Saturday, May 23, 2020

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में करियर

बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी या इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक एक 4 वर्ष का अंडरग्रेजुएट लेवल कोर्स है. जैसेकि इसके नाम से पता चलता है, इस कोर्स में इंजीनियरिंग की दो बेसिक फ़ील्ड्स – इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्यूनिकेशन – का एक साथ अध्ययन करवाया जाता है. इस कोर्स को पढ़ने वाले स्टूडेंट्स इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज, सर्किट्स, ट्रांसमीटर, रिसीवर, इंटीग्रेटेड सर्किट्स जैसे कम्युनिकेशन इक्विपमेंट्स के बारे में सीखते और जानकारी प्राप्त करते हैं. इस कोर्स में बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स, एनालॉग और डिजिटल ट्रांसमिशन्स के साथ डाटा-रिसेप्शन, माइक्रोप्रोसेसर्स, सेटेलाइट कम्युनिकेशन, माइक्रोवेव इंजीनियरिंग, एंटीना और वेव प्रोग्रेशन आदि का भी अध्ययन शामिल है. यह कोर्स करने पर स्टूडेंट्स को इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन की फील्ड में काम करने के लिए अपेक्षित बेसिक कॉन्सेप्ट्स और थ्योरीज की जानकारी और स्किल सेट्स को बढ़ाने में मदद मिलती है.

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक – पात्रता मानदंड

किसी भी अंडरग्रेजुएट लेवल के इंजीनियरिंग कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, स्टूडेंट्स ने देश के किसी मान्यताप्राप्त शिक्षण बोर्ड से अपनी 12वीं क्लास की परीक्षा अवश्य पास की हो. इसके अलावा:

  • स्टूडेंट ने कम से कम क्वालीफाइंग मार्क्स के साथ साइंस विषय (अर्थात फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स में से कोई एक विषय कोर विषय के तौर पर पढ़ा हो) में 12 वीं क्लास का एग्जाम पास किया हो. (कम से कम क्वालीफाइंग मार्क्स विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अलग-अलग हो सकते हैं).
  • कैंडिडेट को इंजीनियरिंग के लिए जेईई मेंस एंट्रेंस एग्जाम और अन्य उपयुक्त कम्पीटीटिव एग्जाम देने होंगे. जेईई मेंस एंट्रेंस एग्जाम भारत में अधिकांश इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन देने के लिए सीबीएसई द्वारा आयोजित किया जानवे वाला कॉमन नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम है. जेईई मेंस एंट्रेंस एग्जाम पास करने के बाद ही स्टूडेंट्स ज्वाइंट एडवांस्ड एंट्रेंस एग्जाम दे सकते हैं. कुछ कॉलेज अपने एंट्रेंस एग्जाम्स भी आयोजित करते हैं.

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक – एंट्रेंस एग्जाम्स

भारत में जेईई मेन्स इंजीनियरिंग करने के इच्छुक कैंडिडेट्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण एंट्रेंस एग्जाम है. भारत में अधिकांश इंजीनियरिंग कॉलेज जेईई मेन्स मेरिट लिस्ट के आधार पर स्टूडेंट्स को एडमिशन देते हैं. सुप्रसिद्ध आईआईटीज में एडमिशन लेने के लिए स्टूडेंट्स को जेईई एडवांस्ड एंट्रेंस एग्जाम पास करना होता है. लेकिन, जेईई एडवांस्ड एंट्रेंस एग्जाम देने के लिए आपको पहले जेईई मेन्स एग्जाम पास करना होगा. राष्ट्रीय, राज्य और विश्वविद्यालय के सत्रों पर कई अन्य इंजीनियरिंग एग्जाम्स भी आयोजित किये जाते हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के लिए कुछ लोकप्रिय इंजीनियरिंग एग्जाम्स निम्नलिखित हैं:

राष्ट्रीय स्तर:

• ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम – मेन्स (जेईई मेन)

• ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम – एडवांस्ड (जेईई एडवांस्ड)

राज्य स्तर:

• महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (एमएचटी-सीईटी)

• उत्तर प्रदेश राज्य एंट्रेंस एग्जाम (यूपीएसईई)

• कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (केसीईटी)

विश्वविद्यालय स्तर:

• वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम (वीआईटीईई)

• बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस एडमिशन टेस्ट (बीआईटीएसएटी)

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक अपने में एक सम्पूर्ण कोर्स है.

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक – लोकप्रिय स्पेशलाइजेशन्स

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स इस फील्ड के विभिन्न उप-विषयों में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं. कुछ महत्वपूर्ण उप-विषय निम्नलिखित हैं:

  • सिग्नल प्रोसेसिंग – इसमें सिंगल्स के एनालिसिस, सिंथिसिस और मॉडिफिकेशन का अध्ययन शामिल है.
  • टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग – इस फील्ड में टेलीकम्यूनिकेशन सिस्टम्स को सपोर्ट और बढ़ावा दिया जाता है. इसके तहत बेसिक सर्किट डिज़ाइन से लेकर स्ट्रेटेजिक मास डेवलपमेंट्स तक सभी कार्य शामिल होते हैं.
  • कंट्रोल इंजीनियरिंग – यह फील्ड उन कंट्रोलर्स की डिजाइनिंग से संबद्ध है जो मशीन के बिहेवियर को माइक्रो-कंट्रोलर्स, प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स, डिजिटल सिग्नल प्रोसेसर्स और इलेक्ट्रिकल सर्किट्स का इस्तेमाल करके कंट्रोल करते हैं.
  • इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग – यह फील्ड प्रेशर, फ्लो और टेम्परेचर की मेजरिंग डिवाइसेज की डिजाइनिंग से संबद्ध है. इस फील्ड के लिए स्टूडेंट्स को फिजिक्स की काफी अच्छी जानकारी और समझ होनी चाहिए.
  • कंप्यूटर इंजीनियरिंग – इस विषय के तहत कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को डेवलप करने के लिए जरुरी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस की विभिन्न फ़ील्ड्स को एकीकृत किया जाता है.
  • वीएलएसआई डिज़ाइन इंजीनियरिंग – वैरी-लार्ज-स्केल इंटीग्रेशन (वीएलएसआई): यह बिलियन्स ट्रांजिस्टर्स को सिंगल चिप में जोड़ने के द्वारा इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी) बनाने की प्रोसेस है. 

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक – मुख्य विषय और सिलेबस

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में शामिल कुछ मुख्य विषय निम्नलिखित हैं:

• रैखिक एकीकृत/ लीनियर इंटीग्रेटेड सर्किट्स

• एम्बेडेड सिस्टम्स

• वीएलएसआई डिजाइन

• मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक – टॉप कॉलेजेज

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग कोर्सेज की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और डिमांड के कारण, आजकल अधिकांश संस्थान यह कोर्स ऑफर कर रहे हैं. इनमें से हम आपकी सहूलियत के लिए यूजीसी द्वारा मान्यताप्राप्त कुछ लोकप्रिय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट्स पेश कर रहे हैं जिन्हें वर्ष 2018 के लिए एनआईआरएफ रैंकिंग में टॉप 10 केटेगरीज में शामिल किया गया है:

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी खड़गपुर, खड़गपुर

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी दिल्ली, दिल्ली

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कानपुर, कानपुर

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी रुड़की, रुड़की

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी, गुवाहाटी

• अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई

• जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी हैदराबाद, हैदराबाद

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद करियर के अवसर

एक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियर के तौर पर, कोई भी व्यक्ति एविएशन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिसिटी प्लांट्स, मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्टेशन, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर एप्लीकेशन आदि में काम कर सकता है. इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियर्स के लिए कुछ अन्य लोकप्रिय रोज़गार के क्षेत्र निम्नलिखित हैं:

• भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (आईईएस)

• भारतीय टेलीफोन उद्योग

• सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइन-इंडस्ट्रीज

• इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड

• तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड

• सिविल एविएशन डिपार्टमेंट

• स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडियन लिमिटेड (सेल)

• पॉवर सेक्टर

• इंडियन रेलवे

• भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड

• भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)

• सॉफ्टवेयर इंडस्ट्रीज

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद जॉब के अवसर

यह कोर्स करने पर स्टूडेंट्स ब्राडकास्टिंग, कंसल्टिंग, डाटा कम्युनिकेशन, एंटरटेनमेंट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सिस्टम सपोर्ट आदि जैसे अन्य कई मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के संगठनों में काम कर सकते हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियर्स के लिए कुछ बढ़िया जॉब प्रोफाइल्स निम्नलिखित हैं:

• इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर

• फील्ड टेस्ट इंजीनियर

• नेटवर्क प्लानिंग इंजीनियर

• इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन्स कंसलटेंट

• कस्टमर सपोर्ट इंजीनियर

• इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्निशियन

• एसोसिएट फर्स्टलाइन टेक्निशियन

• रिसर्च एंड डेवलपमेंट सॉफ्टवेयर इंजीनियर

• सर्विस इंजीनियर

• सीनियर सेल्स मैनेजर

• टेक्निकल डायरेक्टर

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक – लोकप्रिय रिक्रूटर्स

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियर्स के लिए जॉब के अच्छे अवसर उपलब्ध करवाने वाले कुछ लोकप्रिय रिक्रूटर्स निम्नलिखित हैं:

सरकारी क्षेत्र की कंपनियां

• दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी)

• रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)

• भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)

निजी क्षेत्र की कंपनियां

• एक्सेंचर सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड

• कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस

• एचसीएल टेक्नोलॉजीज

• हेवलेट पैकर्ड

• हनीवेल ऑटोमेशन इंडिया लिमिटेड

• इंफोसिस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड

• एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंक

• टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस)

• विप्रो लिमिटेड

• सीमेंस

• टेक महिंद्रा

• एनवीआईडीआईए

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद सैलरी प्रॉस्पेक्ट्स

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में सैलरी प्रॉस्पेक्ट्स बहुत बढ़िया हैं. लेकिन, आपको कैसा सैलरी पैकेज मिलेगा?... यह कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है जैसेकि, वर्किंग स्किल्स, क्वालिफिकेशन्स, वर्किंग एरिया, रिक्रूटर्स सहित अन्य फैक्टर्स आदि. हालांकि, एक फ्रेश कॉलेज ग्रेजुएट के तौर पर, आप 2-3 लाख प्रति वर्ष सैलरी कमा सकते हैं और 5-7 वर्ष के अनुभव के बाद आप प्रति वर्ष 8-9 लाख रु. कमा सकते हैं. 

कौन से स्टूडेंट्स करें यह कोर्स?

जो स्टूडेंट्स प्रॉब्लम-सॉल्विंग में कुशल होते हैं और सूचनाओं को सटीक, संक्षिप्त और असरदार ढंग से पेश करने में माहिर हैं तथा असंगत फैक्ट्स में से संगत फैक्ट्स चुनने की क्षमता जिनमें होती है, उन स्टूडेंट्स के लिए यह कोर्स बिलकुल सही रहेगा. इसके साथ ही, स्टूडेंट्स के पास जिज्ञासु दिमाग होना चाहिए और वे आलोचना को स्वीकार करके उस पर काम करने की इच्छा जाहिर करें. 

आप क्यों करें यह कोर्स?

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग एक काफी लोकप्रिय इंजीनियरिंग विषय है. प्रति वर्ष हजारों स्टूडेंट्स भारत के विभिन्न संस्थानों में इस कोर्स में एडमिशन लेते हैं. यह कोर्स ऐसे तैयार किया गया है ताकि स्टूडेंट्स को कम्प्लेक्स सिस्टम्स को प्लान, डिज़ाइन, इनस्टॉल, ऑपरेट, कंट्रोल और मेनटेन करना सीखने में मदद मिल सके. यह कोर्स स्टूडेंट्स के लिए बेहतरीन करियर विकल्प पेश करता है. यह कोर्स स्टूडेंट्स को टेलिकॉम इंडस्ट्रीज और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्रीज से संबद्ध दो विभिन्न सेक्टर्स में काम करने के अवसर भी उपलब्ध करवाता है.

Friday, May 8, 2020

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में करियर

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग क्या है?

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग की वह ब्रांच है जो गारमेंट, कलर और फैब्रिक लाइन की इंडस्ट्रीज से संबद्ध कार्य करती है. यह एक ऐसा विज्ञान है जो टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग की प्रोसेस में शामिल सभी एक्टिविटीज और मेथड्स से संबद्ध है.  

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में लॉ, प्रिंसिपल्स और साइंटिफिक टेक्निक्स शामिल हैं जो सभी किस्म के यार्न्स (धागे) और टेक्सटाइल फैब्रिक्स की मैन्युफैक्चरिंग और विकास करने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं. यह साइंस के उन प्रिंसिपल्स का भी अध्ययन करती है जो टेक्सटाइल फाइबर को बनाने में इस्तेमाल होने वाले पॉलीमर्स को एनालाइज करते हैं.

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का फोकस फाइबर, मशीनरी और प्रोडक्ट्स, अपैरल और टेक्सटाइल प्रोसेस को डिज़ाइन करने और कंट्रोल करने से जुड़े कार्यों पर होता है.

टेक्सटाइल इंजीनियर्स क्या करते हैं?

हम हर जगह टेक्सटाइल्स देख सकते हैं फिर चाहे वे कपड़े, बेडशीट्स, ड्रेपरीज, कारपेटिंग, अपहोल्स्ट्री फैब्रिक्स या टॉवल्स हों. इन सभी गुड्स के प्रोडक्शन के पीछे जो विज्ञान काम कर रहा है, वही टेक्सटाइल इंजीनियरिंग है. टेक्सटाइल इंजीनियर्स उक्त सभी किस्म के फाइबर्स, फैब्रिक्स और यार्न्स को तैयार करने के लिए प्रोसेसेज, इक्विपमेंट और प्रोसीजर्स को डिज़ाइन और डेवलप करने से संबद्ध कार्य करते हैं.

वे प्लांट में काम कर सकते हैं और डिज़ाइन इंजीनियरिंग, प्रोसेस इंजीनियरिंग, प्रोडक्शन कंट्रोल और सुपरविज़न, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, टेक्निकल सेल्स एंड सर्विसेज, क्वालिटी कंट्रोल रिसर्च एंड डेवलपमेंट और कॉरपोरेट मैनेजमेंट से जुड़े सभी कार्य करते हैं.

मेडिकल साइंस भी आर्टिफीशल आर्टरीज और किडनी डायलिसिस मशीन्स के फिल्टर्स के लिए टेक्सटाइल्स पर निर्भर करती है. जार्विक – 7 आर्टिफीसीयल हार्ट 50 परसेंट टेक्सटाइल फाइबर्स से बना होता है और उसमें वेल्क्रो फिटिंग्स होती है.

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के कोर सब्जेक्ट्स

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल केमिस्ट्री और टेक्सटाइल प्रोडक्शन शामिल हैं. टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में आने वाले कोर सब्जेक्ट्स निम्नलिखित टेबल में दिए जा रहे हैं:

टेक्सटाइल फाइबर

यार्न फॉर्मेशन

फैब्रिक फॉर्मेशन

केमिकल प्रोसेसिंग ऑफ़ टेक्सटाइल्स

इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इन टेक्सटाइल

डिज़ाइन एंड स्ट्रक्चर ऑफ़ फैब्रिक

कंप्यूटर एप्लीकेशन्स इन टेक्सटाइल्स

डिज़ाइन एंड स्ट्रक्चर ऑफ़ फैब्रिक

टेक्सटाइल टेस्टिंग एंड इंस्ट्रूमेंट्स

प्रोसेसिंग एट टेक्सटाइल लैब

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का चयन क्यों किया जाए?

आजकल टेक्सटाइल एक निरंतर विकसित होने वाली इंडस्ट्री बन चुकी है और फैशन, गारमेंट्स तथा फाइबर मैन्युफैक्चरिंग की फील्ड में अपनी पहचान बनाने में रूचि रखने वाले कैंडिडेट्स टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का कोर्स चुन सकते हैं.

यह कोर्स छात्रों को एक शानदार करीयर के लिए ढेरों अवसर उपलब्ध करवाता है क्योंकि टेक्सटाइल्स की मांग और आपूर्ति कभी कम नहीं होगी. इसलिये, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का टाइम और कार्यक्षेत्र लगातार व्यापक होता जा रहा है और टेक्सटाइल इंजीनियरिंग ने भारत और विदेशों में कई किस्म की जॉब्स के अवसर मुहैया करवाये हैं.

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में रिसर्च और क्रिएटिविटी की बहुत अधिक जरूरत होती है और छात्र अपनी क्रिएटिविटी, इनोवेशन तथा साइंटिफिक नॉलेज का इस्तेमाल करते हुए अपने यूनिक आइडियाज को साकार कर सकते हैं.

टेक्सटाइल इंजीनियर्स अपने स्किल्स और क्रिएटिविटी के आधार पर, टॉप टेक्सटाइल प्लांट्स एवं कंपनियों में जॉब प्राप्त करके, सफलता की नई उंचाइयों को छू सकते हैं या फिर, वे अपना नया वेंचर भी शुरू कर सकते हैं.

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में कोर्सेज

कई यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों ने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन कोर्सेज शुरू किये हैं. टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के सिलेबस में स्टूडेंट्स को मेटीरियल और मशीन के इंटरेक्शन, एनर्जी कंजरवेशन, नेचुरल और मानव-निर्मित मेटीरियल्स, पोल्यूशन, वेस्ट कंट्रोल और सेफ्टी तथा हेल्थ के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है.

भारत में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में निम्नलिखित 4 किस्म के प्रोग्राम्स हैं:

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कोर्स:

  • टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी/ टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा
  • फेब्रिकेशन टेक्नोलॉजी एंड इरेक्शन इंजीनियरिंग में डिप्लोमा

अंडरग्रेजुएट कोर्स

इसे अक्सर बीटेक प्रोग्राम के नाम से जाना जाता है. इस कोर्स की ड्यूरेशन 4 वर्ष है और यह कोर्स 10+2 एग्जाम पास करने के बाद किया जा सकता है.

  • टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी (बीटेक)

पोस्टग्रेजुएट कोर्स

इस कोर्स को एमटेक के नाम से भी जाना जाता है और इस कोर्स की अवधि 2 वर्ष है. इंजीनियरिंग में अंडरग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करने के बाद आप यह कोर्स कर सकते हैं.

  • टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी में मास्टर ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमटेक)
  • टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमटेक)
  • टेक्सटाइल केमिस्ट्री में मास्टर ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमटेक)

डॉक्टोरल डिग्री कोर्स

यह कोर्स पीएचडी डिग्री कोर्स के नाम से जाना जाता है और इस कोर्स की अवधि 1-2 वर्ष होती है. छात्र अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद यह कोर्स कर सकते हैं.

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम्स की लिस्ट

ग्रेजुएशन लेवल

• जेएनयू: जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम

• बीआईएसएटी: बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस एग्जाम

• एनआईटी: नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

• डीसीई सीईई: दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग कंबाइंड एंट्रेंस एग्जाम

• बीआईएचईआर: भारथ यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम

• एएमआईई: एसोसिएट मेम्बरशिप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन्स ऑफ़ इंजीनियर्स

• वीआईटीईईई: वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम

• एआईईईई: ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम

• एआईसीईटी: ऑल इंडिया कॉमन एंट्रेंस टेस्ट

• आईआईटी जेईई: आईआईटी ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम

• उत्तर प्रदेश स्टेट एंट्रेंस एग्जाम

पोस्टग्रेजुएशन लेवल

• बीआईटीएसएटी: बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंट्रेंस एग्जाम

• गेट: ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट, इंजीनियरिंग

• एआईईईई: इंडियन इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम

• पीजीईसीईटी: पोस्ट ग्रेजुएशन इंजीनियरिंग कॉमन एंट्रेंस टेस्ट

• आईआईटी जेईई: आईआईटी जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम

उक्त एग्जाम्स में हिस्सा लेने वाले इंस्टिट्यूट्स की लिस्ट

• आईआईटी: इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, दिल्ली

• इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, नई दिल्ली

• एलडी कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, गुजरात

• कॉलेज ऑफ़ टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, पश्चिम बंगाल

• एसएसएम इंस्टिट्यूट ऑफ टैक्सटाइल टैक्नोलॉजी एंड पॉलिटेक्निक कॉलेज, तमिलनाडु

• यूनिवर्सिटी ऑफ़ मुंबई, महाराष्ट्र

• बेन्नारी अम्मन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, तमिलनाडु

• इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, उड़ीसा

• जैल सिंह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पंजाब

• बंगाल इंजीनियरिंग एंड साइंस यूनिवर्सिटी, पश्चिम बंगाल

• कलकत्ता यूनिवर्सिटी, कॉलेज ऑफ टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, वेस्ट बंगाल

• सरदार वल्लभभाई पटेल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्सटाइल मैनेजमैंट, तमिलनाडु

• जया इंजीनियरिंग कॉलेज, तमिलनाडु

• एमिटी यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश

• दी आर्ट्स इंस्टिट्यूट्स

• डिपार्टमेंट ऑफ़ टेक्सटाइल, आईआईटी, दिल्ली

• टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्सटाइल्स, हरियाणा

• अन्ना यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु

• डीकेटीई सोसाइटी’ज टेक्सटाइल इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट, महाराष्ट्र

• कलकत्ता यूनिवर्सिटी, पश्चिम बंगाल

• कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टैक्नोलॉजी, तमिलनाडु

• गवर्नमेंट सेंट्रल टेक्सटाइल इंस्टिट्यूट, उत्तर प्रदेश

• एमएलवी टेक्सटाइल इंस्टिट्यूट, राजस्थान

• एमएस युनिवर्सिटी, गुजरात

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में कोर्सेज

कई यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों ने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन कोर्सेज शुरू किये हैं. टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के सिलेबस में स्टूडेंट्स को मेटीरियल और मशीन के इंटरेक्शन, एनर्जी कंजरवेशन, नेचुरल और मानव-निर्मित मेटीरियल्स, पोल्यूशन, वेस्ट कंट्रोल और सेफ्टी तथा हेल्थ के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है.

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में उपलब्ध रोज़गार के अवसर

टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में फैशनेबल कपड़ों की मांग को ध्यान में रखते हुए, बहुत ज्यादा रिसर्च, क्रिएटिविटी और इनोवेशन की जरूरत होती है. एक बार कोर्स पूरा हो जाने के बाद, छात्रों को अपने काम में इस क्रिएटिविटी और साइंटिफिक जानकारी का इस्तेमाल जरुर करना चाहिए ताकि उन्हें अपने काम में बेहतरीन क्वालिटी और अच्छे नतीजे प्राप्त हों. 

टेक्सटाइल इंजीनियर्स को अक्सर टॉप टेक्सटाइल प्लांट्स और कंपनियों द्वारा जॉब ऑफर की जाती है. रोज़गार के अलावा, टेक्सटाइल इंजीनियर्स अपना बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं. टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में जिन छात्रों ने डिग्री हासिल की है, वे निम्नलिखित पोजीशन्स पर काम कर सकते हैं:

• मेडिकल टेक्सटाइल्स इंजीनियर

• प्रोसेस इंजीनियर

• ऑपरेशन्स ट्रेनी

• क्वालिटी कंट्रोल सुपरवाइजर

• प्रोसेस इम्प्रूवमेंट इंजीनियर

• टेक्निकल सेल्सपर्सन

भारत में टेक्सटाइल इंजीनियर्स को जॉब मुहैया करवाने वाले प्रमुख रिक्रूटर्स की लिस्ट

• बॉम्बे डाइंग

• मैसूर सिल्क

• जेसीटी लिमिटेड

• लक्ष्मी मिल्स

• रिलायंस टेक्सटाइल्स

• फैब इंडिया

• ग्रासिम इंडस्ट्रीज

• अरविंद मिल्स लिमिटेड

• लक्ष्मी मशीन वर्क्स

• भीलवाड़ा ग्रुप

• राजस्थान पेट्रो सिंथेटिक्स

• आरआईएल टेक्सटाइल्स

• जेसीटी मिल्स

• मफ्तलाल डेनिम

• रेमंड ग्रुप

Wednesday, April 29, 2020

बायोटेक्नोलॉजी में करियर

बायोटेक्नोलॉजी क्या है?

बायोटेक्नोलॉजी को आमतौर पर ‘बायोटेक’ के नाम से जाना जाता है और यह इंजीनियरिंग करने के इच्छुक उम्मीदवारों के बीच सबसे ज्यादा पसंदीदा कोर्सेज में से एक कोर्स है. बायोटेक्नोलॉजी साइंस की वह ब्रांच है जिसमें बायोलॉजी और टेक्नोलॉजी के आश्चर्यजनक मेल से रॉ मेटीरियल्स को आश्चर्यजनक इनोवेशन्स, डिस्कवरीज और प्रोडक्ट्स में बदला जाता है. वर्ष 1919 में, हंगरी के एग्रीकल्चरल इंजीनियर कार्ल एरेक्य ने सबसे पहले बायोटेक्नोलॉजी शब्द का इस्तेमाल किया. चाहे वह बैक्टीरिया, यीस्ट या एंजाइम्स जैसे बायोलॉजिकल पदार्थ हों, बायोटेक की जानकारी प्राप्त करने के बाद, आप इंडस्ट्रियल या मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेसेज से संबद्ध कार्य करने के लिए हरेक माइक्रोऑर्गानिज्म को इस्तेमाल कर सकेंगे.

एक बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियर क्या करता है?

एक प्रसिद्ध कहावत है कि, “विनर्स अलग काम नहीं करते हैं, वे कामों को अलग तरीके से करते हैं.” यह कहावत एक बायोटेक्नोलॉजिस्ट/ बायोटेक इंजीनियर पर खरी उतरती है. बायोटेक्नोलॉजी कामों को अलग तरीके से करने के लिए विभिन्न पहलू तलाश करने से संबद्ध है ताकि इस दुनिया में परिवर्तन लाया जा सके. एक बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियर ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन लेवल पर किये गए स्पेशलाइजेशन और अपनी रूचि के अनुसार विभिन्न फ़ील्ड्स जैसेकि, एनिमल हसबेंड्री, एग्रीकल्चर, मेडिसिन, जेनेटिक इंजीनियरिंग, एनवायरनमेंट कन्जर्वेशन, हेल्थकेयर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट से जुड़े कार्य करता/ करती है.

कोर्सेज के प्रकार और अवधि

बायोटेक्नोलॉजी एक प्रोमिसिंग कोर्स है जिसके तहत कई कोर्सेज और सिलेबस शामिल किये जा सकते हैं. इस स्ट्रीम में अपना करियर बनाने के इच्छुक कैंडिडेट्स 10 वीं क्लास (इंटरमिडीएट लेवल) की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी यह कोर्स कर सकते हैं. इस कोर्स को पढ़ कर, समझकर और विश्लेषण करके आप काफी अच्छी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. आप इस कोर्स के तहत डॉक्टोरल डिग्री भी प्राप्त कर सकते हैं बशर्ते आप विज्ञान की इस ब्रांच में शामिल विभिन्न बारीकियों और विवरण का पता लगाना चाहते हों.

 

डिप्लोमा कोर्सेज

बायोटेक्नोलॉजी में डिप्लोमा प्राप्त करने के लिए, छात्र उन कॉलेजों में इस कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं जो 10 वीं क्लास पास करने के बाद छात्रों को यह डिप्लोमा कोर्स ऑफर करते हैं. भारत में इस कोर्स की अवधि 3 वर्ष है. 

अंडरग्रेजुएट कोर्सेज

जो इंस्टिट्यूट्स और यूनिवर्सिटीज अंडरग्रेजुएट कोर्सेज ऑफर करते हैं, वहां आप बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इस अंडरग्रेजुएट कोर्स की अवधि 4 वर्ष है और छात्रों को इस अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लेने के लिए एक एंट्रेंस एग्जाम पास करना पड़ता है.

पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज

पोस्टग्रेजुएशन के लेवल पर, इस कोर्स को अक्सर बायोटेक्नोलॉजी में एमटेक या बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी के नाम से जाना जाता है. यह उस यूनिवर्सिटी या इंस्टिट्यूट पर निर्भर करता है जो कैंडिडेट्स को पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री या डिप्लोमा ऑफर करता है. पोस्टग्रेजुएशन लेवल पर इस कोर्स की अवधि केवल 2 वर्ष है.

डॉक्टोरल प्रोग्राम्स

जो उम्मीदवार बायोटेक्नोलॉजी में डॉक्टोरल डिग्री हासिल करना चाहते हैं, वे अपनी पोस्टग्रेजुएशन पूरी करने के बाद पीएचडी कोर्सेज के लिए अप्लाई कर सकते हैं. पीएचडी कोर्सेज की अवधि आमतौर पर 3 से 4 वर्ष की होती है जो थीसिस पूरी करने के लिए शामिल रिसर्च वर्क पर निर्भर करती है. पीएचडी फुल टाइम और पार्ट टाइम तरीके से की जा सकती है.

बायोटेक्नोलॉजी के तहत सब-स्पेशलाइजेशन कोर्सेज

जब कोई छात्र बायोटेक्नोलॉजी प्रोग्राम करना चाहता है तो वह निम्नलिखित में से कोई एक स्पेशलाइजेशन कोर्स चुन सकता है. ये स्पेशलाइजेशन्स अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट लेवल पर किये जा सकते हैं लेकिन, हरेक इंस्टिट्यूट अपने छात्रों को निम्नलिखित सभी स्पेशलाइजेशन्स ऑफर नहीं करते हैं. अगर आप किसी विशेष डोमेन में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं तो किसी इंस्टिट्यूट में एडमिशन लेने से पहले इस इंस्टिट्यूट के प्रोग्राम ब्रोशर में उस इंस्टिट्यूट द्वारा ऑफर किये जा रहे स्पेशलाइजेशन कोर्सेज के नाम चेक कर लें.

जेनेटिक्स

जेनेटिक्स और सेल बायोलॉजी से संबद्ध वैज्ञानिक खोज में रूचि रखने वाले छात्र यह कोर्स चुन सकते हैं. उन्हें विभिन्न मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, थेरेपीज और थेरापियूटिक्स के बारे में सिखाया जायेगा. उदाहरण के लिए: ह्यूमन जीनोम की सिक्वेंसिंग पर प्रोजेक्ट्स.

वीरोलॉजी

यह विषय आमतौर पर बायोटेक्नोलॉजी के चौथे  सेमेस्टर में पढ़ाया जाता है. वीरोलॉजी की स्टडी से आपको मॉलिक्यूलर वीरोलॉजी के फंडामेंटल्स और वास्तविक दुनिया में इसके एप्लीकेशन्स को समझने में सहायता मिलती है.

इम्युनोलॉजी

यह कोर्स ह्यूमन इम्यून सिस्टम के काम करने के तरीके और समझने में मदद करता है ताकि हमें यह पता चल सके कि टेक्नोलॉजी कैसे इम्यून सिस्टम को कमजोर होने से बचाने में मनुष्यों की मदद कर सकती है.

बायो-स्टेटिस्टिक्स

बायो-स्टेटिस्टिक्स बायोटेक्नोलॉजी की वह फील्ड है जिस के जरिये कोई भी व्यक्ति रिसर्चर्स द्वारा किये जाने वाले विभिन्न एक्सपेरिमेंट्स में मैथमेटिक्स और स्टेटिस्टिक्स के कॉन्सेप्ट्स अप्लाई कर सकता है. इस जानकारी का इस्तेमाल करते हुए, बायो-स्टेटिस्टीशियन डाटा कलेक्ट, डिसेक्ट और समराइज़ कर सकते हैं और फिर, ठोस जानकारी पेश कर सकते हैं.

फार्माकोलॉजी

फार्माकोलॉजी पढ़ने वाले छात्र कम लागत पर ड्रग्स तैयार करने के तरीके और मनुष्यों तथा जानवरों के टिश्यू एवं सेल फंक्शन पर इन ड्रग्स के प्रभाव का मुल्यांकन करना सीखते हैं.

मॉलिक्यूलर बायोलॉजी

यह स्पेशलाइजेशन ह्यूमन और एनिमल हेल्थ, एग्रीकल्चर और एनवायरनमेंट जैसे क्षेत्रों में न्यूक्लिक एसिड्स और प्रोटीन्स के एप्लीकेशन्स के लिए इनकी बारीकियों को समझने में मदद करता है. इस कोर्स को पढ़ने वाले छात्र ह्यूमन और एनिमल हेल्थ कायम रखने के लिए ड्रग्स, थेरेपीज और डायग्नोस्टिक टेस्ट्स तैयार करने के लिए अपने ज्ञान का इस्तेमाल कर सकते हैं.  

एनिमल हसबेंड्री

बायोटेक्नोलॉजी लाइवस्टॉक ब्रीडिंग के लिए एक आश्चर्यजनक वरदान बन चुकी है. बायोटेक्नोलॉजी की यह ब्रांच पृथ्वी पर जीवजंतुओं की हेल्थ और कल्याण के लिए छात्रों को एम्ब्रॉय ट्रांसफर, आर्टिफीशल इनसेमिनेशन, क्लोनिंग और अन्य कई कंसेप्ट्स की जानकारी प्राप्त करने में मदद करती है.

ये कुछ ऐसे स्पेशलाइजेशन कोर्सेज थे जो बायोटेक्नोलॉजी करने वाले छात्र अक्सर चुनते हैं. कुछ अन्य स्पेशलाइजेशन्स भी हैं जो आजकल लोकप्रिय हो रहे हैं.

बायोटेक्नोलॉजी के कोर्सेज में कैसे लें एडमिशन?

किसी भी शानदार करियर की शुरुआत करने के लिए एडमिशन प्रोसेस बहुत चुनौतीपूर्ण लेकिन महत्वपूर्ण कदम होती है. जब कोई छात्र किसी कॉलेज में एक विशेष कोर्स में एडमिशन लेना चाहता है तो उसके लिए विभिन्न स्टेप्स को क्रम से फ़ॉलो करना जरुरी होता है. इस पूरी प्रक्रिया में, पहला कदम किसी खास कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को समझना है. जब आपको एक बार एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया का पता चल जाता है तो आप उस कोर्स के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो इस प्रक्रिया का अगला कदम है वांछित कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए निर्धारित एग्जाम्स के बारे में पता करना.

सबसे पहले, हम विभिन्न स्तरों पर बायोटेक्नोलॉजिकल कोर्सेज के लिए आवश्यक एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के बारे में जानकारी हासिल करते हैं: 

बायोटेक में एडमिशन लेने के लिए विभिन्न लेवल्स पर एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

किसी भी छात्र को बायोटेक्नोलॉजी में एडमिशन लेने के लिए एलिजिबिलिटी के बारे में अवश्य पता होना चाहिए. अगर कोई कैंडिडेट एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा नहीं करता/ करती है तो उसे कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलेगा. इस संबंध में इंस्टिट्यूट्स और एग्जाम लेने वाले संस्थानों ने कुछ गाइडलाइन्स  जारी की हैं. बायोटेक करने के इच्छुक उम्मीदवारों को भारत के किसी बेहतरीन बायोटेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट में सीट प्राप्त करने के लिए अवश्य इस संदर्भ में पूरी जानकारी होनी चाहिए.

डिप्लोमा

जिन छात्रों ने मैथमेटिक्स और साइंस सब्जेक्ट के साथ 10 वीं क्लास पास कर ली है, वे बायोटेक्नोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

ग्रेजुएशन

अंडरग्रेजुएट कोर्स में अप्लाई करने के लिए, छात्र ने फिजिक्स, मैथ्स, बायोलॉजी और केमिस्ट्री के साथ 12 वीं क्लास अवश्य पास की हो. जिन छात्रों ने 10वीं क्लास पास करने के बाद डिप्लोमा प्राप्त किया है, वे भी अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में एडमिशन ले ले सकते हैं. 12 वीं क्लास पास करने वाले छात्रों की बजाय डिप्लोमा प्राप्त करने वाले छात्रों को ज्यादा महत्व दिया जाता है. डिप्लोमा होल्डर्स को बायोटेक्नोलॉजी के 2 वर्ष के बीटेक/ बीई कोर्स में सीधी एंट्री दी जायेगी.

पोस्टग्रेजुएशन

बायोटेक्नोलॉजी में एमटेक करने के लिए अप्लाई करने वाले छात्रों के लिए कम से कम 50% मार्क्स के साथ ग्रेजुएशन या उसके समान योग्यता प्राप्त करना बहुत जरुरी है. रिजर्वेशन कोटा और इंस्टिट्यूट की एडमिशन पॉलिसी के अनुसार हरेक इंस्टिट्यूट की रिक्वायर्ड परसेंटेज अलग-अलग हो सकती है.

डॉक्टोरल प्रोग्राम्स

बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री किसी डॉक्टोरल प्रोग्राम में एडमिशन लेने के लिए बहुत जरुरी होती है. कुछ यूनिवर्सिटीज अपने यहां पीएचडी प्रोग्राम में एडमिशन देने के लिए मास्टर इन फिलोसोफी (एमफिल) के बारे में भी पूछ सकती हैं.

बायोटेक्नोलॉजी में कोर्सेज करने के लिए एंट्रेंस एग्जाम्स

अंडरग्रेजुएट लेवल पर, बीटेक कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए, जेईई मेन्स और जेईई एडवांस्ड एग्जाम्स सबसे ज्यादा प्रसिद्ध एंट्रेंस एग्जाम्स हैं. जो लोग उच्च शिक्षा अर्थात पोस्ट-ग्रेजुएट लेवल में एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे हैं, अक्सर गेट और आईआईटी जेएएम जैसे एंट्रेंस एग्जाम्स की तैयारी करते हैं. आईआईटीज और भारत के अन्य बढ़िया इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए, छात्र इन एग्जाम्स के डिफिकल्टी लेवल को देखते हुए इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम्स के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करते हैं.

डिप्लोमा कोर्सेज के लिए:

आमतौर पर इंस्टिट्यूट्स स्टेट लेवल के इंजीनियरिंग डिप्लोमा एंट्रेंस एग्जाम्स के आधार पर ‘बायोटेक्नोलॉजी में डिप्लोमा’ के लिए स्टूडेंट्स को शॉर्टलिस्ट करते हैं. कुछ पॉपुलर इंजीनियरिंग डिप्लोमा एंट्रेंस एग्जाम्स हैं:

1. दिल्ली पॉलिटेक्निक कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (दिल्ली सीईटी)

2. ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन काउंसिल, उत्तर प्रदेश (जेईईसीयूपी)

3. जेईएक्सपीओ और वीओसीएलईटी पॉलिटेक्निक एंट्रेंस एग्जाम (पश्चिम बंगाल)

4. पंजाब ज्वाइंट एंट्रेंस टेस्ट (पंजाब पीईटी)

5. हरियाणा डिप्लोमा एंट्रेंस टेस्ट (एचएसटीईएस डीईटी)

अंडरग्रेजुएट कोर्सेज के लिए:

नेशनल लेवल के एग्जाम्स:

सीबीएसई द्वारा आयोजित जेईई मेन 2018

आईआईटी और एनआईटी में एडमिशन लेने के लिए जेईई एडवांस्ड 2018

स्टेट लेवल के एग्जाम्स:

एपी ईएएमसीईटी 2018

टीएस ईएएमसीईटी 2018

केसीईटी 2018

एमएएच-सीईटी 2018

यूनिवर्सिटी लेवल के एग्जाम्स

वीआईटीईई 2018

पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज के लिए:

नेशनल लेवल के एग्जाम्स:

गेट 2018

आईआईटी जेएएम (एमएससी के लिए ज्वाइंट एडमिशन टेस्ट)

स्टेट लेवल के एग्जाम्स:

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ग्रेजुएट स्कूल द्वारा बायोलॉजी और इंटरडिसिप्लिनरी बायोलॉजी के लिए आयोजित ज्वाइंट ग्रेजुएट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेजीईईबीआईएलएस)

यूनिवर्सिटी लेवल के एग्जाम्स

एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) एमएससी बायोटेक्नोलॉजी

जेएनयू सीईईबी कंबाइंड बायोटेक्नोलॉजी एंट्रेंस एग्जाम

भारत में टॉप 10 बायोटेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट्स

बायोटेक्नोलॉजी एक महत्वपूर्ण कोर्स है जो भारत में विभिन्न इंस्टिट्यूट्स ऑफर करते हैं. उनमें से यूजीसी द्वारा मान्यताप्राप्त टॉप 10 बायोटेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट्स के नाम निम्नलिखित हैं जिन्हें वर्ष 2018 के लिए एनआईआरएफ रैंकिंग में भी प्रमुख स्थान देने के साथ इन इंस्टिट्यूट्स की काफी तारीफ की गई है:

क्रम संख्या

इंस्टिट्यूट

लोकेशन

1

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

मद्रास

2

डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोसाइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग (बीएसबीई), आईआईटी 

बॉम्बे

3

डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

नई दिल्ली

4

डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

खड़गपुर

5

डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग, आईआईटी

कानपुर

6

डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी, आईआईटी

रूड़की

7

डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी, आईआईटी

गुवाहाटी

8

सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी, अन्ना यूनिवर्सिटी

चेन्नई

9

डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी, आईआईटी

हैदराबाद

10

इंस्टिट्यूट ऑफ़ केमिकल टेक्नोलॉजी

मुंबई

उक्त बायोटेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट्स का चयन बेहतरीन प्लेसमेंट रिकॉर्ड, स्टेट ऑफ़ दी आर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर, हाइली क्वालिफाइड फैकल्टी और उनके द्वारा अपनाई जा रही सख्त एडमिशन प्रोसेस के आधार पर किया गया है. हमें आशा है कि उक्त लिस्ट आपके शानदार करियर के लिए, आपको बढ़िया बायोटेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट चुनने में मदद करेगी.

स्टूडेंट्स के लिए बायोटेक्नोलॉजी में स्कोप

भारत में बायोटेक्नोलॉजी ने काफी महत्वपूर्ण जगह बना ली है. इस फील्ड के तहत सभी संभावित फ़ील्ड्स जैसेकि, फार्मास्यूटिकल, फ़ूड मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और रिसर्च से संबद्ध कार्य शामिल हो गये हैं. उक्त फ़ील्ड्स के अलावा भी अन्य कई फ़ील्ड्स में बायोटेक्नोलॉजी के योगदान को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता है. चाहे वह बायोफ़र्टिलाइज़र्स, बायोपेस्टीसाइड्स, ग्रीन रेवोलुशन या आईटी की फ़ील्ड में रेवोलुशन लाने वाली बायोइन्फॉर्मेटिक्स से संबंधित मुद्दे हों, बायोटेक्नोलॉजी भारत के युवा वर्ग के लिए रोज़गार के ढेरों अवसर मुहैया करवा रही है. अब हम उन विभिन्न एरियाज का जिक्र करते हैं जिनमें बायोटेक्नोलॉजी पढ़ने वाले छात्रों के करियर के अभूतपूर्व विकास के लिए काफी संभावनाएं हैं.

1. मेडिकल राइटिंग्स

2. कॉलेज और विश्वविद्यालय

3. फार्मास्युटिकल कंपनियां

4. आईटी कंपनियां

5. हेल्थ केयर सेंटर्स

6. एग्रीकल्चर सेक्टर

7. एनिमल हसबेंड्री

8. जेनेटिक इंजीनियरिंग

9. रिसर्च लैबोरेट्रीज

10. फ़ूड मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री

बायोटेक्नोलॉजी के स्टूडेंट्स के लिए करियर ऑप्शन्स

बायोटेक्नोलॉजी की फील्ड का विकास बड़ी तेज़ रफ्तार से हो रहा है और बायोटेक्नोलॉजी में डिप्लोमा/ बीटेक/ एमटेक या डॉक्टोरल डिग्री करने वाले छात्रों के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है. चाहे वह कोई प्राइवेट सेक्टर हो या कोई गवर्नमेंट जॉब, बायोटेक कैंडिडेट्स को विभिन्न कंपनियों में बेहतरीन जॉब प्रोफाइल्स मिल सकते हैं. बायोटेक कैंडिडेट्स को आमतौर पर ऑफर किये जाने वाले कुछ प्रसिद्ध जॉब प्रोफाइल्स की लिस्ट नीचे दी जा रही है:

जॉब प्रोफाइल्स

डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद पलब्ध जॉब प्रोफाइल्स

भारत में विभिन्न पॉलिटेक्निक्स बायोटेक्नोलॉजी में डिप्लोमा करने वाले फ्रेशर्स को कोर्स पूरा होने के बाद निम्नलिखित जॉब ऑफर मिलते हैं:

1. क्लिनिकल लेबोरेटरी टेक्निशियन

2. बायोलॉजिकल सप्लाइज मैन्युफैक्चरर

3. एनवायर्नमेंटल टेक्निशियन

4. फ़ूड सेफ्टी टेक्निशियन

5. फार्मास्युटिकल रिसर्च टेक्निशियन

बीटेक करने के बाद उपलब्ध जॉब प्रोफाइल्स

बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक करने वाले छात्रों को आमतौर पर इंडियन और मल्टीनेशनल फर्म्स द्वारा निम्नलिखित जॉब ऑफर्स मिलते हैं:

1. लेबोरेटरी असिस्टेंट

2. प्रोफेसर / एसोसिएट प्रोफेसर

3. बायोटेक्नोलॉजी एक्सपर्ट

4. बिजनेस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव

5. सेल्स मैनेजर

6. मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव ट्रेनी

एमटेक करने के बाद उपलब्ध जॉब प्रोफाइल्स

बायोटेक्नोलॉजी में एमटेक करने वाले छात्रों को उनके शानदार करियर के लिए बहुत बढ़िया और रिवॉर्डिंग जॉब प्रोफाइल्स में काम करने के अवसर मिलते हैं:

1. बैक्टीरियोलॉजिस्ट

2. मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट

3. एम्ब्र्योलॉजिस्ट

4. जेनेटिसिस्ट

5. इम्यूनोलॉजिस्ट

6. माइक्रोबायोलॉजिस्ट

7. बायो-इन्फॉर्मेटिशियन

8. फार्माकोलॉजिस्ट

9. बायो-एनालिटिकल केमिस्ट

10. फ़ूड केमिस्ट

11. एनवायरनमेंटल केमिस्ट

12. मेडिकल बायोकेमिस्ट

पीएचडी करने के बाद उपलब्ध जॉब प्रोफाइल्स

डॉक्टोरल डिग्री की पढ़ाई करना काफी मुश्किल काम है. लेकिन, एक बार पीएचडी या डॉक्टोरल डिग्री प्राप्त कर लेने के बाद आपको इंडस्ट्री में लीडिंग रोल्स ऑफर किये जाते हैं. कुछ विशेष जॉब रोल्स निम्नलिखित हैं:

1. बायोटेक्नोलॉजी रिसर्चर

2. प्रोसेस इंजीनियर

3. बायोटेक्नोलॉजी एंड फार्मास्यूटिकल रिसर्च एनालिस्ट

4. लीड बायोटेक्नोलॉजी कंसलटेंट

5. क्लिनिकल प्रोजेक्ट मैनेजर

6. पेटेंट सर्च एनालिस्ट

7. रिसर्च साइंटिस्ट

8. मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट एंड लेबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट

9. क्वालिटी अश्योरेंस / क्वालिटी कंट्रोल एग्जीक्यूटिव

10. बायोटेक्नोलॉजी एक्सपर्ट

सैलरी प्रॉस्पेक्ट्स

मेक इन इंडिया डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व के टॉप 12 बायोटेक डेस्टिनेशन्स में से एक है और एशिया पेसिफिक में इसका तीसरा रैंक है. इससे पता चलता है कि बायोटेक्नोलॉजी की फील्ड से प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है. भारत में 350 से ज्यादा बायोटेक्नोलॉजिकल कंपनियां हैं और बायोटेक में स्पेशलाइजेशन कोर्स करना अब काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.

यहां इस फील्ड की सैलरी एक्सपेक्टेशन्स पेश की जा रही हैं जिनके बारे में आपको इस फील्ड में अपना करियर शुरु करने से पहले पता होना चाहिए. ये सैलरी एक्सपेक्टेशन्स किसी भी कंपनी में आपके सीनियरटी लेवल के अनुसार अलग-अलग हैं जिनका विवरण नीचे देखें: 

लेवल

सैलरी एक्सपेक्टेशन्स (लाख रु.)

फ्रेशर्स

2-3

मिड-लेवल

4-6

सीनियर लेवल

7-10

टॉप लेवल

<10

सोर्सपेस्केल डॉट कॉम

बायोटेक इंजीनियर्स के लिए मशहूर फर्म्स

इंडियन ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन अर्थात आईबीईएफ की सिफारिशों के अनुसार, बायोटेक इंजीनियर्स के करियर के शानदार विकास के लिए निम्नलिखित टॉप 10 फर्म्स विकास के अवसर ऑफर करती हैं:

1. बायोकॉन लिमिटेड

2. नेशनल डेरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा संचालित इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (आईआईएल)

3. ग्लैक्सोस्मिथक्लिन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड

4. ट्रांसएशिया बायो-मेडिकल्स

5. वॉकहार्ट

6. पिरामल ग्रुप

7. सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया लिमिटेड

8. रासी सीड्स(पी) लिमिटेड

9 शांथा बायोटेक्निक लिमिटेड

10. क्रेब्स बायोकेमिकल्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (केबीआईएल)

आईबीईएफ द्वारा लिस्टेड कंपनियों में एग्रीकल्चर, डेरी, केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल और अन्य कई फ़ील्ड्स शामिल हैं. ये कंपनियां प्रसिद्ध जॉब प्रोफाइल्स के साथ ही उभरते हुए बायोटेक्नोलॉजिस्ट्स को केवल जॉब्स के बेशुमार अवसर ही नहीं मुहैया करवाती हैं बल्कि, उन्हें विशेष इनोवेशन्स के लिए अवसर भी मुहैया करवाती हैं और ये इनोवेशन्स हमारे आजकल के काम करने के तरीकों में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं. 

बायोटेक्नोलॉजी स्ट्रीम पर और अधिक अपडेट्स प्राप्त करने के लिए, समय-समय पर jagranjosh.com पर विजिट करते रहें और सारी जानकारी एक ही साइट पर प्राप्त करें.

Monday, April 27, 2020

सिविल इंजीनियरिंग के बीच अंतर

रियल एस्टेट सेक्टर, खास तौर पर कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री इन दोनों प्रोफेशन पर पूरी तरह से आश्रित रहती है: एक आर्किटेक्ट्स और दूसरे सिविल इंजीनियर्स। कंसट्रक्शन बिजनेस का जहां तक संबंध है, आर्किटेक्ट्स और सिविल

इंजीनियर्स इनके अभिन्ना हिस्से हैं। क्योंकि ये दोनों ही खूबसूरत और सुविधाजनक निर्माण कार्य करने में मदद कर सकते हैं। प्रकृति में एक ही जैसे इन दोनों प्रोफेशंस के लिए इसी इंडस्ट्री में काम के अवसर हैं। और शायद इसीलिए विद्यार्थी दोनों में से क्या चुनें इसे लेकर पसोपेश में पड़ जाते हैं।

एक बात और भी है कि दोनों के बीच बहुत सारी समानताएं भी हैं। लेकिन इसके साथ ही दोनों के बीच बहुत सूक्ष्म लेकिन बहुत महत्वपूर्ण अंतर भी है। इन्हीं समानताओं और असमानताओं के प्रकाश में दोनों में से किसका चयन किया जाना चाहिए और क्यों इसका जवाब हम ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं।

स्टूडेंट्स की मदद करने के लिए और उनकी रुचि के अनुसार निर्णय करने के लिए हमने विषय का क्षेत्र, परिभाषा, काम करने की प्रकृति, संभावित आय, अच्छे कॉलेज और कुछ दूसरी चीजों की सूचनाएं हमने जमा की हैं।

विषय की परिभाषा

एक तरफ सिविल इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर दोनों ही अपने कोर्स और कंटेट में एक जैसी ही लगते हैं, तब बात इनकी परिभाषाओं की होती है। दोनों के बीच बहुत सारे फर्क हैं।

आर्किटेक्चर: आर्किटेक्चर शब्द की उत्पत्ति 'आर्किटेक्टोन" से हुई है। जिसका मतलब है 'चीफ-बिल्डर" या 'मुख्य भवन निर्माता"। जब इस शब्द की उत्पत्ति हुई होगी तब हो सकता है कि आर्किटेक्ट्स ही बिल्डर हुआ करते होंगे। लेकिन जब बात असली परिभाषा की होती है तो आर्किटेक्चर बिल्डिंग बनाने से ज्यादा कलात्मकता की मांग करता है। यह एक सृजनात्मक क्षेत्र हैं और यह किसी बिल्डिंग को बनाने की कला और विज्ञान दोनों से संबंद्ध होता है।

सिविल इंजीनियरिंग: सिविल इंजीनियरिंग एक बहुत वृहद् शब्द है। इसमें भवन के डिजाइन, कंस्ट्रक्शन और

उसके प्राकृतिक और भौतिक पर्यावरण के रखरखाव का काम शामिल है। इसमें सड़कें, पुल, नहरें, बांध और भवन हर चीज शामिल हैं। दूसरे शब्दों में सिविल इंजीनियरिंग भवन निर्माण के दूसरे संरचनात्मक तत्वों पर फोकस करता है। तय करता है कि कौन-सा मटेरियल का इस्तेमाल किया जाना है, संरचना लंबे समय तक कैसे टिकी रह सकती है और उसके लिए क्या-क्या प्रयास करने होंगे?

बहुत साधारण शब्दों में आर्किटेक्ट्स दी हुई जगह का सबसे अच्छा इस्तेमाल करते हुए अपनी कल्पनाशीलता और गणितीय कौशल से ज्यादा सुविधाजनक बनाता है। इसके उलट एक सिविल इंजीनियर असल में आर्किटेक्ट द्वारा दी गई डिजाइन को असेस करता है कि वह समय पर और उस जगह में उसी तरह का निर्माण करते हुए उतना मजबूत हो पाएगा? इस दृष्टि से एक पक्ष कलात्मक है और दूसरा व्यवहारिक।

क्या है दोनों विषयों के क्षेत्र का विस्तार?

विषय का क्षेत्र संभवत: सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण अंतर है आर्किटेक्चर और सिविल इंजीनियरिंग के बीच का।

आर्किटेक्चर बिल्डिंग की डिजाइन और संरचना में उसकी व्यवहारिकता और सौंदर्य से संबंध रखता है। आर्किटेक्चर मूलभूत संरचना के तत्वों के साथ बिल्डिंग के सुंदर और व्यावहारिक होने पर जोर देता है।

दूसरी तरफ सिविल इंजीनियर्स उसकी आर्किटेक्चरल डिजाइन के प्लान को लागू करता है और देखता है कि उन्हें किस तरह से एक्जिक्यूट किया जा सकता है। सिविल इंजीनियर उसके संरचनात्मक ढांचे की डिजाइन

पर फोकस करता है और एक्स्ट्रीम कंडीशन्स में उसके रखरखाव और उसकी मजबूती को निश्चित करता है।

कोर्स और एलिजिबिलिटी

आमतौर पर बी. आर्क का पांच साल का स्नातक कोर्स पूरे देश के आर्किटेक्चर स्कूल में करवाया जाता है। काउंसिल ऑफ आर्किक्टेक्चर द्वारा आयोजित कॉमन इंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से एडमिशन होता है। कंपलसरी सब्जेक्ट की जहां तक बात है, वे सब बिल्कुल इंजीनियरिंग की तरह ही होते हैं। बी. आर्क के स्टूडेंट को फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्य जैसे विषयों के साथ 12 वीं बोर्ड की परीक्षा पास करनी होती है। स्नातक कोर्स को पूरा करने के बाद बी. आर्क. के स्टूडेंट्स आर्किटेक्चर में दो साल का स्नातकोत्तर का कोर्स भी कर सकते हैं। सिविल इंजीनियरिंग करने वालों के लिए आमतौर पर दो रास्ते हैं। पहला डिग्री कोर्स कर लें, या फिर कम अवध‍ि का डिप्लोमा कोर्स कर लें। सिविल इंजीनियर बनना चाहने वालों के बीच सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच से बी. टेक. करना बहुत लोकप्रिय है।

यह कोर्स पूरे देश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में उपलब्‍ध होता है। इन कॉलेजों में एडमिशन जीईई मेन्स, एनआईटी,

आईआईआईटी और जीएफटीआई या फिर आईआईटी और आईएसएम-धनबाद में एडमिशन जेईई एडवांस

के परीक्षा में मेरिट के आधार पर होता है। जो सिविल इंजीनियरिंग करना चाहते हैं उनका 12 वीं बोर्ड में

फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्य लेकर पास होना आवश्यक है।

रोजगार के अवसर व पैकेज

सिविल इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर जैसे विषय को चुनने की एक सबसे बड़ी वजह ही यह है कि इसमें रोजगार के अवसर भी ज्यादा है और पैकेज भी अच्छा मिलता है। फिर भी दोनों कोर्स के बीच कौन-सा कोर्स चुना जाए इसे लेकर कंफ्यूजन भी कम नहीं है।

आर्किटेक्चर: आर्किटेक्ट अलग-अलग कंस्ट्रक्शन कंपनियों में डिजाइनर के तौर पर काम करता है। उसकी पहली जिम्मेदारी अपने क्लाइंट की जरूरत को समझना और उस हिसाब से व्यावहारिक, सुविधाजनक और सुंदर डिजाइन तैयार करना है। प्राइवेट बिल्डर्स के साथ-साथ सरकारी एजेंसी भी पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट्स, नेशनल बिल्डिंग ऑर्गेनाइजेशन, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ऑर्गेनाइजेशन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और अन्य में भी आर्किटेक्ट्स की जरूरत हुआ करती है। जहां तक वेतन की बात है तो यह 25 से 30 हजार महीने से शुरू होता है और यह आपके कौशल और अनुभव के आध्ाार पर एक आर्किटेक्ट 1 लाख रुपए महीना तक अर्न कर सकता है।

सिविल इंजीनियरिंग: सिविल इंजीनियरिंग में आर्किटेक्ट्स से ज्यादा स्कोप है। सिविल इंजीनियर्स के पास सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट संस्था के लिए भी बेहतरीन काम करने के अवसर होते हैं। रोजगार के अवसरों की जहां तक बात है, प्राइवेट संस्था में तो अवसर हैं ही, सरकारी संस्थाओं में भी जरूरत होती है। सरकारी संस्थाओं के साथ-साथ सिविल इंजीनियर्स की जरूरत तो इंडियन आर्मी में भी होती है। इसके अलावा वे अपनी खुद की इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी फर्म भी स्थापित कर सकते हैं। इसके साथ ही टीचिंग में भी बहुत मांग है। जिनके पास स्वयं लिखने का कौशल है वे अपने ही क्षेत्र में तकनीकी लेखन कर सकते हैं। आपका कौशल और आपकी योग्यता के आधार पर एक सिविल इंजीनियर की अर्निंग 4 से 8 लाख रुपए तक हो सकती है। आर्किटेक्ट्स की तरह की सिविल इंजीनियर्स को भी अनुभव और कौशल के आधार पर बेहतर अर्निंग हो सकती है।

निष्कर्ष

सिविल इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर दोनों ही बहुत उपयोगी एकेडमिक प्रोग्राम्स है, दोनों के अपने-अपने लाभ और हानि है। अपनी सुविधा और रुचि के हिसाब से आप दोनों में कोई भी कोर्स चुन सकते हैं। तरक्की का संबंध तो आपके बेहतर परफॉर्मेंस से है जो आपकी योग्यता और कौशल पर निर्भर करता है

Thursday, February 27, 2020

मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी में भविष्‍य

अब मेडिकल फील्ड में भी राहों की कमी नहीं है. बायोलॉजी के हर स्टुडेंट की ख्वाहिश होती है कि वह डॉक्टर बने. लेकिन अगर वह उसमें सफल नहीं होते, तो निराश होने की जरूरत नहीं है. मेडिकल में अन्य फील्ड भी हैं जहां जॉब की अच्छी संभावनाएं हैं. उनमें से एक है- मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी. मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट की डिमांड निजी और गवर्नमेंट फील्ड्स में भी खूब है.

कैसे होती है एंट्री?
लैब टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में करियर बनाने के लिए कई रास्ते खुल गए हैं. इसके लिए सर्टिफिकेट इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी, बीएससी मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स किए जा सकते हैं. आम तौर पर ऐसे कोर्स 12वीं के बाद किए जा सकते हैं. डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए 12वीं में बायोलॉजी सब्जेक्ट होना जरूरी है, जिसकी अवधि दो वर्ष की होती है. ऐसे इंस्टीट्यूट में एडमिशन लें, जहां अच्छे लैब उपकरण हों. इस फील्ड में जॉब तो बीएससी या डिप्लोमा करके ही हासिल किया जा सकता है. लेकिन किसी अच्छे सब्जेक्ट से पोस्ट ग्रेजुएशन कर लेने से ऑप्शन बढ़ जाते हैं और डिमांड एक स्पेशलिस्ट के रूप होने लगती है.

इस फील्ड में दो तरह के प्रोफेशनल्स काम करते हैं- एक मेडिकल लैबोरेट्री टेक्निशियन और दूसरे मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट. आम तौर पर टेक्निशियन के काम को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है- नमूना तैयार करना, जांच की मशीनों को ऑपरेट करना और उनका रखरखाव तथा जांच की रिपोर्ट तैयार करना. वहीं मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट रोगी के खून की जांच, टीशू, माइक्रोआर्गनिज्म स्क्रीनिंग, केमिकल एनालिसिस और सेल काउंट से जुड़े परीक्षण को अंजाम देता है

इस फील्ड में हैं कई राहें
पैरा मेडिकल सिर्फ नर्सिंग और हॉस्पिटल के प्रशासनिक कार्यों तक ही सीमित नहीं है. इसके दायरे में कई सारे फील्ड्स, जैसे- मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी, ऑर्थोटिक और प्रोस्थेटिक टेक्नोलॉजी, फार्मेसी, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ऐंड मैनेजमेंट, ऑडियोलॉजी ऐंड स्पीच थेरेपी, डेंटल हाइजिन ऐंड डेंटल मैकेनिक और स्वास्थ्य स्वच्छता निरीक्षण आदि आते हैं.

जॉब की संभावनाएं
डीपीएमआइ की प्रिंसिपल डॉ. अरुणा सिंह बताती हैं, ''इसमें गवर्नमेंट फील्ड के जॉब के लिए वैकेंसीज का इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में ऐसी बात नहीं है. मेडिकल फील्ड में प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केङ्क्षटग सेल्स, क्वालिटी इंश्योरेंस, एन्वायरनमेंट हेल्थ ऐंड इंश्योरेंस जैसे फील्ड्स में भी मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट की डिमांड है.” इस फील्ड में प्रोफेशनल्स की शुरुआती सैलरी 10,000-15,000 रु. प्रति माह है. अनुभव के बाद सैलरी बढऩे के साथ-साथ अपना लैब भी खोला जा सकता है. सरकारी फील्ड में शुरुआत से ही अच्छी सैलरी मिलती है.

हेल्थ सेक्टर में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डॉक्टर्स के साथ ही पारा मेडिकल प्रोफेशनल्स की जबरदस्त मांग है. इस सेक्टर में इनकी तादाद करीब 60 फीसदी होती है. एक सर्वे के मुताबिक, देश में 2015 तक 60 लाख से अधिक ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत पड़ेगी. योजना आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में करीब 10,00,000 नर्सों और बड़ी तादाद में ऐसे प्रोफेशनल्स की कमी है. जाहिर है इस फील्ड में करियर की काफी संभावनाएं हैं.

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Dear Sir

Saturday, February 22, 2020

डिप्लोमा इन आर्किटेक्चर

किसी इमारत की डिज़ाइन, योजना और उसका निर्माण करने वाले को आर्किटेक्चर कहते है। अगर आप कोई बड़ी बिल्डिंग बनाना चाहते है तो उसके लिए पहले डिज़ाइन बनाई जाती है। जो आर्किटेक्चर के द्वारा ही बनाई जाती है। आर्किटेक्चर उस डिज़ाइन के द्वारा आपको बताता है की वह बिल्डिंग कैसी दिखेगी। आर्किटेक्चर द्वारा पहले किसी इमारत की संरचना के लिए प्लान बनाया जाता है। प्लान बनाने के बाद आर्किटेक्चर द्वारा उसकी डिज़ाइन तैयार की जाती है जिसके बाद वह उसका निर्माण करवाता है।

किसी इमारत का निर्माण करने में आर्किटेक्चर की जरुरत होती है। सामान्य तौर पर आर्किटेक्चर का काम होता है किसी बिल्डिंग या इमारत की प्लानिंग के साथ उसकी डिज़ाइन तैयार करना। इसके साथ ही उसके और भी बहुत से कार्य होते है।

डिज़ाइन बनाना

आर्किटेक्चर का पहला काम किसी इमारत की डिज़ाइन को बनाने का होता है। इसमें बिल्डर जिस तरह की बिल्डिंग का निर्माण करना चाहते है उसके अनुसार डिज़ाइन बनाने के लिए आर्किटेक्ट को नियुक्त करते है और क्लाइंट जिस तरह की डिज़ाइन चाहता है उसके अनुसार इमारत का नक्शा या डिज़ाइन आर्किटेक्ट को बनाना होता ।

दस्तावेज़ बनाना

ग्राहक द्वारा जो डिज़ाइन बताई गयी होती है आर्किटेक्ट उसे पेपर पर उतारता है। डिज़ाइन को समझने के लिए तथा उसकी वास्तविकता को जानने के लिए चित्रों को बनाना होगा। इसमें आर्किटेक्ट को ग्राहक की सुविधा, बजट, आवश्यकता इन सभी के अनुसार दस्तावेज़ में संशोधन करने की आवश्यकता होती है।

निर्माण की भूमिकाएँ

इसमें निर्माण दस्तावेज़ों को बनाना होता है और जो डिज़ाइन बनाई जाती है उसे ठेकेदारों और निर्माण विशेषज्ञों के निर्देशों के अनुसार रूपांतरित किया जाता है। जिससे की वह इसे देखकर ही बिल्डिंग का निर्माण कर सके और जब पूरी तरह से यह परियोजना निर्माण के कार्य तक पहुँच जाती है तो आर्किटेक्ट का काम निर्माण की देखरेख करना, हस्ताक्षर करना, साईट के दौर और बैठकों में शामिल होना रहता है।

आर्किटेक्चर बनने के लिए आपको B.Arch कोर्स करना होता है। बहुत से आर्किटेक्चर कॉलेज NATA (National Aptitude Test in Architecture) के द्वारा एडमिशन करवाते है। तो आर्किटेक्चर बनने के लिए 12 वीं के बाद NATA की एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करना होती है। यह एप्टीट्यूड टेस्ट नेशनल लेवल पर आयोजित किया जाता है।

यह एग्जाम Critical Thinking, Architecture की समझ के लिए आपकी योग्यता को मापता है। इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के लिए आपको इस एग्जाम को पास करना होता है और इसके लिए कुछ योग्यताएं भी होती है जिन्हें पूरा करना होता है। तो जानते है

शैक्षिक योग्यता

  • B.Arch कोर्स करने के लिये आपको 12 वीं में गणित विषय से पास होना अनिवार्य है।
  • 12 वीं आपने 50 % से उत्तीर्ण की हो।
  • आपने 10 वीं के बाद किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से 3 वर्ष का डिप्लोमा किया हुआ हो।

आयु सीमा

NATA परीक्षा के आवेदन के लिए किसी तरह की न्यूनतम आयु सीमा नहीं है।

NATA की प्रवेश प्रक्रिया

  1. NATA परीक्षा के लिए ऑनलाइन ही Apply करना होगा।
  2. इस परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएँगे।
  3. परीक्षा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से होगी।

NATA Syllabus

NATA का Syllabus तीन विषय पर आधारित होता है। इन्हीं विषयों से सम्बन्धित प्रश्न परीक्षा में आपसे पूछे जाते है। जानते है NATA Exam का Syllabus क्या है।

Mathematics

इस विषय में Algebra (बीज-गणित), Matrices (मेट्रिक्स), Trigonometry (त्रिकोणमिति), Statistics & Probability (सांख्यिकी और संभाव्यता) पर आधारित प्रश्न आते है।

General Aptitude

इसमें Mathematical Reasoning (गणितीय तर्क), Sets & Relation (सेट्स और संबंध) से प्रश्न आते है।

Drawing Test

इसमें किसी वस्तु की ड्राइंग करना होती है और साथ ही रंगों का प्रयोग भी करना होता है।

NATA Exam Pattern

NATA का परीक्षा पैटर्न किस तरह का होगा, इसमें कितने प्रश्न आते है और कितने मार्क्स दिए जाते है यह आप आगे जानेंगे।

 

 

कुल मिलाकर आपसे 62 प्रश्न पूछे जाएँगे। जिसमें 20 प्रश्न गणित के होंगे, 40 प्रश्न general aptitude के आएँगे और 2 प्रश्न drawing test के होंगे।

 Architecture Courses

आर्किटेक्चर को कुछ कोर्सेज़ की जानकारी भी होना चाहिए। जिससे आप पूरे काम को कर पाओगे जिससे आप आर्किटेक्चर डिज़ाइन तैयार कर सकते है और किसी बिल्डिंग का डिज़ाइन बना पाएँगे। इनमें से किसी भी कोर्स को करके आप आर्किटेक्चर बन सकते है।
डिग्री कोर्स इन आर्किटेक्चर

  • डिप्लोमा कोर्स इन आर्किटेक्चर
  • मास्टर डिग्री इन आर्किटेक्चर
  • डिग्री इन आर्किटेक्चर
  • पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन आर्किटेक्चर
  • सस्टेनेबल कोर्स इन आर्किटेक्चर
  • एडवांस्ड सर्टिफिकेट कोर्स इन आर्किटेक्चरल
  • बैचलर डिग्री इन आर्किटेक्चर टेक्नोलॉजी एंड कंस्ट्रक्शन
  • मास्टर ऑफ़ लैंडस्केप आर्किटेक्चर कोर्स
  • बेसिक कोर्स इन आर्किटेक्चरल ड्राफ्ट्समैन

यह सारे कोर्स ग्रेजुएशन कोर्स है जिसे करके आप आर्किटेक्चर इंजीनियर बन सकते है।

B.Arch Entrance Exam

B.Arch में एडमिशन के लिए आपको एंट्रेंस एग्जाम देना होती है। यह एग्जाम कॉलेज या किसी इंस्टिट्यूट के द्वारा आयोजित की जाती है लेकिन आर्किटेक्चर में प्रवेश के लिए कुछ मुख्य परीक्षाएं भी होती है।

  • AIEEE
  • AMU Entrance Exam
  • KEAM
  • NATA
  • BEEE
  • IIT-JEE
  • UPTU SEE Exam

B.Arch की फीस

इसकी फ़ीस कॉलेज पर निर्भर करती है की आपने किस कॉलेज में एडमिशन लिया है। अगर आपने सरकारी कॉलेज में एडमिशन लिया है तो आपकी फ़ीस अलग होगी और अगर आपने प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन लिया है तो आपकी फ़ीस अलग होगी।

सरकारी कॉलेज

सरकारी कॉलेज में अगर आप एडमिशन लेते है तो आपकी फ़ीस 1.5 लाख से 2.5 लाख तक हो सकती है। यह राज्यों पर भी निर्भर करती है।

प्राइवेट कॉलेज

इस कोर्स की फ़ीस सरकारी कॉलेज के मुकाबले प्राइवेट कॉलेज में ज्यादा होती है। 3 लाख से 6 लाख तक होती है या इससे ज्यादा भी हो सकती है।

Monday, February 10, 2020

फुटवियर डिजाइनिंग में भविष्य

बदलते जमाने और फैशन के इस दौर में सिर्फ अच्छे कपड़े पहनना ही सीमित नहीं है बल्कि लोग फुटवियर पर भी पूरा ध्यान देते हैं। ऐसे फुटवियर की मांग है जो स्टाइलिश होने के साथ आरामदायक भी है। और उनकी इस जरूरत को पूरा करने का काम करते हैं फुटवियर डिजाइनर। पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में कॅरियर की बेहतर संभावनाएं उजागर हुई हैं। अगर आप भी समझदार व कुछ क्रिएटिव करने की चाह रखते हैं तो इस क्षेत्र में सुनहरा भविष्य देख सकते हैं।इसके बारे में बता रहे हैं दिल्ली में कार्यरत फुटवियर डिजाइनर- कार्यक्षमता इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आप में हमेशा कुछ हटकर व नया करने की क्षमता होनी चाहिए। इसके अलावा उनका रिसर्च वर्क भी अच्छा होना चाहिए ताकि वह मार्केट में चल रहे ट्रेंड से भली−भांति अवगत रहें। चूंकि उन्हें अपने डिजाइन को फाइनल लुक देने के लिए बहुत से लोगों की आवश्यकता होती है, इसलिए उनका अन्य लोगों के साथ मेलजोल भी अच्छा होना चाहिए। अगर आपके टीम वर्क व कोऑर्डिनेशन में कुछ कमी होती है तो उसका असर प्रॉडक्ट में भी दिखाई देता है। आजकल डिजाइनर्स अपने डिजाइन को कंप्यूटर पर ही बनाते हैं, इसलिए आपमें टेक्निकल स्किल्स भी होनी चाहिए। कार्य एक फुटवियर डिजाइनर का काम सिर्फ फुटवियर डिजाइन करना ही नहीं होता, बल्कि उसे आम लोगों की ख्वाहिश को ध्यान में रखते हुए अपना काम इस प्रकार करना होता है ताकि वह लेटेस्ट डिजाइन के शू कम से कम दामों में लोगों को मुहैया करा सके। वैसे भी कुछ समय पहले तक इस फील्ड में जो नया कॉन्सेप्ट आता था, वह कुछ महीने या सालों तक चलता था। लेकिन अब फैशन व स्टाइल रोज बदलते हैं। इसलिए उनका प्रमुख काम हमेशा कुछ नया सोचना व उसे अमल में लाना होता है।
  योग्यता इस क्षेत्र में अंडरग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध हैं। आप चाहें तो 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद इससे संबंधित कोर्स कर सकते हैं। लेकिन बीटेक या एमटेक करने के लिए आपका साइंस या इंजीनियरिंग बैकग्रांउड होना अनिवार्य है। कोर्स के दौरान छात्रों को जूते बनाने वाले मैटीरियल, पैटर्न, डिजाइन कॉन्सेप्ट, डिजाइन सॉफ्टवेयर व फैशन टेंडस आदि की विस्तृत जानकारी दी जाती है। संभावनाएं एक फुटवियर डिजाइनर के लिए सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी करियर की बेहतरीन संभावनाएं हैं। एक डिजाइनर विभिन्न शू कंपनियों में नौकरी की तलाश कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ अनुभव के बाद आप खुद के डिजाइन किए हुए फुटवियर की एक शॉप भी खोल सकते हैं। इससे जब आप बेहतरीन व लेटेस्ट कम दामों पर लोगों को मुहैया कराएंगे तो आपकी आमदनी भी अधिक होगी और आप खुद भी एक ब्रांड के रूप में मार्केट में उभरकर आएंगे। आमदनी इस फील्ड में जॉब के शुरूआती दौर में ही दो से तीन लाख रुपए सालाना मिल जाते हैं। तीन−चार साल का अनुभव होने के बाद यही सैलरी चार से पांच लाख रुपए सालाना हो जाती है। अगर आप किसी बड़ी कंपनियों से जुड़ते हैं और आपका काम लोगों को पसंद आता है तो आपकी सैलरी अधिक भी हो सकती है। सरकारी पहल इस क्षेत्र से जुड़े स्किल्ड लोगों की मांग पूरी करने के लिए सरकार की तरफ से पहल हुई है। इसके लिए 1963 में आगरा में सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की गई। इतना ही नहीं, वर्ष 1986 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की देख-रेख में नोएडा में फुटवियर डिजाइन ऐंड डेवलॅपमेंट इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई। इसके अलावा, देश के प्रमुख शहरों कानपुर, जालंधर, चेन्नई, मुंबई आदि में भी सरकारी और निजी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट चलाए जा रहे हैं। प्रमुख संस्थान फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, नोएडा। एवीआई स्कूल ऑफ फैशन व शू टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़। सेंटल फुटवियर ट्रेनिंग इंस्टीटयूट, आगरा। द सेंटर लेदर रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेन्नई। कर्नाटका इंस्टीटयूट ऑफ लेदर टेक्नोलॉजी, बंगलुरु।