Monday, June 22, 2015

चांद-सितारों का कैरियर



किसी समय चांद सिर्फ किस्से-कहानियों में ही होता था। मां बच्चे को लोरी गाकर सुनाती थी कि चंदा मामा दूर के…। अब चांद दूर की वस्तु नहीं रह गया है। चांद को तो मनुष्य ने 1969 मंे ही फतह कर लिया था। अब वह दूसरे ग्रहों तक पहुंच बनाने में जुटा है। हर ग्रह पर जीवन की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। यह सब संभव 
ब्रह्मांड में अवस्थित आकाशीय पिंडों का प्रकाश,उद्भव और उनके  व्यवहार का अध्ययन खगोल शास्त्र के अंतर्गत किया जाता है। अब तक ब्रह्मांड के जितने हिस्से का हमें पता चला है,उसमें लगभग 19 अरब आकाशगंगाओं का अनुमान है और प्रत्येक आकाशगंगा मंे लगभग 10 हजार तारे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक महापिंड के विस्फोट से हुई है। सूर्य को एक औसत तारा माना जाता है। सूर्य के चारों और नौ ग्रह चक्कर लगाते है। सूर्य सहित इन नौ ग्रहों को सौरमंडल कहा जाता है। पृथ्वी भी उनमें से एक है। इस ब्रह्मांड में हर एक तारा सूर्य के सदृश है। बहुत से तारे तो  ऐसे हैं कि सूर्य उनके सामने बहुत छोटा प्रतीत होता है।
इतिहास
सभी प्राकृतिक विज्ञानों मंे से अंतरिक्ष विज्ञान सबसे प्राचीन है। इसका आरंभ प्रागैतिहासिक काल में हो चुका था। प्राचीन धार्मिक  और मिथकीय कार्यों मंे इसका प्रयोग होता था। खगोलशास्त्र के साथ ज्योतिष का बड़ा गहरा संबंध रहा है। आज भी कई लोग इन्हें एक ही मानते हैं। प्राचीन खगोलविद् तारों और ग्रहों के बीच के अंतर को समझते थे। उनके अनुसार तारे लगभग शताब्दियों तक एक ही स्थान पर बने रहते हैं, जबकि ग्रह कम समय मंे ही अपने स्थान से हट जाते हैं। खगोल विज्ञान को वेद का नेत्र भी कहा जाता है, क्योंकि संपूर्ण सृष्टियों के होने वाले व्यवहार का निर्धारण काल से होता है और काल का ज्ञान ग्रहीय गति से होता है। ऋगवेद आदि ग्रंथों मंे नक्षत्र, चंद्रमास,सौरमास, मलमास,उत्तरायण, दक्षिणायण इत्यादि के संबंध में उदाहरण मिलते हैं। प्रसिद्ध खगोलविद जॉन प्लेफेयर के अनुसार 6 हजार वर्ष पूर्व भी भारत में खगोल विज्ञान था और यहां की गणनाएं पूरे विश्व मंे प्रयुक्त होती थीं। प्लेफेयर के अनुसार भारत ने ईसा से 3 हजार वर्ष पूर्व अंतरिक्ष विज्ञान ने काफी प्रगति कर ली थी। आर्यभट्ट ने 5वीं और 6वीं शताब्दी में ग्रहों की गति के विषय मंे कई महत्त्वपूर्ण खोजें की। खगोल शास्त्र का आधुनिक युग जर्मन भौतिकविद् किरचाक से आरंभ हुआ। उन्होंने 1859 मंे सूर्य के वातावरण मंे सोडियम, लौह, मैग्नीशियम, कैल्शियम तथा अन्य तत्त्वों का पता लगाया। भारत मंे स्वर्गीय प्रोफेसर मेघनाथ साहा ने सूर्य और तारों के भौतिक तत्त्वों के अध्ययन में महत्त्वपूर्ण कार्य किया। हमारे देश मंे डा. एस चंद्रशेखर और डा. जयंत विष्णु नारलीकर ने खगोल विज्ञान मंे कई महत्त्वपूर्ण खोजें की।
काल गणना भी अंतरिक्ष विज्ञान की उपज
प्राचीन काल मंे धार्मिक उत्सव और कैलेंडर को सूर्य और चंद्रमा की गति से निर्धारित किया जाता था। दिन, महीने और साल भी सूर्य और चंद्रमा की गति से निर्धारित हुए। आज का कैलेंडर रोमन कैलेंडर पर आधारित है,जो साल को 12 महीनों और महीने को 30 या 31 दिनों में बांटता है।
हिमाचल में खगोल पर्यटन
हिमाचल पर्यटन विकास निगम ने राज्य मंे पर्यटक को लुभाने के लिए खगोल पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। इसके लिए राज्य के 47 होटलों को चुना गया है। दिल्ली मंे स्पेस टेक्नोलॉजी एंड एजुकेशन के साथ करार किया गया है। ऑफ सीजन मंे इन होटलों मंे 35 फीसदी की छूट दी जाएगी। अंतरिक्ष विज्ञानी इन होटलों मंे अधिक पावर वाले टेलीस्कोप लगाएंगे। ये होटल चैल, नारकंडा, धर्मशाला, खजियार, काजा, केलांग, कल्पा और खड़ापत्थर मंे हैं।
हिमाचल की भावी योजना
हिमाचल मंे भास्कराचार्य स्पेस एप्लीकेशन एंड जियो इन्फार्मेशन संस्थान की तर्ज पर जियो इन्फार्मेटिक सेंटर स्थापित करने का ऐलान पिछली सरकार ने किया था। विख्यात खगोलविद् आर्यभट्ट के नाम पर आर्यभट्ट जियो इन्फार्मेशन एंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर रखा जाएगा। यह केंद्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग की निगरानी मंे राज्य की डिजिटल योजना बनाएगा।
प्रशिक्षण संस्थान
1-  पुणे विश्वविद्यालय अंतरिक्ष विज्ञान में एमएससी पाठ्यक्रम चलाता है, जिसमें  इसरो का भी कुछ पाठ्यक्रम रखा गया है।

2- तिरुवनंतपुरम में आईआईटी के छात्रों के लिए एक नया संस्थान प्रारंभ किया गया हैै। इसका लक्ष्य इसरो की आवश्यकता के अनुसार इंजीनियरों को प्रशिक्षित करना है। कई ऐसे पाठ्यक्रम भी हैं, जिनके पूरा होने पर छात्रों को खगोल विज्ञान में प्रमाणपत्र प्रदान किए जाते हैं।
3- बंगलूर में सेंट जोसेफ़  कालेज तथा बिरला इंस्टीच्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में  सर्टिफिकेट कोर्स के साथ  ख्रगोल विज्ञान में एमएससी भी करवाई जाती है।
4- कालीकट विश्वविद्यालय, खगोल विज्ञान में एमएससी कोर्स संचालित करता है।
5-  बाबा साहेब अंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद
6- शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर
 7- लखनऊ विश्वविद्यालय,लखनऊ
दूरबीन ने दिखाया रास्ता
दूरबीन के आविष्कार से तो जैसे अंतरिक्ष विज्ञान को जैसे पंख ही लग गए। इटली के अंतरिक्ष विज्ञानी गैलिलीयो गैलिली(1564-1642)ने सन् 1612 में पहली बार आकाशमंडल के अध्ययन मंे दूरदर्शी यंत्र(दूरबीन)का प्रयोग किया। दूरबीन के आविष्कार ने इस विज्ञान को बुलंदियों तक पहुंचाया।
अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी वेधशालाएं
आईआईएससी, कोरमंगलम, बंगलूर
वेणूबप्पू वेधशाला(वीबीओ)कावलूर, तमिलनाडु
कोडेकनाल वेधशाला, मद्रास
गौरीविदनूर वेधशाला, बंगलूर
भारतीय खगोल वेधशाला हांले, लेह-लद्दाख
अनुसंधान तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा केंद्र ,बंगलूर (क्रेस्ट)
अंतरिक्ष विज्ञान से आर्थिकी
अगर ज्योतिष किसी व्यक्ति का भविष्य बताता है,तो अंतरिक्ष विज्ञान किसी देश का भविष्य बनाता है। प्राचीन काल में वर्षा, अकाल, मौसम और ज्वार-भाटे की भविष्यवाणी अंतरिक्ष विज्ञान के आंकड़ों पर आधारित थी। आज भी अंतरिक्ष विज्ञान की मदद से वर्षा, अकाल और प्राकृतिक आपदाओं के बारे में जाना जा सकता है। देश की आर्थिकी मंे अंतरिक्ष विज्ञान अहम भूमिका निभाता है।
पात्रता
यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां शैक्षिक कौशल के साथ-साथ  अभिरुचि भी  महत्त्वपूर्ण है। मस्तिष्क की वैज्ञानिक प्रवृत्ति तथा खोज की आकांक्षा होना प्राथमिक आवश्यकता है। यदि आप इसमें जिज्ञासा तथा रुचि रखते हैं तो आप आधी जंग जीत चुके हैं। अन्य तकनीकी योग्यता के साथ-साथ जमा दो स्तर पर तथा स्नातक स्तर पर भौतिकी एवं गणित विषय होना अनिवार्य है। अंतरिक्ष विज्ञान में कैरिअर के लिए छात्रों को सामान्यतः भौतिकी, गणित एव इंजीनियरी तकनीकों का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए। उम्मीदवारों के पास  मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से भौतिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि में बीई या बीएससी की डिग्री होनी चाहिए।
परीक्षा पैटर्न
वायुमंडलीय एवं अंतरिक्ष विज्ञान में पीएचडी करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए सामान्यतः फरवरी या मार्च में संयुक्त प्रवेश जांच परीक्षा  आयोजित की जाती है। भौतिकी में स्नातकोत्तर या इंजीनियरी में प्रौद्योगिकी मास्टर या इंजीनियरी स्नातक छात्र परीक्षा में बैठने के पात्र हैं। परीक्षा में मल्टीपल च्वायस, आब्जेक्टिव प्रकृति के प्रश्न होते हैं, जिसमें भौतिकी विषय के सामान्य क्षेत्र शामिल होते हैं। परीक्षा मे वैज्ञानिक कौशल विषय के ज्ञान तथा समस्या सुलझाने की क्षमता की जांच की जाती है। अधिकतम आबंटित अंक 150 होते हैं। सभी 50 प्रश्नों के समान अंक होते हैं और नेगेटिव मार्किंग भी होती है। यदि आप यांत्रिक इंजीनियर हैं तो आपके लिए इस क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य के अवसर बढ़ जाते हैं।
वेतनमान
खगोल भौतिकी में कोई पाठ्यक्रम करने के बाद कोई भी अभ्यर्थी  कई अनुसंधान संस्थानों तथा सरकारी संगठनों में अनुसंधान वैज्ञानिक लग सकते हैं। अनुसंधान कार्य पूरा करने के बाद विभिन्न संस्थानों में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। विभिन्न सरकारी संस्थान भी खगोल विशेषज्ञों को वैज्ञानिकों के रूप में भर्ती करते हैं और उन्हें उच्च वेतन तथा अन्य अनुलाभ एवं भत्ते दिए जाते हैं। अनुसंधान कार्य के दौरान वे 30 से 40 हजार रुपए तक मासिक वेतन तथा अन्य अनुदान एवं सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। निजी क्षेत्रों में वेतन अनुभव और योग्यता के आधार पर निर्धारित होता है।
इसरो
इसरो भारत की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी है। इसकी स्थापना 1962 ई. में हुई। इसरो की गिनती विश्व की सबसे बड़ी छह अंतरिक्ष एजेंसियों में होती है। वर्तमान में डा. के राधाकृष्णन इसरो के अध्यक्ष हैं। भारत को स्पेस सुपर पावर बनाने में इसरो की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण है।

Sunday, June 21, 2015

PETROCRATS बनें एनर्जी के एक्सपर्ट


अगर आप इमर्जिग करियर चाहते हैं तो पेट्रोलियम सेक्टर की ओर मूव कर सकते हैं। इन दिनों पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की बढती मांग ने इस सेक्टर को टॉप पर पहुंचा दिया है। पहले पेट्रोलियम के नाम पर हम सिर्फ पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और केरोसिन ऑयल को ही जानते थे। अब सीएनजी भी इसमें शामिल हो गई है। अभी तक इस फील्ड में सिर्फ जियोलॉजिस्ट और केमिकल इंजीनियर्स का ही दबदबा था, लेकिन बढती मांग और फील्ड विस्तार की वजह से विभिन्न क्षेत्रों में इससे संबंधित एक्सपर्ट रखे जा रहे हैं।
मल्टीपल कोर्सेज
इस फील्ड में करियर बनाने के लिए आपके पास कई तरह के कोर्स हैं। अगर आप इससे संबंधित इस फील्ड में डिप्लोमा, बीटेक, एमटेक या एमबीए हैं, तो एंट्री कर सकते हैं। इसके अलावा एमटेक डुअल डिग्री करने का भी विकल्प खुला है, जो पांच साल की डिग्री है। इसमें हायर सेकेंडरी पास स्टूडेंट एडमिशन ले सकते हैं। कुछ चुनिंदा संस्थान एमएससी कोर्स भी चलाते हैं।
पर्सनल स्किल
इस फील्ड में अपना भविष्य देख रहे युवाओं के लिए इसके कामकाज का तरीका समझना ज्यादा आवश्यक है। इनका काम जमीन के अंदर तेल की खोज और खुदाई, नमूनों की जांच, क्रूड ऑयल को अलग-अलग करना, प्रोसेसिंग और प्रोडक्शन करना होता है। यह फील्ड मेकेनिकल माइनिंग और केमिकल इंजीनियरिंग का मिला-जुला रूप हैं। इसलिए बेसिक साइंस, फिजिक्स, जियोलॉजी और केमिस्ट्री के स्टूडेंट्स इस फील्ड को करियर के रूप में चुन सकते हैं।
अपॉ‌र्च्यूनिटी एक्सप्लोर
एक बेहतरीन पेट्रो एक्सपर्ट के पास सिर्फ इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट का ही ऑप्शन नहीं है, बल्कि इसमें माइंस की खुदाई और उसमें से खनिज और ईधन की खोज भी शामिल हैं। चाहे एग्रीकल्चर हो, परफ्यूम इंडस्ट्री या फिर पेंट्स इंडस्ट्री की बात करें, तमाम तरह के उद्योग-धंधे पेट्रोलियम पर ही निर्भर करते हैं। लुब्रीकेंट्स, पेस्टीसाइड्स, कीटनाशक, केरोसिन, वैक्स और दूसरी तमाम तरह की चीजें किसी न किसी तरह पेट्रोलियम से ही बनी हैं। मार्केटिंग में भी इसकी संभावनाएं बेहद मजबूत हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, ओएनजीसी, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, रिलायंस, अदानी, एस्सार और केयर्स एनर्जी जैसी कई बडी कंपनियां पेट्रो प्रोफेशनल्स को शानदार सैलरी पैकेज पर जॉब ऑफर कर रही हैं। साथ ही यूरोप के साथ खाडी देशों के दरवाजे भी खुले हैं।
इंस्टीट्यूट वॉच
-पंडित दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी, गांधीनगर
-यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज, देहरादून
-राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, रायबरेली
-इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
-बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
-आईआईटी, चेन्नई
एक्सपर्ट बाइट
पेट्रोलियम प्रोडक्शन के मामले में भारत काफी पीछे है, लेकिन खपत के मामले में विकसित देशों से टक्कर ले रहा है। जाहिर है कि जब यहां पेट्रो प्रोडक्ट का इस्तेमाल ज्यादा है, तो इससे संबंधित प्रोफेशनल्स की डिमांड भी ज्यादा होगी।
यही कारण है कि पेट्रोलियम इंडस्ट्री अब काफी बडा रूप ले चुकी है। यह पेट्रोल पंप से रिफाइनरी डिपो और मल्टीनेशनल कंपनियों तक फैल चुका है।

Saturday, June 20, 2015

टॉय डिजाइनिंग में सवारें कैरियर


खिलौने सभी बच्चों को बेहद पसंद होते हैं। ये सिर्फ खेलने के नजरिए से नहीं बल्कि उनके मानसिक विकास में भी मदद करते हैं। वैसे भी आजकल बाजार में इतने नए-नए खिलौने आ गए हैं कि कई बार लेने से पहले सोचना पड़ता है। कहते हैं अपने अंदर का बच्चा कभी न मरने दें और खिलौनों की दुनिया का यह नया स्वरूप खिलौने के निर्माण में कैरियर की भी ढेरों संभावनाएं पैदा करता है।

टॉय डिजाइनर का काम खिलौनों से बच्चों का मनोरंजन तो हो ही, साथ ही, ऐसे खिलौने बनाना भी है जिनसे बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा भी मिले। टॉय डिजाइनिंग

खिलौने भी दो प्रकार के होते हैं - एक जिनसे बच्चे कुछ सीखते हैं और जिसे परिवार के साथ भी खेला जा सकता है, दूसरा सिर्फ मौज-मस्ती के लिए। पुराने समय में खिलौने प्राकृतिक चीजों से बनते थे जैसे लकड़ी, पत्थर या मिट्टी लेकिन आजकल यह प्लास्टिक, फर और अन्य कृत्रिम पदार्थ।

टॉय डिजाइनर खिलौनों को डिजाइन करते हैं और फिर बनाते हैं। उनका काम शुरू होता है ड्रॉइंग, स्केचिंग या कंप्यूटर से मॉडल तैयार करने से, फिर यह तय करना कि खिलौने का हर हिस्सा कैसे बनना है और फिर उसका एक नमूना तैयार करना।

खिलौनों को बाजार में दो प्रकार के उपभोक्ताओं के लिए रखा जाता है - एक तो बच्चे जो उनसे खेलते हैं और दूसरे उन ग्राहकों के लिए जो खिलौने एकत्रित करते हैं। गुड़िया से लेकर मैकेनिकल सेट, टॉय डिजाइनर बोर्ड गेम्स, पजल्स, कंप्यूटर गेम्स, स्टफ्ड एनिमल्स, रिमोट कंट्रोल कार, नवजात शिशु के लिए खिलौने आदि बनाते हैं।

आजकल के दौर के हिसाब से खिलौने बनाने के लिए डिजाइनर को न केवल बाजार के ट्रेंड से अवगत रहना चाहिए बल्कि अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों की जरूरतों को भी पता होना चाहिए। इस कैरियर में ग्राफिक डिजाइन, मैकेनिकल ड्रॉइंग और कलर के चुनाव की जानकारी हो तो अच्छी सफलता प्राप्त हो सकती है। टॉय डिजाइनर बच्चों के विशेषज्ञ के साथ काम करते हैं जिससे उन्हें हर आयु के बच्चों की जरूरत का पता चलता है। उनकी सफलता अच्छे, मनोरंजक, कल्पनाशील और सुरक्षित खिलौने बनाने पर निर्भर करती है। इस कैरियर के लिए व्यापार और प्रबंधन क्षमता होना जरूरी है।

इस कैरियर में विशिष्ट कोर्स कम हैं लेकिन ग्राफिक डिजाइन, इंडस्ट्रियल डिजाइन या कार्टूनिंग की जानकारी के साथ काम किया जा सकता है। इसमें कंप्यूटर की जानकारी होना जरूरी है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग और मार्केटिंग में अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षक, विशेषज्ञ, साइकोलॉजिस्ट, इंजीनियर, आर्किटेक्ट और कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट भी टॉय डिजाइनिंग का कोर्स कर सकते हैं।

इंजीनियरिंग का ज्ञान तकनीक द्वारा निर्मित खिलौने के लिए होना जरूरी है। शिक्षक, विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक हर आयु के बच्चों की जरूरतें आसानी से समझ सकते हैं इसलिए परामर्शदाता के तौर पर वह इस क्षेत्र में पैर जमाने में सक्षम हैं। कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट खिलौनों की सॉफ्टवेयर संबंधित कार्यात्मकता प्रदान कर सकते हैं।

PR

कुछ टॉय डिजाइनर एजुकेशनल खिलौनों में भी विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं, कुछ सामान्य खिलौनों में या फिर कोई विशिष्ट क्षेत्र में कोर्स कर सकते हैं जैसे मॉडल मेकिंग, बोर्ड गेम्स, सॉफ्ट टॉय या पुराने खिलौनों की प्रतिकृति आदि। आजकल पालतू जानवरों के लिए खिलौने बनाना भी बढ़ती हुई इंडस्ट्री है।

टॉय डिजाइनर अगर चाहें तो किसी कंपनी में भी काम कर सकते हैं या स्वतंत्र रूप से खिलौने भी बना सकते हैं। अगर चाहें तो अपनी मैनुफैक्चरिंग यूनिट भी खोल सकते हैं। टॉय डिजाइन पर किताब लिख सकते हैं या किसी इंस्टिट्यूट में बतौर शिक्षक भी नौकरी की जा सकती है। इसके अलावा, बतौर इंटीरियर डिजाइनर बच्चों के कमरे या प्ले स्कूल थीम बेस्ड टॉय का इस्तेमाल करके डिजाइन कर सकते हैं। टॉय डिजाइन कंस्लटेंट या इसमें फ्रीलांसिंग भी की जा सकती है। एक बार डिजाइनर के तौर पर अपने आपको स्थापित करने के बाद अवसरों और आय की कमी नहीं होगी। लेकिन इस कैरियर में सफलता आपकी रचनात्मकता पर निर्भर करती है।

यहां से करें कोर्स -
1 नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद

2 इंस्टिट्यूट ऑफ टॉय मेकिंग, कोलकाता



केमिकल इंजीनियरिंग में बनाएं ब्राइट करियर


केमिकल इंजीनियरिंगके क्षेत्र में आप अपने करियर को बेहतर बना सकते। औद्योगिक क्षेत्रों, जैसे-प्लास्टिक, पेंट्स, फ्यूल्स, फाइबर्स, मेडिसिन, फर्टिलाइजर्स, सेमीकंडक्टर्स, पेपर में काम करने के अलावा, पर्यावरण सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं। आइए, जानते हैं केमिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आपके लिए किस तरह के मौके हैं।

समय के साथ करियर
समय के साथ स्टूडेंट्स के सामने करियर के ढेरों नए ऑप्शंस खुल हुए रहते हैं, लेकिन आज भी इंजीनियरिंग फील्ड स्टूडेंट्स के लिए पसंदीदा करियर ऑप्शन बना हुआ है। जिसमें करियर के हमेशा ऑप्शंस रहते है। इंजीनियरिंग से जुड़ी एक फील्ड है केमिकल इंजीनियरिंग का, जिसमें करियर ऑप्शंस की कोई कमी नहीं रहती है। जैसे-जैसे इसका दायरा बढ़ रहा है, इस फील्ड में प्रोफेशनल्स की डिमांड भी बढ़ती जा रही है।

केमिकल इंजीनियर का मुख्य काम विभिन्न रसायनों और रासायनिक उत्पादों के निर्माण में आने वाली समस्याओं को सॉल्व करना है। इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स पेट्रोलियम, रिफाइनिंग, फर्टिलाइजर टेक्नोलॉजी, खाद्य व कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, सिंथेटिक फूड, पेट्रो केमिकल्स, सिंथेटिक फाइबर्स, कोयला, खनिज उद्योग और एनवॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग जैसे अन्य क्षेत्रों में अपने करियर को बेहतर बना सकते हैं। अपनी फील्ड में एक्सपर्ट होने के लिए आपको फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग आदि की पढ़ाई भी करनी होती है। कुछ केमिकल इंजीनियर ऑक्सीडेशन, पॉलीमराइजेशन या प्रदूषण नियंत्रण जैसी फील्ड में भी एक्सपर्ट्स हो जाते हैं।

किस जगह ज्यादा संभावनाएं है
कोर्स करने के बाद सबसे ज्यादा नियुक्तियां केमिकल, प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, प्रिंटिंग, फूड व मिल्क इंडस्ट्री में होती हैं। इसके अलावा, प्रोफेशनल्स मिनरल इंडस्ट्री, पेट्रोकेमिकल प्लांट्स, फार्मास्यूटिकल, सिंथेटिक फाइबर्स, पेट्रोलियम रिफाइनिंग प्लांट्स, डाई, पेंट, वार्निश, औषधि निर्माण, पेट्रोलियम टेक्सटाइल एवं डेयरी प्लास्टिक उद्योग आदि क्षेत्रों में जॉब के ऑप्शंस रहते है। शोध में रुचि रखने वाले रिसर्च इंजीनियरिंग का विभाग संभालते हैं। प्राइवेट एवं सरकारी संस्थानों में केमिकल इंजीनियरिंग से संबंधित जॉब्स की भरमार है। यह कोर्स करने के बाद आप विदेशी कपंनीयों में जॉब पा सकेते है। विदेशों में केमिकल इंजीनियर की काफी डिमांड है।

कैसे ले एंट्री
इस फील्ड में एंट्री के लिए ग्रेजुएट होना अनिवार्य है। अच्छे कॉलेज में एडमिशन के लिए ऑल इंडिया लेवल पर होने वाले एंट्रेंस एग्जाम को क्वालिफाई करना जरूरी होता है। एग्जाम क्लीयर करने के बाद आइआइटी, बीएचयू, रुडक़ी एवं कुछ अन्य बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों में मेरिट के बेस पर एडमिशन मिल जाता है। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों के अलग-अलग इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए राज्यस्तरीय प्रवेश परीक्षा के जरिए एडमिशन लिया जा सकता है। ग्रेजुएट एप्टिट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) एग्जाम को क्वालिफाई करके पोस्टग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लिया जा
सकता है।

सैलरी पैकेज
केमिकल इंजीनियरिंग की फील्ड में सैलरी प्रोफेशनल के एक्सपीरियंस, क्वालिफिकेशन आदि पर निर्भर करती है। प्राइवेट सेक्टर में प्रोफेशनल्स को ज्यादा पैसा ऑफर किया जाता है। बतौर फ्रेशर्स करियर शुरू करने पर सैलरी 20 से लेकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह हो सकती है। इस क्षेत्र में जॉब की कोई कमी नही है तथा इस क्षेत्र में करियर के ऑप्शंस हमेशा रहते है।



Thursday, June 18, 2015

अंतरिक्ष क्षेत्र में बनाएं करियर


जयपुर। अंतरिक्ष और उसमें होने वाली घटनाएं बेशक मानव के लिए कौतूहल का विषय रही हैं लेकिन समय अब वह नहीं रहा जब इंसान सिर्फ आसमान की ओर देखकर हैरान ही होता था। आज अंतरिक्ष से जुड़े तमाम रहस्य धरती पर रहने वाले मानव द्वारा सुलझाए जा रहे हैं। 

इस क्षेत्र मे होने वाली नई-नई खोजों और रहस्यों से उठते हुए पर्दों ने युवा पीढ़ी को इसकी ओर आकर्षित किया है। इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व के कारण ही 2007 में भारत में एशिया के पहले स्पेस इंस्टीटयूट \"इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी\" की स्थापना की गई।

यदि आप भी अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं तो आईआईएसटी में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। क्योंकि इसमें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है।

कोर्स और योग्यता-
तिरूवनंतपुरम स्थित आईआईएसटी में स्पेस साइंस की तीन मुख्य शाखाओं से जुड़े बीटेक प्रोग्राम्स संचालित हैं। चार साल की अवधि वाले प्रोग्राम और उनमें सीटो की संख्या इस प्रकार है - 
एयरोस्पेस इंजीनियरिंग-60 सीट, एवियॉनिक्स-60 सीट, फिजिकल साइंसेज-36 सीट

आईआईएसटी के बीटेक प्रोग्राम्स में प्रवेश की सबसे पहली योग्यता आपका फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्य विषयों में कम से कम 70 फीसदी अंकों के साथ 12वीं या समकक्ष होना है। इसके बाद आपने जेईई मेन्स दिया हो और जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई किया हो। जेईई एडवांस में भी न्यूनतम अंकों की अनिवार्यता रखी गई है-
:-सामान्य जाति तीनों विषयों में 5 फीसदी अंक, एग्रीगेट -20 फीसदी 
:-ओबीसी-नॉन क्रीमीलेयर ओबीसी तीनों विषयों में 4.5 फीसदी अंक, एग्रीगेट - 18 फीसदी 
:-एससी, एसटी, शारिरीक विकलांग तीनों विषयों में 2.5 फीसदी अंक और एग्रीगेट- 10 फीसदी। 

निर्धारित योग्यता के बाद ही आप प्रवेश की पात्रता रख सकते हैं।

कैसे होगा चयन-
आईआईएसटी में प्रवेश के लिए चयन मुख्यत: सीबीएसई द्वारा तैयार की जाने वाली ऑल इंडिया रैंक के आधार पर होगा लेकिन प्रवेश के लिए जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई किया होना जरूरी है। आवेदन उन्हीं का मान्य होगा जिन्होंने आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रजिस्ट्रेशन भी करवाया होगा। इसके बाद आईआईएसटी अपनी रैंक लिस्ट तैयार करेगा और आवेदकों को काउंसलिंग के लिए बुलाया जाएगा।

कैसे करें आवेदन-
ऑनलाइन आवेदन के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.आईआईएसटी.एसी.आईएन पोर्टल पर रजिस्टे्रशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन के समय आपके पास आईआईटी मेन्स और एडवांस दोनों का रोल नंबर होना जरूरी है। यहां अपनी डिटेल्स भरने के बाद चालान का प्रिंट आउट लें। फॉर्म भरने के अगले दिन एसबीआई या यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में चालान के जरिए आवेदन शुल्क जमा कराएं। चालान की डिटेल्स एप्लीकेशन वाले पोर्टल पर जाकर डालें और संस्थान की कॉपी पीडीएफ या जेपीईजी फॉर्मेट में स्कैन करके अपलोड कर दें।

मिलेगी आर्थिक मदद-
आईआईएसटी में बीटेक के दौरान स्टूडेंट्स की पढ़ाई, हॉस्टल और मेडिकल कवर का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है। यदि स्टूडेंट यहां पढ़ने के दौरान ग्रेड प्वाइंट एवरेज स्केल पर 10 में से 7.5 प्वाइंट लाने में विफल रहता है तो यह आर्थिक मदद बंद की जा सकती है। यहां से बीटेक करने वाले स्टूडेंट्स को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अंतरिक्ष विभाग से जुड़ने के अवसर मिलता है। देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के भी अवसर हैं।

अगर आप भी अंतरिक्ष को गहराई से समझना चाहते हैं तो आप स्पेस साइंस और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर सकते हैं। बीटेक प्रोग्राम्स चलाया जाता है। बारहवीं के बाद आप इसमें प्रवेश ले सकते हैं। आपके पास अपने सपनों को पाने का और उन्हें साकार करने का सुनहरा मौका है।

गौर करें कि आईआईएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगामी 8 जून, 2014 को शुरू होनी है और रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 7 जुलाई, 2014 रहने की संभावना है
कैसे करें आवेदन
आईआईएसटी के एमटेक या एमएस प्रोग्राम में आवेदन के लिए आप http://www.iist.ac.in/admissions/postgraduate/regularपर जाएं। यहां ऑनलाइन एप्लीकेशन का लिंक दिया है। यहां अपना फॉर्म भरें, फोटो, साइन आदि अपलोड करें। इसे जमा करवाने के बाद एक रजिस्ट्रेशन नंबर व लॉगइन पासवर्ड मिलेगा। इसकी मदद से अब कोर्स रजिस्टे्रशन करवाएं। फिर चालान से एप्लीकेशन फीस जमा करवाएं और फिर मुहर लगे चालान की कॉपी वेबसाइट पर अपलोड करें। ऑनलाइन आवेदन आठ मई तक करें। एप्लीकेशन फीस 14 मई 2015 तक भरी जा सकती है। आवेदन और भुगतान समय रहते कर दें

जंगलों में एडवेंचर के साथ संवारें करियर


अगर आपको वन क्षेत्र और जंगली जीव-जन्तुओं से प्यार है, वन क्षेत्र में समय बिताने में आपको आनंद आता है तो आप इस क्षेत्र में अपना बेहतर भविष्य बना सकते हैं। वाइल्ड लाइफ कन्जर्वेशनिस्ट बन कर आप अपनेकरियर को नए आयाम दे सकते हैं।
कैसे पहुंचें मुकाम परकिसी भी बायोलॉजिकल क्षेत्र में बैचलर के बाद एन्वायर्नमेंटल साइंस या वाइल्ड लाइफ बायोलॉजी तथा कन्जर्वेशन या इकोलॉजी में मास्टर्स करना अच्छा रहेगा। इस क्षेत्र में इस विशेषज्ञता के साथ आप अर्थपूर्ण रिसर्च वर्क कर पाएंगे।
योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से विज्ञान विषयों के साथ स्नातक डिग्री अनिवार्य है।
कहां से करें कोर्स वाइल्ड लाइफ में मास्टर डिग्री या पीएचडी कर सकते हैं। वाइल्ड लाइफ कन्जर्वेशन में मास्टर डिग्री कराने वाले दो संस्थान हैं। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तथा नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज। इन्हें वाइल्ड लाइफ कन्जर्वेशन सोसायटी तथा सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ स्टडीज का सहयोग प्राप्त है।  
पारिश्रमिकएंट्री लेवल पर रिसर्चर या जूनियर रिसर्च फेलो को 9 से 12 हजार प्रतिमाह के बीच पारिश्रमिक मिलता है। पोस्ट डॉक्टोरल छात्रों/सीनियर रिसर्च फेलो को प्रतिमाह 12 से 15 हजार रुपए मिलते हैं। असिस्टेंट रिसर्चर को करीब 20,000 रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। जैसे-जैसे आप अनुभव हासिल करते जाएंगे, वेतन भी उसी के साथ बढ़ता जाएगा।
फायदे और नुकसानपर्याप्त संतुष्टि मिलती है, क्योंकि जो पढ़ रहे हैं, वही काम करना काफी रोचक होता है।
दुनिया के बेहतरीन इलाकों में जाने का मौका मिलता है।
भावी पीढ़ी के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हैं और स्वच्छ तथा स्वस्थ पर्यावरण में योगदान देते हैं।
कार्य की लंबी अवधि।
दक्षताबायोलॉजी, मैथमेटिक्स तथा स्टेटिस्टिक्स में मजबूत पकड़ हो।
वन्यजीवन के प्रति आकर्षण हो।
बेहतर कम्युनिकेशन स्किल व आंतरिक दक्षता हो।
कंप्यूटर पर काम करने की जानकारी हो।
कार्य स्वरूपफील्ड साइट पर पहुंच कर डेटा एकत्र करना।
फील्ड साइट की भौगोलिक स्थिति के मुताबिक ऊबड़-खाबड़ और मुश्किल रास्तों पर चढ़ाई या ड्राइव करना होता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों से मिलना और बातचीत करना।
साइंटिफिक पेपर, टेक्निकल रिपोर्ट या पॉपुलर ऑर्टिकल्स का काम पूरा करना या अनुदान या वित्तीय सहायता के लिए लिखना तथा नीति निर्माताओं या कॉलेबोरेटर्स से मुलाकात करना।
वाइल्ड लाइफ में आज काफी संभावना है। इस क्षेत्र में पहले के मुकाबले अब वेतनमान काफी बढ़ चुके हैं। साथ ही यह काफी मजेदार फील्ड है, जिसमें काम करने में मजा आएगा।
बेलिंडा राइट, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी ऑफ इंडिया
अगर आपको वन क्षेत्र और जंगली जीव-जन्तुओं से प्यार है, वन क्षेत्र में समय बिताने में आपको आनंद आता है तो आप इस क्षेत्र में अपना बेहतर भविष्य बना सकते हैं। वाइल्ड लाइफ कन्जर्वेशनिस्ट बन कर आप अपनेकरियर को नए आयाम दे सकते हैं।
दक्षता
बायोलॉजी, मैथमेटिक्स तथा स्टेटिस्टिक्स में मजबूत पकड़ हो।
वन्यजीवन के प्रति आकर्षण हो।
बेहतर कम्युनिकेशन स्किल व आंतरिक दक्षता हो।
कंप्यूटर पर काम करने की जानकारी हो।
कार्य स्वरूप
फील्ड साइट पर पहुंच कर डेटा एकत्र करना।
फील्ड साइट की भौगोलिक स्थिति के मुताबिक ऊबड़-खाबड़ और मुश्किल रास्तों पर चढ़ाई या ड्राइव करना होता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों से मिलना और बातचीत करना।
साइंटिफिक पेपर, टेक्निकल रिपोर्ट या पॉपुलर ऑर्टिकल्स का काम पूरा करना या अनुदान या वित्तीय सहायता के लिए लिखना तथा नीति निर्माताओं या कॉलेबोरेटर्स से मुलाकात करना।
वाइल्ड लाइफ में आज काफी संभावना है। इस क्षेत्र में पहले के मुकाबले अब वेतनमान काफी बढ़ चुके हैं। साथ ही यह काफी मजेदार फील्ड है, जिसमें काम करने में मजा आएगा।
बेलिंडा राइट, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी ऑफ इंडिया

कैसे पहुंचें मुकाम परकिसी भी बायोलॉजिकल क्षेत्र में बैचलर के बाद एन्वायर्नमेंटल साइंस या वाइल्ड लाइफ बायोलॉजी तथा कन्जर्वेशन या इकोलॉजी में मास्टर्स करना अच्छा रहेगा। इस क्षेत्र में इस विशेषज्ञता के साथ आप अर्थपूर्ण रिसर्च वर्क कर पाएंगे।
प्रमुख संस्थान
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया
पोस्ट बॉक्स-18, चंद्रबनी, देहरादून
उत्तराखंड
 http://www.wii.gov.in
नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, जीके वीके बेल्लारी रोड, बेंगलुरू
www.ncbs.res.in
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस,
बेंग्लुरू, 560012
 www.iisc.ernet.in
नेचर कंजरवेशन फाउंडेशन
गोकुलम पार्क, मैसूर-570002
http://ncf-india.org

Tuesday, June 16, 2015

Oral Healthके केयर-टेकर

फो‌र्ब्स ने डेंटल हाइजीनिस्ट को टॉप टेन की लिस्ट में रखा है। आने वाले समय में इसकी जॉब ग्रोथ 38 परसेंट तक रहेगी और जॉब डिमांड ग्लोबल रहेगी..
डेंटल हाइजीनिस्ट ओरल हेल्थ की देखभाल का स्पेशलिस्ट होता है। अगर आप इस फील्ड में जाकर करियर बनाना चाहते हैं, तो चांस कम नहीं हैं। अमेरिका ही नहीं, इंटरनेशनल लेवल पर सबसे ज्यादा जॉब इसी फील्ड में माने जा रहे हैं।
सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स
डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली से रिलेटेड कुछ कॉलेजों से डेंटल मैकेनिक और डेंटल हाइजीन से जुडे सर्टिफिकेट या डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। फॉरेन के मुकाबले इंडिया में अभी इसमें अटेंशन कम है, लेकिन ग्रोथ को देखते हुए अब लोग इस ओर रुख कर रहे हैं। अमेरिका, ऑस्टेलिया, यूके जैसे कंट्रीज में डेंटल हाइजीन को अच्छा करियर माना जाता है।
वर्क प्रोफाइल
डेंटल हाइजीनिस्ट डेंटिस्ट की हेल्प के साथ दांतों की सफाई, छिलाई, एक्सरे लेना तथा उन्हें डेवलप करना, इंस्टूमेंट्स को स्टरलाइज करना, डेंटल क्लीनिंग, स्केलिंग और पॉलिशिंग, डेंटल इंप्रेशन लेना आदि करता है। यह पेशेंट की मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड प्रेशर और दूसरे जरूरी डिटेल भी चेक करता है।
स्किल्स
इसके लिए फिट एंड फाइन, गुड हेल्थ, हार्डवर्कर, चीजों को ध्यान से समझने वाला होना चाहिए। एक अच्छा डेंटल हाइजीनिस्ट ट्रीटमेंट के दौरान पेशेंट से कम्युनिकेशन करते हुए उन्हें पेन का अहसास नहीं होने देता। इसके पास साइंटिफिक नॉलेज के अलावा आर्टिस्टिक अप्रोच होना जरूरी है। यह एक तरह का साइंटिस्ट है, जो सभी तरह के मुंह के रोगों की रोकथाम, पहचान तथा ट्रीटमेंट द्वारा पेशेंट की हेल्प करता है।
एंप्लायमेंट ऑप्शंस
बदलती लाइफ स्टाइल में लोगों का खानपान बदल गया है। कम उम्र में ही लोगों को डेंटल प्रॉब्लम होने लगी है, जिसका ट्रीटमेंट कराने के लिए हम डेंटिस्ट के पास जाते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार स्थिति यह है कि पॉपुलेशन के एवरेज रेश्यो में जितने डेंटिस्ट हाइजीनिस्ट की जरूरत है, उससे कहीं कम हैं। इस लिहाज से डेंटिस्ट के लिए हॉस्पिटल्स के डेंटल ट्रीटमेंट डिपार्टमेंट के अलावा प्राइवेट सेक्टर में भी काफी स्कोप बना हुआ है। वे एजुकेशन सेक्टर में भी किस्मत आजमा सकते हैं। वहां भी उनके लिए ऑप्शंस कम नहीं हैं। इसके अलावा नर्सिग होम्स, रिसर्च डिपार्टमेंट्स, फॉर्मास्युटिकल कंपनियों में भी करियर बना सकते हैं। वे डेंटल केयर से जुडी एजेंसीज, डिफेंस में भी वर्क कर सकते हैं। इसके अलावा चाहें तो कॉस्मेटिक डेंटिस्ट बनकर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट का खुला ऑप्शन भी चुन सकते हैं। ओरल कैंसर इंटरनेशनल लेवल पर एक बडा खतरा बनकर सामने आ रहा है। ऐसे में ओरल हाइजीन पर स्पॉटलाइट पहले से कहीं अधिक हो गई है। डेंटल साइंस की तरफ रुझान होने की वजह से स्किलफुल हैंडलिंग और एक्युरेसी इस करियर में आपके लिए काफी हेल्पफुल हो सकते हैं। इंडिया में इसकी पढाई अधिकतर डेंटल कॉलेजेज में ही कराई जा रही है। कुछ इंस्टीट्यूट्स अलग से कोर्स भी कंडक्ट करा रहे हैं।
फ्यूचर है ब्राइट
इंडिया में डेंटल हाइजीनिस्ट नया करियर है। इस कारण इसके बढने के चांसेज सबसे ज्यादा हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि आज हर दूसरा व्यक्ति डेंटल डिजीज से ग्रसित है और उचित देखभाल के अभाव में उनकी डेंटल प्रॉब्लम्स बढ रही हैं। सरकारी और निजी प्रयास से अब जागरुकता बढ रही है और डेंटल डिजीज को भी लोग सीरियस लेने लगे हैं। इसके अलावा, इंडिया में ऐसी क्लास भी है, जिसके पास पैसे की कमी नहीं है। उनकी लाइफ स्टाइल भी बिंदास है। स्मार्ट दिखने के लिए काफी संख्या में ऐसे लोग डेंटल हाइजीनिस्ट के पास आ रहे हैं। अगर आप कुछ दिन एक्सपीरियंस लेकर खुद का क्लीनिक खोलते हैं और बेहतर वर्क से पेशेंट को सटिस्फाइड करते हैं, तो आपको दूसरे करियर फील्ड की अपेक्षा आगे बढने के चांसेज सबसे ज्यादा हैं। आने वाले सालों में इस फील्ड काफी स्कोप है, क्योंकि जिस स्पीड से लाइफ स्टाइल चेंज हो रही हैं, उसी स्पीड से डेंटल प्रॉब्लम्स भी बढ रही हैं।
Finance की प्लानिंग
फाइनेंस सेक्टर में अगले 10 सालों में जॉब ग्रोथ रेट 32 परसेंट तक बढने की उम्मीद है। ऐसे में करियर के लिहाज से यह बेस्ट ऑप्शन है..
ग्लोबलाजेशन से इंडियन इकोनॉमी में ही चेंज नहीं आया है, बल्कि इंडियन कॉरपोरेट सेक्टर ही बदल गया है। नई-नई जॉब सामने आ रही हैं। अगर आप भी कॉरपोरेट सेक्टर में करियर स्टैब्लिश करना चाहते हैं, तो फाइनेंशियल एक्सपर्ट बन शुरुआत कर सकते हैं। यहां करियर बनाने के कई ऑप्शन हैं। इसका कोर्स करके कहीं भी जॉब के लिए एडजस्ट हुआ जा सकता है। इसमें डिग्री या पीजी कोर्स कर लें तो करियर की राह आसानी से सहज हो जाती है।
पीजी डिग्री तक
फाइनेंशियल प्लानर बनने के लिए डिप्लोमा से लेकर मास्टर डिग्री तक के कोर्स हैं। इन कोर्सेज में फाइनेंशियल अकाउंटिंग और इकोनॉमिक्स पर मेन फोकस रहता है। इन कोर्सेज से चार्टर्ड अकाउंटेंट, कॉस्ट अकाउंटेंट, सीएस, एमबीए प्रोफेशनल्स को एक्स्ट्रा बेनिफिट मिलता है।
एलिजिबिलिटी
कॉमर्स बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स के लिए यह गोल्डन फील्ड है, लेकिन अन्य स्ट्रीम के स्टूडेंट्स भी इसमें करियर बना सकते हैं। एंट्री के लिए मिनिमम क्वॉलिफिकेशन किसी भी स्ट्रीम में 50 परसेंट मा‌र्क्स के साथ हायर सेकेंडरी पास होना जरूरी है। कोर्स में एंट्री मेरिट या एंट्रेंस बेस पर दी जाती है।
वर्क प्रोफाइल
फाइनेंशियल सर्विस से जुडे इस प्रोफेशनल का मेन वर्क ऑर्गेनाइजेशन के लिए मनी क्रिएट करना, कैश जनरेट करना और किसी भी इनवेस्टमेंट पर अधिक से अधिक रिटर्न दिलाना है। इसके साथ ही आगे की फाइनेंशियल प्लानिंग भी ये करते हैं। ये किसी भी कंपनी की बैलेंसशीट को एनालाइज करते हैं, ताकि फ्यूचर के लिए फाइनेंस प्लानिंग की जा सके।
जॉब आप्शंस
इंडिया दुनिया की तीसरी सबसे तेजी से बढती हुई मार्केट है। अर्नस्ट एंड यंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया आईपीओ के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बडा कंट्री बन गया है। म्युचुअल फंड में भी इसकी ग्रोथ सराहनीय है और आने वाले तीन सालों में इस सेक्टर में 30 परसेंट की ग्रोथ देखी जा सकती है। फो‌र्ब्स के टॉप 50 माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूट्स में इंडिया के सात इंस्टीट्यूट जगह बनाने में सक्सेस हुए हैं। फाइनेंशियल आउटसोर्सिग सर्विस के बढने से टैलेंटेड प्रोफेशनल्स की उपलब्धता, ऑफशोर लोकेशन, बेहतर आउटसोर्सिग स्ट्रेटेजी आदि सभी में इजाफा हुआ है। हाल के वर्षो में जिस तरह से फाइनेंशियल केपीओ सेक्टर बढा है, उसने फाइनेंशियल एक्सप‌र्ट्स के लिए अपॉच्र्युनिटीज के नए रास्ते खोल दिए हैं।
मेन इंस्टीट्यूट्स
- दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली - अलीगढ मुस्लिम यूनिवíसटी, अलीगढ
- द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट ऑफ इंडिया, दिल्ली
- देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, इंदौर
- कुरुक्षेत्र यूनिवíसटी, हरियाणा
-यूनिवíसटी ऑफ लखनऊ, लखनऊ
जॉब सीन
इसके प्रोफेशनल्स को कारपोरेट फाइनेंस, इंटरनेशनल फाइनेंस, मर्चेट बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, कैपिटल एंड मनी मार्केट, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट, स्टॉक ब्रोकिंग, शेयर, रजिस्ट्री, क्रेडिट रेटिंग आदि में जॉब मिलती है। गवर्नमेंट बैंक्स के अलावा प्राइवेट और फॉरेन बैंक्स की एंट्री होने से फाइनेंशियल एक्सपर्ट, फाइनेंशियल एनालिस्ट, फाइनेंशियल प्लानर आदि की डिमांड बढी है। एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, विदेशी बैंक जैसे- आरबीएस, सिटीगोल्ड वेल्थ मैनेजमेंट, सिटी बैंक, डच बैंक, एचएसबीसी आदि में बहुत ऑप्शंस हैं। इनवेस्टमेंट फर्म जैसे- डीएसपी मैरील लाइंच, कोटक सिक्योरिटीज, आनंद राठी इंवेस्टमेंट और जे.एम. मार्गन स्टेनली में भी जॉब के अवसर हैं। इस फील्ड में एक बार पैर जम जाएं, तो मनी प्रॉब्लम अपने आप खत्म हो जाती है। सैलरी क्वॉलिटी वर्क, एक्सपीरियंस और इंडस्ट्री पर डिपेंड करती है।