Tuesday, July 11, 2017

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस में करियर

एविएशन का नाम आते ही आसमान में उड़ने का मन करता है लेकिन यदि आप बनाना चाहते हो हो एविएशन में अपना करियर तो आप कहाँ पर अपनी लाइफ बना सकते हो। एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) में हो रहे लगातार विस्तार से रोजगार के अवसरों में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में बहुत से अवसर हैं कई लोग सोचते हैं केवल पायलट या एयर होस्टेस तक ही एविएशन में जॉब सीमित हैं,  लेकिन ऐसा कतई नही है क्योंकि इनके इलावा भी आप एविएशन में अपना करियर बना सकते हो। इसी लाइन में में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर (AME) भी बहुत अच्छा विकल्प है।

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर की कार्य प्रकृति कैसी है उसका क्या काम होता है: किसी भी जहाज की तकनीकी जिम्मेदारी एएमई के ऊपर होती है। हर उड़ान के पहले एएमई जहाज का पूरी तरह से निरीक्षण करता है और सर्टिफिकेट जारी करता है कि जहाज उड़ान भरने को तैयार है। इस काम के लिए उसके पास पूरी तकनीकी टीम होती है। कोई भी विमान एएमई के फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना उड़ान नहीं भर सकता। गौरतलब है कि एक हवाईजहाज के पीछे करीब 15-20 इंजीनियर काम करते हैं। इसी से इनकी जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता है।

कैसे बन सकते हो आप एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बन सकते हो: जैसे की पायलट बनने के लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है वैसे ही एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनने के लिए भी लाइसेंस लेना पड़ता है। यह लाइसेंस डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन द्वारा प्रदान किया जाता है। कोई भी संस्थान, जो इससे संबंधित कोर्स कराता है, उसे भारत सरकार के विमानन मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले डीजीसीए से इसके लिए अनुमति लेनी होती है। जो इंस्टिट्यूट इससे मान्यता प्राप्त हैं उनसे भी आप ये लाइसेंस हासिल कर सकते हैं।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनने के लिए क्या शैक्षणिक योग्यता की आवश्कयता होनी चाहिए: जो विद्यार्थी इस कोर्स के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथेमेटिक्स विषयों की पढ़ाई जरूरी है। पीसीएम से 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग से संबंधित पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते हैं। कोर्स के दौरान मैकेनिकल इंजीनियरिंग और वैमानिकी की विभिन्न शाखाओं के बारे में जानकारी दी जाती है।
एविएशन सेक्टर में कहाँ मिलेंगे अवसर: ऐसे तकनीकी प्रोफेशनल्स के लिए देश-विदेश में सभी जगह मौके हैं। एयर इंडिया, इंडिगो, इंडियन एयरलाइन्स, जेट एयरवेज, स्पाइस जेट, गो एयर जैसे एयरलाइंस में तो मौके मिलते ही हैं, इसके अलावा देश के तमाम हवाईअड्डों और सरकारी उड्डयन विभागों में भी रोजगार के बेहतरीन अवसर उपलब्ध होते हैं। भारत में ही करीब 450 कंपनियां हैं, जो इस क्षेत्र में रोजगार प्रदान करती हैं। एएमई का शुरुआती वेतन 20-30 हजार हो सकता है, जिसमें अनुभव और विशेष शिक्षा के साथ बढ़ोतरी होती जाती है। इसके साथ-2 आप विदेशी या प्राइवेट कंपनियो जो प्राइवेट एयरक्राफ्ट की सुविधा उपलब्ध कराती उनमे भी आप अपना करियर चुन सकते हो
देश में कौन कौनसे मुख्य संस्थान हैं जहाँ पर एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर के लिए कोर्स किया जा सकता है: जो संस्थान संबंधित कोर्स कराने का इच्छुक होता है, उसको डीजीसीए से मान्यता लेनी होती है। ऐसे कुछ प्रमुख संस्थान हैं-
  • जेआरएन इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
  • भारत इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स, पटना एयरपोर्ट, पटना
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स साइंस, कोलकाता
  • एकेडमी ऑफ एविएशन इंजीनियरिंग, बेंगलुरु
  • आंध्र प्रदेश एविएशन एकेडमी, हैदराबाद

Sunday, July 9, 2017

पोषाहार विज्ञान में करियर

पोषाहार विज्ञान में विज्ञान के ऑनर्स बैचलर

पोषाहार विज्ञान वास्तव में एक अंतःविषय प्रकृति के अध्ययन के एक रोमांचक और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। स्वास्थ्य और रोग में अपनी भूमिका पर पोषण के प्रभाव को समझना (पोषक तत्व आवश्यकताओं और उपयोग) शामिल चयापचय की प्रक्रिया का ज्ञान पर आधारित है, में एकीकृत सामाजिक और व्यवहार कारकों में से खाद्य पदार्थों के रसायन शास्त्र (खाद्य संरक्षण, खाद्य उत्पादन) और की उचित पोषण के माध्यम से इष्टतम स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों के विचार।

प्रमुख कार्यक्रम

पोषाहार विज्ञान में एक मेजर को प्राप्त करने के लिए, छात्र विज्ञान की एक चार साल ऑनर्स बैचलर (Hon.B.Sc.) के लिए आवश्यक 20 पाठ्यक्रमों में से आठ को परिभाषित करता है, जो अध्ययन के एक कार्यक्रम इस प्रकार है। कार्यक्रम में परिभाषित नहीं अन्य पाठ्यक्रमों के लिए, छात्र व्यक्तिगत रुचि और कैरियर के लक्ष्यों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, पोषण जैव रसायन में एक स्नातक की डिग्री का पीछा पर एक छात्र के इरादे अधिक उपयुक्त अर्थशास्त्र या व्यवसाय प्रशासन में पाठ्यक्रम मिल सकता है भोजन के विपणन पहलुओं में रोजगार की आशंका है, जो एक छात्र है, जबकि जैव रसायन पाठ्यक्रम पर जोर देना होगा। उपयुक्त पाठ्यक्रम के लिए देख छात्र चार साल की डिग्री नृविज्ञान, जैव रसायन, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल, मानविकी, शरीर विज्ञान और जूलॉजी विभाग की कला और विज्ञान कैलेंडर लिस्टिंग के संकाय की जांच करनी चाहिए पूरा करने के लिए।

प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम

पोषाहार विज्ञान विभाग प्रथम वर्ष के स्तर पर किसी भी पाठ्यक्रम की पेशकश नहीं करता है।

पहले साल के लिए सलाह

  • अनुकूलन और जैव विविधता और जैव 130H - जैव 120H आण्विक और कोशिका जीव विज्ञान, और प्रथम वर्ष रसायन विज्ञान: प्रथम वर्ष जीव विज्ञान लेना चाहिए पोषाहार विज्ञान का अध्ययन करने में रुचि रखते हैं जो छात्र CHM 138H1 - इंट्रोडक्टरी कार्बनिक रसायन विज्ञान मैं और एच एम 139H1 - रसायन विज्ञान: भौतिक सिद्धांतों (दो आधा पाठ्यक्रम) या एच एम 151Y1 - रसायन विज्ञान: आण्विक विज्ञान। हमारे परिचयात्मक कोर्स (NFS के 284H1 - मूल मानव पोषण) किसी भी प्रथम वर्ष के किसी और चीज की जरूरत नहीं है और हर शब्द (पतन, सर्दी, गर्मी) की पेशकश की है।

करियर

बुनियादी या नैदानिक ​​पोषण अनुसंधान, शिक्षण, स्वास्थ्य संवर्धन, पोषण परामर्श या समुदाय पोषण में करियर एक और अधिक उन्नत डिग्री (एमएससी, पीएचडी या MHSc) की आवश्यकता होती है। पोषण भी दवा या दंत चिकित्सा में एक और पेशेवर डिग्री के लिए एक अच्छा आधार है।
डायटेटिक्स भी पोषण में कई बीएससी कार्यक्रमों के बाद एक लोकप्रिय कैरियर है, हालांकि, कृपया ध्यान दें, टी यू में पोषाहार विज्ञान कार्यक्रम के इस विकल्प प्रदान संरचित नहीं है।

प्रवेश सूचना

  • सेंट जॉर्ज परिसर में जीवन विज्ञान में प्रवेश के वर्ग से लागू करें
  • अंग्रेजी और गणित और वैक्टर सहित छह ग्रेड 12 यू या एम पाठ्यक्रम, आवश्यक हैं
  • जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान में वरिष्ठ उच्च विद्यालय क्रेडिट प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम के लिए आवश्यक हैं
  • वरिष्ठ उच्च विद्यालय भौतिकी तैयारी की सिफारिश की है
  • ओंटारियो के बाहर के छात्र समकक्ष वरिष्ठ उच्च विद्यालय क्रेडिट होनी चाहिए

Wednesday, July 5, 2017

फार्माकोविजिलेंस में करियर

बचपन से मेडिसीन की पढ़ाई का सपना था पर सफलता नहीं मिलने की वजह से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पाए तो निराश होने की कोई बात नहीं. अब आपके पास एक ऐसा ऑप्‍शन है जो आपके अधूरे सपने को पूरा कर सकता है. हालांकि इस कोर्स को करने के बाद आप एमबीबीएस की डिग्री तो नहीं पा सकेंगे लेकिन एक डॉक्टर का फर्ज जरूर निभा सकेंगे.
हम यहां जिस कोर्स की बात कर रहे हैं उसका नाम है- फार्माकोविजिलेंस. दरअसल, दवाइयों से होने वाले किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट की पहचान, आकलन और बचाव के लिए फार्माकोलॉजिकल साइंस की मदद ली जाती है ताकि दवाइयों को ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी बनाया जा सके.

अगर आपकी रुचि मेडिकल के क्षेत्र में है तो यह कोर्स आपके लिए ठीक रहेगा. इसके अलावा लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग और सुरक्षित रखने की भावना रखने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतर करियर ऑप्शन है.
फार्माकोविजिलेंस का संबंध दवाइयों की उपलब्धता, डिस्ट्रीब्यूशन, पहुंच, इस्तेमाल और इससे जुड़ी दूसरी समस्‍याओं से भी है. इस फील्‍ड में विदेशों में भी नौकरियों की संभावनाएं हैं.
कोर्सेज:
सर्टिफिकेट इन फार्माकोविजिलेंस
डिप्लोमा इन फार्माकोविजिलेंस
विषय:
बेसिक प्रिंसिपल ऑफ फार्माकोविजिलेंस
रेगुलेशन इन फार्माकोविजिलेंस
फार्माकोविजिलेंस इन क्लिनिकल रिसर्च
ड्रग रिएक्शन
मैनेजमेंट ऑफ फार्माकोविजिलेंस डाटा
रिस्क मैनेजमेंट इन फार्माकोविजिलेंस
फार्माकोइपिडेमियोलॉजी
योग्यता:
कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, जेनेटिक्स और बायोटेक से ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट या फार्मेसी और मेडिसिन में ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट.
चयन प्रक्रिया:
छात्रों का चयन एंट्रेंस टेस्ट, पर्सनल इंटरव्यू और स्क्रीनिंग टेस्ट पर आधारित होता है.
कहां मिलेगी नौकरी:
फार्माकोविजिलेंस से संबंधित कोर्स करने के बाद ग्लैक्सो, सन फार्मा, फाइजर, सिप्ला, निकोलस पिरामल जैसी फार्मास्युटिकल कंपनियों में नौकरी मिल सकती है. विदेशी फार्मा कंपनियां भी इस कोर्स को करने वाले भारतीय छात्रों को अच्छा पैकेज ऑफर करते हैं.
वेतन:
इस फील्ड में शुरुआत में 15 से 20 हजार रुपये मिलते हैं. वहीं, कुछ साल का अनुभव हासिल करने के बाद 30 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह तक मिल सकते हैं
कहां से करें कोर्स:
इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल रिसर्च, नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, अहमदाबाद, हैदराबाद
वेबसाइट: www.icriindia.com
आईसीबीआईओ क्लीनिकल रिसर्च, बेंगलुरू
वेबसाइट: www.icbio.org
एम्पावर स्कूल ऑफ हेल्थ, दिल्ली
वेबसाइट: www.empower.net.in
आईडीडीसीआर, हैदराबाद
वेबसाइट: www.iddcr.com
जीआईटीएस एकेडमी, बेंगलुरू
वेबसाइट: www.gitsacademy.com
एकेडमी ऑफ क्लीनिकल रिसर्च एंड फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट, कोलकाता
महाराजा इंस्टीट्यूट मेडिकल साइंसेज, आंध्रप्रदेश
वेबसाइट: www.mimsvzm.org

सिमोजेन इंडिया
वेबसाइट: www.symogen.net

Sunday, July 2, 2017

वनस्पति में करियर

पौधे और फूल न केवल हमारे उद्यानों में सुंदरता फैलाते हैं और हमारे जीवन को ताजगी देते हैं बल्कि हमारी बुनियादी आवश्यकताओं तथा औषधियों के लिए महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक सामग्रियों के रूप में कार्य करते हैं। पौधे ऐसे रासायनिक कारखाने होते हैं जो मनुष्य के लिए उपयोगी सभी प्रकार के उत्पाद देते हैं। भोजन के अतिरिक्त पौधे कागज, भवन सामग्री, द्रव्यों, गोंद, कपड़ों, औषधियों और कई अन्य उत्पादों के लिए कच्चा माल देते हैं। उदाहरण के लिए एलोवेरा पौधा क्रीम तथा चिकित्सा द्रव्यों में प्रयोग में लाया जाता है। इन सब बातों का अध्ययन वनस्पति विज्ञान में किया जाता है। वनस्पति विज्ञान में वनस्पति जगत में पाए जाने वाले सब पेड़-पौधों का अध्ययन होता है। जीव विज्ञान का यह एक प्रमुख अंग है। दूसरा प्रमुख अंग प्राणी विज्ञान है। सभी जीवों को जीवन निर्वाह करने, वृद्धि करने, जीवित रहने और जनन के लिए भोजन या ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। यह ऊर्जा सूर्य से प्राप्त होती है। सूर्य में परमाणु के विखंडन या तरंगों के रूप में चलकर यह ऊर्जा पृथ्वी पर आती है। केवल पौधों में ही इस ऊर्जा के ग्रहण करने की क्षमता विद्यमान है। पृथ्वी के अन्य सब प्राणी पौधों से ही ऊर्जा प्राप्त करते हैं। अतः विज्ञान में वनस्पति के अध्ययन का विशिष्ट और बड़े महत्त्व का स्थान है। प्रमुख शिक्षण संस्थान
* कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर
* हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी, शिमला
* नौणी विश्वविद्यालय, सोलन (हिप्र)
* अमरावती विश्वविद्यालय, अमरावती
* इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद
* आंध्र विश्वविद्यालय वाल्टेयर, विशाखापट्टनम
* गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर (पंजाब)
* अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
* लखनऊ यूनिवर्सिटी, उत्तरप्रदेश
* कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र
* जम्मू यूनिवर्सिटी, जम्मू
शैक्षणिक योग्यता
साइंस संकाय में बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषयों के साथ दस जमा दो उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। स्नातक कोर्स के लिए इस विषय की स्ट्रीम के छात्र दाखिला ले सकते हैं। बीएससी, एमएससी, एमफिल के बाद पीएचडी की उपाधि भी हासिल की जा सकती है।
वेतनमान
वनस्पति विज्ञान में सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। सरकारी क्षेत्र में अध्यापन या शोध के क्षेत्र में सरकारी मानकों के अनुसार वेतन मिलता है। अध्यापन और शोध के क्षेत्र में आरंभ में लगभग 30 हजार से वेतन शुरू होता है। इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर  में  भी कंपनियां अच्छे वेतनमान पर इस फील्ड के एक्सपर्ट्स को रखती हैं।
उत्पत्ति और विकास
वनस्पति जगत के सदस्य अत्यंत सूक्ष्म से लेकर अत्यंत विशालकाय तक होते हैं। इसकी शुरुआत शैवाल पौधे के अध्ययन से शुरू होती है। यह सबसे साधारण और प्राचीनतम वनस्पति है। यह अपना भोजन स्वयं बनाता है। आज कई प्रकार के गूढ़ आकार के भी शैवाल पाए जाते हैं। शैवालों से ही पृथ्वी पर के अन्य सब पौधों के उत्पन्न होने का अनुमान वैज्ञानिकों ने लगाया है। वनस्पतियों के अध्ययन में सबसे पहला कदम पेड़ पौधों का नामकरण और वर्गीकरण है। जब तक उनके नाम का पता न लगे और वे पहचान में न आएं, तब तक उनके अध्ययन का कोई महत्त्व नहीं है। अतः वनस्पति विज्ञान का सबसे पुराना और सबसे अधिक महत्त्व का विभाग वर्गिकी या वर्गीकरण विज्ञान है। इसमें केवल नाम का ही पता नहीं लगता, अपितु पेड़ पौधों के पारस्परिक संबंध का अध्ययन कर उन्हें विभिन्न समूहों में रखा भी जाता है।
अवसर कहां-कहां
विश्वविद्यालयों, कालेजों से वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में स्नातक योग्यता प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए कई प्रकार के रोजगार उपलब्ध हैं। जैसे कि ब्रीडर के रूप में, पार्क रेंजर, पादप रोग विज्ञानी, पारिस्थितिकीविद, प्रोफेसर, अध्यापक, कृषि परामर्शदाता, अनुसंधानकर्ता, उद्यान विज्ञानी, नर्सरी प्रबंधक।
दीर्घकालीन करियर की संभावना
व्यापक शिक्षा तथा अनुभव के आधार पर वनस्पति विज्ञानी बना जा सकता है। उसके बाद किसी वनस्पति विज्ञानी के रूप में उन्नति की संभावना सामान्यतः उसकी विश्वविद्यालय डिग्री पर निर्भर होती है। व्याख्यात्मक प्रकृति विज्ञानी, पर्यावरण सुधार तकनीशियन अथवा अनुसंधान सुविधाओं में प्रयोगशाला तकनीशियन के रूप में कार्य किया जा सकता है। कई व्यक्ति पर्यावरण, बागबानी या कृषि से जुड़े क्षेत्रों में परामर्शदाता के रूप में कार्य करते हैं जबकि अन्य व्यक्ति अनुसंधान तथा अध्यापन के क्षेत्र में कार्य करने का निर्णय भी ले सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षक के साथ रोजगारपरक भी
शहरी इलाकों में तबदील हो रहे गांव हमारे भविष्य के लिए सवाल बन गए हैं। जहां पर्यावरण को लेकर कई बड़ी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं, वहीं शहरी इलाकों में तबदील हुए गांवों में युवा कृषि को छोड़कर रोजगार तलाश कर रहे हैं। लेकिन रोजगार के अवसर इतने अधिक नहीं हैं कि युवाओं का भविष्य संवर सके। इसी बीच वनस्पति विज्ञान जहां पर्यावरण को बेहतर करने के लिए एक अहम कदम है, वहीं युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है।
स्नातक योग्यता डिग्री वालों के लिए अवसर
निजी क्षेत्र- औषधि कंपनियां, नर्सरी, जैव प्रौद्योगिकी फर्में, खाद्य कंपनियां,  तेल उद्योग, फल उत्पादक, बीज कंपनियां, रसायन कंपनियां, कागज कंपनियां, सरकारी क्षेत्र- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय वन सेवा, कृषि।

Thursday, June 29, 2017

सोलर एनर्जी में बनाएं करियर

बिजली की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के घरेलू बजट को बिगाड़कर रख दिया है। ऐसे में सोलर एनर्जी लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प बनकर उभरी है। इसकी मदद से न केवल बिजली का बिल कम किया जा सकता है, बल्कि ग्रिड एनर्जी से निर्भरता भी घटाई जा सकती है। यह पर्यावरण और सेहत के लिए भी अनुकूल है। सोलर एनर्जी से चलने वाले प्रॉडक्ट्स की पूरी जानकारी दे रही हैं नेहा जैन :

क्या है सोलर एनर्जी
अभी तक सूरज की गर्मी में जहां कपड़े, पापड़ आदि ही सुखाए जाते थे, वहीं अब इससे बिजली की सप्लाई भी मुमकिन हो रही है। सोलर पैनल द्वारा सोलर एनर्जी को बिजली में बदल दिया जाता है। इसके लिए पैनल को छत पर रखा जाता है, जहां उस पर सूरज की सीधी धूप आती हो। गौरतलब है कि अपने देश में लगभग 250-300 दिन सूरज निकलता है जिसके कारण यहां सोलर एनर्जी की बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं।
जयपुर। सोलर एनर्जी सेक्टर में कॅरियर बनाने के इच्छुक लोग जामिया मिलिया इस्लामिया के बैचलर ऑफ वोकेशनल सोलर एनर्जी कोर्स में आवेदन कर सकते हैं। तीन वर्षीय इस कोर्स में स्टूडेंट के पास पहले या दूसरे साल भी पासआउट हो जाने का विकल्प होगा।
बैचलर ऑफ वोकेशनल सोलर एनर्जी कोर्स तीन साल का कोर्स है। इस कोर्स का प्रमुख उद्देश्य सोलर एनर्जी सेक्टर के विभिन्न उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप श्रमबल तैयार करना है। इस कोर्स के लिए आवेदकों का चयन मेरिट के आधार पर ही होगा। इसके लिए संस्थान की ओर से कोई भी एंट्रेंस एग्जाम आयोजित नहीं करवाया जाएगा।
कोर्स की अवधि 03 साल है, यह वोकेशनल डिग्री कोर्स। इसके लिए आवेदन करने की तिथि 30 सितंबर 2015 है।
- 50 फीसदी अंकों के साथ 12वीं पास, 12वीं में फिजिक्स व मैथ्स में 50-50 फीसदी अंक।
- सोलर एनर्जी इंडस्ट्री में एनएसक्यूएफ लेवल 4 सर्टिफिकेट
- एनएसक्यूएफ का लेवल 4 सर्टिफिकेट, लेकिन सोलर एनर्जी में वोकेशनल कोर्स के इच्छुक।
सीटें और फीस
जामिया के इस कोर्स में कुल 50 सीट्स हैं, जिनका वितरण विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप होगा। इस कोर्स के लिए वार्षिक तौर पर भरी जाने वाली फीस 10 हजार रूपए निर्घारित की गई है।
एप्लीकेशन फॉर्म
जामिया मिलिया इस्लामिया के बैचलर ऑफ वोकेशनल इन सोलर एनर्जी कोर्स में आवेदन के लिए संस्थान की वेबसाइट www.jmi.ac.in� से फॉर्म डाउनलोड करके भरें और इसके साथ 100 रूपए का डीडी बनवाएं।
यहां भेजें आवेदन
फॉ र्म, डीडी, क्वालीफाइंग एग्जाम व 10वीं की सेल्फ अटेस्टेड मार्क शीट की कॉपीज इस पते पर 30 सितंबर तक पहुंचा दें- Dept. of Physics, Faculty of Natural Sciences, Jamia Milia Islamia , New Delhi

Tuesday, June 27, 2017

वुड साइंस-टेक्नोलॉजी में कॅरियर

नई दिल्ली. वुड साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर के चमकीले अवसर हैं। वर्तमान में इस क्षेत्र में भारी मांग है तथा यह मांग भविष्य में भी बने रहने की संभावना है। कई संस्थानों में इससे संबंधित संचालित स्पेशलाइज्ड कोर्स कर वुड साइंस के क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है। इस बारे में और विस्तार से जानिए।
 
काष्ठ उत्पाद यानी वुड प्रोडक्ट्स हमारी विविध आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। अगर हम अपने आस-पास की वस्तुओं पर नजर डालें तो पाएंगे कि कार्य के औजार, खिलौने, मकान, फर्नीचर, पुस्तकें और समाचारपत्र आदि अनेक वस्तुएं काष्ठ द्वारा बनाई जाती हैं। ऐसी सूची में प्लाइवुड पार्टिकल बोर्ड, फाइबर बोर्ड, पैलेट्स और अनेक अन्य औद्योगिक एवं उपभोक्ता सामग्री भी शामिल हैं और इस सूची में अन्य ढेरों नाम और सम्मिलित किए जा सकते हैं।
 
हमारे देश में लकड़ी के  कुल योगदान में से लगभग 40 प्रतिशत भाग कागज बनाने में प्रयुक्त होता है। टिंबर प्रोसेसिंग उद्योग की प्राइमरी वुड प्रोसेसिंग (सॉ मिलिंग पैनल्स तथा लुगदी एवं कागज) और वानिकी व्यवसायों में रोजगार देने में अहम भूमिका है। इनमें से अधिकांश व्यवसाय लघु तथा मझोले उद्यम हैं। काष्ठ एवं इससे बने विविध उत्पादों का उपयोग बढ़ने से काष्ठ उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं। 

मेन कोर्सेस-एंट्री
भारत में  आईसीएफआरई के अधीन वन अनुसंधान संस्थान विश्वविद्यालय, देहरादून काष्ठ प्रौद्योगिकी में मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम चलाता है। काष्ठ प्रौद्योगिकी में स्नातकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रम में चयन के लिए कोई भी स्टूडेंट, विज्ञान/वानिकी/कृषि/बुनियादी विज्ञान आदि में स्नातक योग्यता पूरी करने के बाद आवेदन कर सकता है। स्नातकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रम में चयन अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। इसी तरह काष्ठ विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईडब्ल्यूएसटी), बैंगलुरु, भारतीय प्लाइवुड उद्योग अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (आईपीआईआरटीआई), बैंगलुरु, केंद्रीय लुगदी एवं कागज अनुसंधान संस्थान, (सीपीपीआरआई) सहारनपुर में पीएचडी तथा अनुसंधान पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी) जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा, नई दिल्ली से संबद्ध है, के द्वारा संचालित वानिकी कोर्स भी बहुत उपयोगी है। इसके अतिरिक्त काष्ठ प्रौद्योगिकी तथा समवर्गी विज्ञान में अध्येतावृत्तियां भी विभिन्न राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों/संगठनों द्वारा चलाई जाती हैं। 
 
कोर्स कंटेंट
बीएससी वानिकी में काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पढ़ाया जाने वाला एक अनिवार्य विषय है। इंजीनियरी, सामग्री विज्ञान तथा प्रसंस्करण, रसायन विज्ञान या विपणन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए काष्ठ विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी एक बहुत ही आकर्षक करियर है। यह एक ऐसा मल्टी डिसिप्लीनरी क्षेत्र है, जिसका प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से सीधा संबंध होने के साथ भौतिकी विज्ञान से भी गहरा जुड़ाव है। काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के स्नातक पाठ्यक्रम में एनाटॉमिकल, भौतिकी, रासायनिक तथा यांत्रिक संपत्तियों का ज्ञान शामिल होता है।
 
इसके अतिरिक्त छात्र व्यापक काष्ठ  प्रसंस्करण कार्यों, काष्ठ सीजनिंग, काष्ठ परिरक्षण, पुनर्निर्मित काष्ठ आधारित पैनलों, वन उत्पादों, गोंद, टिंबर इंजीनियरी तथा निर्माण, उत्पाद-डिजाइन तथा अवसंरचना, काष्ठ कार्य तथा परिष्करण और रासायनिक परिशोधन में भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। अपनी रुचि के  करियर के आधार पर छात्र किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में अतिरिक्त पाठ्यक्रमों का चयन करके काष्ठ का अपना ज्ञान और विस्तृत कर सकते हैं। कुछ विश्वविद्यालय काष्ठ इंजीनियरी में डिग्री को अपने इंजीनियरी पाठ्यक्रम के एक भाग के रूप में चलाते हैं। काष्ठ प्रौद्योगिकी से संबंधित सभी पहलू पाठ्यक्रमों में सम्मिलित किए जाते हैं। 
 
जॉब आॅप्शंस-इनकम
विनिर्माण, तकनीकी सेवा, अनुसंधान तथा विपणन ऐसे विभिन्न क्षेत्र हैं, जहां काष्ठ प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की जरूरत होती है। काष्ठ प्रौद्योगिकी में पीजी कैंडिडेट्स केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा वन विभागों में वैज्ञानिक, हस्तशिल्प संवर्धन अधिकारी, गुणवत्ता निरीक्षक तथा लॉगिंग अधिकारी के पदों पर भर्ती किए जाते हैं। ग्रामीण विकास से जुड़ी परियोजनाओं में काष्ठ प्रौद्योगिकी एक्सपर्ट लघु और कुटीर उद्योगों से संबंधित कार्यों के लिए परियोजना अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाते हैं। निजी क्षेत्र में ये व्यवसायी अपनी विशेषज्ञता के आधार पर काष्ठ आधारित उद्योगों, अनुसंधान एवं विकास कंपनियों में तकनीकी कार्मिक के रूप में नियुक्त होते हैं।
 
आजकल काष्ठ प्रौद्योगिक विशेषज्ञों को चारकोल उद्योग, काष्ठ निर्माण उद्योग, इंजीनियर्ड वुड या संयुक्त काष्ठ उद्योगों, सॉ मिलिंग तथा सॉ डाक्टरिंग, रेजिन तथा टर्पेंटाइन उद्योग एवं औधषीय पादप यूनिट, काष्ठ नमूना निर्धारण, लुगदी एवं कागज उद्योगों एवं अन्य काष्ठ उत्पाद आधारित उद्योगों में क्वालिटी कंट्रोलर तथा प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में भर्ती किया जाता है। इनके अतिरिक्त, नेट एग्जाम क्लीयर कर प्रोफेसर पद के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। काष्ठ विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मिलने वाले वेतन की तुलना देश में इंजीनियरों को दिए जाने वाले वेतन से की जा सकती है। 
 
प्रमुख संस्थान 
-इंदिरा गांधी कृषि विवि, रायपुर 
वेबसाइट: www.igau.edu.in
-भारतीय वन प्रबंधन संस्थान
वेबसाइट: : www.iifm.ac.in
-जेएलएन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, जबलपुर
वेबसाइट: www.jnkvv.org

Sunday, June 18, 2017

चिप डिजाइन में करियर

टेक्‍नोलॉजी ने जहां लोगों के जीवन को सरल और आधुनिक बना दिया है, वहीं टेक्‍नोलॉजी के कई क्षेत्रों में करियर के शानदार विकल्‍प भी उभ्‍ार कर सामने आए हैं। टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में जो प्रगति हुई है उसमें चिप डिजाइनिंग इंडस्‍ट्री ने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। अगर आप भी इंजीनियरिंग में रूचि रखते हैं और साथ ही चैलेंजिंग काम करना चाहते हैं तो चिप डिजाइनिंग में करियर बना सकते हैं। चिप सिलिकॉन का एक छोटा और पतला टुकड़ा होता है जो मशीनों के लिए इंटीग्रेटेड सर्किट बेस का काम करता है। चिप डिजाइनिंग की मदद से बड़े आकार के उपकरणों को भी छोटे आकार में बदला जा सकता है।
बढ़ रही है डिमांड
चिप डिजाइन के रूप में आप एक सुनहरा करियर बना सकते हैं। इसकी हर सेक्‍टर में मांग है। एक चिप डिजाइनर का मुख्‍य काम छोटी-बड़ी इलेक्‍ट्रॉनिक डिवाइसेस की कार्यक्षमता को बढ़ाना और उसे आसान बनाना है। मोबाइल, टीवी रिमोट से लेकर कंज्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, ऑटोमोबाइल सेक्‍टर तक में चिप का इस्‍तेमाल हो रहा है। आप इस इंडस्ट्री से डिजाइन इंजीनियर, प्रोडक्ट इंजीनियर, टेस्ट इंजीनियर, सिस्टम्स इंजीनियर, प्रॉसेस इंजीनियर, पैकेजिंग इंजीनियर, सीएडी इंजीनियर आदि के रूप में जुड सकते हैं।
योग्‍यता
चिप डिजानिंग में करियर बनाने के लिए आपके पास इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, टेली कम्‍यूनिकेशन या कम्‍प्‍यूटर साइंस में बीई या बीटेक डिग्री होना चाहिए। चिप डिजाइनिंग इंडस्‍ट्री में विशेष रूप से डिजाइन, प्रोडक्‍शन, टेस्टिंग, एप्‍लीकेशंस और प्रॉसेस इं‍जीनियरिंग शामिल होता है। वैसे इस क्षेत्र में कुछ संस्थानों द्वारा शॉर्ट टर्मकोर्सेस भी कराए जाते हैं, जिनका संबंध आईसी, सर्किट डिजाइन और माइक्रो प्रोसेसर से होता है।
जरूरी स्किल्‍स
इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्‍छुक युवाओं को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का नॉलेज होना जरूरी है। इसके अलावा अच्‍छी कम्‍यूनिकेशन स्किल्‍स, टीम वर्क, प्रॉब्‍लम सॉल्विंग एटिट्यूड बहुत जरूरी है। प्रोग्रामिंग और मैथमेटिकल स्किल्‍स बहुत जरूरी है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्‍छुक युवाओं को टेक्‍नोलॉजी डेवलपमेंट्स और लेटेस्‍ट इनोवेशन का ज्ञान होना जरूरी है।
प्रमुख संस्‍थान:
- बिटमैपर इंट्रीगेशन टेक्नोलजी, पुणे, महाराष्ट्र
- सेंट्रल फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांसड कंप्यूटिंग, बेंगलूर
- जामिया मिलीया इस्लामिया, नई दिल्ली