Thursday, February 27, 2020

मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी में भविष्‍य

अब मेडिकल फील्ड में भी राहों की कमी नहीं है. बायोलॉजी के हर स्टुडेंट की ख्वाहिश होती है कि वह डॉक्टर बने. लेकिन अगर वह उसमें सफल नहीं होते, तो निराश होने की जरूरत नहीं है. मेडिकल में अन्य फील्ड भी हैं जहां जॉब की अच्छी संभावनाएं हैं. उनमें से एक है- मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी. मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट की डिमांड निजी और गवर्नमेंट फील्ड्स में भी खूब है.

कैसे होती है एंट्री?
लैब टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में करियर बनाने के लिए कई रास्ते खुल गए हैं. इसके लिए सर्टिफिकेट इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी, बीएससी मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स किए जा सकते हैं. आम तौर पर ऐसे कोर्स 12वीं के बाद किए जा सकते हैं. डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए 12वीं में बायोलॉजी सब्जेक्ट होना जरूरी है, जिसकी अवधि दो वर्ष की होती है. ऐसे इंस्टीट्यूट में एडमिशन लें, जहां अच्छे लैब उपकरण हों. इस फील्ड में जॉब तो बीएससी या डिप्लोमा करके ही हासिल किया जा सकता है. लेकिन किसी अच्छे सब्जेक्ट से पोस्ट ग्रेजुएशन कर लेने से ऑप्शन बढ़ जाते हैं और डिमांड एक स्पेशलिस्ट के रूप होने लगती है.

इस फील्ड में दो तरह के प्रोफेशनल्स काम करते हैं- एक मेडिकल लैबोरेट्री टेक्निशियन और दूसरे मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट. आम तौर पर टेक्निशियन के काम को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है- नमूना तैयार करना, जांच की मशीनों को ऑपरेट करना और उनका रखरखाव तथा जांच की रिपोर्ट तैयार करना. वहीं मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट रोगी के खून की जांच, टीशू, माइक्रोआर्गनिज्म स्क्रीनिंग, केमिकल एनालिसिस और सेल काउंट से जुड़े परीक्षण को अंजाम देता है

इस फील्ड में हैं कई राहें
पैरा मेडिकल सिर्फ नर्सिंग और हॉस्पिटल के प्रशासनिक कार्यों तक ही सीमित नहीं है. इसके दायरे में कई सारे फील्ड्स, जैसे- मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी, ऑर्थोटिक और प्रोस्थेटिक टेक्नोलॉजी, फार्मेसी, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ऐंड मैनेजमेंट, ऑडियोलॉजी ऐंड स्पीच थेरेपी, डेंटल हाइजिन ऐंड डेंटल मैकेनिक और स्वास्थ्य स्वच्छता निरीक्षण आदि आते हैं.

जॉब की संभावनाएं
डीपीएमआइ की प्रिंसिपल डॉ. अरुणा सिंह बताती हैं, ''इसमें गवर्नमेंट फील्ड के जॉब के लिए वैकेंसीज का इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में ऐसी बात नहीं है. मेडिकल फील्ड में प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केङ्क्षटग सेल्स, क्वालिटी इंश्योरेंस, एन्वायरनमेंट हेल्थ ऐंड इंश्योरेंस जैसे फील्ड्स में भी मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट की डिमांड है.” इस फील्ड में प्रोफेशनल्स की शुरुआती सैलरी 10,000-15,000 रु. प्रति माह है. अनुभव के बाद सैलरी बढऩे के साथ-साथ अपना लैब भी खोला जा सकता है. सरकारी फील्ड में शुरुआत से ही अच्छी सैलरी मिलती है.

हेल्थ सेक्टर में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डॉक्टर्स के साथ ही पारा मेडिकल प्रोफेशनल्स की जबरदस्त मांग है. इस सेक्टर में इनकी तादाद करीब 60 फीसदी होती है. एक सर्वे के मुताबिक, देश में 2015 तक 60 लाख से अधिक ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत पड़ेगी. योजना आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में करीब 10,00,000 नर्सों और बड़ी तादाद में ऐसे प्रोफेशनल्स की कमी है. जाहिर है इस फील्ड में करियर की काफी संभावनाएं हैं.

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Dear Sir

Saturday, February 22, 2020

डिप्लोमा इन आर्किटेक्चर

किसी इमारत की डिज़ाइन, योजना और उसका निर्माण करने वाले को आर्किटेक्चर कहते है। अगर आप कोई बड़ी बिल्डिंग बनाना चाहते है तो उसके लिए पहले डिज़ाइन बनाई जाती है। जो आर्किटेक्चर के द्वारा ही बनाई जाती है। आर्किटेक्चर उस डिज़ाइन के द्वारा आपको बताता है की वह बिल्डिंग कैसी दिखेगी। आर्किटेक्चर द्वारा पहले किसी इमारत की संरचना के लिए प्लान बनाया जाता है। प्लान बनाने के बाद आर्किटेक्चर द्वारा उसकी डिज़ाइन तैयार की जाती है जिसके बाद वह उसका निर्माण करवाता है।

किसी इमारत का निर्माण करने में आर्किटेक्चर की जरुरत होती है। सामान्य तौर पर आर्किटेक्चर का काम होता है किसी बिल्डिंग या इमारत की प्लानिंग के साथ उसकी डिज़ाइन तैयार करना। इसके साथ ही उसके और भी बहुत से कार्य होते है।

डिज़ाइन बनाना

आर्किटेक्चर का पहला काम किसी इमारत की डिज़ाइन को बनाने का होता है। इसमें बिल्डर जिस तरह की बिल्डिंग का निर्माण करना चाहते है उसके अनुसार डिज़ाइन बनाने के लिए आर्किटेक्ट को नियुक्त करते है और क्लाइंट जिस तरह की डिज़ाइन चाहता है उसके अनुसार इमारत का नक्शा या डिज़ाइन आर्किटेक्ट को बनाना होता ।

दस्तावेज़ बनाना

ग्राहक द्वारा जो डिज़ाइन बताई गयी होती है आर्किटेक्ट उसे पेपर पर उतारता है। डिज़ाइन को समझने के लिए तथा उसकी वास्तविकता को जानने के लिए चित्रों को बनाना होगा। इसमें आर्किटेक्ट को ग्राहक की सुविधा, बजट, आवश्यकता इन सभी के अनुसार दस्तावेज़ में संशोधन करने की आवश्यकता होती है।

निर्माण की भूमिकाएँ

इसमें निर्माण दस्तावेज़ों को बनाना होता है और जो डिज़ाइन बनाई जाती है उसे ठेकेदारों और निर्माण विशेषज्ञों के निर्देशों के अनुसार रूपांतरित किया जाता है। जिससे की वह इसे देखकर ही बिल्डिंग का निर्माण कर सके और जब पूरी तरह से यह परियोजना निर्माण के कार्य तक पहुँच जाती है तो आर्किटेक्ट का काम निर्माण की देखरेख करना, हस्ताक्षर करना, साईट के दौर और बैठकों में शामिल होना रहता है।

आर्किटेक्चर बनने के लिए आपको B.Arch कोर्स करना होता है। बहुत से आर्किटेक्चर कॉलेज NATA (National Aptitude Test in Architecture) के द्वारा एडमिशन करवाते है। तो आर्किटेक्चर बनने के लिए 12 वीं के बाद NATA की एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करना होती है। यह एप्टीट्यूड टेस्ट नेशनल लेवल पर आयोजित किया जाता है।

यह एग्जाम Critical Thinking, Architecture की समझ के लिए आपकी योग्यता को मापता है। इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के लिए आपको इस एग्जाम को पास करना होता है और इसके लिए कुछ योग्यताएं भी होती है जिन्हें पूरा करना होता है। तो जानते है

शैक्षिक योग्यता

  • B.Arch कोर्स करने के लिये आपको 12 वीं में गणित विषय से पास होना अनिवार्य है।
  • 12 वीं आपने 50 % से उत्तीर्ण की हो।
  • आपने 10 वीं के बाद किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से 3 वर्ष का डिप्लोमा किया हुआ हो।

आयु सीमा

NATA परीक्षा के आवेदन के लिए किसी तरह की न्यूनतम आयु सीमा नहीं है।

NATA की प्रवेश प्रक्रिया

  1. NATA परीक्षा के लिए ऑनलाइन ही Apply करना होगा।
  2. इस परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएँगे।
  3. परीक्षा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से होगी।

NATA Syllabus

NATA का Syllabus तीन विषय पर आधारित होता है। इन्हीं विषयों से सम्बन्धित प्रश्न परीक्षा में आपसे पूछे जाते है। जानते है NATA Exam का Syllabus क्या है।

Mathematics

इस विषय में Algebra (बीज-गणित), Matrices (मेट्रिक्स), Trigonometry (त्रिकोणमिति), Statistics & Probability (सांख्यिकी और संभाव्यता) पर आधारित प्रश्न आते है।

General Aptitude

इसमें Mathematical Reasoning (गणितीय तर्क), Sets & Relation (सेट्स और संबंध) से प्रश्न आते है।

Drawing Test

इसमें किसी वस्तु की ड्राइंग करना होती है और साथ ही रंगों का प्रयोग भी करना होता है।

NATA Exam Pattern

NATA का परीक्षा पैटर्न किस तरह का होगा, इसमें कितने प्रश्न आते है और कितने मार्क्स दिए जाते है यह आप आगे जानेंगे।

 

 

कुल मिलाकर आपसे 62 प्रश्न पूछे जाएँगे। जिसमें 20 प्रश्न गणित के होंगे, 40 प्रश्न general aptitude के आएँगे और 2 प्रश्न drawing test के होंगे।

 Architecture Courses

आर्किटेक्चर को कुछ कोर्सेज़ की जानकारी भी होना चाहिए। जिससे आप पूरे काम को कर पाओगे जिससे आप आर्किटेक्चर डिज़ाइन तैयार कर सकते है और किसी बिल्डिंग का डिज़ाइन बना पाएँगे। इनमें से किसी भी कोर्स को करके आप आर्किटेक्चर बन सकते है।
डिग्री कोर्स इन आर्किटेक्चर

  • डिप्लोमा कोर्स इन आर्किटेक्चर
  • मास्टर डिग्री इन आर्किटेक्चर
  • डिग्री इन आर्किटेक्चर
  • पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन आर्किटेक्चर
  • सस्टेनेबल कोर्स इन आर्किटेक्चर
  • एडवांस्ड सर्टिफिकेट कोर्स इन आर्किटेक्चरल
  • बैचलर डिग्री इन आर्किटेक्चर टेक्नोलॉजी एंड कंस्ट्रक्शन
  • मास्टर ऑफ़ लैंडस्केप आर्किटेक्चर कोर्स
  • बेसिक कोर्स इन आर्किटेक्चरल ड्राफ्ट्समैन

यह सारे कोर्स ग्रेजुएशन कोर्स है जिसे करके आप आर्किटेक्चर इंजीनियर बन सकते है।

B.Arch Entrance Exam

B.Arch में एडमिशन के लिए आपको एंट्रेंस एग्जाम देना होती है। यह एग्जाम कॉलेज या किसी इंस्टिट्यूट के द्वारा आयोजित की जाती है लेकिन आर्किटेक्चर में प्रवेश के लिए कुछ मुख्य परीक्षाएं भी होती है।

  • AIEEE
  • AMU Entrance Exam
  • KEAM
  • NATA
  • BEEE
  • IIT-JEE
  • UPTU SEE Exam

B.Arch की फीस

इसकी फ़ीस कॉलेज पर निर्भर करती है की आपने किस कॉलेज में एडमिशन लिया है। अगर आपने सरकारी कॉलेज में एडमिशन लिया है तो आपकी फ़ीस अलग होगी और अगर आपने प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन लिया है तो आपकी फ़ीस अलग होगी।

सरकारी कॉलेज

सरकारी कॉलेज में अगर आप एडमिशन लेते है तो आपकी फ़ीस 1.5 लाख से 2.5 लाख तक हो सकती है। यह राज्यों पर भी निर्भर करती है।

प्राइवेट कॉलेज

इस कोर्स की फ़ीस सरकारी कॉलेज के मुकाबले प्राइवेट कॉलेज में ज्यादा होती है। 3 लाख से 6 लाख तक होती है या इससे ज्यादा भी हो सकती है।

Monday, February 10, 2020

फुटवियर डिजाइनिंग में भविष्य

बदलते जमाने और फैशन के इस दौर में सिर्फ अच्छे कपड़े पहनना ही सीमित नहीं है बल्कि लोग फुटवियर पर भी पूरा ध्यान देते हैं। ऐसे फुटवियर की मांग है जो स्टाइलिश होने के साथ आरामदायक भी है। और उनकी इस जरूरत को पूरा करने का काम करते हैं फुटवियर डिजाइनर। पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में कॅरियर की बेहतर संभावनाएं उजागर हुई हैं। अगर आप भी समझदार व कुछ क्रिएटिव करने की चाह रखते हैं तो इस क्षेत्र में सुनहरा भविष्य देख सकते हैं।इसके बारे में बता रहे हैं दिल्ली में कार्यरत फुटवियर डिजाइनर- कार्यक्षमता इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आप में हमेशा कुछ हटकर व नया करने की क्षमता होनी चाहिए। इसके अलावा उनका रिसर्च वर्क भी अच्छा होना चाहिए ताकि वह मार्केट में चल रहे ट्रेंड से भली−भांति अवगत रहें। चूंकि उन्हें अपने डिजाइन को फाइनल लुक देने के लिए बहुत से लोगों की आवश्यकता होती है, इसलिए उनका अन्य लोगों के साथ मेलजोल भी अच्छा होना चाहिए। अगर आपके टीम वर्क व कोऑर्डिनेशन में कुछ कमी होती है तो उसका असर प्रॉडक्ट में भी दिखाई देता है। आजकल डिजाइनर्स अपने डिजाइन को कंप्यूटर पर ही बनाते हैं, इसलिए आपमें टेक्निकल स्किल्स भी होनी चाहिए। कार्य एक फुटवियर डिजाइनर का काम सिर्फ फुटवियर डिजाइन करना ही नहीं होता, बल्कि उसे आम लोगों की ख्वाहिश को ध्यान में रखते हुए अपना काम इस प्रकार करना होता है ताकि वह लेटेस्ट डिजाइन के शू कम से कम दामों में लोगों को मुहैया करा सके। वैसे भी कुछ समय पहले तक इस फील्ड में जो नया कॉन्सेप्ट आता था, वह कुछ महीने या सालों तक चलता था। लेकिन अब फैशन व स्टाइल रोज बदलते हैं। इसलिए उनका प्रमुख काम हमेशा कुछ नया सोचना व उसे अमल में लाना होता है।
  योग्यता इस क्षेत्र में अंडरग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध हैं। आप चाहें तो 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद इससे संबंधित कोर्स कर सकते हैं। लेकिन बीटेक या एमटेक करने के लिए आपका साइंस या इंजीनियरिंग बैकग्रांउड होना अनिवार्य है। कोर्स के दौरान छात्रों को जूते बनाने वाले मैटीरियल, पैटर्न, डिजाइन कॉन्सेप्ट, डिजाइन सॉफ्टवेयर व फैशन टेंडस आदि की विस्तृत जानकारी दी जाती है। संभावनाएं एक फुटवियर डिजाइनर के लिए सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी करियर की बेहतरीन संभावनाएं हैं। एक डिजाइनर विभिन्न शू कंपनियों में नौकरी की तलाश कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ अनुभव के बाद आप खुद के डिजाइन किए हुए फुटवियर की एक शॉप भी खोल सकते हैं। इससे जब आप बेहतरीन व लेटेस्ट कम दामों पर लोगों को मुहैया कराएंगे तो आपकी आमदनी भी अधिक होगी और आप खुद भी एक ब्रांड के रूप में मार्केट में उभरकर आएंगे। आमदनी इस फील्ड में जॉब के शुरूआती दौर में ही दो से तीन लाख रुपए सालाना मिल जाते हैं। तीन−चार साल का अनुभव होने के बाद यही सैलरी चार से पांच लाख रुपए सालाना हो जाती है। अगर आप किसी बड़ी कंपनियों से जुड़ते हैं और आपका काम लोगों को पसंद आता है तो आपकी सैलरी अधिक भी हो सकती है। सरकारी पहल इस क्षेत्र से जुड़े स्किल्ड लोगों की मांग पूरी करने के लिए सरकार की तरफ से पहल हुई है। इसके लिए 1963 में आगरा में सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की गई। इतना ही नहीं, वर्ष 1986 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की देख-रेख में नोएडा में फुटवियर डिजाइन ऐंड डेवलॅपमेंट इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई। इसके अलावा, देश के प्रमुख शहरों कानपुर, जालंधर, चेन्नई, मुंबई आदि में भी सरकारी और निजी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट चलाए जा रहे हैं। प्रमुख संस्थान फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, नोएडा। एवीआई स्कूल ऑफ फैशन व शू टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़। सेंटल फुटवियर ट्रेनिंग इंस्टीटयूट, आगरा। द सेंटर लेदर रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेन्नई। कर्नाटका इंस्टीटयूट ऑफ लेदर टेक्नोलॉजी, बंगलुरु।

Wednesday, February 5, 2020

टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री में करियर

भारत के सबसे पुराने उद्योगों में से एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री पहले सिर्फ फैब्रिक प्रोडक्शन तक ही सीमित थी लेकिन अब नई टेक्नोलॉजी के आने से यह तेजी से विकसित हुई है। अब यह इंडस्ट्री अनुसंधान, विकास, मेन्युफैक्चरिंग और मर्केंडाइजिंग जैसी कई श्रेणियों में काम कर रही है। साथ ही, इसमें जॉब के अवसर भी पहले की अपेक्षा अब तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर आप टेक्सटाइल डिजाइनिंग या प्रोडक्शन में दिलचस्पी रखते हैं, तो टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी में अपना करियर बना सकते हैं।

क्या है टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी?

टेक्सटाइल्स के प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और डिजाइनिंग के अध्ययन को टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी या टेक्सटाइल इंजीनियरिंग कहते हैं। इस फील्ड में साइंटिफिक और इंजीनियरिंग सिद्धांतों के साथ-साथ फाइबर, टेक्सटाइल व

अपैरल की डिजाइनिंग और प्रोसेस कंट्रोल सब कुछ शामिल है। इसमें प्राकृतिक और मानवनिर्मित मटेरियल, सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण, वेस्ट एंड पॉल्यूशन कंट्रोल आदि सभी बातों का खयाल रखा जाता है।

छात्रा से गैंगरेप की घटना मे आया चौंकाने वाला मोड़

कौन-से कोर्स करें?

इस फील्ड में करियर बनाने के लिए इंटर में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स या बायोलॉजी जैसे विषय होने जरूरी हैं। इसके बाद आप टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी में बीई या बीटेक, टेक्सटाइल डिजाइनिंग में बीए, टेक्सटाइल डिजाइन में बीएससी, बैचलर ऑफ डिजाइन, डिप्लोमा इन टेक्सटाइल मेन्युफैक्चर या टेक्सटाइल केमिस्ट्री में बीटेक कर सकते हैं। इसके बाद इन कोर्सेज में एडवांस्ड डिप्लोमा, एमई, एमटेक और उसके बाद पीएचडी भी कर सकते हैं।

कैसी है वर्क प्रोफाइल?

आप टेक्सटाइल कंपनीज के प्रोडक्शन कंट्रोल, प्रोडक्ट रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग प्रोसेस, सेल्स, कॉर्पोरेट मैनेजमेंट, सुपरविजन आदि डिपार्टमेंट्स में काम कर सकते हैं। एक टेक्सटाइल इंजीनियर आम तौर पर इंजीनियरिंग प्रोसेस से जुड़ा होता है, जबकि अपैरल और गारमेंट्स की डिजाइनिंग और मेन्युफैक्चरिंग के लिए काम करने वाले प्रोफेशनल्स प्रोडक्ट रिसर्च एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में काम करते हैं।

कौन-सी स्किल्स चाहिए?

इस फील्ड में सर्वाइव करने के लिए उम्मीदवार के पास बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल्स, कम्प्यूटर स्किल्स, एनालिटिकल स्किल्स और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स होनी जरूरी हैं। इसके अलावा उनमें चीजों की बारीकियों पर ध्यान देने की क्षमता, लॉजिकल थिंकिंग और क्रिएटिविटी होनी भी जरूरी है।

भविष्य की संभावनाएं

आप टेक्सटाइल मिल्स, एक्सपोर्ट हाउसेज, निटवेयर मेन्युफैकचरिंग यूनिट्स, टेक्सटाइल डाइंग एंड प्रिंटिंग यूनिट्स में काम कर सकते हैं। इसके अलावा आप सरकार द्वारा प्रायोजित अथवा निजी सिल्क, हैंडलूम, जूट, खादी, क्राफ्ट डेवलपमेंट संस्थानों में काम कर सकते हैं। आप फैशन रीटेलर्स डिजाइन स्टूडियोज और बड़ी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज जैसे में भी काम कर सकते हैं।

सैलरी कितनी?

एक फ्रैशर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को 12 हजार से 30 हजार रुपए की सैलरी मिलती है। अनुभवी उम्मीदवारों की सैलरी 50 हजार से 60 हजार रुपए तक होती है।

प्रमुख संस्थान

आईआईटी दिल्ली

गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, सेरामपुर

उत्तरप्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, कानपुर

डॉ बीआर अंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जालंधर

पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पानीपत

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन, कल्याण

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली

एलडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, अहमदाबाद

Monday, February 3, 2020

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में करियर

मैकेनिकल इंजीनियरिंग क्या है?

मैकेनिकल इंजीनियरिंग सबसे पुराने और व्यापक विषयों में से एक इंजीनियरिंग विषय है. यह मशीन्स और टूल्स की डिजाइनिंग, प्रोडक्शन और ऑपरेशन के लिए हीट और मैकेनिकल पॉवर के उत्पादन और इस्तेमाल से संबद्ध है. इस फील्ड में करियर शुरू करने वाले छात्रों के लिये यह बहुत जरुरी है कि उन्हें कोर कन्सेप्ट्स जैसेकि, मैकेनिक्स, कीनेमेटीक्स, थर्मोडायनामिक्स, मेटीरियल साइंस, स्ट्रक्चरल एनालिसिस आदि की अच्छी समझ होनी चाहिए. इन कोर्सेज में मुख्यतः टेक्निकल एरियाज जैसेकि जनरेटर्स के माध्यम से इलेक्ट्रिसिटी का डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रांसफार्मर्स, डिजाइनिंग, इलेक्ट्रिक मोटर्स, ऑटोमोबाइल्स, एयरक्राफ्ट और अन्य हैवी व्हीकल्स शामिल हैं.

मैकेनिकल इंजीनियर्स क्या करते हैं?

मैकेनिकल इंजीनियरिंग आपके जीवन के तकरीबन हरेक पहलू को प्रभावित करती है. अधिकांश चीज़ें, जो हम अपनी रोजाना की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं, उन्हें मैकेनिकल इंजीनियर्स ही डिज़ाइन और डेवलप करते हैं. उदाहरण के लिए, माइक्रो-सेन्सर्स, कंप्यूटर्स, ऑटोमोबाइल्स, स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, मेडिकल डिवाइसेज, रोबोट्स और कई अन्य वस्तुएं. हमारे जीवन को ज्यादा बेहतर बनाने के लिए इन नई डिवाइसेज और इक्विपमेंट से मदद मिलती है. 

कोर्सेज एंड ड्यूरेशन

मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग की कोर फ़ील्ड्स में से एक है. यह इंजीनियरिंग के सबसे पुराने विषयों में से भी एक है. आजकल, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में कई स्पेशलाइजेशन्स को शामिल किया गया है. जो कन्सेप्ट्स यहां शामिल किये गए हैं, वे इंजीनियरिंग की अन्य फ़ील्ड्स से भी परस्पर संबद्ध हैं. उदाहरण के लिए, पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, सिविल, केमिकल आदि विषय इंजीनियरिंग के ऐसे विषय हैं जो मैकेनिकल इंजीनियरिंग से भी अच्छी तरह संबद्ध हैं. जो छात्र मैकेनिकल इंजीनियरिंग में कोई कोर्स करना चाहते हैं, वे विभिन्न कोर्सेज में दाखिला ले सकते हैं:

  • डिप्लोमा कोर्सेज – यह कोर्स छात्रों को मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एक पॉलिटेक्निक डिप्लोमा ऑफर करता है और आप 10 वीं और 12 वीं क्लास पास करने के बाद यह कोर्स कर सकते हैं. इस कोर्स की ड्यूरेशन या अवधि 3 वर्ष है.  
  • अंडरग्रेजुएट कोर्सेज – यह एक 4 वर्ष की अवधि का कोर्स है जिसे पूरा करने पर आपको मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक (बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी) की डिग्री मिलती है. आप 12 वीं क्लास पास करने के बाद यह कोर्स कर सकते हैं.
  • पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज – यह 2 वर्ष की अवधि का कोर्स है जो मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक (मास्टर ऑफ़ टेक्नोलॉजी) की पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री ऑफर करता है. इस कोर्स में एडमिशन लेने से पहले आपके पास उपयुक्त फील्ड में अंडरग्रेजुएट डिग्री होनी चाहिए.
  • डॉक्टोरल कोर्सेज – यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डॉक्टोरल डिग्री या पीएचडी (डॉक्टर ऑफ़ फिलोसोफी की डिग्री) प्राप्त करने के लिए एक 3 वर्ष की अवधि का कोर्स है. यह कोर्स करने के लिए छात्रों के पास किसी उपयुक्त विषय में पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए.

सबसे लोकप्रिय उप-विषय

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की फील्ड में कई स्पेशलाइजेशन्स होते हैं और छात्र बैचलर डिग्री प्राप्त करने के बाद हायर डिग्रीज प्राप्त करने के लिए इन उप-विषयों में से किसी एक में स्पेशलाइजेशन हेतु अपनी स्टडीज जारी रख सकते हैं. इस फील्ड के कुछ सबसे लोकप्रिय स्पेशलाइजेशन्स निम्नलिखित हैं:

  • मेकाट्रोनिक्स एंड रोबोटिक्स – यह फील्ड कई विषयों जैसे रोबोटिक्स, आर्टिफीशल इंटेलिजेंस, कंप्यूटर साइंस, न्यूरोसाइंस, साइकोलॉजी और कई अन्य विषयों से संबद्ध है. रोबोटिक्स में स्पेशलाइजेशन करने वाले छात्रों के लिए कई बेहतरीन करियर ऑप्शन्स मौजूद हैं. वे विभिन्न इंडस्ट्रीज जैसेकि, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्टेशन, एंट्री एवं अन्य संबद्ध इंडस्ट्रीज में काम कर सकते हैं.
  • थर्मोडाईनॅमिक्स एंड थर्मो-साइंस – यह फील्ड हीट ट्रांसफर और थर्मोडाईनॅमिक्स के फंडामेंटल प्रिंसिपल्स के साथ ही एडवांस्ड इंजीनियरिंग सिस्टम्स में उनके एप्लीकेशन और डिजाइनिंग से संबद्ध है.
  • नैनोटेक्नोलाजी – इस फील्ड में बहुत ज्यादा छोटे पैमाने पर टेक्नोलॉजी की स्टडी और डेवलपमेंट शामिल हैं. इस फील्ड में स्पेशलाइजेशन करने वाले छात्रों को केमिस्ट्री, इंजीनियरिंग, बायोलॉजी आदि की फ़ील्ड्स में करियर के कई अवसर मिलते हैं.
  • फ्लूइड मैकेनिक्स – रॉकेट इंजन्स, एयर-कंडीशनिंग, आयल पाइपलाइन्स, विंड टरबाइन्स आदि की डिजाइनिंग और समझ रखने के लिए फ्लूइड मैकेनिक्स में स्पेशलाइजेशन करना बहुत आवश्यक है. ओशन करंट्स, टेक्टोनिक प्लेट्स और अन्य संबद्ध टॉपिक्स को एनालाइज करने के लिए भी इस फील्ड का बहुत महत्व है.
  • सॉलिड मैकेनिक्स – सॉलिड मैकेनिक्स में स्पेशलाइजेशन के तहत बिहेवियर, मोशन, डिफोरमेशन और एक्सटर्नल इन्फ्लुएंसेज के अनुसार सॉलिड मेटीरियल्स की स्टडी शामिल है. इस फील्ड में एक्सपरटाइज प्राप्त करने के बाद आपके पास मैन्युफैक्चरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग करियर शुरू करने के ढेरों अवसर मौजूद हैं. 

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मुख्य विषय

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में शामिल कुछ मुख्य विषय निम्नलिखित हैं:

• कम्प्यूटेशनल फ्लुइड डायनेमिक्स एंड हीट ट्रांसफर

• कंप्यूटर एडेड डिजाइन ऑफ़ थर्मल सिस्टम

• फंडामेंटल्स ऑफ़ कास्टिंग एंड सॉलिडीफिकेशन

• इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एंड ऑपरेशन रिसर्च

• मॉडलिंग ऑफ़ टरबूलेंट कम्बस्शन

• प्रिंसिपल ऑफ़ वाइब्रेशन कंट्रोल

• रेलरोड व्हीकल डायनामिक्स

• रोबोट मैनिपुलेटर्स डायनामिक्स एंड कंट्रोल

• ट्रांजीशन एंड टर्बुलेंस

• वेव प्रोपेगेशन इन सोलिड्स

एडमिशन प्रोसेस

मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर इंजीनियरिंग विषयों में सबसे ज्यादा पसंदीदा कोर्सेज में से एक है. छात्र विभिन्न लेवल्स जैसेकि डिप्लोमा, अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, डॉक्टोरल के तहत मैकेनिकल इंजीनियरिंग में कोई कोर्स कर सकते हैं. लेकिन, उक्त कोर्सेज में से हरेक कोर्स के लिए पहले से जरूरी कुछ एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया हैं और छात्रों के पास अवश्य ये योग्यतायें होनी चाहियें. इसलिये, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में विभिन्न कोर्सेज के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया निम्नलिखित है: 

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में विभिन्न कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

  • डिप्लोमा कोर्सेज – छात्र ने किसी मान्यताप्राप्त शिक्षा बोर्ड से 10 वीं क्लास का एग्जाम पास किया हो.छात्र ने फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स आदि मुख्य विषयों के साथ 12 वीं क्लास पास की हो.
  • अंडरग्रेजुएट कोर्सेज – यूजी प्रोग्राम में एडमिशन लेने के लिए छात्र को उपयुक्त एंट्रेंस एग्जाम्स देने होते हैं. इसके अलावा, छात्र ने फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स आदि मुख्य विषयों के साथ 12 वीं क्लास पास की हो.
  • पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज – पीजी प्रोग्राम्स में एडमिशन लेने के लिए भी छात्र को उपयुक्त एंट्रेंस एग्जाम्स पास करने होते हैं. छात्र के पास किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से संबद्ध विषय में अंडरग्रेजुएट की डिग्री भी होनी चाहिए.
  • डॉक्टोरल कोर्सेज – डॉक्टोरल प्रोग्राम में एडमिशन लेने के लिए, छात्र के पास किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी संबद्ध विषय में पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री अवश्य होनी चाहिए.

मैकेनिकल इंजीनियरिंग के लिए एंट्रेंस एग्जाम्स

इंजीनियरिंग के विभिन्न विषयों में एडमिशन लेने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और यूनिवर्सिटी लेवल पर एंट्रेंस एग्जाम्स आयोजित किये जाते हैं. मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने के लिए छात्र निम्नलिखित लोकप्रिय एग्जाम्स दे सकते हैं:

• जॉयंट एंट्रेंस एग्जाम - मेन (जेईई मेन)

• जॉयंट एंट्रेंस एग्जाम - एडवांस्ड (जेईई एडवांस्ड)

• वीआईटी इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम (वीआईटीईईई)

• दी महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (एमएचटीसीईटी)

• उत्तर प्रदेश राज्य एंट्रेंस एग्जाम (यूपीएसईई)

• बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस एडमिशन टेस्ट (बीआईटीएसएटी)

• वीआईटी यूनिवर्सिटी मास्टर’स एंट्रेंस एग्जाम (वीआईटीएमईई)

• ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट)

• बिड़ला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड साइंस हायर डिग्री एग्जाम (बीआईटीएस एचडी)

मैकेनिकल इंजीनियरिंग के लिए टॉप 10 इंस्टिट्यूट्स 

भारत में इंजीनियरिंग कोर्सेज करने के लिए सबसे बढ़िया कॉलेजों के तौर पर ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजीज़’ अर्थात आईआईटी’ज माने जाते हैं. एनआईआरएफ रैंकिंग वर्ष 2018 के अनुसार, भारत में यूजीसी से मान्यताप्राप्त टॉप 10 इंजीनियरिंग कॉलेज निम्नलिखित हैं:

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मद्रास, मद्रास

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी बॉम्बे, बॉम्बे

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी खड़गपुर, खड़गपुर

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी दिल्ली, दिल्ली

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कानपुर, कानपुर

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी रुड़की, रुड़की

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी, गुवाहाटी

• अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई

• जादवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता

• इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी हैदराबाद, हैदराबाद

मैकेनिकल इंजीनियर्स के लिए करियर प्रॉस्पेक्ट्स

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में कई अन्य कार्यों के साथ ही मशीन्स की डिजाइनिंग और टेस्टिंग के विभिन्न पहलू शामिल हैं. इस जॉब में विभिन्न फ़ील्ड्स जैसेकि, थर्मल पॉवर प्लांट्स, न्यूक्लियर स्टेशन्स, इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन आदि में लाइव प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग और सुपरविज़न के कार्य आते हैं. इस फील्ड में रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल्स, क्वालिटी कंट्रोल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन आदि कुछ नई और ऐमर्जिंग फ़ील्ड्स हैं. इंजीनियरिंग में अंडरग्रेजुएट डिग्रीज प्राप्त करने के बाद छात्रों के लिए मैन्युफैक्चरिंग, प्रोडक्शन, सर्विसेज और डेवलपमेंट की विभिन्न फ़ील्ड्स में जॉब के काफी अच्छे अवसर मौजूद हैं. आजकल हम मशीन्स के युग में जी रहे हैं और जहां एक मशीन है, वहां एक मैकेनिकल इंजीनियर की जरूरत है. इसलिये, मैकेनिकल इंजीनियर्स के लिए कभी भी जॉब ऑप्शन्स की कमी नहीं हो सकती है.     

मैकेनिकल इंजीनियर्स के लिए लोकप्रिय जॉब प्रोफाइल्स

मैकेनिकल इंजीनियर्स अपने स्पेशलाइजेशन के आधार पर बहुत-सी इंडस्ट्रीज में काम कर सकते हैं. मैकेनिकल इंजीनियर्स के लिए कुछ पसंदीदा जॉब प्रोफाइल्स निम्नलिखित हैं: 

  • आर्किटेक्चरल एंड इंजीनियरिंग मैनेजर्स

आर्किटेक्चरल और इंजीनियरिंग मैनेजर्स आर्किटेक्चरल और इंजीनियरिंग कंपनियों में प्लानिंग, डायरेक्टिंग, मैनेजिंग और कोआर्डिनेटिंग एक्टिविटीज से संबद्ध कार्य करते हैं.

  • ड्राफ्टर्स

इस जॉब में इंजीनियर्स और आर्किटेक्ट्स द्वारा बनाये गये डिज़ाइन्स को टेक्निकल ड्राइंग में बदलने के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना शामिल है ताकि माइक्रोचिप्स और स्काईस्क्रेपर्स जैसी चीज़ों को डिज़ाइन करने में मदद मिल सके. कोई भी उम्मीदवार आर्किटेक्चर, सिविल, इंजीनियरिंग, मैकेनिकल एवं अन्य संबद्ध फ़ील्ड्स में स्पेशलाइजेशन कर सकता है.

  • मेटीरियल इंजीनियर्स

इस प्रोफाइल में नये मेटीरियल्स बनाने के लिए मेटल्स, सिरेमिक्स, प्लास्टिक, कंपोजिट्स, नैनोमेटीरियल्स और विभिन्न अन्य वस्तुओं की प्रॉपर्टीज और स्ट्रक्चर की स्टडी की जाती है. एक मेटीरियल इंजीनियर के तौर पर आप माइक्रोचिप्स से एयरक्राफ्ट्स विंग्स तक और गोल्फ क्लब्स से बायोमेडिकल डिवाइसेज आदि तक प्रोडक्ट्स की व्यापक रेंज तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले मेटीरियल्स की प्रोसेसिंग, टेस्टिंग और डेवलपिंग से संबद्ध कार्य भी करेंगे.  

  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग टेकनीशियन्स

मैकेनिकल इंजीनियरिंग टेकनीशियन्स विभिन्न मैकेनिकल डिवाइसेज को डिज़ाइन करने, डेवलप करने, उनकी मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग में मैकेनिकल इंजीनियर्स की सहायता करते हैं. आपको रफ लेआउट्स बनाने, डाटा एनालाइसिंग और रिकॉर्डिंग, कैलकुलेशन्स करने, एस्टिमेट्स लगाने और प्रोजेक्ट्स के नतीजों की रिपोर्टिंग से संबद्ध कार्य करने होंगे. 

  • न्यूक्लियर इंजीनियर्स 

न्यूक्लियर इंजीनियर्स हमारे फायदे के लिए न्यूक्लियर एनर्जी और रेडिएशन का इस्तेमाल करने के लिए उपयोगी प्रोसेस और सिस्टम्स के रिसर्च और विकास कार्य करते हैं.

  • पेट्रोलियम इंजीनियर्स

एक पेट्रोलियम इंजीनियर के तौर पर आपको ऑयल डिपॉजिट्स से ऑयल और गैस निकालने के लिए विभिन्न मेथड्स को डिज़ाइन और डेवलप करने से संबद्ध कार्य करने होंगे.

  • फिजिसिस्ट्स एंड एस्ट्रोनोमर्स

फिजिसिस्ट्स एंड एस्ट्रोनोमर्स एनर्जी और मैटर के इंटरेक्शन के विभिन्न रूपों के तौर-तरीकों की स्टडी करते हैं. कुछ फिजिसिस्ट्स पार्टिकल एक्सेलरेटर्स, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप्स, लेज़र्स आदि जैसे सोफिस्टिकेटेड इक्विपमेंट को डिज़ाइन करते हैं और उन के साथ एक्सपेरिमेंट्स भी करते हैं.

  • सेल्स इंजीनियर्स

सेल्स इंजीनियर्स विभिन्न बिजनेसेज को जटिल साइंटिफिक और टेक्नोलॉजिकल प्रोडक्ट्स बेचते हैं. एक सेल्स इंजीनियर के तौर पर आपको अपने प्रोडक्ट, इसके पार्ट्स और कार्यों की काफी अच्छी जानकारी होनी चाहिए. आपको प्रोडक्ट के कामकाज में शामिल वैज्ञानिक प्रक्रिया की अच्छी समझ भी होनी चाहिए.

लोकप्रिय रिक्रूटर्स

गवर्नमेंट और प्राइवेट सेक्टर्स में मैकेनिकल इंजीनियर्स को जॉब के बढ़िया अवसर ऑफर करने वाले कुछ लोकप्रिय रिक्रूटर्स के नाम नीचे दिए जा रहे हैं:

गवर्नमेंट सेक्टर

• भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल)

• नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी)

• इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो)

• डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ)

• कोल इंडिया

• इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (ईसीआईएल)

• हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल)

• स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल)

प्राइवेट सेक्टर

• टाटा मोटर्स

• बजाज ऑटो

• हीरो मोटोकॉर्प

• लेलैंड मोटर्स

• फोर्ड मोटर कंपनी

• होंडा मोटर कंपनी

• भाभा एटॉमिक रिसर्च सेटर (बीएआरसी)

Wednesday, January 29, 2020

प्लास्टिक टेक्नोलॉजी


 वर्तमान समय में प्लास्टिक आदमी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो गया है। आम आदमी की जरूरतों से लेकर उद्योग जगत तक में प्लास्टिक का प्रयोग दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग ने प्लास्टिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र को बहुत व्यापक बना दिया है। इंडस्ट्री का निरंतर विस्तार होने के कारण इसमें विशेषज्ञों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट का कार्य इस इंडस्ट्री में बहुत ही महत्वपूर्ण है।

कार्य
प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट रॉ मैटीरियल को विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजार कर प्रोडक्ट्स का निर्माण करते हैं। वे शोध व अनुसंधान का कार्य भी करते हैं। इन्हीं कार्यों के फलस्वरूप हर दिन नए प्र 

योग्यता
बीटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में प्रवेश पाने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथमेटिक्स विषयों के साथ 10+2 में कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी है। एमटेक या पीजी  डिप्लोमा करने के लिए केमिकल इंजीनियरिंग/ प्लास्टिक रबर टेक्नोलॉजी/ मैकेनिकल इंजीनियरिंग/ टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में बीटेक/ बीई डिग्री या डिप्लोमा आवश्यक है। फिजिक्स अथवा केमिस्ट्री में एमएससी करने वाले छात्र भी प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में एमटेक कर सकते हैं। जिन छात्रों ने गेट परीक्षा पास की है, उन्हें एमटेक में प्राथमिकता दी जाती है।

व्यक्तिगत गुण
इस इंडस्ट्री में भविष्य संवारने के लिए युवाओं के पास शैक्षणिक योग्यता के साथ कठोर परिश्रम, कल्पनाशीलता तथा भौतिक व रसायन विज्ञान में गहरी रुचि आवश्यक है।

अवसर
भारत सरकार ने प्लास्टिक उद्योग को उच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र माना है। भारत में प्लास्टिक की मांग प्रतिवर्ष 10 से 14 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इस उद्योग में भारत का 3500 करोड रुपये का सालाना कारोबार है, जिसके 2014 तक 6500 करोड रुपये सालाना होने की उम्मीद है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में बढ़ती प्लास्टिक की खपत को देखते हुए आगामी वर्षां में 15 लाख लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। प्लास्टिक टेक्नोलॉजी का कोर्स पूरा कर लेने के बाद कंप्यूटर, इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स में नौकरी प्राप्त की जा सकती है। सार्वजनिक क्षेत्र में प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट को पेट्रोलियम मंत्रालय, ऑयल ऐंड नेचुरल गैस कमीशन, इंजीनियरिंग संयंत्रों, पेट्रोकेमिकल्स, विभिन्न राज्यों में पॉलिमर्स कॉरर्पोरेशन्स, पेट्रोलियम कंजर्वेशन, रिसर्च असोसिएशन ऑफ इंडिया आदि में करियर के अच्छे अवसर हैं। इसके अलावा मार्केटिंग व प्रबंधन के क्षेत्र में भी काफी स्कोप हैं।

कमाई
सरकारी क्षेत्र में प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट की शुरुआती सैलरी 8 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह होती है। प्राइवेट कंपनियों में शुरुआती स्तर पर 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह या इससे भी अधिक प्राप्त हो सकते हैं। 2 या 3 सालों के अनुभव के बाद 20 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं।

कोर्स
 • बीटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी (4 वर्ष)
 • एमटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी (2 वर्ष)
 • डिप्लोमा/पीजी डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी (3-4 वर्ष)
 • डिप्लोमा/पीजी डिप्लोमा इन प्लास्टिक मोल्ड डिजाइन (3-4 वर्ष)
 • पीजी डिप्लोमा इन प्लास्टिक प्रोसेसिंग ऐंड टेस्टिंग (18 माह)

संस्थान
 1. दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, दिल्ली
 2. गोविंद वल्लभपंत पॉलिटेक्निक, नई दिल्ली
 3. इंडियन प्लास्टिक इंस्टीट्यूट, मुंबई
 4. हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट, कानपुर
 5. लक्ष्मीनारायण इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, उत्तर प्रदेश
 6. सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी, ब्रांच :  भोपाल, चेन्नई, लखनऊ, अहमदाबाद, भुवनेश्वर, मैसूर, गुवाहटी
 7. मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई
 8. संत लोंगोवाल इंडस्ट्री ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड  टेक्नोलॉजी, पंजाब
 9. जगत राम गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक होशियारपुर, पंजाब
 10. गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, कोटा, राजस्थान

Saturday, January 25, 2020

पॉलिटेक्निक के बाद करियर विकल्प

पॉलीटेक्निक डिप्लोमा/कोर्स के बाद करियर स्कोप

क्या आपका पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कोर्स अब समाप्त होने वाला है या फिर आप पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कोर्स करने के विषय में सोंच रहे हैं और इस बात को लेकर उहापोह की स्थिति में हैं कि आखिर इस कोर्स को करने के बाद रोजगार की कितनी संभावनाएं हैं तथा इसमें करियर एडवांसमेंट के असार हैं या नहीं, तो इन दोनों ही परिस्थितियों में आपको डरने तथा कुछ ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है. डिप्लोमा पॉलिटेक्निक कोर्स के पूरा होने के बाद बहुत अच्छे करियर विकल्प और अवसर मिलते हैं. पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का चयन करने का एक मुख्य कारण इसके द्वारा कम पैसे और कम समय में उत्कृष्ट करियर के अवसर उपलब्ध कराना है.

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कार्यक्रम के पूरा होने के बाद इंजीनियरिंग ट्रेडों के साथ-साथ गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में भी छात्रों के पास कई प्रकार के करियर विकल्प मौजूद हैं.

आगे का अध्ययन

यद्यपि पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कार्यक्रम एआईसीटीई / अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा संचालित और अनुमोदित पूर्ण तकनीकी डिग्री पाठ्यक्रम है, लेकिन इन पाठ्यक्रमों को विशेष रूप से संबंधित स्ट्रीम्स या विषय के व्यावहारिक पहलुओं और मूलभूत बातें सीखने में मदद करने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है. इसलिए, यदि आप अपने टेक्नीकल ज्ञान के थियरेटिकल ज्ञान के साथ साथ प्रैक्टिकल ज्ञान में भी वृद्धि करना चाहते हैं तो आपके द्वारा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कोर्स पूरा करने के बाद निम्नांकित विषयों के अध्ययन पर जोर दिया जाना चाहिए.

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के बाद आगे अध्ययन करने का फायदा

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा एक टेक्नीकल डिग्री है. इससे आपको एक अच्छी नौकरी मिलने में मदद मिल सकती है. विविध प्रकार की नौकरियों में जॉब की संभावना और हायर लेवल की नौकरियों के लिए अपनी योग्यता साबित करने के लिए डिप्लोमा करने के बाद भी अध्ययन करना जरुरी है. पॉलीटेक्निक डिप्लोमा के दौरान सम्बंधित डोमेन के व्यावहारिक पक्ष तथा आधारभूत तथ्यों पर ज्यदा जोर दिया जाता है लेकिन वे हायर लेवल की नौकरी के लिए पर्याप्त नहीं होते हैं. पॉलीटेक्निक डिप्लोमा से प्रारंभिक स्तर पर जूनियर लेवल की जॉब आसानी से पायी जा सकती है लेकिन हायर लेवल की नौकरियों के लिए सिर्फ इससे काम नहीं चलता है. इसलिए सम्बन्धित डोमेन में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों ही स्तर पर पर्याप्त ज्ञान के लिए आगे अध्ययन करना बहुत जरुरी हो जाता है. इसके लिए आप निम्नांकित कोर्सेज पर विचार कर सकते हैं -

बीटेक लेटरल एंट्री स्कीम

पॉलीटेक्निक डिप्लोमा धारकों के लिए सबसे लोकप्रिय विकल्प, खासकर इंजीनियरिंग डोमेन से, बी.टेक या बीई का चयन करना है.  इसके लिए उम्मीदवारों को कॉलेज और पाठ्यक्रम के लिए संबंधित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा. कई इंजीनियरिंग कॉलेज इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारकों को लेटरल एंट्री प्रदान करते हैं. लेटरल एंट्री का मतलब है कि आप सीधे दूसरे वर्ष में इंजीनियरिंग कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं या बी.टेक / बीई के तीसरे सेमेस्टर में शामिल हो सकते हैं. कुछ कॉलेजों में डिप्लोमा धारकों को लेटरल एंट्री योजना के माध्यम से प्रवेश के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है.

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा छात्रों के लिए लेटरल एंट्री स्कीम की पेशकश करने वाले शीर्ष कॉलेज

निम्नलिखित टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज हैं जो पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को लेटरल एंट्री योजना के माध्यम से प्रवेश प्रदान करते हैं :

एआईएम प्रमाणन

इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले डिप्लोमा धारकों के लिए एक और अन्य विकल्प एआईएम सर्टिफिकेशन कोर्स है. एएमआईआई (इंजीनियरों के संस्थानों के सहयोगी सदस्य) सर्टिफिकेशन बीई के बराबर एक प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन डिग्री है. एआईएम सर्टिफिकेशन कोर्स को पूरा करने वाले उम्मीदवारों को इंजीनियरिंग संस्थान, भारत द्वारा एआईएम प्रमाण पत्र से सम्मानित किया जाता है. एआईएम परीक्षा में दो खंड होते हैं और इस कोर्स को पूरा करने में लगभग 4 साल लगते हैं. हालांकि, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को स्ट्रीम ए, यानि प्रोजेक्ट वर्क में शामिल होने की बहुत जरुरत नहीं होती है.

इसलिए, वे केवल 3 वर्षों में ही एआईएम सर्टिफिकेशन कोर्स कर सकते हैं.अगर आपको इस विकल्प के विषय में और अधिक जानकारी चाहिए तो आप www.ieindia.org पर जाकर और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

स्टडी डोमेन में ग्रेजुएशन

बीटेक और बीई कोर्सेज के अलावा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों के पास अपने सम्बन्धित डोमेन में तीन साल के नियमित ग्रेजुएशन कोर्स में शामिल होने का विकल्प भी मौजूद है. यह विकल्प गैर-इंजीनियरिंग प्रोग्राम्स, बीएससी, बीए, बीसीए और बीकॉम जैसे तीन साल के रेगुलर ग्रेजुएशन प्रोग्राम्स  की अपेक्षा डिप्लोमा धारकों के लिए विशेष रूप से व्यावहारिक है. लेकिन इसके लिए उम्मीदवार के पास 12 वीं का रीजल्ट तथा डिप्लोमा का सर्टिफिकेट होना आवश्यक है तभी उन्हें इसमें एडमिशन मिल सकता है.

रोजगार के अवसर

उत्कृष्ट क्षेत्र और विभिन्न करियर के अवसर प्रदान करने के कारण पॉलिटेक्निक डिप्लोमा को कई छात्र करियर के शॉर्ट-कट का नाम देते हैं. 10 वीं पास करने के बाद आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे छात्रों को यह रोमांचक और आकर्षक करियर विकल्प प्रदान करता है. ऐसे में वे पीएसयू की नौकरी कर सरकारी सेवा क्षेत्र में शामिल होने, निजी कंपनियों के साथ नौकरियां लेने या यहां तक कि अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने और स्व-नियोजित होने का विकल्प चुन सकते हैं.

आइए कुछ प्रमुख नौकरी करियर विकल्पों पर विचार करते हैं जिसे पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारक कोर्स पूरा होने के बाद अपना सकते हैं-

सार्वजनिक क्षेत्र / पीएसयू

सरकार या उनके सहयोगी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को बेहतरीन करियर के अवसर प्रदान करती हैं. ये कंपनियां जूनियर लेवल पोजिशन (इंजीनियरिंग और गैर इंजीनियरिंग उम्मीदवारों दोनों के लिए) और तकनीशियन स्तर की नौकरियों के लिए डिप्लोमा धारकों को हायर करती हैं.

पॉलीटेक्निक डिप्लोमा ग्रेजुएट्स की भर्ती करने वाली शीर्ष कंपनियां

  • रेलवे
  • भारतीय सेना
  • गेल - गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड
  • ओएनजीसी - तेल और प्राकृतिक गैस निगम
  • डीआरडीओ - रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन
  • भेल - भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
  • एनटीपीसी - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन
  • लोक कार्य विभाग
  • बीएसएनएल - भारत संचार निगम लिमिटेड
  • सिंचाई विभाग
  • बुनियादी ढांचा विकास एजेंसियां
  • एनएसएसओ - राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन
  • आईपीसीएल - इंडियन पेट्रो केमिकल्स लिमिटेड

निजी क्षेत्र

सार्वजनिक क्षेत्र की तरह ही निजी क्षेत्र की कंपनियां भी विशेष रूप से विनिर्माण, निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार डोमेन में काम करने वाले पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को हायर करती हैं. हालांकि, ये नौकरियां जूनियर लेवल की होती हैं और इसमें प्रोमोशन के आसार कम होते हैं.

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को भर्ती करने वाली शीर्ष निजी क्षेत्र की कंपनियां-

  • एयरलाइंस - इंडिगो, स्पाइसजेट, जेट एयरवेज इत्यादि
  • निर्माण फर्म - यूनिटेक, डीएलएफ, जेपी एसोसिएटेड, जीएमआर इंफ्रा, मित्स इत्यादि
  • संचार फर्म – भारती एयरटेल , रिलायंस कम्युनिकेशंस, आइडिया सेल्युलर इत्यादि.
  • कम्प्यूटर इंजीनियरिंग फर्म - टीसीएस, एचसीएल, विप्रो, पोलारिस इत्यादि.
  • ऑटोमोबाइल - मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, बजाज ऑटो इत्यादि.
  • इलेक्ट्रिकल / पावर फर्म - टाटा पावर, बीएसईएस, सीमेंस, एलएंडटी, इत्यादि.
  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग फर्म - हिंदुस्तान यूनिलीवर, एसीसी लिमिटेड, वोल्टस इत्यादि.

स्व रोजगार

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों के लिए एक और उत्कृष्ट करियर विकल्प स्व-रोज़गार है. पॉलिटेक्निक संस्थानों द्वारा पेश किए गए सभी डिप्लोमा कोर्सेज विशेष रूप से संबंधित विषय के व्यावहारिक या अनुप्रयोग सम्बन्धी पहलुओं पर छात्रों को प्रशिक्षित करते हैं.यह छात्रों को विषय की मूल बातें सीखने के लिए तैयार करता है और अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के योग्य बनाता है.उदाहरण के लिए, कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा रखने वाले छात्र आसानी से कंप्यूटर की मरम्मत के लिए एक व्यवसाय शुरू कर सकते हैं; या ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा रखने वाला कोई भी छात्र अपना गेराज या ऑटोमोबाइल मरम्मत स्टोर शुरू कर सकता है. इसलिए, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पाठ्यक्रम छात्रों को स्व-रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं.

आगे का अध्ययन

यद्यपि पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कार्यक्रम एआईसीटीई / अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा संचालित और अनुमोदित पूर्ण तकनीकी डिग्री पाठ्यक्रम है, लेकिन इन पाठ्यक्रमों को विशेष रूप से संबंधित स्ट्रीम्स या विषय के व्यावहारिक पहलुओं और मूलभूत बातें सीखने में मदद करने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है. इसलिए, यदि आप अपने टेक्नीकल ज्ञान के थियरेटिकल ज्ञान के साथ साथ प्रैक्टिकल ज्ञान में भी वृद्धि करना चाहते हैं तो आपके द्वारा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कोर्स पूरा करने के बाद निम्नांकित विषयों के अध्ययन पर जोर दिया जाना चाहिए.

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के बाद आगे अध्ययन करने का फायदा

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा एक टेक्नीकल डिग्री है. इससे आपको एक अच्छी नौकरी मिलने में मदद मिल सकती है. विविध प्रकार की नौकरियों में जॉब की संभावना और हायर लेवल की नौकरियों के लिए अपनी योग्यता साबित करने के लिए डिप्लोमा करने के बाद भी अध्ययन करना जरुरी है. पॉलीटेक्निक डिप्लोमा के दौरान सम्बंधित डोमेन के व्यावहारिक पक्ष तथा आधारभूत तथ्यों पर ज्यदा जोर दिया जाता है लेकिन वे हायर लेवल की नौकरी के लिए पर्याप्त नहीं होते हैं. पॉलीटेक्निक डिप्लोमा से प्रारंभिक स्तर पर जूनियर लेवल की जॉब आसानी से पायी जा सकती है लेकिन हायर लेवल की नौकरियों के लिए सिर्फ इससे काम नहीं चलता है. इसलिए सम्बन्धित डोमेन में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों ही स्तर पर पर्याप्त ज्ञान के लिए आगे अध्ययन करना बहुत जरुरी हो जाता है. इसके लिए आप निम्नांकित कोर्सेज पर विचार कर सकते हैं -

बीटेक लेटरल एंट्री स्कीम

पॉलीटेक्निक डिप्लोमा धारकों के लिए सबसे लोकप्रिय विकल्प, खासकर इंजीनियरिंग डोमेन से, बी.टेक या बीई का चयन करना है.  इसके लिए उम्मीदवारों को कॉलेज और पाठ्यक्रम के लिए संबंधित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा. कई इंजीनियरिंग कॉलेज इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारकों को लेटरल एंट्री प्रदान करते हैं. लेटरल एंट्री का मतलब है कि आप सीधे दूसरे वर्ष में इंजीनियरिंग कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं या बी.टेक / बीई के तीसरे सेमेस्टर में शामिल हो सकते हैं. कुछ कॉलेजों में डिप्लोमा धारकों को लेटरल एंट्री योजना के माध्यम से प्रवेश के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है.

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा छात्रों के लिए लेटरल एंट्री स्कीम की पेशकश करने वाले शीर्ष कॉलेज

निम्नलिखित टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज हैं जो पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को लेटरल एंट्री योजना के माध्यम से प्रवेश प्रदान करते हैं :

  • गुरू नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज, लुधियाना
  • डीएवी इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग और टैक्नोलॉजी, जालंधर
  • इंजीनियरिंग कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे
  • गुरु तेगबाहदुर प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली
  • एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, नोएडा
  • दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला
  • नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
  • केआईआईटीएस यूनिवर्सिटी, ओडिशा
  • गुरु गोबिंद सिंह आईपी यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • पंजाब टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, जलंधर
  • पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
  • चंडीगढ़ समूह कॉलेज, चंडीगढ़
  • पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला
  • हार्कोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट, कानपुर
  • चित्रकारा यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़
  • सैंटलांगोंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, संगरूर
  • एसबीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, फिरोजपुर

एआईएम प्रमाणन

इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले डिप्लोमा धारकों के लिए एक और अन्य विकल्प एआईएम सर्टिफिकेशन कोर्स है. एएमआईआई (इंजीनियरों के संस्थानों के सहयोगी सदस्य) सर्टिफिकेशन बीई के बराबर एक प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन डिग्री है. एआईएम सर्टिफिकेशन कोर्स को पूरा करने वाले उम्मीदवारों को इंजीनियरिंग संस्थान, भारत द्वारा एआईएम प्रमाण पत्र से सम्मानित किया जाता है. एआईएम परीक्षा में दो खंड होते हैं और इस कोर्स को पूरा करने में लगभग 4 साल लगते हैं. हालांकि, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को स्ट्रीम ए, यानि प्रोजेक्ट वर्क में शामिल होने की बहुत जरुरत नहीं होती है.

इसलिए, वे केवल 3 वर्षों में ही एआईएम सर्टिफिकेशन कोर्स कर सकते हैं.अगर आपको इस विकल्प के विषय में और अधिक जानकारी चाहिए तो आप www.ieindia.org पर जाकर और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

स्टडी डोमेन में ग्रेजुएशन

बीटेक और बीई कोर्सेज के अलावा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों के पास अपने सम्बन्धित डोमेन में तीन साल के नियमित ग्रेजुएशन कोर्स में शामिल होने का विकल्प भी मौजूद है. यह विकल्प गैर-इंजीनियरिंग प्रोग्राम्स, बीएससी, बीए, बीसीए और बीकॉम जैसे तीन साल के रेगुलर ग्रेजुएशन प्रोग्राम्स  की अपेक्षा डिप्लोमा धारकों के लिए विशेष रूप से व्यावहारिक है. लेकिन इसके लिए उम्मीदवार के पास 12 वीं का रीजल्ट तथा डिप्लोमा का सर्टिफिकेट होना आवश्यक है तभी उन्हें इसमें एडमिशन मिल सकता है.

रोजगार के अवसर

उत्कृष्ट क्षेत्र और विभिन्न करियर के अवसर प्रदान करने के कारण पॉलिटेक्निक डिप्लोमा को कई छात्र करियर के शॉर्ट-कट का नाम देते हैं. 10 वीं पास करने के बाद आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे छात्रों को यह रोमांचक और आकर्षक करियर विकल्प प्रदान करता है. ऐसे में वे पीएसयू की नौकरी कर सरकारी सेवा क्षेत्र में शामिल होने, निजी कंपनियों के साथ नौकरियां लेने या यहां तक कि अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने और स्व-नियोजित होने का विकल्प चुन सकते हैं.

आइए कुछ प्रमुख नौकरी करियर विकल्पों पर विचार करते हैं जिसे पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारक कोर्स पूरा होने के बाद अपना सकते हैं-

सार्वजनिक क्षेत्र / पीएसयू

सरकार या उनके सहयोगी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को बेहतरीन करियर के अवसर प्रदान करती हैं. ये कंपनियां जूनियर लेवल पोजिशन (इंजीनियरिंग और गैर इंजीनियरिंग उम्मीदवारों दोनों के लिए) और तकनीशियन स्तर की नौकरियों के लिए डिप्लोमा धारकों को हायर करती हैं.

पॉलीटेक्निक डिप्लोमा ग्रेजुएट्स की भर्ती करने वाली शीर्ष कंपनियां

  • रेलवे
  • भारतीय सेना
  • गेल - गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड
  • ओएनजीसी - तेल और प्राकृतिक गैस निगम
  • डीआरडीओ - रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन
  • भेल - भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
  • एनटीपीसी - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन
  • लोक कार्य विभाग
  • बीएसएनएल - भारत संचार निगम लिमिटेड
  • सिंचाई विभाग
  • बुनियादी ढांचा विकास एजेंसियां
  • एनएसएसओ - राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन
  • आईपीसीएल - इंडियन पेट्रो केमिकल्स लिमिटेड

निजी क्षेत्र

सार्वजनिक क्षेत्र की तरह ही निजी क्षेत्र की कंपनियां भी विशेष रूप से विनिर्माण, निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार डोमेन में काम करने वाले पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को हायर करती हैं. हालांकि, ये नौकरियां जूनियर लेवल की होती हैं और इसमें प्रोमोशन के आसार कम होते हैं.

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को भर्ती करने वाली शीर्ष निजी क्षेत्र की कंपनियां-

  • एयरलाइंस - इंडिगो, स्पाइसजेट, जेट एयरवेज इत्यादि
  • निर्माण फर्म - यूनिटेक, डीएलएफ, जेपी एसोसिएटेड, जीएमआर इंफ्रा, मित्स इत्यादि
  • संचार फर्म – भारती एयरटेल , रिलायंस कम्युनिकेशंस, आइडिया सेल्युलर इत्यादि.
  • कम्प्यूटर इंजीनियरिंग फर्म - टीसीएस, एचसीएल, विप्रो, पोलारिस इत्यादि.
  • ऑटोमोबाइल - मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, बजाज ऑटो इत्यादि.
  • इलेक्ट्रिकल / पावर फर्म - टाटा पावर, बीएसईएस, सीमेंस, एलएंडटी, इत्यादि.
  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग फर्म - हिंदुस्तान यूनिलीवर, एसीसी लिमिटेड, वोल्टस इत्यादि.