Friday, August 18, 2017

समाज सेवा में करियर

समाज सेवा कोई फुलटाइम काम थोड़ी है। आम धारणा है कि समाज सेवा को पार्टटाइम आधार पर किया जाता है। यह एक अपेक्षाकृत हल्का विकल्प है, जो लड़कियों को ही करना चाहिए। दरअसल, यह सब विचार गलतफहमियां हैं। आज समाज सेवा एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें कॉरपोरेट और अनेक बहुराष्ट्रीय एनजीओ भी भारत में अपनी पहचान बनाने के लिए सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के आधार पर पैसा लगा रहे हैं। इसका एक उदाहरण है अजीम प्रेमजी द्वारा अपनी निजी आय में से 9000 करोड़ रुपए दान किया जाना, जिसका इस्तेमाल प्रेमजी फाउंडेशन शिक्षा और ग्राम सुधार के लिए कर रही है। इसके अलावा, इंडियन ऑयल, यूनीलिवर, नेस्ले, एनटीपीसी, एलएंडटी आदि कंपनियों के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी विभाग हैं। वह अपनी परियोजनाओं के लिए एमएसडब्ल्यू (मास्टर इन सोशल वर्क) को रखते हैं। यहां तक कि बहुराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे यूनेस्को, यूनिसेफ और अन्य संस्थाएं भी समाज सेवा पृष्ठभूमि वाले लोगों को रखती हैं।
एक समाज सेवी मूलत: मॉडर्न मैनेजमेंट और समाज विज्ञान के विचारों को मिला कर सामाजिक समस्याओं का हल खोजता है। आज के समाज सेवियों को सरकारों और निजी संस्थानों से फंडिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, काउंसलिंग, कैम्प ऑर्गेनाइजेशन आदि कार्यों के लिए लॉबिंग करनी पड़ती है। समाज सेवा को तीन व्यापक हिस्सों में बांटा जा सकता है, ये हैं सर्विस, एडवोकेसी और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर)। इनकी सेवाओं में पूंजी स्नोत, निर्धनों और जरूरतमंदों के लिए रोजगार का इंतजाम करना भी होता है। समाज सेवा के दायरे में अनाथालयों या वृद्धाश्रमों और छात्रवृत्ति को सहयोग देना भी आता है।
समाज सेवा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय और सरकारी संस्थान और बड़े एनजीओ जैसे क्राई, एसओएस चिल्ड्रंस विलेजेज ऑफ इंडिया और हैल्पएज भी काम करते हैं, जो बाल सुधार, महिलाओं और श्रम अधिकारों के क्षेत्र में काम करते हैं। समाज सेवा को सबसे अधिक संतोषप्रद कार्यक्षेत्रों में भी माना जाता है। इसमें अपनी जैसी सोच वाले व्यक्तियों के साथ मिल कर राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं। यही नहीं, समाजसेवा करने वाले व्यक्तियों को सरकारी योजना निर्माण में भी मदद के लिए बुलाया जाता है।
कार्य गतिविधियां
अधिकांश समाजसेवी युवाओं और उनके परिवारों के साथ कार्य करते हैं। वह इन समूहों के साथ भी कार्य कर सकते हैं:
युवा अपराधी
दिमागी बीमारियों से जूझ रहे युवा
स्कूल न जाने वाले युवा
नशे के आदि युवा
शारीरिक तौर पर अक्षम लोग
बेघरों और वृद्धों के साथ
स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा क्षेत्र से जुड़े सरकारी प्रावधान के अंतर्गत समाजसेवी विभिन्न दलों के साथ काम कर सकते हैं।

समाजसेवियों की जिम्मेदारियां
मेडिकल स्टाफ के साथ अनुमानित आंकड़ों को एकत्र करना, जो निश्चित मानदंड और समय के अनुसार कार्य में लाए जाते हैं।
पिछड़ा क्षेत्र के लोगों और उनके परिवारों से बात, ताकि उन्हें पहुंच रहे लाभ का आकलन किया जा सके।
पिछड़ा क्षेत्र के लोगों को सूचना और सहयोग देना।
पिछड़ा क्षेत्र के लिए सपोर्ट पैकेज उपलब्ध कराना।
किसी विशिष्ट सेवा प्रदाता द्वारा दिए जा रहे सहयोग के संबंध में आवश्यक निर्णय लेना।
अन्य एजेंसियों के साथ सहयोग स्थापित करना।
बाल सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों से जुड़े दलों की बैठकों में शिरकत करना।
किसी भी कानूनी कार्रवाई के लिए रिकॉर्ड की संभाल करना।
ट्रेनिंग, सुपरविजन और टीम मीटिंग्स में शामिल होना।
इस क्षेत्र में जॉब मार्केट बहुआयामी है। किसी बड़ी कंपनी के सीएसआर विभाग में काम करने पर आप 30,000 से 70,000 रुपए तक कमा सकते हैं। यदि आप किसी आईडीआरसी या किसी एक्शन एड में काम करते हैं तो भी वेतनमान अच्छा होता है, जो समय के साथ-साथ बढ़ता है। एक्शन एड का सलाहकार एक लाख रुपए प्रतिमाह तक कमा सकता है। लेकिन ऐसे जॉब्स कम और बेहद प्रतिस्पर्धात्मक होते हैं। अनेक एनजीओ भी 15,000 से 25,000 रुपए तक देते हैं। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति ने किस संस्थान से शिक्षा प्राप्त की है और उसे कार्य का कितना अनुभव है। टीआईएसएस शीर्ष इंस्टीटय़ूट्स में से है और वहां से श्रेष्ठतम नौकरियां मिलती हैं।
किसी बी या सी श्रेणी इंस्टीटय़ूट से शिक्षा प्राप्ति पर भी 10,000 रुपए शुरुआती वेतन पर काम मिल जाता है। इसलिए यदि किसी अच्छे संस्थान से एमएसडब्ल्यू (मास्टर्स इन सोशल वर्क) किया है तो यह किसी बी श्रेणी संस्थान से एमबीए करने से बेहतर होगा। लिहाजा, आप बीएसडब्ल्यू या समाजविज्ञान या मनोविज्ञान में शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं, जिसके बाद एमएसडब्ल्यू करके इस करियर में अपनी शुरुआत कर सकते हैं। निजी और सरकारी विभाग भी सोशल वर्क डिग्री को तरजीह देते हैं। बेशक यह एक विकास कर रहा क्षेत्र है और इसमें युवाओं के लिए रोजगार के अनेक अवसर मौजूद हैं।

Tuesday, August 8, 2017

रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट में करियर

आज जिस तेजी से दुनिया में विकास हो रहा है, उससे भी कहीं ज्यादा तेजी से एनर्जी की मांग बढ़ रही है। किसी भी इंडस्ट्री या प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले वहां की ऊर्जा की संभावनाओं की पड़ताल जरूरी होती है। जरूरतों के साथ ही अब पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी देखा जाने लगा है। तमाम पावर प्रोजेक्ट्स पर्यावरण संबंधी विषयों के चलते ही अटके पड़े हैं। इसलिए रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस्ड रहना उनकी मजबूरी है। इस क्षेत्र में भारत ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रखी हैं। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे इस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं।
बायोफ्यूल की लगातार कम होती जा रही मात्रा और देश में एनर्जी की मांग को देखते हुए एनर्जी प्रोडक्शन और उसका प्रबंधन पहली प्राथमिकता बन चुका है। सरकारी के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इस ओर विशेष जोर दे रही हैं। यही कारण है कि रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट के कोर्स की तेजी से मांग बढ़ रही है। समय के साथ-साथ ऊर्जा की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसलिए ऊर्जा के अतिरिक्त स्रोतों यानी वैकल्पिक ऊर्जा, सौर ऊर्जा, विंड एनर्जी, बायो एनर्जी, हाइड्रो एनर्जी आदि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा पर्यावरण के मुद्दों को देखते हुए भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी योजना बना रखी है, क्योंकि सरकार का इरादा अगले साल तक 55 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन का है। कॉरपोरेट कंपनियां भी इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं।
क्या है रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट
मौजूदा प्रौद्योगिकी के अलावा नई तकनीक को अपना कर रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) के उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बिजली की मांग के एक बड़े हिस्से की आपूर्ति व प्रदूषण में कमी के साथ-साथ हजारों करोड़ रुपये की बचत भी की जा सके। इसलिए सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने पर बल दिया है।
कौन से हैं कोर्स
इसमें जो भी कोर्स हैं, वे पीजी अथवा मास्टर लेवल के हैं। छात्र उन्हें तभी कर सकते हैं, जब उन्होंने किसी विश्वविद्यालय या मान्यताप्राप्त संस्थान से बीटेक, बीई या बीएससी सरीखा कोर्स किया हो। एमएससी फिजिक्स के छात्रों को यह क्षेत्र सबसे अधिक भाता है।
एमबीए कोर्स
कई बिजनेस संस्थानों में एनर्जी मैनेजमेंट या पावर मैनेजमेंट जैसे एमबीए कोर्स भी ऑफर किए जा रहे हैं। इनको ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है। रिसर्च करने के लिए मास्टर होना जरूरी है।
कौन से हैं प्रमुख कोर्स
  • एमएससी इन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एमएससी इन फिजिक्स/एनर्जी स्टडीज
  • एमटेक इन एनर्जी स्टडीज
  • एमटेक इन एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमटेक इन एनर्जी टेक्नोलॉजी
  • एमटेक इन रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमई इन एनर्जी इंजीनियरिंग
  • पीजी डिप्लोमा इन एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमबीए इन रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट
  • एमफिल इन एनर्जी
जरूरी गुण
  • आवश्यक स्किल्स
  • लॉजिकल व एनालिटिकल स्किल्स
  • कठिन परिश्रम से न भागना
  • मेहनती व अनुशासन में रहना
  • नई चीजें सीखने के लिए तत्पर रहना
  • कठिन परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता
वेतनमान
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में डिप्लोमाधारी युवाओं को शुरू-शुरू में 25-30 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिलती है। इस क्षेत्र में जैसे-जैसे वे समय व्यतीत करते जाते हैं, उनकी आमदनी भी बढ़ती जाती है।
अनुभव से बढ़ेगी सैलरी
अमूमन 3-4 साल के अनुभव के बाद यह सेलरी बढ़ कर 50-55 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाती है। कई ऐसे प्रोफेशनल्स हैं, जो इस समय 5-6 लाख रुपये सालाना सेलरी पैकेज पा रहे हैं। टीचिंग व विदेश जाकर काम करने वाले प्रोफेशनल्स की सेलरी भी काफी अच्छी होती है। इस क्षेत्र के जानकार प्रोफेशनल्स को अकसर सेलरी के लिए ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि आज भी इस क्षेत्र में मांग की तुलना में करियर प्रोफेशनल्स की भारी कमी है।
यहां पर मिल सकता है काम
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर से संबंधित सरकारी व निजी उद्योगों में करियर के तमाम विकल्प मौजूद हैं।
पर्याप्त संभावनाएं
देश में रिन्यूएबल एनर्जी की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। इससे लगभग 1.79 लाख मेगावॉट बिजली पैदा की जा सकती है। इसके अंतर्गत एचआर मैनेजमेंट, ऑपरेशन, फाइनेंस, मार्केटिंग तथा स्ट्रैटिजिक मैनेजमेंट जैसे कार्य शामिल हैं। इसमें प्रोफेशनल्स एनर्जी कॉर्पोरेशन के मैनेजमेंट में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह क्षेत्र भले ही अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर करियर की संभावनाएं मौजूद हैं।
संस्थान
- यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ, लखनऊ
वेबसाइट- www.lkouniv.ac.in
- यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे, पुणे
वेबसाइट- www.unipune.ac.in
- आईआईटी दिल्ली, नई दिल्ली
वेबसाइट- www.iitd.ac.in
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, तिरुचिरापल्ली
वेबसाइट- www.nitt.edu
- राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल
वेबसाइट- www.rgpv.ac.in
- इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट (डीम्ड यूनिवर्सिटी), इलाहाबाद
वेबसाइट- www.shiats.edu.in
- पेट्रोलियम कंजर्वेशन रिसर्च एसोसिएशन, नई दिल्ली
वेबसाइट- www.pcra.org

Wednesday, August 2, 2017

मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, एफएमसीजी

लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एेसी प्रक्रिया है, जिसमें जानकारी, गुड्स और अन्य संसाधनों को शुरुआत से लेकर सप्लाई तक कस्टमर की जरूरतों के अनुसार मैनेज किया जाता है। अन्य शब्दों मंे कहें, तो यह खरीद, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और मटीरियल के डिस्ट्रीब्यूशन को मैनेज करना है। सप्लाई चेन मैनेजमेंट इसका ही एक हिस्सा है, जिसमें इंवेंट्री, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, मटीरियल हैंडलिंग और पैकेजिंग भी शामिल है। घर, ऑफिस अौर फैक्टरी में होने वाले मटीरियल की सप्लाई की जिम्मेदारी लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कंपनी की होती है।
भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, एफएमसीजी और ई-कॉमर्स में तेजी के कारण लॉजिस्टिक्स मार्केट के 2020 तक सालाना 12.17 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है। भारत फिलहाल लॉजिस्टिक्स में जीडीपी का 14.4 फीसदी खर्च करता है, जो विकसित देशों में हाेने वाले 8 फीसदी खर्च से कहीं ज्यादा है। नेशनल स्किल डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल भारत के लॉजिस्टिक्स मार्केट में 1.7 करोड़ एम्प्लाॅई काम कर रहे हैं और 2022 तक 1.11 करोड़ अतिरिक्त एम्प्लॉई की आवश्यकता होगी।
देश के फ्रेट ट्रांसपोर्ट मार्केट के 2020 तक 13.35 फीसदी की सालाना दर से बढ़ने की संभावना है। देश के फ्रेट ट्रांसपोर्ट में लगभग 60 फीसदी हिस्सा रोड फ्रेट का है और 2020 तक इसके 15 फीसदी की सालाना दर से बढ़ने की संभावना है। लॉजिस्टिक्स कई प्रकार का हो सकता है जैसे प्रोडक्शन, बिज़नेस और प्रोफेशनल लॉजिस्टिक्स।
अधिकतर कोर्स पीजी स्तर के
लॉजिस्टिक मैनेजमेंट के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिए कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं। इसके लिए पार्ट टाइम, सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा और पीजी डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश लिया जा सकता है। किसी भी स्ट्रीम में बैचलर डिग्री करने वाले छात्र इसमें प्रवेश ले सकते हैं। प्रमुख कोर्स में पीजी डिप्लोमा इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट, एमबीए इन लॉजिस्टिक एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन लॉजिस्टिक्स एंड पोर्ट मैनेजमेंट और एग्जीक्यूटिव पीजी डिप्लोमा इन बिज़नेस लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एंड एससीएम शामिल हैं। शीर्ष संस्थानों में प्रवेश कैट, मैट, ज़ैट जैसी परीक्षाओं के स्कोर के आधार पर मिलता है। एग्जीक्यूटिव कोर्स में प्रवेश के लिए एक्सपीरियंस जरूरी है।
सभी तरह की कंपनियों में अवसर
छोटी और बड़ी सभी तरह की कम्पनियों में लॉजिस्टिक्स मैनेजर की जरूरत होती है। कई संस्थाएं विश्वभर में लॉजिस्टिक मैनेजर की नियुक्ति करती हैं। यह कम्पनियां मैन्युफैक्चरर, होलसेलर, इलेक्ट्रिसिटी सप्लायर, लोकल गवर्नमेंट से लेकर आर्मी और चैरिटी संस्थाएं भी हो सकती हैं। रिटेल, क्लियरिंग एंड फाॅरवर्डिंग कंपनी, कूरियर एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट एंटरप्राइजेस में कॅरिअर की बेहतर संभावनाएं होती हैं। इसमें कस्टमर सर्विस मैनेजर, लॉजिस्टिक मैनेजर, मटीरियल मैनेजर, पर्चेस मैनेजर और इंवेंट्री कंट्रोल मैनेजर के पदों पर जॉब की जा सकती है।
कमाई
इस क्षेत्र में सैलरी पैकेज आमतौर पर अच्छे होते हैं। फ्रेशर को क्वालिफिकेशन और संस्थान के आधार पर प्रति माह 12 हजार से 20 हजार रुपए तक मिलने की संभावना होती है। कुछ वर्ष के अनुभव के बाद 35 हजार से 50 हजार रुपए प्रति माह का सैलरी पैकेज मिल सकता है।

Monday, July 24, 2017

कॉफी क्वॉलिटी मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा

कॉफी दुनिया के सबसे लोकप्रिय पेय में एक हैं। इसकी लोकप्रियता को बनाए रखने के लिए इसकी गुणवत्ता पर काफी जोर दिया जाता है। ऐसे में कॉफी क्वॉलिटी के क्षेत्र में करियर बनाने के अच्छे मौके भी मिलते हैं।

कॉफी के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वालों के लिए भारत के कॉफी बोर्ड ने पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स लॉन्च किया है। इसके छात्रों को भारतीय कॉफी कंपनियों में अच्छी नौकरियों के अवसर मिलते हैं।

कॉफी क्वॉलिटी मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (PGDCQM) कोर्स छात्रों को कॉफी टेस्टर्स  के रूप में उनकी क्षमता विकसित करने में मदद करता है।

कोर्स की खास बातें
- यह 12 महीने का कोर्स है जो 3 ट्राइमेस्टर में होता है।

- छात्रों को पहले ट्राइमेस्टर में सीसीआरआई, बलेहोनुर, चिकमंगलूर में रहने की सुविधा मिलती है। दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर के लिए छात्रों के बेंगलुरु में अपने रहने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी।

- दाखिले हर योग्य अभ्यर्थी के लिए खुले हैं। कॉफी इंडस्ट्री के लिए स्पॉन्सर्ड अभ्यर्थियों को भी दाखिले दिए जाएंगे।

- दाखिले अकादमिक रिकॉर्ड, पर्सनल इंटरव्यू और सेंसरी इवैल्यूएशन टेस्ट के आधार पर होंगे।

आखिरी तारीख 
आवेदन करने की आखिरी तारीख 16 अगस्त 2016 है।

योग्यता
उम्मीदवारों को बॉटनी, जूलॉजी, केमिस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी, बायोसाइंस, फूड टेक्नोलॉजी, इन्वायरमेंटल साइंस में ग्रेजुएट या एग्रीकल्चर साइंस में ग्रेजुएट होना चाहिए। ऐसे छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्हें किसी एक्सपोर्ट कंपनी/क्यूरिंग संस्थान/कॉफी प्लांटेशन से स्पॉन्सरशिप हासिल हो।

प्रक्रिया 
आवेदन वेबसाइट से डाउनलोड या कॉफी बोर्ड, बेंगलुरु से सीधे हासिल किए जा सकते हैं। पूरी तरह से भरा हुआ आवेदन 200 रुपये की डीडी ("कॉफी बोर्ड जनरल फंड नन प्लान अकाउंट" के नाम पर) और 9 इंच X 6 इंच के सेल्फ-एड्रेसेस्ड लिफाफे के साथ 16 अगस्त पहुंचने चाहिए।

इंटरव्यू और चयन की तारीख: 31 अगस्त 2016

कोर्स फी: 2,00,000 रुपये   

Wednesday, July 19, 2017

आरजीसीबी में पीएचडी

बायोटेक्नोलॉजी के आधुनिक क्षेत्र में शोध करने के बाद कॅरियर की व्यापक संभावनाएं तलाशने के इच्छुक लोग राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी के लिए आवेदन कर सकते हैं । यहां इस फील्ड से जुड़ी कई स्ट्रीम्स में शोध करने के विकल्प मौजूद हैं। भारत सरकार का यह स्वायत्त संस्थान तिरूवनंतपुरम में है। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पीएचडी आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2015 निर्धारित की गई है।
आवेदन करने वाले लोगों में से योग्य उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने वालों को ईमेल के जरिए सूचित किया जाएगा। इसके अलावा वेबसाइट पर भी उनके नाम डाले जाएंगे। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आरजीसीबी में आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2015 निर्धारित की गई है।
कई हैं स्ट्रीम्स
आरजीसीबी में जिन फील्ड्स में पीएचडी का विकल्प उपलब्ध है, वे फील्ड्स इस प्रकार हैं- प्लांट बायोलॉजी, केमिकल बायोलॉजी, क्रोनिक डिसीज बायोलॉजी, ट्रॉपिकल डिसीज बायोलॉजी, कंप्यूटेशनल बायोलॉजी आदि।
क्या है अनिवार्य योग्यता
आवेदक ने संबंधित विषय में पीजी किया हो और इसमें उसने कम से कम 60 फीसदी अंक (ओजीपीए-6.0) हासिल किए हों। एससी/एसटी आवेदकों के लिए यह 50 फीसदी अंक (ओजीपीए- 5.0) है। पीजी के फाइनल ईयर के रिजल्ट का इंतजार कर रहे लोग भी आवेदन कर सकते हैं। आवेदक की अधिकतम उम्र 28 साल हो (एससी/एसटी को छूट)। आवेदक के पास यूजीसी/ सीएसआईआर/डीबीटी आदि की मान्य रिसर्च फैलोशिप होनी चाहिए।
कैसे होगा चयन
चूंकि आवेदकों के लिए पहले ही एक राष्ट्रीय स्तर की फैलोशिप के लिए क्वालिफाई करना अनिवार्य रखा गया है इसलिए चयन प्रक्रिया सिर्फ इंटरव्यू पर आधारित होगी। जिन आवेदकों को इंटरव्यू में बुलाया जाना है, उनके नाम वेबसाइट पर और ईमेल के जरिए 2 दिसंबर को भेज दिए जाएंगे।
कैसे करें आवेदन
आवेदन के लिए द्धह्लह्लश्च://ह्म्द्दष्ड्ढ. ह्म्द्गह्य.द्बठ्ठ पर जाकर फॉर्म डाउनलोड करें। इसे भरें और फॉर्म में बताए गए दस्तावेजों की प्रतियों व एप्लीकेशन फीस के डीडी के साथ इस पते पर भेजें-
Director, Rajiv Gandhi Centre for Biotechnology, Thycaud P.O., Thiruvananthapuram 695014, Kerala
फॉर्म के साथ डीडी
एप्लीकेशन फीस के रूप में फॉर्म के साथ 500 रुपए का डीडी भेजें। डीडी The Director, Rajiv Gandhi Centre for Bio technology,Thiruvananthapuram- 695014, Kerala के पक्ष में बनवाना है।
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Sunday, July 16, 2017

जीव विज्ञान में पीएचडी

डॉक्टरेट कार्यक्रम 'कोशिकाओं की आणविक जीव विज्ञान "न्यूरोसाइंसेस और आण्विक बायोसाइंसेज के लिए गौटिंगेन ग्रेजुएट स्कूल (GGNB) के एक सदस्य है। यह आणविक बायोसाइंसेज के लिए गौटिंगेन केंद्र (GZMB) द्वारा आयोजित किया जाता है और गौटिंगेन विश्वविद्यालय, biophysical रसायन विज्ञान, प्रायोगिक चिकित्सा के लिए मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के लिए मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट, और जर्मन प्राइमेट सेंटर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है।

शोध उन्मुख कार्यक्रम और अंग्रेजी में सिखाया जाता है, जो जैव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, चिकित्सा के क्षेत्र में एक मास्टर की डिग्री (या समकक्ष), या संबंधित क्षेत्रों रखने वाले छात्रों के लिए खुला है।

कार्यक्रम है जो कोशिकाओं के अध्ययन के लिए उत्साह का हिस्सा पिछले शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों से छात्रों को स्वीकार करता है। प्रशिक्षण कैसे सेल भाग्य और टोपोलॉजी निर्धारित कर रहे हैं की एक तुलनात्मक समझ प्राप्त करने के उद्देश्य से है, कैसे व्यापक जीनोमिक विश्लेषण उपकरणों को लागू करने का एक महत्वपूर्ण भावना, और स्थापित करने और सेलुलर कार्यों के लिए वैचारिक मॉडल का परीक्षण करने की क्षमता।
अनुसंधान

यह कार्यक्रम किया जा रहा है कि कैसे कोशिकाओं की 'subcellular मॉड्यूल' आनुवंशिक जानकारी, विनियमन, शरीर विज्ञान और टोपोलॉजी के स्तर पर बातचीत और समारोह अग्रणी सवाल के साथ, सेल और उसके विनियामक नेटवर्क के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण के उद्देश्य से अनुसंधान गतिविधियों को एकजुट करती है।

मॉडल प्रणाली, प्रोकीर्योट्स (जीवाणु और आर्किया) और यूकेरियोटिक रोगाणुओं संयंत्र के लिए और रोग मॉडल सहित पशु कोशिकाओं से लेकर संरक्षित सिद्धांतों की पहचान सक्षम करने से। इसके अलावा, प्लेटफार्मों जीनोम, प्रतिलेखन हस्ताक्षर, बड़े पैमाने पर प्रोटीन की पहचान, metabolomics, इमेजिंग, साथ ही बड़े पैमाने पर विश्लेषण और मात्रात्मक मॉडलिंग, संकाय सदस्यों, जो जैव सूचना विज्ञान में विशेषज्ञ हैं के द्वारा कवर के विश्लेषण के लिए उपलब्ध हैं।

दो प्रमुख विषयों के आसपास अनुसंधान केन्द्रों। सेल गुण और सेल भाग्य नियंत्रण, पूछ के साथ पहली सौदों कैसे कोशिकाओं को उनके प्रसार और अस्तित्व, उनके भेदभाव और समारोह, और बाहरी पोषक तत्वों से तनाव को लेकर संकेतों के लिए उनकी प्रतिक्रिया को नियंत्रित। इन परस्पर घटना विनियामक नेटवर्क के आधार पर कर रहे हैं, और उनकी समझ बहुत राज्यों में आम लक्षण की पहचान करने से फायदा होता है। दूसरा विषय टोपोलॉजी और intracellular डिब्बों की गतिशीलता के साथ संबंधित है। एक प्रमुख कार्य, एकीकृत सिद्धांतों और कैसे कोशिकाओं को प्राप्त करने के व्यक्तिगत विवरण की पहचान को बनाए रखने और उनके स्थानिक संगठन को समायोजित करने के लिए है।
अध्ययन

डॉक्टरेट कार्यक्रम 'कोशिकाओं की आणविक जीव विज्ञान "न्यूरोसाइंसेस और आण्विक बायोसाइंसेज के लिए गौटिंगेन ग्रेजुएट स्कूल (GGNB) के एक सदस्य है। ग्रेजुएट स्कूल एक संयुक्त मॉड्यूलर प्रशिक्षण कार्यक्रम है जो GGNB के बारह डॉक्टरेट कार्यक्रमों में योगदान के लिए प्रदान करता है और कहा कि सभी GGNB छात्रों के लिए खुला है। एक व्याख्यान और संगोष्ठी कार्यक्रम के अलावा, प्रशिक्षण (1) थीसिस समितियों द्वारा व्यक्तिगत परामर्श, (2) विशेष प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं में 1-3 सप्ताह के गहन तरीकों पाठ्यक्रम, के होते हैं प्रयोगशालाओं में (3) 2-3 दिन विधियों पाठ्यक्रम भाग लेने वाले शिक्षकों की, (4) इस तरह के वैज्ञानिक लेखन, प्रस्तुति कौशल, संचार, परियोजना प्रबंधन, टीम के नेतृत्व कौशल, संघर्ष के संकल्प, नैतिकता, और कैरियर के विकास, और (5) के छात्र का आयोजन वैज्ञानिक बैठकों, उद्योग के रूप में व्यावसायिक कौशल पाठ्यक्रम यात्रा, और सांस्कृतिक घटनाओं। छात्रों के पाठ्यक्रम और घटनाओं की एक बड़ी संख्या में से चुनने के द्वारा अपनी व्यक्तिगत पाठ्यक्रम दर्जी करने में सक्षम हैं।

कार्यक्रम है जो कोशिकाओं के अध्ययन के लिए उत्साह का हिस्सा पिछले शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों से छात्रों को स्वीकार करता है। प्रशिक्षण कैसे सेल भाग्य और टोपोलॉजी निर्धारित कर रहे हैं की एक तुलनात्मक समझ प्राप्त करने के उद्देश्य से है, कैसे व्यापक जीनोमिक विश्लेषण उपकरणों को लागू करने का एक महत्वपूर्ण भावना, और स्थापित करने और सेलुलर कार्यों के लिए वैचारिक मॉडल का परीक्षण करने की क्षमता। एक तुलनात्मक व्याख्यान श्रृंखला, आम तौर पर प्रति सत्र दो या दो से अधिक वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत किया, विभिन्न प्रजातियों और यहां तक ​​कि राज्यों में अनुरूप घटनाएं शामिल हैं। विधियों पाठ्यक्रम जीनोम, प्रतिलेखन हस्ताक्षर, बड़े पैमाने पर प्रोटीन की पहचान, सेल आकृति विज्ञान और विनियमन, metabolomics के उच्च सामग्री के विश्लेषण, साथ ही बड़े पैमाने पर विश्लेषण और मात्रात्मक मॉडलिंग प्रतिभागियों जो जैव सूचना विज्ञान में विशेषज्ञता के माध्यम से विश्लेषण में सभी छात्रों की सहायता करेंगे।

प्रायोगिक अनुसंधान डॉक्टरेट के अध्ययन के प्रमुख घटक का गठन किया और डॉक्टरेट कार्यक्रम के एक संकाय सदस्य की प्रयोगशाला में आयोजित किया जाता है। डॉक्टरेट अनुसंधान परियोजनाओं को एक स्कूल चौड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम, सभी GGNB छात्रों को, जो एक जीवंत अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान समुदाय के सदस्य हैं के लिए पेशकश से पूरित कर रहे हैं। डॉक्टरेट कार्यक्रम की भाषा अंग्रेजी है।

Friday, July 14, 2017

फर्नीचर डिजाइनिंग में करियर,

एक समय तक फर्नीचर डिजाइनिंग का काम कारपेंटर ही करते थे, लेकिन आज के दौर में यह एक अलग प्रोफेशन बन चुका है। अगर आप की भी इसमें रुचि है और आप क्रिएटिव हैं तो फर्नीचर डिजाइनर बनकर करियर संवार सकते हैं। संबंधित ट्रेनिंग हासिल कर आप किसी कंपनी में जॉब कर सकते हैं या फिर अपना कारोबार भी शुरू कर सकते हैं। इस बारे में विस्तार से जानिए

पर्सनल स्किल्स
फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आपमें क्रिएटिव और आर्टिस्टिक सेंस का मजबूत होना अति आवश्यक है, साथ ही कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी चाहिए। मार्केटिंग स्किल्स और बिजनेस की भी समझ अनिवार्य है। फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में काम करने के लिए मार्केट में डिजाइनिंग को लेकर क्या कुछ नया किया जा रहा है, उस ओर भी पैनी नजर रखनी होती है क्योंकि फर्नीचर डिजाइनर का काम एक बेजान लकड़ी में डिजाइन के जरिए उसे आकर्षक रूप देना होता है।

बढ़ रही है डिमांड
फर्नीचर डिजाइनिंग व्यवसाय अब केवल कारपेंटर का काम नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कुशल डिजाइनरों की मांग व्यापक स्तर पर बढ़ी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले पांच वर्षों में बाजार में तकरीबन एक लाख फर्नीचर डिजाइनरों की मांग होगी।उल्लेखनीय है कि फर्नीचर डिजाइनिंग में पैसे कमाने के साथ-साथ अपनी कलात्मक क्षमता को अभिव्यक्त करने का मौका और सृजन की संतुष्टि का अहसास भी मिलता है।

एंट्री प्रोसेस
आमतौर पर फर्नीचर डिजाइनिंग कोर्स में प्रवेश के लिए शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास है, लेकिन कुछ संस्थानों में नामांकन के लिए आवेदन करते समय उम्मीदवार का किसी भी विषय  से 12वीं पास होना आवश्यक है। कुछ समय पहले तक फर्नीचर डिजाइनिंग के विभिन्न कोर्स सामान्यत: डिजाइनिंग केमुख्य कोर्स केअंतर्गत ही कराए जाते थे लेकिन वर्तमान में कई संस्थाओं में फर्नीचर डिजाइनिंग एक स्वतंत्र स्ट्रीम के रूप में भी पढ़ाया जाने लगा है।

मेन कोर्सेस
ट्रेनिंग कोर्सेस की बात करें तो इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कई तरह के प्रोफेशनल कोर्स उपलब्ध हैं। कंप्यूटर एडेड डिजाइनिंग के जरिए भी फर्नीचर कला सीखी जा सकती हैै। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए फर्नीचर डिजाइनिंग में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स, बैचलर डिग्री कोर्स उपलब्ध हैं। सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि एक साल की होती है, जबकि डिप्लोमा कोर्स दो साल की अवधि का होता है। फर्नीचर डिजाइनिंग केकई पाठ्यक्रमों केलिए प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद साक्षात्कार में उत्तीर्ण होने के बाद दिया जाता है। इस परीक्षा में आपकी कलात्मक प्रतिभा और सोच को भी परखा जाता है। देश के प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ डिजाइनिंग, अहमदाबाद में फर्नीचर डिजाइनिंग केपोस्ट ग्रेजुएट कोर्स उपलब्ध हैं। यहां प्रवेश केलिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा इंटीरियर डिजाइनिंग के तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में भी फर्नीचर डिजाइनिंग एक महत्वपूर्ण भाग होता है। इंटीरियर डिजाइनिंग के पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के बाद फर्नीचर डिजाइनिंग में अल्पकालिक विशेषज्ञता कोर्स भी किया जा सकता है

जॉब आॅप्शंस
दिनों-दिन बढ़ती मांग और स्वर्णिम भविष्य की कल्पनाओं के कारण फर्नीचर डिजाइनिंग करियर के रूप में आज युवाओं में बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। किसी प्रतिष्ठित संस्थान से फर्नीचर डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद किसी भी डिजाइनर के साथ काम किया जा सकता है। फर्नीचर डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद अपना व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है या इस क्षेत्र में काम कर रही प्रतिष्ठित कंपनियों से जुड़कर काम कर सकते हैं। भारत में फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में कई विदेशी कंपनियाँ भी आ चुकी हैं। रचनात्मकता और नए डिजाइन के लिए कुशलता के साथ-साथ प्रशिक्षण की भी जरूरत होती है इसीलिए क्षेत्र में करियर की असीम संभावनाओं को देखते हुए अनेक संस्थानों ने फर्नीचर डिजाइनिंग के कोर्स शुरू किए हैं।
आप इस क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियों के लिए डिजाइनिंग का कार्य कर सकते हैं। कंप्यूटर स्किल्स और कंप्यूटर वर्क की मदद से अपने कार्य को अंजाम दे सकते हैं। अगर आप अपना स्वयं का रोजगार शुरू करना चाहते हैं,तो डिग्री या डिप्लोमा के आधार पर बैंक से लोन मिल जाता है। फर्नीचर की कई बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां समय-समय पर अपने यहां नियुक्तियां निकालती हैं। इसके अलावा कई प्रशिक्षण संस्थान भी इस फील्ड के अनुभवी लोगों को रोजगार केअवसर मुहैया कराते हैं।

इनकम
फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में अनुभव का महत्व सबसे ज्यादा है। उसी आधार पर बाजार में प्रोफेशनल की मांग बढ़ती है। इस फील्ड में अनुभव के आधार पर ही इनकम का दायरा निर्धारित होता है। आजकल फर्नीचर डिजाइनर्स के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करना काफी महत्वपूर्ण है। इस तरह आप एक साथ कई कंपनियों से जुड़ सकते हैं और उनकेलिए डिजाइनिंग कर सकते हैं। प्रशिक्षुओं से कंप्यूटर स्किल्स और कंप्यूटर वर्क की उम्मीद की जाती है। इंटीरियर डिजाइनिंग केक्षेत्र में हुए क्रांतिकारी बदलाव ने फर्नीचर डिजाइनिंग को आज अच्छी इनकम वाला व्यवसाय बना दिया है। फर्नीचर डिजाइनर का शुरुआती वेतन दस से बीस हजार रुपए प्रतिमाह तक हो सकता है। इसकेबाद अनुभव के आधार पर वेतन बढ़ता जाता है। अगर आप स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं तो आय लाखों रुपए में हो सकती है।

प्रमुख संस्थान
एनआईडी, अहमदाबाद
गवर्नमेंट पोलीटेक्निक कॉलेज, चंडीगढ़
इंस्टीट्यूट आॅफ फर्नीचर डिजाइनिंग, पटियाला
गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक कॉलेज, लखनऊ
इंडियन प्लाइवुड इंडस्ट्रीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, बैंगलुरु