Wednesday, January 26, 2022

GIS में बनाएं उज्ज्वल भविष्य

दिजिटल टेक्नोलॉजी, रिमोट सेंसिंग और हाईटेक कार्य प्रणाली से सुसज्जित भूगोल की एक अहम शाखा है ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम यानी कि जीआईएस। इस क्षेत्र में आप पुराने आंकड़ों के साथ-साथ नए आंकड़ों का अध्ययन करते हैं और उनका एनालिसिस भी करते हैं। जीआईएस का इस्तेमाल डेवलपमेंट अथॉरिटी और डिजास्टर मैनेजमेंट जैसे विषयों में भी होता है।
डिजिटल मैप तैयार करने के लिए भी इस तकनीक का ही सहारा लिया जाता है। भारत में अब भी बेहतर डिजिटल मैप उपलब्ध नहीं हैं इस वजह से इस क्षेत्र में करियर की अच्छी संभावनाएं हैं। इतना ही नहीं विदेशों की बड़ी वैज्ञानिक संस्थाओं में भी जीआईएस के प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है। जीआईएस के जानकार प्रोफेशनल डेटा एनालिसिस में भी मददगार साबित होते हैं। भूगोल की इस शाखा की बढ़ती हुई जरुरत और इस्तेमाल की वजह से इस क्षेत्र के प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ी है। आइये आपको इस क्षेत्र में करियर बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताते हैं।
क्या है जीआईएस
जीआईएस भूगोल का एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जिसकी मदद से किसी भी क्षेत्र के टारगेट एरिया की मैपिंग की जाती है। मैपिंग करने के बाद क इकट्ठी की गई डाटा की मदद से ऑफिस के अन्दर ही उस पूरे क्षेत्र की सही जानकारी निकाल ली जाती है। इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल डिफेंस, अर्थ साइंस, आर्किटेक्चर, एग्रिकल्चर, वि न्यूक्लियर साइंस, टाउन प्लानर, मोबाइल तथा पे मैपिंग आदि के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से किसी भी हैं जगह के हालात को और उसकी भूगोलीय संरचना को कंप्यूटर पर देखा एवं बनाया जा सकता है।
जियोग्रफिक इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के प्रमुख क्षेत्र :
• जीआईएस ऐप्लिकेशन 
• जिओस्टेटिस्टीक 
• जीआईए डेवलपमेंट 
• वेबजीआईएस 
• फोटोग्रामैट्री 
• जीआईएस प्रोजेक्ट डेवलपमेंट 
पढ़ाई तथा योग्यता
12वीं में आर्ट्स के माध्यम से जियोग्राफी या फिजिक्स केमिस्ट्री के साथ साइंस विषय की पढ़ाई करने के बाद आप बीई, बीएससी, बीटेक या बीए इन जियोग्राफी, जिओलॉजी, अप्लायड जिओलॉजी, अर्थ साइंस, जिओसाइंस आदि से ग्रेजुएशन कर सकते हैं। इसके अलावा आप विभिन्न डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स के साथ-साथ पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं पीएचडी और शोध कार्य की भी अनेकों संभावनाएं हैं।
पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट इन जीआईएस ऐंड आरएस तथा पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट इन जीआईएस प्रोग्रामिंग कोर्स भी जीआईएस के लोकप्रिय कोर्स हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ जिओइन्फॉर्मेटिक्स ऐंड रिमोट सेंसिंग के तहत कई शिक्षण संस्थान इसके विभिन्न कोर्स से पढ़ाई करवाते हैं। जीआईएस का इस्तेमाल डेवलपमेंट अथॉरिटी और डिजास्टर मैनेजमेंट जैसे विषयों में भी होता है। डिजिटल मैप तैयार करने के लिए भी इस तकनीक का ही सहारा लिया जाता है...
प्रमख क्षेत्रों एवं केंद्रों में जॉब की संभावनाएं :
जीआईएस का उपयोग भविष्य में लगभग प्रत्येक क्षेत्र में होने की संभावना है जैसे- डिजास्टर मैनेजमेंट
•  नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएसए) 
•  इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) 
•  स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर 
•  नेशनल इन्फॉर्मेटिक सेंटर (एनआईसी)
•  मिलिट्री कमांड 
•  नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट 
•  अर्बन डेवलपमेंट ऑथोरिटी 
•  इमर्जेंसी मैनेजमेंट 
•  बिजनेस ऐप्लिकेशन 
•  अर्बन डेवलपमेंट 
•  ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट 
•  सोशियो-इकोनॉमिक डेवलेपमेंट
प्रमुख संस्थान :
इंडियन इंस्टीट्यूट रिमोट सेंसिंग, देहरादून, 
जीआईएस इंस्टीट्यूट, नोएडा बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची,
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर, 
एमडीएस युनिवर्सिटी अजमेर, राजस्थान, 
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की

Monday, December 13, 2021

सैटेलाइट टेक्नॉलजी में बनाएं करियर

सब्जेक्ट हैं, जिसमें आपको अलग-अलग देशों,

क्या कभी आपने सोचा है हम जिस धरती पर रहते हैं, वह कितनी पुरानी है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पूरी दुनिया की 90 फीसदी जनसंख्या नॉर्दर्न हेमिसफियर में रहती है। ज्योग्रॉफी ऐसा सब्जेक्ट हैं, जिसमें आपको अलग-अलग देशों, उनके नक्शों, वहां की जलवायु, उसका लोगों की लाइफस्टाइल पर पड़ने वाला असर, जंगल, पहाड़ों, नदियों आदि के बारे में स्टडी करने का मौका मिलता है

  उनके नक्शों, वहां की जलवायु, उसका लोगों की

हम कई बार भूगोलशास्त्रियों के बारे में पढ़ते हैं। असल में ये साइंटिस्ट होते हैं जो कि भूगोल की अलग-अलग ब्रांच की स्टडी करते हैं। जैसे कि फिजिकल ज्योग्राफी, एनवायरनमेंट ज्योग्राफी, ह्यूमन ज्योग्राफी आदि। इस समय देखा जाए तो ज्योग्राफी में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और ज्योग्राफिक इनफर्मेशन सिस्टम का कॉन्सेप्ट काफी मददगार साबित हो रहा है। इनकी मदद से कई काम आसान हो गए हैं।
क्या चाहिए योग्यता
प्राइमरी और सेकंडरी लेवल पर स्कूल में हम सभी ने ज्योग्राफी पढ़ी है। अगर कोई इस फील्ड में करियर बनाना चाहता हैं तो सबसे पहले उसका ज्योग्राफी में इंट्रेस्ट होना चाहिए। इसके लिए बैचलर डिग्री होनी चाहिए। साथ ही किसी स्पेशलाइजेशन के साथ मास्टर्स डिग्री। कई इंस्टिट्यूट हैं जो कि इस फील्ड में बीएससी और बीए डिग्री कोर्स चलाते हैं। साइंस या आर्ट्स बैकग्राउंड वाले स्टूडेंट्स इन कोर्स के लिए एप्लाई कर सकते हैं। कई इंस्टिट्यूट इसके लिए इंट्रेस एग्जाम भी कराते हैं।

जॉब की संभावनाएं
ज्योग्राफी की फील्ड में जॉब की काफी संभावनाएं हैं। ट्रांसपोर्टेशन, पर्यावरण विज्ञान, एयरलाइन रूट, शिपिंग रूट प्लानिंग, सिविल सर्विसेज, कार्टोग्राफी (नक्शे बनाना), सैटेलाइट टेक्नॉलजी, जनसंख्या परिषद, मौसम विज्ञान विभाग, एजुकेशन, आपदा प्रबंधन जैसे कई क्षेत्र हैं जहां आप अपना करियर बना सकते हैं।

Tuesday, November 9, 2021

मौसम विज्ञान में करियर

 बदलते मौसम की जानकारी हर कोई लेना चाहता है। जिसके कारण आज के समय में सरकारी विभागों से लेकर मौसम विज्ञान की भविष्यवाणी करने वाली प्रयोगशालाओं, अंतरिक्ष विभाग और टेलीविजन चैनल पर मीटिअरोलॉजी एक अच्‍छा करियर बनाने का रास्‍ता दिखा रहा है। यदि आपको हवा, बादल, समुद्र, बरसात, धुंध-कोहरे, आंधी-तूफान और बिजली में दिलचस्पी है तो आप मीटिअरोलॉजी बनकर जहां अपनी जिज्ञासाओं की पूर्ति कर सकते हैं, वहीं अच्‍छा करियर भी बना सकते हैं। मौसम वैज्ञानिक वे वैज्ञानिक होते हैं, जो पृथ्वी के वायुमंडल और भौतिक वातावरण, पृथ्वी पर उनके विकास, प्रभाव और परिणामों का अध्ययन करता है।

मौसम विज्ञान क्‍या है
वायुमण्डल के वैज्ञानिक अध्ययन को मौसम विज्ञान कहते हैं। यह मौसम की प्रक्रियाओं और पूर्वानुमान पर केंद्रित है। मौसम विज्ञान एक अत्यंत अंतःविषय विज्ञान है, जो पृथ्वी के वातावरण, इसकी प्रक्रियाओं और इसकी संरचना की समझ में हमारी सहायता करने के लिए भौतिकी और रसायन विज्ञान के नियमों को ड्राइंग करता है। इस क्षेत्र में मौसम और जलवायु दोनों शामिल है। यह पृथ्वी के वातावरण की भौतिक, गतिशील और रासायनिक स्थिति और वायुमंडल और पृथ्वी की सतह के बीच परस्पर क्रिया से संबंधित है।

मौसम वैज्ञानिक का कार्य क्षेत्र
एक मौसम वैज्ञानिक का कार्य पृथ्वी के वायुमंडल और भौतिक वातावरण, पृथ्वी पर उनके विकास, प्रभाव और परिणामों पर अध्ययन करते है। इनके कार्य निम्‍नलिखित हैं।

फिजिकल मीटिअरोलॉजी
वैज्ञानिक इसमें सोलर रेडिएशन, पृथ्वी में विलयन एवं वायुमंडलीय व्यवस्था आदि का अध्‍ययन करते हैं।

क्लाइमेटोलॉजी
क्लाइमेटोलॉजी में वैज्ञानिक किसी क्षेत्र या स्थान विशेष की जलवायु का अध्ययन करता है। कुछ महीनों के लिए किसी एक क्षेत्र में अध्ययन कर उस क्षेत्र के जलवायु प्रभाव और उससे होने वाले बदलावों के बारे में विस्तार से शोध किया जाता है।

सिनॉप्टिक मीटिअरोलॉजी
इस क्षेत्र में कम दबाव के क्षेत्र, वायु, जल, अन्य मौसम तंत्र, चक्रवात, दबाव स्तर एवं इसमें एकत्र किया जाने वाला मानचित्र जोकि पूरे विश्व के मौसम का सिनॉप्टिक व्यू बताता है आदि की जानकारी मिलती है।
डाइनेमिक मीटिअरोलॉजी
वैज्ञानिक इसमें गणितीय सूत्रों के जरिए वायुमंडलीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करते हैं। दोनों को साथ साथ होने के कारण इसे न्यूमेरिक मॉडल भी कहा जाता है।

एग्रीकल्चर मीटिअरोलॉजी
इस क्षेद्ध में वैज्ञानिकों द्वारा फसलों की पैदावार एवं उससे होने वाले नुकसान में मौसम संबंधी सूचनाओं का आकलन किया जाता है।
अप्लाइड मीटिअरोलॉजी
वैज्ञानिक इसमें एअरकॉफ्ट डिजाइन, वायु प्रदूषण एवं नियंत्रण आर्किटेक्चरल डिजाइन, अर्बन प्लानिंग, एअर कंडिशनिंग, टूरिज्म डेवलपमेंट आदि के प्रति थ्योरी रिसर्च करते हैं।

कोर्स और योग्यता
हमारे देश में आज भी मौसम वैज्ञानिकों की भारी कमी है। इस बात को ध्यान में रखते हुए देश के बहुत से कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में मीट्रिओलॉजी संबंधित कोर्स चलाए जा रहे हैं। जो युवा इस क्षेत्र में भविष्य बनाना चाहते हैं, वे इसमें अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट योग्यता हासिल कर सकते हैं। अंडग्रेजुएट कोर्स के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से विज्ञान वर्ग भौतिकी, जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान से 12वीं पास होना जरूरी है। ग्रेजुएट स्तर का कोर्स तीन साल का है। अगर आप इसमें पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री लेना चाहते हैं तो इसके लिए किसी भी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से आपका बीएससी होना जरूरी है।
जॉब के अवसर
इस क्षेत्र में आप जहां रिसर्च व प्रोफेसर के तौर पर नौकरी कर सकते हैं। वहीं रेडियो और दूरदर्शन केन्द्र, उपग्रह अन्तरिक्ष अनुसन्धान केन्द्र, मौसम प्रसारण केन्द्र, सैन्य विभाग, पर्यावरण से जुड़ी एजेंसियों, रेडियो और दूरदर्शन केन्द्र, औद्योगिक मौसम अनुसन्धान संस्थाएं, उपग्रह अन्तरिक्ष अनुसन्धान केन्द्र तथा विश्व मौसम केन्द्र में भी अच्छे पैकेज पर जॉब कर सकते हैं।

यहां से कर सकते हैं कोर्स
आइआइटी खड़गपुर, पश्चिम बंगाल (IIT Kharagpur, West Bengal)
भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलुरु (Indian Institute of Science, Bangalore)
पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला (Panjab University, Patiala)
मणिपुर विश्वविद्यालय, इंफल (Manipur University, Imphal)
आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम (Andhra University, Visakhapatnam)
कोचिन विश्वविद्यालय, कोच्चि (Cochin University, Kochi)
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर (Devi Ahilya University, Indore)
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे (Indian Institute of Tropical Meteorology, Pune)

Sunday, October 24, 2021

हॉस्पिटल मैनेजमेंट बनाएं करियर

कोरोना के दौरान जिस तरह देश में स्‍वास्‍थ्‍य ढांचा बिखर गया, उससे साफ पता चलता है कि इस क्षेत्र में अभी भी कई कमियां हैं, साथ ही रोजगार के अवसर भी। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए हेल्थकेयर सेक्टर में करियर विकल्पों को तलाशना ना सिर्फ लाभकारी है, बल्कि भविष्‍य में अच्‍छे करियर का भरोसा देने वाला विकल्प भी है। आज के समय में हॉस्पिटल मैनेजमेंट सेक्‍टर तेजी से विकास कर रहा है।
हॉस्पिटल मैनेजमेंट का कार्य (Hospital Management Work)
हॉस्पिटल मैनेजमेंट के तहत हेल्थ केयर एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट आता है, जो अस्‍पताल से संबंधित सभी व्यवस्थाओं पर नजर रखता है। ताकि वहां मौजूद संसाधनों का समुचित और बेहतर इस्तेमाल हो व इलाज के लिए आने वालों को सेवा प्रदान करने का कुशल तंत्र विकसित हो सके। इनमें अंतर्गत अस्पताल से डॉक्टरों को जोड़ना, नए-नए उपकरणों और तकनीक की व्यवस्था करना भी शामिल है। यहां तक कि हॉस्पिटल में कोई हादसा होता है तो उसकी जवाबदेही का जिम्मा भी इन्हीं प्रोफेशनल्स का होता है। अस्पताल की वित्तीय व्यवस्था, कर्मचारियों की सुविधा आदि कार्य भी उन्हें करने होते हैं।

एजुकेशन व कोर्स (Hospital Management Education And Courses)
इस सेक्‍टर के यूजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आपके पास साइंस के साथ 12 वीं में कम से कम 50 फीसदी अंक होने चाहिए। जिसके बाद आप बैचलर ऑफ हॉस्पिटल मैनेजमेंट कर सकते हैं, जो 3 साल होती है। वहीं मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन और एमबीए इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन करने के लिए दो साल की अवधि निर्धारित है। इसके बाद आप अगर आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं तो डॉक्टोरल डिग्री एमडी, एमफिल भी कर सकते हैं। जिसके लिए मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन डिग्री होना अनिवार्य है।

वहीं ईएमबीए, पीजीडीएचएम तथा एडीएचएम जैसे कोर्सेज की समय अवधि एक साल सुनिश्चित है। शॉर्ट टर्म से संबंधित सर्टिफिकेट कोर्स और डिप्लोमा कोर्स भी इसमें उपलब्ध हैं।
 यहां से कर सकते हैं कोर्स (Institutes For Hospital Management)
  1. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली (All India Institute of Medical Sciences, New Delhi)
  2. आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज, पुणे (Armed Forces Medical College, Pune)
  3. देवी अहिल्या विश्व विद्यालय, इंदौर (Devi Ahilya Vishwavidyalaya, Indore)
  4. फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्ट्डीज़ (Faculty of Management Studies)
  5. दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University)
  6. बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी (Birla Institute of Technology and Science, Pilani)
जरूरी स्किल्‍स
हॉस्पिटल में अगर आप एक कुशल प्रबंधक के तौर पर कार्य करना चाहते हैं तो आपके पास वित्त और सूचना प्रणाली का अच्छा ज्ञान, बेहतरीन नेतृत्व कौशल, अच्छा संचार और आयोजन कौशल, मिलनसार व्यक्तित्व, समय सीमा को संभालने की क्षमता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, धीरज, उत्कृष्ट मौखिक और लिखित संचार कौशल आदि होना अति आवश्यक है।

करियर की संभावनाएं (Career Prospects in Hospital Management)
अगर आप इस सेक्‍टर में करियर की संभावनाएं देख रहे हैं तो आपको यहां कार्य करने के लिए कई ऑप्‍शन मिलेंगे। शायद यही कारण है कि यह अधिक मांग वाला नौकरी बनती जा रही है। युवा स्नातकों के लिए, हॉस्पिटल मैनेजमेंट में नौकरी का अवसर अभूतपूर्व है। आप सहायक अस्पताल प्रशासक या प्रबंधक के रूप में अपना करियर शुरू कर सकते हैं। आप आउट पेशेंट क्लीनिक, अस्पतालों, धर्मशालाओं और नशीली दवाओं के दुरुपयोग उपचार केंद्रों का प्रबंधन करते हैं। इस क्षेत्र में अनुभव प्राप्त करने के बाद आपको सीईओ के पद पर पदोन्नत किया जा सकता है।

आप अपना नर्सिंग होम या अस्पताल भी स्थापित कर सकते हैं। यदि आप शिक्षा क्षेत्र में रुचि रखते हैं, तो आप कॉलेजों में शिक्षक और व्याख्याता के रूप में काम कर सकते हैं।

वेतन (Salary In Hospital Management)
आपको इस सेक्‍टर में बेहतरीन वेतन के साथ-साथ आपको लोगों की सेवा करने का मौका भी मिलता है। सरकारी संस्थानों में वेतन मानकों के अनुसार मिलता है, लेकिन अगर आप निजी संस्थानों में काम करना चाहते हैं तो आप शुरुआती समय में प्रेशर के तौर पर 40 हजार रूपये महीना तक कमा सकते हैं। यह निर्भर करता है कि आप की एजुकेशन क्‍या है और आप किस कंपनी में कार्य कर रहे हैं। जिसके बाद आपके अनुभव के साथ- साथ वेतन में भी बढ़ोतरी होती है।

Saturday, October 9, 2021

डाटा साइंस में करियर

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी की बढ़ती दुनिया के कारण डाटा साइंटिस्‍टों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में अगर आप भी डाटा साइंटिस्‍ट बनने के बारे में सोच रहे हैं, तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं हो सकती, क्योंकि वर्तमान में एक डाटा साइंटिस्‍ट सीए और इंजीनियरों की तुलना में बहुत अधिक कमा रहे हैं। हालांकि डाटा साइंटिस्‍ट बनने के कई फायदे के साथ नुकसान भी है।
क्‍या है डाटा साइंस (What is Data Science)
डाटा किसी भी क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है लेकिन केवल तभी, जब इसे ठीक प्रोसेस और विश्लेषित किया जाता है। यह बिग डाटा और डाटा के समान अवधारणा पर काम करता है। डाटा साइंस का कार्य यह होता है कि वह कोई भी प्रकार के डाटा से इनसाइट्स लेता है तथा उसके बारे में जानता है। डाटा साइंस में डाटा माइनिंग, मशीन लर्निंग, क्लस्टर एनालिसिस, डाटा रेंग्लिंग तथा लिनियर अलजेब्रा आदि से बड़ी मात्रा में डाटा निकाल सकते हैं। डाटा साइंस का उपयोग बड़ी कम्पनी या कोई स्टार्टअप उन सभी डाटा का इस्तेमाल करते हैं, जो उनके ग्राहको को बेहतर अनुभव करा सके।
 ज्‍यादा जॉब्‍स डिमांड
आज के समय में डाटा साइंस प्रोफेशनल्‍स् की काफी डिमांड है। इस क्षेत्र में लोगों के पास जॉब्‍स के कई ऑप्‍शन हैं। यह लिंक्डइन पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली नौकरी है और 2026 तक 11.5 मिलियन रोजगार सृजित करने की भविष्यवाणी की गई है। यह डाटा साइंस को सबसे ज्‍यादा जॉब देने वाला प्‍लेटफार्म है।

मिलेगी हाई सैलरी
डाटा साइंस सबसे अधिक पे करने वाली जॉब्‍स में से एक है। माना जाता है कि एक डाटा साइंटिस्‍ट प्रतिवर्ष एक करोड़ रूपये तक कमा सकता है। जिसके कारण ही डाटा साइंस को एक अत्यधिक आकर्षक करियर विकल्प माना जाता है।

डाटा साइंस में सभी को मौके
बहुत कम लोग होते हैं जिनके पास डाटा साइंटिस्‍ट बनने के लिए सभी स्किल्‍स पहले से मौजूद होती हैं। हालांकि इसके बाद भी सभी को समान मौके मिलते है, क्‍योंकि डाटा साइंस बहुत बड़ा क्षेत्र है और इसमें बहुत सारे अवसर हैं। डाटा साइंस के क्षेत्र में मांग अधिक है और डाटा साइंटिस्‍टों की भारी कमी है।
डाटा साइंस व्‍यापक
डाटा साइंस का क्षेत्र काफी व्‍यापक है। इसका व्यापक रूप से स्वास्थ्य देखभाल, बैंकिंग, परामर्श सेवाओं और ई-कॉमर्स उद्योगों में उपयोग किया जाता है। डाटा साइंस एक बहुत ही बहुमुखी क्षेत्र है इसलिए आपको विभिन्न क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलेगा।
डाटा साइंस के क्षेत्र में नुकसान (Disadvantages in the field of Data Science)

डाटा साइंस सामान्‍य शब्‍द
डाटा साइंस सुनने अच्‍छा भले ही लगे, लेकिन यह एक बहुत ही सामान्य शब्द है और इसकी कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। डाटा साइंस का सटीक अर्थ लिखना बहुत कठिन है। इनकी विशिष्ट भूमिका उस क्षेत्र पर निर्भर करती है जिसमें कंपनी विशेषज्ञता प्राप्त करना चाहती है।

नहीं हासिल कर सकते डाटा साइंस में महारथ
यह एके ऐसा क्षेत्र है जिसमें सांख्यिकी, कंप्यूटर विज्ञान और गणित जैसे कई क्षेत्रों का मिश्रण है। इसलिए प्रत्येक क्षेत्र में महारथ हासिल करना और उन सभी में समान रूप से विशेषज्ञ होना संभव नहीं है।

डाटा गलत परिणाम दे सकता है
डाटा साइंटिस्‍ट का कार्य डाटा का विश्लेषण कर भविष्‍य की योजना तैयार करना है, लेकिन देखा गया है कि कई बार, दिए गए डाटा गलत हो जाते हैं। जिससे गलत परिणाम भी सामने आ सकते हैं, यह कमजोर प्रबंधन और रिसोर्सेज के खराब उपयोग के कारण भी विफल हो सकता है।
डाटा प्राइवेसी का बड़ा खतरा
आज के समय में सबसे बड़ा मुद्दा ग्राहकों की प्राइवेसी बनता जा रहा है। कई उद्योगों के लिए डाटा उनका ईंधन है। प्रचार व ई-कॉमर्स कंपनियां डाटा के आधार पर ग्राहकों के चुनाव का निर्णय लेती हैं। हालाँकि, इस प्रक्रिया में उपयोग किया गया डाटा कई बार ग्राहकों की गोपनीयता भंग कर देता है। क्लाइंट का व्यक्तिगत डाटा कंपनी को दिखाई देता है और कई बार सुरक्षा में चूक के कारण डाटा लीक हो सकता है।

Saturday, October 2, 2021

म्यूजियोलॉजी में हैं करियर

अगर आपको देश की पुरानी विरासतों से लगाव है और आप उनको बनाने व संवारने के साथ अपना करियर भी बनाना चाहते हैं तो आप म्यूजियोलॉजी यानी संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। म्यूजियोलाजी दरअसल, म्यूजियम या संग्रहालय के प्रबंधन, संगठन और इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशिक्षित करने वाला विज्ञान है। देश में यू तो अंग्रेजों के जमाने से ही कई संग्रहालय मौजूद हैं, लेकिन अब इसका विस्तार और दायरा बढ़ चुका है। अब यह हथियारों, आभूषणों, शिलालेखों और मानव के विकास के अध्ययन, प्रदर्शन और विश्लेषण का भी विज्ञान बन चुका है। जिसके कारण इस क्षेत्र में लगातार पेशावर लोगों की मांग बढ़ती जा रही है। भारत में सरकारी से लेकर प्राइवेट तक करीब 700 से अधिक म्यूजियम हैं, जो बड़े पैमाने पर जॉब की पेशकश करते हैं।
किसे कहते हैं म्यूजियोलॉजिस्ट (Who is a Museologist)
म्यूजियम एक ऐसी जगह होती है, जहां पर ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और कलात्मक महत्व की कलाकृतियों और वस्तुओं को सहेजकर रखा जाता है। इन कार्यो को अंजाम देने वाले प्रोफेशनल म्यूजियोलॉजिस्ट के रुप में जाने जाते हैं। म्यूजियोलॉजिस्ट्स म्यूजियम्स में क्यूरेटर्स की तरह कार्य कर सकते हैं, जहां पर उनको म्यूजियम में कैटलागिंग और कलाकृतियों को सही तरह से व्यवस्थित करना होता है, साथ ही म्यूजियम वस्तुओं को अलग-अलग सेक्शन्स में बांटने और उनके बारे में विस्तृत जानकारी देने की जिम्मेदारी भी इन्ही की होती है।
 

ग्रेजुएशन के बाद करें म्यूजियोलॉजी की पढ़ाई  
इस क्षेत्र में एजुकेशन शुरू करने की न्‍यूनतम योग्‍यता 12वीं है। आपने चाहे किसी भी विषय से 12वीं किया हो आप म्यूजियोलॉजी का कोर्स कर सकते हैं। हालांकि कोर्स करने से पहले यह जरूर समझ लें कि अगर आप इतिहास, संरक्षण विज्ञान एवं संग्रहालय के संग्रह के संरक्षण में रुचि रखते हैं तभी यह कोर्स करें। इस क्षेत्र में आप बैचलर ऑफ आर्ट्स इन म्यूजियोलॉजी एंड आर्कियोलॉजी, बीए इन म्यूजियोलॉजी, बीए इन आर्कियोलॉजी, पीजी डिप्लोमा इन म्यूजियोलॉजी एंड कंजर्वेशन, पीजी डिप्लोमा इन म्यूजियोलॉजी एंड हिस्ट्री ऑफ इंडियन आर्ट, एडवांस डिप्लोमा इन आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियोलॉजी, एमए इन म्यूजियोलॉजी, एमए इन आर्कियोलॉजी, एमफिल इन म्यूजियोलॉजी एंड आर्कियोलॉजी पीएचडी इन म्यूजियोलॉजी एंड आर्कियोलॉजी का कोर्स शामिल है।

कोर्स के दौरान स्टूडेंट्स को क्यूरेशन, आर्ट, जूलॉजी, बॉटनी, हिस्ट्री, एंथ्रोपोलॉजी के कलेक्शन को मैनेज करने के बारे में जानकारी दी जाती है। वहीं अगर आपको फॉरेन या क्लासिकल लैंग्वेज जैसे कि पर्शियन, संस्कृत, लैटिन, ग्रीक, अरेबिक, इटैलियन, जर्मन, फ्रेंच में से किसी भी लैंग्वेज की जानकारी है तो इस सेक्टर में आपको अपनी इस एक्स्ट्रा स्किल का फायदा मिलेगा।
भारत में अब राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण की तरु सरकारें काफी ध्‍यान दे रही हैं, साथ ही प्राइवेट म्‍यूजियम व गैलरी में भी इजाफा हो रहा है। जिसके कारण इस क्षेत्र में जॉब्‍स के ऑप्‍शन बढ़ रहे हैं। इस समय देश में ऐसे सैकड़ों म्‍यूजियम हैं, जहां पर आप जॉब कर सकते हैं। इसमें केंद्र के अलावा राज्य, जिले स्तर, प्राइवेट और ट्रस्ट टाइप के म्यूजियम शामिल हैं। अगर आप सरकारी क्षेत्र में जॉब करना चाहते हैं तो नेशनल म्यूजियम, मॉनीटरी म्यूजियम, आरबीआई, इंडियन म्यूजियम, सालारजंग म्यूजियम में जॉब ढूंढ सकते हैं। हालांकि इसके लिए आपको एसएससी व यूपीएससी की परीक्षाओं को पास करना होगा। इसके अलावा आप एमफिल व पीएचडी कर टीचिंग और रिसर्च के क्षेत्र में भी सुनहरा करियर बना सकते हैं।

विगत कुछ वर्षों से म्यूजियम का महत्व काफी बढ़ा है। जिससे उनके प्रेजेंटेशन और कांसेप्ट में भी परिवर्तन हुआ है। अब म्यूजियम्‍स को और भी कल्पनाशीलता से मैनेज किया जा रहा है। विरासत और इतिहास के सरंक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण आर्कियोलॉजिकल, मिलिट्री और वॉर म्यूजियम्स, आर्ट, मैरीटाइम, साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल के मैनजमेंट के लिए प्रोफेशनल लोगों की डिमांड बढ़ी है। अगर आपको हिस्ट्री में दिलचस्पी है तो म्यूजियोलॉजी आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन है।

यहां से कर सकते हैं कोर्स (Best Institutes For Museology)
  1. नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट, न्यू दिल्ली (National Museum Institute, New Delhi)
  2. गुरुगोविन्द सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली (Guru Gobind Singh Indraprastha University, Delhi)
  3. स्कूल ऑफ आर्काइवल स्टडीज, न्यू दिल्ली (School of Archival Studies, New Delhi)
  4. सेंटर फॉर म्यूजियोलॉजी एंड कंजर्वेशन, जयपुर (Center for Museology and Conservation, Jaipur)
  5. कलकत्ता यूनिवर्सिटी (Calcutta University)
  6. बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (Banaras Hindu University)
  7. असम यूनिवर्सिटी (Assam University)
  8. राजस्थान यूनिवर्सिटी (Rajasthan University)
  9. जम्मू यूनिवर्सिटी (Jammu University)

Monday, September 27, 2021

इंटीरियर डिजाइनिंग में हैं करियर

 अगर आपको कमरे या किसी जगह को सजाने – संवारने का शौक है और आप कुछ क्रिएटिव करना चाहते हैं तो इंटीरियर डिजाइन कोर्स आपके लिए एक अच्छा विकल्प है। अगर आप घर, ऑफिस, मॉल, शोरूम, होटल आदि जगहों के लिए सजावट का अलग नजरिया रखते हैं तो आप भी इंटीरियर डेकोरेशन कोर्स कर के अपना करियर संवार सकते हैं। इंटीरियर डिजाइनर्स की मांग अब केवल मेट्रो सिटीज़ तक ही सिमित नहीं रह गई है। छोटे शहरों में भी इंटीरियर डिजाइनर्स की मांग काफी ज्यादा हो गई है। आज – कल लोग फ्लैट लेते ही उसे सजाने के लिए इंटीरियर डिज़ाइनर खोजना शुरू कर देते हैं। आप भी इस फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं तो आपके लिए हम ले कर आए हैं इंटीरियर डिज़ाइन कोर्सेज से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां। 

हम में से कई लोगों के दिमाग में यह सवाल आता है कि इंटीरियर डिजाइनिंग है क्या? तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि इंटीरियर डिजाइनिंग क्या है, इंटीरियर डिजाइनर क्या है और क्या इंटीरियर डिजाइनिंग पाठ्यक्रम 12वीं के बाद कर सकते हैं या नहीं। मेडिकल, इंजिनीरिंग की तरह इंटीरियर डिजाइनिंग भी एक कोर्स है। इंटीरियर डिजाइन कोर्स को करने के बाद आपके पास किसी भी घर, दफ्तर, क्लिनिक आदि की साज – सज्जा करने के लिए डिग्री प्राप्त हो जाती है। इसके अलावा मल्टिनैशनल कंपनियों के देश में आने से कार्यालयों का लुक पूरी तरह से बदल गया है। ऐसी कंपनियां अपने दफ्तरों की अंदरूनी सजावट को काफी अहमियत देती हैं। इससे इंटीरियर डेकोरेटर्स की मांग बहुत बढ़ गई है।

इंटीरियर डिजाइनर का काम

इंटीरियर डिजाइनर का काम बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। आज कल न्यूक्लियर फैमिली की वजह से फ्लैट कल्चर पैदा हो गया है। इसने इंटीरियर डिजाइनर की भूमिका बहुत खास बना दी है। छोटे-छोटे घरों में पूरे परिवार के हिसाब से सामान व्यवस्थित करना, कम जगह को भी खूबसूरत तरीके से सजाना, यह काम इंटीरियर डिजाइनर ही कर सकते हैं। उन्हें जगह और ग्राहकों के बजट के अनुसार सजावट करनी होती है। जगह के अनुसार रंगो का चयन, टेबल हो या सोफा या कोई और फर्नीचर, सबका चयन करना इंटीरियर डिजाइनर का ही काम होता है। साथ ही लाइट्स कैसे होने चाहिए और डेकोरेटिव आइटम्स का भी ध्यान रखना होता है। कई बार ग्राहकों की मांग पर आपको वास्तु के अनुसार भी सजावट करनी होती है। घर सजाते वक्त सबकी पसंद को ध्यान में रखते हुए बच्चों का कमरा, बुजुर्गों का कमरा, स्टडी रूम्स, किचन सबकी अलग तरह से सजावट करनी होती है।

इंटीरियर डिजाइनर के गुण

इंटीरियर डिज़ाइनर बनने के लिए शैक्षिक योग्यता के साथ कुछ अन्य गुणों को होना भी आवश्यक है। अगर आपके अंदर भी निम्न गुण मौजूद हैं तो आप भी इस कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

  • आपके अंदर बदलते ट्रेंड की समझ होना बहुत जरुरी है।
  • आपके अंदर क्रिएटिविटी होनी चाहिए।
  • साथ ही स्ट्रॉन्ग इमेजिनेशन पावर होना भी जरुरी है। इससे आपके दिमाग में नए कॉन्सेप्ट आएंगे।
  • कई बार आपको डिजाइंस बना कर समझाना होता है इसलिए ड्रॉइंग और आर्ट्स की जानकारी होना भी बहुत जरुरी है।
  • आपकी कम्युनिकेशन स्किल भी अच्छी होनी चाहिए जिससे आप अपने आइडियाज़ दूसरों तक पहुंचा सकें।

इंटीरियर डिजाइनर के रूप में सफलता प्राप्त करने के लिए रियल एस्टेट फील्ड की जानकारी होना भी आवश्यक है। रियल एस्टेट फील्ड की जानकारी होने से आप यह पता कर पाएंगे कि बिल्डिंग, घर या कमर्शियल प्लेस में किस तरह का मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है। और किस तरह की डिजाइंस ट्रेंड में चल रही हैं।

इंटीरियर डिज़ाइनिंग कोर्स के लिए शैक्षिक योग्यता

अगर आप इंटीरियर डिजाइनर कोर्स करना चाहते हैं तो आपके पास बारहवीं की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता होनी आवश्यक है। किसी भी विषय से बारहवीं पास होने वाले उम्मीदवार इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। बारहवीं के बाद आप डिप्लोमा कोर्स, डिग्री कोर्स या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। स्नातक के बाद भी आप इंटीरियर डिज़ाइन कोर्सेज के लिए अप्लाई कर सकते हैं। स्नातक के बाद पीजी डिप्लोमा कोर्स या डिग्री कोर्स होते हैं। इंटीरियर डिजाइनिंग लिए एक से तीन वर्षों के अलग – अलग कोर्सेज़ होते हैं। इसमें आप अपनी सुविधा के अनुसार डिप्लोमा या डिग्री कोर्स कर सकते हैं।

इंटीरियर डिज़ाइनिंग कोर्स डिटेल्स

इंटीरियर डिजाइनिंग अपने आप में एक स्पेशलाइज्ड कोर्स है। लेकिन अगर आप चाहें तो इसके अंतर्गत आप रूम डिजाइनिंग, किचन डिजाइनिंग, ऑफिस डिजाइनिंग, होम डेकोर आदि में विशेषज्ञता भी हासिल कर सकते हैं। इन दिनों अधिकतर इंटीरियर डेकोरेटर्स किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त किए होते हैं। इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए आप बैचलर इन इंटीरियर डिजाइन, बीए इन इंटीरियर आर्किटेक्चर एंड डिजाइन, डिप्लोमा इन इंटीरियर स्पेस एंड फर्नीचर डिजाइन, पीजी डिप्लोमा इन इंटीरियर डिजाइन जैसे कोर्स कर सकते हैं।

इंटीरियर डिजाइनर कोर्स की अवधि

इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में भी अलग – अलग कई कोर्सेज होते हैं। आप अपनी शैक्षिक योग्यता के अनुसार इनमे से कोई भी इंटीरियर डेकोरेशन कोर्स कर सकते हैं।

  • कोर्स का नाम : डिप्लोमा इन इंटीरियर डिज़ाइन
    • कोर्स की अवधि : 1 वर्ष
  • कोर्स का नाम : पीजी डिप्लोमा इन इंटीरियर डिज़ाइन एंड डेकोरेशन
    • कोर्स की अवधि : 1 वर्ष
  • कोर्स का नाम : डिप्लोमा इन इंटीरियर डिज़ाइन
    • कोर्स की अवधि : 2 वर्ष
  • कोर्स का नाम : एडवांस डिप्लोमा इन इंटीरियर
    • कोर्स की अवधि : 2 वर्ष
  • कोर्स का नाम : बैचलर ऑफ़ आर्किटेक्चर
    • कोर्स की अवधि : 2 वर्ष
  • कोर्स का नाम : बीएससी इन इंटीरियर डिज़ाइन
    • कोर्स की अवधि : 3 वर्ष

इंटीरियर डिजाइनर कोर्स के अंतर्गत आने वाले विषय

अगर आप इंटीरियर डेकोरेटर बनने के लिए नामांकन लेने की सोच रहे हैं तो हम आपको बता दें कि इन कोर्सेज़ के अंतर्गत आपको किन विषयों को पढ़ना होगा। विषयों के नाम निम्न प्रकार हैं।

  • आर्ट एंड बेसिक डिज़ाइन
  • फर्नीचर डिज़ाइन
  • फ़र्नीशिंग एंड फ़िटिंग
  • हिस्ट्री ऑफ़ इंटीरियर डिज़ाइन
  • कंस्ट्रक्शन एंड मटेरियल्स
  • सर्विसेस प्रो़फेशनल मैनेजमेंट- इस्टिमेटिंग एंड बजटिंग
  • डिस्प्ले, कंप्यूटर एडेड डिज़ाइनिंग
  • लेटरिंग
  • प्रॉपर्टीज़ ऑफ़ मटेरियल एंड पेंट टेक्नोलॉजी

इंटीरियर डिज़ाइनिंग में कहां है स्कोप

इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स करने के बाद आप किसी कंपनी में डेकोरेटर के पद पर काम कर सकते हैं। इसके आलावा आप किसी आर्किटेक्चरल फर्म, स्टूडियो और थिएटर, एग्ज़िबिशन ऑर्गनाइज़र और इवेंट प्लानर जैसी कंपनी में जुड़ कर उनके साथ काम कर सकते हैं। आप किसी अच्छी मल्टीनेशनल कंपनी में भी काम कर सकते हैं। आप चाहें तो इसे अपना निजी व्यवसाय बना कर अपना बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं। लेकिन करियर के शुरूआत में किसी फर्म में या किसी कंपनी के साथ जुड़ कर नौकरी करना ज्यादा सही रहता है। इससे आपको काम करने का सही तरीका भी पता चलता है और प्रेक्टिकल नॉलेज और अनुभव भी बढ़ जाती है। आप चाहें तो किसी होटल, रिजॉर्ट, हॉस्पिटल, शॉपिंग काम्प्लेक्स, के लिए भी काम कर सकते हैं। आप किसी बिल्डर या आर्किटेक्ट के संपर्क में रह कर या उनके साथ काम कर के भी अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं।

इंटीरियर डिजाइनर का वेतन

इंटीरियर डेकोरेटर की आय उनके द्वारा किए गए कार्य पर निर्भर करती है। अपने करियर के शुरुआती दिनों में आप हर महीने 10 हजार रूपए से लेकर 25 हजार रुपए तक कमा सकते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ लोगों के बीच आपकी मांग भी बढ़ने लगती है। और आपकी आय बढ़कर प्रति माह 40 हजार से एक लाख रुपए तक हो सकती है।

इंटीरियर डिजाइनर कोर्स के लिए कुछ प्रमुख संसथान

  • स्कूल ऑफ़ इंटीरियर डिज़ाइन, अहमदाबाद।
  • जे.जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट्स. मुंबई।
  • निर्मला निकेतन, न्यू मरीन लाइन्स, मुंबई।
  • सोफ़िया कॉलेज बी. के. सोमानी पॉलिटेक्निक, मुंबई।
  • एसएनडीटी वुमन्स यूनिवर्सिटी, मुंबई।
  • साउथ दिल्ली पॉलिटेक्निक फ़ॉर वुमन, नई दिल्ली।
  • जवाहर लाल नेहरू टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, हैदराबाद।
  • नागपुर विश्‍वविद्यालय, रविंद्रनाथ टैगोर मार्ग, नागपुर।
  • देवी अहिल्या विश्‍वविद्यालय, इंदौर।
  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन डिज़ाइनिंग, चंडीगढ़।
  • चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ।
  • ऐकेडमी ऑफ़ इंटीरियर डेकोरेशन, दिल्ली।
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीरियर एंड फैशन टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर
  • इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीरियर डिजाइनर्स, नई दिल्ली
  • एमआईटी इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पुणे