Tuesday, January 21, 2020

लाइब्रेरी साइंस में करियर

लाइब्रेरी को सूचना, ज्ञान और मनोरंजन का संग्रह माना जाता है। इसके जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक नवीनतम सूचनाओं और ज्ञान सामग्री का नाममात्र खर्च में पहुंचना संभव हो पाता है। उपयोग के आधार पर लाइब्रेरी को कई भागों में बांटा जा सकता है, जैसे पब्लिक लाइब्रेरी, यूनिवर्सिटी/कॉलेज लाइब्रेरी, निजी लाइब्रेरी आदि।

क्या है लाइब्रेरी साइंस
इस विषय के तहत मुख्य रूप से किताबों, संदर्भ ग्रंथों, पत्रिकाओं और अखबारों को व्यवस्थित ढंग से रखने और लंबे अरसे तक सुरक्षित ढंग से सहेजने के बारे में जानकारी दी जाती है। बड़ी संख्या में उपलब्ध ज्ञान और सूचना परक सामग्रियों (किताब, पत्रिका) को एक निश्चित क्रम में वगीकृत करने के लिए लाइब्रेरी साइंस वैज्ञानिक विधियों और तकनीकों का सहारा लेती है। लाइब्रेरी की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और उसे अधिक उपयोगी बनाने का काम लाइब्रेरियन का होता है।

उपलब्ध कोर्स
सर्टिफिकेट कोर्स इन लाइब्रेरी साइंस
सर्टिफिकेट इन आईसीटी एप्लिकेशन इन लाइब्रेरी
सर्टिफिकेट कोर्स इन लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस
डिप्लोमा कोर्स इन लाइब्रेरी साइंस
डिप्लोमा इन लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस (डीएलआईएस)
बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन
मास्टर ऑफ लाइब्रेरी साइंस
पीजी डिप्लोमा इन लाइब्रेरी ऑटोमेशन एंड नेटवर्किंग

स्पेशलाइजेशन के विषय
इन्फॉर्मेशन आर्किटेक्चर इंडेक्सिंग
इन्फॉर्मेशन ब्रोकर
आर्काइविंग एब्सट्रेक्टर्स
मेटाडेटा मैनेजमेंट कैटालॉगिंग
मेटाडेटा आर्किटेक्चर कंप्यूटर
डेटा एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम
प्रिजव्रेशन एडमिनिस्ट्रेशन एंड कंजव्रेशन

योग्यता
डिप्लोमा/सर्टिफिकेट कोर्स: इन कोर्स में प्रवेश के लिए किसी मान्यता प्राप्त स्कूल शिक्षा बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है। दाखिला आमतौर पर मेरिट सूची के जरिए होता है।

बैचलर कोर्स: किसी विषय में ग्रेजुएशन करने के बाद लाइब्रेरी साइंस के बैचलर कोर्स में प्रवेश लिया जा सकता है। यह कोर्स एक साल का होता है। दाखिले प्रवेश परीक्षा या मेरिट के आधार पर दिए जाते हैं।

पीजी कोर्स: मास्टर्स या पीजी डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए बी.लिब. होना जरूरी है। अलग-अलग संस्थानों में दाखिले का अंक प्रतिशत 50 होता है।

यहां मिलेगी नौकरी
सरकारी और निजी लाइब्रेरी 
यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी
न्यूज एजेंसी और मीडिया संस्थान
विदेशी दूतावास
फोटो/ फिल्म लाइब्रेरी
इन्फॉर्मेशन सेंटर्स/ डॉक्यूमेंटेशन सेंटर्स
शोध सुविधाओं से युक्त म्यूजियम और गैलरी

वेतन
योग्यता और अनुभव के आधार पर वेतन मिलता है। निजी व सरकारी क्षेत्र में वेतन का स्वरूप अलग-अलग है। लाइब्रेरी में शुरुआती वेतन प्रतिमाह 20,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये के बीच हो सकता है।

प्रमुख संस्थान

दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
www.du.ac.in
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
www.jmi.ac.in
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश
www.bhu.ac.in
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश
www.mcu.ac.in
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश
www.amu.ac.in
जीवाजी यूनिवर्सिटी, मध्य प्रदेश
www.jiwaji.edu

Wednesday, January 15, 2020

एयर होस्टेस के तौर पर करियर

यह भारतीय महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय करियर ऑप्शन है जो आकर्षक होने के साथ ही एक प्रोमिसिंग करियर ऑप्शन भी है. अगर आपको अन्य लोगों से बातें करना अच्छा लगता है और आपकी आकर्षक पर्सनैलिटी के साथ ही आपके पास बढ़िया कम्युनिकेशन स्किल्स हैं तो यह पेशा आपके लिए एक उपयुक्त करियर ऑप्शन है. एक एयर होस्टेस के तौर पर, आप विभिन्न स्थानों और देशों में विजिट करेंगी, जहां आप होटल्स में रहकर हर रोज़ नये लोगों से बातचीत कर नये-नये अनुभव प्राप्त कर सकती हैं. हालांकि, अगर आप यह प्रोफेशन अपनाना चाहती हैं तो आपको 100% प्रतिबद्धता, समर्पण और साहस के साथ मेहनत करने के लिए तत्पर रहना होगा.

एलिजिबिलिटी और पर्सनैलिटी ट्रेट्स

भारत में कई संस्थान महिला कैंडिडेट्स को डिप्लोमा और शॉर्ट-टर्म कोर्स तथा ट्रेनिंग करवाते हैं. एयर होस्टेस की ट्रेनिंग के लिए, एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स जैसे एयर सर्विस कैरियर्स कम से कम 157.5 सेंटीमीटर कद वाली, 19 से 25 वर्ष की युवा लडकियों को रिक्रूट करते हैं. अधिकांश सस्थानों में अनिवार्य एजुकेशनल क्वालिफिकेशन 12 वीं कक्षा पास है. लेकिन कुछ संस्थान आपसे ग्रेजुएशन की डिग्री के बारे में भी पूछ सकते हैं.

स्मार्ट और आत्मविश्वासी लड़कियां, जिनकी आकर्षक और पोलाइट पर्सनैलिटी हो, केवल वे ही एयर होस्टेस का पेशा चुन सकती हैं. इन ट्रेट्स के साथ ही, एक्सीलेंट कम्युनिकेशन स्किल्स और अच्छा सेंस ऑफ़ ह्यूमर भी इस पेशे की प्रमुख आवश्यकता है. इस पेशे के लिए आपको कम से कम एक विदेशी भाषा में महारत हासिल होनी चाहिए; हालांकि, यह एक अनिवार्य शर्त नहीं है.

शैक्षिक संस्थान

भारत में कई शैक्षिक संस्थान/ इंस्टिट्यूशंस एयर होस्टेस के पेशे के लिए स्टूडेंट्स को डिग्री कोर्स और ट्रेनिंग करवाते हैं. कुछ प्रसिद्ध संस्थानों के नाम नीचे दिए जा रहे हैं.

• वाईएमसीए, नई दिल्ली

• स्काईलाइन एजुकेशनल इंस्टिट्यूट, हौज खास, दिल्ली

• फ्रैंकफिन इंस्टीट्यूट ऑफ एयर होस्टेस ट्रेनिंग, नई दिल्ली

जॉब प्रॉस्पेक्ट्स

एयर होस्टेस की ट्रेनिंग और कोर्स सफलतापूर्वक समाप्त करने के बाद, कैंडिडेट्स विभिन्न पब्लिक और प्राइवेट एयरलाइन्स जैसे, एयर इंडिया, इंडिगो, ब्रिटिश एयरवेज आदि में जॉब्स प्राप्त कर सकती हैं.

एडवरटाइजिंग में करियर प्रॉस्पेक्ट्स

आजकल, एडवरटाइजिंग एक बहुत ही आकर्षक और पसंदीदा प्रोफेशन के तौर पर उभरा है, जो आपको एक तरफ फन और क्रिएटिविटी की गारंटी देता है और दूसरी तरफ, यह आपको पहचान और प्रसिद्धी दिलवाता है. इस पेशे में, आपके पास अपने आस-पास के माहौल के बारे में जागरूकता लाने और उसके बाद, दिलकश विज्ञापनों के माध्यम से अपनी टारगेट ऑडियंस को लुभाने की काबिलियत जरुर होनी चाहिए. एडवरटाइजिंग करियर के लिए ऑल-राउंड क्रिएटिविटी, यूजर बिहेवियर की समझ और ब्रांडिंग स्किल्स अनिवार्य शर्तें हैं.

एलिजिबिलिटी और पर्सनैलिटी ट्रेट्स

बैचलर लेवल पर कोई एडवरटाइजिंग कोर्स ज्वाइन करने के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया 12 वीं क्लास पास होना और पीजी लेवल के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है. कई संस्थान अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल के एडवरटाइजिंग कोर्सेज करवाते हैं. एडवरटाइजिंग में अपना करियर शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप किसी एड एजेंसी में जॉब ज्वाइन कर लें. अपने पैशन और स्किल्स के अनुसार, आप किसी भी एड एजेंसी में क्रिएटिव या मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ज्वाइन कर सकते हैं.

एडवरटाइजिंग में सफल करियर बनाने के लिए, सहनशीलता और शांत स्वभाव होने के साथ-साथ आपके पास बहुत अच्छे इमैजिनेटिव और विजूअलाइजेशन स्किल्स होने चाहिए. इस कार्यक्षेत्र में तरक्की प्राप्त करने के लिए आपके पास प्रेशर के तहत काम करने क्षमता भी होनी चाहिए ताकि आप सख्त डेडलाइन्स में अपने टारगेट्स प्राप्त कर सकें. लैंग्वेज में महारत, टीम के साथ मिलकर काम करने की काबिलियत के साथ ही ऑर्गेनाइजेशन स्किल्स भी इस पेशे में महारत हसिल करने के लिए बहुत जरुरी हैं.   

शैक्षिक संस्थान

एडवरटाइजिंग में प्रोफेशनल कोर्सेज करवाने वाले कुछ बढ़िया इंस्टिट्यूट्स निम्नलिखित हैं:

• भारतीय विद्या भवन, (मुंबई, कलकत्ता, चेन्नई, दिल्ली)

• सेंटर फॉर मास मीडिया, वाईएमसीए, नई दिल्ली

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन्स (आईआईएमसी), नई दिल्ली

• केसी कॉलेज ऑफ मैनेजमैंट, मुंबई

• मुद्रा इंस्टिट्यूट ऑफ कम्युनिकेशंस, अहमदाबाद (एमआईसीए)

• नरसी मोंजी इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमैंट स्ट्डीज़, मुंबई

• सेंट जेवियर्स कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशंस, मुंबई

जॉब प्रॉस्पेक्ट्स

एडवरटाइजिंग में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, आपको एड एजेंसीज, रेडियो चैनल्स, मीडिया हाउसेज, ई-कॉमर्स स्टोर्स, एफएमसीजी कंपनियों और पीआर एजेंसीज में जॉब्स मिल सकती हैं. प्रोडक्ट प्रमोशन और ब्रांडिंग के लिए एडवरटाइजिंग की लोकप्रियता दिन-प्रति-दिन बढ़ती ही जा रही है. आजकल के संगठन क्लाइंट सर्विसिंग, अकाउंट मैनेजमेंट, पब्लिक रिलेशन्स, सेल्स प्रमोशन, आर्ट डायरेक्शन और कॉपी राइटिंग के क्षेत्रों से संबद्ध पेशेवरों को जॉब्स देने के लिए ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

फैशन डिजाइनिंग में करियर

आजकल, हमारे लाइफस्टाइल को आर्थिक विकास और मॉडर्न वैल्यूज ने काफी प्रभावित किया है. अब, हरेक व्यक्ति कपड़ों, खान-पान, ट्रेवल, शिक्षा और संबंधों के मामले में एक अलग और विशेष लाइफस्टाइल अपनाना चाहता है. इस ट्रेंड को देखते हुए, कुछ समय से फैशन डिजाइनिंग सबसे ज्यादा पसंदीदा करियर ऑप्शन के तौर पर उभरा है. अब, हर दूसरा व्यक्ति आकर्षक और सुरुचिपूर्ण तरीके से कपड़े पहनना और तैयार होना चाहता है और इस कारण इन दिनों फैशन डिज़ाइनर्स की मांग बहुत बढ़ गई है. आज के इस आधुनिक समाज में फैशन लोगों के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है. इसलिये, इस प्रोफेशन में आप अपना करियर शुरू करके उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं.

एलिजिबिलिटी और पर्सनैलिटी ट्रेट्स

किसी प्रसिद्ध इंस्टिट्यूट से फैशन डिजाइनिंग कोर्स करने का बेसिक एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया 12 वीं क्लास पास करना है. 10+2 पास करने के बाद आप दो किस्म के कोर्स कर सकते हैं जो हैं – फैशन टेक्नोलॉजी में बैचलर की डिग्री और फैशन डिजाइनिंग में बैचलर की डिग्री. अपने इंटरेस्ट के मुताबिक आप इनमें से कोई भी कोर्स कर सकते हैं. इन दोनों कोर्सेज की अवधि 4 वर्ष है.

इस प्रोफेशन को ज्वाइन करने के लिए, आपके पास बहुत उम्दा इमैजिनेटिव पावर्स होनी चाहिए. बढ़िया मास्टरपीस तैयार करने के लिए फैब्रिक्स, कलर्स और स्टाइल के मिलान के लिए आपके पास आर्टिस्टिक व्यू-प्वाइंट के साथ ही असाधारण विज़ुअलाइज़ेशन क्षमतायें होनी चाहिए. इसके अलावा, आपको इस क्षेत्र में होनी वाली प्रतियोगिता और चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा. आपको यूजर्स के फैशन टेस्ट और लेटेस्ट फैशन ट्रेंड्स के साथ खुद को जरुर अपडेटेड रखना होगा.

शैक्षिक संस्थान

फैशन डिजाइनिंग में कोर्सेज करवाने वाले टॉप इंस्टिट्यूट्स की लिस्ट निम्नलिखित है:

• सीईपीजेड इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टैक्नोलॉजी, मुंबई

• जेडी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (विभिन्न शहर)

• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन, कलकत्ता

• नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी (नई दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, चेन्नई, बंगलौर, हैदराबाद, गांधीनगर)

• पर्ल एकेडेमी ऑफ़ फैशन, नई दिल्ली

• सोफिया पॉलिटेक्निक, मुंबई

जॉब प्रॉस्पेक्ट्स

अगर आप कलात्मक हैं और आपके पास बेहतरीन फैशन सेंस है, तो इस प्रोफेशन में आप आसमान छू सकते हैं. एक कुशल और टैलेंटेड फैशन डिज़ाइनर को अपैरल कंपनियों, एक्सपोर्ट हाउसेज और रॉ मेटीरियल इंडस्ट्री में एक स्टाइलिस्ट या डिज़ाइनर के तौर पर जॉब मिल सकती है. इस पेशे की सबसे अच्छी बात तो यह है कि कुछ वर्षों का अनुभव प्राप्त करने के बाद आप अपना फैशन बुटीक खोल सकते हैं. किसी फैशन डिजाइनिंग ग्रेजुएट के लिए विजूअल मर्केंडाइजिंग, कॉस्टयूम डिजाइनिंग और फैशन राइटिंग अन्य बेहतरीन करियर ऑप्शन्स हैं. 

जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में करियर

आप अवश्य अंजना ओम कश्यप और बरखा दत्त जैसी प्रसिद्ध न्यूज़ जर्नलिस्ट्स के नामों से परिचित होंगे. अगर आप उनके जैसी बनना चाहती हैं तो जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में कोर्स करना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में प्रोफेशन बहुत चुनौतीपूर्ण और जोखिम से भरा होता है. लेकिन आजकल, अधिकांश महिलायें यह प्रोफेशन अपना रही हैं क्योंकि इसमें जॉब सेटिस्फेक्शन के साथ-साथ प्रसिद्धी भी मिलती है. डिजिटल मीडिया के आने से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन का कार्यक्षेत्र ज्यादा व्यापक बन गया है और अब इस कार्यक्षेत्र के तहत रिपोर्टर्स, कॉपी राइटर्स, प्रोड्यूर्स, एंकर्स, एक्सपर्ट्स और कॉलमिस्ट्स के लिए भी बहुत ज्यादा जॉब्स उपलब्ध हैं.

एलिजिबिलिटी और पर्सनैलिटी ट्रेट्स

मास कम्युनिकेशन में अंडरग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करने के लिए आपने 12 वीं क्लास जरुर पास की हो. इसी तरह,  मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त करने के लिए आपने मास कम्युनिकेशन में बैचलर डिग्री प्राप्त की हो. कुछ कॉलेज एंट्रेंस टेस्ट्स लेकर कैंडिडेट्स का चयन करते हैं. लेकिन, कुछ कॉलेज कैंडिडेट्स के एकेडेमिक रिकार्ड्स के आधार पर उनका चयन करते हैं. कई इंस्टिट्यूट्स जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में 1 साल का पीजी कोर्स भी ऑफर करते हैं.

इस पेशे में महारत हासिल करने के लिए, आपके पास असाधारण राइटिंग और वर्बल कम्युनिकेशन स्किल्स होने चाहिये. इसके साथ ही, आपमें भरपूर आत्मविश्वास होना चाहिए और आपकी पर्सनैलिटी आकर्षक होनी चाहिए. आप कैमरा के सामने पूरे आत्मविश्वास और स्मार्टनेस के साथ आयें. आपकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष होनी चाहिए और आपके विचारों और राय पर लेशमात्र भी राजनीतिक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. इसके अलावा, मास कम्युनिकेशन के कैंडिडेट्स के पास अपने टॉपिक्स में बहुत अच्छी तरह एक्स्टेंसिव रिसर्च करने के बाद किसी भी स्टोरी को प्रसारित करने की काबिलियत होनी चाहिए.

शैक्षिक संस्थान

भारत में मास कम्युनिकेशन कोर्सेज करवाने वाले टॉप इंस्टिट्यूट्स निम्नलिखित हैं:

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी, नई दिल्ली

• एशियाई कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, चेन्नई

• जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली

• डिपार्टमेंट ऑफ़ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे

• सिम्बायोसीस इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, पुणे

• नई दिल्ली वाईएमसीए, नई दिल्ली

• भारतीय विद्या भवन, दिल्ली और मुंबई

जॉब प्रॉस्पेक्ट्स

विभिन्न समाचारपत्र, न्यूज़ एजेंसीज, मैगजीन्स, वेब साइट्स, सरकारी और प्राइवेट टीवी चैनल्स अपने ऑफिसेज में जर्नलिस्ट्स को रिपोर्टिंग, एडिटिंग और कॉपी राइटिंग के काम पर रखते हैं. इसके अलावा, इंटरनेशनल पेपर्स और न्यूज़ चैनल्स ढेरों जॉब्स ऑफर करते हैं. इनफॉर्मेशन एवं ब्राडकास्टिंग मंत्रालय में भी समय-समय पर जॉब के अवसर उपलब्ध होते रहते हैं.

मास कम्युनिकेशन ग्रेजुएट्स विभिन्न समाचारपत्रों, मैगजीन्स, न्यूज़ एजेंसीज, न्यूज़ वेबसाइट्स, सरकारी और प्राइवेट चैनल्स और रेडियो स्टेशन्स में रोज़गार प्राप्त कर सकते हैं. इसी तरह, इंटरनेशनल न्यूज़पेपर्स और न्यूज़ चैनल्स कई वेकेंसीज ऑफर करते हैं. ये जॉब्स रिपोर्टिंग, एडिटिंग, प्रोडक्शन, एंकरिंग, कॉपी राइटिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग और वीडियो शूट्स के जॉब-प्रोफाइल्स के लिए उपलब्ध होती हैं.

एयर होस्टेस के तौर पर करियर

यह भारतीय महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय करियर ऑप्शन है जो आकर्षक होने के साथ ही एक प्रोमिसिंग करियर ऑप्शन भी है. अगर आपको अन्य लोगों से बातें करना अच्छा लगता है और आपकी आकर्षक पर्सनैलिटी के साथ ही आपके पास बढ़िया कम्युनिकेशन स्किल्स हैं तो यह पेशा आपके लिए एक उपयुक्त करियर ऑप्शन है. एक एयर होस्टेस के तौर पर, आप विभिन्न स्थानों और देशों में विजिट करेंगी, जहां आप होटल्स में रहकर हर रोज़ नये लोगों से बातचीत कर नये-नये अनुभव प्राप्त कर सकती हैं. हालांकि, अगर आप यह प्रोफेशन अपनाना चाहती हैं तो आपको 100% प्रतिबद्धता, समर्पण और साहस के साथ मेहनत करने के लिए तत्पर रहना होगा.

एलिजिबिलिटी और पर्सनैलिटी ट्रेट्स

भारत में कई संस्थान महिला कैंडिडेट्स को डिप्लोमा और शॉर्ट-टर्म कोर्स तथा ट्रेनिंग करवाते हैं. एयर होस्टेस की ट्रेनिंग के लिए, एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स जैसे एयर सर्विस कैरियर्स कम से कम 157.5 सेंटीमीटर कद वाली, 19 से 25 वर्ष की युवा लडकियों को रिक्रूट करते हैं. अधिकांश सस्थानों में अनिवार्य एजुकेशनल क्वालिफिकेशन 12 वीं कक्षा पास है. लेकिन कुछ संस्थान आपसे ग्रेजुएशन की डिग्री के बारे में भी पूछ सकते हैं.

स्मार्ट और आत्मविश्वासी लड़कियां, जिनकी आकर्षक और पोलाइट पर्सनैलिटी हो, केवल वे ही एयर होस्टेस का पेशा चुन सकती हैं. इन ट्रेट्स के साथ ही, एक्सीलेंट कम्युनिकेशन स्किल्स और अच्छा सेंस ऑफ़ ह्यूमर भी इस पेशे की प्रमुख आवश्यकता है. इस पेशे के लिए आपको कम से कम एक विदेशी भाषा में महारत हासिल होनी चाहिए; हालांकि, यह एक अनिवार्य शर्त नहीं है.

शैक्षिक संस्थान

भारत में कई शैक्षिक संस्थान/ इंस्टिट्यूशंस एयर होस्टेस के पेशे के लिए स्टूडेंट्स को डिग्री कोर्स और ट्रेनिंग करवाते हैं. कुछ प्रसिद्ध संस्थानों के नाम नीचे दिए जा रहे हैं.

• वाईएमसीए, नई दिल्ली

• स्काईलाइन एजुकेशनल इंस्टिट्यूट, हौज खास, दिल्ली

• फ्रैंकफिन इंस्टीट्यूट ऑफ एयर होस्टेस ट्रेनिंग, नई दिल्ली

जॉब प्रॉस्पेक्ट्स

एयर होस्टेस की ट्रेनिंग और कोर्स सफलतापूर्वक समाप्त करने के बाद, कैंडिडेट्स विभिन्न पब्लिक और प्राइवेट एयरलाइन्स जैसे, एयर इंडिया, इंडिगो, ब्रिटिश एयरवेज आदि में जॉब्स प्राप्त कर सकती हैं.

एडवरटाइजिंग में करियर प्रॉस्पेक्ट्स

आजकल, एडवरटाइजिंग एक बहुत ही आकर्षक और पसंदीदा प्रोफेशन के तौर पर उभरा है, जो आपको एक तरफ फन और क्रिएटिविटी की गारंटी देता है और दूसरी तरफ, यह आपको पहचान और प्रसिद्धी दिलवाता है. इस पेशे में, आपके पास अपने आस-पास के माहौल के बारे में जागरूकता लाने और उसके बाद, दिलकश विज्ञापनों के माध्यम से अपनी टारगेट ऑडियंस को लुभाने की काबिलियत जरुर होनी चाहिए. एडवरटाइजिंग करियर के लिए ऑल-राउंड क्रिएटिविटी, यूजर बिहेवियर की समझ और ब्रांडिंग स्किल्स अनिवार्य शर्तें हैं.

एलिजिबिलिटी और पर्सनैलिटी ट्रेट्स

बैचलर लेवल पर कोई एडवरटाइजिंग कोर्स ज्वाइन करने के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया 12 वीं क्लास पास होना और पीजी लेवल के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है. कई संस्थान अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल के एडवरटाइजिंग कोर्सेज करवाते हैं. एडवरटाइजिंग में अपना करियर शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप किसी एड एजेंसी में जॉब ज्वाइन कर लें. अपने पैशन और स्किल्स के अनुसार, आप किसी भी एड एजेंसी में क्रिएटिव या मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ज्वाइन कर सकते हैं.

एडवरटाइजिंग में सफल करियर बनाने के लिए, सहनशीलता और शांत स्वभाव होने के साथ-साथ आपके पास बहुत अच्छे इमैजिनेटिव और विजूअलाइजेशन स्किल्स होने चाहिए. इस कार्यक्षेत्र में तरक्की प्राप्त करने के लिए आपके पास प्रेशर के तहत काम करने क्षमता भी होनी चाहिए ताकि आप सख्त डेडलाइन्स में अपने टारगेट्स प्राप्त कर सकें. लैंग्वेज में महारत, टीम के साथ मिलकर काम करने की काबिलियत के साथ ही ऑर्गेनाइजेशन स्किल्स भी इस पेशे में महारत हसिल करने के लिए बहुत जरुरी हैं.   

शैक्षिक संस्थान

एडवरटाइजिंग में प्रोफेशनल कोर्सेज करवाने वाले कुछ बढ़िया इंस्टिट्यूट्स निम्नलिखित हैं:

• भारतीय विद्या भवन, (मुंबई, कलकत्ता, चेन्नई, दिल्ली)

• सेंटर फॉर मास मीडिया, वाईएमसीए, नई दिल्ली

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन्स (आईआईएमसी), नई दिल्ली

• केसी कॉलेज ऑफ मैनेजमैंट, मुंबई

• मुद्रा इंस्टिट्यूट ऑफ कम्युनिकेशंस, अहमदाबाद (एमआईसीए)

• नरसी मोंजी इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमैंट स्ट्डीज़, मुंबई

• सेंट जेवियर्स कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशंस, मुंबई

जॉब प्रॉस्पेक्ट्स

एडवरटाइजिंग में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, आपको एड एजेंसीज, रेडियो चैनल्स, मीडिया हाउसेज, ई-कॉमर्स स्टोर्स, एफएमसीजी कंपनियों और पीआर एजेंसीज में जॉब्स मिल सकती हैं. प्रोडक्ट प्रमोशन और ब्रांडिंग के लिए एडवरटाइजिंग की लोकप्रियता दिन-प्रति-दिन बढ़ती ही जा रही है. आजकल के संगठन क्लाइंट सर्विसिंग, अकाउंट मैनेजमेंट, पब्लिक रिलेशन्स, सेल्स प्रमोशन, आर्ट डायरेक्शन और कॉपी राइटिंग के क्षेत्रों से संबद्ध पेशेवरों को जॉब्स देने के लिए ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

फैशन डिजाइनिंग में करियर

आजकल, हमारे लाइफस्टाइल को आर्थिक विकास और मॉडर्न वैल्यूज ने काफी प्रभावित किया है. अब, हरेक व्यक्ति कपड़ों, खान-पान, ट्रेवल, शिक्षा और संबंधों के मामले में एक अलग और विशेष लाइफस्टाइल अपनाना चाहता है. इस ट्रेंड को देखते हुए, कुछ समय से फैशन डिजाइनिंग सबसे ज्यादा पसंदीदा करियर ऑप्शन के तौर पर उभरा है. अब, हर दूसरा व्यक्ति आकर्षक और सुरुचिपूर्ण तरीके से कपड़े पहनना और तैयार होना चाहता है और इस कारण इन दिनों फैशन डिज़ाइनर्स की मांग बहुत बढ़ गई है. आज के इस आधुनिक समाज में फैशन लोगों के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है. इसलिये, इस प्रोफेशन में आप अपना करियर शुरू करके उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं.

एलिजिबिलिटी और पर्सनैलिटी ट्रेट्स

किसी प्रसिद्ध इंस्टिट्यूट से फैशन डिजाइनिंग कोर्स करने का बेसिक एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया 12 वीं क्लास पास करना है. 10+2 पास करने के बाद आप दो किस्म के कोर्स कर सकते हैं जो हैं – फैशन टेक्नोलॉजी में बैचलर की डिग्री और फैशन डिजाइनिंग में बैचलर की डिग्री. अपने इंटरेस्ट के मुताबिक आप इनमें से कोई भी कोर्स कर सकते हैं. इन दोनों कोर्सेज की अवधि 4 वर्ष है.

इस प्रोफेशन को ज्वाइन करने के लिए, आपके पास बहुत उम्दा इमैजिनेटिव पावर्स होनी चाहिए. बढ़िया मास्टरपीस तैयार करने के लिए फैब्रिक्स, कलर्स और स्टाइल के मिलान के लिए आपके पास आर्टिस्टिक व्यू-प्वाइंट के साथ ही असाधारण विज़ुअलाइज़ेशन क्षमतायें होनी चाहिए. इसके अलावा, आपको इस क्षेत्र में होनी वाली प्रतियोगिता और चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा. आपको यूजर्स के फैशन टेस्ट और लेटेस्ट फैशन ट्रेंड्स के साथ खुद को जरुर अपडेटेड रखना होगा.

शैक्षिक संस्थान

फैशन डिजाइनिंग में कोर्सेज करवाने वाले टॉप इंस्टिट्यूट्स की लिस्ट निम्नलिखित है:

• सीईपीजेड इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टैक्नोलॉजी, मुंबई

• जेडी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (विभिन्न शहर)

• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन, कलकत्ता

• नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी (नई दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, चेन्नई, बंगलौर, हैदराबाद, गांधीनगर)

• पर्ल एकेडेमी ऑफ़ फैशन, नई दिल्ली

• सोफिया पॉलिटेक्निक, मुंबई

जॉब प्रॉस्पेक्ट्स

अगर आप कलात्मक हैं और आपके पास बेहतरीन फैशन सेंस है, तो इस प्रोफेशन में आप आसमान छू सकते हैं. एक कुशल और टैलेंटेड फैशन डिज़ाइनर को अपैरल कंपनियों, एक्सपोर्ट हाउसेज और रॉ मेटीरियल इंडस्ट्री में एक स्टाइलिस्ट या डिज़ाइनर के तौर पर जॉब मिल सकती है. इस पेशे की सबसे अच्छी बात तो यह है कि कुछ वर्षों का अनुभव प्राप्त करने के बाद आप अपना फैशन बुटीक खोल सकते हैं. किसी फैशन डिजाइनिंग ग्रेजुएट के लिए विजूअल मर्केंडाइजिंग, कॉस्टयूम डिजाइनिंग और फैशन राइटिंग अन्य बेहतरीन करियर ऑप्शन्स हैं.

जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में करियर

आप अवश्य अंजना ओम कश्यप और बरखा दत्त जैसी प्रसिद्ध न्यूज़ जर्नलिस्ट्स के नामों से परिचित होंगे. अगर आप उनके जैसी बनना चाहती हैं तो जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में कोर्स करना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में प्रोफेशन बहुत चुनौतीपूर्ण और जोखिम से भरा होता है. लेकिन आजकल, अधिकांश महिलायें यह प्रोफेशन अपना रही हैं क्योंकि इसमें जॉब सेटिस्फेक्शन के साथ-साथ प्रसिद्धी भी मिलती है. डिजिटल मीडिया के आने से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन का कार्यक्षेत्र ज्यादा व्यापक बन गया है और अब इस कार्यक्षेत्र के तहत रिपोर्टर्स, कॉपी राइटर्स, प्रोड्यूर्स, एंकर्स, एक्सपर्ट्स और कॉलमिस्ट्स के लिए भी बहुत ज्यादा जॉब्स उपलब्ध हैं.

एलिजिबिलिटी और पर्सनैलिटी ट्रेट्स

मास कम्युनिकेशन में अंडरग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करने के लिए आपने 12 वीं क्लास जरुर पास की हो. इसी तरह,  मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त करने के लिए आपने मास कम्युनिकेशन में बैचलर डिग्री प्राप्त की हो. कुछ कॉलेज एंट्रेंस टेस्ट्स लेकर कैंडिडेट्स का चयन करते हैं. लेकिन, कुछ कॉलेज कैंडिडेट्स के एकेडेमिक रिकार्ड्स के आधार पर उनका चयन करते हैं. कई इंस्टिट्यूट्स जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में 1 साल का पीजी कोर्स भी ऑफर करते हैं.

इस पेशे में महारत हासिल करने के लिए, आपके पास असाधारण राइटिंग और वर्बल कम्युनिकेशन स्किल्स होने चाहिये. इसके साथ ही, आपमें भरपूर आत्मविश्वास होना चाहिए और आपकी पर्सनैलिटी आकर्षक होनी चाहिए. आप कैमरा के सामने पूरे आत्मविश्वास और स्मार्टनेस के साथ आयें. आपकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष होनी चाहिए और आपके विचारों और राय पर लेशमात्र भी राजनीतिक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. इसके अलावा, मास कम्युनिकेशन के कैंडिडेट्स के पास अपने टॉपिक्स में बहुत अच्छी तरह एक्स्टेंसिव रिसर्च करने के बाद किसी भी स्टोरी को प्रसारित करने की काबिलियत होनी चाहिए.

शैक्षिक संस्थान

भारत में मास कम्युनिकेशन कोर्सेज करवाने वाले टॉप इंस्टिट्यूट्स निम्नलिखित हैं:

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी, नई दिल्ली

• एशियाई कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, चेन्नई

• जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली

• डिपार्टमेंट ऑफ़ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे

• सिम्बायोसीस इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, पुणे

• नई दिल्ली वाईएमसीए, नई दिल्ली

• भारतीय विद्या भवन, दिल्ली और मुंबई

जॉब प्रॉस्पेक्ट्स

विभिन्न समाचारपत्र, न्यूज़ एजेंसीज, मैगजीन्स, वेब साइट्स, सरकारी और प्राइवेट टीवी चैनल्स अपने ऑफिसेज में जर्नलिस्ट्स को रिपोर्टिंग, एडिटिंग और कॉपी राइटिंग के काम पर रखते हैं. इसके अलावा, इंटरनेशनल पेपर्स और न्यूज़ चैनल्स ढेरों जॉब्स ऑफर करते हैं. इनफॉर्मेशन एवं ब्राडकास्टिंग मंत्रालय में भी समय-समय पर जॉब के अवसर उपलब्ध होते रहते हैं.

मास कम्युनिकेशन ग्रेजुएट्स विभिन्न समाचारपत्रों, मैगजीन्स, न्यूज़ एजेंसीज, न्यूज़ वेबसाइट्स, सरकारी और प्राइवेट चैनल्स और रेडियो स्टेशन्स में रोज़गार प्राप्त कर सकते हैं. इसी तरह, इंटरनेशनल न्यूज़पेपर्स और न्यूज़ चैनल्स कई वेकेंसीज ऑफर करते हैं. ये जॉब्स रिपोर्टिंग, एडिटिंग, प्रोडक्शन, एंकरिंग, कॉपी राइटिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग और वीडियो शूट्स के जॉब-प्रोफाइल्स के लिए उपलब्ध होती हैं.

Sunday, January 12, 2020

डकास्ट इंजीनियरिंग में करियर

देश-दुनिया में आजकल जीवन के हरेक क्षेत्र में होने वाली तरक्की की वजह से हम एजुकेशन और करियर की फील्ड में रोज़ाना नए-नए विकास के आयाम देखते हैं. इंजीनियरिंग भी इसका अपवाद नहीं है और अब इंजीनियरिंग की फील्ड में भी हम इंजीनियरिंग की कई नई ब्रांचेज़ देख सकते हैं. पहले जहां इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग के तहत हम इंजीनियरिंग के विभिन्न आस्पेक्ट्स को समझते थे, आजकल वहीँ हम इंजीनियरिंग में कई अन्य स्पेसिफिक इंजीनियरिंग कोर्सेज को भी देख रहे हैं जैसेकि, एयरोस्पेस/ एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग, मरीन इंजीनियरिंग, ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग, न्यूक्लियर इंजीनियरिंग, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, बायोकेमिकल इंजीनियरिंग, चेम्सिअल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग. इस आर्टिकल में हम ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग से संबंधित विभिन्न आस्पेक्ट्स पर एक चर्चा कर रहे हैं. आइये जानते हैं कि ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग क्या है और आज के संदर्भ में, भारत में इस फील्ड में करियर ऑप्शन्स और करियर ग्रोथ की कितनी संभावनाएं हैं?.....

ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग क्या है?

आजकल देश-दुनिया में ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग इंजीनियरिंग की एक महत्त्वपूर्ण ब्रांच बन चुकी है क्योंकि पूरी दुनिया में लगातार 24x7 न्यूज़, व्यूज़ और एंटरटेनमेंट की ब्रॉडकास्टिंग होती ही रहती है. ऐसे में, आप बड़ी आसानी से आज के दौर में ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग के महत्त्व और योगदान का अनुमान लगा सकते हैं. वास्तव में, ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग में विभिन्न ऑडियो-विजूअल्स, रेडियो और टीवी में विभिन्न कार्यक्रमों की ब्रॉडकास्टिंग के दौरान साउंड रेंज, साउंड क्लैरिटी, कलर इम्पैक्ट और सिग्नल स्ट्रेंथ को समुचित लेवल पर रखने के लिए विभिन्न इक्विपमेंट्स को ऑपरेट और रेगुलेट किया जाता है. ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग की एक ऐसी फील्ड हैं जिसमें इलेक्ट्रोमेग्नेटिक वेव्स को रेडियो और टीवी सिग्नलस ब्रॉडकास्ट करने के लिए समुचित तरीके से इस्तेमाल किया जाता है. आज के दौर में हम दिन-रात रेडियो और टीवी पर रियल टाइम न्यूज़ रिपोर्टिंग, लाइव शोज़/ परफॉरमेंसेस, इंटरव्यूज़, इवेंट्स और लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग पर काफी हद तक निर्भर हैं.   

 ब्रॉडकास्ट इंजीनियर का जॉब प्रोफफाइल/ करियर ऑप्शन्स  

जो पेशेवर ब्रॉडकास्टिंग से संबंधित विभिन्न कार्य करते हैं, वे ब्रॉडकास्ट इंजीनियर या ब्रॉडकास्ट तकनीशियन कहलाते हैं. ये पेशेवर रेडियो, टेलीविज़न और अन्य किस्म के ऑडियो-विजूअल्स में साउंड रेंज, साउंड क्लैरिटी, कलर स्कीम और कलर इम्पैक्ट के साथ सिग्नल स्ट्रेंथ से जुड़े विभिन्न काम देखते हैं. ये पेशेवर ब्रॉडकास्टिंग इक्विपमेंट्स को मेंटेन रखते हैं और जरूरत पड़ने पर रिपेयर और अपग्रेड भी करते हैं ताकि पब्लिक के पास निर्बाध रूप से सारी सूचना और जानकारी तुरंत पहुंच सके.

 

भारत में ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग की फील्ड में निम्नलिखित जॉब प्रोफाइल्स/ करियर ऑप्शन्स मौजूद हैं:

  • ब्रॉडकास्ट इंजीनियर – फ्रेशर
  • ब्रॉडकास्ट इंजीनियर – अनुभवी
  • ब्रॉडकास्ट डिज़ाइन इंजीनियर
  • ब्रॉडकास्ट सिस्टम इंजीनियर
  • ब्रॉडकास्ट मेंटेनेंस इंजीनियर
  • ब्रॉडकास्ट IT इंजीनियर
  • ब्रॉडकास्ट नेटवर्क इंजीनियर
  • वीडियो ब्रॉडकास्ट इंजीनियर
  • रिमोट ब्रॉडकास्ट इंजीनियर
  • टीवी स्टूडियो ब्रॉडकास्ट इंजीनियर
  • असिस्टेंट चीफ इंजीनियर
  • चीफ इंजीनियर

ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग से संबंधित एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

हमारे देश में किसी मान्यताप्राप्त एजुकेशनल बोर्ड से मैथ्स और फिजिक्स के साथ साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास स्टूडेंट्स ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग में डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट लेवल के कोर्सेज कर सकते हैं. इस इंजीनियरिंग कोर्स में एडमिशन लेने के लिए स्टूडेंट्स को AIEEE या स्टेट लेवल का अन्य कोई एंट्रेंस एग्जाम भी जरुर पास करना पड़ता है. ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग में स्टूडेंट्स ऑनलाइन डिग्री/ डिप्लोमा कोर्सेज भी कर सकते हैं. कुछ महत्त्वपूर्ण एजुकेशनल कोर्सेज निम्नलिखित हैं:

  • बैचलर डिग्री – इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग
  • बैचलर डिग्री – टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग
  • बैचलर डिग्री – इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी
  • बैचलर डिग्री – ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग/ टेक्नोलॉजी
  • बैचलर डिग्री – कंप्यूटर इंजीनियरिंग

 

भारत में इन टॉप इंस्टीट्यूट्स से करें ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग से संबद्ध विभिन्न कोर्सेज

भारत में निम्नलिखित प्रमुख एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग में विभिन्न डिग्री और डिप्लोमा कोर्सेज करवाते हैं:

  • ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग सोसाइटी, नई दिल्ली/ बैंगलोर
  • इंडियन फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट, मेरठ
  • सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ़ मीडिया एंड कम्युनिकेशन, पुणे
  • ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ़ मीडिया आर्ट्स, मुंबई
  • वीगन एंड लीघ कॉलेज, इंडिया (नागपुर/ भुबनेश्वर/ हैदराबाद)

ब्रॉडकास्ट इंजीनियर्स को मिलता है बढ़िया सैलरी पैकेज

आजकल ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पेशेवरों को भारत में काफी आकर्षक सैलरी पैकेज ऑफर किये जाता है. शुरू में इन पेशेवरों को एवरेज 20 – 25 हजार रुपये मासिक मिलते हैं और कुछ वर्षों के अनुभव के बाद ये पेशेवर एवरेज 4.15 लाख रुपये का सालाना सैलरी पैकेज लेते हैं. इस फील्ड में 10 वर्ष का अनुभव हो जाने पर इन पेशेवरों को आमतौर पर 50-60 हजार रुपये मासिक का सैलरी पैकेज मिलता है.

 

ब्रॉडकास्ट इंजीनियर्स यहां करें अप्लाई

भारत में ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग में सूटेबल डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स आकाशवाणी, विविधभारती, FM चैनल्स, दूरदर्शन, आजतक, ज़ी ग्रुप, NDTV, सोनी ग्रुप जैसे विभिन्न नेशनल या लोकल टीवी चैनल्स के साथ विभिन्न ऑडियो-विजूअल्स एजेंसीज़ में जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इसके अलावा, ब्रॉडकास्टिंग इक्विपमेंट्स मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस से जुड़ी इंडस्ट्रीज के साथ विभिन्न प्राइवेट या सरकारी सेक्टर्स में ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग से संबद्ध डिपार्टमेंट्स या फ़ील्ड्स में भी ये पेशेवर जॉब ऑफर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

Wednesday, January 8, 2020

स्पेस साइंस में करियर

स्पेस साइंस एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है। इसकी पढ़ाई रोजगार के बेहतरीन मौके उपलब्ध कराती है। क्या है स्पेस साइंस और क्या हैं इसमें करियर की संभावनाएं, जानते हैं-

सेटेलाइट व नई तकनीक के जरिए मौसम अथवा ग्रह-उपग्रह के बारे में सटीक सूचना दे पाना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है। वायुमंडल अथवा पृथ्वी की हलचलों का पता लगाना भी ज्यादा आसान हो गया है। यह सब संभव हो पाया है ‘स्पेस साइंस’ से। साल दर साल इसमें नई चीजें शामिल होती जा रही हैं। इसमें एडवांस कम्प्यूटर एवं सुपर कम्प्यूटर से डाटा एकत्र करने का कार्य किया जाता है। डाटा न मिलने की स्थिति में आकलन के जरिए किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की कोशिश की जाती है। इस काम से जुड़े प्रोफेशनल स्पेस साइंटिस्ट कहलाते हैं। समय के साथ यह एक सशक्त करियर का रूप धारण कर चुका है। इस क्षेत्र में युवाओं की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। इंडस्ट्री के जानकारों का भी मानना है कि आने वाले पांच सालों में इसमें नौकरियों की संख्या बढ़ेगी।

क्या है स्पेस साइंस
यह साइंस की एक ऐसी शाखा है, जिसके अंतर्गत हम ब्रह्मांड का अध्ययन करते हैं। इसमें ग्रह, तारों आदि के बारे में जानकारी होती है। छात्रों को कोर्स के दौरान यह भी जानकारी दी जाती है कि किस तरह से पृथ्वी और सौर मंडल की उत्पत्ति हुई तथा उसके विस्तार की प्रक्रिया किस तरह की है। इसमें प्रयुक्त होने वाले उपकरणों के बारे में भी छात्रों को थ्योरी और प्रैक्टिकल के रूप में जानकारी दी जाती है।

बारहवीं के बाद प्रवेश
इसमें जो भी कोर्स हैं, वे बैचलर से लेकर पीएचडी लेवल तक हैं। बैचलर कोर्स में प्रवेश तभी मिल पाएगा, जब छात्र ने बारहवीं की परीक्षा साइंस विषय के साथ (फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथमेटिक्स) पास की हो। इसमें ऑल इंडिया लेवल पर एक प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इसमें सफल होने के बाद ही बैचलर प्रोग्राम में दाखिला मिलता है, जबकि मास्टर प्रोग्राम में बीटेक व बीएससी के बाद दाखिला मिलता है। यदि छात्र किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं तो उन्हें पीएचडी की डिग्री लेनी अनिवार्य है।

स्पेस साइंस की शाखाएं
एस्ट्रोनॉमी- यह स्पेस साइंस की एक ऐसी महत्वपूर्ण शाखा है, जिसके अंतर्गत सूर्य, चंद्रमा, तारे, ग्रह आदि का अध्ययन किया जाता है। आमतौर पर इसमें एस्ट्रोनॉमी आकलन पर फोकस होता है।
एस्ट्रोफिजिक्स- यह एक ऐसी शाखा है, जिसके अंतर्गत तारों के जन्म-मृत्यु व जीवन, ग्रह, आकाश गंगा एवं सौर मंडल के अन्य तत्वों का अध्ययन भौतिकी व रसायन शास्त्र के नियमों के आधार पर किया जाता है।
कॉस्मॉलजी- कॉस्मॉलजी के अंतर्गत ब्रह्मांड का बड़े पैमाने पर अध्ययन किया जाता है। इसमें ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर उसके विस्तार तक की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया जाता है।
प्लैनेटरी साइंस- यह शाखा ग्रह, सेटेलाइट और सौर मंडल के अन्य ग्रहों को समझने की क्षमता में विस्तार करती है। इसमें छात्र वायुमंडल, ग्रहों की सतह से आंतरिक भाग तक का अध्ययन करते हैं।
स्टेलर साइंस- सौर मंडल में सभी तारे एक विशेष पैरामीटर के तहत व्यवस्थित होते हैं। ये बहुत कुछ सूर्य की स्थिति पर निर्भर रहते हैं। स्टेलर साइंस में इसका अध्ययन किया जाता है।

रोजगार के भरपूर अवसर
सफलतापूर्वक कोर्स करने के बाद इस क्षेत्र में रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ता। प्रोफेशनल्स को नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा), इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो), डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआडीओ), हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), नेशनल एयरोनॉटिकल लेबोरेटरी (एनएएल) आदि में प्रमुख पदों पर काम मिलता है। इसके अलावा स्पेसक्राफ्ट सॉफ्टवेयर डेवलपिंग फर्म, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, स्पेसक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग फर्म, स्पेस टूरिज्म में भी रोजगार की प्रचुरता है। प्रमुख विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज, स्पेस साइंटिस्ट को अपने यहां रख रहे हैं। स्पेस रिसर्च एजेंसी, साइंस म्यूजियम एवं प्लैनेटेरियम में भी हर साल बड़े पैमाने पर नियुक्तियां होती हैं। इसरो व नासा बड़े रोजगार प्रदाता के रूप में जाने जाते हैं।

इन पदों पर मिलता है काम
स्पेस साइंटिस्ट
एस्ट्रोनॉमर  
एस्ट्रोफिजिसिस्ट
मैटीरियोलॉजिस्ट   
क्वालिटी एश्योरेंस स्पेशलिस्ट
रडार टेक्निशियन 
रोबोटिक टेक्निशियन
सेटेलाइट टेक्निशियन   
जियोलॉजिस्ट

आकर्षक सेलरी पैकेज
स्पेस इंडस्ट्री में प्रोफेशनल्स को काफी आकर्षक सेलरी मिलती है, बशर्ते उन्हें काम की अच्छी समझ हो। आमतौर पर शुरुआती दौर में एक स्पेस साइंटिस्ट को 25-30 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं, जबकि दो-तीन साल के अनुभव के बाद यही राशि 40-45 हजार रुपए तक पहुंच जाती है। रिसर्च के क्षेत्र में आज कई ऐसे साइंटिस्ट हैं, जो सालाना लाखों के पैकेज पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विदेशों में भी प्रोफेशनल्स को आकर्षक पैकेज दिया जाता है।

फायदे एवं नुकसान
उच्च पदों पर मिलती है जॉब
प्रोजेक्ट कंप्लीट होने पर सुकून
काम के घंटे अधिक
कई बार काम का नतीजा नहीं

एजुकेशन लोन
छात्रों को प्रमुख राष्ट्रीयकृत, प्राइवेट अथवा विदेशी बैंकों द्वारा एजुकेशन लोन प्रदान किया जाता है। छात्र को जिस संस्थान में एडमिशन कराना होता है, वहां से जारी एडमिशन लेटर, हॉस्टल खर्च, ट्यूशन फीस एवं अन्य खर्चो को ब्योरा बैंक को देना होता है। अंतिम निर्णय बैंक को करना होता है।

कुछ प्रमुख कोर्स
बीटेक इन स्पेस साइंस (चार वर्षीय)
बीएससी इन स्पेस साइंस (तीन वर्षीय)
एमटेक इन स्पेस साइंस (दो वर्षीय)
एमएससी इन स्पेस साइंस (दो वर्षीय)
एमई इन स्पेस साइंस (दो वर्षीय)
पीएचडी इन स्पेस साइंस (तीन वर्षीय)

साइंस पर कमांड जरूरी
एक अच्छा प्रोफेशनल बनने के लिए साइंस
विषयों खासकर फिजिक्स का बेहतर ज्ञान होना जरूरी है। कम्प्यूटर की अच्छी जानकारी व इंजीनियरिंग के बेसिक्स पर मजबूत पकड़ उन्हें काफी आगे तक ले जाती है। कम्युनिकेशन व राइटिंग स्किल्स, प्रेजेंटेशन तैयार करने का कौशल हर मोड़ पर सम्यक सहायता दिलाता है। इसके अलावा प्रोफेशनल्स को परिश्रमी, धर्यवान व जिज्ञासु प्रवृत्ति का बनना होगा, क्योंकि इससे संबंधित अधिकांश कार्य रिसर्च अथवा आकलन पर आधारित
होते हैं।

प्रमुख संस्थान
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी, तिरुवनंतपुरम
वेबसाइट- www.iist.ac.in
बिरला इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, रांची
वेबसाइट- www.bitmesra.ac.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस, बेंग्लुरू
वेबसाइट- www.iisc.ernet.in
टाटा इंस्टीटय़ूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई
वेबसाइट-  www.univ.tifr.res.in
नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, भुवनेश्वर
वेबसाइट- www.niser.ac.in
आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीटय़ूट ऑफ ऑब्जरवेशनल साइंसेज, नैनीताल
वेबसाइट- www.aries.ernet.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, बेंग्लुरू
वेबसाइट- www.iiap.res.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर
वेबसाइट- www.iitk.ac.in

Friday, August 30, 2019

Spiritual Theology में करियर

स्पिरिचुअल थियोलॉजी एक ऐसी प्रकार की आध्यात्मिकता है जो साइंस, आर्ट और आस्था पर बेस्ड है। ये एक ऐसा विषय है जिस पर जितनी भी रिसर्च की जाए उतनी कम है। इसलिए बहुत से लोग इस को समझ नहीं पाते हैं और हैरान हो जाते हैं। लेकिन लोग आध्यात्मिकता को पसंद करते हैं वो चाहें तो इसमें अपना करियर भी शुरू कर सकते हैं।


स्पिरिचुअल थियोलॉजी
इस कोर्स में स्टूडेंट्स को पूर्व और पश्चिम की आध्यात्मिकता के बारे में सिखाया जाता है। मनोविज्ञान, चर्च के उपदेश, यूथ एनिमेशन और सिविल लॉ के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। स्टूडेंट्स को वैज्ञानिक विधिशास्त्र पर बेस्ड रिसर्च निबंध तैयार करना होता है। स्टूडेंट्स आश्रम के जीवन, अलग-अलग धर्मों के कार्यक्रमों और प्रार्थना सभाओं में हिस्सा लेते हैं। और सभी धर्मों में निहित आध्यात्मिक ज्ञान को ग्रहण करते हैं। बेंगलुरु में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पिरिचुअलिटी से डिप्लोमा कर सकते हैं।


अपॉर्च्युनिटी
इस कोर्स के बाद स्टूडेंट्स को आध्यात्मिक सलाहकार के रूप में नौकरी मिल सकती है। स्कूल में बच्चों को, घर में बड़ी उम्र के लोगों को और किसी कंपनी के कर्मचारियों को ग्रुप में आध्यात्मिक सलाह और उपदेश देने का कार्य कर सकते हैं। आध्यात्मिक कंसल्टेंट फील्ड देश में बढ़ती जा रही है।


इनकम
इस कोर्स के बाद आपको 20-30 हजार रुपये प्रति माह इनकम हो सकती है और धीरे-धीरे ये इनकम बढ़ती जाएगी।

यहां से करें कोर्स
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्प्रिचुअलिटी, बेंगलुरु

Tuesday, July 23, 2019

टूल्स डिजाइनिंग में करियर


मैन्यूफैक्चरिंग इंजीनियरिंग का ही एक हिस्सा है टूल्स डिजाइनिंग। आज के औद्योगिक माहौल में टूल्स इंजीनियरों की काफी मांग है... उत्पाद का स्वरूप चाहे जैसा भी हों, उनके निर्माण के लिए टूल्स की आवश्यकता होती ही है। टूल्स ही मशीनरी का आधार होते हैं, जिनकी मदद से किसी प्रोडक्ट को मनचाहे रूप में ढाला जा सकता है। उत्पादों के बदलते स्वरूप के अनुसार नई-नई मशीनरी की जरूरत भी निरंतर बनी रहती है। यही कारण है कि वर्तमान औद्योगिक माहौल में टूल्स डिजाइनरों की मांग काफी है। विषय की रूपरेखा टूल्स एनालिसिस, प्लानिंग, डिजाइनिंग और डेवलपमेंट से संबंधित विभिन्न कार्य टूल्स डिजाइनिंग के तहत संपन्न किए जाते हैं। ऐसी डिजाइनिंग का मुख्य मकसद बेहतर टूल्स और मशीनों का निर्माण करके उत्पादकता को सुविधाजनक और गुणवत्तापूर्ण बनाना होता है। मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री की सफलता में टूल्स की बेहतरीन डिजाइनिंग की बेहद खास भूमिका होती है। पाठ्यक्रम और शैक्षणिक योग्यता पीजी डिप्लोमा इन टूल डिजाइन ऐंड सीएडी/सीएएम, मास्टर ऑफ सीएमएम ऐंड सीएनसी टेक्नोलॉजी, बीटेक इन टूल इंजीनियरिंग, मास्टर ऑफ सीएडी, डिप्लोमा इन टूल ऐंड डाई मेकिंग, सर्टिफिकेट कोर्स इन टर्नर/मिलर/फिल्टर, इंटीग्रेटेड कोर्स इन मॉड्यूल डिजाइन आदि इस क्षेत्र के खास पाठ्यक्रम हैं। पाठ्यक्रमों की प्रकृति के अनुसार उनकी अवधि 6 महीने से लेकर 4 वर्ष तक की हो सकती है। जिन विद्यार्थियों ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री अथवा डिप्लोमा किया हो, उनका इन कोर्सेज में नामांकन हो सकता है। इसके अलावा संबंधित स्ट्रीम में आईटीआई करने वाले विद्यार्थी भी एडमिशन के हकदार हैं। कई संस्थान, जैसे सीआईटीडी में विद्यार्थियों को एंट्रेस टेस्ट के माध्यम से दाखिला मिलता है। मौके कहां-कहां टूल्स डिजाइनिंग से संबंधित प्रोफेशनल्स की मांग टूल्स डिजाइन कंपनी, टूल्स मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी आदि में बनी रहती है। औद्योगिक ईकाइयां चाहे जिस भी प्रकृति की हों, टूल्स डिजाइनरों के लिए अवसर उपलब्ध होते हैं।

दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ टूल इंजीनियरिंग, दिल्ली www.dite.delhigovt.nic.in एनटीटीएफ, बेंगलुरु www.nttftrg.com इंडो-जर्मन टूल रूम, औरंगाबाद www.igtr-aur.org सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ टूल डिजाइन, बेंगलुरु www.citdindia.org इंडियन मशीन टूल मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन, बेंगलुरु www.imtma.in

Thursday, July 18, 2019

आर्कियोलॉजी

हजारों साल पहले मानव जीवन कैसा रहा होगा? किन-किन तरीकों से जीवन से जुड़े अवशेषों को बचाया जा सकता है? एक सभ्यता, दूसरी सभ्यता से कैसे अलग है? क्या हैं इनकी वजहें? ऐसे अनगिनत सवालों से सीधा सरोकार होता है आर्कियोलॉजिस्ट्स का। 

अगर आप भी देश की धरोहर और इतिहास में रुचि रखते हैं तो आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में एक अच्छे करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें आपको नित नई चीजें जानने को तो मिलेंगी ही, सैलरी भी अच्छी खासी है। आर्कियोलॉजी के अंतर्गत पुरातात्विक महत्व वाली जगहों का अध्ययन एवं प्रबंधन किया जाता है। 

हेरिटेज मैनेजमेंट के तहत पुरातात्विक स्थलों की खुदाई का कार्य संचालित किया जाता है और इस दौरान मिलने वाली वस्तुओं को संरक्षित कर उनकी उपयोगिता का निर्धारण किया जाता है। इसकी सहायता से घटनाओं का समय, महत्व आदि के बारे में जरूरी निष्कर्ष निकाले जाते हैं। 
जरूरी योग्यता
एक बेहतरीन आर्कियोलॉजिस्ट अथवा म्यूजियम प्रोफेशनल बनने के लिए प्लीस्टोसीन पीरियड अथवा क्लासिकल लैंग्वेज, मसलन पाली, अपभ्रंश, संस्कृत, अरेबियन भाषाओं में से किसी की जानकारी आपको कामयाबी की राह पर आगे ले जा सकती है।
पर्सनल स्किल
आर्कियोलॉजी ने केवल दिलचस्प विषय है बल्कि इसमें कार्य करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए यह चुनौतियों से भरा क्षेत्र भी है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए अच्छी विशेलषणात्मक क्षमता, तार्किक सोच, कार्य के प्रति समर्पण जैसे महत्वपूर्ण गुण जरूर होेने चाहिए। कला की समझ और उसकी पहचान भी आपको औरों से बेहतर बनाने में मदद करेगी। इसके अलावा आप में चीजों और उस देशकाल को जानने की ललक भी होनी चाहिए। 
संभावनाएं व वेतन
आर्कियोलॉजिस्ट की मांग सरकारी और निजी हर क्षेत्र में है। इन दिनों कॉरपोरेट हाउसेज में भी नियुक्ति हो रही है। वे अपने रिकॉर्ड्स के रख-रखाव के लिए एक्सपर्ट की नियुक्ति करते हैं। इसी तरह रिचर्स के लिए भी इसकी मांग रहती है। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया में आर्कियोलॉजिस्ट पदों के लिए संघ लोक सेवा आयोग हर वर्ष परीक्षा आयोजित करता है। राज्यों के आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट में भी असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट की मांग भी रहती है। वहीं नेट क्वालीफाई करके लेक्चररशिप भी कर सकते हैं। आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में किसी भी पद पर न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपए है। उसके बाद वेतन का निर्धारण पद और अनुभव के आधार पर होता है।
कोर्सेज
आर्कियोलॉजी से जुड़े रेगुलर कोर्स जैसे पोस्ट ग्रेजुएशन, एमफिल या पीएचडी देश के अलग-अलग संस्थानों में संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि हेरिटेज मैनेजमेंट और आर्किटेक्चरल कंजरवेशन से जुड़े कोर्स केवल गिने-चुने संस्थानों में ही पढ़ाए जा रहे हैं। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया की फंक्शनल बॉडी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी में दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स की पढ़ाई होती है। अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के आधार पर इस कोर्स में दाखिला दिया जाता है। इसी तरह गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी नई दिल्ली से एफिलिएटेड इंस्टीट्यूट, दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज रिसर्च एंड मैनेजमेंट, आर्कियोलॉजी और हेरिटेज मैनेजमेंट में दो वर्षीय मास्टर कोर्स का संचालन होता