Wednesday, February 17, 2021

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर में करियर

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर क्या होता है  

एक इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर वह होता है जो सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की डिजाइनिंग करने के साथ-साथ उनका विकास भी करता है। यहां बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर का किसी भी देश की टेक्नोलॉजी के विकास में काफी महत्वपूर्ण योगदान होता है क्योंकि वह विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बनाने के साथ-साथ उनका आविष्कार भी करता है। 

यहां आपको जानकारी के लिए यह भी बता दें कि एक इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर का काम काफी जिम्मेदारी वाला होता है और इसमें खतरा भी होता है इसलिए इस कार्य को काफी निपुणता के साथ किया जाता है। आज के समय में कोई भी काम बिजली के बिना नहीं हो सकता और इसके संचालन और नियंत्रण के लिए ही एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की आवश्यकता होती है। अगर कोई उम्मीदवार इस फील्ड में अपना कैरियर बनाना चाहता है तो उसे इसके लिए डिप्लोमा या फिर डिग्री कोर्स करना होता है। 

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स लिस्ट  

  • बीटेक इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
  • बीई इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग 

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनाने के लिए योग्यता क्या होनी चाहिए  

  • कैंडिडेट ने किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से 10+2 पास की हो। 
  • छात्र ने 12वीं कक्षा में विज्ञान विषय गणित के साथ पास किया हो। ‌
  • 12वीं कक्षा में छात्र ने 60% अंक हासिल किए होना अनिवार्य है। ‌

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स के लिए प्रवेश प्रक्रिया 

अगर कोई छात्र बारहवीं कक्षा के बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के कोर्स में एडमिशन लेना चाहता है तो उसकी जानकारी के लिए हम बता दें कि हमारे देश भारत में ऐसे बहुत सारे कॉलेज और संस्थान हैं जहां पर वह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर सकता है लेकिन किसी अच्छे सरकारी कॉलेज में दाखिले के लिए उसे प्रवेश परीक्षा को पास करना होता है।

हमारे देश में हर साल इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के लिए विभिन्न परीक्षाएं आयोजित करवाई जाती हैं जैसे- जेईई मेंस (JEE MAINS), डब्ल्यूबीजेईई (WBJEE), वीआईटीजेईई (VITJEE), एमएचटीसीईटी (MHTCET) इत्यादि। यहां एक बात आपको हम बता दें कि अगर आप प्रवेश परीक्षा में कामयाब नहीं हो पाते हैं तो फिर आपको किसी सरकारी संस्थान में दाखिला नहीं मिल सकेगा। लेकिन आपको इसके लिए निराश होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि देश में ऐसे दूसरे बहुत सारे कॉलेज हैं जहां पर आप बिना प्रवेश परीक्षा के भी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स कर सकते हैं। लेकिन फिर भी हम आप को यही सलाह देंगे कि पहले आप यह कोशिश करें कि आप देश में आयोजित की जाने वाली इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग परीक्षा को पास करने की कोशिश अवश्य करें। 

भारत में टॉप 10 इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कॉलेजों  

अगर आप एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं और आपको यह नहीं पता है कि आप कौन कौन से कॉलेजों से इस कोर्स को कर सकते हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब आप इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के लिए होने वाली परीक्षा को पास कर लेंगे तो आपको भारत के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा जिनके नाम इस प्रकार से है-

  1. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मुंबई (Indian Institute of Technology Mumbai)
  2. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी (Indian Institute of Technology Guwahati)
  3. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी दिल्ली (Indian Institute of Technology, Delhi)
  4. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर (Indian Institute of Technology, Kanpur)
  5. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी खड़कपुर (Indian Institute of Technology, Kharagpur)
  6. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मद्रास (Indian Institute of Technology, Madras)
  7. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (National Institute of Technology)
  8. मणिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (Manipal Institute of Technology, Manipal)
  9. दिल्ली कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग दिल्ली (Delhi college of Engineering, Delhi)
  10. बिट्स पिलानी (BITS Pilani)

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स फीस  

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स के लिए छात्र को फीस का अनुमान उसी समय लगता है जिस समय उसका एडमिशन होता है क्योंकि प्रत्येक कॉलेज या संस्थान में अलग अलग फीस का प्रावधान है। अगर आप प्रवेश परीक्षा पास कर लेते हैं तो आपको किसी भी सरकारी कॉलेज में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने का मौका मिल जाता है जहां पर आप अपना कोर्स बहुत कम पैसों में कर लेते हैं लेकिन इसके अलावा ऐसे बहुत सारे निजी संस्थान भी हैं जहां पर उम्मीदवार को काफी अधिक फीस देनी पड़ जाती है। 

इसके साथ साथ हम यह भी बता दें कि अगर आप डिग्री कोर्स करेंगे तो उसके लिए आपको अधिक फीस का भुगतान करना पड़ता है और वही अगर आप डिप्लोमा कोर्स करेंगे तो वहां पर आपको कम फीस का भुगतान करना होता है। हालांकि इस कोर्स को करने के लिए उम्मीदवार को हर साल 50 हजार से लेकर 2 लाख रुपए तक का खर्च करना पड़ सकता है। ‌लेकिन किसी संस्थान में यह फीस कम हो सकती है और किसी में आपको इससे भी अधिक फीस देनी पड़ सकती है। 

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स के बाद प्राइवेट सेक्टर में जॉब्स  

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एक ऐसी फील्ड है जहां पर उम्मीदवार को कभी भी नौकरी की कोई समस्या नहीं आती है क्योंकि देशभर में इनकी आवश्यकता भारी पैमाने पर रहती है। तो ऐसे में यदि कोई उम्मीदवार इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बन जाता है तो उसको विभिन्न प्राइवेट सेक्टर में काम करने के अवसर आसानी से मिल जाते हैं जैसे विद्युत उत्पादन केंद्र, रेडियो, टेलीविजन, इलेक्ट्रिकल कंपनी इत्यादि। 

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स के बाद गवर्नमेंट सेक्टर में जॉब्स 

जिस तरह से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को प्राइवेट विभागों में बहुत सारे नौकरी के अवसर आसानी से मिल जाते हैं ठीक उसी तरह से उसको सरकारी विभागों में भी जॉब करने के अवसर मिल जाते हैं। यहां बता दें कि हमारे देश में हर साल विभिन्न सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की भर्ती के लिए काफी रिक्तियां निकलती हैं जहां पर वह आवेदन कर सकते हैं। इस प्रकार वो सरकारी बिजली विभाग, सरकारी दफ्तरों, कॉलेज, संस्थानों, अस्पतालों इत्यादि में काम कर सकते हैं।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के कार्य  

एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के कार्य बहुत सारे होते हैं जिसमें काफी जोखिम भी होता है और उसके साथ साथ बिजली के उन कार्यों को करते समय इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को काफी सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं। निम्नलिखित हम आपको कुछ उन कार्यों के बारे में बता रहे हैं जो एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर करता है-

  • सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का परीक्षण और उनका रखरखाव। 
  • अगर किसी सिस्टम में किसी प्रकार का संशोधन करने की आवश्यकता है तो उसको ठीक करना। 
  • प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खोज करना और हर तरह के छोटे या बड़े इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसिज को बनाना।
  • किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में अगर कोई खराबी है तो उसको ठीक करने के साथ-साथ उसका नए वर्जन में अपडेट करना। 
  • देश के इलेक्ट्रॉनिक विभागों में बिजली से जुड़े हुए कार्य करना और वहां का सारा काम देखना।
  • इसके अलावा इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कंप्यूटर टेक्नोलॉजी में भी होने वाली खराबी को भी ठीक करने का काम भी करते हैं। ‌

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का वेतन कितनी होती है  

जब एक उम्मीदवार सफलतापूर्वक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का कोर्स पूरा कर लेता है और उसके बाद वह इस इंडस्ट्री में जॉब करना चाहता है तो आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि उसको शुरुआत में ही 30 हजार रुपए से लेकर 40 हजार रुपए हर महीने की सैलरी मिल जाती है। लेकिन जैसे-जैसे इस क्षेत्र में उसका अनुभव बढ़ता है जाता है तो उसकी सैलरी भी बढ़ने लगती है। यहां आपको एक बात हम यह भी बता दें कि अगर कोई उम्मीदवार किसी दूसरी कंट्री में जाकर नौकरी करता है तो तब वहां पर उसे हर महीने लाखों रुपए का वेतनमान मिलता है। ‌

निष्कर्ष

दोस्तों यह था हमारा आज का आर्टिकल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (Electrical Engineer) कैसे बनें। इस लेख के माध्यम से हमने आपको यह जानकारी दी कि किस प्रकार से आप 12वीं के बाद electrical engineer बन सकते हैं। इसके साथ-साथ हमने आपको यह भी बताया कि भारत में कौन से टॉप इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स के कॉलेज हैं और इसके अलावा हमने आपको यह भी बताया कि इस कोर्स को करने के लिए आपको कितनी फीस देनी पड़ सकती है। 

इसके साथ-साथ हमने आपको यह जानकारी भी दी कि एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के क्या-क्या काम होते हैं एवं अन्य दूसरी जानकारियां भी हमने आपको दे दी है और हमें पूरी आशा है कि यह आर्टिकल आपके लिए काफी उपयोगी रहा होगा। इसलिए हमारी आप से रिक्वेस्ट है कि इस आर्टिकल को सोशल मीडिया पर के साथ भी शेयर करें जो 12वीं के बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं। 

Tuesday, February 9, 2021

माइनिंग इंजीनियरिंग में करियर

भारत में खनिज पदार्थों की प्रचुरता को लेकर सभी वाकिफ हैं। कोयला उत्पादन में भारत दुनिया में जहां तीसरे स्थान पर है, वहीं लौह अयस्कों के उत्पादन में इसका स्थान चौथा है। बॉक्साइट रिजर्व के मामले में भी यह विश्व में सातवें पायदान पर है। यही वजह है कि यहां की माइनिंग इंडस्ट्री का देश की आर्थिक तरक्की में विशेष योगदान रहा है। हर साल यहां बड़ी तादाद में रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। आप भी चाहें, तो माइनिंग इंजीनियरिंग के जरिये इस इंडस्ट्री का हिस्सा बन सकते हैं।

क्या है माइनिंग इंजीनियरिंग?

आज जिस तरह से अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए खनिजों का इस्तेमाल हो रहा है, वह सब धरती से खनन करके ही निकाला जाता है। खनिजों के उत्खनन और उसे उपयोग लायक बनाने की पूरी प्रक्रिया को माइनिंग कहते हैं। वहीं, माइनिंग इंजीनियरिंग के तहत उन तकनीकों (मशीन, टूल्स, इंजन आदि) और तरीकों की पढ़ाई होती है, जिनसे धातुओं के अयस्क खनन के जरिए इकट्ठा किए जाते हैं। इसके अंतर्गत माइनिंग की संभावनाओं को चेक करना, उसका बजट तैयार करना, उससे होने वाले मुनाफे आदि का अंदाजा लगाना, क्षेत्र को माइनिंग के लिए विकसित करना, अयस्क से धातु का उत्पादन करना आदि शामिल है। एक माइनिंग इंजीनियर ही खदान की डिजाइन तैयार करने से लेकर, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी के जरिए खदान से अयस्कों को सुरक्षित निकालने की पूरी प्रक्रिया को अंजाम देता है। ये कामगारों के साथ ही पूरा ऑपरेशन भी देखते हैं। माइनिंग इंजीनियर को निरंतर जियोलॉजिस्ट एवं मेटलर्जिकल इंजीनियर्स के संपर्क में रहना होता है, ताकि नए-नए खदानों की जानकारी मिल सके।

शैक्षिक योग्यता

आइआइटी खड़गपुर की रिसर्च स्कॉलर पारामा मुखोपाध्याय के अनुसार, माइनिंग इंजीनियरिंग के लिए स्टूडेंट्स को फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स के साथ 12वीं करना होगा। इसके बाद वे माइनिंग में बीटेक और एमटेक कर सकते हैं।

स्टूडेंट्स चाहें, तो 10वीं के बाद भी माइनिंग एवं माइन सर्वेइंग में तीन साल का डिप्लोमा कर सकते हैं। वहीं, जो स्टूडेंट्स आइआइटी एवं एनआइटी से कोर्स करने के इच्छुक हैं, वे जेईई की परीक्षा को क्वालिफाई कर ऐसा कर सकते हैं। बिटसैट एवं वीआइटीईईई अपनी अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करती हैं। जो लड़कियां इस क्षेत्र में आना चाहती हैं, वे आइआइटी खड़गपुर, आइआइआटी, बीएचयू एवं आइएसएम, धनबाद से माइनिंग इंजीनियरिंग में बीटेक, एमटेक और पीएचडी कर सकती हैं। इनके अलावा, अन्ना यूनिवर्सिटी से भी पढ़ाई की जा सकती है।

संभावनाएं

देश के पब्लिक सेक्टर या सरकारी संस्थानों के साथ काम करने के अलावा, खाड़ी देशों, कुवैत, सऊदी अरब, कतर एवं ब्रिटेन में भी अच्छे मौके हैं। भारत में इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, आइपीसीएल, हिंदुस्तान जिंक, अडानी माइनिंग, कोल इंडिया जैसी कंपनियों में नियमित अवसर निकलते रहते हैं। इस फील्ड में युवाओं को शुरुआत में ही 6 से 8 लाख रुपये सालाना की आय हो सकती है।

प्रमुख संस्थान

आइआइटी, खड़ग़ुपर

www.iitkgp.ac.in

आइआइटी, बीएचयू

www.iitbhu.ac.in

आइआइटीआइएसएम, धनबाद

www.iitism.ac.in

आइआइटी, गुवाहाटी

http://www.iitg.ac.in

Saturday, February 6, 2021

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में कैरियर

अगर आप इनोवेटिव और क्रिएटिव माइंडेड हैं, तो ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का करियर अपना सकते हैं। इस फील्ड में शानदार पे-पैकेज के अलावा, जॉब की भरपूर संभावनाएं हैं। जानिए इस इनोवेटिव फील्ड में कैसे मिल सकती है आपको एंट्री..

भारतीयों की क्रय शक्ति और गाडि़यों की सेल्स बढ़ने से ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से उभरती हुई इंडस्ट्री बन गया है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। कहते हैं कि किसी भी ऑटो कंपनी में एक जॉब क्रिएट होने का मतलब है, तीन से पांच इनडायरेक्ट जॉब ऑप्शंस का खुलना। जिस तरह से मार्केट में देशी-विदेशी कंपनियों की नई इनोवेटिव कारें लॉन्च हो रही हैं, उसे देखते हुए ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। अगर आपको भी कार का पैशन है। मैकेनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैथमेटिक्स में दिलचस्पी है, तो ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के साथ करियर को रफ्तार दे सकते हैं।

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग?

एक ऑटोमोबाइल इंजीनियर पर कई प्रकार की जिम्मेदारियां होती हैं। उन्हें कम लागत में बेहतरीन ऑटोमोबाइल डिजाइन करना होता है। इसलिए इंजीनियर्स को सिस्टम और मशीनों से संबंधित रिसर्च और डिजाइनिंग में काफी समय देना पड़ता है। पहले ड्रॉइंग और ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है। इसके बाद इंजीनियर्स उनमें फिजिकल और मैथमेटिकल प्रिंसिपल्स अप्लाई कर उसे डेवलप करते हैं। इस तरह ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स प्लानिंग, रिसर्च वर्क के बाद एक फाइनल प्रोडक्ट तैयार करते हैं, जिसे मैन्युफैक्चरिंग के लिए भेजा जाता है। यहां भी उन्हें पूरी निगरानी रखनी होती है। व्हीकल बनने के बाद उसकी टेस्टिंग करना इनकी ही जवाबदेही होती है, जिससे कि मार्केट से कोई शिकायत न आए।

स्पेशलाइजेशन फायदेमंद

अगर कोई ऑटोमोबाइल इंजीनियर किसी खास एरिया में स्पेशलाइजेशन करता है, तो इससे उन्हें काफी फायदा होता है। मार्केट में उनकी एक अलग पहचान बनती है, जैसे-ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स एग्जॉस्ट सिस्टम, इंजन और स्ट्रक्चरल डिजाइन में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं।

बेसिक स्किल्स

ऑटोमोबाइल इंजीनियर बनने के लिए आपके पास टेक्निकल के साथ-साथ फाइनेंशियल नॉलेज होना भी जरूरी है। आपको जॉब के कानूनी पहलुओं से अपडेट रहना होगा। इसके अलावा, इनोवेटिव सोच और स्ट्रॉन्ग कम्युनिकेशन स्किल आगे बढ़ने में मदद करेंगे। इस फील्ड में ड्यूटी ऑवर्स काफी लंबे होते हैं। इसलिए आपको प्रेशर और डेडलाइंस के तहत काम करना आना चाहिए।

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

केमिस्ट्री, मैथ्स, फिजिक्स में दिलचस्पी रखने वाले युवा ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में करियर बना सकते हैं। इसके लिए 10वीं के बाद डिप्लोमा भी किया जा सकता है या फिर आप ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। हां, बीई या बीटेक करने के लिए आपका मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री, कंप्यूटर साइंस जैसे सब्जेक्ट्स के साथ 12वीं होना जरूरी है। आप ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में स्नातक के बाद ऑटोमोटिव्स या ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग में एमई या एमटेक भी कर सकते हैं। अगर विशेषज्ञता हासिल करनी हो, तो पीएचडी भी की जा सकती है। बीई या बीटेक में एंट्री के लिए आइआइटी, जेइइ, एआइइइइ, बिटसेट आदि अखिल भारतीय या राज्य स्तर की प्रवेश परीक्षाएं देनी होती हैं।

नौकरी की संभावनाएं

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में विभिन्न प्रकार की संभावनाएं मौजूद हैं। कार बनाने वाली कंपनी से लेकर सर्विस स्टेशन, इंश्योरेंस कंपनीज, ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स के लिए काफी मौके हैं। इसके अलावा, जिस तरह से सड़कों पर गाडि़यों की संख्या बढ़ रही है, उनकी मेंटिनेंस और सर्विसिंग करने वाले प्रोफेशनल्स की मांग में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। आप ऑटोमोबाइल टेक्निशियन, कार या बाइक मैकेनिक्स, डीजल मैकेनिक्स के रूप में काम कर सकते हैं। आप किसी ऑटो कंपनी में सेल्स मैनेजर, ऑटोमोबाइल डिजाइंस पेन्ट स्पेशलिस्ट भी बन सकते हैं।

सैलरी पैकेज

एक ग्रेजुएट ऑटोमोबाइल इंजीनियर ट्रेनिंग के समय से ही कमाना शुरू कर देता है। कहने का मतलब यह कि ट्रेनिंग के दौरान कंपनियां उन्हें 15 से 30 हजार रुपये तक का स्टाइपेंड आसानी से दे देती हैं। अगर नौकरी कंफर्म हो गई, तो सैलरी खुद-ब-खुद बढ़ जाती है। वैसे, इंडिया में एक ऑटोमोबाइल इंजीनियर को सालाना 3 से 8 लाख रुपये मिल जाते हैं। सबसे ज्यादा सैलरी व्हीकल मैन्युफैक्चरर देते हैं। इसके बाद प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग फम्र्स भी उन्हें अच्छा पे-पैकेज ऑफर करती हैं। इस फील्ड में अच्छा खासा अनुभव होने के बाद एक ऑटोमोबाइल इंजीनियर 25 से 35 लाख रुपये सालाना आसानी से कमा सकते हैं।

Wednesday, January 20, 2021

टूल्स डिजाइनिंग में संवारे करियर

मैन्यूफैक्चरिंग इंजीनियरिंग का ही एक हिस्सा है टूल्स डिजाइनिंग। आज के औद्योगिक माहौल में टूल्स इंजीनियरों की काफी मांग है... उत्पाद का स्वरूप चाहे जैसा भी हों, उनके निर्माण के लिए टूल्स की आवश्यकता होती ही है। टूल्स ही मशीनरी का आधार होते हैं, जिनकी मदद से किसी प्रोडक्ट को मनचाहे रूप में ढाला जा सकता है। उत्पादों के बदलते स्वरूप के अनुसार नई-नई मशीनरी की जरूरत भी निरंतर बनी रहती है। यही कारण है कि वर्तमान औद्योगिक माहौल में टूल्स डिजाइनरों की मांग काफी है। विषय की रूपरेखा टूल्स एनालिसिस, प्लानिंग, डिजाइनिंग और डेवलपमेंट से संबंधित विभिन्न कार्य टूल्स डिजाइनिंग के तहत संपन्न किए जाते हैं। ऐसी डिजाइनिंग का मुख्य मकसद बेहतर टूल्स और मशीनों का निर्माण करके उत्पादकता को सुविधाजनक और गुणवत्तापूर्ण बनाना होता है। मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री की सफलता में टूल्स की बेहतरीन डिजाइनिंग की बेहद खास भूमिका होती है। पाठ्यक्रम और शैक्षणिक योग्यता पीजी डिप्लोमा इन टूल डिजाइन ऐंड सीएडी/सीएएम, मास्टर ऑफ सीएमएम ऐंड सीएनसी टेक्नोलॉजी, बीटेक इन टूल इंजीनियरिंग, मास्टर ऑफ सीएडी, डिप्लोमा इन टूल ऐंड डाई मेकिंग, सर्टिफिकेट कोर्स इन टर्नर/मिलर/फिल्टर, इंटीग्रेटेड कोर्स इन मॉड्यूल डिजाइन आदि इस क्षेत्र के खास पाठ्यक्रम हैं। पाठ्यक्रमों की प्रकृति के अनुसार उनकी अवधि 6 महीने से लेकर 4 वर्ष तक की हो सकती है। जिन विद्यार्थियों ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री अथवा डिप्लोमा किया हो, उनका इन कोर्सेज में नामांकन हो सकता है। इसके अलावा संबंधित स्ट्रीम में आईटीआई करने वाले विद्यार्थी भी एडमिशन के हकदार हैं। कई संस्थान, जैसे सीआईटीडी में विद्यार्थियों को एंट्रेस टेस्ट के माध्यम से दाखिला मिलता है। मौके कहां-कहां टूल्स डिजाइनिंग से संबंधित प्रोफेशनल्स की मांग टूल्स डिजाइन कंपनी, टूल्स मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी आदि में बनी रहती है। औद्योगिक ईकाइयां चाहे जिस भी प्रकृति की हों, टूल्स डिजाइनरों के लिए अवसर उपलब्ध होते हैं। दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ टूल इंजीनियरिंग, 

दिल्ली www.dite.delhigovt.nic.in एनटीटीएफ, बेंगलुरु www.nttftrg.com इंडो-जर्मन टूल रूम, औरंगाबाद www.igtr-aur.org सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ टूल डिजाइन, बेंगलुरु www.citdindia.org इंडियन मशीन टूल मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन, बेंगलुरु www.imtma.in

Friday, January 15, 2021

प्रदूषण और वायु प्रदूषण से बचाव के क्षेत्र में करियर

  • एयर क्वालिटी रिसर्च एनालिस्ट

ये पेशेवर देश के विभिन्न हिस्सों की एयर क्वालिटी की निगरानी करके अपना रिसर्च वर्क और सटीक रिपोर्ट्स तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं. रोज़ाना की एयर क्वालिटी रिपोर्ट्स के आधार पर ही केंद्र और राज्य सरकारों के साथ अन्य विभिन्न संबद्ध संगठन प्रदूषण के नियंत्रण के लिए सभी जरुरी कदम उठाने के लिए नीतियां बनाते और लागू करते हैं.

  • एनवायरनमेंट एक्सपर्ट

ये पेशेवर हमारी पृथ्वी के नेचुरल एनवायरनमेंट को कायम रखने के लिए इको-फ्रेंडली टेक्नोलॉजीज़ अपनाने के साथ पोल्यूशन कंट्रोल के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

  • एनवायरनमेंट इम्पैक्ट स्पेशलिस्ट

ये पेशेवर लोगों को एनवायरनमेंट के प्रति जागरूक करते हैं ताकि लोग अपने आस-पास फैलने वाले प्रदूषण को रोकने में सहयोग देकर एनवायरनमेंट के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं. ये पेशेवर लोगों को प्रदूषण से होने वाले नुकसान और प्रदूषण को रोकने के कारगर तरीकों की जानकारी देते हैं.  

 

  • कंजरवेशनिस्ट

ये पेशेवर मुख्य रूप से वाटर/ सोल/ फ़ॉरेस्ट कंजर्वेशन और प्रिजर्वेशन के कार्य करते हैं और एनवायरनमेंट को सुरक्षित रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

  • व्हीकल एनर्जी एनालिस्ट

ये पेशेवर व्हीकल एनर्जी एनालिसिस के माध्यम से एयर पॉल्यूशन को कम करने के लिए स्मार्ट चार्जिंग जैसे ऑप्शन्स के लाभ बताते हैं.

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल सॉफ्टवेयर डेवलपर

ये पेशेवर ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए इलेक्ट्रिकल व्हीकल सॉफ्टवेयर डिज़ाइन और डेवलप करते हैं ताकि व्हीकल्स के इन नए डिज़ाइन्स से व्हीकल पॉल्यूशन को कम किया जा सके.

  • एनवायरनमेंट इंजीनियर

ये पेशेवर एनवायरनमेंट को सुरक्षित रखने के लिए और प्रदूषण की समस्या के स्थाई समाधान के लिए इको-फ्रेंडली टेक्नीक्स विकसित करते हैं.

  • एनर्जी एंड सस्टेनेबिलिटी इंजीनियर/ मैनेजर

ये पेशेवर एनर्जी के नॉन-कन्वेंशनल तरीकों जैसेकि सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी, बायो फ्यूल्स को बढ़ावा देने के लिए नई टेक्नोलॉजी को विकसित करने और इस्तेमाल करने से संबंधित कामकाज देखते हैं.

  • रिस्क मैनेजमेंट एक्सपर्ट

ये पेशेवर विभिन्न कंपनियों और दफ्तरों में रोज़ाना होने वाले काम-काज और प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े रिस्क या खतरों से कंपनी और कर्मचारियों की रक्षा करते हैं.

  • प्रोडक्शन मैनेजर

इन पेशेवरों का प्रमुख काम विभिन्न उद्योगों में होने वाले प्रोडक्शन को इको-फ्रेंडली बनाना है ताकि हमारा एनवायरनमेंट सुरक्षित रहे.

 

प्रदूषण और वायु प्रदूषण से बचाव: प्रमुख एजुकेशनल कोर्सेज और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

भारत में स्टूडेंट्स के लिए ग्रीन सेक्टर या एनवायरनमेंट की फील्ड से संबंधित विभिन्न एजुकेशनल कोर्सेज और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया निम्नलिखित हैं:

  • बीएससी/ बीई/ बीटेक– एनवायरनमेंटल साइंस -  स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त एजुकेशनल बोर्ड से अपनी 12वीं क्लास साइंस स्ट्रीम में पास की हो. इन कोर्सेज की अवधि 3 वर्ष है. इसी तरह, इस फील्ड में सर्टिफिकेट कोर्सेज की अवधि 6 महीने से 1 वर्ष तक हो सकती है.
  • बीई/ बीटेक– एनवायरनमेंट इंजीनियरिंग - स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त एजुकेशनल बोर्ड से अपनी 12वीं क्लास साइंस स्ट्रीम में पास की हो. इन कोर्सेज की अवधि 4 वर्ष है.
  • एमएससी/ एमई/ एमटेक– एनवायरनमेंटल साइंस – स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से साइंस स्ट्रीम में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की हो. इन कोर्सेज की अवधि 2 वर्ष है.
  • एमई/ एमटेक– एनवायरनमेंटल - स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से साइंस स्ट्रीम में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की हो. इन कोर्सेज की अवधि 2 वर्ष है.
  • एमफिल– एनवायरनमेंटल साइंस –स्टूडेंट्स के पास किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी या कॉलेज से साइंस की स्ट्रीम में पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री हो. इस कोर्स की अवधि 2 वर्ष है.
  • पीएचडी– एनवायरनमेंटल साइंस –स्टूडेंट्स के पास एमफिल की डिग्री हो और इस कोर्स की अवधि 3 – 5 वर्ष है.

 

भारत के ये टॉप एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स करवाते हैं विभिन्न कोर्सेज

आप निम्नलिखित एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स से एनवायरनमेंट की फील्ड से संबंधित विभिन्न डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज कर सकते हैं:

  • दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
  • जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
  • टेरी स्कूल ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज़, नई दिल्ली
  • चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ
  • इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंसेज, बैंगलोर
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मुंबई/ खड़गपुर
  • वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, उत्तरांचल
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, लखनऊ/ मुंबई/ खड़गपुर/ दिल्ली/ रुड़की/ कलकत्ता/ बैंगलोर

पर्यावरण प्रदूषण से बचाव और सुरक्षा: सैलरी पैकेज

भारत में इस फील्ड में किसी फ्रेशर को अपने करियर की शुरुआत में इस फील्ड में एवरेज 3-4 लाख रुपये सालाना मिलते हैं और कुछ वर्षों के अनुभव के बाद ये पेशेवर एवरेज 6-8 लाख रुपये सालाना तक कमा सकते हैं. ग्रीन सेक्टर से संबंधित MBA प्रोफेशनल्स को शुरू में ही किसी बड़े कॉर्पोरेट हाउस या MNC में एवरेज 8-10 लाख सालाना का सैलरी पैकेज मिल जाता है. यहां बड़ी नेशनल और इंटरनेशनल कंपनियों के साथ ही विभिन्न इंस्टीट्यूशन्स में इन पेशेवरों को अपने टैलेंट और एजुकेशनल स्किल्स के मुताबिक बेहतरीन सैलरी पैकेज मिलता है

Thursday, December 24, 2020

डाटा साइंस में बनाएं अपना करियर

देश-दुनिया में डाटा साइंस प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। जितनी इनकी डिमांड है, उस हिसाब से प्रोफेशनल्स नहीं मिल पा रहे हैं। आउटबाउंड हायरिंग स्टार्टअप बिलॉन्ग की टैलेंट सप्लाई इंडेक्स 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में चार गुना तेजी से डाटा साइंटिस्ट्स की मांग बढ़ी है। पिछले एक साल में डाटा साइंटिस्ट्स की मांग में 417 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आइए, जानते हैं कैसे इस ग्रोइंग फील्ड में करियर बनाया जा सकता है?

टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही है। आज तकरीबन हर फील्ड में इसका इस्तेमाल होने लगा है। जिसकी वजह से जॉब्स के नए-नए अवसर भी सामने आ रहे हैं। इस फील्ड में खासकर डाटा साइंटिस्ट प्रोफेशनल्स की डिमांड पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है।

इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, 2018 में देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तहत डाटा साइंटिस्ट सहित डाटा से जुड़े करीब पांच लाख विशेषज्ञों की मांग है, जो 2021 तक बढ़कर 7.5 लाख से ज्यादा हो जाएगी। आईटी मंत्रालय के मुताबिक, एआई के तहत डाटा साइंटिस्ट के अलावा, डाटा आर्किटेक्ट और सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मांग भी बढ़ रही है।

सबसे ज्यादा डिमांड डाटा साइंटिस्ट की है, जो खोए हुए डाटा खोजने, गड़बड़ियों को दूर करने और तमाम खामियों से बचाव करने में मददगार होते हैं। फिलहाल सर्विस प्रोवाइडर के बीच 2.5 लाख, स्टार्टअप में 25 हजार, आईटी कंपनियों में 26 हजार, अन्य क्षेत्र की कंपनियों को 1.40 लाख और विदेशी कंपनियों में 92 हजार डाटा साइंटिस्ट्स की जरूरत है।

  

डिमांड है भरपूर

रिपोर्ट के मुताबिक, अगले तीन साल में करीब पांच लाख से ज्यादा डाटा साइंटिस्ट की जरूरत होगी। कंपनियों, संस्थानों और हेल्थकेयर क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों में इसकी डिमांड बढ़ी है। आने वाले दिनों में डिजिटल क्षेत्र में भारत दुनिया में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

डाटा साइंटिस्ट गायब हुए डाटा को खोजने में मुख्य भूमिका निभाता है। साथ ही, यह तकनीक का इस्तेमाल करके डाटा का अध्ययन और उस पर निर्णय लेता है। वैसे देखा जाए, तो कुल 5.11 लाख डाटा साइंटिस्ट की मांग की तुलना में देश में महज 1.44 लाख कुशल प्रोफेशनल्स मौजूद हैं।

नेचर ऑफ वर्क

डाटा साइंटिस्ट, डाटा से जुड़ी स्टडी करते हैं। इसके तहत डाटा को जुटाकर उनके अध्ययन और एनालिसिस के माध्यम से भविष्य की योजना बनाई जा सकती है। साथ ही, डाटा साइंटिस्ट अपनी कंपनी के लिए डाटा एनालिसिस करते हैं, जिससे उसे बिजनेस में फायदा हो। डाटा साइंस में आंकड़े के विश्लेषण को तीन भागों में बांटा जाता है।

पहले डाटा को जुटाया जाता है और उनको स्टोर किया जाता है। उसके बाद डाटा की पैकेजिंग यानी विभिन्न श्रेणियों के हिसाब से उनकी छंटाई की जाती है और अंत में डाटा की डिलिवरी की जाती है। डाटा साइंटिस्ट के पास प्रोग्रामिंग, स्टेटिस्टिक्स, मैथमेटिक्स और कंप्यूटर की अच्छी जानकारी होती है।

वे डाटा को जमा करके उनका बहुत ही बारीकी से विश्लेषण करते हैं। इसके लिए वे स्टेटिस्टिक्स और मैथ्स के टूल्स का उपयोग करते हैं। इसको वे पॉवर प्वाइंट, एक्सल, गूगल विजुअलाइजेशन के जरिए प्रस्तुत करते हैं। इनके पास किसी भी तरह के डाटा को बेहतर तरीके से विजुअलाइज करने की क्षमता होती है।

साथ ही, विभिन्न सेक्टरों द्वारा दिए गए उलझाऊ और जटिल डाटा में से अहम जानकारियों को बारीकी से खंगालते हैं। वे यह भी पता लगाते हैं कि किस वजह से कंपनी की स्थिति में गिरावट आ रही है या कंपनी के लिए कौन-सा नया उद्यम ज्यादा फायदेमंद होगा।

क्वालिफिकेशन

डाटा साइंटिस्ट बनने के लिए कैंडिडेट के पास मैथ्स, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, अप्लाइड साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक और एमएस की डिग्री होना जरूरी है। यही नहीं कैंडिडेट्स को सांख्यिकी मॉडलिंग, प्रॉबेबिलिटी की नॉलेज होना बहुत जरूरी है।

इसके अलावा, पाइथन, जावा, आर, एसएएस जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की समझ होना भी बेहद जरूरी है। एडवांस्ड सर्टिफिकेट और एडवांस्ड प्रोग्राम जैसे कुछ प्रोग्राम के लिए इंजीनियरिंग या मैथ्स या स्टेटिस्टिक्स में बैचलर डिग्री या मास्टर डिग्री होने के साथ-साथ दो वर्ष का अनुभव भी चाहिए। 

मेन कोर्सेस

डाटा साइंटिस्ट की पढ़ाई के लिए देश में कई संस्थानों द्वारा बिजनेस एनालिटिक्स स्पेशलाइजेशन में शॉर्ट टर्म कोर्स कराए जा रहे हैं। आईआईएम कोलकाता, आईएसआई कोलकाता और आईआईटी खड़गपुर ने मिल कर दो वर्षीय फुलटाइम पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस एनालिटिक्स प्रोग्राम की शुरुआत की है।

इसके अलावा, एडवांस्ड सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन बिजनेस एनालिटिक्स, एग्जिक्युटिव प्रोग्राम इन बिजनेस एनालिटिक्स, एडवांस्ड बिजनेस एनालिटिक्स एंड बिजनेस ऑप्टिमाइजेशन प्रोग्राम, मास्टर्स इन मैनेजमेंट, पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन मार्केट रिसर्च एंड डाटा एनालिटिक्स, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस एनालिटिक्स जैसे कोर्स किए जा सकते हैं।

  

जॉब्स ऑप्शन

इस फील्ड में आप डाटा साइंटिस्ट, डाटा एनालिस्ट, सीनियर इंफॉर्मेशन एनालिस्ट, इंफॉर्मेशन ऑफिसर, डाटा ऑफिसर, सॉफ्टवेयर टेस्टर, सपोर्ट एनालिस्ट और बिजनेस एनालिस्ट के तौर पर करियर बना सकते हैं। इस फील्ड में सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में जॉब के बहुत मौके हैं।

अगर प्राइवेट सेक्टर की बात करें, तो आइटी, बैंक्स, इंश्योरेंस, फाइनेंस, टेलीकॉम, ई-कॉमर्स, रिटेल और आउटसोर्सिंग कंपनीज में ऐसे प्रोफेशनल्स की बहुत डिमांड है। इसके अलावा, युवाओं के लिए कंस्ट्रक्शन, यूटिलिटी, ऑयल/गैस/माइनिंग, हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्टेशन, कंसल्टिंग और मैन्युफेक्चरिंग कंपनीज में भी काफी संभावनाएं हैं।

अगर चाहें तो कॉलेज या यूनिवर्सिटीज के रिसर्च विंग से भी जुड़ सकते हैं। डाटा प्रोफेशनल्स की डिमांड अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में भी बहुत है। कई बड़ी कंपनियों जैसे गूगल, अमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट, ईबे, लिंक्डइन, फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनीज को भी डाटा साइंटिस्ट्स की जरूरत पड़ती है।

सैलरी

डाटा साइंटिस्ट्स की सैलरी उसके अनुभव पर भी निर्भर करती है। लेकिन यह काफी हाई-पेइंग जॉब है। अगर एवरेज सैलरी की बात की जाए, तो डाटा साइंटिस्ट्स को करीब 70-80 लाख रुपए सालाना तक मिल सकता है। हालांकि शुरुआती दौर में प्रोफेशनल्स को 8 से 10 लाख रुपए का सालाना पैकेज आसानी से मिल जाता है। 

प्रमुख संस्थान

आईएसआई, कोलकाता 

वेबसाइट: www.isical.ac.in 

आईआईएम, कोलकाता, लखनऊ

वेबसाइट: www.iimcal/l.ac.in 

आईआईटी, खड़गपुर

वेबसाइट: www,iitkgp.ac.in 

एमआईसीए, अहमदाबाद

वेबसाइट: www.mica.ac.in 

-आईआईएससी, बेंगलुरु 

वेबसाइट: www,iisc.ernet.in 

 

एक्सपर्ट व्यू अनिल सेठी, करियर एक्सपर्ट

डाटा प्रोफेशनल्स की बढ़ेगी मांग 

इंडिया ही नहीं, पूरी दुनिया में बिजनेस एनालिटिक्स का उपयोग बढ़ रहा है। आज बैंकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस, ई-कॉमर्स और डाटा एनालिटिक्स से जुड़ी स्टार्टअप्स कंपनियां इसे ज्यादा से ज्यादा यूज करने पर जोर दे रही हैं। कंपनियां भी इस क्षेत्र में लगातार इंवेस्टमेंट कर रही हैं। ऐसे में डाटा वॉल्यूम बढ़ने से बहुत-सी कंपनियों के लिए डाटा एनालिस्ट और डाटा साइंटिस्ट्स को हायर करना अनिवार्य हो गया है।

वैसे, देखा जाए, तो आजकल कमोबेश सभी कंपनियां बिजनेस एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए डाटा को नए तरीके से यूज करने की कोशिश कर रही हैं। साथ में, बिजनेस प्रोसेस की लागत भी कम करना चाहती हैं और कस्टमर को अच्छा शॉपिंग एक्सपीरिएंस भी फील कराना चाहती हैं। इसलिए डाटा को फिल्टर करके सटीक जानकारी निकालना अब आसान हो गया है। ऐसे में डाटा प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।


Sunday, December 13, 2020

डिप्लोमा इन आर्किटेक्चर

किसी इमारत की डिज़ाइन, योजना और उसका निर्माण करने वाले को आर्किटेक्चर कहते है। अगर आप कोई बड़ी बिल्डिंग बनाना चाहते है तो उसके लिए पहले डिज़ाइन बनाई जाती है। जो आर्किटेक्चर के द्वारा ही बनाई जाती है। आर्किटेक्चर उस डिज़ाइन के द्वारा आपको बताता है की वह बिल्डिंग कैसी दिखेगी। आर्किटेक्चर द्वारा पहले किसी इमारत की संरचना के लिए प्लान बनाया जाता है। प्लान बनाने के बाद आर्किटेक्चर द्वारा उसकी डिज़ाइन तैयार की जाती है जिसके बाद वह उसका निर्माण करवाता है।

किसी इमारत का निर्माण करने में आर्किटेक्चर की जरुरत होती है। सामान्य तौर पर आर्किटेक्चर का काम होता है किसी बिल्डिंग या इमारत की प्लानिंग के साथ उसकी डिज़ाइन तैयार करना। इसके साथ ही उसके और भी बहुत से कार्य होते है।

डिज़ाइन बनाना

आर्किटेक्चर का पहला काम किसी इमारत की डिज़ाइन को बनाने का होता है। इसमें बिल्डर जिस तरह की बिल्डिंग का निर्माण करना चाहते है उसके अनुसार डिज़ाइन बनाने के लिए आर्किटेक्ट को नियुक्त करते है और क्लाइंट जिस तरह की डिज़ाइन चाहता है उसके अनुसार इमारत का नक्शा या डिज़ाइन आर्किटेक्ट को बनाना होता ।

दस्तावेज़ बनाना

ग्राहक द्वारा जो डिज़ाइन बताई गयी होती है आर्किटेक्ट उसे पेपर पर उतारता है। डिज़ाइन को समझने के लिए तथा उसकी वास्तविकता को जानने के लिए चित्रों को बनाना होगा। इसमें आर्किटेक्ट को ग्राहक की सुविधा, बजट, आवश्यकता इन सभी के अनुसार दस्तावेज़ में संशोधन करने की आवश्यकता होती है।

निर्माण की भूमिकाएँ

इसमें निर्माण दस्तावेज़ों को बनाना होता है और जो डिज़ाइन बनाई जाती है उसे ठेकेदारों और निर्माण विशेषज्ञों के निर्देशों के अनुसार रूपांतरित किया जाता है। जिससे की वह इसे देखकर ही बिल्डिंग का निर्माण कर सके और जब पूरी तरह से यह परियोजना निर्माण के कार्य तक पहुँच जाती है तो आर्किटेक्ट का काम निर्माण की देखरेख करना, हस्ताक्षर करना, साईट के दौर और बैठकों में शामिल होना रहता है।

आर्किटेक्चर बनने के लिए आपको B.Arch कोर्स करना होता है। बहुत से आर्किटेक्चर कॉलेज NATA (National Aptitude Test in Architecture) के द्वारा एडमिशन करवाते है। तो आर्किटेक्चर बनने के लिए 12 वीं के बाद NATA की एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करना होती है। यह एप्टीट्यूड टेस्ट नेशनल लेवल पर आयोजित किया जाता है।

यह एग्जाम Critical Thinking, Architecture की समझ के लिए आपकी योग्यता को मापता है। इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के लिए आपको इस एग्जाम को पास करना होता है और इसके लिए कुछ योग्यताएं भी होती है जिन्हें पूरा करना होता है। तो जानते है

शैक्षिक योग्यता

  • B.Arch कोर्स करने के लिये आपको 12 वीं में गणित विषय से पास होना अनिवार्य है।
  • 12 वीं आपने 50 % से उत्तीर्ण की हो।
  • आपने 10 वीं के बाद किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से 3 वर्ष का डिप्लोमा किया हुआ हो।

आयु सीमा

NATA परीक्षा के आवेदन के लिए किसी तरह की न्यूनतम आयु सीमा नहीं है।

NATA की प्रवेश प्रक्रिया

  1. NATA परीक्षा के लिए ऑनलाइन ही Apply करना होगा।
  2. इस परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएँगे।
  3. परीक्षा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से होगी।

NATA Syllabus

NATA का Syllabus तीन विषय पर आधारित होता है। इन्हीं विषयों से सम्बन्धित प्रश्न परीक्षा में आपसे पूछे जाते है। जानते है NATA Exam का Syllabus क्या है।

Mathematics

इस विषय में Algebra (बीज-गणित), Matrices (मेट्रिक्स), Trigonometry (त्रिकोणमिति), Statistics & Probability (सांख्यिकी और संभाव्यता) पर आधारित प्रश्न आते है।

General Aptitude

इसमें Mathematical Reasoning (गणितीय तर्क), Sets & Relation (सेट्स और संबंध) से प्रश्न आते है।

Drawing Test

इसमें किसी वस्तु की ड्राइंग करना होती है और साथ ही रंगों का प्रयोग भी करना होता है।

NATA Exam Pattern

NATA का परीक्षा पैटर्न किस तरह का होगा, इसमें कितने प्रश्न आते है और कितने मार्क्स दिए जाते है यह आप आगे जानेंगे।

 

 

कुल मिलाकर आपसे 62 प्रश्न पूछे जाएँगे। जिसमें 20 प्रश्न गणित के होंगे, 40 प्रश्न general aptitude के आएँगे और 2 प्रश्न drawing test के होंगे।

 Architecture Courses

आर्किटेक्चर को कुछ कोर्सेज़ की जानकारी भी होना चाहिए। जिससे आप पूरे काम को कर पाओगे जिससे आप आर्किटेक्चर डिज़ाइन तैयार कर सकते है और किसी बिल्डिंग का डिज़ाइन बना पाएँगे। इनमें से किसी भी कोर्स को करके आप आर्किटेक्चर बन सकते है।
डिग्री कोर्स इन आर्किटेक्चर

  • डिप्लोमा कोर्स इन आर्किटेक्चर
  • मास्टर डिग्री इन आर्किटेक्चर
  • डिग्री इन आर्किटेक्चर
  • पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन आर्किटेक्चर
  • सस्टेनेबल कोर्स इन आर्किटेक्चर
  • एडवांस्ड सर्टिफिकेट कोर्स इन आर्किटेक्चरल
  • बैचलर डिग्री इन आर्किटेक्चर टेक्नोलॉजी एंड कंस्ट्रक्शन
  • मास्टर ऑफ़ लैंडस्केप आर्किटेक्चर कोर्स
  • बेसिक कोर्स इन आर्किटेक्चरल ड्राफ्ट्समैन

यह सारे कोर्स ग्रेजुएशन कोर्स है जिसे करके आप आर्किटेक्चर इंजीनियर बन सकते है।

B.Arch Entrance Exam

B.Arch में एडमिशन के लिए आपको एंट्रेंस एग्जाम देना होती है। यह एग्जाम कॉलेज या किसी इंस्टिट्यूट के द्वारा आयोजित की जाती है लेकिन आर्किटेक्चर में प्रवेश के लिए कुछ मुख्य परीक्षाएं भी होती है।

  • AIEEE
  • AMU Entrance Exam
  • KEAM
  • NATA
  • BEEE
  • IIT-JEE
  • UPTU SEE Exam

B.Arch की फीस

इसकी फ़ीस कॉलेज पर निर्भर करती है की आपने किस कॉलेज में एडमिशन लिया है। अगर आपने सरकारी कॉलेज में एडमिशन लिया है तो आपकी फ़ीस अलग होगी और अगर आपने प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन लिया है तो आपकी फ़ीस अलग होगी।

सरकारी कॉलेज

सरकारी कॉलेज में अगर आप एडमिशन लेते है तो आपकी फ़ीस 1.5 लाख से 2.5 लाख तक हो सकती है। यह राज्यों पर भी निर्भर करती है।

प्राइवेट कॉलेज

इस कोर्स की फ़ीस सरकारी कॉलेज के मुकाबले प्राइवेट कॉलेज में ज्यादा होती है। 3 लाख से 6 लाख तक होती है या इससे ज्यादा भी हो सकती है।