Monday, June 12, 2017

गाड़ि‍यों की लुक डिजाइन में कर‍ियर

जब भी बात गाड़ियों के लुक की होती है, तो कुछ गाड़ियां खुद ही हमारे जहन में आ जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी डिजाइनिंग उस समय के हिसाब से बिल्कुल 'हटकर' और कंफर्ट लेवल को ध्यान में रखकर की गई होती है। गाड़ियों के इसी ओवरऑल लुक की डिजाइनिंग करते हैं ऑटोमोटिव इंजीनियर्स। अगर आपको भी वाहनों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात आकर्षित करती है, तो आप भी ऑटोमोटिव डिजाइनर बन सकते हैं।
क्या है ऑटोमोटिव डिजाइन?
ऑटोमोबाइल्स के अपीयरेंस और फंक्शनैलिटी को डिजाइन करने की प्रक्रिया ऑटोमोटिव डिजाइनिंग कहलाती है। इसमें कार, बाइक, ट्रक, बस आदि हर सेग्मेंट के वाहन शामिल हैं। इसके तहत गाड़ियों की इंटीरियर व एक्सटीरियर डिजाइन, कलर स्कीम और शेप पर भी काम किया जाता है।
जॉब प्रोफाइल
किसी भी ऑटोमोबाइल को बनाने के लिए बेसिक आइडिया की जरूरत होती है। आइडिया जनरेशन ही ऑटोमोटिव डिजाइनर की प्रमुख जिम्मदारी है। इंजीनियर्स और डिजाइनर्स की टीम इस आइडिया पर चर्चा करती है और फिर कॉन्सेप्ट तैयार हो जाने पर डिजाइनर्स सॉफ्टवेयर की मदद से गाड़ी का बेसिक स्केच बनाते हैं, जो 3डी होता है। इसमें वाहन की हर बेसिक डीटेल शामिल होती है। साथ ही इंटीरियर और एक्सटीरियर की कलर स्कीम की जानकारी भी देनी होती है। डिजाइन फाइनल होने के बाद गाड़ी का स्केल मॉडल बनाया जाता है।
जरूरी स्किल
ऑटोमोटिव डिजाइनर बनने की सबसे पहली शर्त तो यह है कि आपमें सड़क पर चलने वाली हर गाड़ी के लिए पैशन होना चाहिए। साथ ही आपके पास वाहनों के निर्माण और उनकी फंक्शनैलिटी के बारे में बेसिक जानकारी भी होनी चाहिए। सृजनात्मकता के साथ ही आपमें ड्रॉइंग और स्कल्पचर बनाने में रुचि भी होनी चाहिए।
कौन-से कोर्स?
इस उद्योग में करियर बनाने के लिए डिजाइनिंग में बैचलर्स की डिग्री होनी जरूरी है। आप चाहें, तो डिजाइनिंग में मास्टर्स करके अपना ज्ञान और बढ़ा सकते हैं। इससे जॉब पाने की संभावना भी बढ़ जाती है। वैसे इस उद्योग में सर्वाइवल और करियर ग्रोथ के लिए डिजाइन स्किल्स ही मायने रखती हैं। आप चाहें, तो कोर्स पूरा करने के बाद किसी कंपनी में इंटर्नशिप करके डिजाइनिंग की बारीकियां सीख सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
ऑटोमोटिव डिजाइनर बड़े ऑटोमोबाइल निर्माताओं के कॉन्सेप्ट एंड डिजाइनिंग डिपार्टमेंट में काम करते हैं। अगर बात पे-पैकेज की करें, तो यह फील्ड काफी आकर्षक है। ज्यादातर कंपनियां ऑटोमोटिव डिजाइनर्स को अच्छा पैकेज देती हैं। भारत में आम तौर पर इस फील्ड में 5 लाख रुपए के वार्षिक पैकेज से शुरूआत होती है। अनुभव के साथ यह बढ़ता जाता है।

Friday, June 9, 2017

न्यूक्लियर मेडिसिन में कॅरिअर

बहुत जल्द ही पारंपरिक जांच-परख के तौर-तरीके बदलने वाले हैं, खासतौर पर गंभीर बीमारियों के संबंध में। दरअसल, मौजूदा चिकित्सा पद्धति चाहे वह जिस तौर-तरीके पर आधारित हो, आमतौर पर बीमारियों का अनुमान ही लगाती है और फिर उस अनुमान के आधार पर इलाज होता है। जब अनुमान सही साबित हो जाता है तो चिकित्सा कामयाब रहती है और अगर अनुमान लगाने में कोई गलती रह गई तो दवाइयां असर नहीं करतीं। दवाइयों की कामयाबी का प्रतिशत भी दरअसल चिकित्सकों द्वारा बीमारियों के लगाए जाने वाले सटीक अनुमान पर ही निर्भर है।
लेकिन अनुमानों की यह दुनिया बहुत ही जल्द बदलने वाली है। अनुमान की जगह लेगी अब न्यूक्लियर मेडिसिन, जो न सिर्फ जांच-परख की सौ प्रतिशत शुद्धता सुनिश्र्चित करेगी अपितु इस्तेमाल होने वाली दवाइयों का कारगर होना भी तय करेगी। इसलिए अगर आपसे कोई डॉक्टर कहे कि आपको न्यूक्लियर मेडिसिन की जरूरत है तो इससे घबराएं नहीं। इसका न तो परमाणु बम से कोई रिश्ता है और न ही रेडियोधर्मी विकिरणों से। न्यूक्लियर मेडिसिन आने वाले भविष्य की हकीकत बनने जा रही है। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल संभवतः उन खतरनाक बीमारियों का सटीक विश्लेषण करने, उनकी परख करने के लिए किया जाए जो असाध्य बीमारियों की कोटि में आती हैं। थायराइड कैंसर, न्यूरल क्रिस्ट ट्यूमर, बार-बार उभर आने वाली ऑर्थराइटिस जैसी बीमारियों का पता लगाने और उनके निदान में न्यूक्लियर मेडिसिन जबरदस्त भूमिका निभा सकती है।
लेकिन चिकित्सा की इस शाखा को सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई से जोड़कर देखने की गलती नहीं करनी चाहिए। यह इससे पूरी तरह से अलग, अपने आप में स्वतंत्र और स्पष्ट चिकित्सा शाखा है। पारंपरिक शारीरिक अनुमान और उसके प्रतिविंबन के तौर-तरीके अपनी जगह पहले की तरह मौजूद रहेंगे। यह इन सबसे अलग और इनको उन्नत बनाने वाली चिकित्सा शाखा है। सच बात तो यह है कि यह अब तक की संभवतः पहली ऐसी चिकित्सा शाखा बनने जा रही है जो रोगी और डॉक्टर दोनों को ही सौ प्रतिशत संतुष्टिदायक नतीजे दे पाने में सक्षम होगी। ऐसा इस क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञों का कहना है या ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि इसमें किसी रोग को शुरूआती स्थिति से भी पहले पकड़ पाने की कुव्वत होगी। जबकि शारीरिक तस्वीर प्रविधि (एनाटोमिकल इमेजिंग मॉडेलिटीज) में किसी रोग को पकड़ पाना तभी संभव है, वह जब न सिर्फ पैदा हो जाए बल्कि पैदा होकर विकसित भी हो जाए। मसलन, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई तकनीक के जरिए हम किसी टिश्यू या शरीर के अंदर किसी खतरे को तभी भाप पाते हैं, जब खतरा खतरनाक स्थिति तक पहुंच जाता है। जब ट्यूमर बढ़ चुका होता है और ज़िंदगी दॉंव पर लग चुकी होती है।
कस्तूरबा गांधी मेडिकल कॉलेज, मणिपाल के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार कहते हैं, “न्यूक्लियर मेडिसिन इमेजिंग तकनीक न सिर्फ बीमारी को बहुत शुरूआती अवस्था में पकड़ पाने में सक्षम रहती है अपितु यह प्रभावशाली इलाज और दवाइयों के बारे में भी स्पष्टता से बहुत कुछ बता पाने में सक्षम है। इससे हम किसी भी बीमारी की विस्तृत जानकारी, उसके विस्तृत प्रभाव और उससे निपटने के प्रभावशाली तरीकों आदि के बारे में जान जाते हैं। यही नहीं इससे बीमारी के आगे बढ़ने के बारे में यानी भविष्य में इसके फैलने की रफ्तार, दिशा और तरीके का भी ज्ञान हो जाता है। जिस कारण यह बीमारी किस अंग को किस तरह से प्रभावित करती है, कैसे फैलती है, इससे कैसे प्रभावशाली तरीके से छुटकारा पाया जा सकता है? इस सबका पता चल जाता है।’
न्यूक्लियर मेडिसिन में चिकित्सा उन्नति का भविष्य छुपा है। जाहिर है, इसका भविष्य शानदार है। ऐसे में भला न्यूक्लियर मेडिसिन का हिस्सा कौन नहीं बनना चाहेगा। इसे एक शानदार कॅरियर के रूप में अपनाने वालों की लंबी कतार है। आप भी न्यूक्लियर मेडिसिन में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। मगर याद रखें, यह 9 साल या इससे भी ज्यादा समय का एक जटिल पाठ्यक्रम है। इसलिए इसमें मेहनत बहुत जरूरी है। एमबीबीएस पूरा करने के बाद आप डीआरएम यानी डिप्लोमा इन न्यूक्लियर मेडिसिन हासिल कर सकते हैं। चाहें तो न्यूक्लियर मेडिसिन में एमडी की डिग्री भी हासिल कर सकते हैं। आप में अगर पूर्ण समर्पण और कठोर श्रम करने का माद्दा है तो आप इस क्षेत्र में आंतरिक श्रेष्ठता वाले क्षेत्रों जैसे- इमरजेंसी न्यूक्लियर मेडिसिन या न्यूक्लियर कार्डियोलॉजी का चयन कर सकते हैं। चूंकि न्यूक्लियर मेडिसिन या न्यूक्लियर कार्डियोलॉजी से संबंधित मरीज कैंसर से पीड़ित होते हैं और आमतौर पर खतरनाक स्थिति में होते हैं इसलिए इनकी जांच-परख करने वालों को न सिर्फ बेहद संवेदनशील अपितु खतरों के प्रति पूरी तरह से आगाह रहने वाला स्वभाव होना चाहिए।
चूंकि रेडियोआइसोटॉप्स शरीर में पहुंचते ही रेडिएशन का खतरा पैदा कर देते हैं इसलिए इस क्षेत्र में जाने वालों को सुरक्षा मानकों के प्रति बेहद संवेदनशील होना जरूरी है। ऐसे किसी भी विशेषज्ञ को भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर या एटोमिक एनर्जी रेग्यूलेटरी बोर्ड, मुंबई से लाइसेंस लेना जरूरी होता है। इसके बाद ही न्यूक्लियर मेडिसिन में कोई विशेषज्ञ प्रैक्टिस कर सकता है। अगर आप यह विशेषज्ञता हासिल करके नौकरी करते हैं तो शुरूआत में ही आपको 35 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह मिल जाते हैं।
हालांकि हमारे देश में अभी न्यूक्लियर मेडिसिन को लेकर लोगों की जानकारी बड़ी सीमित है। यह वह क्षेत्र है जो आने वाले दिनों में भारी मांग में होगा। इस क्षेत्र में डिग्री-डिप्लोमा हासिल करना भविष्य में विशिष्ट रोजगार हासिल होने की गारंटी है। डॉ. धनराज जांगिड़ एसोसिएट डायरेक्टर न्यूक्लियर मेडिसिन एंड कार्डिक इमेजिंग एस्कॉट्र्स कहते हैं, “न्यूक्लियर मेडिसिन की क्षमता अभी तक भारत में उपयोग में नहीं लाई गई, क्योंकि इसके उपकरण बहुत महंगे हैं। रेडिएशन के फैलने का खतरा भी बना रहता है अगर आप इस तकनीक में दक्ष नहीं हैं और आपके पास उपकरण संवेदनशील नहीं हैं। लेकिन आने वाले दिनों में इसका भविष्य बहुत उज्जवल है।’ ज्यादा से ज्यादा कैंसर और हृदय रोग का इलाज करने वाले अस्पताल न्यूक्लियर मेडिसिन की तरफ देख रहे हैं। इसलिए यह कहना पूरी तरह से सुरक्षित है कि आने वाले दिनों में भारत में न्यूक्लियर मेडिसिन में विशेषज्ञ लोगों की भारी मांग होगी। चूंकि यह एक विशिष्ट क्षेत्र है इसलिए इसमें दक्षता हासिल करने के लिए समर्पण, जुनून के साथ-साथ पैसा और पेशेंस की भी जरूरत होती है।
एमबीबीएस के बाद डीआरएम (डिप्लोमा इन न्यूक्लियर मेडिसिन), एमडी, डीएनबी हासिल करने के लिए आप देश के कई महत्वपूर्ण मेडिकल संस्थानों में पढ़ाई कर सकते हैं। सबसे अच्छे संस्थानों में हैं –
– ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, एम्स, दिल्ली
वेबसाइट – www.aiims.edu
फोन नंबर : 011-26588500/26588900
– किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ
वेबसाइट – www.kgmcindia.edu
फोन नंबर : 0522-2257540
– पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़
वेबसाइट – www.pgimer.nic.in
फोन नंबर- 0172-2746018/2756565
– कस्तूरबा गांधी मेडिकल कॉलेज, मणिपाल
वेबसाइट – www.manipal.edu
फोन नंबर-080-41474392/93

Tuesday, June 6, 2017

ऑक्यूपेशनल थैरेपी में करियर

अगर आपकी रूचि मेडिकल क्षेत्रों में है और अगर आप इसमें कुछ हटकर करना चाहते हैं तो ऑक्यूपेशनल थैरेपी कोर्स कर सकते हैं। ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्टों की मांग भारत में तेजी से बढ़ रही है, लेकिन प्रोफेशनल्स की बेहद कमी है। यही वजह है कि इस पेशे में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं।

जानिए, ऑक्यूपेशनल थैरेपी के बारे में ::::::::
ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट का काम मुख्य तौर पर अपंग लोगों को दिनचर्या के कामों को करने के लिए प्रशिक्षण देना होता है। वे मरीजों को भावनात्मक रूप के साथ-साथ शारीरिक तौर पर भी इस बात के लिए संकल्पित कराते हैं कि कैसे वे लोग एक स्वतंत्र और संतुष्ट जीवन जी सकते हैं। एक ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट का काम मरीज के कार्यकलापों और उसकी प्रोन्नति का पूरा ट्रैक रिकॉर्ड मेंटेन करने का होता है।
ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट के लिए जरूरी है कि वो बहुत ही धैर्यवान हो और अपने मरीज के साथ एक विश्वसनीय और मजबूत भावनात्मक रिश्ता बना सके। इनोवेटिव होना उसके लिए सोने पर सुहागे जैसा है। ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट्स की भूमिका में अब वैश्विक स्तर पर बड़ा परिवर्तन आया है। वे अब लोगों के जीवन में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं, सेल्फ-केयर व्यवहार से लेकर कर्मचारी परिस्थिति विज्ञान तक।
मेडिकल और पैरामेडिकल प्रोफेशन की ही तरह ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट्स के लिए भी हॉस्पिटल्स, ऑर्थोपेडिक्स विभाग, रिहेबिलिटेशन सेंटर्स, स्पेशल स्कूल्स, हेल्थकेयर सेंटर्स आदि में रोजगार की संभावानाएं हैं।
एक क्वालिफाइड ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट बनने के लिए आपको बीपीटी या बीओटी की बैचलर डिग्री या अनिवार्य विषय में डिप्लोमा करना होता है। इन कोर्सों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता फिजिक्स-कैमिस्ट्री-मैथ्स के साथ बारहवीं उत्तीर्ण करना है।
भारत से लेकर अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया समेत तमाम देशों में ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट की खूब डिमांड है। हालांकि विदेशों में उनसे दो साल के अनुभव की मांग की जाती है। वैसे ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट को सेलरी भी अच्छी मिलती है, पर ये अपनी प्रैक्टिस भी शुरू कर सकते हैं।


ऑक्यूपेशनल थैरेपी शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम लोगों को उनकी रोजाना की जिंदगी को सुगम बनाने में मदद करती है। इसकी जरूरत ऑटिज्म या इमोशनल डिसऑर्डर के शिकार हुए बच्चों और न्यूरोलॉजिकल या साइकेट्रिक डिसऑर्डर से प्रभावित युवाओं को होती है।

संबंधित कोर्सेज :::::::

इस कोर्स में पढाई करने के लिए स्टूडेंट्स का साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास होना जरूरी है। इस कोर्स में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया जा सकता है। इस कोर्स में एंट्रेस एग्जाम के द्वारा ही स्टूडेंट्स को एडमिशन मिलता है।

नौकरी की असीम संभावनाएं :::::::::

ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट को सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों, मेंटल हेल्थ केयर सेंटर, रिहेबिलेशन सेंटर, एडल्ट डे केयर में नौकरी मिल सकती है। थैरेपिस्ट या कंसल्टेंट के रूप में अगर आप चाहें तो अपना क्लीनिक भी खोल सकते हैं।

यहां से करे कोर्स ::::::::::


- राष्ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, कटक
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड एजुकेशन रिसर्च, पटना
- इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर
- दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, दिल्ली

Sunday, June 4, 2017

वुड साइंस-टेक्नोलॉजी में कॅरियर

नई दिल्ली. वुड साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर के चमकीले अवसर हैं। वर्तमान में इस क्षेत्र में भारी मांग है तथा यह मांग भविष्य में भी बने रहने की संभावना है। कई संस्थानों में इससे संबंधित संचालित स्पेशलाइज्ड कोर्स कर वुड साइंस के क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है। इस बारे में और विस्तार से जानिए।
 
काष्ठ उत्पाद यानी वुड प्रोडक्ट्स हमारी विविध आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। अगर हम अपने आस-पास की वस्तुओं पर नजर डालें तो पाएंगे कि कार्य के औजार, खिलौने, मकान, फर्नीचर, पुस्तकें और समाचारपत्र आदि अनेक वस्तुएं काष्ठ द्वारा बनाई जाती हैं। ऐसी सूची में प्लाइवुड पार्टिकल बोर्ड, फाइबर बोर्ड, पैलेट्स और अनेक अन्य औद्योगिक एवं उपभोक्ता सामग्री भी शामिल हैं और इस सूची में अन्य ढेरों नाम और सम्मिलित किए जा सकते हैं।
 
हमारे देश में लकड़ी के  कुल योगदान में से लगभग 40 प्रतिशत भाग कागज बनाने में प्रयुक्त होता है। टिंबर प्रोसेसिंग उद्योग की प्राइमरी वुड प्रोसेसिंग (सॉ मिलिंग पैनल्स तथा लुगदी एवं कागज) और वानिकी व्यवसायों में रोजगार देने में अहम भूमिका है। इनमें से अधिकांश व्यवसाय लघु तथा मझोले उद्यम हैं। काष्ठ एवं इससे बने विविध उत्पादों का उपयोग बढ़ने से काष्ठ उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं। 

मेन कोर्सेस-एंट्री
भारत में  आईसीएफआरई के अधीन वन अनुसंधान संस्थान विश्वविद्यालय, देहरादून काष्ठ प्रौद्योगिकी में मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम चलाता है। काष्ठ प्रौद्योगिकी में स्नातकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रम में चयन के लिए कोई भी स्टूडेंट, विज्ञान/वानिकी/कृषि/बुनियादी विज्ञान आदि में स्नातक योग्यता पूरी करने के बाद आवेदन कर सकता है। स्नातकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रम में चयन अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। इसी तरह काष्ठ विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईडब्ल्यूएसटी), बैंगलुरु, भारतीय प्लाइवुड उद्योग अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (आईपीआईआरटीआई), बैंगलुरु, केंद्रीय लुगदी एवं कागज अनुसंधान संस्थान, (सीपीपीआरआई) सहारनपुर में पीएचडी तथा अनुसंधान पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी) जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा, नई दिल्ली से संबद्ध है, के द्वारा संचालित वानिकी कोर्स भी बहुत उपयोगी है। इसके अतिरिक्त काष्ठ प्रौद्योगिकी तथा समवर्गी विज्ञान में अध्येतावृत्तियां भी विभिन्न राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों/संगठनों द्वारा चलाई जाती हैं। 
 
कोर्स कंटेंट
बीएससी वानिकी में काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पढ़ाया जाने वाला एक अनिवार्य विषय है। इंजीनियरी, सामग्री विज्ञान तथा प्रसंस्करण, रसायन विज्ञान या विपणन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए काष्ठ विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी एक बहुत ही आकर्षक करियर है। यह एक ऐसा मल्टी डिसिप्लीनरी क्षेत्र है, जिसका प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से सीधा संबंध होने के साथ भौतिकी विज्ञान से भी गहरा जुड़ाव है। काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के स्नातक पाठ्यक्रम में एनाटॉमिकल, भौतिकी, रासायनिक तथा यांत्रिक संपत्तियों का ज्ञान शामिल होता है।
 
इसके अतिरिक्त छात्र व्यापक काष्ठ  प्रसंस्करण कार्यों, काष्ठ सीजनिंग, काष्ठ परिरक्षण, पुनर्निर्मित काष्ठ आधारित पैनलों, वन उत्पादों, गोंद, टिंबर इंजीनियरी तथा निर्माण, उत्पाद-डिजाइन तथा अवसंरचना, काष्ठ कार्य तथा परिष्करण और रासायनिक परिशोधन में भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। अपनी रुचि के  करियर के आधार पर छात्र किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में अतिरिक्त पाठ्यक्रमों का चयन करके काष्ठ का अपना ज्ञान और विस्तृत कर सकते हैं। कुछ विश्वविद्यालय काष्ठ इंजीनियरी में डिग्री को अपने इंजीनियरी पाठ्यक्रम के एक भाग के रूप में चलाते हैं। काष्ठ प्रौद्योगिकी से संबंधित सभी पहलू पाठ्यक्रमों में सम्मिलित किए जाते हैं। 
 
जॉब आॅप्शंस-इनकम
विनिर्माण, तकनीकी सेवा, अनुसंधान तथा विपणन ऐसे विभिन्न क्षेत्र हैं, जहां काष्ठ प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की जरूरत होती है। काष्ठ प्रौद्योगिकी में पीजी कैंडिडेट्स केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा वन विभागों में वैज्ञानिक, हस्तशिल्प संवर्धन अधिकारी, गुणवत्ता निरीक्षक तथा लॉगिंग अधिकारी के पदों पर भर्ती किए जाते हैं। ग्रामीण विकास से जुड़ी परियोजनाओं में काष्ठ प्रौद्योगिकी एक्सपर्ट लघु और कुटीर उद्योगों से संबंधित कार्यों के लिए परियोजना अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाते हैं। निजी क्षेत्र में ये व्यवसायी अपनी विशेषज्ञता के आधार पर काष्ठ आधारित उद्योगों, अनुसंधान एवं विकास कंपनियों में तकनीकी कार्मिक के रूप में नियुक्त होते हैं।
 
आजकल काष्ठ प्रौद्योगिक विशेषज्ञों को चारकोल उद्योग, काष्ठ निर्माण उद्योग, इंजीनियर्ड वुड या संयुक्त काष्ठ उद्योगों, सॉ मिलिंग तथा सॉ डाक्टरिंग, रेजिन तथा टर्पेंटाइन उद्योग एवं औधषीय पादप यूनिट, काष्ठ नमूना निर्धारण, लुगदी एवं कागज उद्योगों एवं अन्य काष्ठ उत्पाद आधारित उद्योगों में क्वालिटी कंट्रोलर तथा प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में भर्ती किया जाता है। इनके अतिरिक्त, नेट एग्जाम क्लीयर कर प्रोफेसर पद के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। काष्ठ विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मिलने वाले वेतन की तुलना देश में इंजीनियरों को दिए जाने वाले वेतन से की जा सकती है। 
 
प्रमुख संस्थान 
-इंदिरा गांधी कृषि विवि, रायपुर 
वेबसाइट: www.igau.edu.in
-भारतीय वन प्रबंधन संस्थान
वेबसाइट: : www.iifm.ac.in
-जेएलएन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, जबलपुर
वेबसाइट: www.jnkvv.org

Thursday, June 1, 2017

एडवेंचर स्पोर्टस में बनाएं करियर

क्या आपको साहसिक खेल पसंद है? अगर आप कुदरत के करीब रहना पसंद करते हैं तो एडवेंचर स्पोर्टस के क्षेत्र में आप करियर बना सकते हैं। घरेलू पर्यटन का विकास होने की वजह से एडवेंचर स्पोर्टस के पेशेवर खिलाड़ियों की मांग में भी कई गुना का इजाफा हुआ है। इसके अलावा नेशनल जियोग्राफिक और डिस्कवरी जैसे चैनल सामान्य यात्राओं की बजाय रोमांचक यात्राओं पर जाने वाले पर्यटकों को विशेष लाभ भी मुहैया कराते हैं।
क्या है एडवेंचर स्पोर्टस
एडवेंचर स्पोर्टस को एक्शन स्पोर्ट्स, एग्रो स्पोर्ट्स और एक्सट्रीम स्पोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह के खेलों में वो गतिविधियां (खेल संबंधी) आती हैं, जिनमें बड़े खतरे अंतर्निहित होते हैं। इन गतिविधियों में गति, उच्च स्तर के शारीरिक दमखम और विशेष कौशल की जरूरत होती है।
कई तरह के एडवेंचर स्पोर्ट्स
इन खेलों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है- एअर स्पोर्ट्स, लैंड स्पोर्ट्स और वॉटर स्पोर्ट्स। खेलों की इन श्रेणियों में ढेर सारे खेल शामिल हैं, इनमें से कुछ प्रमुख हैं-
एअर स्पोर्ट्स-  बंजी जंपिंग, पैराग्लाइडिंग, स्काई डाइविंग और स्काई सर्फिग आदि।
लैंड स्पोर्ट्स-  रॉक क्लाइम्बिंग, स्केट बोर्डिग, माउंटेन बाइकिंग, स्कीइंग, स्नो बोर्डिंग और ट्रैकिंग आदि।
वाटर स्पोर्ट्स-  स्कूबा डाइविंग, व्हाइट वाटर राफ्टिंग, कायकिंग, केनोइंग, क्िलफ डाइविंग,स्नॉर्केलिंग और याट रेसिंग आदि।
पेशेवरों का काम
एडवेंचर स्पोर्टस के क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों का काम भौगोलिक दृष्टि से उन क्षेत्रों की तलाश करना होता है जहां एडवेंचर स्पोर्ट्स की संभावना हो। इसके साथ ही वह उस क्षेत्र में खेल से जुड़े जोखिमों का आकलन भी करते हैं। इन कार्यों को करने के बाद वह खेल गतिविधियों को संचालित करने का प्रारूप तैयार करते हैं और संभावित खतरों से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन की कार्ययोजना भी बनाते हैं। यह पेशा देखने में भले ही बेहद रोमांचक हो, लेकिन असल जिंदगी में यह काफी चुनौतीपूर्ण है। इसके पेशेवरों को हमेशा जोखिम उठाते हुए जिंदगी की महीन डोर के सहारे चलना पड़ता है। उन्हें कई बार घबराए हुए और कई बार उत्साही क्लाइंटों को संभालने की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ती है।
रोजगार के मौके
साहसिक खेल के क्षेत्र में सबसे ज्यादा रोजगार एडवेंचर स्पोर्ट्स कंपनियां देती हैं। हालांकि इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों के पास काम में बदलाव करके भी रोजगार और अपनी पेशेवर रुचि को बरकरार रखने का विकल्प होता है। वह स्कूलों के साथ मिलकर छात्रों के लिए आउटडोर एजुकेशन प्रोग्राम संचालित कर सकते हैं, तो पर्सनल ट्रेनर और कैजुअल टूर गाइड के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा वह अपनी निजी एडवेंचर स्पोर्ट्स कंपनी भी शुरू कर सकते हैं। कुछ लोग तो इस क्षेत्र में काम करने के लिए दुनिया की सैर करने का विकल्प भी चुनते हैं।
योग्यता
-एडवेंचर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में बतौर पेशेवर काम करने के लिए किसी विषय के साथ बारहवीं या बैचलर डिग्री प्राप्त होना पर्याप्त है। इस योग्यता के आधार पर एडवेंचर स्पोर्ट्स में डिप्लोमा या डिग्री पाठयक्रम संचालित करने वाले संस्थानों में प्रवेश लिया जा सकता है। इन संस्थानों में प्रशिक्षण पाठयक्रम पूरा करने के बाद आसानी से रोजगार प्राप्त किया जा सकता है।
-इसके अलावा शारीरिक रूप से मजबूत और स्वस्थ होना भी आवश्यक होता है।
-इस पेशे में जल आधारित खेलों के लिए तैराकी में निपुण होना जरूरी होता है।
-अंग्रेजी और किसी एक विदेशी भाषा में दक्ष होना भी इस पेशे में मददगार होता है।
ऐसे में अगर आपको भी साहसिक खेल का रोमांच पसंद है तो इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं

Monday, May 29, 2017

एथिकल हैकिंग में करियर

वचरुअल दुनिया का दायरा जिस तरह दिन-दुनी रात-चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है, आईटी (इफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) आधारित सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी परेशानी का सबब बन रही हैं। हर रोज दुनिया के किसी न किसी कोने में नेटवर्क, वेबसाइट और ई-मेल अकाउंट्स की सुरक्षा दांव पर लगी होती है। इंटरनेट पर साइबर अपराध के मामलों में चिंताजनक रफ्तार से वृद्धि देखी जा रही है
इन मामलों में किसी व्यक्ति या संस्था के कंप्यूटर सिस्टम में सेंध लगाकर संवेदनशील डाटा चुराने से लेकर पासवर्ड चोरी करने, भद्दे ई-मेल भेजने और ई-मेल अकाउंट को हैक करने जैसी घटनाएं शामिल होती हैं। इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों से सूचनाओं को अवैध ढंग से प्राप्त करने वालों को हैकर कहा जाता है। मगर जब यही काम कंप्यूटर सिस्टम के सुरक्षा उपायों को जांचने और उसे पुख्ता बनाने के उद्ेदश्य से किया जाता है, तो उसे एथिकल हैकिंग कहते हैं। इस कार्य को करने वाले पेशेवर एथिकल हैकर के नाम से जाने जाते हैं। साइबर अपराधों की बढ़ती तादाद के बीच मूल्यवान इंफॉर्मेशन सिस्टम की सुरक्षा के लिए एथिकल हैकरों की मांग जोर पकड़ रही है। इस कारण यह पेशा नौकरी की आकर्षक संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।

एथिकल हैकर का काम

इन पेशेवरों को व्हाइट हैट्स या पेनिशन टेस्टर के नाम से भी जाना जाता है। कंप्यूटर और नेटवर्क से संबंधित तकनीकों में इन्हें विशेषज्ञता प्राप्त होती है।

इनका काम अपने नियोक्ता (कंप्यूटर सिक्योरिटी उत्पाद बनाने वाली कंपनी) के लिए किसी निर्धारित कंप्यूटर सिस्टम पर हमला करना होता है, ताकि सिस्टम की उन कमियों का पता लगाया जा सके, जिन्हें तलाशकर हैकर साइबर अपराधों को अंजाम देते हैं।

एक प्रकार से एथिकल हैकर भी हैकरों (साइबर अपराधी) जैसा ही काम करते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य किसी कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने की बजाए उसे पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाना होता है। इंटरनेट पर बढ़ती निर्भरता के कारण एथिकल हैकर आईटी सिक्योरिटी इंडस्ट्री की अहम जरूरत बन गए हैं। यह एक चुनौतीपूर्ण पेशा है, जो जरूरत पड़ने पर 24 घंटे काम में जुट रहने की भी अपेक्षा रखता है। एथिकल हैकर को हमेशा खुद को कंप्यूटर सिस्टम से संबंधित नई तकनीकों से अपडेट रखना होता है, ताकि वह नई चुनौतियों का तेजी से हल तलाश सकें।

पर्याप्त हैं रोजगार के अवसर
•फिलहाल देश में एथिकल हैकरों की काफी कमी है। इसलिए कई-कई कंपनियां अपने नेटवर्क में मौजूद खामियों को खोजने के लिए एक ही पेशेवर की मदद लेती हैं। इन पेशेवरों की सरकारी क्षेत्र के संस्थानों में भी काफी पूछ है। सेना, पुलिस बलों (सीबीआई और एनआईए शामिल), फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं और रक्षा अनुसंधान संगठनों में विशेष रूप से एथिकल हैकरों की मदद ली जाती है। जासूसी एजेंसियों में भी इनके लिए काफी अवसर हैं।

 योग्यता
•    इस पेशे में आने के लिए कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का अच्छा ज्ञान जरूरी होता है। इसलिए कंप्यूटर साइंस, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी या कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री का होना आवश्यक है। शैक्षणिक योग्यता के साथ उ, उ++ और ढ83ँल्लआदि प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम मसलन विंडोज या लिनक्स की जानकारी का होना भी जरूरी है।

•    उपलब्ध पाठय़क्रम
•    सर्टिफिकेट कोर्स इन साइबर लॉ
•    सीसीएनए सर्टिफिकेशन
•    सर्टिफाइड एथिकल हैकर
•    सर्टिफाइड इंफॉर्मेशन सिस्टम सिक्योरिटी प्रोफेशनल
•    एमएससी साइबर फॉरेंसिक्स एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी
•    पीजी डिप्लोमा इन डिजिटल एंड साइबर फॉरेंसिक्स
•    पीजी डिप्लोमा इन साइबर लॉ
•    पीजी डिप्लोमा इन आईटी सिक्योरिटी
•    एडवांस डिप्लोमा इन एथिकल हैकिंग
•    संबंधित संस्थान
•    एनआईईएलआईटी
•    सीईआरटी
•    इंडियन स्कूल ऑफ एथिकल हैकिंग
•    तिलक महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी
•    इन्नोबज नॉलेज सॉल्यूशन्स प्रा. लि.
•    आईएमटी गाजियाबाद
•    इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी

Thursday, May 25, 2017

ड्रामा मे करियर

अभिनय, निर्देशन, डिजाइन या थियेटर से जुड़े अन्य क्षेत्रों मे करियर बनाने का शौक यदि आप भी अपने मन में पाले बैठे हैं और अपने इस शौक को पेशेवर ट्रेनिंग के जरिए निखारना चाहते हैं तो इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के डिप्लोमा इन ड्रमैटिक आर्ट्स में आवेदन कर सकते हैं। इस संस्थान में आवेदन वेबसाइट से फॉर्म डाउनलोड करके भी किया जा सकता है और पोस्ट से मंगवाकर भी। इस कोर्स में आवेदन की अंतिम तिथि 8 मई 2015 रखी गई है। चयन प्रक्रिया में ऑडिशन, वर्क शॉप और फिटनेस टैस्ट होगा।
एनएसडी दिल्ली
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत आने वाला एक स्वायत्त संस्थान है। इसकी स्थापना संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष 1959 मे की थी। थियेटर की विभिन्न विधाओं में कलाकारों के हुनर को प्रशिक्षण के जरिए निखारने वाले इस संस्थान से फिल्म और थियेटर जगत की कई दिग्गज हस्तियां प्रशिक्षण ले चुकी हैं। यह संस्थान नई दिल्ली में स्थित है। थिएटर ट्रेनिंग में इस संस्थान का विश्वभर में एक अहम स्थान है। आप भी यहां थिएटर ट्रेनिंग लेकर अपना कौशल निखार सकते हैं और अच्छा करियर बना सकते हैं।
क्या है योग्यता
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के तीन वर्षीय कोर्स में वे लोग आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने भारत से या विदेश से ग्रेजुएशन की हो और कम से कम छह माह तक थिएटर प्रोडक्शंस में भागीदारी की हो और हिंदी-अंग्रेजी की जानकारी हो। 1 जुलाई 2015 को आवेदक की उम्र कम से कम 20 साल और अधिक से अधिक 30 साल हो। एससी/ एसटी को इसमें पांच साल की छूट प्राप्त है।
कैसे होगा चयन
एनएसडी के इस कोर्स में प्रवेश के इच्छुक आवेदकों के एप्टीट्यूड और टैलेंट की परख विशेषज्ञों की एक कमेटी करेगी। प्रवेश के इच्छुक कैंडिडेट्स को सबसे पहले एक प्रीलिमिनरी टेस्ट या ऑडिशन देना होगा। यह ऑडिशन/टेस्ट देशभर मे कुल छह केंद्रों पर अलग-अलग दिन करवाया जाएगा। गुवाहाटी में यह टेस्ट 23 मई को होना है। कोलकाता में इसकी तारीख 25 व 26 मई है। बेंगलुरू में यह टैस्ट 28 मई को, मुंबई में 2 और 3 जून को होगा। लखनऊ में यह टेस्ट 5 और 6 जून को और दिल्ली में 8,9,10 व 11 जून को होगा। इस टेस्ट को पास करने वाले आवेदकों को फिर 16 जून से 20 जून तक चलने वाली पांच दिवसीय वर्कशॉप में हिस्सा लेना होगा। इसके बाद इनके अंतिम चयन पर फैसला लिया जाएगा। एडमिशन के लिए चयनित लोगों का फिजिकल फिटनेस की जांच के लिए मेडिकल टेस्ट भी करवाया जाएगा। इसमें उत्तीर्ण होने पर ही एडमिशन दिया जाएगा।
संस्था के संसाधन
एनएसडी से कोर्स करने वाले लोगों को इस संस्थान के उत्कृष्ट संसाधनों के प्रयोग के साथ-साथ यहां के रचनात्मक माहौल में खुद को ज्यादा से ज्यादा निखारने का अवसर मिलता है। यह काफी उपयोगी साबित होता है। यहां के स्टूडेंट्स को थिएटर और फिल्म क्षेत्र की विभिन्न हस्तियों के संपर्क में आने का अवसर तो मिलता ही है, साथ ही यहां की वीडियो-ऑडियो लाइब्रेरी, परफॉर्मिग स्पेस आदि की मदद से वे अपने खास कौशल को ज्यादा रचनात्मक रूप दे पाते हैं। संस्थान में आयोजित होने वाले विभिन्न महोत्सवों में उन्हें अपने कौशल को मंच पर पेश करने का अवसर भी मिलता है। एनएसडी के इस तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश पाने वाले लोगों को प्रतिमाह 6000 रूपए का स्टाइपेंड भी दिया जाता है, ताकि वे अपने अकादमिक और अन्य खर्चे आसानी से चला सकें।
कैसे लें फॉर्म
आवेदन के लिए फॉर्म http://nsd.gov.in/ से डाउनलोड करें। संस्थान के पते पर 225 रूपए का डीडी या पे ऑर्डर भेजकर फॉर्म मंगवा भी सकते हैं। फॉर्म भरकर भेज रहे हैं तो The Director, National School of Drama, New Delhi के पक्ष में 150 रूपए का डीडी भेजें।
फॉर्म भेजने का पता
डाउनलोड किए हुए फॉर्म को पूरा भरकर संस्थान के पते पर आठ मई तक पहुंचाना है। फॉर्म के लिफाफे में 150 रूपए का डिमांड ड्राफ्ट या पे ऑर्डर होना जरूरी है, नहीं तो फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। फॉर्म इस पते पर भेजना है-
Dean Academics, National School of Drama, Bahawalpur House, Bhagwandas Road, New Delhi - 110001
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