्रकार के रोजगार उपलब्ध कराते हैं। डिजाइन, इंजीनियरी, उत्पादन, ऑपरेशन्स, मानव संसाधन प्रबंधन, बिक्री और सेवाएं, विपणन, वित्त, ग्राहक देखभाल, आईटी और अनुसंधान एवं विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। 

ऑटोमोबाइल उद्योग में रोजगार के अवसरों को तीन मुख्य क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है-डिजाइन, डेवेलपमेंट (विकास) और मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण)। डिजाइन के अंतर्गत वाहन या कम्पोनेन्ट का खाका तैयार किया जाता है। डेवलपमेंट इंजीनियर खाके का मूल्यांकन करते हैं और मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरों का संबंध वाहन के उत्पादन के साथ है। 

ऑटोमोबाइल इंजीनियरों को सौंपी जाने वाली कुछ भूमिकाओं में ऑटोमोबाइल डिजाइनर, प्रोडक्शन इंजीनियर, ड्राइवर इंस्टूमेंशन इंजीनियर, क्वालिटी इंजीनियर, ऑटोमोटिव तकनीशियन और पेन्टस स्पेशलिस्ट प्रमुख हैं। ऑटोमोबाइल विनिर्माण कंपनियों और ऑटोमोबाइल कंपोनेन्ट कंपनियों के अलावा सर्विस स्टेशनों और परिवहन कंपनियों द्वारा भी ऑटोमोबाइल इंजीनियरों को काम पर रखा जाता है। ऑटोमोबाइल सॉफ्टवेयर परियोजनाओं का संचालन करने वाली, आईटी यानी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां भी इन व्यवसायियों को रोजगार प्रदान करती हैं, परंतु इसके लिए उन्हें, सॉफ्टवेयर कोर्स करना होता है या सम्बद्ध कार्य का प्रशिक्षण लेना होता है। रोजगार का अन्य विकल्प मरम्मत वर्कशापों या गैराजों की स्थापना है। इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं अध्यापन के विकल्प भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में अनुसंधान की संभावना वाले क्षेत्रों में एरोडायनामिक्स, वैकल्पिक ईंधन, चैसिस, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण, सामग्री, मोटर स्पोर्ट, पावर ट्रेन, रैपिड प्रोटोटाइपिंग, वाहन और पैदल यात्री सुरक्षा या सप्लाई चेन मैनेजमेंट शामिल हैं। 

ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में काम-काज का उत्कृष्ठ पक्ष यह है कि इसमें विभिन्न विभागों में काम करने और ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर के विभिन्न पहलुओं से संबंधित कौशल हासिल करने के अवसर मिलते हैं। 

पारिश्रमिक


ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में नए स्नातक प्रतिमाह रु. 10,000/- से 15,000/- के बीच अर्जित कर सकते हैं। आईआईटीज, एनआईटीज और बिट्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के स्नातकों को पर्याप्त ऊंचे वेतन पैकेज प्रस्तावित किए जाते हैं।

शैक्षिक योग्यताएं :


ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थी ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में बी.ई. या बी.टैक. कोर्स से शुरुआत कर सकते हैं अथवा मैकेनिकल इंजीनियरी में बी.ई या बी.टैक. कोर्स करके बाद में ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में एम.टैक. कर सकते हैं। 

ऑटोमोबाइल इंजिनियरी के अंतर्गत आने वाले कुछ विषयों में थरमोडायनामिक्स, एरोडायनामिक्स, इलेक्ट्रिकल मोशन, कंबस्चन इंजन, व्हीकल चैसीस, इलेक्ट्रिक सिस्टम्स, कंट्रोल सिस्टम्स, फ्लुइड मेकेनिक्स, एमिशन्स, वर्कशाप प्रौद्योगिकी, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, मशीन डिजाइन, कम्प्यूटर एडिड डिजाइन, प्रोटोटाइप क्रीएशंस और एर्गोनोमिक्स शामिल हैं। ये सभी पाठ्यक्रम सैद्धांतिक अध्ययन, व्यावहारिक प्रयोग और स्वयं हाथ से काम करने के प्रशिक्षण का सम्मिश्रण हैं। अधिकतर विद्यार्थी इंटर्नशिप को इन पाठ्यक्रमों का सबसे उपयोग हिस्सा मानते हैं। इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थी स्वयं अपने हाथ से कार्य करने का अनुभव प्राप्त करते हैं। इन कार्यों में किसी कार को हविस (हॉइस्ट) पर ऊपर उठाने, एयर फिल्टर, ईंधन पिल्टर, इंजन ऑयल, स्पार्क प्लग बदलने, टायर पंक्चर लगाने से लेकर डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर के साथ काम करने और कंपोनेन्ट्स असेम्बल करने, आदि तक के कार्यों का प्रशिक्षण शामिल होता है। कुछ विद्यार्थी बताते हैं कि मेकेनिकों द्वारा ऐसे टिप्स दिए जाते हैं जिनकी जानकारी अनुभवी ऑटोमोबाइल इंजीनियरों को भी नहीं होती। इंजीनियरी मेकेनिक्स, अप्लाइड थरमोडायनामिक्स, मेकेनिकल इंजीनियरी, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन, आदि विषयों में प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। 

डिग्री पाने के इच्छुक डिप्लोमा धारक एएमआईइ परीक्षा दे सकते हैं, जिसका संचालन इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया द्वारा किया जाता है। यह व्यावसायिक प्रमाणपत्र स्नातक उपाधि के समकक्ष समझा जाता है। 

कौशल


ऑटोमोबाइल इंजीनियरी पाठ्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन के लिए गणित और विज्ञान विषयों की अच्छी जानकारी उपयोगी सिद्ध होती है। 

मौलिकता ऑटोमोबाइल इंजीनियरी के क्षेत्र में सफलता की कुंजी है। इसलिए युक्तिसंगत सोच, वस्तुनिष्ठ नजरिया परिश्रमी स्वभाव और अध्यवसाय जैसे गुण उस व्यक्ति में अपेक्षित हैं, जो इस क्षेत्र में रोजगार की अभिलाषा रखते हैं। 

स्कैचिंग और ड्राइंग कौशल सहित सुदृढ़ तकनीकी प्रशिक्षण के अलावा उम्मीदवारों को अभिव्यक्ति कौशल, टीम भावना से काम करने और समस्या समाधान में निपुण होना चाहिए ताकि वे अपने व्यवसाय के प्रति न्याय कर सकें। सीखने की इच्छा और सम्पर्कों का नेटवर्क रखना इस क्षेत्र में तरक्की के लिए मददगार सिद्ध होगा।

ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों की संख्या अधिक नहीं है। ऑटोमोबाइल कंपनियों में विभिन्न पद भरने के लिए प्रशिक्षित इंजीनियरों की भारी कमी है। अतः इस क्षेत्र में वास्तविक अभिरुचि रखने वाले और प्रतिबद्ध उम्मीदवारों के लिए भविष्य उज्जवल है। 

कॉलेज और पाठ्यक्रमः


कॉलेज
पाठ्यक्रम
पात्रता
प्रवेश
वेबसाइट
अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नै
ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में बी.ई
10+2
प्रवेश परीक्षा में प्रदर्शित योग्यता
एसआरएम यूनिवर्सिटी जिला कांचीपुरम
ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में बी.टैक
10+2 स्तर की परीक्षा में गणित, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान मुख्य विषय रहे हों और संबद्ध परीक्षा में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों।
प्रवेश परीक्षा में प्रदर्शित योग्यता
भारत यूनिवर्सिटी, चेन्नै
ऑटोमोबोइल इंजीनियरी में एम.टैक
संबद्ध विषय में बी.ई/बी.टैक या समकक्ष डिग्री
प्रवेश परीक्षा/गेट में प्रदर्शित योग्यता
वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट, मुंबई
ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में विशेषज्ञता के साथ मेकेनिकल इंजीनियरी में एम.टैक
मेकेनिकल/ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में बी.ई/बी.टैक
गेट में प्रदर्शित योग्यता
सास्ट्र यूनिवर्सिटी, तंजावुर
ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में 5 वर्षीय बी.टैक+एमटैक समेकित पाठ्यक्रम
गणित, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान के साथ 10+2
क्वालिफाइंग परीक्षा/एआईईईई में प्रदर्शित योग्यता
एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा
मेकेनिकल और ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में 5 वर्षीय बी.टैक+एम टैक दोहरी डिग्री पाठ्यक्रम
बीई/बी.टैक/एएमआईई (मेकेनिकल/ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में) परीक्षा 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की हो और 10+2 स्तर पर भी न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों।
प्रवेश परीक्षा में प्रदर्शित योग्यता
आचार्य इंस्टिट्यूट्स, सोलदेवनाहल्ली, बंगलौर
ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में डिप्लोमा
गणित और विज्ञान के साथ दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की हो।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग स्टॅडीज, हैदराबाद, आंध्रप्रदेश
ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में डिप्लोमा
कक्षा दस

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद
ट्रांस्पोर्टेशन और ऑटोमोबाइल डिजाइन में विशेषज्ञता के साथ डिजाइन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा
बी.ई/बी.टैक/बी.डेज/बी.आर्क या समकक्ष
प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार में प्रदर्शित योग्यता

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