Tuesday, April 12, 2022

जेनेटिक इंजीनियरिंग

मेडिकल साइंस एक जरूरी फील्ड है, जो टेक्नोलॉजी में काफी आगे है। जब रिसर्चर ने बायोलॉजी को प्रोग्रेसिव टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा, तो इसने बायोटेक्नोलॉजी के व्यापक क्षेत्र को बनाया और मेडिकल साइंस में क्रांति ला दी। नए उभरते क्षेत्रों के साथ, बायोलॉजी कई ब्रांच में उभरा है। बायोलॉजी की ऐसी ही एक ब्रांच है, जेनेटिक इंजीनियरिंग है जो बायोटेक्नोलॉजी और जेनेटिक के साइंस को मिक्स करती है। यह किसी विशेष जीव के जीन के सीधे हेरफेर की सुविधा के लिए बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग करता है। 
यदि आप इस बारे में उत्सुक हैं कि कैसे जेनेटिक और टेक्नोलॉजी हमारे मेडिकल साइंस को देखने के तरीके में क्रांति ला सकती है, तो आप दुनिया भर में ऑफर किए जाने वाले कई जेनेटिक इंजीनियरिंग कोर्स में से चुन सकते हैं।

जेनेटिक इंजीनियरिंग कोर्स का सिलेबस (Syllabus of Genetic Engineering Courses)

बायोकेमेस्ट्री (Biochemistry)
बायोकेमेस्ट्री को बायोलॉजी की ब्रांच के रूप में रिफर्ड (referred) किया जा सकता है जो किसी भी बायोलॉजिकल प्रोसेस के केमिकल एसपेक्टस से संबंधित है। ऑर्गेनिक मटेरियल के बजाय सिंथेटिक के आ जाने के कारण कंटेम्पररी रिसर्च में बायोकेमेस्टी साइंस की एक जरूरी ब्रांच है। इस बदलाव ने हेल्थ सेक्टर के साथ-साथ माइक्रोबायोलॉजी सेक्टर को भी प्रभावित किया है और बायोकेमेस्ट्री के क्षेत्र में महत्व (significance) लाया है।

इम्यूनोलॉजी (Immunology)
इम्यूनोलॉजी एक जीव की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) का अध्ययन है और यह कैसे परजीवियों (parasites) और अन्य रोग पैदा करने वाले जीवों (disease-causing organisms) से अपनी रक्षा करता है। इम्यूनोलॉजी माइक्रोबायोलॉजी का एक अनिवार्य हिस्सा है, क्योंकि कुछ घातक बीमारियां जिससे मानव शरीर ग्रस्त हैं, बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीवों के कारण होती हैं। इम्यूनोलॉजी इन जीवों से होने वाले नुकसान का पता करने में मदद करती है और इन बीमारियों का इलाज विकसित करने और भविष्य में उन्हें रोकने पर काम करती है।
 
बायोइनफॉरमैटिक्स (Bioinformatics)
यह एक अंतःविषय (interdisciplinary) सब्जेक्ट है जो जैविक डेटा को समझने के लिए जीव विज्ञान, कंप्यूटर एप्लीकेशन और मैथ्स को जोड़ता है। इस क्षेत्र का उपयोग मुख्य रूप से जैविक डेटा का आकलन करने और रिसर्च करने के लिए वैध (valid) और आवश्यक (necessary) एलिमेंटस की पहचान करने के लिए किया जाता है। 

नैनोटेक्नोलॉजी (Nanotechnology)
नैनोटेक्नोलॉजी एक अन्य अंतःविषय (interdisciplinary) फील्ड है जो जेनेटिक इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और आणविक (molecular) या परमाणु पैमाने (atomic scale) पर पदार्थ के हेरफेर (manipulation) से संबंधित है। हेल्थ केयर में शामिल विभिन्न प्रक्रियाओं को देखने के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग में इस क्षेत्र का उपयोग किया जाता है। नैनो टेक्नोलॉजी और जेनेटिक इंजीनियरिंग दो प्रमुख क्षेत्र हैं जिन्होंने हेल्थ सेक्टर में सुधार के लिए गहन रूप से काम किया है।

जेनेटिक इंजीनियरिंग कोर्स के लिए योग्यता (Genetic Engineering Courses: Eligibility Criteria)
जेनेटिक इंजीनियरिंग में प्रोफेशनल डिग्री हासिल करने के इच्छुक व्यक्ति फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स व बायोलॉजी के साथ अपने 10 + 2 साइंस के बाद बीटेक कोर्स कर सकते हैं। जेनेटिक इंजीनियरिंग में बीटेक में एडमिशन विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा इन-हाउस आयोजित प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से या देश भर में आईआईटी / एनआईटी और सीएफटीआई के लिए जेईई जैसी राष्ट्रीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के अंकों के माध्यम से किया जाता है।
 
भारत में टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज (Top Genetic Engineering Colleges in India)
  1. एसआरएम विश्वविद्यालय चेन्नई, तमिलनाडु
  2. भारत विश्वविद्यालय चेन्नई, तमिलनाडु
  3. आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना, बिहार
  4. जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र, बैंगलोर, कर्नाटक
  5. महात्मा ज्योति राव फूल विश्वविद्यालय, जयपुर, राजस्थान
  6. भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई, तमिलनाडु
  7. भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर, कर्नाटक
  8. कुवेम्पु विश्वविद्यालय, कर्नाटक
  9. मदुरै कामराज विश्वविद्यालय, तमिलनाडु
  10. इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी स्कूल (सेट), शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा


Friday, April 8, 2022

ऑक्यूपेशनल थेरेपी में करियर

ऑक्यूपेशनल थेरेपी के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। आइए जानते हैं इस क्षेत्र के बारे में-

बदलती जीवनशैली और काम के सिलसिले में भागमभाग के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर कई तरह के प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहे हैं, जिनमें शारीरिक व मानसिक अशक्तता प्रमुखता से शामिल हैं। इनसे निजात पाने के लिए उन्हें एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ रही है। संबंधित एक्सपर्ट विभिन्न विधियों से इलाज करते हुए उन्हें समस्या से मुक्ति दिलाते हैं। साथ ही उन्हें मानसिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं। कई बार डॉंक्टर के देख लेने के बाद इनकी जरूरत पड़ती है तो कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें डॉंक्टर के देखने से पहले ही इनकी सेवा ली जाती है। खासकर मेडिकल और ट्रॉमा सेंटर इमरजेंसी व फ्रैक्चर मैनेजमेंट में तो इनकी विशेष जरूरत पड़ती है। यह पूरा ताना-बाना ऑक्यूपेशनल थेरेपी के अंतर्गत बुना जाता है। इससे जुड़े प्रोफेशनल्स को ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट नाम दिया गया है। इनका काम फिजियोथेरेपिस्ट से मिलता-जुलता है। यही कारण है कि मेडिकल व फिटनेस एरिया में इनकी भारी मांग है।

ऑक्यूपेशनल थेरेपी की जरूरत
ऑक्यूपेशनल थेरेपी का सीधा संबंध पैरामेडिकल से है। इसके अंतर्गत शारीरिक व विशेष मरीजों की अशक्तता का इलाज किया जाता है, जिसमें न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के उपचार से लेकर अन्य कई तरह के शारीरिक व्यायाम कराए जाते हैं। कई बार मानसिक विकार आ जाने पर कागज-पेंसिल के सहारे मरीजों को समझाया जाता है। ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट मरीजों का पूरा रिकॉर्ड अपने पास रखते हैं। इसमें हर आयु-वर्ग के मरीज होते हैं। यह सबसे तेजी से उभरते मेडिसिन के क्षेत्रों में से एक है। इसमें शारीरिक व्यायाम अथवा उपकरणों के जरिए कई जटिल रोगों का इलाज किया जाता है। शारीरिक रूप से अशक्त होने या खिलाडियों में आर्थराइटिस व न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर आने पर ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट की मदद ली जाती है। यही कारण है कि प्रोफेशनल्स को ह्यूमन एनाटमी, हड्डियों की संरचना, मसल्स एवं नर्वस सिस्टम आदि की जानकारी रखनी पड़ती है

बारहवीं के बाद मिलेगा दाखिला
ऑक्यूपेशनल थेरेपी से संबंधित बैचलर, मास्टर और डिप्लोमा और डॉक्टरल कोर्स मौजूद हैं। यदि छात्र बैचलर कोर्स में प्रवेश लेना चाहता है तो उसका फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी ग्रुप के साथ बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण होना  जरूरी है। बैचलर के बाद मास्टर और डॉंक्टरल प्रोग्राम में दाखिला मिल सकता है। कोर्स के बाद छह माह की इंटर्नशिप की व्यवस्था है। कई संस्थान अपने यहां प्रवेश देने के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन कराते हैं, जिसमें सफल होने के बाद विभिन्न कोर्सों में दाखिला मिलता है, जबकि कई संस्थान मेरिट के आधार पर प्रवेश देते हैं।

कौन-कौन से हैं कोर्स
बीएससी इन ऑक्यूपेशनल थेरेपी (ऑनर्स)
बीएससी इन ऑक्यूपेशनल थेरेपी 
बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी 
डिप्लोमा इन ऑक्यूपेशनल थेरेपी 
एमएससी इन फिजिकल एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी 
मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी

कोर्स से जुड़ी जानकारी
इसमें छात्रों को थ्योरी व प्रैक्टिकल पर समान रूप से अपना फोकस रखना पड़ता है। कोर्स के दौरान ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट को कई क्लिनिकल व पैरा क्लिनिकल विषयों का अध्ययन करना होता है। इसमें मुख्य रूप से एनाटमी, फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, मेडिसिन एवं सर्जरी (मुख्यत: डायग्नोस्टिक) आदि विषय शामिल हैं। इसके अलावा इन्हें ऑर्थपीडिक्स, प्लास्टिक सर्जरी, हैंड सर्जरी, रिमैटोलॉजी, साइकाइट्री आदि के बारे में भी थोड़ी-बहुत जानकारी दी जाती है।

आवश्यक स्किल्स
यह एक ऐसा प्रोफेशन है, जिसमें छात्रों को संवेदनशील होने से लेकर वैज्ञानिक नजरिया तक अपनाना पड़ता है, क्योंकि इसमें उन्हें मरीजों के दुख को समझ कर उसके हिसाब से उपचार करने की जरूरत होती है। अच्छी कम्युनिकेशन स्किल, टीम वर्क, मेहनती, रिस्क उठाने और दबाव को झेलने जैसे गुण इस प्रोफेशन के लिए बहुत जरूरी हैं। अधिकांश काम मेडिकल उपकरणों के सहारे होता है, इसके लिए उनका ज्ञान बहुत जरूरी है।

सेलरी
ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट को काफी आकर्षक सेलरी मिलती है। कोर्स समाप्ति के बाद उन्हें शुरुआती दौर में 15-20 हजार रुपए प्रतिमाह आसानी से मिल जाते हैं, जबकि दो-तीन साल के अनुभव के बाद यह राशि 30-35 हजार रुपए तक पहुंच जाती है। प्राइवेट सेक्टर में सरकारी अस्पतालों की अपेक्षा ज्यादा सेलरी मिलती है। यदि ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट स्वतंत्र रूप से या अपना सेंटर खोल कर काम कर रहे हैं तो उनके लिए आमदनी की कोई निश्चित सीमा नहीं होती। वे 50 हजार से लेकर एक लाख रुपए प्रतिमाह तक कमा सकते हैं।

रोजगार के पर्याप्त अवसर
रोजगार की दृष्टि से यह काफी विस्तृत क्षेत्र है। यदि छात्र ने गंभीरतापूर्वक कोर्स किया है तो रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उसे सरकारी अथवा प्राइवेट अस्पताल में नौकरी मिल जाएगी। सबसे ज्यादा जॉब कम्युनिटी मेडिकल हेल्थ सेंटर, डिटेंशन सेंटर, हॉस्पिटल, पॉलीक्लिनिक, साइक्राइटिक इंस्टीटय़ूशन, रिहैबिलिटेशन सेंटर, स्पेशल स्कूल, स्पोर्ट्स टीम में सृजित होती हैं। एनजीओ भी इसके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं। इसमें एक-तिहाई थेरेपिस्ट पार्ट टाइम को तरजीह देते हैं। यदि वे किसी सेंटर अथवा संस्था से जुड़ कर काम नहीं करना चाहते तो स्वतंत्र रूप से काम करने के अलावा अपना सेंटर भी खोल सकते हैं।

फायदे एवं नुकसान
सेवा व समर्पण की भावना
हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर
काम के बाद आत्मसंतुष्टि
घंटों काम करने से थकान की स्थिति
अपेक्षित सफलता न मिलने पर कष्ट
अपने काम के लिए नेटवर्किंग जरूरी

एक्सपर्ट व्यू
चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा छात्रों को

अन्य क्षेत्रों की भांति मेडिकल क्षेत्र भी तेजी से दौड़ रहा है। उसमें कदम-कदम पर रोजगार के अवसर भी सामने आ रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट के साथ है। आज युवाओं के लिए यह पसंदीदा क्षेत्र बन चुका है और हर साल इसमें छात्रों की भीड़ बढ़ती जा रही है। भले ही इस क्षेत्र में ढेरों विकल्प हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कोर्स खत्म होने के बाद नौकरी तलाशने से लेकर अपनी यूनिट स्थापित करने तक में छात्रों की खुद की मेहनत रंग लाती है, इसलिए छात्र अपनी मंजिल खुद तय करें तो फायदेमंद होगा। इसमें थ्योरी व प्रैक्टिकल दोनों की समान जानकारी दी जाती है, क्योंकि दोनों का अपना महत्व है। जो चीजें क्लास में पढ़ाई जाती हैं, लैब में उन्हीं का प्रैक्टिकल कराया जाता है। इस पेशे से संबंधित तकनीक व उपकरण दिन-प्रतिदिन बदलते जा रहे हैं। बाजार में बने रहने के लिए छात्रों को उन नई तकनीकों व आधुनिक उपकरणों से अपडेट रहना होगा।       
- डॉ. वीपी सिंह (डायरेक्टर)
दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, दिल्ली

इन पदों पर मिलेगा काम
ऑक्यूपेशनल थेरेपी टेक्निशियन
कंसल्टेंट
ऑक्यूपेशनल थेरेपी नर्स
रिहैबिलिटेशन थेरेपी  
असिस्टेंट
स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट
स्कूल टीचर
लैब टेक्निशियन
मेडिकल रिकॉर्ड 
टेक्निशियन
ओटी इंचार्ज

प्रमुख संस्थान
नेशनल इंस्टीटय़ूट फॉर द ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड, कोलकाता
वेबसाइट
www.niohkol.nic.in
पं. दीनदयाल इंस्टीटय़ूट फॉर फिजिकली हैंडिकैप्ड, नई दिल्ली
वेबसाइट
www.iphnewdelhi.in
ऑल इंडिया इंस्टीटय़ूट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन, मुंबई
वेबसाइट
www.aiipmr.gov.in
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लौर
वेबसाइट-
 www.cmch-vellore.edu
केएमसीएच कॉलेज ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी, कोयम्बटूर वेबसाइटwww.kmchcot.ac.in
संतोष कॉलेज ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी, चेन्नई
ईमेल
info@santoshhospital.org
यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास, चेन्नई
वेबसाइट-
 www.unom.ac.in

Wednesday, April 6, 2022

बायोटेक में करियर

अगर आप बायोटेक करके अपने करियर को उम्दा बनाने की सोच रहे हैं, तो आज हम आपको बायोटेक्नोलॉजी की डिग्री लेने के बाद कौन-कौन से क्षेत्रों में आपकी बायोटेक की डिग्री को प्राथमिकता दी जाएगी, इसकी पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।

ये समय ऐसा है जब देश के युवाओं के बीच अपने करियर को सेट करने की होड़ चल रही है। ऐसे में अपने करियर में सही गाइडलाइंस और कोर्सेस का चुनाव करना बेहद ही अहम है। 12वीं के बाद आप कौन से क्षेत्र में जाना चाहते हैं यह पहले से तय न करने वाले युवाओं की तादाद अच्छी खासी पाई जाती है। ऐसे में अगर आप बायोटेक करके अपने करियर को उम्दा बनाने की सोच रहे हैं, तो आज हम आपको बायोटेक्नोलॉजी की डिग्री लेने के बाद कौन-कौन से क्षेत्रों में आपकी बायोटेक की डिग्री को प्राथमिकता दी जाएगी, इसकी पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।

अगर आपका सवाल है बायोटेक क्या है?
बायोटेक शब्द बायोटेक्नोलॉजी का शॉर्ट फॉर्म है। जिसमें जैव प्रौद्योगिकी अर्थात जीवों से प्राप्त होने वाले जीवाश्म पदार्थों का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के उपयोगी उत्पादों का निर्माण किया जाता है। इस टेक्नोलॉजी की उपयोगिता और निर्भरता को आंकते हुए विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जैसे कृषि क्षेत्र, स्वास्थ्य सम्बन्धी, पशुपालन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट इत्यादि।

कैसे हासिल करें बायोटेक की डिग्री?
बायो टेक्नोलॉजी से जुड़ी अलग-अलग शाखाओं के द्वारा डिग्री प्रोग्राम तैयार किए गए हैं। जिनके माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी के अंतर्गत मनचाहा क्षेत्र चुनकर डिग्री प्राप्त की जा सकती है।

डिप्लोमा कोर्स
बायोटेक्नोलॉजी के पाठ्यक्रम की व्यवस्था डिप्लोमा कोर्सेस में भी की गई है। इसमें हाईस्कूल की परीक्षा पास कर कोई भी छात्र प्रवेश के लिए अप्लाई कर सकता है। इसमें 3 वर्ष का डिग्री प्रोग्राम तय किया गया है।

यू०जी० कोर्सेस
अंडर ग्रेजुएशन में जो डिग्री प्रोग्राम बायोटेक्नोलॉजी के लिए बनाए गए हैं, उसमें प्रवेश पाने बाबत प्रवेश पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रावधान रखा गया है। हायर सेकेंडरी की परीक्षा पास करने के उपरांत 4 वर्ष  बायोटेक्नोलॉजी का विधिवत अध्ययन कर बेहतर कैरियर बनाया जा सकता है।

पी०जी० कोर्सेस
ग्रेजुएशन के उपरांत अगर आप एमटेक की डिग्री लेना चाहें तो भारत में 2 वर्ष का पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स रखा गया है।

पीएचडी प्रोग्राम्स
बायोटेक्नोलॉजी में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करने के लिए पीएचडी प्रोग्राम्स बनाए गए हैं। जिसके तहत अलग-अलग जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों को चुनकर रिसर्चर की गहरी भूमिका निभाते हुए गहन शोध और अध्ययन कर पीएचडी की जा सकती है। 

किन क्षेत्रों में पा सकते हैं नौकरी?
दवाओं का बाजार दुनियाभर में तेजी से बढ़ा है। बाजार में दवाओं की उपयोगिता को पूरा करने के लिए फार्मास्यूटिकल कंपनियां भी बुलंदियों पर हैं। दवा कंपनियों में बीटेक,एमटेक की डिग्री धारकों के लिए भारी स्कोप है। प्राइवेट सेक्टर्स या गवर्नमेंट जॉब में बीटेक की मांग बनी रहती है।

बायोटेक्नोलॉजी एक्सपर्ट
बायोटिक की डिग्री प्रोग्राम के तहत हासिल की गई विद्वता आपको बतौर एक्सपर्ट इस फील्ड में जॉब दिला सकती है। लेकिन जैव प्रौद्योगिकी की बारीकियों का गहन अध्ययन और ज्ञान होना भी आवश्यक है। यह युग प्रतिस्पर्धा का है, जहां डिग्री के साथ-साथ पर्सनल व्यूप्वाइंट का अनुभव होना जरूरी है। एक ही वस्तु को आप कितने नजरियों से पेश कर सकते हैं, यह कला आपको आनी चाहिए, जिसकी आवश्यकता बायोटेक्नोलॉजी में है।

ऐसे ही अन्य क्षेत्रों जैसे लैब असिस्टेंट, सेल्स मैनेजमेंट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, जेनेसिस्ट, फार्मोकोलॉजिस्ट, बायो केमिस्ट, बायोटेक रिसर्चर, क्वालिटी कंट्रोलर, जैसे तमाम बायो टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में जॉब की भरमार है।

Thursday, March 31, 2022

पैरामेडिक्स इमरजेंसी एंड हेल्थकेय कोर्स

पूरी दुनिया कोविड-19 (COVID-19) के खिलाफ जंग लड़ रही है. इस लड़ाई में डॉक्टरों के साथ पैरामेडिक्स से जुड़े प्रोफेशनल्स भी फ्रंटलाइन पर हैं. पैरामेडिक्स इमरजेंसी एंड हेल्थकेयर से जुड़े प्रोफेशनल्स होते हैं. इनका काम किसी रोग की पहचान और हर तरीके से मरीज की देखभाल में डॉक्टरों की मदद करना होता है.

इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स डॉक्टर और नर्सों को इफेक्टिव मेडिकल केयर देने में मदद करते हैं. हेल्थकेयर सेक्टर में कई तरह के  पैरामेडिक्स कार्य करते हैं.इनमें इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियंस, लैब टेक्नीशियंस, रेडियोलॉजी टेक्नीशियंस, ऑप्टोमेट्रिस्ट्स, ईसीजी टेक्नीशियंस शामिल हैं. इन दिनों देश में पैरामेडिक्स से जुड़े ट्रेंड प्रोफेशनल्स की काफी डिमांड है. आइए जानते हैं कि इस फील्ड में करियर किस तरह बना सकते हैं-

कैसे बनें पैरामेडिक्स

भारत में पैरामेडिकल कॉलेजों द्वारा पैरामेडिकल साइंसेज के फील्ड में अलग-अलग तरह के कोर्स संचालित किए जाते हैं. ये कोर्स 6 महीने से लेकर 3 साल तक के होते हैं. वहीं कोर्स को पूरा करने में कितना समय लगेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन-सा कोर्स चुनते हैं. इन कॉलेजों में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, बैचलर, मास्टर डिग्री कोर्स तो हैं ही, साथ ही आप चाहें तो पीएचडी प्रोग्राम्स में भी एडमिशन ले सकते हैं.

प्रमुख डिप्लोमा कोर्स

 -डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन मेडिकल एक्स-रे टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन मेडिकल रिकॉर्ड्स टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन डायलेसिस टेक्नोलॉजी
 -डिप्लोमा इन हेल्थ इंस्पेक्टर
 -डिप्लोमा इन डेंटल मैकेनिक्स
 -डिप्लोमा इन डेंटल हाइजिन

नौकरियों के अवसर

कोर्स को पूरा करने के बाद गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स, प्राइवेट क्लिनिक्स, ट्रॉमा सेंटर जैसी जगहों पर जॉब कर सकते हैं. यहां आप मेडिकल प्रोफेशनल्स  मेडिकल लैब टेक्नीशियंस, रेडियोग्राफी टेक्नीशियंस, रेडियोलॉजिस्टर, फिजियोथेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट और ऑडियोलॉजिस्ट्स, डायलिसिस थेरेपिस्ट्स, इमरजेंसी टेक्नीशियंस, इमरजेंसी केयर प्रैक्टिसनर्स, कार्डियक टेक्नीशियंस, रेसपिरेटरी थेरेपिस्ट जैसी पोस्ट पर काम कर सकते हैं. इसके साथ विदेश में भी इन प्रोफेशनल्स की काफी डिमांड होती है.  

क्वालिफिकेशन

किसी भी बोर्ड या यूनिवर्सिटी से साइंस स्ट्रीम ( फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) में 12वीं पास स्टूडेंट्स पैरामेडिक्स से जुड़े कोर्स में दाखिला ले सकते हैं

पर्सनल स्किल्स

-रोटेशनल शिफ्ट में काम करने की क्षमता.
-प्रेजेंस ऑफ माइंड, ताकि इमरजेंसी में सही डिसीजन ले सकें.
-फिजिकली फिट हों. घायल व्यक्ति के साथ उपचार से संबंधित उचित प्रीकॉशन ले सकें.
-पैरा-मेडिसिन फील्ड में काम किया हो और मेडिकल इक्विपमेंट की मेंटेनेंस  की अच्छी समझ हो. साथ ही इमरजेंसी व्हीकल के ऑपरेशन की भी अच्छी समझ होना जरूरी है.
-बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स का होना भी जरूरी है.

सैलरी पैकेज

पैरामेडिक्स फील्ड में सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस ऑर्गनाइजेशन से जुड़े हैं. साथ ही सैलरी आपकी स्किल्स और अनुभव पर भी निर्भर करती है. शुरुआत में सैलरी 3 लाख से 5 लाख रुपए प्रति वर्ष तक होगी, जो एक्सीपीरियंस और आपकी स्किल्स के हिसाब से बढ़ती जाती है.

ऑल इंडिया इंस्टीस्ट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स)
www.aiims.edu
-इग्नू.-इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी
www.ignou.ac.in
-राजीव गांधी पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट
www.rgpcindia.com
-दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट
www.dpmiindia.com
-मौलाना इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज
www.moulanahospital.com

Sunday, March 27, 2022

ऑप्टोमेट्रिस्ट मेंकरियर

क्वालीफिकेशन 
इस कोर्स के लिए न्यूनतम क्वालीफिकेशन है साइंस स्ट्रीम से 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास होना। फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलाजी/ मैथ्स से 12वीं पास स्टूडैंट्स ऑप्टोमेट्री से रिलेटेड कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। ऑप्टोमेट्री में बैचलर डिग्री, बी.एससी. या फिर डिप्लोमा कोर्स के लिए रास्ते खुल जाते हैं। डिप्लोमा कोर्स की अवधि है दो वर्ष और बैचलर डिग्री कोर्स चार वर्ष का होता है। बैचलर डिग्री में तीन साल की पढ़ाई और एक साल की इंटर्नशिप होती है। इंटर्नशिप के तहत स्टूडैंट्स को किसी क्लीनिक या अस्पताल में आंख के डॉक्टर के अधीन काम करना होता है। इसमें एडमिशन आई.सी.ई.टी. एग्जाम में पास होने के बाद ही होता है। आमतौर पर इस कोर्स में आंखों की देखभाल से संबंधित विषयों को पढ़ाया जाता है। साथ ही कस्टमर को किस तरह का चश्मा पहनना है, कॉन्टैक्ट लैंस, लो-विजन डिवाइसेज एवं विजन थैरेपी, आई एक्सरसाइज आदि की ट्रेनिंग दी जाती है।

कार्यक्षेत्र
ऑप्टोमेट्रिस्ट या ऑप्टोमेट्रिक फिजीशियन आंखों की देखभाल और आंखों की जांच में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के रख-रखाव आदि के विशेषज्ञ होते हैं। सर्जरी और दूसरी बड़ी जिम्मेदारी वाले काम उनके जिम्मे नहीं होते हैं। वे सभी उपचार ऑप्टिकल उपकरणों से करते हैं। इसके अलावा वे कलर ब्लाइंडनैस, दूर और नजदीक की कम रोशनी, मायोपिया, जैनेटिक प्रॉब्लम्स का इलाज भी करते हैं। उनका कार्य आंखों की जांच कर चश्मा या लैंस देना तो है ही, साथ ही उन्हें खुद बनाते भी हैं।

 

अवसर
कोर्स कम्प्लीट करने के बाद ऑप्टोमेट्रिस्ट के पास जॉब ऑप्शंस की कोई कमी नहीं है। कोर्स करने के बाद स्टूडैंट्स स्वयं की प्रैक्टिस कर सकते हैं, जैसे आई सर्जन करते हैं। ऑप्थोमोलिस्ट के रूप में किसी शोरूम में काम कर सकते हैं या फिर आंखों के हॉस्पिटल में कार्य की तलाश कर सकते हैं। इसके अलावा, उनके पास ऑप्टिकल लैंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट आदि खोलने का भी ऑप्शन होता है। इस फील्ड से जुड़े प्रोफैशनल्स कॉन्टैक्ट लैंस, लैंस इंडस्ट्री या फिर आई डिपार्टमैंट में काम कर सकते हैं।  कार्पोरेट सैक्टर में आंखों से संबंधित प्रोडक्ट्स बनाने वाली कम्पनी में प्रोफैशनल्स सर्विस एग्जीक्यूटिव के पद पर काम कर सकते हैं। गौरतलब है कि आंखों के डॉक्टरों को ट्रेंड असिस्टैंट की बहुत जरूरत पड़ती है जो कुशल तरीके से चश्मा, लैंस और दूसरे नेत्र उपकरण बना सकें। इसके अलावा, आंखों के उपचार में आने वाली चीजों का रख-रखाव भी जरूरी होता है। सरकारी नियमों के अनुसार, ऑप्टिकल दुकानों में भी ट्रेंड ऑप्टीशियन को ही रखने का प्रावधान है इसलिए वहां भी ऑप्टोमेट्रिस्ट के लिए अवसर होता है। इस तरह देखा जाए तो आने वाले दिनों में इस फील्ड में भरपूर नौकरियां होंगी।

पारिश्रमिक
अगर आप किसी अच्छे इंस्टीच्यूट से कोर्स करते हैं तो शुरूआती दौर में आप 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह सैलरी की उम्मीद कर सकते हैं। कुछ वर्ष का वर्क एक्सपीरियंस हासिल कर लेते हैं तो सैलरी अच्छी हो सकती है। इसके अलावा आपके पास अपना कार्य शुरू करने का भी अवसर होता है। 

 

प्रमुख संस्थान
ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ मैडीकल साइंसेज, नई दिल्ली

दिल्ली पैरामैडीकल एंड मैनेजमैंट इंस्टीच्यूट, नई दिल्ली

गांधी आई हॉस्पिटल, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश 

बी.आर.डी. मैडीकल कॉलेज, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

इंदिरा गांधी मैडीकल कॉलेज, शिमला, हिमाचल प्रदेश

Tuesday, March 22, 2022

फिजियोथेरेपी में बनाएं करियर

आज के समय में पैरा मेडिकल फील्ड काफी बढ़ रहा है। यही वजह है कि फिजियोथेरेपी में करियर ही काफी संभावनाएं हैं। आज कई बीमारियों के इलाज के लिए फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी सबसे खास बात है कि इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। फिजियोथेरेपी चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा जिसकी मदद से शरीर के बाहरी हिस्से का इलाज किया जाता है। इसके माध्यम से कई स्तरों में इलाज किया जाता हैं।

कोर्स :

फिजियोथेरेपी में आप डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई कर सकते हैं। बैचलर कोर्स का समय लगभग साढ़े चार साल का होता है। आखिरी के छह महीने में इस कोर्स के दौरान इंटर्नशिप करवायी जाती है। वहीं मास्टर्स कोर्स दो साल का होता है और इसके लिए आपको फिजियोथेरेपी में बैचलर्स की डिग्री होना आवश्यक है। आप न्यूरोलॉजिकल फिजियोथेरेपी, पिडियाट्रिक फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी, ऑर्थेपेडिक फिजियोथेरेपी, ऑब्सेक्ट्रिक्स फिजियोथेरेपी, पोस्ट ऑपरेटिव फिजियोथेरेपी, कार्डियोवस्कुलर फिजियोथेरेपी में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। 

जरूरी स्किल्स :

  • बेहतर कम्यूनिकेशन स्किल 
  • समस्या समाधान स्किल
  • सहनशक्ति और जूझरू व्यक्तित्व
  • आत्मविश्वास और सेल्फ मोटिवेटड

कोर्स फीस :

फिजियोथेरेपी बोर्ड की फीस लगभग 30 हजार से लेकर अलग-अलग यूनिवर्सिटियों के नियम अनुसार अलग-अलग है। कई यूनिवर्सिटियां छात्रवृत्ति भी प्रदान करती हैं।

सैलरी :

शुरुआत में आपको 10 से 15 हजार रुपये महीने सैलरी के रूप में मिल सकती हैं। धीरे-धीरे अनुभव के बाद इस क्षेत्र में पैसे भी ज्यादा मिलने लगते हैं। कई जगहों पर इंटर्नशिप के दौरान भी पैसे मिलते हैं और बाद में वह छात्र को अपने यहां नौकरी पर रख भी लेते हैं। अनुभव होने के बाद आप अपना खुद का क्लीनिक भी खोल सकते हैं या किसी बड़े हॉस्पिटल में फिजियोथेरिपिस्ट के तौर पर काम कर सकते हैं।

एडमिशन के लिए योग्यता :

बैचलर कोर्स में दाखिले के लिए आपको इंटर (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) 50 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण होना जरूरी है। वहीं मास्टर्स में आपके पास फिजियोथेरेपी में बैचलर्स की डिग्री का होना जरूरी है। 

एंट्रेंस एग्जाम :

फिजियोथेरेपी कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले एंट्रेंस एग्जाम से गुजरना होगा। अलग-अलग यूनिवर्सिटियां अलग-अलग समय अपने अपने एंट्रेस एग्जाम का आयोजन करती हैं। इसके लिए मार्च से लेकर जून महीने तक में फॉर्म आते हैं। इसके बाद एंट्रेंस एग्जाम में आए नंबर के आधार पर दाखिला दिया जाता है। ज्यादा जानकारी के लिए आप दिए गए कॉलेजों की वेबसाइट पर देख सकते हैं।

फिजियोथेरेपी कॉलेज :

  • अपोलो फिजियोथेरेपी कॉलेज, हैदराबाद 
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंस्टिट्यूट फॉर फिजिकली हैंडिकैप्ड, नई दिल्ली  
  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च, पटना 
  • पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ 
  • एसडीएम कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, कर्नाटक 
  • महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एजुकेशन, केरल 
  • के.जे. सौम्या कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, मुंबई 
  • डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन, तमिलनाडु 
  • जे.एस.एस. कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, मैसूर

Saturday, March 19, 2022

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स

Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स 3 साल और 6 महीने का डिप्लोमा स्तर का कार्यक्रम है जो आयुर्वेदिक नर्सिंग देखभाल में व्यापक ज्ञान और कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है। इसमें 3 साल पढ़ाई और 6 महीने का इंटर्नशिप होता है इस कोर्स में पाठ्यक्रम आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों और व्यापक आयुर्वेदिक उपचार उपचार से संबंधित है। पाठ्यक्रम आयुर्वेदिक दवा और समग्र उपचार तकनीक के सिद्धांतों को उनके कल्याण और स्वास्थ्य देखभाल अभ्यास में शामिल करने के इच्छुक छात्रों के लिए है।

अगर आप कोई ऐसी नौकरी करना चाहते हैं,जिसमें आपको अच्छी सैलरी के साथ-साथ मान सम्मान भी प्राप्त हो, तो आप नर्सिंग का कोर्स कर सकते हैं। नर्सिंग के कोर्स में विभिन्न प्रकार की ब्रांच होती है, जिनमें से आप अपनी पसंद की ब्रांच में कोर्स कर सकते हैं और नर्सिंग की फील्ड में अपना अच्छा कैरियर बना सकते हैं। नर्सिंग की फील्ड में आपको लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल करनी पड़ती है, जिसमें बीमार या फिर एक्सीडेंट में घायल हुए मरीजों की देखभाल करना शामिल होता है। हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में नर्सिंग का कोर्स किए हुए व्यक्तियों की हमेशा डिमांड बनी रहती है।

Diploma in Ayurvedic Nursing Important Point

Diploma in Ayurvedic Nursing एक उन्नत कार्यक्रम है जो प्राकृतिक उपचार के इस प्राचीन रूप के पीछे सिद्धांतों, अवधारणाओं और विचारों को शामिल करता है। यह Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स सिर्फ में केवल आयुर्वेदिक पेशेवरों को तैयार करता है जो लोगों को आयुर्वेदिक तरीको से प्रदान की जाने वाली देखभाल के साथ एक स्वस्थ, संतुलित जीवन जीने में सीखने में मदद कर सकते हैं।

Duration3 years 6 Month Internship
Eligibility10+2 Science with Biology
Age limit17 to 25 year
Annual FeeApprox 50,000/-
Semester FeeApprox 27,000/-

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स कैसे करें?

अगर आप नर्सिंग का कोर्स करना चाहते हैं तो आप डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स कर सकते हैं और हॉस्पिटल अथवा स्वास्थ्य से संबंधित फील्ड में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं।आपकी इंफॉर्मेशन के लिए बता दें कि अस्पताल के सभी डिपार्टमेंट नर्सिंग में शामिल होते हैं।

नर्सिंग सिर्फ टेक्निकल इंफॉर्मेशन ही नहीं बल्कि यह पीड़ित रोगियों के लिए पॉजिटिव वातावरण बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर आपको डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स करना है, तो आपको यह पता होना चाहिए कि, Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स कैसे करते हैं? इस आर्टिकल में आपको इसी बात की जानकारी प्राप्त होने वाली है।

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स क्या है?

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स कुल 3 साल और 6 महीने का एक डिप्लोमा लेवल का कोर्स होता है। इस कोर्स का सिलेबस आयुर्वेद के मूल सिद्धांत और आयुर्वेद की ट्रीटमेंट से जुड़ा होता है। जैसा कि आप जानते हैं कि वर्तमान के समय में आयुर्वेद नर्स की डिमांड काफी तेजी से बढ़ रही है।

आयुर्वेदिक हॉस्पिटल और आयुर्वेदिक क्लिनिकल सेंटर की बढ़ती हुई संख्या के कारण रोगी लोगों को अच्छी और प्रोफेशनल ट्रीटमेंट प्रदान करने के लिए अनुभवी नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता होती है, इसीलिए यह एक अच्छा कैरियर ऑप्शन साबित हो सकता है,क्योंकि इसमें प्राइवेट और गवर्नमेंट दोनों ही फील्ड में काफी शानदार कैरियर है।

Diploma in Ayurvedic Nursing क्वालिफिकेशन

अगर डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालीफिकेशन के बारे में बात करें तो इंडिया के किसी भी सर्टिसाइड स्कूल से जिन विद्यार्थियों ने कम से कम 40 परसेंट अंकों के साथ बारहवीं की एग्जाम को केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स जैसे सब्जेक्ट के साथ पास किया है, वह इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स करने के लिए उम्र सीमा क्या है?

इंडिया के लगभग तमाम राज्यों में इस कोर्स को अलग-अलग इंस्टीट्यूट के द्वारा करवाया जाता है। इसीलिए हर राज्य में इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए भिन्न भिन्न। age लिमिट तय की गई है। सामान्य तौर पर इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए कम से कम उम्र 17 साल और अधिक से अधिक उम्र 25 साल तक तय होती है।

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स में जॉब की संभावनाएं।

जो भी अभ्यर्थी डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स पूरा कर लेते हैं, उनके पास निम्न जॉब अपॉर्चुनिटी होती है।

  • आयुर्वेदिक नर्स
  • आयुर्वेदा हीलर
  • हेल्थ केयर एडमिनिस्ट्रेटर
  • आयुर्वेदा ड्रगिस्ट
  • आयुर्वेदा टूर ऑपरेटर
  • आयुर्वेदिक हेल्थ सुपरवाइजर
  • आयुर्वैदिक हर्ब प्रोड्यूजिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन •आयुर्वेदिक फार्मिंग
  • आयुर्वेद मेडिकल मैन
  • आयुर्वेदिक डायटिशियन

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स की फीस कितनी है?

हमने आपको पहले भी यह बात बताई है कि हर राज्य में अलग-अलग इंस्टिट्यूट के द्वारा इस कोर्स को करवाया जाता है, इसीलिए यह निश्चित तौर पर तो नहीं कहा जा सकता है कि कौन से इंस्टिट्यूट के द्वारा इस कोर्स के लिए कितनी फीस तय की गई है, परंतु यह बात तो तय है कि गवर्नमेंट कॉलेज की तुलना में प्राइवेट कॉलेज में इस कोर्स की फीस ज्यादा होती है।अगर हम सरकारी कॉलेज में इस कोर्स की फीस के बारे में बात करें, तो इसकी सालाना फीस तकरीबन ₹25000 से लेकर ₹28000 के आसपास तक होती है, वहीं प्राइवेट कॉलेज में Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स की फीस सालाना तौर पर तकरीबन ₹35,000 से लेकर ₹48,000 के आसपास होती है।

Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स में एडमिशन के लिए कौन से डॉक्यूमेंट लगेंगे?

किसी भी प्रकार के कोर्स में एडमिशन लेने के लिए जब आप ऑनलाइन फॉर्म भरते हैं, तो आपको कुछ डॉक्यूमेंट भी ऑनलाइन फॉर्म भरते समय पेश करने पड़ते हैं अथवा फॉर्म भरने के बाद आपको कुछ डॉक्यूमेंट पेश करने पड़ते हैं।डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स में एडमिशन लेने के लिए भी आपको कुछ डॉक्यूमेंट की आवश्यकता पड़ेगी।

  • बारहवीं कक्षा पास की मार्कशीट
  • डेट ऑफ बर्थ का प्रूफ
  • स्कूल का लिविंग सर्टिफिकेट
  • ट्रांसफर सर्टिफिकेट
  • कैरेक्टर सर्टिफिकेट
  • माइग्रेशन सर्टिफिकेट
  • डोमिसाइल सर्टिफिकेट
  • रेजिडेंशियल प्रूफ
  • प्रोविजनल सर्टिफिकेट
  • आरक्षण का सर्टिफिकेट

जब किसी कॉलेज के द्वारा डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग के कोर्स में एडमिशन के लिए नोटिफिकेशन जारी की जाती है,तो उस नोटिफिकेशन में यह भी बताया जाता है कि इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए कौन से डॉक्यूमेंट लगेंगे। ऐसे में आपको उस नोटिफिकेशन में जो भी डॉक्यूमेंट बताए हैं,उसे अवश्य तैयार कर लेना चाहिए, ताकि आपको एडमिशन लेते समय किसी भी प्रकार की प्रॉब्लम का सामना ना करना पड़े।

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स करने के बाद नौकरी कहां मिलेगी?

जब महिला अथवा पुरुष अभ्यर्थी डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग का कोर्स कंप्लीट कर लेंगे, तो उसके बाद उन्हें आयुर्वेदिक हॉस्पिटल, मेडिकल की दुकान, फार्मास्यूटिकल कंपनी, मेडिकल यूनिवर्सिटी,  ब्लड बैंक, मेडिकल इक्विपमेंट सेल्स कंपनी, पब्लिक हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, आयुर्वेदिक क्लीनिक में आसानी से नौकरी प्राप्त हो जाएगी।

इसके साथ ही अगर किसी व्यक्ति के पास इन्वेस्टमेंट करने के लिए पैसे हैं,तो वह अपना खुद का आयुर्वेदिक क्लीनिक खोल सकता है और उसके द्वारा भी पैसे कमा सकता है।इसके अलावा व्यक्ति चाहे तो अपना खुद का आयुर्वेदिक मेडिकल भी खोल सकता है और उसके द्वारा भी पैसे कमा सकता है।

Diploma in Ayurvedic Nursing कोर्स बेस्ट कॉलेज

  • दिल्ली डिग्री कॉलेज,हरियाणा
  • भारत इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल टेक्नोलॉजी,नई दिल्ली
  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वैदिक फार्मास्यूटिकल साइंस, गुजरात
  • देश भगत आयुर्वैदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल,पंजाब
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंस एंड रिसर्च, दिल्ली
  • संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, पंजाब
  • श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड पैरामेडिकल साइंस, हरियाणा
  • पंजाब पैरामेडिकल साइंस, पंजाब
  • प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, झारखंड
  • इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एजुकेशन एंड रिसर्च, राजस्थान
  • डीएस इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस, उत्तर प्रदेश
  • उत्तरांचल युनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, उत्तराखंड

Diploma in Ayurvedic Nursing Syllabus

इंडिया में अधिकतर यूनिवर्सिटी के द्वारा डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग के कोर्स में नीचे दिए गए विषयों का अध्ययन करवाया जाता है।

इंट्रोडक्शन टू आयुर्वेदाइंट्रोडक्शन टू संस्कृत
रस शास्त्रप्राथमिक चिकित्सा
फार्मास्यूटिकल बायोलॉजीफार्मास्यूटिकल एनालिसिस
फार्मास्यूटिकल केमेस्ट्रीद्रब्यागुना विजीनानम
टॉक्सिकोलॉजीपैथॉफिजियोलॉजी
फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंगफार्मोकोलॉजी
फिजिकल फार्मेसीशरीर क्रिया विज्ञान
इंडस्ट्रियल फार्मेसीBhaishajya Kalpana

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग में क्या पढ़ाया जाता है?

Diploma in Ayurvedic Nursing के कोर्स में अभ्यर्थियों को आयुर्वेदिक मेडिसिन के बारे में विस्तार से बताया तथा पढ़ाया जाता है। डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग के कोर्स में अभ्यर्थी आयुर्वेदिक दवाइयों की केमिकल प्रॉपर्टी,उनके कंपोजिशन के बारे में जानकारी हासिल करते हैं, साथ ही यह भी जानते हैं कि कौन सी दवाई कितने अमाउंट में पेशेंट को देनी चाहिए। इस कोर्स में विद्यार्थियों को थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों करवाया जाता है।

डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक नर्सिंग कोर्स में एडमिशन पाने की प्रक्रिया क्या है?

जो भी अभ्यर्थी इस कोर्स में एडमिशन पाना चाहते हैं उन्हें इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए मिनिमम क्वालीफिकेशन को पूरा करना पड़ेगा, जो की 12वीं कक्षा को साइंस के विषयों के साथ पास होना है।अधिकतर कॉलेज इस कोर्स में एडमिशन मेरिट लिस्ट के बेस के आधार पर ही देते हैं। इसके अलावा कुछ कॉलेज ऐसे होते हैं, जो खुद की एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन करते हैं और जो अभ्यर्थी एंट्रेंस एग्जाम को पास करते हैं, उन्हें ही इस कोर्स में एडमिशन देते हैं।