Wednesday, February 3, 2016

जोअलॉजी में करियर

जीव-जंतु प्रेमियों को निश्चय ही उनके साथ समय बिताना अच्छा लगता है। आप अपने इसी प्रेम को अपने करियर में भी बदल सकते हैं। प्राणि विज्ञान या जोअलॉजी जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जिसमें जीव-जंतुओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इसमें प्रोटोजोआ, मछली, सरीसृप, पक्षियों के साथ-साथ स्तनपायी जीवों के बारे में अध्ययन किया जाता है। इसमें हम न सिर्फ जीव-जंतुओं की शारीरिक रचना और उनसे संबंधित बीमारियों के बारे में जानते हैं, बल्कि मौजूदा जीव-जंतुओं के व्यवहार, उनके आवास, उनकी विशेषताओं, पोषण के माध्यमों, जेनेटिक्स व जीवों की विभिन्न जातियों के विकास के साथ-साथ विलुप्त हो चुके जीव-जंतुओं के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।
अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि प्राणि विज्ञान में किस-किस प्रकार के जीवों का अध्ययन किया जाता है। जवाब है, इस पाठय़क्रम के तहत आप लगभग सभी जीवों, जिनमें समुद्री जल जीवन, चिडियाघर के जीव-जंतु, वन्य जीवों, यहां तक कि घरेलू पशु-पक्षियों के जीव विज्ञान एवं जेनेटिक्स का अध्ययन करते हैं। आइए जानते हैं कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने का पहला पड़ाव क्या है?
प्राणि विज्ञान के क्षेत्र में आने के लिए सबसे पहले आपको स्नातक स्तर पर जोअलॉजी की डिग्री लेनी होगी। आमतौर पर यह विषय देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विज्ञान के विभिन्न विषयों की तरह ही तीन वर्षीय डिग्री पाठय़क्रम के तहत पढ़ाया जाता है।
योग्यता 
जोअलॉजी या प्राणि विज्ञान में स्नातक में प्रवेश के लिए जरूरी है कि छात्र 12वीं कक्षा विज्ञान विषयों, जीव विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान के साथ-साथ गणित से उत्तीर्ण करें। स्नातकोत्तर में प्रवेश के लिए छात्रों का स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत के साथ जोअलॉजी विषय उत्तीर्ण करना जरूरी है।
पाठय़क्रम
बी. एससी. जोअलॉजी (प्राणि विज्ञान)
बी. एससी. जोअलॉजी एंड इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी (डबल कोर)
बी. एससी. बायो-टेक्नोलॉजी, जोअलॉजी एंड केमिस्ट्री
बी. एससी. बॉटनी, जोअलॉजी एंड केमिस्ट्री
एम. एससी. मरीन जोअलॉजी
एम. एससी. जोअलॉजी विद स्पेशलाइजेशन इन मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी
एम. एससी. जोअलॉजी
एम. फिल. जोअलॉजी
पी. एचडी. जोअलॉजी
फीस 
स्नातक स्तर के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में फीस लगभग 6,500-10,000 रुपये तक हो सकती है। स्नातकोत्तर और उससे आगे की शिक्षा के लिए फीस संबंधित जानकारी के लिए संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान से संपर्क करें।
ऋण एवं स्कॉलरशिप 
स्नातक स्तर पर जहां तक ऋण की बात है तो अभी यहां ऋण के लिए कोई खास सुविधा नहीं है, जबकि विभिन्न कॉलेज व विश्वविद्यालय अपने छात्रों के लिए स्कॉलरशिप जरूर मुहैया कराते हैं। स्नातक से आगे की पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या यूजीसी के साथ-साथ विभिन्न अनुसंधानों में जुटे विभागों या संस्थानों की ओर से भी स्कॉलरशिप की सुविधा प्राप्त की जा सकती है।
यह पाठय़क्रम किसी अन्य प्रोफेशनल कोर्स की तरह नहीं है, जहां स्नातक की डिग्री के साथ ही आप काम के लिए तैयार हो जाते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि कम से कम स्नातकोत्तर की डिग्री के साथ जोअलॉजी की किसी खास शाखा में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद आप इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं देंगे।
शिक्षा सलाहकार अशोक सिंह का कहना है, ‘अगर आप अनुसंधान और शोध के क्षेत्र में आना चाहते हैं तो जोअलॉजी में बी.एससी. के बाद आप एम.एससी. और फिर पीएच.डी. करें। लेकिन छात्रों के लिए 12वीं के स्तर पर ही यह निर्णय लेना जरूरी है कि वे अनुसंधान व शोध के क्षेत्र में आगे जाना चाहते हैं या शिक्षा में।’
प्राणि विज्ञान चूंकि जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जो जीव-जंतुओं की दुनिया से संबंधित है, इसलिए यहां पक्षियों के अध्ययन में विशेषज्ञता हासिल करने वाले को पक्षी वैज्ञानिक, मछलियों का अध्ययन करने वाले को मत्स्य वैज्ञानिक, जलथल चारी और सरीसृपों का अध्ययन करने वाले को सरीसृप वैज्ञानिक और स्तनपायी जानवरों का अध्ययन करने वालों को स्तनपायी वैज्ञानिक कहा जाता है। जोअलॉजिस्ट की जिम्मेदारी जानवरों, पक्षियों, कीड़े-मकौड़ों, मछलियों और कृमियों के विभिन्न लक्षणों और आकृतियों पर रिपोर्ट तैयार करना और विभिन्न जगहों पर उन्हें संभालना भी है। एक जोअलॉजिस्ट अपना काम जंगलों आदि के साथ-साथ प्रयोगशालाओं में भी करता है, जहां वे उच्च तकनीक की मदद से अपने जमा किए आंकड़ों को रिपोर्ट की शक्ल देता है और एक सूचना के डेटाबैंक को बनाता है। जोअलॉजिस्ट सिर्फ जीवित ही नहीं, बल्कि विलुप्त हो चुकी प्रजातियों पर भी काम करते हैं।
संभावनाएं
जोअलॉजी में कम से कम स्नातकोत्तर की डिग्री लेने के बाद छात्रों के सामने विभिन्न विकल्प हैं। सबसे पहला विकल्प है कि वे बी.एड. करने के बाद आसानी से किसी भी स्कूल में अध्यापक पद के लिए योग्य हो जाते हैं। इस क्षेत्र में विविधता की वजह से छात्रों के सामने काफी संभावनाएं मौजूद हैं। वे किसी जोअलॉजिकल या बोटैनिकल पार्क, वन्य जीवन सेवाओं, संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं, राष्ट्रीय उद्यानों, प्राकृतिक संरक्षण संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, प्रयोगशालाओं, मत्स्य पालन या जल जगत, अनुसंधान एवं शोध संस्थानों और फार्मा कंपनियों के साथ जुड़ सकते हैं। इसके अलावा कई टीवी चैनल्स मसलन नेशनल जीअग्रैफिक, एनिमल प्लैनेट और डिस्कवरी चैनल आदि को अक्सर शोध और डॉक्यूमेंटरी फिल्मों के लिए जोअलॉजिस्ट की जरूरत रहती है।
वेतन 
अगर आप शिक्षा जगत से जुड़ते हैं तो सरकारी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से निर्धारित वेतन पर नौकरी करेंगे। आमतौर पर एक बी. एड. अध्यापक का वेतन 32 से 35 हजार रुपये प्रति माह होता है। अगर आप एक फ्रेशर के रूप में अनुसंधान और शोध क्षेत्र में प्रवेश करेंगे तो आप प्रति माह 10 से 15 हजार रुपये कमा सकते हैं।
नए क्षेत्र
करियर काउंसलर जितिन चावला की राय में आजकल जोअलॉजी के छात्रों में वाइल्ड लाइफ से संबंधित क्रिएटिव वर्क और चैनलों पर काम करने के प्रति काफी रुझान है, लेकिन यह आसान काम नहीं है। ऐसे काम की डिमांड अभी भी सीमित है। हालांकि इन दिनों निजी स्तर पर चलाए जा रहे फिश फार्म्स काफी देखने में आ रहे हैं। जोअलॉजी के छात्रों के लिए यह एक बढिया व नया करियर विकल्प हो सकता है, खासकर प्रॉन्स फार्मिंग शुरू करने का।
मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज के जोअलॉजी डिपार्टमेंट की हेड प्रोफेसर स्मिता कृष्णन का कहना है कि जोअलॉजी के छात्रों के लिए इको टूरिज्म, ह्यूमन जेनेटिक्स और वेटरनरी साइंसेज के क्षेत्र खुल रहे हैं। जोअलॉजी में डिग्री के बाद वेटरनरी साइंसेज या एनिमल साइंस से संबंधित कोर्सेज किए जा सकते हैं।
करियर एक्सपर्ट कुमकुम टंडन के अनुसार कम्युनिकेशन जोअलॉजिस्ट के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक संवाद माध्यमों का उपयोग करते हुए आप जोअलॉजी की जानकारी के प्रसार-विस्तार के क्षेत्र में सक्रिय हो सकते हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री में प्लानिंग और मैनेजमेंट लेवल पर अहम भूमिका निभा सकते हैं। समुद्री जीवों और पशुओं की विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में अपना करियर बनाने की सोचें। यह वक्त की जरूरत है कि जोअलॉजिस्ट को जीअग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम और पशुओं की ट्रैकिंग से संबंधित तकनीकों को मिला कर काम करना आता हो।

साक्षात्कार
संभावनाओं की यहां कोई कमी नहीं

जोअलॉजी विषय की बारीकियों और देश-विदेश में इस क्षेत्र की संभावनाओं के बारे में बता रही हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के मैत्रेयी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रेनु गुप्ता
प्राणि विज्ञान के क्षेत्र में किस प्रकार के छात्र अपना भविष्य देख सकते हैं?
जोअलॉजी में वही छात्र प्रवेश लें, जिन्हें जीव-जन्तुओं से प्यार हो, साथ ही साथ वे व्यवहारिक भी हों। पहले तो कॉलेजों में प्रैक्टिकल्स के दौरान चीर-फाड़ भी करनी पड़ती थी, जिसे अब एनिमल एथिक्स के चलते बंद किया जा चुका है, बावजूद इसके छात्र को खुद को इतना मजबूत रखना चाहिए कि वे खून या जीवों से जुड़ी अन्य चीजों को देख कर परेशान न हो जाएं। उन्हें जानवरों से डर नहीं लगना चाहिए।
स्नातक के बाद छात्र किस प्रकार आगे बढ़ सकते हैं?
स्नातक तो जोअलॉजी की पहली सीढ़ी है। इससे आगे छात्र विभिन्न दिशाओं में आगे बढ़ सकते हैं। जो छात्र शिक्षा के क्षेत्र में आना चाहते हैं, वे स्नातक के बाद बी.एड. करके 8वीं कक्षा के छात्रों को विज्ञान विषय और स्नातकोत्तर के बाद बी.एड. व एम.एड. करके स्कूल में 10वीं व 12वीं तक के छात्रों को पढ़ा सकते हैं। इसके अलावा स्नातकोत्तर कर वे देश की अनुसंधान एवं शोध संस्थाओं में प्रोजेक्ट फेलो के रूप में शुरुआत कर सकते हैं। आज जोअलॉजी में विशेषज्ञता के लिए इतने विषय हैं कि वे जोअलॉजी विषयों के विशेषज्ञों के साथ-साथ माइक्रोबायोलॉजिस्ट, फूड टेक्नोलॉजिस्ट, एनवायर्नमेंटलिस्ट, इकोलॉजिस्ट आदि की भूमिका भी निभा सकते हैं।
इस क्षेत्र में करियर के लिहाज से क्या संभावनाएं हैं?
संभावनाओं की यहां कोई कमी नहीं है। आप स्नातक के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन और उसके आगे एम. फिल. व पीएच.डी. तक कर सकते हैं। अगर आप स्नातकोत्तर हैं तो वन्य जीवन जगत, अनुसंधान एवं शोध संस्थानों, शिक्षा क्षेत्र आदि में नाम कमा सकते हैं।
प्रमुख संस्थान
दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज, नई दिल्ली
www.dducollege.du.ac.in/
गार्डन सिटी कॉलेज, इंदिरा नगर, बेंगलुरू
www.gardencitycollege.edu/in/
अचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज, दिल्ली
andcollege.du.ac.in
मैत्रेयी कॉलेज, दिल्ली
www.maitreyi.ac.in/
देशबंधु कॉलेज, दिल्ली
www.deshbandhucollege.ac.in
श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, दिल्ली
www.svc.ac.in/academicpage1.html
सेंट एल्बर्ट्स कॉलेज, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोच्चि
www.alberts.ac.in/ug-courses/
पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज ऑफ साइंस, ओसमानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद
www.osmania.ac.in/oupgcs/
किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली
www.kmcollege.ac.in/
नफा-नुकसान
प्रकृति के करीब रहने व उसे और करीब से जानने का मौका मिलता है।
इस दिशा में ज्ञान हासिल करने की कोई सीमा नहीं है। आप काफी आगे तक जानकारी के लिए देश-विदेश में शिक्षा हासिल कर सकते हैं।
बाकी क्षेत्रों के मुकाबले शुरुआत में यहां वेतन काफी कम है।

Tuesday, February 2, 2016

फोटोग्राफी में करियर

फोटोग्राफी अपनी रचनात्मकता और भावनाओं को व्यक्त करने का एक अच्छा माध्यम है। यदि आप अपना दायरा थोड़ा-सा बढ़ा दें तो यह शौक आपके लिए एक अच्छा करियर विकल्प बन सकता है। फोटोग्राफी में करियर के बारे में बता रही हैं नमिता सिंह
फोटोग्राफी के कई स्वरूप हैं, जिसमें से आपको पसंदीदा क्षेत्र चुनना पड़ता है। चाहे स्टिल फोटोग्राफी हो या वीडियो फोटोग्राफी, दोनों में बेहतर कौशल की दरकार होती है। फोटो तो कोई भी व्यक्ति बस एक क्लिक करके खींच सकता है, पर उस फोटो से किस प्रकार का प्रभाव सामने आ रहा है, यह समझना आवश्यक है।
जानते हैं कि युवा फोटोग्राफी में करियर बना कर अपना भविष्य कैसे उज्ज्वल बना सकते हैं-
कब रख सकते हैं कदम
अभी कुछ वर्ष पूर्व तक फोटोग्राफी में करियर बनाने के लिए किसी विशेष शैक्षिक योग्यता की आवश्यकता नहीं थी, पर अब ऐसा नहीं है। कुछ संस्थानों में नौकरी पाने के लिए स्नातक होना अनिवार्य है। यदि कोई छात्र बारहवीं उत्तीर्ण है तो उसके लिए डिप्लोमा अथवा सर्टिफिकेट कोर्स करने के लिए अवसर खुल जाते हैं। इसके अतिरिक्त डिप्लोमा, डिग्री तथा कई तरह के स्पेशलाइजेशन कोर्स बाजार में मौजूद हैं। इनकी अवधि 6 माह से लेकर 3 वर्ष तक है।
आवश्यक स्किल्स
इस क्षेत्र में स्थापित होने के लिए फोटोग्राफर को शारीरिक रूप से फिट होना बहुत जरूरी है। यदि आप फिट हैं तो आसानी से 50-55 साल तक इनडोर अथवा आउटडोर फोटोग्राफी कर सकते हैं। वीडियो फोटोग्राफी करते समय फोटोग्राफर को साउंड, क्रियेटिविटी, कैमरे से जुड़ी जानकारियां, लाइट एवं फोटोग्राफी टेक्नीक की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा फोटोग्राफर में आंखों की शार्पनेस, ग्राहक की पसंद को परखने, बुद्धिमता, रंगों के संयोजन, दबाव के समय भी अच्छा कार्य करने जैसे गुण होने भी आवश्यक है।
कोर्स से जुड़ी जानकारी
कोर्स के अंतर्गत फोटो खींचने के विभिन्न तरीकों के साथ-साथ फोटो द्वारा दिए जाने वाले संदेश के बारे में भी स्पष्ट ज्ञान दिया जाता है। कैमरे के अलावा भी कई और बातों के बारे में छात्रों को बताया जाता है, मसलन किस फोटो को किस एंगल से लेना है, किस ऑबजेक्ट को अधिक फोकस करना है, प्रेशर में कैसे कार्य अधिक करना है तथा कम्प्यूटर पर विभिन्न सॉफ्टवेयरों की मदद से किस प्रकार फोटो को मीनिंगफुल बनाना है आदि।
यह एक ऐसी विधा है, जो लगातार अभ्यास करते रहने से ही आती है।
फोटोग्राफी के विभिन्न कार्य क्षेत्र
इसका कार्यक्षेत्र बहुत फैला हुआ है, इसलिए फोटोग्राफर को किसी विशेष क्षेत्र में स्पेशलाइजेशन करना पड़ता है। इन्हें निम्न रूप में बांटा जा सकता है-
फोटो जर्नलिस्म- इसमें समाचार पत्र-पत्रिकाओं से लेकर न्यूज एजेंसियों के लिए काम किया जाता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें खतरों और विपरीत परिस्थितियों से दो-चार होकर भी फोटोग्राफी करनी पड़ती है। इसमें फोटोग्राफर को ध्यान देना पड़ता है कि किस प्रकार उसकी फोटोग्राफी अधिक न्यूजी बने तथा उसके द्वारा लिखा गया कैप्शन स्टोरी व फोटो को सपोर्ट कर सके।
फैशन फोटोग्राफी- इस प्रकार की फोटोग्राफी में फोटोग्राफरों की जबर्दस्त डिमांड है, साथ ही क्रिएटिव लोग जल्दी ही प्रमोशन भी पा जाते हैं। फैशन फोटोग्राफरों को फैशन एक्सपर्ट के मुताबिक फोटो खींचनी होती है। दिल्ली एवं मुंबई में यह क्षेत्र अधिक विकसित हो रहा है।
स्टूडियो फोटोग्राफी- इसमें स्टूडियो वर्कशामिल होता है। यहां पोट्रेट खींचने के अलावा शादी-विवाह, सामाजिक एवं खेलकूद कार्यक्रमों तथा बर्थडे या अन्य पार्टियों आदि की तस्वीरों से जुड़ा काम मिलता है।
कॉमर्शियल फोटोग्राफी-कॉमर्शियल फोटोग्राफी में फोटोग्राफर को कई तरह के कैमरों पर हाथ आजमाना पड़ता है। इसके प्रमुख क्षेत्रों में मर्चेडाइजिंग, इंटीरियर्स तथा इंडस्ट्रियल होते हैं। यह फोटोग्राफी इनडोर तथा आउटडोर दोनों रूप में होती है। मुख्य रूप से कंपनी के ब्रोशर, वार्षिक रिपोर्ट, विज्ञापन एवं बिक्री के लिए तस्वीरें खींची जाती हैं।
मेडिकल/तकनीकी फोटोग्राफी- बाजार में मेडिकल एवं अन्य तकनीकी पुस्तकों तथा जर्नलों के लिए जिन फोटोग्राफ्स की आवश्यकता होती है, उसकी कमी इसी से जुड़े फोटोग्राफर पूरा करते हैं। रिसर्च, इंजीनियरिंग, साइंस आदि से संबंधित फोटोग्राफ्स इसी का हिस्सा हैं।
एडवर्टाइजिंग फोटोग्राफी-इसके अंतर्गत ज्यादातर फ्रीलांस फोटोग्राफर ही आते हैं, जो एक पैकेज के रूप में काम करते हैं। इसमें विभिन्न विज्ञापन एजेंसियों, प्रोडक्शन हाउसों तथा स्टूडियो से संपर्क रखना पड़ता है, जो कमीशन के आधार पर इन्हें काम देते हैं।
फीचर फोटोग्राफी- यह फोटोग्राफी सामान्यत: किसी विषय विशेष पर की जाती है। इसमें चित्र के आधार पर ही स्टोरी का निर्माण होता है। इसके अंतर्गत खेलकूद, शिक्षा, पर्यटन, वातावरण, वन्य जीवन, फूड, मनोरंजन आदि क्षेत्र आते हैं। इसमें फोटोग्राफर को कभी-कभी एक रिपोर्टर की भूमिका में भी कार्य करना पड़ता है।
फ्रीलांस फोटोग्राफी- अधिकांश फोटोग्राफर्स की पसंद फ्रीलांस फोटोग्राफी ही है। एक आंकड़े के मुताबिक लगभग 45-50 प्रतिशत फोटोग्राफर फ्रीलांसर के रूप में ही काम कर रहे हैं। यदि किसी फोटोग्राफर में अच्छा व्यवसायिक ज्ञान, बेहतर संवाद क्षमता तथा जिम्मेदारियों को उठाने की काबिलियत है तो उनके लिए यह सुनहरा क्षेत्र है। इसमें अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में फोटोग्राफी की जा सकती है।
रोजगार की संभावनाएं
यह एक ऐसा प्रोफेशन है, जिसमें अनुभव हासिल हो जाने पर नौकरी की जरूरत महसूस नहीं होती। आप अपनी इच्छानुसार स्वतंत्र रूप से समाचार पत्र-पत्रिकाओं, न्यूज चैनल्स, एडवर्टाइजिंग एजेंसीज, फिल्म इंडस्ट्री, फैशन एजेंसी, डॉक्यूमेंट्री व प्रोडक्शन हाउस के अलावा अपना स्वयं का स्टूडियो लगा कर पोर्टफोलियो, शादी-विवाह आदि की फोटोग्राफी कर सकते हैं।
शुरुआत  में आपको सहायक कैमरामैन के रूप में काम करना पड़ता है, जो कि सीखने के लिए वरदान साबित होता है। धीरे-धीरे आप बतौर कैमरामैन स्थापित हो जाते हैं।
यह एक ऐसा क्षेत्र बन चुका है, जिसमें कभी रोजगार का अभाव हो ही नहीं सकता। सरकारी महकमों में भी फोटोग्राफरों की नियुक्ति की जाती है। यदि आप किसी कंपनी अथवा संस्थान से नहीं जुड़ना चाहते तो फ्रीलांसर के रूप में भी काम कर सकते हैं। इसमें आपके पास कई सारे विकल्प सामने आएंगे।
मिलने वाली सेलरी
आय की दृष्टि से भी यह फील्ड उत्तम है। बतौर सहायक कैमरामैन किसी फोटोग्राफर को 10-15 हजार रुपए प्रतिमाह आमदनी होती है, जबकि कैमरामैन के रूप में काम करने पर आसानी से 30-32 हजार रुपए प्रतिमाह कमाए जा सकते हैं। अनुभव बढ़ने पर यह रकम तेजी से बढ़ती है।
यदि आप किसी अच्छे पत्र-पत्रिका में फोटोग्राफर के रूप में काम कर रहे होते हैं तो आपको 20-25 हजार रुपए, न्यूज चैनलों, प्रोडक्शन हाउसों तथा एड एजेंसियों में 30-35 हजार रुपए तथा फिल्म इंडस्ट्री में 70 हजार रुपए से लेकर लाखों तक कमा सकते हैं, जबकि फ्रीलांसिंग के रूप में कमाई की कोई निश्चित सीमा नहीं होती। आप एक दिन में 50 हजार रुपए तक घर ला सकते हैं।

एक्सपर्ट व्यू
सकारात्मक सोच के साथ आएं इस क्षेत्र में
फोटोग्राफी एक कलात्मक क्षेत्र है। इसमें हर नई फोटो के साथ फोटोग्राफर को आत्मसंतुष्टि का अनुभव होता है। समय के साथ इसमें टेक्नोलॉजी का समावेश होता गया। पहले जो काम साधारण कैमरों से किया जाता था, आज उनका स्थान डिजिटल और महंगे कैमरों ने ले लिया है। इस क्षेत्र में जो भी बदलाव हुआ है, उससे काम और अच्छा तथा सरल होता चला गया है। फोटोग्राफी को लोग दो तरह से अपनाते हैं। एक करियर के लिहाज से और दूसरा शौकिया। सिर्फ कैमरा साथ रख लेने या बटन क्लिक कर देने से अच्छा फोटोग्राफर नहीं बना जा सकता। फोटोग्राफर को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि वह क्या दिखाना चाहता है। यदि उसे इस सवाल का जवाब मिल जाए तो समझ लीजिए कि घटना या ईवेंट की सही तस्वीर प्रस्तुत हो सकती है। सफलतापूर्वक कोर्स करने के बाद इसमें रोजगार की बहार है। फैशन फोटोग्राफी, प्रोडक्ट फोटोग्राफी तथा मेडिकल फोटोग्राफी में आजकल जॉब की अनेक संभावनाएं सामने आ रही हैं। स्वतंत्र रूप से काम करना भी काफी कमाऊ हो सकता है।
-अश्वनी जुनेजा, सीनियर फैकल्टी, फोटोग्राफी, भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली
प्रमुख संस्थान
फोटोग्राफी से संबंधित पाठ्यक्रम कराने वाले प्रमुख संस्थान निम्नलिखित हैं-

भारतीय विद्या भवन (डिपार्टमेंट ऑफ फिल्म एंड टीवी स्टडीज), नई दिल्ली                           
वेबसाइट- www.film-tvstudies.com
जामिया मिल्लिया इस्लामिया
(एमसीआरसी डिपार्टमेंट), नई दिल्ली                          
वेबसाइट- www.jmi.nic.in
भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, पुणे                                    
वेबसाइट-
  www.ftiindiai.com
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी), नई दिल्ली                          
वेबसाइट-
  www.iimc.nic.in
सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता                            
वेबसाइट-
  www.srfti.gov.in
इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद  
वेबसाइट-
  www.allduniv.ac.in
एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टीवी, नोएडा                                          
वेबसाइट
-  www.aaft.com
फायदे एवं नुकसान
सफल होने पर बनती है अलग पहचान
कई तरह के अनुभवों से होते हैं वाकिफ
शारीरिक श्रम अधिक होने से थकान की स्थिति
मेहनत के हिसाब से आमदनी कम

Monday, February 1, 2016

वैलनैस इंडस्ट्री में करियर

वैलनैस इंडस्ट्री के तहत विभिन्न तंदुरुस्ती तथा सौंदर्य सेवाएं आती हैं जिनका आनंद कोई व्यक्ति किसी सैलून अथवा केंद्र में उठा सकता है । पहले यह एक असंगठित उद्योग था परंतु अब देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी देश की आय में इसका योगदान महत्वपूर्ण है । एक अध्ययन के अनुसार देश में वैलनैस इंडस्ट्री के इस वर्ष के अंत तक 1 लाख करोड़ रुपए का कारोबार करने का अनुमान है । प्रति वर्ष 15-17 प्रतिशत की विकास दर हासिल करते हुए वर्ष 2012 में 70 हजार करोड़ रुपए मूल्य से यह बाजार वर्तमान आंकड़ों तक पहुंचा है ।

ब्यूटी केयर सैग्मैंट की हिस्सेदारी सबसे अधिक
सम्पूर्ण वैलनैस इंडस्ट्री में ब्यूटी केयर सैग्मैंट की हिस्सेदारी ही 50 प्रतिशत (करीब 49 हजार करोड़) है  जिसके बाद एल्टरनेट थैरेपी (करीब 21 हजार करोड़) तथा हैल्थ एंड वैल्नैस फूड एंड बेवरेज (27 हजार करोड़) का नम्बर आता है । वर्ष 2012 में ब्यूटी केयर इंडस्ट्री का मूल्य 29 हजार करोड़ रुपए था जबकि फिटनैस तथा स्लिमिंग मार्कीट उस वक्त करीब 60 हजार करोड़ रुपए की थी । करीब 60 प्रतिशत बाजार पर उत्पादों का कब्जा है । देश के महानगरों तथा बड़े शहरों में फ्रैंचाइजी के रूप में हैल्थ व ब्यूटी क्लब्स की संख्या में इजाफा होने की पूरी सम्भावनाएं देखी जा रही हैं । शोध दर्शाते हैं कि वर्ष 1995 से 2005 के मध्य पर्सनल केयर उत्पादों पर किया जाने वाला खर्च लोगों की कुल आय का 4 प्रतिशत से बढ़ कर 8 प्रतिशत हो गया है । वर्ष 2025 तक इसके बढ़ कर 11 प्रतिशत होने की उम्मीद है ।

भारत में अपार सम्भावनाएं
भारत आयुर्वेदिक ट्रीटमैंट्स तथा योगा के लिए एक ग्लोबल सैंटर बनता जा रहा है। हर्बल कॉस्मैटिक्स सैक्टर भी भारतीय वैल्नैस इंडस्ट्री में अपनी जगह पक्की करता जा रहा है । अनुमान है कि इसमें 7 प्रतिशत की दर से विकास होगा क्योंकि अधिक से अधिक लोग रासायनिक उत्पादों को छोड़ कर जैविक उत्पादों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं ।

हैल्थ ड्रिंक्स के रूप में न्यूट्रास्यूटिकल्स, स्लिमिंग टी, डाइटरी सप्लीमैंट्स आदि का सेवन भी कई गुणा बढ़ रहा है । इस सैग्मैंट के भी वर्ष 2016 तक बढ़ कर 3212.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर होने की अपेक्षा है । वहीं ग्लोबल वैल्नैस टूरिज्म सैग्मैंट के भी आम पर्यटन की अपेक्षा 50 प्रतिशत तेजी के साथ बढऩे की सम्भावना है । इसमें एशियाई देशों का योगदान काफी अहम होगा ।

प्रशिक्षण संस्थान
हाल के वर्षों में वैलनैस इंडस्ट्री में करियर बनाने का प्रशिक्षण देने वाले देश में कई संस्थान खुले हैं । ये संस्थान वैल्नैस के क्षेत्र में ट्रेनिंग व एजुकेशन प्रदान कर रहे हैं। मंत्रा इंस्टीच्यूट ऑफ हैल्थ एंड फिटनैस मैनेजमैंट, ओरिएंट स्पा इंस्टीच्यूट, एन.एस.एच.एम. उड़ान  स्किल्स फाऊंडेशन जैसे कुछ संस्थान अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रोग्राम्स तथा कोर्सेज करवा रहे हैं । भारत में विभिन्न सैमीनार, कांफ्रैंस, अवार्ड्स आदि भी आयोजित होते रहते हैं । ग्लोबल इंडियन ब्यूटी एक्स्पो 2014 आदि इसी का उदाहरण है । देश में वैल्नैस इंडस्ट्री में उज्ज्वल भविष्य बनाने की अपार सम्भावनाएं हैं ।

इस इंडस्ट्री में प्रदान की जाने वाली सेवाओं की भरमार प्रत्येक व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करती हैं ।  अपेक्षा है कि भारतीय वैल्नैस इंडस्ट्री वर्ष 2015 तक रोजगार के 30 लाख मौके सृजित करेगी । ऐसे में इस इंडस्ट्री में रोजगार योग्य बनाने तथा इंडस्ट्री की योग्य कर्मचारियों की मांग को पूरा करने के लिए युवाओं में संबंधित कौशल विकसित करने की जरूरत है । साथ ही इस क्षेत्र में सर्टीफाइड कोर्स आदि भी शुरू करने चाहिएं ।

स्वरोजगार के भी उत्तम मौके 

यह भी अच्छी बात है कि जो लोग इस सैक्टर में स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं उन्हें भी वैल्नैस से जुड़ी यूनिट्स खोलने के लिए आरम्भ में ही अधिक धनराशि की जरूरत नहीं होती तथा न ही अधिक लोगों की जरूरत पड़ती है।

Sunday, January 31, 2016

बेकिंग स्पैशलिस्ट एक उज्जवल भविष्य

बेकिंग दुनिया के सबसे पुराने व्यवसायों में से एक है लेकिन समय के साथ इसके स्वरूप व तकनीक में काफी परिवर्तन आया है । आजकल पूरी दुनिया में लोग बेक की हुई चीजों का बहुत बड़े स्तर पर प्रयोग करते हैं । ऐसे में एक प्रोफैशनल बेकर की डिमांड भी काफी बढ़ी है । यदि आपको भी खाना बनाना पसंद है तो आप एक बेकर के रूप में अपना उज्ज्वल भविष्य देख सकते हैं ।

एक बेकर के लिए बेहद जरूरी है कि उसे भोजन व उससे संबंधित सामग्री से बेहद प्यार हो । इसके अतिरिक्त वह बेकरी प्रॉडक्ट्स और उसकी सामग्री से परिचित हो । उसे सिर्फ खाना पकाना ही नहीं आता हो बल्कि अपनी क्रिएटिविटी के बलबूते वह उसे एक नया रूप देने में सक्षम हो । साथ ही एक अच्छी प्रैजैंटेशन खाने को और भी अधिक लाजवाब बनाती है इसलिए उसमें खाने की प्रस्तुति करने का कौशल भी हो ।
खाना बनाते समय उसे सिर्फ टेस्ट पर ही ध्यान नहीं देना बल्कि सजावट व हाइजीन भी उतनी ही जरूरी है । उसका शारीरिक रूप से मजबूत होना भी आवश्यक है ताकि वह घंटों खड़े होकर काम कर सके व भारी सामान भी आसानी से उठा सके । एक बेकर तभी सफलता के नए मुकाम हासिल कर सकता है जब वह अपने ग्राहक को संतुष्ट कर पाए । इसके लिए उसके खाने में जादू के साथ-साथ उसमें स्वयं कम्युनिकेशन स्किल भी बेहतर होनी चाहिए । कड़ी मेहनत के साथ-साथ अच्छा टीमवर्क व मैनेजमैंट स्किल उसकी सफलता की राह आसान करती है ।

योग्यता 
वैसे तो इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए किसी विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं है बस आपको  बेकिंग, आइसिंग व डैकोरेटिंग की जानकारी होनी चाहिए लेकिन अगर आप चाहें तो अपने स्किल्स में निखार लाने के लिए बेकिंग व कन्फैक्शनरी में शॉर्ट टर्म या डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं । इस कोर्स की अवधि 4 से 6 महीने हो सकती है तथा आप 10वीं व 12वीं के बाद यह कोर्स आसानी से कर सकते हैं ।

कोर्स 
कोर्स के दौरान छात्रों को न्यूट्रिशन, फूड सर्विस, बेकिंग के सिद्धांतों, सैनिटेशन, बेकिंग के दौरान काम आने वाली मशीनरी को चलाने आदि के बारे में विस्तार से समझाया जाता है । कोर्स में छात्रों को बेकिंग की बेसिक जानकारी के साथ-साथ एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है । इसमें उन्हें इंडस्ट्रीयल इक्विपमैंट के जरिए सारी सामग्री को मिक्स करना व बेक करना सिखाया जाता है। इस ट्रेनिंग के जरिए छात्र सिर्फ बेकिंग के दम पर अपना भविष्य उज्ज्वल बना सकते हैं ।

अवसर 
आप इस क्षेत्र में किसी होटल, बेकरी शॉप, केटरर आदि के जरिए कदम रख सकते हैं । वैसे आप बेकरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के साथ भी जुड़ सकते हैं । यदि आप किसी के साथ जुड़कर काम नहीं करना चाहते तो आप खुद की बेकरी शॉप भी खोल सकते हैं । यदि आपके अंदर बेकिंग का हुनर लाजवाब है तो आप विदेश में भी नौकरी तलाश सकते हैं ।

आमदनी 
इस क्षेत्र में आपकी आय का स्रोत सिर्फ आपका हुनर है । वैसे प्रारंभ में एक बेकर को 10 से 15 हजार आसानी से मिल जाते हैं ।  वहीं एक अनुभवी बेकर की आमदनी 35 हजार से 50 हजार रुपए प्रतिमाह हो सकती है । यदि आप घर पर ही बेकिंग करते हैं तो आपकी आमदनी आपको मिलने वाले ऑर्डर पर निर्भर करेगी ।

प्रमुख संस्थान 
- नैशनल काऊंसिल फॉर होटल मैनेजमैंट एंड केटरिंग टैक्नोलॉजी,नोएडा,उत्तरप्रदेश
www.nchmct.org
-एल.बी.आई.आई .एच.एम.,पीतमपुरा,दिल्ली-34
www.Ibiihm.com
- दिल्ली पैरामैडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीच्यूट,दिल्ली
www.dpmiindia.com

Saturday, January 30, 2016

लैइजर मैनेजमेंट में करियर

आमतौर पर लैइजर का अर्थ आराम से लगाया जाता है। जब इसके साथ मैनेजमेंट जुड़ जाता है तो इसका अर्थ यह कदापि नहीं होता कि सारा प्रबंधन आराम से किया जाए। वास्तव में यह प्रबंधन का ऐसा क्षेत्र है, जो ग्राहकों के आराम और मनोरंजन का ख्याल रखता है। इसलिए इसमें इवेंट मैनेजमेंट, रिसॉर्ट मैनेजमेंट, रेस्टॉरेंट मैनेजमेंट, डिस्क जोकिइंग जैसे करियर शामिल हैं। जिस तरह आम आदमी की क्रयशक्ति बढ़ी है और वह सप्ताहांत और छुट्टियाँ बिताने के नए-नए साधन ढूँढने लगा है, ऐसे में उसकी सुख-सुविधा का प्रबंध करने वाले लैइजर मैनेजमेंट में अवसर और राय दोनों खासे बढ़े हैं।

कठिन काम लेकिन अच्छे दाम
लैइजर मैनेजमेंट से जुड़े प्रोफेशनल्स को रोजाना उसी तरह भागदौड़ करते हुए काम करवाना पड़ता है, जैसे कि शादी के समय दुल्हन का पिता व्यवस्थाएँ जुटाता है। उन्हें लोगों को खुश करने तथा आराम पहुँचाने के नए-नए तरीकों की खोज करते रहना होता है। उन्हें कंट्री क्लब या रिसॉर्ट का प्रबंधन देखना होता है अथवा मनोरंजक कार्यक्रमों का आयोजन उनके दैनिक कार्य का हिस्सा होता है। इसमें प्लानिंग से लेकर एक्जीक्यूशन और पोस्ट इवेंट कार्य भी शामिल होते हैं। इस काम में पैसा भी अच्छा है। लैइजर से करियर आरंभ करने वाले कई लोग तो इतने पारंगत हो जाते हैं कि वे स्वयं अपना व्यवसाय आरंभ कर सेवा प्रदान कर खासी आय अर्जित करने लगते हैं।

आमतौर पर लैइजर का अर्थ आराम से लगाया जाता है। जब इसके साथ मैनेजमेंट जुड़ जाता है तो इसका अर्थ यह कदापि नहीं होता कि सारा प्रबंधन आराम से किया जाए। वास्तव में यह प्रबंधन का ऐसा क्षेत्र है, जो ग्राहकों के आराम और मनोरंजन का ख्याल रखता है। इसलिए इसमें इवेंट मैनेजमेंट, रिसॉर्ट मैनेजमेंट, रेस्टॉरेंट मैनेजमेंट, डिस्क जोकिइंग जैसे करियर शामिल हैं। जिस तरह आम आदमी की क्रयशक्ति बढ़ी है और वह सप्ताहांत और छुट्टियाँ बिताने के नए-नए साधन ढूँढने लगा है, ऐसे में उसकी सुख-सुविधा का प्रबंध करने वाले लैइजर मैनेजमेंट में अवसर और राय दोनों खासे बढ़े हैं।

ब्रॉड रेंज है लैइजर मैनेजमेंट की
लैइजर मैनेजमेंट को एक ब्रॉड रेंज वाले करियर के रूप में लिया जाएगा, क्योंकि इसमें बहुत सारे उद्योग जुड़े हुए हैं। इसमें केवल आमोद-प्रमोद की गतिविधियाँ ही शामिल नहीं हैं बल्कि इवेंट मैनेजमेंट, रिसॉर्ट मैनेजमेंट, एम्यूजमेंट मैनेजमेंट जैसे नए-नए क्षेत्र भी शामिल हैं। टू टीयर शहरों में पनपती मॉल संस्कृति ने इसे पैर फैलाने का भरपूर अवसर प्रदान किया है।

क्या होता है लैइजर मैनेजमेंट में?
मूल रूप से लैइजर मैनेजमेंट में लोगों के आराम अथवा फुर्सत के समय का प्रबंधन करना शामिल है जिसमें कंट्री क्लब तथा रिसॉर्ट अथवा यहाँ तक कि जिम्नेशियम का प्रबंधन तक शामिल है। इसके अंतर्गत हॉलीडे पैकेजेस की डिजाइनिंग तथा ट्रेकिंग या राफ्टिंग एक्सरसंस अथवा एडवेंचर गेम्स के अन्य रूप के साथ-साथ फैशन शो या प्रदर्शनी, प्रॉडक्ट लांचिंग और सोशल फंक्शन भी आते हैं, जो इन दिनों एक हॉट करियर के रूप में माने जाते हैं।

लैइजर मैनेजमेंट में प्राइवेट पार्टियों, रोड शो, एक्जीबिशंस, कॉन्फ्रेंस, प्रमोशनल कैम्पेन, कांसर्ट्‌स, अवॉर्ड, नाइट्स जैसे आयोजन भी शामिल हैं। इसमें लाइव इवेंट्स की प्लानिंग से लेकर ऑर्गेनाइजेशन तथा एक्जीक्यूशन जैसे कार्य होते हैं, जो प्रॉडक्ट या ब्रांड लांचिंग से लेकर एक्जीबिशन, सेमिनार, प्रेस कॉन्फ्रेंस और यहाँ तक कि वर्कशॉप्स के आयोजन पर आधारित होते हैं। लैइजर मैनेजमेंट में अक्सर होटल मैनेजमेंट के कुछ पहलू भी जुड़े होते हैं, क्योंकि कई इवेंट तथा लैइजर एक्टीविटियों में खाना तथा ड्रिंक्स भी सर्व किया जाता है तथा गेस्ट्स को ठहराने की व्यवस्था भी करनी होती है।

इस क्षेत्र के प्रोफेशनल्स होटलों द्वारा ऑफर की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों का प्रबंधन तथा संचालन करते हैं। इसके अंतर्गत होटल में आयोजित इवेंट के मैनेजमेंट से लेकर उसके प्रमोशन से लेकर पब्लिसिटी का दायित्व भी लैइजर मैनेजरों पर ही होता है। लैइजर मैनेजर ही मीनू तय करता है, स्टाफ का सुपरविजन करता है तथा ग्राहकों की शिकायतों को दूर करने का कार्य भी करता है।

खूब बढ़ रही है माँग
इन दिनों बड़े शहरों के बाहरी हिस्सों में विभिन्ना क्लब, रिसॉर्ट, जिम तेजी से निर्मित हो रहे हैं, जहाँ समृद्ध परिवार से लेकर आम आदमी अपने मित्रों तथा परिवारों के साथ अपने अवकाश को मौज-मस्ती के साथ बिताना चाहता है। वह इस काम पर पैसा भी खूब खर्च करता है और सुविधा भी अच्छी चाहता है। उसके इस काम में लैइजर सहयोग प्रदान करता है।

आज शहर के बाहर निर्मित रिसॉर्ट या क्लब सारी सुविधाओं तथा साधनों से सुसज्ज्ति हैं। वहाँ नए साल की पार्टियों, संगीत की महफिलों आदि का अपने सदस्यों के लिए आयोजन होता रहता है। लोग तनाव को दूर करने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी से दूर यहाँ आकर सुकून की तलाश करते हैं और इस व्यवसाय से अच्छी आय को देखते हुए इस पर निवेश भी खूब बढ़ रहा है और करियर निर्माण के अवसर भी खूब मिल रहे हैं।

कौन-सा पाठ्यक्रम होगा उपयोगी
इस समय हमारे यहाँ लैइजर मैनेजमेंट के नाम से कोई विशेष पाठ्यक्रम संचालित नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे कोई डिग्री या डिप्लोमा कोर्स भी उपलब्ध नहीं हैं, जो लैइजर मैनेमजेंट या इंटरटेनमेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में प्रवेश की सुनिश्चितता प्रदान करते हों। लेकिन पब्लिक रिलेशंस, एडवरटाइजिंग, मॉस कम्युनिकेशंस, सेल्स एंड मार्केटिंग, होटल मैनेजमेंट अथवा बिजनेस मैनेजमेंट के पाठ्यक्रम निश्चित रूप से मदद प्रदान करते हैं।

विदेशों में लैइजर मैनेजमेंट के पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं जिसे देखते हुए कुछ निजी संस्थानों ने हमारे यह भी लैइजर मैनेजमेंट में प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया है। यदि आप चुनौती लेने के लिए तैयार हैं और आपको कठिन कार्य करने में दिलचस्पी है और आप कल्पनाशीलता, पहल करने के साथ-साथ अच्छी आयोजन क्षमता रखते हैं तो आपके लिए लैइजर मैनेजमेंट का क्षेत्र उस उर्वरा भूमि जैसा है, जो भरपूर आय और सेलिब्रिटियों के बीच रहने का अवसर प्रदान करता है।

प्रमुख संस्थान
हमारे यहाँ सभी आईआईएम तथा प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में एमबीए का कोर्स संचालित किया जाता है। लैइजर मैनेजमेंट का क्षेत्र चुनने वालों के लिए निम्नलिखित संस्थानों द्वारा संचालित विभिन्न प्रबंधन कार्यक्रम उपयोगी हो सकते हैं :

जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई
एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च
वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, मुंबई
टाइम स्कूल ऑफ मैनेजमेंट दरियागंज, नई दिल्ली
लाला लाजपतराय इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, मुंबई

Friday, January 29, 2016

चार्टर्ड अकाउंटेंट मे करियर

बाजार में सीए प्रोफेशनल्स की मांग हमेशा से रही है। लगभग सभी कंपनियों को एक स्तर के बाद इनकी जरूरत पड़ती है। इस करियर के बारे में बता रही हैं नमिता सिंह-
पिछले कुछ वर्षों में मल्टीनेशनल कंपनियों के देश में आगमन की वजह से जॉब के क्षेत्र की रौनक बढ़ी है। इनके अलावा स्थानीय कंपनियां भी रोजगार के एक बड़े हब के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। इसके चलते तेजी से विकास करती भारतीय अर्थव्यवस्था में फाइनेंस एवं अकाउंट्स से जुड़े लोगों की मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। जाहिर है इससे संबंधित करियर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते नजर आ रहे हैं। आर्थिक उदारीकरण के बाद इसमें तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) भी उन्हीं में से एक है। किसी भी संस्थान में सीए का काम बेहद सम्मानजनक एवं चुनौतीपूर्ण होता है। वे उस संस्थान अथवा कंपनी से जुड़े सभी अकाउंट एवं फाइनेंस संबंधी कार्यों के प्रति उत्तरदायी होते हैं। इसके अलावा इनका कार्य मनी मैनेजमेंट, ऑडिट अकाउंट का एनालिसिस, टैक्सेशन, रिटेनरशिप तथा फाइनेंशियल एडवाइज उपलब्ध कराने से भी संबंधित है।
क्या काम है सीए का
कंपनी एक्ट के अनुसार केवल सीए ही भारतीय कंपनियों में बतौर ऑडिटर नियुक्त किए जा सकते हैं। इसका फायदा देख कर ही कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां चार्टर्ड अकाउंटेंसी के क्षेत्र में कदम रख रही हैं। देश की इकोनॉमी को नियंत्रित करने, इससे जुड़े सिस्टम का ऑडिट और उसे सर्टिफाई करने का काम सीए के जिम्मे होता है। बैंक अपना सालाना ऑडिट सीए से ही कराते हैं। शेयरों की खरीद-फरोख्त में भी बैलेंस शीट देखी जाती है। बैंक व शेयर से अलग हट कर विभिन्न टैक्सों के भुगतान का हिसाब-किताब तक सीए के जिम्मे होता है।
बारहवीं के बाद प्रवेश शुरू
इसके एंट्री लेवल कोर्स सीपीटी में प्रवेश लेने के लिए छात्र के पास बारहवीं की डिग्री होनी आवश्यक है। इसमें कॉमर्स व मैथ्स की जानकारी सम्यक सहायता दिलाती है। सीपीटी के बाद आईपीसीसी व उसके बाद एफसी कोर्स में प्रवेश मिल जाता है। फाइनल कोर्स पूरा करने के बाद छात्र आईसीएआई में एनरोल कराने के योग्य हो जाते हैं।
तीन लेवल के कोर्स मौजूद
दि इंस्टीटय़ूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ही एकमात्र संस्था है, जो सीए का कोर्स कराती है और उसके बाद लाइसेंस प्रदान करती है। सीए का कोर्स तीन लेवल में पूरा होता है, जो निम्न हैं-
कॉमन प्रॉफिशिएंसी कोर्स (सीपीटी)- सीपीटी सीए के एंट्री लेवल का कोर्स है। इसमें चार विषयों जैसे अकाउंटिंग, मर्केटाइल लॉ, जनरल इकोनॉमिक्स एवं क्वांटिटेटिव एप्टीटय़ूड को शामिल किया जाता है। यह 200 मार्क्स का होता है तथा इसके लिए दो घंटे निर्धारित होते हैं। यह एग्जाम ऑब्जेक्टिव टाइप का होता है तथा इसमें गलत उत्तर दिए जाने पर नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है।
इंटिग्रेटेड प्रोफेशनल कॉम्पीटेंस कोर्स (आईपीसीसी)- यह नौ महीने का थ्योरिटिकल कोर्स है। इसमें अकाउंटिंग, बिजनेस एवं कंपनी लॉ, एथिक्स एंड कम्युनिकेशन, कॉस्ट अकाउंटिंग एवं फाइनेंशियल मैनेजमेंट, टैक्सेशन, एडवांस अकाउंटिंग, ऑडिटिंग एंड एश्योरेंस, आईटी एंड स्टैट्रिजिक मैनेजमेंट आदि विषयों को शामिल किया गया है। यह परीक्षा दो ग्रुप व सात पेपरों में संपन्न होती है। इसके बाद सीए के फाइनल कोर्स में दाखिला मिलता है।
फाइनल कोर्स (एफसी)- यह सीए कोर्स की सबसे अंतिम अवस्था है। इसमें छात्रों को फाइनेंशियल रिपोर्टिंग, ऑडिटिंग, प्रोफेशनल एथिक्स, टैक्सेशन, कार्पोरेट लॉ, सिस्टम कंट्रोल, स्ट्रैटिजिक फाइनेंस व एडवांस मैनेजमेंट एकाउंटेंसी के बारे में जानकारी दी जाती है। फाइनल कोर्स कम्प्लीट करने के साथ ही छात्रों को जनरल मैनेजमेंट एंड कम्युनिकेशन स्किल्स (जीएमसीएस) कोर्स भी पूरा करना होता है। यह परीक्षा दो ग्रुप तथा आठ पेपरों में होती है। सभी परीक्षाएं क्लीयर करने के बाद उन्हें आईसीएआई में मेंबरशिप के लिए आवेदन करना होता है।
आवश्यक स्किल्स
सीए बनने के लिए छात्रों को शैक्षिक योग्यता के अलावा अपने अंदर अन्य कई तरह के गुण पैदा करने पड़ते हैं। यह प्रोफेशन खासकर उन लोगों के लिए है, जो दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कठिन मेहनत की क्षमता रखते हों। उन्हें कॉमन सेंस, प्रशासनिक कौशल, अकाउंटिंग व एथिक्स, गणितीय कौशल, निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के साथ-साथ करेंट अफेयर्स से अपडेट रहना जरूरी है।
फीस की रूपरेखा
सीए की तीनों ही परीक्षाओं में फीस की रूपरेखा अलग-अलग होती है। सीपीटी में जहां छात्रों को प्रॉस्पेक्टस, रजिस्ट्रेशन, जर्नल आदि के रूप में 6,700 रुपए देने होते हैं, वहीं आईपीसीसी की 10,600 रुपए तथा फाइनल कोर्स की फीस 12,250 रुपए तय की गई है। इसके अलावा आर्टिकिलशिप ट्रेनिंग फीस 2000 रुपए,100 घंटे के इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी टेस्ट (आईटीटी) की फीस 4000 रुपए, 35 घंटे के ओरिएंटेशन प्रोग्राम की फीस 3000 रुपए तथा जीएमसीएस की फीस 4000 रुपए तय की गई है। सभी कोर्स व प्रोग्राम मिला कर यह 42,550 रुपए के करीब बैठती है।
रोजगार के भरपूर अवसर
सीए प्रोफेशनल्स के रूप में आप देश-विदेश की कंपनियों में फाइनेंस, अकाउंट्स एवं टैक्स डिपार्टमेंट में फाइनेंस मैनेजर, अकाउंट्स मैनेजर, फाइनेंशियल बिजनेस एनालिस्ट, ऑडिटिंग/इंटरनल ऑडिटर, स्पेशल ऑडिटर सहित चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर, सीईओ, फाइनेंस डायरेक्टर, फाइनेंशियल कंट्रोलर, चीफ अकाउंटेंट, चीफ इंटरनल ऑडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम कर सकते हैं। इसके साथ ही प्राइवेट प्रैक्टिस व कंसल्टेंसी में रोजगार के अवसर मिलते हैं। अधिकांश सीए कार्पोरेट घरानों को बिजनेस एडवाइज देने तथा प्रोजेक्ट प्लानिंग का काम भी करते हैं।  विदेशों में भी भारतीय प्रोफेशनल्स को अवसर मिल रहे हैं। सभी सरकारी व प्राइवेट बैंकों, पब्लिक लिमिटेड कंपनियों, ऑडिटिंग फर्म्स, फाइनेंशियल कंपनियों, म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट कंपनियों, इनवेस्टमेंट हाउस, स्टॉक ब्रोकिंग फर्म्स, लीगल फर्म्स व हाउस आदि में तेजी से नौकरियां सृजित हो रही हैं।
सेलरी
आजकल घरेलू कंपनियों में सीए प्रोफेशनल्स को जूनियर लेवल पर 15,000-20,000 रुपए प्रतिमाह तथा सीनियर लेवल पर 30,000-35,000 रुपए प्रतिमाह मिलते हैं, जबकि दो-तीन साल का अनुभव होने पर यही राशि 55,000-60,000 रुपए प्रतिमाह के करीब पहुंच जाती है। विदेशी कंपनियां इन्हें लाखों के पैकेज पर रख रही हैं।  यदि किसी कंपनी से नहीं जुडम्ना चाहते तो स्वतंत्र रूप से अपनी सेवाएं दे सकते हैं।
एक्सपर्ट व्यू
हार्डवर्किंग फील्ड है सीए
सीए प्रोफेशन भारतीय परिदृश्य में हमेशा से ही फिट बैठता आया है। देश की अर्थव्यवस्था को विकसित देश की श्रेणी की ओर ले जाने के लिए जो 2020-30 विजन तैयार किया गया है, उसमें सीए की बहुत बड़ी भूमिका है। इसका स्कोप कई कारणों से है। कंपनी लॉ कहता है कि किसी भी ऐसी कंपनी, जिसका टर्नओवर 60 करोड़ है, उसका टैक्स ऑडिट कराना जरूरी है। साथ ही यह भी नियम है कि उसका ऑडिटर सीए होना चाहिए।
आजकल इतने सारे लॉ आ गए हैं, जिनके बारे में जानकारी और उनसे अपडेट रहने की जिम्मेदारी सीए ही उठा सकते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि कंपनियां सही चीज भी गलत तरीके से करती हैं, जिसके चलते उन्हें भारी वित्तीय नुकसान होता है। बतौर सीए उस नुकसान से कंपनी को बचाया जा सकता है। जहां तक इसमें कोर्स करने का सवाल है तो बिना कोर्स के सीए बनने की कल्पना करना भी बेमानी है। इसके कोर्स की संरचना काफी विस्तार लिए हुए है।
छोटी-मोटी असफलता पर इसमें हारने की जरूरत नहीं है। यह लम्बी लड़ाई होती है। ऐसे में इसमें वही छात्र टिके रह सकते हैं, जो पूरी मेहनत और एकाग्रता से इसमें लगे हुए हैं। कोर्स के बाद काम की कोई कमी सामने नहीं आती।
एके गुप्ता, सीए

प्रमुख संस्थान
दि इंस्टीटय़ूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई)
वेबसाइट- www.icai.org
(हेड ऑफिस नई दिल्ली में स्थित है। इसके चार रीजनल ऑफिस मुंबई, कोलकाता, चेन्नई तथा कानपुर में हैं, जबकि पूरे देश में 87 शाखाएं और विदेशों में नौ चैप्टर मौजूद हैं)

Thursday, January 28, 2016

इकोलॉजी: प्रकृति को जानने का हुनर

मनुष्य पूरी तरह से पर्यावरण पर निर्भर है। पर्यावरण में थोड़ी सी भिन्नता या बदलाव उसके जीवन को तेजी से प्रभावित करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज हर देश पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है। वायु, जल, ध्वनि या भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में होने वाले अनचाहे परिवर्तन मनुष्य या अन्य जीवधारियों, उनकी जीवन परिस्थितियों, औद्योगिक प्रक्रियाओं एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों के लिए हानिकारक साबित हो रहे हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को इसकी भयावहता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आने वाले समय में इसके और विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए इकोलॉजी का अध्ययन आवश्यक है। इसके जरिए पर्यावरण के विभिन्न आयामों व उनके संरक्षण की विधिवत जानकारी मिलती है। विगत कुछ वर्षों से यह तेजी से उभरता हुआ करियर साबित हो रहा है। इससे संबंधित कोर्स में लोगों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है।
क्या है इकोलॉजी
इकोलॉजी (पारिस्थितिकी) जीव विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत जीवों व उनके वातावरण के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है। जीवन की अनेक जटिल वर्तमान समस्याओं का समाधान पारिस्थितिकी के अध्ययनों द्वारा हुआ है। इसमें निजी पारिस्थितिकी, समुदाय पारिस्थितिकी व इको सिस्टेमोलॉजी आदि भी शामिल हैं। इकोलॉजी को समझने के लिए मानव प्रजातियों का विधिवत अध्ययन आवश्यक है। इसके अलावा जलवायवीय कारक जैसे प्रकाश, ताप, वायु-गति, वर्षा, वायुमंडल की गैसों आदि का अध्ययन भी जरूरी है। पृथ्वी पर एक बहुत बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसमें समस्त जीव समुदाय सूर्य से प्राप्त ऊर्जा पर आश्रित रहते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल, पारिस्थितिकी पिरामिड, ऊर्जा का पिरामिड, जैव मंडल, वायु मंडल आदि का अध्ययन किया जाता है।

साइंस बैकग्राउंड होना जरूरी
यदि कोई छात्र इकोलॉजी से संबंधित कोर्स करना चाहता है तो स्नातक में उसका साइंस बैकग्राउंड होना जरूरी है। खासकर बॉटनी, बायोलॉजी, जूलॉजी एवं फॉरेस्ट्री संबंधी विषय सहायक साबित होते हैं। इसके बाद मास्टर कोर्स में दाखिला मिलता है। यदि छात्र रिसर्च, टीचिंग तथा अन्य शोध संबंधी कार्य करना चाहते हैं तो उनके लिए मास्टर डिग्री के बाद पीएचडी करना अनिवार्य है।
आवश्यक स्किल्स
इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए जरूरी है कि प्रोफेशनल्स प्रकृति से प्रेम करना सीखें और उसके संरक्षण के लिए उनके दिल में दर्द हो। कार्यक्षेत्र व्यापक होने के कारण जिस क्षेत्र में जा रहे हों, उसका विस्तृत अध्ययन जरूरी है। किसी भी चीज को आंकने का कौशल व कार्यशैली उन्हें औरों से अलग करती है। इसके अलावा उनमें समस्या के त्वरित निर्धारण का गुण, कम्प्यूटर व मैथ्स की अच्छी जानकारी, प्रेजेंटेशन व राइटिंग स्किल, कार्य के प्रति अनुशासन व टीम वर्क आदि का गुण उन्हें लंबी रेस का घोड़ा बना सकता है।
विस्तृत है कार्यक्षेत्र
अर्बन इकोलॉजी-
अर्बन इकोलॉजी इस क्षेत्र की सबसे नवीनतम विधा है, जिसमें इकोलॉजी का बड़े पैमाने पर अध्ययन किया जाता है, खासकर शहरों में रहने वाले लोगों के जनजीवन व प्राकृतिक परिदृश्य को इसमें भली-भांति परखा जाता है।
फॉरेस्ट इकोलॉजी- इसके अंतर्गत विभिन्न प्रजातियों के पौधों, जानवरों और कीड़े-मकौड़ों का अध्ययन व उनका वर्गीकरण किया जाता है। इसके अलावा जंगलों की भूमि और वहां के वातावरण पर मनुष्य और ग्लोबल वार्मिंग के असर का अध्ययन भी करते हैं।
मरीन इकोलॉजी- यह इकोलॉजी की ऐसी शाखा है, जिसके अंतर्गत जलीय जन्तुओं और उसमें रहने के दौरान वातावरण के असर को समझा जाता है। इसमें चिडियाघर और एक्वेरियम सेंटर में जलीय जन्तुओं के संरक्षण पर भी काम किया जाता है।
रेस्टोरेशन इकोलॉजिस्ट- ये प्रोफेशनल्स ऐसी जगह काम करते हैं, जहां पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में (जैसे वनों की कटान, फिर से पौधारोपण की कवायद) हो। रेस्टोरेशन इकोलॉजिस्ट प्रोजेक्ट के तहत काम करते हैं।
वाइल्ड लाइफ इकोलॉजी- इसमें इकोलॉजिस्ट पशुओं व उनकी जनसंख्या तथा उनके संरक्षण का प्रमुखता से अध्ययन करते हैं। साथ ही यह भी ढूंढ़ते हैं कि वे कौन से कारण हैं, जिनसे उनकी जनसंख्या में वृद्धि हो रही है।
एन्वायर्नमेंटल बायोलॉजी- इसमें एन्वायर्नमेंटल बायोलॉजिस्ट किसी विशेष वातावरण तथा उसमें रहने वाले लोगों की शारीरिक बनावट का अध्ययन करते हैं। ये पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा तथा उसके असंतुलन पर होने वाले दुष्परिणामों से भी लोगों को अवगत कराते हैं।
रोजगार की संभावना
सफलतापूर्वक कोर्स करने के बाद छात्रों को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ता। हर साल इकोलॉजिस्टों की मांग बढ़ती जा रही है। कई सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियां, एनजीओ, फर्म व विश्वविद्यालय-कॉलेज हैं, जहां इन प्रोफेशनल्स को विभिन्न पदों पर काम मिलता है। मुख्य रूप से प्रोफेशनल्स को रिसर्च सेंटर जैसे सीएसआईआर, एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीटय़ूट, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट, एन्वायर्नमेंटल अफेयर डिपार्टमेंट, फॉरेस्ट्री डिपार्टमेंट, नेशनल पार्क, म्यूजियम, एक्वेरियम सेंटर में काम मिलता है। इसके अलावा कई प्राइवेट संस्थान प्राकृतिक संरक्षण के क्षेत्र में आगे आए हैं और वे भी इकोलॉजिस्ट्स को अपने यहां प्रमुखता से नियुक्त कर रहे हैं।
इन पदों पर मिलता है काम
रिसर्चर
इकोलॉजी साइंटिस्ट
नेचर रिसोर्सेज मैनेजर
वाइल्ड लाइफ मैनेजर
एन्वायर्नमेंटल कंसल्टेंट
रेस्टोरेशन इकोलॉजिस्ट
मिलने वाली सेलरी
इसमें सेलरी की ज्यादातर रूपरेखा संस्थान, प्रोफेशनल्स की योग्यता व कार्यशैली पर निर्भर करती है। वैसे इसमें शुरुआती दौर में कोई संस्थान ज्वाइन करने पर 15-20 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ ही सेलरी भी बढ़ती जाती है, जबकि किसी विश्वविद्यालय या कॉलेज में टीचिंग के कार्य के दौरान उन्हें 40-50 हजार रुपए मिल जाते हैं। यदि स्वतंत्र रूप से या फिर विदेश में जॉब कर रहे हैं तो आमदनी की कोई निश्चित सीमा नहीं होती।
एजुकेशन लोन
इस कोर्स को करने के लिए कई राष्ट्रीयकृत बैंक देश में अधिकतम 10 लाख और विदेशों में 20 लाख तक का लोन प्रदान करते हैं। इसमें तीन लाख रुपए तक कोई सिक्योरिटी नहीं ली जाती। इसके ऊपर लोन के हिसाब से सिक्योरिटी देनी आवश्यक है। हर बैंक का अपना नियम-कानून है। बेहतर होगा कि छात्र लोन लेने से पूर्व संबंधित बैंक जाकर अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें।
एक्सपर्ट व्यू
समय की मांग है इकोलॉजी

पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने तथा उसमें मौजूद जीवों व संसाधनों में संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया से लगभग सभी देश जूझ रहे हैं। इसके लिए वे अभियान चला कर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। इन सब कवायदों के साथ ही देश में इकोलॉजिस्टों की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा स्नातक स्तर पर पर्यावरण एक अनिवार्य विषय घोषित हो जाने से भी फैकल्टी के रूप में योग्य लोगों की आवश्यकता है। एनजीओ, वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट व सरकारी विभागों में इनकी काफी डिमांड है। एक इकोलॉजिस्ट की पहली ड्य़ूटी पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न प्रजातियों को खोजना तथा वैज्ञानिक व व्यावहारिक सूचनाएं एकत्र करना है। इन प्रोफेशनल्स का ज्यादा समय रिसर्च, आंकड़ों का अध्ययन करने तथा रिपोर्ट तैयार करने में बीतता है। यह ऐसा क्षेत्र है, जो छात्रों से किताबी और प्रायोगिक दोनों तरह की जानकारी मांगता है। इसका विषय क्षेत्र व्यापक होने के कारण उन्हीं क्षेत्रों की ओर अपना कदम बढ़ाएं, जिनमें उनकी अधिक रुचि हो तथा जिसमें वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। आजकल इकोलॉजिस्टों के काम का दायरा काफी बढ़ गया है। वे बड़े-बड़े भूखंडों के मालिकों, उद्योगपतियों तथा वॉटर कंपनियों से जुड़ कर उन्हें सलाह देने का काम कर रहे हैं।  
-डॉ. वंदना मिश्रा, सीनियर फैकल्टी, डीयू
प्रमुख संस्थान
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
वेबसाइट
- www.jnu.ac.in
नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ इकोलॉजी, जयपुर
वेबसाइट
- www.nieindia.org
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस (सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंस), बेंगलुरू
वेबसाइट-
www.ces.iisc.ernet.in
नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ एडवांस स्टडीज, बेंगलुरू
वेबसाइट-
www.nias.res.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ इकोलॉजी एंड एन्वायर्नमेंटल, नई दिल्ली
वेबसाइट-
www.ecology.edu