Saturday, February 18, 2017

लिक्विड गोल्ड में करियर

दुनियाभर में एनर्जी के रूप में पेट्रोलियम पदार्थों की उपयोगिया क्या है, इससे हम सभी भलीभांति अवगत हैं। पहले पेट्रोलियम के नाम पर हम सिर्फ पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और केरोसिन ऑयल को ही जानते थे, लेकिन अब इसमें सीएनजी भी शामिल हो गई है। दरअसल, ऑयल ऐंड गैस इंडस्ट्री एक विशिष्ट फील्ड है, जिसमें खासतौर पर प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत पड़ती है। इनमें इंजीनियर्स की मांग तो हमेशा बनी ही रहती है, अन्य क्षेत्रों के जानकारों के लिए भी भरपूर मौके होते हैं। इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी से जुड़े कोर्स काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

क्वालिफिकेशन 
12वीं की परीक्षा भौतिक विज्ञान, गणित और रसायन विज्ञान से 50 प्रतिशत अंकों से पास करने के बाद आप पेट्रोलियम से जुड़े कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। केमिकल और पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में बीई और बीटेक कर चुके छात्र पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में एमटेक के लिए आवेदन कर सकते हैं। बीबीए में प्रवेश के लिए 12वीं किसी भी संकाय से उत्तीर्ण होना जरूरी है। पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी संबंधी एमएससी कोर्स में ऐडमिशन के लिए जियोलॉजी (भूगर्भ विज्ञान), पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल, केमिकल, मैकेनिकल, पॉलिमर साइंस आदि में ग्रेजुएशन डिग्री होनी चाहिए। पेट्रोलियम सेक्टर की पढ़ाई के दौरान यह सिखाया जाता है कि किस तरह गणित, जियोलॉजी और भौतिक विज्ञान के नियम, सूत्र और सिद्घांतों का प्रयोग ईंधन की खोज, विकास और उत्पादन में किया जा सकता है? पेट्रोलियम से जुड़े कोर्स में एडमिशन आमतौर पर लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होते हैं।


कोर्स
पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी ने बीबीए, एमबीए, एमटेक, बीटेक, एमएससी जैसे कोर्स शुरू किए हैं। इसके अलावा देश के चुनिंदा संस्थानों ने पेट्रोलियम के क्षेत्र में बीई, बीटेक, एमई, एमटेक, एमएससी और बीएससी जैसे कोर्स शुरू किए हैं। ये सभी कोर्स पेट्रोकैमिकल इंजीनियरिंग, पेट्रोटेक्नोलॉजी, गैस इंजीनियरिंग, पेट्रोमार्केटिंग आदि में शुरू किए हैं।

स्टडी कोर्स
पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में छात्र जियोलॉजी, भौतिकी और इंजीनियरिंग के सिद्वांतों द्वारा पेट्रोलियम की रिकवरी, डेवलपमेंट और प्रोसेसिंग के बारे में जानते हैं। इसके अलावा ड्रिलिंग, मैकेनिक्स, पर्यावरण संरक्षण और पेट्रोलियम जैसे विषयों पर छात्रों की पकड़ बनाई जाती है। पेट्रोलियम इंडस्ट्री को मुख्य तौर पर दो भागों में बांट कर देख सकते हैं- अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम सेक्टर। अपस्ट्रीम सेक्टर में खोज, उत्पादन व तेल और प्राकृतिक गैसों का दोहन कैसे किया जाए, इसकी शिक्षा व ट्रेनिंग दी जाती है। डाउनस्ट्रीम सेक्टर में रिफाइनिंग, मार्केटिंग और वितरण से संबंधित पूरी जानकारी दी जाती है। पेट्रोलियम के क्षेत्र में टीम की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण होती है। एक पेट्रोलियम इंजीनियर को जियोलॉजिस्ट, अन्वेषणकर्ता, इंजीनियर, पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ काम करना पड़ता है।


क्या है स्कोप
पहले इस क्षेत्र में जियोलॉजिस्ट की काफी मांग थी, समय बदलने के साथ मैकेनिकल क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस इंडस्ट्री में अपनी धाक जमाई। करियर की अनेक संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में प्रबंधन से लेकर इंजीनियरिंग तक के कोर्स शुरू हुए हैं। खासबात यह है कि प्रफेशनल्स की मांग हमेशा बनी रहती है। विशिष्ट क्षेत्र होने और प्रोफेशनल्स की मांग के मुकाबले उपलब्धता कम होने से इस सेक्टर में सैलरी भी काफी आकर्षक दी जाती है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, ओएनजीसी, रिलायंस, अदानी एस्सार और केयर्स एनर्जी जैसी कई बडी कंपनियां पेट्रो प्रोफेशनल्स को शानदार सैलरी पैकेज पर नौकरियों के ऑफर दे रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में ही हर साल तकरीबन आठ लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत है। इस क्षेत्र में यूरोप के साथ ही खाडी़ देशों के भी दरवाजे खुले हैं।

काम और पद

जियोफिजिसिस्ट
इनका काम धरती की आंतरिक और वाह्य संरचना का अध्ययन करना है। इस पद पर काम करने के लिए जियोलॉजी, फिजिक्स, मैथ्स और केमिस्ट्री का बैकग्राउंड होना चाहिए।

ऑयल वेल-लॉग एनालिस्ट
इनका काम ऑयल फील्ड्स से नमूने लेना, खुदाई के दौरान विभिन्न मापों का ध्यान रखना और काम पूरा होने पर माप और नमूनों की जांच करना होता है।

ऑयल ड्रिलिंग इंजीनियर
इनका काम तेल के कुओं की खुदाई के लिए योजना बनाना होता है। इंजीनियर यह भी कोशिश करते हैं कि यह काम कम से कम खर्च में पूर्ण किया जा सके।

प्रॉडक्शन इंजीनियर
तेल के कुओं की खुदाई का काम पूरा होने के बाद प्रॉडक्शन इंजीनियर जिम्मेदारी संभालते हैं। ईंधन को सतह तक लाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका क्या है, इसका निर्णय प्रॉडक्शन इंजीनियर करते हैं।

ऑयल रिजरवॉयर इंजीनियर
इंजीनियर रिजरवॉयर प्रेशर निर्धारित करने के लिए जटिल कंप्यूटर मॉडल्स और गणित के फार्म्यूलों का प्रयोग करते हैं।

ऑयल फैसिलिटी इंजीनियर
ईंधन के सतह पर आने के बाद इसे अलग करने, प्रोसेसिंग और दूसरी जगहों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ऑयल फैसिलिटी इंजीनियर के कंधों पर होती है।

सैलरी
पेट्रोलियम सेक्टर में फ्रेशर्स की सैलरी की बात करें, तो यह चुने गए फील्ड पर अधिक निर्भर करता है। मोटे तौर पर कह सकते हैं कि प्रशिक्षित युवा शुरुआत में साढ़े तीन से चार लाख रुपये तक का पैकेज हासिल कर सकता है। इस सेक्टर में आकर्षक सैलरी के अलावा अनुभवी व्यक्तियों को दुनियाभर में काम करने का मौका भी मिलता है। इस क्षेत्र की सरकारी कंपनियों में छह से सात लाख सालाना और निजी क्षेत्र में इससे भी ज्यादा सैलरी पैकेज मिलता है।

इंस्टीट्यूट वॉच
u राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, रायबरेली

www.rgipt.ac.in

u लखनऊ यूनिवर्सिटी, लखनऊ

www.lkouniv.ac.in

u पंडित दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी, गांधीनगर

www.pdpu.ac.in

u इंडियन स्कूल ऑफ माइंस धनबाद

www.ismdhanbad.ac.in

u महाराष्ट्र इंडस्ट्री ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे,

www.mitpune.com

u अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी

www.amu.ac.in

u पुणे यूनिवर्सिटी

www.unipune.ernet.in

u बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी

www.itbhu.ac.in

u आईआईटी चेन्नई

www.mtechadm.iitm.ac.in

u यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम ऐंड एनर्जी स्टडीज, देहरादून,

www.upes.ac.in

Tuesday, February 14, 2017

पॉलीमर साइंस में करियर

आज की जिंदगी में प्लास्टिक कुछ इस तरह रचा-बसा है कि उसके बिना जिंदगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती. यदि हम आसपास नजर डालें तो कम से कम दस में से आठ चीजें प्लास्टिक निर्मित मिलेंगी. 

प्लास्टिक, फाइबर और रबर- तीनों ही किसी न किसी रूप में एक ही फैमिली से हैं और इन सभी का निर्माण पॉलीमर की मदद से होता है. प्लास्टिक-पॉलीमर उत्पादों की लिस्ट काफी लंबी है. 

पॉलिमर कपड़े, रेडियो, टीवी, सीडी, टायर, पेंट, दरवाजे और चिपकाने वाले पदार्थ इसी उद्योग की देन हैं. अकेले ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में 75 प्रतिशत पार्ट्स इसी उद्योग की मदद से बनाए जाते हैं. 

इतना ही नहीं, हवाई जहाज में भी प्लास्टिक का ही परिमार्जित रूप इस्तेमाल होता है. आंकड़ों पर नजर डालें तो प्लास्टिक की खपत के मामले में चीन के बाद भारत का दूसरा नंबर है. 

प्लास्टिक इंडस्ट्री में भारत का प्रतिवर्ष 4,000 करोड़ रुपये का कारोबार है. अकेले पैकेजिंग इंडस्ट्री में ही बड़ी तादाद में प्लास्टिक का उपयोग होता है. इसमें हर साल 30 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है. 

दुनिया में हर एक व्यक्ति औसतन साल में 30 किलोग्राम प्लास्टिक का उपयोग करता है, जबकि भारत में यह आंकड़ा फिलहाल चार किलो ग्राम प्रतिवर्ष ही है. लेकिन जिस किस्म की पैकेजिंग जागरूकता भारत में भी बढ़ रही है, आने वाले दिनों में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक की खपत का औसत कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा. 

कोर्स-

इसकी इसी व्यापकता को देखते हुए कई तरह के कोर्स की शुरुआत हुई है. हालांकि ये कोर्स अभी कुछ चुनिंदा संस्थानों में ही उपलब्ध हैं. कई बार प्रतिभाशाली होने के बावजूद छात्रों को इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पाता. 

ऐसे छात्रों के लिए बीएससी पॉलीमर साइंस एक अच्छा विकल्प हो सकता है. कोर्स के बाद छात्र आगे एमएससी या एमटेक कर सकते हैं. अगर नौकरी करना चाहें तो उसके लिए भी काफी बेहतर अवसर हैं यानी आप आईओसी, ओएनजीसी जैसे सरकारी संस्थानों में भी अच्छी नौकरियां पा सकते हैं.

बीएससी पॉलीमर साइंस अवसरों की दृष्टि से उपयोगी कोर्स माना जा रहा है. पॉलीमर और प्लास्टिक के क्षेत्र में डिप्लोमा, बीएससी, एमएससी और इंजीनियरिंग कोर्स उपलब्ध हैं. 

डिप्लोमा कोर्स के लिए अपने राज्य में स्थित पॉलीटेक्निक संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं. इंजीनियरिंग कोर्स में बीई (पॉलीमर साइंस), बीटेक (प्लास्टिक एंड पॉलीमर), बीटेक (प्लास्टिक एंड रबर) हैं, जबकि स्नातकोत्तर स्तर पर एमटेक के लिए प्लास्टिक-पॉलीमर कोर्स हैं. 

इसके अलावा, केमिकल पॉलीमर, बीएससी पॉलीमर साइंस, एमएससी पॉलीमर, केमेस्ट्री कोर्स भी देश के कुछ संस्थानों में पढ़ाए जाते हैं. बीई, बीटेक, बीएससी और बीकॉम कोर्स के लिए 102 पीसीएम विषयों में 50 प्रतिशत अंकों में पास छात्र आवेदन कर सकते हैं.

इसमें बीएससी को छोड़ कर तीनों कोर्स चार वर्ष की अवधि के हैं. कुछ संस्थानों में जैसे आईआईटी दिल्ली, मुंबई यूनिवर्सिटी में एमटेक डेढ़ वर्ष की अवधि का है. 
इसमें केवल संबंधित ब्रांच में बीई और बीटेक पास छात्रों को ही दाखिला मिल सकता है. मद्रास यूनिवर्सिटी में पांच वर्षीय एमएससी इंटीग्रेटेड कोर्स में 102 पीसीएम छात्रों को प्रवेश मिल सकता है. 

अन्य संस्थानों के एमटेक दो वर्षीय कोर्स में इंजीनियरिंग स्नातक में ही प्रवेश ले सकते हैं. एमएससी कोर्स में प्रवेश के लिए इंडस्ट्रियल, केमिकल या केमेस्ट्री ऑनर्स के अलावा वे छात्र भी आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने बीएससी में केमेस्ट्री को एक विषय के रूप में पढ़ा है. 

रोजगार की अपार संभावनाएं 

भारत में प्लास्टिक उद्योग कोई चार मिलियन डॉलर का है. यह हर साल 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. इस लिहाज से प्लास्टिक विशेषज्ञों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं.

कंप्यूटर इंडस्ट्री हो या इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, सभी में इसकी मांग है. 

रिसर्च और अध्ययन के अलावा प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर की विभिन्न कंपनियों में नौकरी के अच्छे अवसर हैं. विभिन्न जूते की कंपनियों के अलावा, इस क्षेत्र में मार्केटिंग और प्रबंधन में भी काफी संभावनाएं हैं. यदि आप चाहें तो स्वरोजगार भी कर सकते हैं.

संस्थान- 

दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नई दिल्ली कोर्स- बीई (पॉलीमर साइंस), एमई (डेढ़ वर्ष का), पीएचडी. 
आईआईटी, नई दिल्ली कोर्स- एमटेक (डेढ़ वर्ष का). 
हरकोर्ट बटलर इंस्टीट्यूट, कानपुर कोर्स- बीटेक (प्लास्टिक टेक). 
बिड़ला इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, रांची कोर्स- बीई पॉलीमर.
भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ अप्लाइड साइंस, नई दिल्ली कोर्स-बीएससी ऑनर्स (पॉलीमर साइंस) 
डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई कोर्स- बीकॉम (पॉलीमर), बीएससी, एमटेक (डेढ़ वर्ष). 
लक्ष्मी नारायण इंडस्ट्री ऑफ टेक्नोलॉजी, नागपुर कोर्स- बीटेक. 
संत लोंगोवाल इंडस्ट्री ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, संगरूर, पंजाब कोर्स- बीई (पेपर एंड प्लास्टिक) तीन वर्ष का. 
इंडस्ट्री ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कानपुर यूनिवर्सिटी, कानपुर कोर्स- बीटेक (प्लास्टिक), एमटेक (प्लास्टिक). 
बुंदेलखंड यू निवर्सिटी, झांसी कोर्स- एमएससी (इं टीग्रेटेड), एमएससी (पॉलीमर), एससी (पॉलीमर केमिस्ट्री)

Friday, February 10, 2017

एडवेंचर स्पोर्टस में बनाएं करियर

क्या आपको साहसिक खेल पसंद है? अगर आप कुदरत के करीब रहना पसंद करते हैं तो एडवेंचर स्पोर्टस के क्षेत्र में आप करियर बना सकते हैं। घरेलू पर्यटन का विकास होने की वजह से एडवेंचर स्पोर्टस के पेशेवर खिलाड़ियों की मांग में भी कई गुना का इजाफा हुआ है। इसके अलावा नेशनल जियोग्राफिक और डिस्कवरी जैसे चैनल सामान्य यात्राओं की बजाय रोमांचक यात्राओं पर जाने वाले पर्यटकों को विशेष लाभ भी मुहैया कराते हैं।
क्या है एडवेंचर स्पोर्टस
एडवेंचर स्पोर्टस को एक्शन स्पोर्ट्स, एग्रो स्पोर्ट्स और एक्सट्रीम स्पोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह के खेलों में वो गतिविधियां (खेल संबंधी) आती हैं, जिनमें बड़े खतरे अंतर्निहित होते हैं। इन गतिविधियों में गति, उच्च स्तर के शारीरिक दमखम और विशेष कौशल की जरूरत होती है।
कई तरह के एडवेंचर स्पोर्ट्स
इन खेलों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है- एअर स्पोर्ट्स, लैंड स्पोर्ट्स और वॉटर स्पोर्ट्स। खेलों की इन श्रेणियों में ढेर सारे खेल शामिल हैं, इनमें से कुछ प्रमुख हैं-
एअर स्पोर्ट्स-  बंजी जंपिंग, पैराग्लाइडिंग, स्काई डाइविंग और स्काई सर्फिग आदि।
लैंड स्पोर्ट्स-  रॉक क्लाइम्बिंग, स्केट बोर्डिग, माउंटेन बाइकिंग, स्कीइंग, स्नो बोर्डिंग और ट्रैकिंग आदि।
वाटर स्पोर्ट्स-  स्कूबा डाइविंग, व्हाइट वाटर राफ्टिंग, कायकिंग, केनोइंग, क्िलफ डाइविंग,स्नॉर्केलिंग और याट रेसिंग आदि।
पेशेवरों का काम
एडवेंचर स्पोर्टस के क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों का काम भौगोलिक दृष्टि से उन क्षेत्रों की तलाश करना होता है जहां एडवेंचर स्पोर्ट्स की संभावना हो। इसके साथ ही वह उस क्षेत्र में खेल से जुड़े जोखिमों का आकलन भी करते हैं। इन कार्यों को करने के बाद वह खेल गतिविधियों को संचालित करने का प्रारूप तैयार करते हैं और संभावित खतरों से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन की कार्ययोजना भी बनाते हैं। यह पेशा देखने में भले ही बेहद रोमांचक हो, लेकिन असल जिंदगी में यह काफी चुनौतीपूर्ण है। इसके पेशेवरों को हमेशा जोखिम उठाते हुए जिंदगी की महीन डोर के सहारे चलना पड़ता है। उन्हें कई बार घबराए हुए और कई बार उत्साही क्लाइंटों को संभालने की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ती है।
रोजगार के मौके
साहसिक खेल के क्षेत्र में सबसे ज्यादा रोजगार एडवेंचर स्पोर्ट्स कंपनियां देती हैं। हालांकि इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों के पास काम में बदलाव करके भी रोजगार और अपनी पेशेवर रुचि को बरकरार रखने का विकल्प होता है। वह स्कूलों के साथ मिलकर छात्रों के लिए आउटडोर एजुकेशन प्रोग्राम संचालित कर सकते हैं, तो पर्सनल ट्रेनर और कैजुअल टूर गाइड के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा वह अपनी निजी एडवेंचर स्पोर्ट्स कंपनी भी शुरू कर सकते हैं। कुछ लोग तो इस क्षेत्र में काम करने के लिए दुनिया की सैर करने का विकल्प भी चुनते हैं।
योग्यता
-एडवेंचर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में बतौर पेशेवर काम करने के लिए किसी विषय के साथ बारहवीं या बैचलर डिग्री प्राप्त होना पर्याप्त है। इस योग्यता के आधार पर एडवेंचर स्पोर्ट्स में डिप्लोमा या डिग्री पाठयक्रम संचालित करने वाले संस्थानों में प्रवेश लिया जा सकता है। इन संस्थानों में प्रशिक्षण पाठयक्रम पूरा करने के बाद आसानी से रोजगार प्राप्त किया जा सकता है।
-इसके अलावा शारीरिक रूप से मजबूत और स्वस्थ होना भी आवश्यक होता है।
-इस पेशे में जल आधारित खेलों के लिए तैराकी में निपुण होना जरूरी होता है।
-अंग्रेजी और किसी एक विदेशी भाषा में दक्ष होना भी इस पेशे में मददगार होता है।
ऐसे में अगर आपको भी साहसिक खेल का रोमांच पसंद है तो इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं

Wednesday, February 8, 2017

ज्वेलरी डिज़ाइनिंग में करियर

किसी भी पार्टी, फंक्शन आदि में जाने से पहले ख़ूबसूरत कपड़ोेंं के साथ ज्वेलरी का टच पर्सनालिटी को और भी निखारता है. फैशन ने आज ग्लोबल स्तर पर लोगों के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है. ज्वेलरी का बढ़ता ट्रेंड ही आज युवाओं को इसमें करियर बनाने के लिए आकर्षित कर रहा है. फैशन की दुनिया में क़दम रखना चाहते हैं, तो ज्वेलरी डिज़ाइन आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. ज्वेलरी डिज़ाइन में करियर बनाने के लिए कैसे करें शुरुआत? आइए, जानते हैं.
क्या है ज्वेलरी डिज़ाइन?
तरह-तरह के गहनों को बनाने की कला को ही ज्वेलरी डिज़ाइन कहते हैं. गोल्ड, सिल्वर, पर्ल, प्लेटिनम, आदि धातुओं को तराशकर उनसे
तरह-तरह के गहने बनाए जाते हैं. इसी तरह हाथी दांत, पत्थर, सीप आदि का भी प्रयोग स्टाइलिश ज्वेलरी बनाने में किया जाता है. ज्वेलरी डिज़ाइनर उन्हें कहते हैं, जो ज्वेलरी की स्टाइल, पैटर्न आदि सेट करते हैं.
शैक्षणिक योग्यता
ज्वेलरी डिज़ाइन में करियर बनाने के लिए 12वीं पास होना बहुत ज़रूरी है. इसके बाद आप आगे के कोर्स कर सकते हैं. दसवीं पास वालों के लिए भी ज्वेलरी डिज़ाइन में बेहतरीन करियर विकल्प है. दसवीं के बाद आप शॉर्ट टर्म कोर्सेस कर सकते हैं. आगे के कोर्स के लिए इच्छुक व्यक्ति को ऐप्टीट्यूड टेस्ट देना पड़ता है. इसके बाद ही आप आगे के कोर्स के लिए आवेदन भर सकते हैं.
क्या हैं कोर्सेस?
ज्वेलरी डिज़ाइन में करियर बनाने के लिए डिप्लोमा, डिग्री या सर्टीफिकेट कोर्स कर सकते हैं.
सर्टीफिकेट कोर्सेस
  • बेसिक ज्वेलरी डिज़ाइन
  • डायमंड आइडेंटीफिकेशन एंड ग्रेडिंग
  • कैड फॉर जेम्स एंड ज्वेलरी
  • कलर्ड जेमस्टोन आइडेंटिफिकेशन
डिग्री कोर्सेस
  • बीएससी इन ज्वेलरी डिज़ाइन
  • बैचलर ऑफ ज्वेलरी डिज़ाइन
  • बैचलर ऑफ एक्सेसरीज़ डिज़ाइन
  • मास्टर्स डिप्लोमा इन ज्वेलरी डिज़ाइन एंड टेक्नोलॉजी
डिप्लोमा कोर्सेस
  • डिप्लोमा इन ज्वेलरी डिज़ाइन एंड जैमोलॉजी
  • एडवांस ज्वेलरी डिज़ाइन विद कैड
  • ज्वेलरी मैनुफैक्चरिंग
कोर्स के दौरान
तेज़ी से बढ़ते इस क्षेत्र की डिमांड लोगों को इसमें करियर बनाने के लिए आकर्षित कर रही है. ज्वेलरी डिज़ाइन कोर्स के दौरान अलग-अलग पत्थरों, ज्वेलरी बनाने में कलर कॉम्बिनेशन, डिज़ाइन थीम, प्रेज़ेंटेशन, फ्रेमिंग, कॉस्ट्म ज्वेलरी आदि सिखाया जाता है.
तकनीकी शिक्षा
ज्वेलरी डिज़ाइन कोर्स के दौरान कम्प्यूटर एडेड ज्वेलरी सॉफ्टवेयर, जैसे- ज्वेल कैड, ऑटो कैड, 3 डी स्टूडियो आदि के बारे में टेक्निकल नॉलेज भी दिया जाता है. इसके साथ ही फोटोशॉप, कोरल ड्रॉ, वेट एंड मेटल कम्पोजिशन के बारे में भी बताया जाता है.
प्रमुख संस्थान
  •  जैमोलॉजी इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, मुंबई.
  • सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई.
  •  जैमस्टोन्स आर्टिसन्स ट्रेनिंग स्कूल, जयपुर.
  • इंडियन जैमोलॉजी इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली.
  • जैम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, जयपुर.
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली.
  • ज्वेलरी डिज़ाइन एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, नोएडा.
  • एसएनडीटी यूनिवर्सिटी, मुंबई.
पर्सनल स्किल 
ज्वेलरी डिज़ाइन में करियर बनाने के लिए सबसे पहले इस क्षेत्र के प्रति लगाव और ज्वेलरी डिज़ाइन का सेंस होना बहुत ज़रूरी है. इसके साथ ही क्रिएटिव, कल्पनाशील, न्यू ट्रेंड का सेंस, फैशन सेंस आदि के साथ मेहनती होना बहुत आवश्यक है. ज्वेलरी डिज़ाइन में करियर बनाने की सोच रहे हैं, तो धैर्य को अपना साथी बना लें. इस काम में ईमानदारी भी बहुत ज़रूरी होती है. ख़ासतौर पर अगर आप किसी गोल्ड, डायमंड जैसी धातुओं से ज्वेलरी बनाने में लगे हैं, तो थोड़ी सी भी लापरवाही आपके व्यक्तित्व पर प्रश्‍न चिह्न लगा सकती है. ग्लोबल मार्केट और फैशन के प्रति रुचि होना बहुत ज़रूरी है.
रोज़गार के अवसर
ज्वेलरी डिज़ाइन में आगे बढ़ने के लिए बहुत स्कोप है. कोर्स करने के बाद आप फुल टाइम किसी कंपनी के साथ जुड़कर काम शुरु कर सकते हैं. ज्वेलरी डिज़ाइन हाउस, एक्सपोर्ट हाउस, फैशन हाउस आदि जगहों पर आप काम शुरु कर सकते हैं. इसके साथ ही अगर आप आर्थिक रूप से मज़बूत हैं, तो ऑफिस-कम होम से भी काम शुरु कर सकते हैं. घर से काम शुरु करने के कई फ़ायदे होते हैं. घर के काम के अलावा आप अपने करियर को भी संवार सकते हैं. इतना ही नहीं दिन में किसी ऑफिस में काम करके आप घर पर पार्ट टाइम इस काम को जारी रख सकते हैं. आप अगर किसी कंपनी से फुल टाइम नहीं जुड़ना चाहते तो फ्रीलांस के तौर पर काम शुरू कर सकते हैं. इससे आप मनमुताबिक़ पैसा कमा सकते हैं.
सैलरी
पढ़ाई के तुरंत बाद किसी कंपनी में जॉब लगने पर शुरुआत में 7 से 8 हज़ार रुपए प्रति माह आप कमा सकते हैं. अनुभव के साथ इस क्षेत्र में आप उम्मीद से ज़्यादा कमा सकते हैं. अनुभव होने पर 18 से 20 और फिर इसी तरह आगे बढ़ते रहते हैं. प्रसिद्ध ज्वेलरी डिज़ाइनर महीने का लाख रुपए भी लेते हैं.
टॉप कंपनी
ज्वेलरी डिज़ाइन का कोर्स करने के बाद आप नौकरी के लिए इन जगहों पर जा सकते हैं.
  •  तनिष्क
  •  गिली
  • नक्षत्र
  •  ज्वेलरी मेकिंग एंड डिज़ाइनिंग यूनिट्स
  • ज्वेलरी शॉप्स एंड शोरूम
  •  एंटीक एंड आर्ट ऑक्शन हाउसेस

Monday, February 6, 2017

ब्रांड मैनेजमेंट में करियर

हर कंपनी ग्राहकों की मांग को देखते हुए अपने उत्पाद की ब्रांडिंग करना चाहती है ताकि उसका उत्पाद बाजार में सबसे खास लगे। अपने उत्पाद को अलग ढंग से प्रस्तुत करने की यही कला ब्रांडिंग कहलाती है। ब्रांडिंग की इस प्रकिया में ब्रांड मैनेजर अहम भूमिका निभाता है।
प्रतियोगिता के इस दौड़ में निश्चित तौर पर हर कंपनी अपने उत्पाद को अलग ढंग से प्रस्तुत करना चाहती है और यही वजह है कि इस तरह के प्रोफेशनल कोर्स की अब खूब मांग होने लगी है। इस कोर्स को असल में ब्रांड मैनेजमेंट कहा जाता है जिसके अंतर्गत किसी खास उत्पाद को मार्केटिंग तकनीकों के प्रयोग से ग्राहकों के सामने इस ढंग से पेश किया जाता है ताकि उसकी छाप लंबे समय तक बरकरार रहे।
» योग्यता : किसी भी विषय से स्नातक की डिग्री कर, कैट और मैट की प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद सीधे आप एमबीए कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। वहीं ब्रांड मैनेजमेंट कोर्स में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। यह कोर्स यूं तो दो साल की अवधि का है लेकिन आप चाहें तो इसमें डिप्लोमा कोर्स भी कर सकते हैं जिसकी अवधि एक साल है।
» गुण : बतौर ब्रांड मैनेजर आपमें भाषा की अच्छी पकड़ होनी लाजमी है। वहीं बाजार की पूरी जानकारी होने के साथ-साथ ग्राहकों की उत्पाद को लेकर क्या मांग है उस पर आपकी पैनी नजर होनी जरूरी है। बाजार पर आपकी पूरी तरह से पैंठ हो। इसी के साथ आपमें रचनात्मकता और लोगों से अच्छे संपर्क साधने की कला भी होनी चाहिए।
» संभावनाएं : इस कोर्स को करने के उपरांत आपके पास कई विकल्प हैं जहां से आप अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं। शुरुआती तौर पर आप चाहें तो प्रोडक्ट मैनेजर या ब्रांड डेवलपमेंट मैनेजर के रूप में काम कर सकते हैं। आमतौर पर कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों की प्लेसमेंट देश की प्रमुख कपनियों जैसे हिन्दुस्तान लीवर, गोदरेज, मंहिद्रा एंड मंहिद्रा, सन फार्मा, आदित्य बिरला ग्रुप, रिलायंस आदि में हो जाता है।
» वेतन : शुरु में इस कोर्स को कर 10 से 15 हजार रुपए आसानी से कमा सकते हैं । अनुभव के बाद अच्छी कमाई कर सकते हैं।
  • यहां से कर सकते हैं कोर्स
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट, दिल्ली
बेस लेवल, आईआईपीएम टावर, बी-11, कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली – 110016इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद, गुजरात
19, इंकलाब सोसाइटीए अहमदाबाद, गुजरातइंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड मैनेजमेंट , झारखंड
आईआईएसएम कैंपस, रांची – 834004
संपर्क करें : 91-651-2242060

Thursday, February 2, 2017

ऑप्थैलमोलॉजी में करियर

मेडिकल सेक्टर में डॉक्टर बनने के अलावा अब करियर के अनगिनत विकल्प हैं। अगर आप इसमें एंट्री करना चाहते हैं, तो ऑप्थैलमिक असिस्टेंट एक बेहतर करियर हो सकता है। इस तरह के ट्रेंड प्रोफेशनल अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से आंखों की जांच करके सटीक डायग्नोसिस तक पहुंचते हैं।
मेडिकल फील्ड में पैरामेडिकल साइंस की भूमिका को आज के दौर में कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। डायग्नोस्टिक तकनीक हेल्थकेयर सेक्टर के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुई है। आज अमूमन सभी स्पेशलिस्ट आम तौर पर लैब टेस्ट, एक्सरे, ईसीजी, अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन की रिपोर्ट्स के नतीजों पर ही निर्भर हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 2050 तक देश की आबादी करीब 150 करोड़ हो जाएगी। आज आबादी के लिहाज से देश में
ऑप्थैलमिक असिस्टेंट, लैब टेक्निशियन या रेडियोलॉजिस्ट जैसे ट्रेंड क्वॉलिफाइड स्टाफ की बेहद कमी है। मौजूदा समय में देश में करीब 10 लाख पैरामेडिकल स्टाफ की शॉर्टेज है।
क्या है ऑप्थैलमोलॉजी ?
ऑप्थैलमोलॉजी चिकित्सा विज्ञान की ही एक शाखा है। इसमें आंख संबंधी बीमारियों की जांच व उपचार किया जाता है। ऑप्थैलमिक असिस्टेंट हेल्थकेयर सेक्टर का एंट्री-लेवल जॉब है। ये ऑप्थैलमोलॉजिस्ट, यानी नेत्र चिकित्सक के सह यक के तौर पर अपनी सेवाएं देते हैं। किसी भी अस्‍पताल या नर्सिंग होम में ऑप्‍थैलमिक असिस्‍टेंट मुख्‍य रूप से मरीजों की मेडिकल इंफॉर्मेशन जुटाने, उपचार के बारे में उन्‍हें समझाने से लेकर चिकित्‍सक से पहले मरीजों की कुछ आरंभिक जांच करने तथा उपकरणों को मेंटेन रखने जैसी जिम्‍मेदारियां निभाते हैं।
जॉब के अवसर
ऑप्थैलमोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स करने के बाद युवा सरकारी या प्राइवेट दोनों तरह के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। ऐसे प्रोफेशनल्स हॉस्पिटल्स, नर्सिंग होम्स, आई क्लीनिक्स, लेजर आई सर्जरी क्लीनिक्स, डायग्नॉस्टिक सेंटर्स आदि में जॉब पा सकते हैं। ऑप्थैलमिक असिस्टेंट अनुभव के बाद टेक्निशियन बनकर खुद का क्लीनिक या आई सेंटर भी खोल सकते हैं।
कोर्स व क्वॉलिफिकेशन
ऑप्थैलमिक असिस्टेंट बनने के लिए देश के कई सरकारी और प्राइवेट संस्थान कोर्स ऑफर कर रहे हैं। फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी विषयों से 12वीं पास युवा ऑप्थैलमोलॉजी में 2 वर्ष का डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं।
सैलरी
कोर्स पूरा करने के बाद एक ऑप्थैलमिक असिस्टेंट के रूप में शुरूआत करने पर 10 से 12 हजार रुपए सैलरी आसानी से मिल जाती है। अनुभव बढ़ने पर ऐसे प्रोफेशनल्स 25 से 30 हजार रुपए तक सैलरी पा सकते हैं।
प्रमुख संस्‍थान:
भारती विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज, पुणे
पैरामेडिकल कॉलेज, दुर्गापुर (प.बंगाल)
शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़
दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली
ऑप्टोमेट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, बांदा (उप्र)

Wednesday, February 1, 2017

योग में कॅरियर

योग से न सिर्फ आपका मानसिक संतुलन ठीक रहता है बल्कि कसरत, मेडिटेशन से आपकी बॉडी भी फिट रहती है और शारीरिक स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। लोगों के फिट रहने की आदत ने योग में करियर की नई राहें खोल दी हंै। यही वजह है कि युवा योगा इंस्ट्रक्टर के रूप में करियर बना रहे हैं।जब हम बात योग की करते हैं तो हमारे जहन में सिर्फ आसन, प्राणायाम, ध्यान, मुद्राएं ही आती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। योग बहुत ही विस्तृत विषय है। इसका क्षेत्र कर्म योग, ज्ञान योग, हठ योग, मंत्र योग, कुंडली जागृति जैसे कई योग-विषयों तक है।
योग सिखाने के लिए जरूरी स्किल्स
(1) योग में करियर बनाने के लिए जरूरी है कि आप एक अच्छे वक्ता हों। आप में एक व्यक्ति से लेकर ग्रुप तक को अपनी बात योग के जरिए समझाने की क्षमता होनी चाहिए।
(2) योग टीचर बनने से पहले स्वंय भी योग के बारे में विस्तृत जानकारी हो। एक भी गलत आसन, कसरत नई बीमारी का जन्म दे सकती हैं।
योग में करियर से इनकम
योग को करियर चुनने की सोच रहे हैं तो यह अच्छा विचार है। लेकिन करियर बनाने से पहले इससे होने वाली आमदनी के बारे में जान लें। योग आप किसको करा रहे हैं इससे आपकी आमदनी तय होती है। कई योग शिक्षण संस्थान हैं जहां आपको नौकरी मिल सकती है। आप अपना काम शुरू कर सकते हैं। काम कितना मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप योग को कितना समझते हैं, दूसरों को योग से कितना प्रभावित कर पाते हैं। कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट की क्लास लगाती हैं। इन क्लास को लेने वाले योग गुरु ही होते हैं। अगर आप बड़ी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं तो इनकम ज्यादा होगी। अगर आप किसी अधिक आमदनी वाले परिवार, व्यक्ति या ग्रुप को योग करा रहे हैं तो आपकी इनकम ज्यादा होगी। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि आप फीस कितने में तय करा पाते हैं। योग को आप करियर चुन रहे हैं तो ये जान लीजिए कि इस क्षेत्र में काम के घंटे तय नहीं है। इतना तो तय है कि अधिकतर काम सुबह के समय मिलेंगे।
योग की बढ़ती मांग से विदेशों में भी काम के काफी अवसर हैं।
योग कोर्स कराने वाले कुछ संस्थान
आप इन सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों से योग सीख सकते हैं।
(1) मोरारजी देसाई नेशनल इस्टीट्यूट ऑफ योग, दिल्ली
(ग्रेजुएट करने के बाद यहां से 3 साल का बीएससी योगा साइंस, 1 साल का डिप्लोमा और कुछ पार्ट टाइम योग के कोर्स किए जा सकते हैं)
www.yogamdniy.nic.in
(2) बिहार स्कूल ऑफ योगा, मुंगेर
(यहां से 4 महीने और 1 साल का कोर्स कर सकते हैं)
www.biharyoga.net/bihar-yoga-bharati/byb-courses
(3) भारतीय विद्या भवन, दिल्ली
(यहां से आप 6 महीने से लेकर 1 साल तक का कोर्स कर सकते हैं)
www.bvbdelhi.org/yoga.html
(4) अय्यंगर योग सेंटर, पुणे
(यहां से आप योग का प्रशिक्षण ले सकते हैं)
http://iyengaryogakshema.org/
(5) कैवल्यधाम योग इंस्टीट्यूट, पुणे
(यहां से सर्टिफिकेट कोर्स इन योग, पीजी डिप्लोमा इन योग एजुकेशन, पीजी डिप्लोमा इन योग थिरैपी, फाउंडेशन कोर्स इन योग, एडवांस योग टीचर्स ट्रैनिंग, बीए- योग फिलोस्फी, मास्टर क्लास फॉर योग टीचर्स का कोर्स किया जा सकता है।)
http://kdham.com/college/
(6) स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु
(यह डीम्ड यूनिवर्सिटी है। यहां से रेगुलर और डिस्टेंस योगा कोर्स कर सकते हैं। योग में बीएससी, एमएससी, पीएचडी की डिग्री ले सकते हैं।)
  www.svyasa.org
(7) इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ योगिक साइंस एंड रिसर्च
(यहां से योग में कई छोटे अंतराल के कोर्स से लेकर मास्टर डिग्री तक के कोर्स किए जा सकते हैं)
www.iiysar.co.in/
(8) देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार, उत्तराखंड
(यहां से आप योग मे बीएससी से लेकर पीएचडी तक के कोर्स कर सकते हैं)
www.dsvv.ac.in
(9) द योग इंस्टीट्यूट सांताक्रूज, मुंबई
(सन् 1918 में स्थापित इस योग संस्थान से योग की शिक्षा ली जा सकती है।)
http://theyogainstitute.org/
10- गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार, उत्तराखंड
(यहां से योग में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स किए जा सकते हैं।
http://gkv.ac.in/diplomayoga-certificate