कंप्यूटर इंजीनियर में करियर

कंप्यूटर इंजीनियरिंग उन विषयों में से है, जिनमें आज छात्रों का रुझान सबसे ज्यादा है। इसकी एक बड़ी वजह इस क्षेत्र में बहुत अधिक नौकरियों का होना है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग दो विषयों पर आधारित है- कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर हार्डवेयर। इंजीनियर इन दोनों के ज्ञान का उपयोग कंप्यूटर का डिजाइन तैयार करने और उसे विकसित करने में करते हैं। जो इंजीनियर कंप्यूटर के उपकरण तैयार करते हैं, वे हार्डवेयर इंजीनियर होते हैं और जो कंप्यूटर के चलाने के लिए विभिन्न प्रोग्राम तैयार करते हैं, वे सॉफ्टवेयर इंजीनियर होते हैं।
कंप्यूटर इंजीनियर के कार्य
हार्डवेयर इंजीनियर को कंप्यूटर के सभी पार्ट्स की जानकारी होना आवश्यक है। सॉफ्टवेयर इंस्टालेशन की जानकारी, पार्ट्स रिपेयरिंग, कंप्यूटर का रखरखाव और कंप्यूटर के साथ जुड़ी अन्य चीजों की जानकारी जैसे प्रिंटर, सीपीयू, मॉडम इत्यादि की जानकारी होनी आवश्यक है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर सॉफ्टवेयर्स की प्रोग्रामिंग और डिजाइनिंग करते है। कंप्यूटर में इंस्टॉल किए जाने वाले सभी सॉफ्टवेयर्स को सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही बनाते हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर को हार्डवेयर्स के बारे में अतिरिक्त जानकारी हो सकती है। किसी भी सॉफ्टवेयर के डेवलपमेंट, ऑपरेशन और मेंटिनेंस का काम सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के अंतर्गत आता है। इसके अलावा इसमें सॉफ्टवेयर रिक्वायरमेंट, कंस्ट्रक्शन और सॉफ्टवेयर टेस्टिंग भी शामिल किए जाते हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में इतनी सारी चीजें शामिल होने की वजह से इस फील्ड में रोजगार की संभावनाएं दिनोदिन बढ़ती जा रही हैं।
कंप्यूटर इंजीनियर कैसे बनें
कंप्यूटर इंजीनियर बनने के लिए बीटेक/बीई कंप्यूटर साइंस आदि कोर्स करने की आवश्यकता होती है। लेकिन कई अन्य तरीकों से भी कंप्यूटर क्षेत्र में जाया जा सकता है। ऐसे में आप कंप्यूटर बेसिक लेवल कोर्स शुरू कर सकते हैं या फिर ओ लेवल कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इसके बाद आप कंप्यूटर प्रोग्राम में डाटा एंट्री करने में सक्षम हो जाएंगे। आगे ट्रेनिंग लेकर आप कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में भी जॉब हासिल कर सकते हैं। प्रोग्रामिंग जॉब में आप प्रोग्राम को लिखने और टेस्टिंग का काम करेंगे तथा इंप्लिमेंटिंग फेज में आप यूजर की सहायता करेंगे। यदि आप कुछ कंप्यूटर भाषाओं और टेक्नोलॉजी जैसे सी, सी प्लस प्लस, जावा, कोबोल आदि में दक्ष हो जाते हैं तो आप कंप्यूटर टेक्नोलॉजी में सुनहरा भविष्य बना सकते हैं।
डोएक के ए लेवल तथा बी लेवल कोर्स ग्रेजुएशन डिग्री के बराबर ही हैं। इन कोर्सों में ऑपरेटिंग सिस्टम्स जैसे माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, इंटरनेट एक्सप्लोरर, फोटोशॉप आदि एप्लीकेशन्स के डेवलपमेंट के बारे में सीखते हैं। इन सबको करने के बाद आप नई तथा विकसित टेक्नोलॉजी में काम कर सकते हैं। इस क्षेत्र में करियर संभावनाओं के लिए आप अपनी रुचि तथा योग्यता के अनुसार कई अन्य प्रोग्राम्स, लैंग्वेजिज तथा टेक्नोलॉजी सीख सकते हैं, जिसके बाद आप सिस्टम एनालिस्ट, सिस्टम प्रोग्रामर, एनालिस्ट प्रोग्रामर, डाटाबेस मैनेजमेंट, नेटवर्किंग, कोडर आदि क्षेत्रों में काम कर सकते हैं।
स्किल्स
लॉजिकल दिमाग तथा एकाग्रता के साथ सीखने की चाहत इस क्षेत्र में प्रवेश करने की न्यूतम जरूरत है।
रचनात्मक क्षमता होना बेहद जरूरी है।
मैथ्स में मजबूत होना जरूरी है।
नई तकनीक और अन्य चीजों के प्रति जागरूक होना जरूरी है।
काम में एकाग्रता होनी चाहिए।
तार्किक क्षमता का होना और प्रयेागधर्मी होना भी जरूरी है।
कोई नया प्रोग्राम बनाने की क्षमता।
अंतिम निर्णय तक जाने की क्षमता।
संभावनाएं
नेटवर्किंग इंजीनियर, सिस्टम डिजाइनर, सिस्टम एनालिस्ट, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर इंजीनियर के लिए भारत में अपार अवसर हैं। इसके अलावा विदेश में भी भारतीय कंप्यूटर इंजीनियर्स की काफी मांग है।
देश में इस क्षेत्र में कुशल इंजीनियर्स की मांग में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी के अवसर तो मौजूद हैं ही, साथ ही आप खुद का व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं। कंपनियां अपनी जरूरतों के हिसाब से सॉफ्टवेयर डेवलप कराती हैं, इसलिए हर फील्ड में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की डिमांड बढ़ गई है।
फैक्ट फाइल
कुछ प्रमुख संस्थान
आईआईटी, चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, मुम्बई, बैंगलोर, रुड़की
बिड़ला इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नालॉजी एंड साइंस, पिलानी, राजस्थान
वैल्लोर इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नालॉजी, वैल्लोर, तमिलनाडु
बैंगलोर इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बेंगलुरू
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू
नेताजी सुभाष इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग
योग्यता
इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के लिए कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ 10वीं परीक्षा में पास होना जरूरी है। बैचलर डिग्री कोर्स, बीई/बीटेक के लिए साइंस में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, और गणित में 50 फीसदी के साथ 12वीं पास होना जरूरी है।
प्रवेश प्रक्रिया
विभिन्न राज्यों की यूनिवर्सिटीज और आईआईटी कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीई, बीटेक प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित करती हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के लिए बैचलर डिग्री पास होना जरूरी है। एमटेक/एमई में दाखिला लेने के लिए बीटेक/बीई में 60 फीसदी अंकों की जरूरत होती है। आईपी यूनिवर्सिटी में इंटर ग्रेजुएट लेवल प्रोग्राम में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट होते हैं। आईआईटी छात्रों को ग्रेजुएट एप्टीटय़ूड टेस्ट फॉर इंजीनियर्स के आधार पर स्नातकोत्तर के लिए प्रवेश मिलता है। सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, कंप्यूटर सिस्टम एनालिस्ट और डेटा बेस डेवलपर के लिए कंप्यूटर इंजीनियरिंग या कंप्यूटर साइंस में डिग्री जरूरी है।
कोर्स समय सीमा
12वीं के बाद बीटेक करने के लिए 4 साल का समय लगता है या फिर ग्रेजुएशन के बाद 3 साल की एमसीए भी की जा सकती है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की अवधि 3 साल है। बीई/बीटेक कंप्यूटर साइंस की अवधि चार साल है। एमई/एमटेक कोर्स 2 साल का है।
कोर्स
डिप्लोमा इन कंप्यूटर्स, एडवांस डिप्लोमा इन कंप्यूटर्स, बीएससी कंप्यूटर साइंस, बीटेक इन कंप्यूटर साइंस, बीसीए, एमसीए, एमटेक। आप विभिन्न संस्थानों से डिप्लोमा तथा सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।
सेलरी
बीसीए कोर्स के बाद 5-6 हजार से लेकर 15 हजार रुपए तक मिल जाते हैं। बीटेक छात्रों को 10 से 35 हजार रुपए तक सेलरी मिलती है। एमसीए करने के बाद शुरुआती सेलरी 15 से 50 हजार के बीचमिलती है। पब्लिक सेक्टर में कंपनियां शुरुआत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को 10,000 से 20,000 रुपए प्रति महीना सेलरी देती हैं। निजी कंपनियों में एक योग्य सॉफ्टवेयर इंजीनियर शुरुआत में 20,000 से 25,000 रुपए प्रति महीना सेलरी पा सकता है। अनुभव के आधार पर वह 50,000 से 1 लाख रुपए प्रति माह सेलरी भी प्राप्त कर सकता है।

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